मस्त विचार 121
जिन्दगी हरदम रहे महकती, चेहरे पर रहे हरदम प्रसन्नता.
ह्रदय में हो मेरे विशालता, बुद्धि में हो मेरे समता.
ह्रदय में हो मेरे विशालता, बुद्धि में हो मेरे समता.
ज़माना क्या जाने हम कौन हैं.
जो खुद को नहीं जानता है.
वो हमें पूछता है तुम कौन हो.
_ सारे खिलौने छोड़ के जज्बातों से खेलते हैं.
_ उन्हें अलविदा कहने में कोई बुराई नहीं ..
…….. अब प्रेम किसको कहते हैं मालूम नहीं……………
क्या करूँ लाचार था, दुनिया की निर्दयता का दास था.
तूने आज़ाद किया.
और चाँद से खुशबू निचोड़ने का हुनर भी सीखना चाहता हूँ.