मस्त विचार 1211
पर गलती पर समझा कर साथ निभाने वाले बहुत कम मिलते हैं.
पर गलती पर समझा कर साथ निभाने वाले बहुत कम मिलते हैं.
छोटी सी जिंदगी है नफ़रत कब तक करोगे !!
जहाँ बसा है घोर अंधेरा, वहीं पर दीप जलाओ तुम.
भीड़ भरी दुनिया में, एक इनसान बन जाओ तुम.
कतरे गये हैं जिन पंछी के पर, उन्हें उड़ना सिखाओ तुम.
डूब रही है भंवर में नइया, उसे साहिल पर ले आओ तुम.
जहाँ बसा है घोर अंधेरा, वहीं पर दीप जलाओ तुम.
ज्ञान की पावन धारा को, गंगा की तरह बहाओ तुम.
एक इनसान बन जाओ तुम.
भटक गये जो अपने पथ से, उनको पथ पर लाओ तुम.
शूल कभी न बोओ यहाँ पर, ऐसी सीख सीखाओ तुम.
जहाँ बसा है घोर अंधेरा, वहीं पर दीप जलाओ तुम.
एक इनसान बन जाओ तुम.
मैंने परखा बहुत ज़माने को.,.!!
मिट्टी की तरह हम भी महकते चले जाएं…..!!
दिल की गांठों को तुम खुलने दो,
बुँदे बूंदें मोती बन जाएँगी,
पश्याताप के आँसुओं को बहने दो
दिल के सीप तो खुलने दो।
तारीफी के कसीदे न भी पढ़ सको तो,
मुस्करा के दो बोल ,बोल ही दो।
बर्तनों का गठरी है ये रिश्ते,
खनखनाएंगे,थोड़ा शोर भी करेंगे,
भूल को भूल समझकर भूल जाने से,
कोलाहल भी संगीत बन जायेगा,
तिनका तिनका जुड़ जाएगा
कुनबा तेरा बन्ध जायेगा,
बाहें अपनी पसार तो लो।
गलतफहमियों के बीज से पनपता है,
शक का पौधा,फासलों का फूल,
इन फासलों को पाट दो,
इनमे विश्वास की पौध डाल दो।
जीने के हैं दिन है चार,
कौन कब बिछड़ जाएगा,
कौन कब छोड़ चला जायेगा,
बाहों में बाहें डाल दो,
रिश्तों को तुम मिठास दो ।
।। पीके ।।