मस्त विचार 356

 लोहा नरम होकर औजार बन जाता है,

सोना नरम होकर जेवर बन जाता है !

मिट्टी नरम होकर खेत बन जाती है,

आटा नरम होता है तो रोटी बन जाती है !

ठीक इसी तरह अगर इंसान भी…

नरम हो जाये तो लोगो की दिलों में,

अपनी जगह बना लेता है.

मस्त विचार 354

तेरे ग़रूर को देख कर तेरी तमन्ना ही छोड़ दी हमने….

ज़रा हम भी तो देखें कौन चाहता है तुम्हें हमारी तरह…

मस्त विचार 353

गालों पे आंसूओं की लकीर बन गई.

सोचा न था ऐसी तक़दीर बन गई.

हमने तो रेत पे ऊँगली फिराई ही थी,

देखा तो आपकी तसवीर बन गई.

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