मस्त विचार 1068
ना, राज़ है…………ज़िन्दगी…,
ना, नाराज़ है…………….ज़िन्दगी..,
बस जो है….वो आज है………..ज़िन्दगी.!!!
ना, नाराज़ है…………….ज़िन्दगी..,
बस जो है….वो आज है………..ज़िन्दगी.!!!
दूसरों पर आश्रय उस की स्वयं की सत्ता को सोख लेता है.
अतः उत्तम प्रभाव डालने के लिए यह एक सहज उपाय है.
ना तो किसी को ग़म चाहिए और ना ही किसी को कम चाहिए…”
ढूंढने चले थे जिंदगी, जिंदगी से दूर हो गए.
फूल तो काँटों में भी खिला करते हैं,
थक कर ना बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर,
हीरे अक्सर कोयले में ही मिला करते हैं.