मस्त विचार 834
आँखों को अश्को से तर करते है कभी- कभी…..
यादों के फूल सूख न जाएं, इसलिए….
आँखों को अश्को से तर करते है कभी- कभी…..
यादों के फूल सूख न जाएं, इसलिए….
मगर यकीन हम ने तो अपने यकीन पे किया
बाहर से टूटता रहा सब
पर भीतर से एक शीशा भी हम ने तड़कने न दिया.
तुझसे मिली ठोकर ने, मुझे संभलना सीखा दिया.
बहुत अहसान है तेरी नफरतों का मुझ पर….
ये दुनिया महज़ गम ही गम नही है……
बहुत कुछ और भी है इस जंहा में…..
कब तक यूँ परायों में अपने होने के निशां ढूंढता फिरूँ……..
खुद से भी रूबरू कभी करा दे मेरे मालिक मुझ को…….
वरना पत्तों की तरह तुझको हवा ले जायेगी…..
जीने की आरज़ू है तो जी चट्टानों की तरह…..