सुविचार – मन हो नया – 2205

” मन हो नया “

नये वर्ष के नये दिन पर पहली बात तो यह कहना चाहूंगा कि दिन तो रोज ही नया होता है, लेकिन रोज नये दिन को न देख पाने के कारण हम वर्ष में कभी- कभी नये दिन को देखने की कोशिश करते हैं. हमने अपनी पूरी जिंदगी को पुराना कर डाला है. उसमें नये की तलाश मन में बनी रहती है, तो वर्ष में एकाध दिन को हम नया दिन मान कर अपनी इस तलाश को पूरा कर लेते हैं, सोचनेवाली बात है- जिसका पूरा वर्ष पुराना होता हो, उसका एक दिन कैसे नया हो सकता है ? जिसकी आदत एक वर्ष पुराना देखने की हो, वह एक दिन को नया कैसे देख पायेगा ? हमारा जो मन हर चीज को पुरानी कर लेता है, वह आज को भी पुराना कर लेगा. फिर नये का धोखा पैदा करने के लिए नये कपड़े हैं, उत्सव हैं, मिठाइयां हैं, गीत हैं. लेकिन न नये कपड़ों से कुछ नया हो सकता है, न नये गीतों से कुछ हो सकता है.

नया मन चाहिए ! और नया मन जिसके पास हो, उसे कोई दिन कभी पुराना नहीं होता. जिसके पास ताजा मन हो, फ्रेश माइंड हो, वह हर चीज को ताजी और नयी कर लेता है. लेकिन ताजा मन हमारे पास नहीं है. इसलिए हम चीजों को नयी करते हैं. मकान रंगते हैं. नयी कार लेते हैं. नये कपड़े लेते हैं. हम चीजों को नया करते हैं, क्योंकि नया मन हमारे पास नहीं है.

कभी सोचा है कि नये और पुराने होने के बीच में कितना फासला होता है ? चीजों को नया करने वाली इस वृत्ति ने जीवन को कठिनाई में डाल दिया है. भौतिकवादी और अध्यात्मवादी में यही फर्क है. अध्यात्मवादी रोज अपने को नया करने की चिंता में लगा है. क्योंकि उसका कहना है कि अगर मैं नया हो गया, तो इस जगत में मेरे लिए कुछ भी पुराना न रह जायेगा, और भौतिकवादी कहता है कि चीजें नयी करो, क्योंकि स्वयं के नये होने का तो कोई उपाय नहीं है. नया मकान बनाओ, नयी सड़कें, नये कारखाने, नयी व्यवस्था लाकर सब नया कर लो. लेकिन अगर आदमी पुराना है और चीजों को पुराना करने की तरकीब उसके भीतर है, तो वह सब चीजों को पुराना कर ही लेगा. हम इस तरह नयेपन का धोखा पैदा करते हैं.

 

– आचार्य रजनीश ओशो

My Favourites – 2018

अकारण प्रसन्नता का नाम मस्ती है…!

मस्तों का आधार सूत्र है कि, दूसरों से अपने सुख को मत जोड़ो..!!

जब आप किसी ऐसे मुकाम पर पहुंच जाते हैं, जहां आपको किसी को प्रभावित करने की जरूरत नहीं होती,_

_ तो आपकी आजादी शुरू हो जाएगी..

आज़ादी सर्वोपरि होती है, _ आज़ाद व्यक्ति अपनी इच्छा से अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकता है, खा-पी सकता है, कहीं घूम – फिर सकता है तथा विचारों को अभिव्यक्त कर सकता है.

गुलामी का जीवन कष्टमय होता है_ … अतः आज़ादी को सँभालकर रखना हम सभी का दायित्व है.

आज़ाद खयाल होना गलत नहीं, _ बस सबको अपनी हद मालूम होनी चाहिए..
जो बदला जा सके उसे बदलो, जो बदला ना जा सके _ उसे स्वीकारो, और जो स्वीकारा ना जा सके _ उससे दूर हो जाओ –

– लेकिन स्वयं को खुश रखो !

जिंदगी में मन की शांति बहुत जरुरी है _ इसलिए लाइफ में खुद को खुश रखने का तरीका ढूंढिए और जो चीजें आपके मन को अशांत करती हैं _ उससे जितनी जल्दी हो सके दूर हो जाएं_

– ” जिंदगी बहुत खूबसूरत है इसे खुश हो कर जीएं “

मानसिक शांति भंग करने वाले हर नकारात्मक तत्व से दूर रहना है मुझे…

_ चाहे वह कितना भी अजीज हो, इस के लिए उसे भी त्याग दूँगा….••

जीवन का अर्थ है आंतरिक शांति प्राप्त करना और यह आंतरिक शांति धन – दौलत से प्राप्त नहीं होगी, इसे बाजार से ख़रीदा नहीं जा सकता,

यह तो तभी प्राप्त होगी, जब आपके जीवन में रचनात्मक गुण हों.

हमेशा उन चीजों के लिए समय निकालें _ जो आपको जिंदा रहने में खुशी का अनुभव कराती हैं.

— ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो आपको खुश कर सकती हैं, _ उन चीजों पर ज्यादा ध्यान न दें जो आपको दुखी करती हैं —

जिंदगी मिली है तो जिंदगी के हर अनुभव को सीख कर आगे बढ़ना ही जीना ही कहलाता है..

हारो तो उसे जिंदगी का पाठ समझो _ जीतो तो जिंदगी का इनाम..

ज़िंदगी में जरूरी नहीं सब कुछ हमारे ही हिसाब से हो, जब लाख प्रयास के बाद भी _

_ आप के हिसाब से सब कुछ न हो तो _ समझो जो हो रहा है _ वही होना था..

-हर व्यक्ति का अपना सफ़र है, अपनी मंज़िल है _ हम साथ चलकर भी अपने-अपने सफ़र के मालिक हैं-

मेरा सफ़र अकेला है ,,,! पर मंज़िल तक पहुँचने के लिए, कुछ महान हस्तियों के, मार्गदर्शन की बहुत जरुरत होती है !!

न तुम मुझे बांधो, _ न मैं तुम्हें बांधू _ क्योंकि आकाश में साथ साथ तो उड़ा जा सकता है _ लेकिन बंधे हुए नहीं..
जिंदगी अब तुझे और समझना नहीं, क्योंकि जितना समझना चाहता हुँ _ और उलझता जाता हुँ..
चल जिंदगी ! नई शुरुआत करते हैं, _ जो उम्मीद औरों से की थी, वो अब खुद से करते हैं….!
जीवन में आज़ादी असुरछा से घिरी होती है, इसलिए अधिकांश लोग पिंजरे में जीवन जीते हैं.
आजादी संसार की सबसे सुंदर चिज है, इसे पकड़ लो _ चाहे इसके लिए जो भी छूट जाए..!
मैं अपनी आजादी का हकदार हूँ, _ किसी की अनुमति का मोहताज नहीं..
असली सफलता वही है जिसमे हम खुद को किसी के साथ तुलना करना बंद कर देते हैं…!!!
केवल एक ही सफलता है – अपने जीवन को अपने तरीके से व्यतीत करने में सक्षम होना..
” खुद से प्यार करो ” और जितने के आप लायक हो _ उससे कम पर समझौता मत करो.
सामान्य ज्ञान एक ऐसा फूल है _ जो हर किसी के बगीचे में नहीं उगता..
आपके जीवन की ख़ुशी _ आपके विचारों की _ गुणवत्ता पर निर्भर करती है.

The happiness of your life depends on the quality of your thoughts.

ज्ञान पाकर, अज्ञान दूर करें_ यदि कोई सोचे कि ‘ ज्ञान नहीं मिला तो क्या फर्क पड़ता है ?

” इसका जवाब __” ज्ञान से मिलनेवाली _ आज़ादी का आनंद ” महसूस करने के बाद ही मालूम पड़ता है.

दूरदर्शिता का गुण दुर्लभ होता है, बहुत कम लोगों में यह पाया जाता है, _ जिन थोड़े- से लोगों में यह होता है,

_ वे मनन के ज़रिए भावी संभावनाओं को पहले से ही जान लेते हैं.

अगर आपकी लाइफ में चैलेंजेज हैँ, बाधाएं हैँ तो उन्हें कोसते मत रहिये, कहीं ना कहीं ये आपको fresh and lively बनाये रखती हैँ,

इन्हेँ accept करिये, इन्हे overcome करिये और अपना तेज बनाये रखिये.

मेरे चेहरे पर मुस्कान का मतलब यह नहीं है कि मेरी जिंदगी परफेक्ट है, _

_ इसका मतलब है कि मेरी चुनौतियों के बावजूद, मैं अपनी खुशी और जीवन के सर्वोत्तम क्षणों पर ध्यान केंद्रित करना चुनता हूं.

अपने पिछले अनुभवों को कभी भी अपने भविष्य को नुकसान न पहुंचाने दें _

_ आपका अतीत बदला नहीं जा सकता और आपका भविष्य सजा के लायक नहीं है..

बस सबसे अच्छा बनने की कोशिश करो, जो आप हो सकते हैं ;

कभी भी सबसे अच्छा बनने की कोशिश करना बंद न करें, _ यह आप की शक्ति है..

उन लोगों, स्थानों और परिस्थितियों से दूर जाने के लिए तैयार रहें_

_ जो आपको आपकी पूरी क्षमता तक पहुँचने से रोकते हैं..

जीवन में कई बार हम बड़ी परेशानियों से यूं निकल जाते हैं,_

_ मानो कोई है जो हमारा साथ दे रहा है.

कल्पना कीजिए कि आप क्या चाहते हैं, अपने अंदर की खुशी को महसूस करें,_

_ और आकर्षण का नियम आपके लिए इसे प्राप्त करने का सही तरीका खोज लेगा..

आप अपनी भावनाओं को तुरंत बदल सकते हैं .. कुछ आनंददायक सोचकर, या कोई गीत गाकर,

_ या एक सुखद अनुभव को याद करके..

जिस व्यक्ति में ज्ञान और कुछ सीखने की भूख होती है, वह हमेशा तरोताजा अवस्था में रहता है,_

_ उसके पास विचारों का व्यापक दृष्टिकोण है और इसके साथ ही वह अंततः महान उपलब्धियां हासिल करता है..

जीवन की त्रासदी यह नहीं है कि यह इतनी जल्दी समाप्त हो जाता है,_

_ बल्कि यह है कि हम इसे शुरू करने के लिए इतना लंबा इंतजार करते हैं..

बुद्धिमान को खुश करने के लिए कुछ चीजों की जरूरत होती है,_

_ लेकिन मूर्ख को कुछ भी संतुष्ट नहीं करता है; और यही कारण है कि इतनी सारी मानव जाति दुखी है.

होशियार व्यक्ति दुनिया को अपनी मर्जी से चलाने की कोशिश करता है _

_ बुद्धिमान व्यक्ति खुद को दुनिया के अनुरूप बना लेता है.

कोई नामुमकिन सी बात को, मुमकिन कर के दिखा _

_ खुद पहचान लेगा ज़माना, भीड़ से तू अलग चल कर दिखा !!

लोग हमेशा कहते थे कि यह असंभव है, _ लेकिन सच्चाई यह है कि यह दुनिया उन लोगों द्वारा बनाई गई है, _

_ जिन्होंने ऐसे काम किए जिन्हें लोग असंभव समझते थे..

सफलता की गिनती इस बात से नहीं होती है कि व्यक्ति कहाँ पहुँच गया है_

_ बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि उसने वहाँ पहुँचने के लिए कितनी बाधाओं को पार किया है..

