हल्की-फुल्की सी है जिँदगी,
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बोझ तो बस ख़्वाहिशोँ का है.
मस्त विचार 961
आजकल अपने काम से काम रखने लगा हुँ मैं !!!
बहुत ही मुश्किल काम करने लगा हुँ मै!!!!
मस्त विचार 960
अँधियारा है घना, और लहू से सना, किरणों के तिनके अम्बर से चुन के अंगना मे फिर आजा री, हमने तुम पे हज़ारो सितम है किए, हमने तुम पे दुनिया भर के जुल्म है किए, हमने सोचा नहीं, तू जो उड़ जाएगी, ये जमी तेरे बिन सूनी रह जाएगी ,, किस के दम पे सजेगा हमारा अंगना ….. ओ री चिरिया !!!!
ओ री चिरिया! नन्ही सी चिरिया अंगना मे फिर आजा री,
मस्त विचार – 959
अपनी अच्छाई पर क्या गुरुर करना _
_ किसी की कहानी मेँ शायद मैं भी गलत हूँ.
मस्त विचार 958
हर आग से वाकिफ़ हूँ, जलना मुझे आता है.
कोई साथ दे या न दे, चलना मुझे आता है.
मस्त विचार 957
जीवन की रीत पुरानी है चट्टानों से टकराने की हमने जीवन में ठानी है.
उठ कर गिरना …गिर कर उठना





