मस्त विचार 569
जिसको जितनी जरूरत थी, उतना मेरे साथ चला.
मैं ले के चला था काफिला, शाम होते होते अकेला मिला.
मैं ले के चला था काफिला, शाम होते होते अकेला मिला.
फैसला जो मुश्किल हो वही बेहतर होता है.
ये हर किसी से हर रोज नही होती,
ज़िन्दगी में हमारी मौंजूदगी को
बेवजह मत समझना,
पलकें कभी आखों पे बोझ नही होती.
ज़िंदगी हम को _ बस ऐसे ही आज़माती रही..!!
दुनिया के गमों को भी जानता हूँ मैं,
तेरे जैसे यार का सहारा है,
तभी तो हंस कर जीना जानता हूँ मैं..