अगर हमारा मन कठिनाइयों को झेलने के लिए तैयार हो जाता है, _

_ तो कठिनाइयां हमें दुखी नहीं बना सकतीं..

अपने बारे में लोगों को समझाना बंद करें और लोगों को सब कुछ कहने दें, _ आप जो करते हैं

उसके बारे में किसी को कोई स्पष्टीकरण नहीं देना है_ आपका जीवन आपका है, _ उनका नहीं..

कभी भी किसी को अपने जीवन में अपने लिए जगह बनाने के लिए मजबूर न करें,

_ क्योंकि अगर वे आपकी कीमत जानते हैं, तो वे निश्चित रूप से आपके लिए एक जगह बनाएंगे.

अगर आपकी सफलता आपकी शर्तों पर नहीं है, अगर यह दुनिया को अच्छी लगती है _

_ लेकिन आपके दिल को अच्छी नहीं लगती है, तो यह सफलता बिल्कुल नहीं है.

आश्वस्त और दृढ़ रहें; अपने रास्ते में आने वाली किसी भी बाधा के बावजूद _ कभी हार न मानने वाला रवैया विकसित करें –

_ ” कोई समस्या नहीं है, केवल चुनौतियाँ और समाधान हैं”

कभी – कभी आपको कठिनाइयों का सामना इसलिए नहीं करना पड़ता कि आप कुछ गलत कर रहे हैं,

बल्कि इसलिए कि आप कुछ सही कर रहे हैं..

आपको मानवता में विश्वास नहीं खोना चाहिए, _

_ मानवता एक सागर है; सागर की कुछ बूंदे गंदी हो जाए तो सागर गंदा नहीं होता..

हर दिन बस चुटकी भर सीख भी मिल जाये काफी है..
मैं गिरा, रोया, उठा, फिर हँसा..

तुमने देखा, बस हँसे, और गिर गए…

टूटना, बिखरना सदैव पीड़ा बनकर नहीं रहता… ‌ किसी पतझड़ का पीछा करते हुए तुम…

स्वयं को एक दिन _ फूलों के बगीचे में पाओगे….

दुनिया को विज्ञान कितना भी विकसित और सुखद बना दे,

लेकिन मानसिक शांति आज भी प्रकृति की गोद में ही मिलती है.

संसार के दुःखो को दूर करने के लिए, स्वयं को पहले सुखों से संपन्न बनाना पड़ेगा,

जो रब की याद से संभव है…

अपने जीवन का आनंद लें, अपने सपने देखें, _

_ अपनी मेहनत से खुद को साबित करें और अपना जीवन बदलें..

” जिंदगी शुरू करने का सबसे पहला सूत्र याद रहे, कि,

क्रिया की प्रतिक्रिया होती है, ” सुखद की सुखद और दुखद की दुखद “

कड़वा है, मीठा है, फीका है, शिकवा क्या कीजिए,

जीवन समझौता है, घूँट – घूँट पीजिए …!!

दौलत -ए- दर्द को दुनिया से छुपा कर रखना,

आंख में बूंद ना हो _ दिल में समन्दर रखना..

मन खुश है तो _ एक बूंद भी बरसात है…

दुखी मन के आगे _ समंदर की भी क्या औकात है..

मैं मानता था कि प्रार्थना चीजों को बदल देती है, लेकिन अब मुझे पता है कि _

_  प्रार्थना हमें बदल देती है _ और हम चीजों को बदल देते हैं..

जो आसानी से मिल जाए वो हमेशा तक नहीं रहता,

_ जो हमेशा तक रहता है वो आसानी से नहीं मिलता..

हो सकता है कि आप कई चीजों में परिपूर्ण न हों, लेकिन आपके बिना कई चीजें परिपूर्ण नहीं हो सकतीं,_अपने छोटे-छोटे तरीकों में खास रहें.
दुनिया में सबसे खुश,,वो लोग रहते हैं, जो ये जान चुके हैं कि _ दूसरों से किसी भी तरह की उम्मीद करना व्यर्थ है..
चीजों को आसान बनाएं, जीवन आसान है _ हम इंसान इसे जितना जटिल बना रहे हैं उतना ही जटिल बना रहे हैं.
किसी दूसरे के बुरे व्यवहार में इतनी ताक़त नहीं होनी चाहिए — कि वो आपके मन की शांती को खत्म कर दे,,,
” बाधाएं वे चीजें हैं जो एक व्यक्ति तब देखता है _ जब वह अपने लक्ष्य से अपनी आंखें हटा लेता है “
जिसके पास बुद्धि है वह कभी दुखी नहीं हो सकता _ और न ही कोई दूसरा उसे ऐसा बना सकता है..
जब से मैंने स्वयं को प्रसन्न रखने का निर्णय लिया है, _ तब से मेरे लिए कोई समस्या नहीं रही .!
जब आपका अपने विचारों पर नियंत्रण होता है, _ तो आपका अपने जीवन पर नियंत्रण होता है.
खुशी हमेशा उस दरवाजे में छिप जाती है _ जिसके बारे में आपने नहीं सोचा था कि _ वह खुला है..
वक्त के साथ चलना कोई जरुरी नहीं, _ सच के साथ चलिए, एक दिन वक्त आपके साथ चलेगा.
एक बुद्धिमान व्यक्ति न केवल सलाह लेना जानता है, _ बल्कि उसे अस्वीकार करना भी जानता है..
आप अपने जीवन से कुछ भी नहीं सीखते हैं _ यदि आपको लगता है कि आप हर समय सही हैं.
असलियत से जुड़ जाना ही मन को शान्ति देने का ढंग है, _ कृत्रिमता मन को अशान्ति देती है.
दुनिया की महत्वपूर्ण चीजें उन्हें मिली हैं _ जिन्होंने आशा न होते हुए भी _ प्रयास जारी रखा..
बहुत दूर का देखने की कोशिश व्यर्थ है, एक एक कदम चलते चलो, _ रास्ता मिलता जाएगा.
हम जिस रस्ते से गुजरते हैं _ उस रस्ते से हमेशा के लिये गुजर जाना ही _ बेहतर समझते हैं.
दूसरों के साथ अपने जीवन की तुलना न करें, _आपको पता नहीं है कि उनकी यात्रा क्या है.
अगर आपका रास्ता सबसे अलग है, तो _ इसका मतलब यह नहीं कि आप खो गए हैं…
जो हो रहा है उसे होने दो, _ उसने तुम्हारी सोच से भी बेहतर तुम्हारे लिए सोच रखा है..
यदि आप अपना दिमाग ठीक कर लें,_ तो आपका शेष जीवन सही हो जाएगा.!
हम भीतर से जो हासिल करते हैं,  _ वह बाहरी वास्तविकता को बदल देगा..
सब्र करो.. _ जिसके काबिल हो, ज़िंदगी वो हर चीज़ देगी तुम्हें !
स्वस्थ जीवन जीने के लिए कम से कम आवश्यक ज्ञान प्राप्त करना चाहिए..
सिर्फ जन्म लेने से आपको जीवन नहीं मिलता, _ इसे सही तरीके से जीना होगा.
“हम बहुत आभारी हैं कि हमें मनुष्य के रूप में जीवन जीने की अनुमति दी गई”…
अच्छी तरह से जीना, पूरी तरह से जीना, जीवन का उद्देश्य है, कोई दूसरा उद्देश्य क्यों पूछें ?
ख्वाहिशों की आदत भी कितनी बेतुकी है…! _ मुकम्मल होते ही फिर से बदल जाती है..!!
अपने आप को याद दिलाएं कि आपको वह नहीं करना है _ जो बाकी सभी कर रहे हैं.
जब आप ज्ञान से प्रबुद्ध होते हैं, तो आप भौतिकवादी दुनिया में कभी नहीं खोते हैं..
त्याग दो अपने बीते हुए कल को, क्योंकि उसका प्रभाव आने वाले कल को दूषित कर जाएगा.
” आपका समय सीमित है, इसलिए इसे किसी और का जीवन जीने में बर्बाद न करें “
जिस चीज़ के लिए आप तैयार हो जाते हो, _ वह चीज़ आपके जीवन में आती है.
जो हो जाय, उससे प्रसन्न रहो, _ जो होना होगा, वो, होके ही रहेगा..
हर कोई इस बात से अनजान है कि _ वो खुद कितना क़ीमती है !!!
” जिंदगी हल्की महसूस होगी ” _ अगर दूसरों से कम उम्मीद और खुद पर ज्यादा भरोसा हो तो ..!!
आप क्या महसूस करते हो, ये सिर्फ आप महसूस कर सकते हो, _ और दूसरा कोई नहीं..
सबसे समझदार व्यक्ति वह होता है जिसके आँख कान तो खुले हों _ परंतु मुंह बंद हो..
सबसे ज्यादा गरीब वह है, _ जिसकी खुशियाँ दूसरों की अनुमति पर निर्भर करती है..
बात जब फूलों से करना आ गया .._.. ज़िंदगी में रँग भरना आ गया.
किसी ने भी आपकी खुशी का ठेका नहीं ले रखा है _ सिवाय आपको छोड़कर ,,
साधारण चीजें ही सबसे ज्यादा असाधारण होती हैं, और केवल बुद्धिमान लोग ही उसे देख पाते हैं.
तुम रास्ता बनाओं, मंज़िल तुम्हें मिल जायेंगी _ हिम्मत और लगन हो, तो कोशिश रंग लायेंगी..
जब हम खुश रहतें हैं, _ तब हमारी कार्यशैली सर्वोत्तम अवस्था में होती है.
अपनी कामयाबी को कभी छोटा मत समझो, ये सबको प्राप्त नहीं होती.
कोशिश में कोई कमी ना रखना, _ नतीजे तो आए दिन बदलते रहते हैं.
प्रसन्न वो हैं, जो अपना मूल्यांकन करते हैं _ परेशान वो हैं जो, दूसरों का मूल्यांकन करते हैं..
बुद्धिजीवी व्यक्ति का दिमाग हर वक़्त खुद के दिमाग की तरफ ध्यान देता है.
जब आप शांत हैं या नहीं, इस बात पर परेशान नहीं होते हैं तो यही शांति है.
यकिन रखिए ऊपर वाले का फैसला हमारे फैसलो से बहुत अच्छे होते हैं.
हर स्थिति में अच्छाई देखने के लिए अपने दिमाग को प्रशिक्षित करें
आप चिंतन तो करके देखिए, चिंता करने की आवश्यकता ही न होगी !
चिंता का दिन एक हफ्ते के काम से ज्यादा थका देने वाला होता है.
चिंता करना हमारी आदत बन चुकी है, इसलिए हम दुखी हैं.
ज्ञानी चिंता सहित भी चिंता रहित होता है.
सुख को बांटने वाला दुखी हो ही नहीं सकता..
जीवन में महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अंदर से क्या हैं न कि बाहर से..
जीवन एक प्रश्न है _ और हम इसे कैसे जीते हैं _ यह हमारा उत्तर..
इंसान ने सब कुछ खोज लिया, _ सिवाय इसके की जीना कैसे है.
जीवन तो सबको मिल जाता है,_ जीना बहुत कम को आता है.
” जैसे तैसे ” गुजरने वाली को उम्र कहते हैं ” जिंदगी नहीं “
चलो बिखरने देते हैं जिंदगी को, सम्भालने की भी एक हद होती है.
जो थोड़े से तृप्त हो जाता है _ उसके लिए इस संसार के सारे कष्ट आसान हो जाते हैं.
ज़िन्दगी के कुछ और पैमाने तय करो.._..बस जी लेना ही तो जिन्दगी नहीं..
ज़िंदगी कह रही थी “आ जी ले ” __ मुझसे इतना सा काम भी न हुआ..
जिंदगी तो प्यार के लिए भी कम है और लोग इसे नफरतों में गवा देते हैं.
जिसे संभाल न पाओ, उसे बिखेरा न‌ करो.
जीवन यात्रा है, इस यात्रा में जीवन जीने का ढंग महत्वपूर्ण है.
जैसे जैसे आप अधिक जागरूक होते जाते हैं _ इच्छाएं गायब होती जाती हैं !
जब हमारी चाहतें कम होती हैं _ तब जीवन जीने का मजा दोगुना हो जाता है..
समय की बर्बादी एक छोटे से जीवन को और भी छोटा कर सकती है..
हम हैं उलझे हुए उनमें क्यूँ बेवजह, जो जरुरी नहीं ज़िंदगी के लिए..
अपनी आवश्यकताएं सीमित रखना सुखी जीवन का मूलमंत्र है.
अशांत तुम इसलिए हो _ क्योंकि _ गैर ज़रूरी के पीछे पड़े हो..
सिर्फ *सुकून* ढूँढिये…._ *जरूरतें* तो कभी खत्म *नही* होंगी.
ज्ञानी कभी कुछ त्यागता नहीं, _ जो व्यर्थ है वह छूट जाता है.
नकली लोगों के नाटक में क्यों फंसें_जब आप अपने जीवन को उन लोगों के साथ साझा कर सकते हैं_जो वास्तव में आपकी परवाह करते हैं.
अपने आप से पूछें कि वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है और फिर अपने उत्तर के आसपास _ अपना जीवन बनाने का साहस करें.
जिसे जीने की कलाकारी आ गई,_ वह जीवन के रंग मंच पर कभी असफल नहीं होता.

