मस्त विचार 441

ऐ हवा, उस से कहना हम खुश हैं.

बस, उस की यादें सताती हैं.

उस की दूरी का कोई गम नहीं हम को.

बस, जरा सी पलकें भींग जाती हैं.

ऐ हवा, उस से कहना हम खुश हैं.

मस्त विचार 439

तेरा इश्क है मेरी बन्दगी, मुझे और कुछ अब खबर नही.

तुझे देख कर कुछ और देखु,अब मेरे पास वो नजर नही.

मस्त विचार 438

 ना मुस्कुराने को जी चाहता हैं,

ना आंसू बहाने को जी चाहता हैं,

लिखूँ तो क्या लिखूँ तेरी याद में

बस तेरे पास लौट आने को जी चाहता हैं.

मस्त विचार 436

मांगी थी दुआ रब से.

देना उसे जो अलग हो सब से,

रब ने मिला दिया मुझे तुम से,

और कहा ” लो संभालो यह अनमोल है सब से “.

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