मस्त विचार 1159
जो तुम्हारी हंसी के पीछे का दर्द,
गुस्से के पीछे का प्यार,
और मौन के पीछे की वजह समझ सके.
जो तुम्हारी हंसी के पीछे का दर्द,
गुस्से के पीछे का प्यार,
और मौन के पीछे की वजह समझ सके.
बुने थे जो तूने कभी.
मत देख आसमां को, बंद कमरे की खिड़की से.
चल, बाहर निकल और देख खुले आसमां को,
तोड़ दे सीमाओं की जंजीरों को,
चल निकल, कर ले कुछ स्वप्न तो पूरे.
न लड़ इच्छाओं से, बस लड़ ले बाधाओं से.
आगे बढ़, बढ़ता चल, बढ़ता चल.
_ जो अपनी जंजीरों की इज़्ज़त करते हैं.
मुर्झा गया हो जो, वो फूल भी खिल जाता है.
बात करते हो तकदीर से ज्यादा न मिलने की,
तेरी रजा हो तो, बिना तकदीर भी मिल जाता है.
और सब को अलग करने की ताकत वहम में है.
मन के अँधेरे को तू है मिटाता, ज्ञान के प्रकाश को है बिछाता.
प्रेम की पुलक को है बढ़ाता, भटकों को सन्मार्ग दिखाता.
रोते मन को रोज हंसाता, मृत जीवन में साँस चलाता.
दुखियों के दुःख दर्द मिटाता, सदाचार का पाठ पढाता.
क्या है उससे अपना नाता ?
रोज कुछ अच्छा याद रखते हैं और कुछ बुरा भूल जाते हैं .