_ वह जीवन में उतनी हीं जरूरतें जोड़ता है _ ताकि जीवन ना घटे,

_ इस यात्रा पर निकला वह यात्री ज्य़ादा खुश है _ जिसके पास कम सामान है.

एक खुशहाल जीवन के लिए थोड़े की जरुरत होती है _ यह सब आपके अंदर है _ आपके सोचने के तरीके में.
अमीर वह नहीं जिसके पास बहुत है; _ अमीर वह है जिसकी आवश्यकताएं बहुत कम हैं !
योजना बना कर चलना अच्छी बात है, मगर _ योजनाओं के नाम पर चिन्तायें पालना ठीक नहीं.
आपके पास जो भी है, उसमें खुश रहें _ ज्यादा की कामना कर के दुःख को आमंत्रित ना करें.
अगर आप मेहनत से काम करेंगे तो.. _ तब आपको लगेगा की ” यह जीवन बहुत खूबसूरत है “
तब ये बिलकुल भी नहीं पता था ” क्या चाहिए ” _ मगर ये पता था ” क्या नहीं चाहिए “
बुद्धिमान वह है _ जो जीवन में आवश्यक और अनावश्यक चीजों के बीच अंतर कर सके.
– ख़ुद को ख़ुश रखने के तरीके ढूँढें,__ क्यूँकि तकलीफें तो आपको ढूँढ ही रही हैं.

” – जो खुद में खुश रहता है _ उसके लिए सभी परिस्थितियाँ अच्छी होती हैं..”

इबादत एक मुकाम तक ले जाती है, _ आगे दीवानगी रास्ता दिखाती है..
कई जरिये हैं कुछ कहने के, उनमें से एक जरिया है ” कुछ न कहना “
मैं भी हूँ सौदागर कैसा, __ ख़ुशियों का सौदा गम से कर रहा हूं…
उन चीजों को हासिल करें _ जो आपके लिए मायने रखती हैं.
ख्वाब, ख्वाहिश और लोग _ जितने कम हों _ उतना अच्छा..
जो बातें मैं कभी नहीं कहता, _ वे मुझे कभी परेशानी में नहीं डालतीं..!
न कोई उम्मीद…न कोई चाह.., _ बस चलता रहता हूँ…अपनी राह…!
हर कोई _ इस बात से अनजान है की _ वो खुद कितना कीमती है !!!
ज़िन्दगी चलने मेँ _ सुख और दुख _ दोनों पैरों की जरुरत है !!
शांति की इच्छा हो तो…_ पहले इच्छा को शांत करो..
उम्मीदें डरती है मुझसे, _ मैं वास्तविकता का हाथ थामें रहता हूँ..!!!
अपने शौक को कभी भी खत्म न होने दें, बल्कि उनको एक आकार दें .!!
बहुत कुछ होता है जिंदगी में _ जिसके लिए कभी भी समझौता _ मत करना..
जरुरी है कि बिना प्रयास किए, असफलता स्वीकार न की जाए.
जब आप दूसरों पर निर्भर होते हैं, _ तो आप अपना जीवन स्वयं नहीं जी सकते.
अपनी ज़िंदगी को सजाने संवारने की जिम्मेदारी _ आपकी खुद की है.
जब जीवन आपको समय देता है, आराम करें और इसका आनंद लें.
” दुनिया में सबसे बड़ी संपत्ति आपकी मानसिकता है “
मुझे वह लोग पसंद हैं जो अपनी मौज में रहते हैं,

साज़िशें नहीं करते, नफ़रतें नहीं फैलाते, ” मगर कम होते हैं ऐसे लोग !!! “

ज़िंदगी से बडा़ कोई मज़हब नहीं होता,_ और अपने जिस्म से सगा कोई दूजा नहीं होता,

तो सबसे पहले ज़िंदगी की परवाह होनी चाहिये,”

अपने विकास का हर दिन हिसाब रखना सबसे अच्छा होता है, क्या आप दिन प्रति दिन पहले से अच्छा,

_ ज्यादा खुश, और ज्यादा समझदार होते जा रहे हैं.

कुछ लोग अपने बारे में खुद फैसला लेने से डरते हैं, उन्हें लगता है कि कुछ गड़बड़ हुआ, तो जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी. इससे अच्छा है दूसरे के कहे अनुसार चलो, असफल होने पर कह सकते हैं कि मैंने अपनी मर्जी से कुछ नहीं किया.

अपनी जीवन की गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर किसी और को नहीं बैठने देना चाहिए. किसी और को बैठाने वाले जिम्मेदारियों से भागते हैं.

जिंदगी को अपने स्वाभाविक लय में जीने का अलग ही सुख है. यह दिमाग को शांत रखता है, जिससे जिंदगी का सुख जुड़ा हुआ है. अगर आपने अब तक केवल दूसरों की बुराइयां गिनने में समय गुजारा है, तो अब स्वयं में बदलाव लायें. यह कठिन नहीं है, बस केवल आत्मानुशासन की जरुरत है.

एक लंबे अंतराल के बाद पता चलता है कि हमने जिंदगी उस काम में गुजार दी, जिसमें खुद अपना ही अहित हुआ, तो आनेवाले समय में इस बात का ख्याल रहे कि अच्छे और नेक काम में समय बीते. यही जिंदगी का फलसफा है.

जीवन का मजा जीवंत रहने में है, इसलिए अपने स्वभाव के अनुसार जीवंत बने रहिए.

” मैं भग्यशाली हूँ ” क्यूंकि मुझे अपने अनुसार जीवन जीने का अवसर मिला ..

समाज की नजर में तोपचंद बनने से अपना दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं,

वो अमीरी मुझे महा गरीबी लगती है _ जिसमे गुलामी होती है मजबूरी होती है..

चाहे दुनिया का सबसे बड़ा काम करो _ मगर आजादी नहीं तो _ सब व्यर्थ..

जीवन से मृत्यु तक का सफर मगर _ ” उसके पहले जी लो जिंदादिली से “

मैं मेरे जीवन का हर फैसला खुद लेता हुँ _ इस पर किसी का हस्तक्षेप मुझे कतई नहीं पसंद, वो चाहे कोई भी हो_

_ अपना सिम्पल सा फंडा है ” जिओ और जीने दो ” _ छोटी ही सही मगर जिंदगी ” अपने नाम होनी चाहिए “

एक तरफ पुरे परिवार का डिसीजन, दूसरी तरफ मेरा खुद का डिसीजन ;

ना वो मुझे गलत ठहरा रहें ना मैं, खुद को सही बता रहा,

वो अपना काम कर रहे हैं, मैं अपना काम,

हम दोनों ही एक दूसरे का मान रख रहे हैं, बिना एक दूसरे को आरोपित किये

_ बिलकुल खामोशी से..

अपना कंधा मजबूत करो _ और अपने जीवन के हर निर्णय स्वयं लो ..
मैं अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जीता हूं, _ अपव्यय पर समय बर्बाद करने का समय नहीं…

I live my life on my conditions, _ No time to waste on wastage…

अपनी जिंदगी का जो भी फैसला लेना है, _ खुद से लें,

_ क्योंकि आपकी जिंदगी बर्बाद करके _ दूसरों को थोड़ा सा भी फर्क नहीं पड़ेगा !

अपने निर्णय उन लोगों की सलाह पर न लें _ जिन्हें परिणामों से निपटना नहीं है..
आज़ाद पंछी बनने का मज़ा ही अलग है,

अपनी शर्तों पर जीने का ….नशा ही अलग है..!!

कोई मुझे दुःख नहीं दे सकता, _ यदि मैं न लेना चाहूँ,,

खुद की खुशी को दूसरों की मोहताज मत बनाओ _ खुद फैंसले करो और आगे बढ़ो..

जीवन को अपने ढंग से जीना ही जीवन है, दूसरों के लिए जीना यानी दूसरों के ढंग से जीना..

मैं चीजों को अपने हिसाब से करना अधिक पसन्द करता हूँ..!!

जीवन में कुछ निर्णय अत्यंत ही महत्वपूर्ण होते हैं,

क्योंकि उन पर आगे की राह निर्भर करती है.

मशीन जैसे चले जा रहे हैं, एक अनजानी दौड़ में जनाब, _

_ ये ज़रूरतों की मोहताज, हमारी ज़िंदगी अब कहीं खो गई है ?

भीड़ हमेशा आसान रस्ते पर चलती है, जरुरी नहीं वो सही है ;

अपने रास्ते खुद चुनिए, आपको आपसे बेहतर और कोई नहीं जानता..

भीड़ इक्क्ठा करने के लिए _ भीड़ की पसंद से जीना आसान है,

अपनी सोच अनुसार जीवन जीना _ सब के बस की नहीं..

मैं जिस रस्ते पर चल रहा हुँ, उसमें चमकदार नुकीले कांटे _ बिखरे हुये हैं_

_ना मैं रुकता ना कांटे चुभना बंद करते हैं..

ध्यान से विचार करें, आप जिस तरह से _ अपना जीवन जीना चाहते हैं _

_ उसे जीने से आपको क्या रोकता है..

सूर्य कभी ढलता नही, रोशनी कभी जाती नही,,,

हम ही नही देख पाते, वरना पतझड़ के बाद पत्ते आ ही जाते हैं,,,

आजकल जीने लगा हूं जिंदगी, जब से छोड़ा है करनी लोगों की बंदगी ;

हां अब छोड़ दी है परवाह करना लोगों की, और जीने लगा हूं खुद की जिंदगी..

बचपन से हमारे मस्तिष्क को कामयाबी, दौलत, अच्छी नौकरी, सम्मान, आराम और मनचाहा पाने के लिए तैयार किया जाता है.

