मस्त विचार 4283
थोड़ी सी माफी उधार दे दे ” ऐ ख़ुदा “…
जानता हूं कोशिश चाहे जितनी भी कर लूं, मगर गुनाह मुझसे होते ही रहेंगे..
जानता हूं कोशिश चाहे जितनी भी कर लूं, मगर गुनाह मुझसे होते ही रहेंगे..
वरना ख़ुद्दार मुसाफ़िर हूँ…ख़ामोशी से गुजर जाऊँगा”
कभी ख्वाहिश नहीं होती कभी रुपए नहीं होते..
_ मेरी जिंदगी का सबसे भयानक हादसा रहा..
_ मैंने तो नाराज होना भी छोड़ दिया, देख न कितनी नाराजगी है..