मस्त विचार 401

जीवन एक ऎसी अनूठी पुस्तक है, जो अंत तक मनुष्य का साथ देती है. परन्तु इस के कठिन पृष्ठों को समझने के लिए बुद्धि की आवश्यकता है.

मस्त विचार 400

” दोस्तों को समर्पित “

ये मस्त उम्र फिर नहीं आएगी,

जब शनै- शनै उम्र बढ़ जाएगी,

इत्र की जगह आयोडेक्स की खुशबू आएगी,

कहता हूँ अब भी मिल लिया करो,

ये घड़ियां पलटकर नहीं आएंगी,

अभी तो आंखों में नूर है बाकी,

फिर खूबसूरती नज़र नहीं आएगी,

अभी तो यार हैं चलते अपने साथ,

फिर केवल छड़ी ही नजर आएगी,

सुन लो आवाज दोस्तों की,

फिर कानों में मशीन नज़र आएगी,

हंस लो खिलखिला कर आज,

फिर नकली बत्तीसी ही झलक दिखाएगी,

जब दोस्त बुलाएं, चले जाओ,

फिर डाक्टरों से फुर्सत न मिल पाएगी,

समझ जाओ यारों, समझ जाओ,

ये मस्त उम्र फिर नहीं आएगी..

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मस्त विचार 399

अगर आपने किसी को यह अहसास दिला दिया कि वह अकेला नहीं है, तो वह आदमी कठिन से कठिन काम भी कर सकता है. कई बार ऎसा होता है कि हम काम करने के काबिल होते हैं, लेकिन हमें खुद पर भरोसा नहीं होता. हमें केवल किसी के साथ की जरुरत होती है.

मस्त विचार 398

रिश्ता वही अच्छा लगता है, जिससे प्यार रिसता रहे.

_ लेकिन जहाँ संवेदनाएं पिसती हों, दम घुटता हो,
_ चाहतें दम तोड़ती हों,
_ एक- दूसरे को देख कर परेशानी होती हो,
_ वह रिश्ता रिश्ता नहीं, बोझ बन जाता है.
_ वहाँ इन्सानियत की अहमियत ही समाप्त हो जाती है.
“विपन्नता हमेशा धन की कमी से नहीं होती,
कभी-कभी संवेदना की कमी से भी होती है.”

मस्त विचार 397

ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है- ये देखने के लिए हमें ज्यादा दूर जाने की जरुरत नहीं है, जहाँ हम अपनी ज्ञान की आँखें खोल ले, वहीँ हम इसे देख सकते हैं.

मस्त विचार 396

ज़िन्दगी जाने कितने मोड लेती हैं,

हर मोड़ पर नए सवाल देती है

तलाशते रहते है हम सवाल ज़िन्दगी भर

और जब जवाब मिल जाए तो

ज़िन्दगी सवाल ही बदल देती हैं.

error: Content is protected