इन सबके बिना अच्छा जीवन जीने और जिंदगी को प्राथमिकता देने के लिए मस्तिष्क तैयार नहीं है…

नौकरी के लिए डिग्री की आवश्यकता हो सकती है,

लेकिन जीवन में पास होने के लिए अनुभवों से सीखने के अलावा कोई डिग्री नहीं है.

काश तुम्हें पता हो कि तुम्हें क्या चाहिए … तो बात पूरी हो जाए.

तुम्हारी असफलता और दुख का कारण _ तुम्हारी किस्मत या कम श्रम नहीं, _ तुम्हारी चाहत है..

क्योंकि तुम जानते ही नहीं कि तुम्हें क्या चाहिए, _ और तुम चुनने और जांचने निकल जाते हो.

यही कारण है कि तुम्हारी न केवल रोज़ चाहतें बदलती हैं _ बल्कि तुम अपने मन की करने के बाद भी दुखी लौटते हो.

अपनी वास्तविक चाहत को बिना जाने जीना दुख है _ और उसे जान लेना परम आनंद..

सुकून से जीने के लिए दुनिया भर के साधन सुविधाओं की जरूरत नहीं _ फिर भी यहाँ

_ हर इंसान मशीन बनने में लगा हुआ है,_ इस भ्र्म में कि _ आज मेहनत करुँगा कल सुकून से जीऊंगा.

नहीं है ख्वाहिश इस दिल को किसी बड़े आशियाने की,

थकान तो बस _ कुछ लम्हे _ सुकून के चाहती है.

ढूंढ लिया है खुद में ही सुकून…! _ये ख्वाहिशें तो खत्म होने से रही.
खुशियां बहुत सस्ती हैं इस दुनिया में, _ हम ही ढूंढ़ते हैं उसे महंगी दुकानों में..
बीत जाती हैं जिंदगी ये ढूंढ़ने में, कि ढूंढ़ना क्या है ;

जब कि मालूम नहीं ये भी, कि जो मिला है, उस का करना क्या है..

जाने कितना ही वक़्त खोजते हुए खर्च कर दिया,

” पर जो ढूँढ़ लिया ” उसे संभालने का समय नही मिला.

यह मायने नहीं रखता कि आपके पास कितने साधन हैं,

जब तक कि आपको उनका उपयोग करना ही नहीं आता..

इच्छाओं की सड़क तो बहुत दूर तक जाती है,

बेहतर यही है कि हम ” जरूरतों की गली में मुड़ जाएं ” !!

एक सीमा से अधिक साधनों को इकट्ठा करना और overplan करना भी

कभी कभी हमारी जिंदगी दूभर कर देता है.

जितना कम सामान रहेगा, उतना सफ़र आसान रहेगा.

जितनी भारी गठरी होगी, उतना तू हैरान रहेगा..

जिसकी जरुरत नहीं है उसको खरीदो मत,

नहीं तो जिसकी जरुरत है उसे बेचना पड़ेगा..

दूसरों की जिंदगी में इंटरेस्ट दिखाना बंद कर दें, ये आदत आपको उलझन में डाल सकती है ;

इसलिए अपने काम से काम रखें..

एक दिन शिकायत हमें वक़्त से नहीं बल्कि खुद से होगी,

कि एक खूबसूरत जिंदगी सामने थी और हम दुनियादारी में उलझे रहे..

अपने कामो में रत रहना और मौन रहना बहुत सारे विवादों से बचाता है !!!
इतना भी कोई दुःख नहीं है तुम्हारे जीवन में, तुम केवल सोच सोच कर उसे बड़ा बना रहे हो ;

जो होना था हो गया, अब उठो और आगे बढ़ो..

एक दिन आप पीछे मुड़कर देखेंगे, और महसूस करेंगे कि,, आप उन चीजों के बारे में

बहुत ज्यादा चिंतित थे, जो वास्तव में मायने रखती ही नहीं थीं,,!!

अच्छा – बुरा ! जो भी किया !! सब मजाक था !!!

कुछ इसी तरह हमने जीवन को आसां रखा !!!!

इतना समझ आ जाय कि जीवन के लिए क्या जरुरी है और क्या गैरजरूरी

तो समझ लो तुम्हे जीवन जीना आ गया..

अक्सर औकात यह महसूस किया है मैंने,

उम्र- भर जी के भी जीना नहीं आया मुझको..

मानसिक शांति का आनंद प्राप्त करने के लिए _ मन को व्यर्थ बातों में उलझने मत दो !!!
जीवन के स्वर को केवल वे ही सुन सकते हैं _ जो बड़ी गहरी फुर्सत में हैं..
थोड़ा कम ही सही मगर जो भी हो, अपनी मेहनत का हो.
ख्वाइशों के बोझ में तू क्या क्या कर रहा है ?

_ इतना तो जीना नही जितना तू मर रहा है !!!

” अपनी आंतरिक आवाज सुनें “

याद रहे कमाना ठीक है मगर आप कमाने वाली मशीन नहीं हैं.

यदि आप अपने तुच्छ मामलों में उलझे रहते हो, तो आप अपनी विशालता का एहसास कैसे करोगे ?

मेरा जीवन और मेरी ऊर्जा को तुच्छ मामलो में बेकार क्यो जाने दूँ ?

मेरा दिल ये सोच कर रो दिया कि _ ऐसा क्या पाना था मुझे..

जो मैंने खुद को ही खो दिया…

ज्यादातर मैं लोगों में घुल मिल नहीं पाता… वास्तव में मैं उनके जैसा नहीं बनना चाहता…

वे उम्मीद करते हैं कि मैं भी उनके जैसी सोच रखूं…जो कभी सम्भव नहीं है…

जो मैं हूँ, जैसा मैं हूँ.. हु-ब-हु वैसा ही रहना चाहता हूँ…

जीवन का सच जानने के बाद आप की हिम्मत ही नहीं पड़ेगी भेड़चाल चलने की,

फिर भले ही अकेले चलने में आप को हजारों मुसीबतो का सामना क्यू न करना पड़े,

” आपको रास्ता सुखद ही लगेगा “

कुछ भी करने से पहले यदि हम उसके कारण को जान लें, उसके अर्थ को समझ लें,

तो हम अनर्थ होने से बचा सकते हैं.

“जिस दिन से समझा है मैंने ख़ुद को, दुनिया को समझ में नहीं आता हूँ ;

कुछ इस तरह सबका होकर भी उनसे दूर हुआ जाता हूँ !”

तुम दुनिया को समझने लगो और दुनिया को तुम समझ में आना बंद हो जाओ ;

_ तो जान लेना कि _ ज़िन्दगी सही दिशा में जा रही है..!

जीवन मे खुश रहना चाहते हो न साहब,

तो सब से पहले उन्हें भूल जाना, जो आपको भूल गए,

“भूल नही पा रहे ” यह बहाना मत बताना,

खुद के लिए भी जी सकते हो, यह खुद को साबित कर के दिखाना..

चीजों के बेहतर होने का इंतजार न करें, जीवन हमेशा जटिल रहेगा.

वर्तमान में खुश रहना सीखो, नहीं तो तुम्हारा समय समाप्त हो जाएगा.

खिलने की आदत फितरत में होनी चाहिए, फिर देखो कमाल..

मौसम – माहौल – वक़्त _ कैसा भी ,,,_ किसी की क्या मजाल…

चाहो तो खुशबू ले लो…💐

हम तो महके ही हैं …गुलशन से..

मिज़ाज़ अपना कुछ ऐसा बना लिया हमने,

किसी ने कुछ भी कहा बस मुस्करा दिया हमने.

ख़ुदा ने जो बख्शा है वही हुस्न बहुत है,

फूल अपने बदन पर जेवर नहीं रखते जनाब..

जब कोई आपका साथ ना दे, तो समझ जाना ;

आप कुछ सबसे अलग कर रहे हैं..

हर ख़बर से बे-ख़बर हूँ आजकल, उड़ रही है ये ख़बर मेरे ख़िलाफ़.

मैं भी मैं हूँ ! कौन सा मर जाऊँगा ? होने दो सब हैं अगर मेरे ख़िलाफ़.

” दिल बहुत कीमती है ” कोशिश करें की इसमें वो ही रहें,

जो इसमें रहने के क़ाबिल हों, दिखावा करने वाले नहीं !

माना कि गिराने वाले लाख हैं, पर बचाने वाला भी इसी जहां में है.
जुदा होना ही मंजूर किया हमने ___गलती थी नही, तो मानी भी नही.!
आपका बुरा वक्त ही तय करेगा किस से वास्ता रखना है और किस से नहीं….!!
उन्हें खोने से हम डरते रहे, जो कभी हमारे थे ही नही.
मैं अपने लिए जीता हुँ और ये बात सब को हजम नहीं हो पाती.
मुझे हद में रहना पसंद है…और लोग उसे ग़रूर समझते हैं..!!
मुकाम वो हासिल करो, जब चाहो माहौल बदल सको !!
जीवन मेरा सरल था, न जाने कितनों को चुभ गया.
जो हो ! जैसे हो, उसमें ही मगन हो जाओ….!
जिसे चाहो _ _ उससे कुछ मत चाहो..
मैं दूसरों की दृष्टि में क्या हूं, यह महत्वपूर्ण नहीं है ;

महत्वपूर्ण यह है कि मैं अपनी स्वयं कि दृष्टि में क्या हूं !

” किसी हीरे से कम नहीं मेरे जीवन की दास्तां

हसीन है कितना मगर गिना पत्थर में जाता है ”

मेरे ज़ख्मों को हरा ही रहने दो,

ये वो सबक़ है जो ज़िंदगी ने दिये थे..

सोचने दे ज़माने को जो सोचता है,

अगर तेरा दिल सच्चा है तो नाज़ कर खुद पर..

जज़्बा रखो सच और झूठ को परखने का,

कानों में ज़हर घोलना तो जमाने का काम है.

शौक ही नहीं रहा कि, अब खुद को साबित करूं..

अब तो आप जो समझो वही हूं मैं…

दूसरों की शर्तों पर सुल्तान बनने से कई गुना ज्यादा बेहतर है, _

_ अपनी ही मौज का फ़क़ीर बने रहना..

” फकीरी ” ला देती है…. हुनर, ” चुप ” रहने का,,

” रशुख “और अमीरी जरा सी भी हो तो, ” शोर ” बहुत करती है…??

“अपनी मौज़ की सबसे बड़ी वजह रही,

हम अपने को बादशाह जानते रहे, और दुनिया फ़क़ीर, “

हम फकीरों से दोस्ती कर लो.. _ गुर सिखा देंगे शहंशाही के..
सलामत रहे गुरुर उनका, _ हम तो यू भी फकीर ठहरे ..
मिला किसी को है क्या सोचिये अमीरी से,

दिलों के शाह तो अक्सर गरीब होते हैं !

ख्वाहिशें बादशाहों को गुलाम बना लेती हैं,

पर सब्र गुलाम को बादशाह बना देता है…!!!

किसी की हैसियत से हमें क्या ताल्लुक,

खुद की दुनिया के बादशाह हैं हम..

हम तो फकीर थे जो जमाने से मांग रहे थे,

तूने अपनी रहमत से हमें बादशाह बना दिया.

जिसकी ख़ातिर दुनिया की हज़ार ठोकरें सहीं,

आँख बंद करी तो पाया मुझे उसकी ज़रूरत नहीं.

तुम रहो अपने समझदारी के महलों में,

मुझे मेरे हिस्से का पागलपन जी लेने दो..!!

मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस ;

ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं ..!!

बे-फिक्रीयों में भी जीना सीखिए जनाब,

ये फिक्र अक्सर जिंदगी का मजा छिन लेती है..!!

