मस्त विचार 936
बस इतना कह सकता हूँ बहुत याद आते हो “तुम”…
बस इतना कह सकता हूँ बहुत याद आते हो “तुम”…
जिन पलों में तू था, वे पल ढूंढ़ते हैं हम. कारवां खुशी का, जाने कब गुजर गया. रेत पर अब उस के, निशान ढूंढ़ते हैं हम. दुनिया की भीड़ में, कहाँ खो गया है वो. हर गली में, उनका मकान ढूंढ़ते हैं हम. कर भी नहीं गया, वादा वो आने का. फिर भी हर आहट में, उसे ढूंढ़ते हैं हम.
मेरी मंज़िल तो आसमान है.. रास्ता मुझे खुद बनाना है.
मैं खुद को ऎसी बातों से, जरा अंजान रखता हूँ.
जलते हुए में घी डाल सकते हो, तो डालो. और यह भी नहीं कर सकते तो, मत करो. लेकिन जलते हुए दीये को बुझाओ मत.
आज बे वजह क्यूँ भूल गये कल तक बेवजह चाहने वाले.