मस्त विचार 850
क्यों ठहर जाता है हर आता हुआ, जाता हुआ.
क्यों ठहर जाता है हर आता हुआ, जाता हुआ.
_ शायद इसलिए उनकी खुद की ज़िंदगी उलझी रहती है.!!
_ बस वो लहजे बदलते गये और हम अजनबी होते गये. “– ज़रा अपने लहजे संभाल, बातें नस्लों का पता देती हैं..–“
नसीहत से फायदा उठाने के लिए उस से कहीं ज्यादा अक्ल चाहिए.
जो मैं नहीं हूँ वैसा दिखने का, सलीका मुझे नहीं आता.
दिल में कुछ और जुबां पे कुछ
ये बाजीगरी का कमाल मुझे नहीं आता.
और जब करने वाले लग जाते है तो वो हकीकत हो जाती है.