हर किसी को मैं खुश रख सकूं वो सलीका मुझे नहीं आता…!!

जो मैं नहीं हूँ वो दिखाने का तरीका मुझे नहीं आता..!!

रिश्तों का ठप्पा पाने के लिए मत कूदो _ जरा खुद से पूछो तो सही

क्या बैलेंस बना पाओगे जिनसे जुड़ने जा रहे हो ?

ना दुखी था वो अपने हालातों से इतना,

जितना ये सोचकर था की ” दुनिया क्या कहेगी “

जीवन को समझने के लिए, हमें अपने ढंग से जीना होगा,

चार लोग या जीवन दोनों में से, किसी एक को चुनना होगा.

जिंदगी जीने के लिए मिली है,

इसे “लोग क्या कहेंगे” यह सोचने में बर्बाद मत कीजिए..

हम लोगों के फैसलों के बारे में बहुत सोचते हैं, हम भूल जाते हैं कि

ये हमारी जिंदगी है और फैसला लेने का हक भी हमारा है.”

हम लोगों को हिम्मत करनी चाहिए कि दुनिया क्या कहेगी इसकी चिंता न करें, और अपने पंख फैलाकर उड़ने की कोशिश करें…

हो सकता है कि शायद हम एक नए तरीके की दुनिया बना पाएं.

लोग क्या कहेंगे, पहले दिन हसेंगे, दूसरे दिन मजाक उड़ाएंगे और तीसरे दिन भूल जायेंगे,,,

इसलिए लोगों की परवाह मत करो ……करो वो जो उचित हो, जो तुम चाहते हो, जिसमें तुम खुश हो….

याद रखना….. जिंदगी तुम्हारी है, लोगों की नहीं….

ये गलत कहा किसी ने, कि मेरा पता नहीं…!!

मुझे ढूंढ़ने की हद तक कोई ढूंढ़ता ही नहीं…!!

हम क्या हैं वो सिर्फ हम ही जानते हैं !

लोग तो सिर्फ हमारे बारे में ” अंदाज़ा ” लगा सकते हैं,,,,

सारी चमक हमारे पसीने की है जनाब,

विरासत में हमें कोई तोहफा नहीं मिला..

तसल्ली से पढ़े होते तो समझ में आते हम,

ज़रूर कुछ पन्ने बिना पढ़े ही पलट दिए होंगे.

झरने जैसी ही तो है मेरी ज़िंदगी __मौज में बहती, थोड़े से शोर के साथ..

लोगो को अपने पास बुलाती__ और किसी को डरा कर दूर करती.

अपना ढंग बदलो ! अपने आसपास जीवन को सुंदर बनाओ !

सभी को यह महसूस होने दो कि तुम्हारे साथ होना एक उपहार है.

अपने इस जीवन में हम भले ही बड़े- बड़े काम न कर सकें, _

_ किन्तु छोटे- छोटे कार्यों को बड़े प्यार से तो कर सकते हैं..

जीवन को इतना शानदार बनाओ, की आपको याद करके_

_किसी निराश व्यक्ति की आंखों में भी चमक आ जाए ,,!!

अपनी ऊर्जा को एक रचनात्मक उद्देश्य के लिए समर्पित करने के बजाय _

_ एक विनाशकारी उद्देश्य के लिए बर्बाद करना बुद्धिमानी नहीं है.

दिखावे का जीवन जीना बहुत कष्टदायक होता है ; क्यूंकि इंसान की

वास्तविकता कुछ और होती है, और वो दुनिया को कुछ और दिखाना चाहता है.

तू दिन- रात कोशिशें करता है, किनारा ढूँढने की.

हम तो समुद्र में डुबकियाँ लगा कर ही, जीने का मजा लेते हैं.

ये दायरे ये बंदिशे किसी और पे थोपो, _

_ मैं हवा का झोका हूं  _ मुझे आवारगी पसंद है…

समझदार व्यक्ति भीतरी विकास कर आनन्द मे रहता है,

मूर्ख व्यक्ति बाहरी दुनिया को दोष दे दुख मे रहता है..

यूँही, वो आसमान से इश्क नहीं लड़ाते हैं,

कभी खुल के … चाँद को छू के देख !

खुश रह अपनी दुनिया में _ तू खुद एक तूफान है..

माना दुनिया में अनेक बुराइयाँ है _ यूँ अपने आंसू के मोतियों को बर्बाद ना कर..

मुझे कभी भी ये गलत फहमी नहीं हुई कि अगर कोई मुझे छोड कर गया तो, वो पछताएगा…

मैने अभी तक यही सीखा है कि लोगों को, लोग मिल जाया करते हैं…

जिदंगी रुकती नहीं किसी के लिए भी, चलती रहती है…

किसी दूसरे के भाव अब मुझे प्रभावित नहीं करते,, अब मैंने संयम रखना सिख लिया है.

चाहे कोई नज़रअंदाज़ करे या मुझसे दूर हो जाए, मुझे फ़र्क नहीं पड़ता.

” मेरी जीवन की वरियता अब मेहनत है..”

मत सोचो कि कोई आपकी सफलता से खुश हैं, _

_ वे उन लाभों पर प्रसन्न होंगे _ जो आप से प्राप्त हुए हैं.

खुद को दर्द देना भी किसी गुनाह से कम तो नही, _

_ यह ज़िन्दगी इतनी भी कठिन तो नही….

थोड़ा डूबूंगा मगर, मैं फिर तैर आऊंगा, __ ” ए जिंदगी तू देख, मैं फिर जीत जाऊंगा “
“खुद को खुद में ढूँढने की कोशिश… _

_ लिखना बस बहाना है… इसी ख्वाहिश को पूरा करने का…!”

लोग रोये बिछड़ने वालों पर और हम खुद को ढूंढ कर रोये..
मैंने सब कुछ देखने के लिए _ अपनी आंखेँ बंद कर लीं..
आप अच्छे दिखना चाहते हैं या अच्छा महसूस करना चाहते हैं ?

_ आप अपने अंदर कितना शानदार महसूस करते हैं, यही सबसे महत्वपूर्ण है.

खुशी सिर्फ दूसरों को दिखाने के लिए नहीं, _

_ बल्कि अपनी तसल्ली के लिए होनी चाहिए.

” इंसान का इंसान के अलावा कुछ भी और होना, _

_ उसके इंसान होने में सब से बड़ी गिरावट है,”

तारीफें, मोहब्बत, दर्द सब जी के देख लिया, _

_ अब वो सुकून चाहिये _ जिसमे कोई ना हो !

ये जो बेचैनी है तेरी, कुछ नहीं, इक हड़बड़ी है, _

_ देख, _ शायद सोचने में ही तेरे, कुछ गड़बड़ी है.

साजिशों के हम भी शिकार हो गए, _ जितना दिल साफ रखा उतने ही गुनाहगार हो गए…
खुश होना है तो बेवजह हो जाइए जनाब.. _ वजहें आजकल महँगी हो गई हैं..!!
अपने आप में खुश रहो, _ फिर तुम्हे कोई दुख नहीं दे पाएगा !!
ज़िन्दगी में जिसे लोगों की पहचान करनी आ गयी…

उसकी जिंदगी में तकलीफें बहोत कम हो जाती हैं.

उन्हें कामयाबी में सुकून नज़र आया वो दोड़ते गए,

हमें सुकून में कामयाबी दिखी तो हम ठेहर गए.

हर बार रफ्तार सही नही होती,

कई बार धीरे चलने पर भी मंजिल मिल जाती है.

राजा की तरह जीने के लिए,

पहले गुलाम की तरह मेहनत करनी पड़ती है.

“मैं बिखर कर हर बार टूट जाता हूँ,

जितना भी टूटूं, फिर खुद ही ऊठ जाता हूँ !

ये कैसा जूनून है मुझमे, गिरकर सँभलने का,

खुद को मात देकर, खुद से ही जीत जाता हूँ”.

अगर वास्तविकता का एक दाना भी कमा लिया जाए तो वह इतना कीमती होगा कि

दुनिया की सारी दौलत उसके सामने व्यर्थ हो जाएगी..

ख़्वाबों के पीछे जिंदगी उलझा ली इतनी,

कि हकीकत में रहने का सलीका ही भूल गए हम.

सब – सा दिखना छोड़कर, खुद – सा दिखना सीख.

संभव है सब हों ग़लत, बस तू ही हो ठीक..

खुलती है.._ पढ़ी जाती है, _ रद्दी हो जाती है …

ऐ जिंदगी.._ तू भी कुछ – कुछ किताब सी है.

सीख ले ए यार _ अपने आप से यारी का फ़न..

वरना तेरा ज़िंदगी से फ़ासला हो जाएगा…

तू बेशक हीरा है _ लेकिन सामने वाला _ तेरी कीमत _

अपनी औकात, अपनी जानकारी और अपनी हैसियत से लगाएगा..

आपके जीवन में कुछ ऐसे नियम जरूर होने चाहिए,

जिनसे आप किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे.

आज हमारे पास वो सब है, जो पैसे से खरीद सकते हैं.

लेकिन वो चीज खो दी है, जो पैसे से नहीं खरीदी जा सकती..

” हमेशा सही का चुनाव करो, संपदा आए ना आए,

लेकिन सुकून जरूर आता है, और सुकून सबसे कीमती है,”

अपनी मंजिल का रास्ता _ दूसरों से पूछोगे तो _ भटक जाओगे, क्योंकि _

_ आपके मंजिल की अहमियत _ जितनी आप जानते हो _ उतनी और कोई नहीं जानता..

यदि मंजिल की है खबर तो रास्ते की फिकर न कर.

यदि रास्ते में है मजा तो मंजिल की फिकर न कर, ” दोनों हालत में जीत तुम्हारी है “

जिन्दगी की यात्रा, खाक से खाक तक..

या इसके अतिरिक्त भी कुछ कमाना है _ _ प्रयास और केवल, प्रयास.

अच्छा लगता है मुझे उन लोगों से बात करना.!

जो मेरे कुछ भी नहीं लगते, पर फिर भी मेरे बहुत कुछ हैं..!!

अपना जीवन सही निर्णय और गलत निर्णय चुनने में मत लगाइए !

जब आप संतुलित, स्पष्ट और खुश हों तो तब कोई निर्णय लीजिए… और

ईमानदारी से अपना जीवन उसमें लगा दीजिये ; कुछ न कुछ शानदार होगा ..!!

कर्म भूमि पर फल के लिए श्रम सब को करना पड़ता है,_

_ रब सिर्फ लकीरें देता है _ रंग हमको भरना पड़ता है..

यदि कोई ऐसा सोचता है कि पैसे से सुख को खरीद सकते हैं तो वह ख़रीदी हुई खुशी सच्ची नहीं है, _

धन को बहुत महत्व दिया जाता है और सरल चीजें _ जो हमें सच्ची खुशी देती हैं हम अक्सर उनकी अनदेखी कर देते हैं,_

खुशी देने वाली चीजों में से एक प्रेम है, _ इसमें कुछ भी खर्च नहीं होता है _ लेकिन आपकी जिंदगी खुशी से भर सकती है.

आप कम प्रतिक्रिया करके बहुत सी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं.

You can solve a lot of problems by reacting less.

बहोत कुछ है जिसे बदलना अति अति अति आवश्यक है,

धीमी गति से ही सही मगर खुशी की बात है काम जारी है..

कई बार यह जानकर भी कि हमारा नजरिया गलत है, _

_ हम उसे सुधारने की कोशिश नहीं करते..

