मस्त विचार 825
फिर दूसरों को बदलना कैसे सरल हो सकता है.
फिर दूसरों को बदलना कैसे सरल हो सकता है.
तू मेरा शौक़ देख मेरा इन्तज़ार देख……..
जब भी उदास हुआ जीवन में, तू ही साथ रहा मेरे जीवन में, जब खराब होता था मन बेहद, चुपचाप बैठे रहना चाहता था अँधेरे में, तू ने ही निकाला है अँधेरे से जीवन में. मैंने महसूस किया है जीवन में.
बड़ी मुश्किल से वो राज़ी हुआ है साथ चलने को………
तो देखा….हर पन्ना तेरी ही रहमतों से भरा था…
मासूम सा चेहरा है उदास अच्छा नही लगता……..