मस्त विचार 589

आइना और परछाई के जैसे मित्र रखो,

क्योंकि आइना कभी झूठ नही बोलता और परछाई कभी साथ नही छोङती.

मस्त विचार 586

तू छोड दे कोशिशें इंसानो को पहचानने की…..।

यहाँ जरूरत के हिसाब से सब बदलतें नकाब है …..।

अपने गुनाहों पर सौ पर्दे डालकर हर शख्स कहता हैं…….।

ज़माना बङा ख़राब हैं……।।

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