आप अपनी जिंदगी से भले खुश ना हों,

पर कुछ लोग ऐसे भी हैं _ जो आप जैसी जिंदगी जीने के लिए तरसते हैं..

सुख यदि बिना दुख के आए तो सुख की महत्ता नहीं रह जाती ;

_ प्रयास करें कि दोनों का सामंजस्य ऐसा बने की समानता बनी रहे ;

_ ” सुख और दुख का पलड़ा स्थिर रहे “

My Favourites – 2017

सही जीवन कैसे जीना चाहिए ?

अपनी पसंद या जूनून का अनुसरण करें और हमेशा अपने अंतरात्मा की सुनें: आप हमेशा केवल वो ही कार्य करें जिसको आप दिल से करना चाहते हैं, सिर्फ पैसे या दिखावे के लिए कोई कार्य ना करें, जीवन में कई बार ऐसे अवसर आते हैं, जहां आप ये तय कर सकते हैं की वास्तव में आप जिन्दगी में क्या करना चाहते हैं.

” जीवन कठिन नहीं है _ हमारे जीने का तरीका गलत है _ इसलिए हमें जीने का तरीका बदलना होगा “

जीवन में सबसे ज्यादा राग – रंग, विविधताएं, सुन्दरता और संघर्ष वहीँ है,_

_ जिसे हम साधारण जीवन या साधारण जीवन स्थितियां कहते हैं.

ज़िन्दगी एक कैनवास है — उसमे खुशियों के रंग हैं तो परेशानियों के बादल भी हैं, इन बादलों को बारिश की ठण्डी फुहार में बदलें _

_ ताकि, आपके आस पास वालों की ज़िन्दगी में भी ख़ुशी की इस बारिश के छीटें पड़े.

ज्ञान के पथ पर आपके पास सब कुछ है. _ आपके पास सुन्दर ज्ञान है, _ जिसमे जीवन के सभी रंग हैं – – विवेक, हँसी, सेवा, मौन, गाना, नाचना, विनोद, उत्सव, यज्ञ, सहानुभूति

_ और अधिक रंगीन बनाने  के लिए शिकायतें, समस्याएँ, जटिलताएँ तथा गोलमाल ! ! ! जीवन कितना रंगीन है.

अपने आप को एक रंग के रूप में देखें,_ आप हर किसी के पसंदीदा नहीं हो सकते हैं, लेकिन एक दिन आप किसी ऐसे व्यक्ति से मिलेंगे,

_ जिसे अपनी तस्वीर को पूरा करने के लिए आपकी आवश्यकता होगी.

जिंदगी में सकारात्मक आदमी को खोजते रहिए… वो आपको बदल देगा, _ जिस दिन ऐसा आदमी आपको मिलेगा _ आप उसे अपनी याददाश्त से निकाल नही पाएंगे.. कम से कम 15 दिन तो उसी में खोए रहेंगे,

जिस दिन आपकी खोज पूरी हुई आप बदल जायेंगे, कम से कम खुद को बदलने का प्रयास जरूर करेंगे…

मैं उन लोगों से प्यार करता हूं जो मेरे जीवन में हैं और इसे अद्भुत बनाते हैं _ और मैं उन लोगों को धन्यवाद देता हूं _ जो मेरी जिंदगी से दूर हो गये __ और इसे _ और भी शानदार बना दिया..

” उन्होंने इक काम कर दिया मेरा, _ जीना आसान कर दिया मेरा… “

  • ” कुछ लोगों को छोड़ना इसलिए भी ज़रूरी होता है, _

_ अगर आप उन्हें नहीं छोड़ेंगे तो _ वो आप को कहीं का नहीं छोड़ेंगे ! “

“जिन्दगी बहुत छोटी है” इसलिए उनके साथ वक्त बिताओ,_

_ जो आपकी खुशी और जिन्दगी की परवाह करता हो.

अपनी विशिष्टता का सम्मान करें, _ और तुलना छोड़ें ;

_ अपने अस्तित्व में मस्त रहें ..

जीवन एक नाटक के समान है,_

_ लम्बे अभिनय के स्थान पर उत्कृष्ट अभिनय का ही इसमें महत्व है.

अपना ख्याल रखने में बिताया गया समय कभी नष्ट नहीं होता,_

_ बल्कि ऊर्जा के रूप में आपके पास वापस आ जाता है..

आप कभी दूसरे व्यक्ति को नहीं बदल सकते, आप को सिर्फ अपने ऊपर ध्यान लगाना चाहिए _ खुद को बदलने में,

अगर आप खुद को असल में बदलते हैं _ तो लोग क्या परिस्थिति भी अपने आप बदल जाएगी..

अपने बारे में लोगों कि बातों पे ध्यान ना दें, वो अनजान होते हैं _ आपकी निजी ज़िंदगी से _ इसलिए हमेशा सही नहीं होते _ और उससे हमारी ज़िंदगी में कोई फर्क नहीं आना चाहिए..
आप अपने जीवन के साथ जो चाहते हैं वह करें _ लेकिन अगर आप एक बेहतर जीवन बनाते हैं तो लोग आपकी सराहना जरूर करेंगे.
जीवन इतना आसान हो जाता है जब आप खुद के बारे में लोगों को समझाना बंद कर देते हैं, _और वही काम करते हैं जो आपके लिए है.
मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता _ ये दुनिया कैसी है,_ इस दुनिया के लोग कैसे हैं _ मुझे तो बस हर परिस्थिति को मैनेज करना आना चाहिए…
कभी-कभी हमारे जीवन में घटित होने वाली बुरी चीजें _ हमें सीधे उन सर्वोत्तम चीजों की राह पर ले जाती हैं _ जो हमारे साथ कभी भी घटित होंगी.
वह व्यक्ति जिसे वो सब मिल जाता है जो वो चाहता था, _ वह हमेशा शांति और व्यवस्था के पक्ष में होता है.
लोगों से ज्यादा उम्मीद मत रखा करो, वरना हमेशा उदास रहोगे _ और लोगों को जरा भी फ़र्क नहीं पड़ेगा..
” जिस दिन से तथ्य और सत्य समझ़ में आने लगते हैं, _ उसी दिन से जीवन में मौज़ भी आने लगती है,”
जिंदगी छोटी है _ याद रखें, _ जो मायने रखता है उस पर ध्यान केंद्रित करें और जो नहीं है उसे जाने दें.
थोड़ी सी तू अस्त – व्यस्त है….! फिर भी..,”ज़िंदगी”….,,तू ज़बरदस्त है..
ज़िन्दगी तुझमें कशिश तो है, _ ये कशिश जो मुझे तेरी तरफ़ खींचती है.
क्या कहूँ ज़िन्दगी के बारे में, _ एक तमाशा था, _ उम्र भर देखा !
खुद को समझदार समझकर घमंड करने से बेहतर है, _ बेवकूफ दिखकर समझदारी वाले काम करना..
अगर आप अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहते हैं, _

_  _ तो लोगों के मन की नहीं ” अपने मन की सुनो “

  • “- सबसे पहले दिल की सुनिए, दिल सा अपना दूजा ना है, _

_ दिल कहता, सच ही कहता है, _ बाक़ी सब बातें बेमानी. -“

” – अपने दिल की सुनो, _ ओर फिर वही करो _ जो वो कह रहा है ..

_ ये जिंदगी आप की है, _ और किसी की नहीं ..- “

पीछे लौट कर जीवन को समझा जा सकता है. _ परन्तु जीवन जीने के लिए आगे बढ़ना आवश्यक है.
कोई भी व्यक्ति जो सुंदरता को देखने की योग्यता को बनाए रखता है, _ वह कभी भी वृद्ध नहीं होता.
“मैं मंज़िल तक पहुंच जाऊंगा ये उम्मीद है मुझको, _ न तो ठहरा हुआ हूं मैं न ही भटका हुआ हूं मैं…”
मुझे कुछ भी साबित नहीं करना ; _ ” बस अपनी जिंदगी की किताब का “_ लेखक खुद बनना है…
हम भी जानते हैं, मशहूर होने के तौर तरीके, _ पर दिल को जिद्द है,, ” अपने ही अंदाज़ से जीने की “
जा दिखा दुनिया को, मुझको क्या दिखाता है गुरुर.. _ तू समंदर है तो हो, मैं तो मगर प्यासा नहीं…
भागती फिरती थी दुनिया जब तलब करते थे हम, _ छोड़ दिया है इसको – तो बेक़रार आने को है..
अपने आप में और निजी रहें, _ कम महत्वपूर्ण बनें _ विनम्र रहें _ आप सुखी जीवन व्यतीत करेंगे.
“जीवन बहुत नाजुक है, लेकिन आप इसे केवल एक बार जीने देते हैं _ इसलिए सही चुनाव करें “
तेरा ग़म तुझे ही झेलना है, ये दुनिया है ही ऐसी, _ यहाँ कभी आग से तो कभी बर्फ़ से खेलना है !
तुमको क्या पसंद आता है _ इससे तय हो जाता है कि _ तुम्हारी हस्ती झूठ पर खड़ी है या सच पर..
” आप हैं क्या ??? पहले सच्चे से तय कीजिए, _ फिर जैसे भी हो, अपने आप को प्रस्तुत कीजिए,,,,,

