मस्त विचार 840
हँस कर कबूल क्या कर ली कुछ सजाए हमने.
जमाने का तो दस्तूर बन गया है, हर इल्जाम हम पर लगाने का.
जमाने का तो दस्तूर बन गया है, हर इल्जाम हम पर लगाने का.
_ तो पुरानी गलतियों को दोहराने की गलती कभी मत करना !!
मेरा दिल तोड़कर मुझे ही हसाना चाहता है…. जाने क्या बात झलकती है मेरे इस चेहरे से…… हर शख्स मुझे आज़माना चाहता है……
जाने क्या मुझसे ज़माना चाहता है…
धूल के मानिंद में, हवा सा बिखर जाऊंगा. दुनिया तेरी छोड़ कर, पल में खाक हो जाऊंगा. मिट्टी से बना हुआ हूँ, मिट्टी में मिल जाऊंगा.
खाली हाथ आया था, खाली हाथ जाऊंगा.
हर रात के बाद सवेरा होता है, लोग डर जाते हैं मुसीबतों को देखकर, पर मुसीबतों के बाद ही तो कामयाबी का सवेरा होता है ..
हर जलते दीपक तले अँधेरा होता है,