मस्त विचार 1157
उम्मीद नहीं होती जिसकी, वो भी मिल जाता है.
मुर्झा गया हो जो, वो फूल भी खिल जाता है.
बात करते हो तकदीर से ज्यादा न मिलने की,
तेरी रजा हो तो, बिना तकदीर भी मिल जाता है.
मुर्झा गया हो जो, वो फूल भी खिल जाता है.
बात करते हो तकदीर से ज्यादा न मिलने की,
तेरी रजा हो तो, बिना तकदीर भी मिल जाता है.
और सब को अलग करने की ताकत वहम में है.
मन के अँधेरे को तू है मिटाता, ज्ञान के प्रकाश को है बिछाता.
प्रेम की पुलक को है बढ़ाता, भटकों को सन्मार्ग दिखाता.
रोते मन को रोज हंसाता, मृत जीवन में साँस चलाता.
दुखियों के दुःख दर्द मिटाता, सदाचार का पाठ पढाता.
क्या है उससे अपना नाता ?
रोज कुछ अच्छा याद रखते हैं और कुछ बुरा भूल जाते हैं .
वहाँ खुद को समझ लेना ही बेहतर है.
“चाहत” भी अपनों से मिलती है,
“अपनों से कभी रुठना नहीं, क्योंकि
“मुस्कुराहट” भी सिर्फ अपनों से मिलती है”