मस्त विचार 121

जिन्दगी हरदम रहे महकती, चेहरे पर रहे हरदम प्रसन्नता.

ह्रदय में हो मेरे विशालता, बुद्धि में हो मेरे समता.

मस्त विचार 120

ज़माना पूछता है तुम कौन हो.

ज़माना क्या जाने हम कौन हैं.

जो खुद को नहीं जानता है.

वो हमें पूछता है तुम कौन हो.

मस्त विचार 119

इस दुनिया के लोग भी बड़े अजीब हैं, _

_ सारे खिलौने छोड़ के जज्बातों से खेलते हैं.

जो लोग आपके जज्बातों की कदर नहीं करते, _

_ उन्हें अलविदा कहने में कोई बुराई नहीं ..

मस्त विचार 118

ऐ यार, मैंने तो एक तुम पर ही चाहत ख़त्म कर दी…….

…….. अब प्रेम किसको कहते हैं मालूम नहीं……………

मस्त विचार 117

पिन्जरे में बन्द था मै, तूने आजाद किया.

क्या करूँ लाचार था, दुनिया की निर्दयता का दास था.

तूने आज़ाद किया.

मस्त विचार 116

मै हवा में उड़ती खुशबू को अपने भीतर समेटना चाहता हूँ

और चाँद से खुशबू निचोड़ने का हुनर भी सीखना चाहता हूँ.

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