_ एक रास्ता यह भी है, मौज़ की मंजिल का “

मन तो चाहता है जीया जाये अपने हिसाब से, _ जिम्मेदारियां कहती हैं वक्त बर्बाद बहुत होगा..
जो सही है उसके लिए खड़े रहें, तब भी जब _ इसका मतलब _ आपको अकेले खड़ा होना पड़े.
आसान नहीं है उस शख्स को समझना ; _ जो जानता सब कुछ हो ; पर बोलता कुछ भी नहीं…
बादलों में हर किसी के वास्ते है _ कोई बूंद ; _ शर्त ये है_ उतनी शिद्दत से कोई प्यासा तो हो.
बहुत से सवालों के हमें जवाब नहीं चाहिए _ ” सुकून चाहिए ज़िंदगी का ” हिसाब नहीं चाहिए.
आपके जीवन में जो कुछ भी अच्छा हुआ है, वह इसलिए हुआ _ ” क्योंकि कुछ बदल गया “
अपनी योजना के अनुसार अपना जीवन जिएं, _ न कि उस अनुसार जो दूसरे आपसे चाहते हैं.
आप जीवन में तब सफल हो सकते हैं _ जब आप जो चाहते हैं उसमें रुचि लेना शुरू कर दें…
कई बार जिंदगी में कोई समस्या होती ही नहीं, _ और हम “विचारों” में उसे बड़ा बना लेते हैं.
समाज तेरी यही कहानी ; _ ज़िंदगी घुट घुट कर बितानी, _ लेकिन नई राह नही अपनानी !
थोड़ी सी ज़िन्दगी अपने लिए बचा के रखना _ ना जाने कब मौत आ जाय !!
जीवन जीने में मज़ा तभी आता है _ जब बाहर का कुछ भी _ तुम पर हावी नहीं हो पाता है.
अगर तुम सच में ही फूलों के प्रेमी हो, _ तो तुम कांटों से भी निबाह करना सीख लोगे..!!
भीड़ में शामिल होना आसान है, _ लेकिन अकेले खड़े होने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए.
एक उबाऊ जीवन जीना बंद करें, _ एक महत्वाकांछी जीवन जीना शुरू करें ..
अगर जिंदगी में किसी तरह का कोई संघर्ष नहीं है, _ तो समझिए की तरक्की भी नहीं है.
सांचे में हमने औरों के ढलने नहीं दिया, _ दिल मोम का था फिर भी पिघलने नहीं दिया.
दायरा हर बार बनाता हूं ज़िंदगी के लिए, _ लकीरें वहीँ रहती हैं _ मैं खिसक जाता हूं..
“सच्चाई और अच्छाई का फल सदैव शुभ एवं सुखद ही होता है, _ नियम भी यही है “.
“सच बोलने की आदत” _ हमें किसी भी परिस्थिति का सामना करने का साहस देती है.
ये जिंदगी, तमन्नाओं का गुलदस्ता ही तो हो, _ कुछ महकती है, और कुछ मुरझाती है.
मेरी एक औऱ दुनिया है, _ जहां मैं खुद लिखता हूँ, पढ़ता हूँ, औऱ खुश भी रह लेता हूँ..
जिसे कभी जीना आया नहीं, तुम उसी की बातें करते रहो _ “मैं प्रेम वश सुनता रहूंगा”
अधिक ध्यान उस पर दें, जो आपके पास है, _ उस पर नहीं जो, आपके पास नहीं है.
हमें खुद अपने सितारे तलाशने होंगे, _ ये एक जुगनू ने समझा दिया चमक के मुझे..
एक ऐसा जीवन बनाएं जो अंदर से अच्छा लगे, न कि ऐसा जो बाहर से अच्छा लगे.
मेरे हालात तय नहीं करेंगे की मैं कैसा हूँ, _ मैं तय करूँगा की मेरे हालात कैसे होंगे..
जो अपनी जिंदगी में संतुष्ट नहीं है, _ वही दूसरों की जिंदगी में ताक झाँक करता है..
अपने दिल की सुनिए _ उसे पता होता है की _ आप सच में क्या बनना चाहते हैं.
जो जीवन को पढ़ना जानता है, _ उनके लिए जीवन स्वयं सत्य उजागर करता है.
दिमाग से मत हारना _ फिर ना कोई घटना तोड़ सकेगी _ ना कोई हरा पायेगा…
किसी चिन्ता को दूर करने के लिए किसी फैसले पर पहुँचना बहुत जरुरी होता है.
कोशिश ऐसी करनी चाहिए की हारते हारते, _कब जीत जाओ पता भी ना चले.
जो व्यक्ति थोड़े में भी खुश रहता है _सबसे अधिक ख़ुशी उसी के पास होती है.
कुछ गलत लोगों से तू खुद हमें दूर कर देता है, ताकि हमारी ज़िंदगी खराब न हो.
खो देते हैं,..फिर..’खोजा’ करते हैं….यही खेल हम, ज़िन्दगी भर खेला करते हैं!
अपने आप से प्यार करें, जीवन की हर हलचल का आनंद लें, जीवन अद्भुत है.
बहुत कुछ खोना पड़ता है जिंदगी में, _ तब जाकर खुद से मुलाकात होती है..
जमाने में उसने बड़ी बात कर ली.._ खुद अपने से जिसने मुलाकात कर ली…
ज़िन्दगी वो नहीं जिसमें ऐशो आराम हों, _ ज़िन्दगी वो है जिसमें संतुष्टि हो.
दूसरों से बेहतर होने की चिंता न करें, _ खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दें.
जीवन वास्तव में सरल है, _ लेकिन हम इसे जटिल बनाने पर जोर देते हैं.
मैं जीवन से प्यार करता हूँ, _ क्योंकि इसके अलावा और है ही क्या !!
भीड़ से भागा हुआ हूं साहब, _ बड़ी मुश्किल से जाना कि मैं _ कौन हूं .!
अपना मार्ग स्वयं तय करना, _ मतलब जीवन को जीवंतता से भर देना.
उगते हुए सूरज से मिलाते हैं हम निगाहें, _ बीते हुए कल का मातम नहीं मनाते..
ज़िंदगी बहुत छोटी है यारों _ इसे और छोटी बनाने की जरुरत क्या है !
ज़माने में सब ज़िन्दगी यूँ गुज़ारें, _ गुलिस्तां में रहती हैं जैसे बहारें ..
आपने जो कुछ भी खोया है, _ उसके लिए आपने कुछ और पाया है.
ज्यादा दूर देखने की चाहत में, _ बहोत कुछ पास से गुज़र जाता है !!
जीवन एक आइसक्रीम है, _ पिघलने से पहले इसका पूरा आनंद लें.
ज़िन्दगी बड़ी तुनुक मिज़ाज है, _ छोटी-छोटी बातों पर रूठ जाती है.
सफल होने के लिए नहीं _ बल्कि मूल्यवान बनने का प्रयास करें.
जीवन सरल और सुन्दर है, _ जब तक हम स्वयं इसे उलझा न दें.
आगे का इतना भी मत सोचो कि _ अब का मज़ा ना ले पाओ !!
अतीत से ज़ख्म नहीं लिए जाते, _ अतीत से सीख ली जाती है.
बाहर से शांत दिखने के लिए _ अंदर से बहुत लड़ना पड़ता है !
रुठ जाते हैं बे’वजह ख़ुद से, _ ज़िन्दगी कब उदास करती है !!
जीवन में सरल चीजों का आनंद लेने के लिए समय निकालें..
मिट्टी का तन मस्ती का मन, _ छण भर जीवन मेरा परिचय…
” कल उन लोगों का है _ जो आज इसकी तैयारी करते हैं “
कितना सरल हो जाता है जीवन, _ जब विकल्प नहीं रहते..
सिर्फ अपना ख़याल रखना था, _ ये भी ना हो सका हमसे..
एक दिन सच बोलना पड़ेगा _ नहीं तो दम घुट जाएगा…
” खुद को खुश रखिए,” यह भी एक बड़ी जिम्मेदारी है…
जैसी हमारी सोच होती है, _ वैसा ही हम जीवन जीते हैं..
तार तार को _ सितार बनाने के हुनर का नाम ज़िंदगी है.
थोड़े में भी पूरी तरह से जीना _ सबसे बड़ी दौलत है…
अच्छे के साथ बुरा भी_ उसके अच्छे के लिए होता है.
स्वयं को जीतना ही पहली और सबसे अच्छी जीत है.
ज़िन्दगी खूबसूरत है, _ तुम जीने की तो ठानो …!!!
ज़िंदगी जी लीजिए, _  _वरना गुजर जाएगी …!!!!
हर सुख अपने साथ _ अपने ढंग का दुख लाता है !
महंगी है ये ज़िंदगी _ अब कोई छोटा सौदा नहीं…
जो अन्दर से साफ है, _ वही बाहर से चमकता है..
” अच्छी चर्चा करना _ धनवान होने के समान है “
जीवन …… मन जहाँ से रम जाये _ वही जीवन….
वाकई दुखी होते हम, _ तो दुख छोड़ न देते ?
सच्चे लोग अपनी सरलता और पवित्रता में संतुष्ट रहते हैं, वे किसी को भी_

_प्रभावित करने की कोशिश नहीं करते, _ ” क्योंकि वे जानते हैं कि वे कौन हैं “

जब हम खुद अपनी जिंदगी को बेशकीमती समझेंगे _ तभी यह दूसरों की नजर में भी मूल्यवान होगी..!!!

दूसरे शब्दों में – जब जीवनमूल्य निर्धारण स्वयं के हाथ है तो फिर क्यों न इसे अमूल्य समझा जाय…!!!..??

यदि हम अपने आप को केवल आजीविका के लिए तैयार करते हैं तो, _हमारे जीवन का

_  कोई मतलब ही नहीं रह जाता, जीवन को समझना कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है.

अब हार तुम सकते नहीं, यह नियति को संदेश दे दो _

_ हारेगा अब से ” हार ” भी, तुम ऐसा संकल्प ले लो !!

जज़्बातों में बह कर खुद को किसी के अधीन मत कीजिए,

खुदा और खुद के अलावा _ किसी पर यक़ीन मत कीजिए..

रास आ जाए जिस पंछी को _ सोने के पिंजरे का जीवन _

उन पंखों के लिए _ कोई आकाश नहीं होता है..

मैं रोज़ रोज़ _ तबस्सुम { मुस्कान } में छुपता फिरता हूँ,

उदासी है कि मुझे रोज़ ढूंढ लेती है..

जब भी मिलती है मुझे, अजनबी लगती है __

ज़िन्दगी रोज़ नए रंग _ बदलती है ..

ज़िन्दगी वही है, जो जी रहे हैँ ; _

_ ये करेंगे वो करेंगे, ये तो ख्वाब हैँ !!!

तुम अगर खुश हो तो शोर मत मचाओ.,_

_ क्योंकि उदासियाँ _ कच्ची नींद सोती हैं..

स्वस्थ और बुद्धिमान लोग हमें कम ही मिलेंगे,

हम ऐसे लोगों के साथ घिरे हुए हैं, जो एक नशे में जीवन को जी रहे हैं.

” ऊपर वाला जो करता है अच्छे के लिए ही करता है,”_ ये बात हमे

तब महसूस होती है, जब हमारे साथ बुरा होने के बाद अच्छा होने लगता है.

” – कभी कभी कुछ काम का न होना _ कुछ अच्छे का होना होता है, _ काम न होना भी शुभ है -“

जब रब को आपसे प्रेम होता है ना, तो वो उन तमाम लोगों को

आपसे दूर कर देता है,,,……जो आपके काबिल नहीं होते…

तुझे सब पता होते हुए भी … यार

फिर क्यों मिलवाता है _ _ दर्द देने वालों से !!!

यदि एक छोटा सा बीज एक बड़े से पेड़ को जन्म दे सकता है, तो जरा सोच कर देखो कि

हमारा एक छोटा नेक विचार हमारे जीवन में कितनी खुशियों को जन्म दे सकता है.

खुद को बदलने का सबसे तेज तरीका है, उन लोगों के साथ रहना _

_ जो पहले से ही उस रस्ते पर हैं, जिस पर आप जाना चाहते हैं.

-” जिनकी संगति से जीवन कीमती बने उनकी संगति करनी चाहिए “

जिंदगी को समझो तो खुशियां_ नही तो गम का दरिया है,_

_ सुख और दुख कुछ भी नही _अपना अपना नजरिया है..

थोड़ी सी ज़िन्दगी में, कैद ना किया कर, ख़ुशियों के बादल ;_

_ वजह,,,,,बेवजह,,,,,, खुल के मुस्कुराया कर !!!!

घोंसला बनाने में….हम यूँ मशगूल हो गए …!

की उड़ने को पंख भी थे…. ये भी भूल गए…!!!

छोटी छोटी बातों में.. जीने का मज़ा छुपा होता है…

ख्वाहिशें तो बस ___ जीना दुश्वार करती हैं….

कभी कभी _ मन को मना लेना ही बेहतर होता है..

हर जिद _ हमें खुशी नहीं देती..

लगी है प्यास _ चलो रेत निचोड़ी जाए..

अपने हिस्से में _ समन्दर नहीं आना वाला…

रुला ले जितना रूला सकती है ए जिंदगी, _

_ हमने भी तुम्हे हँस कर गुजारने की ज़िद ठानी है !!

खुशियां उगे न खेत में, मिले न हाट बाजार ..!

अपने अंदर ढूंढ लो, भरा अतुल भण्डार …!!

छोड़ दिया किसी और के खयालो में रहना,

हम अब लोगों से नहीं _ खुद से इश्क़ करते हैं .!

ज़िंदगी अपने हिसाब से जियो यारों ;

लोगों के हिसाब से जियोगे तो _ ना अपने रहोगे _ ना लोगों के !

जीवन उसी का मस्त है, जो स्वयं के कार्य मेँ व्यस्त है ;_

_ परेशान वही है जो, दुसरों की ख़ुशियों से त्रस्त है !!

