मस्त विचार 1048
मै जब दर्पण में अपना चेहरा देखता हूँ, तो एक अजनबी चेहरे की झलक दिखाई देती है,
_ तब मुझे लगता है कि मै स्वयम को कितना कम जानता हूँ.
_ तब मुझे लगता है कि मै स्वयम को कितना कम जानता हूँ.
ज़िंदगी को ढूंढने में ज़िंदगी बर्बाद की.
जब से ये फर्क जाना, जिंदगी आसान बहुत हो गई.
इसे आसान बनाना पड़ता है.
कुछ नज़रअंदाज कर के…कुछ बर्दाश्त करके…
कुछ मेहनत करके…और कुछ सही समय पे सही फैसले ले के.
फिर पता चलेगा,
लोग उतने भी बुरे नहीं हैं जितना हम समझते हैं…