मस्त विचार 938
वरना हम तो बिछड़ गए हैं तुमसे
तूफ़ान में परिंदों की तरह.
वरना हम तो बिछड़ गए हैं तुमसे
तूफ़ान में परिंदों की तरह.
उम्मीद अपने आप से रखो… किसी और से नहीं.
बस इतना कह सकता हूँ बहुत याद आते हो “तुम”…
जिन पलों में तू था, वे पल ढूंढ़ते हैं हम. कारवां खुशी का, जाने कब गुजर गया. रेत पर अब उस के, निशान ढूंढ़ते हैं हम. दुनिया की भीड़ में, कहाँ खो गया है वो. हर गली में, उनका मकान ढूंढ़ते हैं हम. कर भी नहीं गया, वादा वो आने का. फिर भी हर आहट में, उसे ढूंढ़ते हैं हम.
मेरी मंज़िल तो आसमान है.. रास्ता मुझे खुद बनाना है.
मैं खुद को ऎसी बातों से, जरा अंजान रखता हूँ.