मस्त विचार 453
शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है…
जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है….!!
जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है….!!
स्वयं की खोज करें, _ अन्यथा आपको अन्य लोगों की राय पर निर्भर रहना होगा जो खुद को भी नहीं जानते हैं.
और हम उसकी ग़लती के बारे में सब को जाकर बता दें.
हमेशा इस बात का इन्तजार बन्द करें कि कोई ग़लती करे
दूसरों को मजा चखाने के बजाय अपने काम पर ध्यान दें.
सच्ची समृद्धि है.
किसी चीज़ की आवश्यकता न रह जाने की स्थिति ही
जिसको अपना अँधेरा ही नहीं दिख रहा, वो रोशनी की चाह क्यूँ करेगा.