मस्त विचार 438

 ना मुस्कुराने को जी चाहता हैं,

ना आंसू बहाने को जी चाहता हैं,

लिखूँ तो क्या लिखूँ तेरी याद में

बस तेरे पास लौट आने को जी चाहता हैं.

मस्त विचार 436

मांगी थी दुआ रब से.

देना उसे जो अलग हो सब से,

रब ने मिला दिया मुझे तुम से,

और कहा ” लो संभालो यह अनमोल है सब से “.

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