मस्त विचार – मुझ से तुम क्या करवा लेते हो – 1085

मुझ से तुम क्या करवा लेते हो.

खो जाता हूँ खुद से खुद में.

मुझे होश कहाँ रहता है.

नजरें झुकीं आमंत्रण देती तुम को.

मुझ से तुम क्या करवा लेते हो.

कैसे कैसे रंगों से नहला देते हो.

अपने ही रंग में रंग लेते हो.

मुझ से तुम क्या करवा लेते हो.

मस्त विचार 1082

अब ना करूँगा अपने दर्द को बयां किसी के सामने.

दर्द जब मुझको ही सहना है तो तमाशा क्यों करना.

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