मस्त विचार 844
फ़िर नयी जैसी लगेगी… …. ज़िन्दगी ही तो है…!
ज़रा सा रफू करके देखिये ना,
फ़िर नयी जैसी लगेगी… …. ज़िन्दगी ही तो है…!
ज़रा सा रफू करके देखिये ना,
कि कहीं वह स्वयं तो रास्ता भटका हुआ नहीं है.
तो खुद को कभी किसी से कम मत समझो..
एक तेरा साथ ही काफी है, ‘जशन-ऐ-ज़िन्दगी के लिए…
मुझे महफिलों की चाहत ही न रही कभी…
जमाने का तो दस्तूर बन गया है, हर इल्जाम हम पर लगाने का.