मस्त विचार 4444
अगर ‘ अंजान ‘ हो, तो गुज़र क्यूँ नहीं जाते ?
और पहचान रहे हो, तो ठहर क्यूँ नहीं जाते ??
और पहचान रहे हो, तो ठहर क्यूँ नहीं जाते ??
पर ऐसा नहीं है कि मैंने चलना छोड़ दिया है.
अब वक्त खुद से सुलह करने का है,,
जिसकी रगो में खून नहीं जुनून दौड़ता है..
वो जिंदगी में हर परिस्थिति का सामना कर सकता है..
ख़ुशी ही नहीं सुकून भी मिलेगा ..