मस्त विचार 1181
जिन्दगी का सफ़र, है ये कैसा सफ़र
कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं
है ये कैसी डगर, चलते हैं सब मगर
कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं.
कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं
है ये कैसी डगर, चलते हैं सब मगर
कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं.
जब भी मिलेंगे अंदाज पुराना होगा.
मन्जिल को दिशा ठीक से पहचानने तो दें.
अपने भीतर के इन्सान को जरा आइना तो दें.
आप हद में रह कर भी हदों से गुजर जायेंगे.
दुनिया को आपके फन की अदा जानने तो दें.
आप अपनी ज़िन्दगी को सही मायने तो दें.
अपने किरदार में हम लोग फ़रिश्ते हों जैसे.
लेकिन सीख हमेशा सही देकर जाते हैं.