मस्त विचार 981

कभी मैं बोलता हूँ तो कभी चुप हो के सुनता हूँ,

आनंद दोनों में है…………..

तेरी रहमत के नग़मे सुन लूँ या सुना दूँ.

मस्त विचार 979

ज़िंदगी बड़ी अजीब होती है..
_ कभी हार कभी जीत होती है,
_ तमन्ना रखो समंदर की गहराई छूने की,
_ किनारों पे तो बस ज़िंदगी की शुरुवात होती है.!!

मस्त विचार 978

कितना ही सुलझ जायें,,अपने से हम …

ये जिंदगी अपनी बातों में हमें,,कभी-कभी उलझा ही लेती है…

मस्त विचार 977

अपने घर में खुद ही आग लगा लेते हैं,

पागल हैं हम अपनी नींद उड़ा लेते हैं,

जीवन अमृत्त कब हमको अच्छा लगता है,

ज़हर हमें अच्छा लगता है खा लेते हैं.

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