मस्त विचार 569

जिसको जितनी जरूरत थी, उतना मेरे साथ चला.

मैं ले के चला था काफिला, शाम होते होते अकेला मिला.

मस्त विचार 567

दोस्ती कभी कोई खोज नही होती,

ये हर किसी से हर रोज नही होती,

ज़िन्दगी में हमारी मौंजूदगी को

बेवजह मत समझना,

पलकें कभी आखों पे बोझ नही होती.

मस्त विचार 565

प्यार की कमी को पहचानता हूँ मैं,

दुनिया के गमों को भी जानता हूँ मैं,

तेरे जैसे यार का सहारा है,

तभी तो हंस कर जीना जानता हूँ मैं..

मस्त विचार 564

दूसरे क्या कर रहे हैं, क्या नहीं कर रहे हैं, कैसे कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं. यह देखना आपका नहीं उनका काम है.
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