मस्त विचार 849
_ शायद इसलिए उनकी खुद की ज़िंदगी उलझी रहती है.!!
_ शायद इसलिए उनकी खुद की ज़िंदगी उलझी रहती है.!!
_ बस वो लहजे बदलते गये और हम अजनबी होते गये. “– ज़रा अपने लहजे संभाल, बातें नस्लों का पता देती हैं..–“
नसीहत से फायदा उठाने के लिए उस से कहीं ज्यादा अक्ल चाहिए.
जो मैं नहीं हूँ वैसा दिखने का, सलीका मुझे नहीं आता.
दिल में कुछ और जुबां पे कुछ
ये बाजीगरी का कमाल मुझे नहीं आता.
और जब करने वाले लग जाते है तो वो हकीकत हो जाती है.
फ़िर नयी जैसी लगेगी… …. ज़िन्दगी ही तो है…!