| Dec 5, 2015 | मस्त विचार
ये चन्द पंक्तियाँ जिसने भी लिखी है, खूब लिखी है
ग़लतियों से जुदा तू भी नही,
मैं भी नही,
दोनो इंसान हैं, खुदा तू भी नही,
मैं भी नही ..
” तू मुझे ओर मैं तुझे इल्ज़ाम देते हैं मगर,
अपने अंदर झाँकता तू भी नही,
मैं भी नही ” ..
” ग़लत फ़हमियों ने कर दी दोनो मैं पैदा दूरियाँ,
वरना फितरत का बुरा तू भी नही, मैं भी नही.
| Dec 3, 2015 | मस्त विचार
रिश्ते और रास्ते एक ही सिक्के के दो पहलू हैं…
कभी रिश्ते निभाते निभाते रास्ते खो जाते हैं,,,
और कभी रास्तों पर चलते चलते
रिश्ते बन जाते हैं…!
| Dec 2, 2015 | मस्त विचार
किन लफ़्ज़ों में बंया करूँ मैं अपने दर्द को..!
सुनने वाले तो बहुत हैं मगर समझने वाला कोई नहीं..!!
| Dec 1, 2015 | मस्त विचार
कभी पीठ पीछे आपकी बात चले तो घबराना मत
बात तो ” उन्ही की होती है ” जिन मे कोई ” बात ” होती है !!
| Nov 30, 2015 | मस्त विचार
लोग इन्तजार करते रह गये कि हमें टूटा हुआ देखें,
और हम थे कि सहते सहते पत्थर के हो गये..!!
| Nov 29, 2015 | मस्त विचार
ऐसे लोग बहुत ही कठिनाई से मिलते हैं,
जो कार्य विधि का चतुराई से विकास करते हैं.