मस्त विचार 4277
जो साथ रह के संवार ना सके,
वो ख़िलाफ़ रह कर क्या बिगाड़ लेंगे.
वो ख़िलाफ़ रह कर क्या बिगाड़ लेंगे.
मैं ऐतबार न करता तो और क्या करता ….
ये किस तरह की ख़मोशी हर इक सदा में है..
लेकिन हां, जिसे हम आँख भर के देख लें, उन्हें हम उलझन में डाल देते हैं…
याद तो वो है,जो महफिल में आए और अकेला कर जाए _
_ लेकिन वो बस आज के लिए ही होंगे !!