मस्त विचार 831
ये दुनिया महज़ गम ही गम नही है……
बहुत कुछ और भी है इस जंहा में…..
ये दुनिया महज़ गम ही गम नही है……
बहुत कुछ और भी है इस जंहा में…..
कब तक यूँ परायों में अपने होने के निशां ढूंढता फिरूँ……..
खुद से भी रूबरू कभी करा दे मेरे मालिक मुझ को…….
वरना पत्तों की तरह तुझको हवा ले जायेगी…..
जीने की आरज़ू है तो जी चट्टानों की तरह…..
कुछ ख़ार कम कर गए गुज़रे जिधर से हम……
माना कि इस ज़मी को न गुलज़ार कर सके….
दिल दुखा कर जो मिले वो फायदा अच्छा नही…….
मुख़्तसर सी बात है ये जान पाओ, जान लो…..
जिसके सामने आईना रखा,हर शख्स वो मुझ से रूठ गया.