मस्त विचार 4438
कपड़े पर सुई चलती है तो बेहतरीन पोशाक बनाती है,
हर चुभने वाली चीज का मकसद बुरा नहीं होता.
हर चुभने वाली चीज का मकसद बुरा नहीं होता.
ये भी एक अंदाज़ होता है नाराज़ होने का..
बुरा नहीं हूं मैं, बस अपनों की मेहरबानी है.
गुजरी हुई बहार की एक यादगार हूँ.
इस दौर में जीने की सज़ा कम तो नहीं है.
तब ही से दूर बैठा हूं सब से…