मस्त विचार 1165
जब वही रिश्ता पुराना हो जाता है….तो लोग दूर होने का बहाना ढूंढते है..
जब वही रिश्ता पुराना हो जाता है….तो लोग दूर होने का बहाना ढूंढते है..
ढ़ूंढ़ रहे दुनियाँ में कमियां, अपने मन में ताके कौन ?
सबके भीतर दर्द छुपा है, उसको अब ललकारे कौन ?
दुनियाँ सुधरे सब चिल्लाते, खुद को आज सुधारे कौन ?
पर उपदेश कुशल बहुतेरे,खुद पर आज विचारे कौन ?
हम सुधरें तो जग सुधरेगा, यह सीधी बात उतारे कौन ?
फूट फूट कर फिर रोने को मन करता है,
मन पागल है, कुछ भी खोने से डरता है,
जो खोया है फिर पाने को मन करता है.
तुम कभी अपने ख़यालात बदल कर देखो.
ऊँची – नीची डगर हमारी, पथरीली चट्टानें.
बिछे हुए हैं पग-पग पर काँटें, देख लगे मुस्काने.
सहता दुःख की चोट निरन्तर,पर आगे बढ़ते जाना.
हँसता रहता, कभी अधर पर अपने आह न लाता.
जिसे न कोई सुनने वाला, मैं हूँ वह अफसाना.
मत पूछो तुम परिचय मेरा, मैं राही दीवाना.
मगर जीवन को अपने तरीके से जीना
अपने हाथ में होता है…
मस्त रहो….., मुस्कुराते रहो…