मस्त विचार 438
ना मुस्कुराने को जी चाहता हैं,
ना आंसू बहाने को जी चाहता हैं,
लिखूँ तो क्या लिखूँ तेरी याद में
बस तेरे पास लौट आने को जी चाहता हैं.
ना आंसू बहाने को जी चाहता हैं,
लिखूँ तो क्या लिखूँ तेरी याद में
बस तेरे पास लौट आने को जी चाहता हैं.
देना उसे जो अलग हो सब से,
रब ने मिला दिया मुझे तुम से,
और कहा ” लो संभालो यह अनमोल है सब से “.
और खराब इंसान का कोई मजहब नहीं होता.
वही आपका भविष्य बना रहा है.
आज आप जो सोच रहे हैं, जैसा महसूस कर रहे हैं,
हर किसी की ज़िंदगी में “काश” रह ही जाता हैं…!!