मस्त विचार 586

तू छोड दे कोशिशें इंसानो को पहचानने की…..।

यहाँ जरूरत के हिसाब से सब बदलतें नकाब है …..।

अपने गुनाहों पर सौ पर्दे डालकर हर शख्स कहता हैं…….।

ज़माना बङा ख़राब हैं……।।

मस्त विचार 585

जीवन से नाराजगी कैसी ?

इस से रुठने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए.

जीवन में दुःख के बाद सुख का महत्व दोगुना हो जाता है.

मस्त विचार 584

मिट्टी में ही होती है पकड़ मजबूत पैरों की।..

संगमरमर पर अक्सर मैंने लोगो को फिसलते देखा है!!

मस्त विचार 583

वफा के घाट पर एहसास दिलाने आ जा,

है न तू बेवफा यह जग को बताने आ जा,

तेरे हमदर्द किस्सों मे क्या कहानी थी,

सारा दुख दूर हो वे किस्से बताने आ जा.

मस्त विचार 582

चमकदमक और तेज रफ्तार किसी को मंजिल तक पहुंचा दे ऐसा जरुरी नहीं. क्योंकि कई बार ऊपरी चमकदमक में आँखें इस तरह चौंधिया जाती हैं कि असलियत सामने ही नहीं आ पाती.
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