मस्त विचार 587
बस इंसानियत कहीं-कहीं जन्म लेती है….!!
इन्सान तो हर घर में पैदा होते हैं….!!
बस इंसानियत कहीं-कहीं जन्म लेती है….!!
इन्सान तो हर घर में पैदा होते हैं….!!
यहाँ जरूरत के हिसाब से सब बदलतें नकाब है …..।
अपने गुनाहों पर सौ पर्दे डालकर हर शख्स कहता हैं…….।
ज़माना बङा ख़राब हैं……।।
इस से रुठने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए.
जीवन में दुःख के बाद सुख का महत्व दोगुना हो जाता है.
संगमरमर पर अक्सर मैंने लोगो को फिसलते देखा है!!
है न तू बेवफा यह जग को बताने आ जा,
तेरे हमदर्द किस्सों मे क्या कहानी थी,
सारा दुख दूर हो वे किस्से बताने आ जा.