मस्त विचार 978

कितना ही सुलझ जायें,,अपने से हम …

ये जिंदगी अपनी बातों में हमें,,कभी-कभी उलझा ही लेती है…

मस्त विचार 977

अपने घर में खुद ही आग लगा लेते हैं,

पागल हैं हम अपनी नींद उड़ा लेते हैं,

जीवन अमृत्त कब हमको अच्छा लगता है,

ज़हर हमें अच्छा लगता है खा लेते हैं.

मस्त विचार 975

हम रिश्तों को ओर अधिक बेहतरीन बना सकते हैं !

“अपनी सोच में छोटा सा बदलाव करके !

“कि सामने वाला गलत नही है !

“सिर्फ हमारी उम्मीद से थोड़ा अलग है.

मस्त विचार 974

न हों पतझड़ तो बहारें किस काम कीं.

संघर्ष बिना ज़िन्दगी ये बस नाम की.

मुकाम पर पहुँचा तू अपने वजूद को.

हार जाएगा,परवाह की जो अंजाम की. 

मस्त विचार 973

चेहरे की हँसी से गम को भुला दो, कम बोलो पर सब कुछ बता दो,

खुद ना रूठो पर सब को हँसा दो,

यही राज है ज़िन्दगी का, कि जियो और जीना सीखा दो.

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