मस्त विचार 954

कभी कभी यूँ भी हम ने अपने जी को बहलाया है…..

जिन बातों को ख़ुद नहीं समझे औरों को समझाया हैं…..

मस्त विचार 950

कभी जो वक्त की लू जिस्म को जलाती है….

ऐसे में तेरे ख्याल की बारिशों में भीगता हूँ मैं…….

मस्त विचार 949

कुछ कोशिश थी,अलहदा कर गुजरने की

कुछ कोशिश थी, अपने से खुद मिलने की

कुछ कोशिश थी. जमाने की चाल से अलग

अपना सा मुकाम पाने की.

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