मस्त विचार 760
ग़लतफ़हमी में पैदा होने वाले सवालों का जवाब खुद ही बना लेता है.
ग़लतफ़हमी में पैदा होने वाले सवालों का जवाब खुद ही बना लेता है.
सारे आँसू दूर हो गए, ये तेरी ही बदौलत है ऐ मेरे यार, हम काँच से कोई कोहिनूर हो गए.
_ बल्कि समय पर न उठना शर्म की बात है..
वरना आँचल और कफ़न एक ही धागे से बनते है.
सपनों के परदे आँखों से हटाती है. किसी भी बात से हिम्मत न हारना. क्यों कि ठोकर ही इन्सान को चलना सिखाती है.
क्यों कि भीड़ साहस तो देती है लेकिन पहचान छीन लेती है.”