मस्त विचार 1012
दुनिया से मुख़्तलिफ़ है मेरा अंदाज़-ए-ज़िन्दगी…..
मैं ज़ख्म खाता हूँ तो और निखर जाता हूँ………
मैं ज़ख्म खाता हूँ तो और निखर जाता हूँ………
उतनी जल्दी सही ज़िन्दगी जीना भी सीख जाते हैं.
सागर का पानी खारा रहता है, क्योंकि वो लेता रहता है.
नाले का पानी दुर्गन्ध पैदा करता है, क्योंकि वो रुका रहता है.
अपना जीवन भी वैसा ही है,
देते रहेंगे तो मीठे लगेंगे, लेते रहेंगे तो खारे लगेंगे.
नहीं मिलते जहाँ चोट के निशान…..
ठोकरें ज़हर तो नहीं जो खा के मर जाएँ….
_दूर हो जाना किसी जीत से कम नहीं होता..
रिश्ता क्या है समझा नहीं सकता.
तुम मेरे लिए इतने ख़ास हो कि,
तुम जो नहीं साथ तो मैं मुस्करा नहीं सकता.