मस्त विचार 1141
खुद कैसे हो कभी भूल कर भी नहीं सोचा.??
खुद कैसे हो कभी भूल कर भी नहीं सोचा.??
काश कोई मुझे भूलने की भी दवा बता देता.
“जल्दी” और “देर”
हम सपने बहुत जल्दी देखते हैं और कार्य बहुत देरी से करते हैं.
हम भरोसा बहुत जल्दी करते हैं और माफ करने मे बहुत देर करते हैं.
हम गुस्सा बहुत जल्दी करते हैं और माफी बहुत देर से माँगते हैं.
हम हार बहुत जल्दी मानते हैं और शुरआत करने मे बहुत देर करते हैं.
हम रोने मे बहुत जल्दी करते हैं और मुस्कुराने मे बहुत देर करते हैं.
बदलें “जल्दी” वरना बहुत “देर” हो जाएगी …
इस दुनिया में वक्त बिताया जा सकता है…!
मैं ढूंढता रहा उम्र भर, एक शहद सी जिंदगी.
कभी पत्थर सी जिंदगी, कभी काँटों सी जिंदगी.
मैं ढूंढता रहा उम्र भर,एक मुलायम सी जिंदगी.
कभी तपती सी जिंदगी, कभी गीली सी जिंदगी.
मैं ढूंढता रहा उम्र भर,एक सलोनी सी जिंदगी.
कभी भागती सी जिंदगी, कभी रूकती सी जिंदगी.
मैं ढूंढता रहा उम्र भर, एक सुकून सी जिंदगी.
कभी सफ़ेद सी जिंदगी, कभी काली सी जिंदगी.
मैं ढूंढता रहा उम्र भर, एक रंगीन सी जिंदगी.
कभी पराई सी जिंदगी, कभी बेगानी सी जिंदगी.
मैं ढूंढता रहा उम्र भर,एक अपनी सी जिंदगी.
कभी दिखावे सी जिंदगी, कभी झूठी सी जिंदगी.
मैं ढूंढता रहा उम्र भर, एक सच्ची सी जिंदगी.
लेकिन किस्मत और नसीब नही..!
“श्रेय मिले न मिले,
अपना श्रेष्ठ देना कभी बंद न करें.