मस्त विचार 754
“मैं” कभी रिश्तों में नहीं आता…
रिश्ते हमेशा “हम” में ही होते हैं,
“मैं” कभी रिश्तों में नहीं आता…
रिश्ते हमेशा “हम” में ही होते हैं,
तेरी यारी के सिवा कोई बदंगी न मिले,, हर जनम मे मिले यार तेरे जैसा या फिर कभी जिंदगी न मिले. ”
” करनी हैं खुदा से गुज़ारिश
लोग पत्थर तो उठाते है मगर उँगली नही.
कि वो…खुद टुट जाते है, मगर किसी का दिल टुटने नही देते …..!!!!
कुछ इसलिए भी पंसद आते है, सच बोलने वाले लोग,
अब हँसने को तमीज़ चाहिए और अशको को तनहाई.
बचपन मे जब चाहा हँस लेते थे जहाँ चाहा रो सकते थे,
मुसीबत हम पे रोती है, हम रोते हैं मुसीबत पर.
निकल कर मुसीबत से, फंसे जा कर मुसीबत में.