मस्त विचार 905
सपनों को बुनने जितनी डोरी खरीद ली. शौक- ए- ज़िन्दगी कुछ कम किए, फिर सस्ते में ही सुकून-ए-ज़िन्दगी खरीद ली.
सब ने सोना ख़रीदा, मैंने सुई खरीद ली.
सपनों को बुनने जितनी डोरी खरीद ली. शौक- ए- ज़िन्दगी कुछ कम किए, फिर सस्ते में ही सुकून-ए-ज़िन्दगी खरीद ली.
सब ने सोना ख़रीदा, मैंने सुई खरीद ली.
क्योंकि जो बगैर दस्तक के आते हैं वो अपने ही होते हैं….
तेरी याद जब आती हैं तो उसे रोकते नहीं हम….
हम तो समुद्र में डुबकियाँ लगा कर ही जीने का मजा लेते हैं.
तू दिन रात कोशिशें करता है किनारा ढूँढने की,
अब शाम हो रही है मेरा साथ छोड़ दो.
जहाँ से तुम चले जाओ, वहाँ तुम्हे सब याद करें.
जहाँ तुम पहुँचने वाले हो, वहाँ सब तुम्हारा इंतजार करें.
तू जंहा मुझसे कहेगी मैं उतर जाऊंगा……….
ज़िंदगी, मैं भी मुसाफिर हूँ तेरी कश्ती का……