मस्त विचार 213
कैसे मै आता बुलाया नहीं था.
याद तुमने किया ही नहीं था.
बुला के तो देख मै कैसे न आऊँ.
तेरा हूँ मै तेरे पास ही आऊँ.
याद तुमने किया ही नहीं था.
बुला के तो देख मै कैसे न आऊँ.
तेरा हूँ मै तेरे पास ही आऊँ.
क्यों हो नाराज यह बयान तो किजीए.
कर दीजीए माफ़ ग़र हो गई हो ख़ता.
यों खामोश रहकर सजा ना दीजीए.
कर्म पथ को रह पूजता, बीच में मत छोड़.
कर कोशिश सपनों को परवान चढाने की.
खुद ही खुद को यूँ मझधार में मत छोड़.
पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर.
खुद ब खुद मेरे नजदीक आती गई.
मेरी मन्जिल मेरा हौसला देख कर.
और सजा लो कुछ नयी सदभावनाएँ.