मस्त विचार 954
जिन बातों को ख़ुद नहीं समझे औरों को समझाया हैं…..
कभी कभी यूँ भी हम ने अपने जी को बहलाया है…..
जिन बातों को ख़ुद नहीं समझे औरों को समझाया हैं…..
कभी कभी यूँ भी हम ने अपने जी को बहलाया है…..
लोग भी…रिश्ते भी…और कभी कभी हम खुद भी.
वक्त के साथ साथ सब कुछ बदल जाता है…
खबर ही ना थी कि तुम मेरी रूह में समाये हुए हो.
किस कदर हम तुझको तलाशते रहे दर-ब-दर ..
आप की आवश्यकताओं में एक और चीज की वृद्धि हो जाती है.
किसी नई चीज का स्वाद पसंद आने पर
ऐसे में तेरे ख्याल की बारिशों में भीगता हूँ मैं…….
कभी जो वक्त की लू जिस्म को जलाती है….
कुछ कोशिश थी, अपने से खुद मिलने की कुछ कोशिश थी. जमाने की चाल से अलग अपना सा मुकाम पाने की.
कुछ कोशिश थी,अलहदा कर गुजरने की