मस्त विचार 981
आनंद दोनों में है………….. तेरी रहमत के नग़मे सुन लूँ या सुना दूँ.
कभी मैं बोलता हूँ तो कभी चुप हो के सुनता हूँ,
आनंद दोनों में है………….. तेरी रहमत के नग़मे सुन लूँ या सुना दूँ.
कभी मैं बोलता हूँ तो कभी चुप हो के सुनता हूँ,
रोज़ नया कल देकर, उम्र छीनती रहती है…..
ये जिंदगी अपनी बातों में हमें,,कभी-कभी उलझा ही लेती है…
कितना ही सुलझ जायें,,अपने से हम …
पागल हैं हम अपनी नींद उड़ा लेते हैं, जीवन अमृत्त कब हमको अच्छा लगता है, ज़हर हमें अच्छा लगता है खा लेते हैं.
अपने घर में खुद ही आग लगा लेते हैं,
हादसे कुछ भी नही है हौसलों के आगे…!
हाथ बाँधे क्युँ खडे हो किस्मत के आगे…!!