मस्त विचार 1014
तेरे साथ रहे तो जीना सीख गए,
थोड़ा सुर लगाया तो तराना सीख गए,
अपनी तो जिंदगी मस्त न थी,
मस्त तब हुई जब तुमसे जीना सीख गए.
थोड़ा सुर लगाया तो तराना सीख गए,
अपनी तो जिंदगी मस्त न थी,
मस्त तब हुई जब तुमसे जीना सीख गए.
आओ, हम ऎसा करें, खुद को बदल कर देख लें….
मैं ज़ख्म खाता हूँ तो और निखर जाता हूँ………
उतनी जल्दी सही ज़िन्दगी जीना भी सीख जाते हैं.
सागर का पानी खारा रहता है, क्योंकि वो लेता रहता है.
नाले का पानी दुर्गन्ध पैदा करता है, क्योंकि वो रुका रहता है.
अपना जीवन भी वैसा ही है,
देते रहेंगे तो मीठे लगेंगे, लेते रहेंगे तो खारे लगेंगे.
नहीं मिलते जहाँ चोट के निशान…..