मस्त विचार 1165

जब रिश्ता नया होता है, तो लोग बात करने का बहाना ढूंढते है. और

जब वही रिश्ता पुराना हो जाता है….तो लोग दूर होने का बहाना ढूंढते है..

 

मस्त विचार 1164

झाँक रहे है इधर उधर सब, अपने अंदर झांकें कौन ?

ढ़ूंढ़ रहे दुनियाँ में कमियां, अपने मन में ताके कौन ?

सबके भीतर दर्द छुपा है, उसको अब ललकारे कौन ?

दुनियाँ सुधरे सब चिल्लाते, खुद को आज सुधारे कौन ?

पर उपदेश कुशल बहुतेरे,खुद पर आज विचारे कौन ?

हम सुधरें तो जग सुधरेगा, यह सीधी बात उतारे कौन ?

मस्त विचार 1163

याद पुरानी फिर बोने को मन करता है,

फूट फूट कर फिर रोने को मन करता है,

मन पागल है, कुछ भी खोने से डरता है,

जो खोया है फिर पाने को मन करता है.

मस्त विचार 1161

मत पूछो तुम परिचय मेरा, मैं राही दीवाना.

ऊँची – नीची डगर हमारी, पथरीली चट्टानें.

बिछे हुए हैं पग-पग पर काँटें, देख लगे मुस्काने.

सहता दुःख की चोट निरन्तर,पर आगे बढ़ते जाना.

हँसता रहता, कभी अधर पर अपने आह न लाता.

जिसे न कोई सुनने वाला, मैं हूँ वह अफसाना.

मत पूछो तुम परिचय मेरा, मैं राही दीवाना.

मस्त विचार 1160

जन्म अपने हाथ में नही, मरण अपने हाथ में नही,

मगर जीवन को अपने तरीके से जीना

अपने हाथ में होता है…

मस्त रहो….., मुस्कुराते रहो…

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