मस्त विचार 760

रिश्तों की डोरी तब कमजोर होती है, जब इंसान

ग़लतफ़हमी में पैदा होने वाले सवालों का

जवाब खुद ही बना लेता है.

मस्त विचार 759

 तेरी हँसी मे हँसे तो

सारे आँसू दूर हो गए,

ये तेरी ही बदौलत है ऐ मेरे यार,

हम काँच से कोई कोहिनूर हो गए.

मस्त विचार 757

सिर्फ एक एहसास करने का अंदाज़ बदल जाया करते है,

वरना आँचल और कफ़न एक ही धागे से बनते है.

मस्त विचार 756

मंजिल इन्सान के हौसले आजमाती है.

सपनों के परदे आँखों से हटाती है.

किसी भी बात से हिम्मत न हारना.

क्यों कि ठोकर ही इन्सान को

चलना सिखाती है.

मस्त विचार 755

“कुछ अलग करना है तो जरा भीड़ से हटकर चलें,,

क्यों कि भीड़ साहस तो देती है लेकिन पहचान छीन लेती है.”

error: Content is protected