मस्त विचार 998
ख्यालों और साँसों का हिसाब है ज़िन्दगी …. कुछ जरूरतें पूरी ,कुछ ख्वाहिशें अधूरी, इन्हीं सवालों का जवाब है ज़िन्दगी …..
ख्यालों और साँसों का हिसाब है ज़िन्दगी …. कुछ जरूरतें पूरी ,कुछ ख्वाहिशें अधूरी, इन्हीं सवालों का जवाब है ज़िन्दगी …..
पर ‘चमकता’ वही है जो.., ‘तराशने’ की हद से ‘गुज़रता है’..
देख के रूप तेरा कुछ यूँ लगा . सोया था बरसों से अभी हूँ जगा . कर दिया अब तो हवाले तुझको . अब तो नैया पार तू लगा . कभी – कभी अज्ञान में भटक जाता हूँ . अपने ज्ञान रूप से रास्ता दिखा . आया हूँ तेरे दर, करता हूँ सजदा . कौन हूँ मै जानता नहीं . मुझे खुद ही से तू मिला.
लगती है चोट कैसे, किनारों से पूछिये …
कभी हंसाती है तो कभी रुलाती है. ..पर जो हर हाल में खुश रहते हैं, जिंदगी उनके आगे सर झुकाती है.
तुम जो पकड़ लो हाथ मेरा, दुनिया बदल सकता हूँ मैं …..