मस्त विचार 1042
न कर फिक्र कि जमाना क्या सोचेगा,
जमाने को अपनी ही फिक्र से फुर्सत कहाँ ..!
जमाने को अपनी ही फिक्र से फुर्सत कहाँ ..!
मगर “जरिया” बनकर किसी को बचायें तो कोई बात बनें…
एक सितारा भी संसार चमका देता है,
जहाँ दुनिया भर के रिश्ते काम नही आते,
वहाँ मेरा एक यार जिन्दगी बना देता है.
किसी के मुंह पर एक सच बोल कर तो देखिये
….एक नया ही रंग सामने आएगा…”!!
बस जिक्र करने का हक नहीं रहा.
परंतु उसकी परछाई सदैव काली होती है.