मस्त विचार 154
अभी तक इस सोच में हूँ कि ‘क्या सोचूँ’ ………!!
अभी तक इस सोच में हूँ कि ‘क्या सोचूँ’ ………!!
_ गला ज़रूरतों का घोंट दिया..
तू मस्ती का राग छेड़ कर चला गया.
जो चल पड़े इस रास्ते पर फिर क्या भंवर
और क्या किनारा
किसको मंजिल की तलाश है
डूबने में ही मजा है
किनारे पर जाकर किसी को क्या मिला है.
हर घड़ी हर लम्हा मुझको , बस तेरी तलाश है.
कभी तू साँसों की जुबां , कभी तू दिल की आस है
तू ही तू बातो का मंजर , तू ही मेरी प्यास है.
कभी तू आँखों की कशिश , कभी तू मन का राज है
तू ही तू इस दिल के अन्दर , तू ही मेरा साज है.
कभी तू लहराती पवन , कभी तू ग़म का राज है
तुझसे ही जन्नत है मेरी , तू ही मेरी आवाज है.
कभी तू माथे की चमक , कभी तू मेरा नाम है
तेरे ही हांथो से बनता , मेरा हर एक काम है.
कभी यू फूलो की महक , कभी तू प्यारा जाम है
तुझसे है रौशन है रोशनी , तू ही तो हर शाम है.
कभी न सोचना वहाँ कि तन्हा हो तुम ………
मूँद कर पलकों को अपनी जो देखोगे तुम ……
तो अपने साथ ही सदा मुझ को पाओगे तुम………