मस्त विचार 213

कैसे मै आता बुलाया नहीं था.

याद तुमने किया ही नहीं था.

बुला के तो देख मै कैसे न आऊँ.

तेरा हूँ मै तेरे पास ही आऊँ. 

मस्त विचार 212

आप मेरा इस तरह इम्तहान न लीजीए.

क्यों हो नाराज यह बयान तो किजीए.

कर दीजीए माफ़ ग़र हो गई हो ख़ता.

यों खामोश रहकर सजा ना दीजीए. 

मस्त विचार 211

बिना पढ़े ही ज़िन्दगी के पृष्ठ मत मोड़.

कर्म पथ को रह पूजता, बीच में मत छोड़.

कर कोशिश सपनों को परवान चढाने की.

खुद ही खुद को यूँ मझधार में मत छोड़.

मस्त विचार 210

डर मुझे भी लगा फासला देख कर.

पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर.

खुद ब खुद मेरे नजदीक आती गई.

मेरी मन्जिल मेरा हौसला देख कर.

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