मस्त विचार 139
एक छलनी है,
जो अपने आप छानती रहती है चीजों को,
जो अच्छे को अपना लेती है और खराब को किनारे कर देती है.
जो अपने आप छानती रहती है चीजों को,
जो अच्छे को अपना लेती है और खराब को किनारे कर देती है.
हँस बन जा मोती तू चुनना.
सबको रिजेक्ट किया, तुम को सिलेक्ट किया.
तुमसे रिक्वेस्ट है, इसे रीफुज न करना.
ज्ञान के इस बल्ब को, फ्यूज न करना.
यादों को हमारी दिल में बसाए रखना,
चाहे आप से मुलाकात हो या ना हो,
पर हम से दोस्ती सदा बनाए रखना.
बढ़ न पाओगे कभी तुम
गुमशुदा रह जाओगे.
भीड़ का हिस्सा नहीं
तुम भीड़ से हट कर दिखो.
वरना खुद की हस्ती से
खुद ही जुदा हो जाओगे.
जिसमे तेरा गीत नहीं गूंजता.
मेरे जीवन के सूनेपन में, ऎसा रस बरसाया है तुमने.
इस जीवन में जो आनन्द है, उसमे बस तेरी ही धुन है.