मस्त विचार 608
जैसे- जैसे जीवन बढ़ता है, अपने अन्दर निखार लाना चाहिए.
जैसे- जैसे जीवन बढ़ता है, अपने अन्दर निखार लाना चाहिए.
कभी उन के भी करीब जाइए, जो आप के बिना खुश नहीं रह सकते.
और जो बिखर कर निखर जाए वो व्यक्तित्व है.
जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है… शिकवे कितने भी हो हर पल, फिर भी हँसते रहना… क्योंकि ये ज़िन्दगी जैसी भी है, बस एक ही बार मिलती है.
ज़िन्दगी पल-पल ढलती है,
यहाँ से # जिन्दा बचकर # कोई नही जायेगा.