मस्त विचार 4284
इतनी बेरुखी….आखिर किसलिए…??
तुमको खुद से ज्यादा चाहा,…क्या इसलिए…??
तुमको खुद से ज्यादा चाहा,…क्या इसलिए…??
जानता हूं कोशिश चाहे जितनी भी कर लूं, मगर गुनाह मुझसे होते ही रहेंगे..
वरना ख़ुद्दार मुसाफ़िर हूँ…ख़ामोशी से गुजर जाऊँगा”
कभी ख्वाहिश नहीं होती कभी रुपए नहीं होते..
_ मेरी जिंदगी का सबसे भयानक हादसा रहा..