मस्त विचार 219
तेरी चाह की चाहत को हम दुनिया से छिपा न सके.
कोशिश तो बहुत की तुझे भुलाने की ,
पर चाह कर भी यार तुझे भुला न सके.
कोशिश तो बहुत की तुझे भुलाने की ,
पर चाह कर भी यार तुझे भुला न सके.
आप को भूल कर रह पाउंगा कैसे,
आप तो मेरी सांसो में बसे हो,
चाह कर भी सांस रोक पाउंगा कैसे.
सुबह होते ही लोग चिरागों को बुझा देते हैं.
अपने घर के लोगों में , बग़ावत हो गई.
वैसे संभालना हम भी जानते थे;
ठोकर भी लगी तो उसी पत्थर से;
जिसे हम अपना मानते थे.
क्योंकि संसार के राजा के साथ रहता हूँ,
उस चाँद को बहुत गुरूर है
कि उसके पास नूर है…..
मगर वो क्या जाने की
मेरा तो यार ही कोहिनूर है.