मस्त विचार 328

काश….कि….मै इंसान न होता.

खुद से फिर अनजान न होता.

क्यों आया इस धरा पर मै.

सोच – सोच परेशान न होता.

तन की काया मन की माया.

घर वाले और बाहर वाले.

कितने टुकड़े करूँ मै खुद के.

करूँ मै खुद को किस के हवाले.

इसलिए मै अक्सर ही,

सोचा ये करता हूँ कि………..

कि काश कि मै होता एक पंछी.

फिर मुझे कोई रोक न पाता

सरहद के उस पार भी मै.

अपनी मरजी से जा पाता.

मिलता वहाँ मै सब से पर,

जंग की कोई बात न करता.

प्रेम के गीत उन्हें सुना कर.

अपने घर में आ जाता.

या काश कि मै होता एक वृच्छ……

देता सब को शीतल छाया.

भेद- भाव ना किसी से करता.

क्या अपना और क्या पराया.

पथिक जो मेरे पास आता.

सब को मीठे फल मै देता.

बदले में कुछ भी न लेता.

और काश कि मै होता एक बूंद……

तृष्णा किसी की मिटा तो पाता.

तृप्ति भले न कर पाता पर,

काम तो कुछ पल आ जाता.

और काश मै होता…..

काश कि होता एक कोरा पन्ना.

कोई मुझ पर तो कुछ लिख पाता.

वेद, पुराण और ग्रन्थ न सही,

एक छोटी- सी कविता ही.

जिसे पढ़ कर प्रेरित तो कुछ लोग होते.

और मै एक प्रेरक अंश बन जाता.

और भूल वश गर जुड़ जाता मै,

इतिहास के पन्नों संग.

फिर कोई तमन्ना शेष न होती,

क्यों कि…………………….

युगों तलक मै अमर हो जाता.

काश………कि……मै इंसान न होता.

मस्त विचार 327

किसी ने बर्फ से पुछा की, आप इतने ठंडे क्युं हो ?

बर्फ ने बडा अच्छा जवाब दिया :-

” मेरा अतीत भी पानी; मेरा भविष्य भी पानी…”

फिर गरमी किस बात पे रखु ??

मस्त विचार 326

किस दिन करोगे मुलाकात.

जवाब दो यार मेरी बात का.

कितने दिन बीत गए तुझ से बिछड़े.

जवाब दो मेरे यार मेरी बात का.

किस दिन करोगे मुलाकात.

मस्त विचार 325

रोने से तकदीर बदलती नही है,

वक्त से पहले कभी रात ढलती नहीं है.

दूसरो की कामयाबी लगती है आसान,

मगर कामयाबी रास्ते पर पड़ी मिलती नहीं है.

मिल जाती है कामयाबी अगर इत्तफाक से,

यह भी सच है की वह पचती नहीं है.

कामयाबी पाना है पानी मे आग लगाना,

पानी मे आग आसानी से लगती नहीं है.

ऐसा भी लगता है जिंदगी मे अक्सर,

दुनिया अपने जज्बात समझती नहीं है.

हर शिकस्त के बाद टूट कर जो संभल

गया फिर कौन-सी बिगड़ी बात बनती नहीं है.

हाथ बांधकर कभी सोचकर देखिये,

अपने आप कोई जिंदगी सँभलती नहीं है.

error: Content is protected