जो तराशता है उसे खूबी दिखेगी..

जो तलाशता है उसे कमी दिखेगी !!

हमने खुद को, _ खुद ही तराशा है..

वर्ना _ बीत जाती ज़िंदगी,_ जौहरी को ढूँढने मे….!!

अपने – आप को, ‘ मुकम्मल, कर लो तो,_

_ फिर सब ‘ मुकम्मल, हो जाता है “

ज़िन्दगी वह नहीं जो तुम्हें मिली है, _

_ ज़िन्दगी वो है जो तुमने बनाई है !!!

जो मुझे समझ न सका _ उसे हक है _ मुझे बुरा कहने का ;

जो मुझे जान लेता है _ वह मुझ पर जान देता है..

कायनात का अपना एक संगीत है, उनके लिए जो इसको सुन सकते हैं.

“Earth” has music for those who listen.

जिंदगी में कुछ चीजों को, कुछ बातों को और कुछ लोगों को जाने दीजिए,

तभी तो अच्छी चीजों, अच्छी बातों और अच्छे लोगों के लिए जगह हो पाएगी.

जीवन के सारे दुःखों की जड़ ‘चाह’ है. ‘चाह’ नजर बाहर घुमाने से पैदा होती है,

यानी जिसकी नजर सिर्फ अपने पर बनी हुई हो वह कभी दुःखी नहीं होता.

“आप जानते हैं कि आप किससे प्यार करते हैं _

_ लेकिन आप यह नहीं जान सकते कि कौन आपसे प्यार करता है..

जो सोचते हैं वो हो नहीं पाता, _

_ क्योंकि जो जरुरी है _ वो कोई समझ ही नहीं पाता !!

यदि आप फूल उगाने की जगह… _ काँटे साफ करना चुनोगे…

तब भी आप _ संसार को उतना ही सुंदर बनाओगे….

ज़िंदगी ने तो बहुत मौके दिए, दौलत के पहाड़ खड़े करने के,

लेकिन मेरी ज़िद थी, खुद की गहराइयों में उतरने की,”

इतनी उम्र बीतने के बाद मुझे यह समझ में आ गया है कि परिवर्तन को रोका नहीं जा सकता,

_ अगर वह अच्छे के लिए हो रहा है, _ तो हमें बाहें फैला कर उसका स्वागत करना चाहिए..

साहसी मनुष्य की पहली पहचान यह है कि_ वह इस बात की चिन्ता नहीं करता_

_ कि तमाशा देखने वाले लोग उसके बारे में क्या सोच रहे हैं.

गलतियाँ, असफलताएँ, अपमान, निराशा, अस्वीकृति और प्रगति विकास का हिस्सा हैं, _

_ इनका सामना किए बिना _ किसी ने कुछ भी हासिल नहीं किया है ..

हम खुशियां मनाने के लिए त्योहारों का इंतजार क्यों करते हैं. आज जब मैं अपने आस- पास की दुनिया देखता हूँ, मेरी उम्र के लोग या बाकि भी लोग पुराने नियम- कानूनों में सिमटे रहना चाहते हैं.

ये लोग हर बदलाव को डर की नजर से देखते हैं. लेकिन होना ये चाहिए कि हमें जिन्दगी के हर पल का लुत्फ उठाना चाहिए.

यह कभी मत सोचो कि तुम दूसरों की तरह क्यों नहीं हो, _ इस तरह जियो कि तुम दूसरों को यह सोचने पर मजबूर कर दो कि

_ वे तुम्हारे जैसे क्यों नहीं हैं_ ” यही जीवन जीने का वास्तविक दृष्टिकोण है “

उस आदमी को कोई नहीं हरा सकता _ जो अकेले, आत्मविश्वास के साथ,

_ बाधाओं, गरीबी, दुर्भाग्य और कठिनाइयों के खिलाफ संघर्ष करने के लिए तैयार है.

जिंदगी एक खूबसूरत रेलगाड़ी की तरह है,_ मीलों का सफर और यादों से भरी _

_ कुल्हड़वाली चाय की तरह, _ ” जिसका जायका जिंदगी नहीं भूलती “

इसमें संदेह नहीं कि ज़िन्दगी मुश्किलों से भरी है ;

लेकिन इसकी मेहरबानियाँ भी कम नहीं _  ” शुक्रिया करते चलो इसका “

ज़िंदगी अपनी ख़ुद की है, इसे तो पूरी शिद्दत से जीना चाहिये.

लोगों का आना-जाना लगा रहता है,_  ख़ुद के साथ रहना आना चाहिये.

यह दुनिया बिलकुल वैसी ही है, जैसा आप देखना चाहते हैं

चाहें तो कीचड़ में कमल देख लो, चाहे देख लो चाँद पर दाग.

आप जो नहीं हैं उसके लिए खुद से नफरत करना बंद करें _

_ और जो कुछ भी आप पहले से हैं _ उसके लिए खुद से प्यार करना शुरू करें.

आपकी अपनी खुशी का कारण कोई नहीं है – आपके अलावा, आप स्वयं हैं _

_ बाहर की दुनिया में शांति, संतोष और आनंद की तलाश में अपना समय और प्रयास बर्बाद न करें.

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” आनंद सदैव न हो तो आनंद नहीं है ” _ दुख आता है, जाता है। सुख भी आता है, जाता है।

” जो न आता कभी और जो न कभी जाता है, उसका नाम ही आनंद है ” जो हमारा स्वभाव है, स्वरूप है.

और जो व्यक्ति भी इस भीतर के स्वरूप में थिर हो जाता है, आनंद को उपलब्ध हो जाता है, स्वयं में स्थित हो जाता है.

प्रकृति में हर ओर आनन्द ही आनन्द फैला पड़ा है,

लेकिन हमारा ध्यान केवल अपने अभावों और दूसरों की समृद्धि पर लगा रहता है.

जिस जीवन में आप बहे जा रहे हैं, अगर वहाँ आनंद उपलब्ध नहीं होता है,

_ तो जानना चाहिए _ आप गलत बहे जा रहे हैं.

” सुख दुःख साझ़ा किया जा सकता है _ आनंद साझ़ा कभी नहीं होता,

_ आनंद तो पूर्णतः व्यक्तिगत अनुभूति है, “

जो सुख की तरफ जाता है _ वह दुख पाता है,

_ जो आनंद की तरफ जाता है _ वह सुख पाता है..

यदि आप नेक दिल हैं तो _ आपके आस- पास के लोग अवश्य ही आनंद का अनुभव करेंगे.
जो व्यक्ति अपने साथ बहुत आनंद अनुभव करता है, _ दूसरे उसके साथ बड़ा आनंद पाएँगे.
वास्तविक आनंद मन की वह अवस्था है,_ _जिसमें आनंद का ख़याल भी नहीं रहता.
जो स्वयं में आनंदित होगा _ उसे किसी की भी पीड़ा बहुत जल्द दिखाई पड़ती है.
हर एक इंसान का नजरिया अलग होता है, _ पर तलाश तो आनंद ही होता है..
कुदरत ने तो…आनंद ही आनंद दिया था,  __ दुःख तो…हमारी खोज है.
आनंद कदम – कदम पर है,_ बात बस इतनी कि हम कैसे जीते हैं.
” आनंद क्या है ” ? स्वयं से मुक्त होने पर मन का उत्सव.
जो आदमी आनंद में है _ वह सुख नहीं चाहता है.

My Favourites – पगला – 2016

खुद की क्या पहचान बताऊं* कुछ भी तो नहीं हूं मैं* बस इतना कह सकता हूं * खुदा की छोटी सी रहमत हूं मै*

जो समझे मुझे, वो एक नाम दे ,दे* जो ना समझे वो पागल कह दे*

क्यों थक रहे हो मुझे पागल साबित करने में, _ मैं तो खुद कहता हूँ कि मैं पगला हूँ..
किसी की बात को ले कर ज्यादा परेशान या ज्यादा खुश ना हों ;

क्योंकि चाहे वो ख़ुशी के दिन हों या दुख के, दिन गुजर जाते हैं ;

लेकिन हर परिस्थिति में एक जैसे रहने वाले लोगों की अलग ही पहचान होती है..

थोड़ी मस्ती थोड़ा सा ईमान बचा पाया हूँ,_

_ ये क्या कम है मैं अपनी पहचान बचा पाया हूँ..

यदि आपकी भूमिका दर्पण की है तो आप दर्पण बने रहो _

_ चिंता उन्हें करने दो जिनकी सूरतें ख़राब हैं, आप अपनी अच्छाईयों पर कायम रहें.

एक बार किसी ने मुझसे पूछा ” तुम कठिन रास्ते पर चलने की ज़िद क्यों करते हो ? “

_ मैंने जवाब दिया — आप ऐसा क्यों मानते हैं कि मुझे दो रास्ते दिखाई दे रहे हैं !!

किसको किसको समझाते फिरोगे _ सोचने दो जिसे जो सोचना है,

लोग उतना ही सोचेंगे _ जितना उनका मानसिक विस्तार है !!

हम तो चीनी की तरह हैं जनाब ; _ चाहे चाय में मिला लो

या शर्बत बना लो, _ ” बस ज़िन्दगी में मिठास भर देंगे.”

जिनको अपनी जड़ों पर भरोसा होता है ,_

_ वो पत्तियों के गिरने पर अफ़सोस नहीं करते !!

” पढ़ना ” भरना है, ” लिखना ” छलकना है _

_ बिना भरे आप, छलक ही नहीं सकते ..

ज़िन्दगी के चंद लम्हे खुद की खातिर भी रखो,_

_ भीड़ में ज्यादा रहे तो खुद ही गुम हो जाओगे.

जिसने खुद से दोस्ती कर ली, वो कभी अकेला नहीं होता,_

_ ना किसी के आने की खुशी, ना किसी के जाने का गम..

कभी किसी पर आँख बंद कर के भरोसा मत करो, _ क्योंकि

_ दुनिया इतनी अच्छी नहीं है कि, आप के भरोसे को कायम रक्खे ..

किसी के सामने हाथ ना जोड़ें साथ रहने के लिए, _

_ जो अच्छे इंसान होंगे _ वह आप की कीमत समझ जाएंगे..!

जो आप को सही लगे, उस के बारे में माफ़ी मांगने से रुकें, _

_ अपनी बात का बचाव करना शुरू करें .!

नामुमकिन है सबको खुश रखना इस जहाँ में, _

_ दिया जलाते ही अंधेरा रूठ जाता है..

हर बात का जवाब देने बैठ जाएंगे तो _

_ कभी लाजवाब नहीं बन पाएंगे ..

खुद से भी खुल के नहीं मिलते हम, _

_ आप क्या ख़ाक जानते हो हमें !!

मजबूर नहीं करेंगे तुम्हें बात करने के लिए, _

_ चाहत होती तो मन तुम्हारा भी करता ..!!

संभव क्या असंभव क्या, ये तो एक आडम्बर है._

_ पहचानो उस शक्ति को, जो छुपी तुम्हारे अंदर है.

तू मेरी कद्र करता भी तो कैसे.. _

_ मैं तुझे आसानी से हासिल जो हो गया था…

” — मुफ़्त में मिल गए हम उन्हें _ जिनकी औकात में भी नहीं थे !! –“

शायद अब वक़्त आ चुका है की _ मैं ज़िन्दगी में आगे बढ़ जाऊँ,_

और उन लोगों को ज़िन्दगी से अलग कर दूँ _ ” जिनके लिए मेरा होना ना होना बराबर है.”

जो सिरफिरे होते हैं वही इतिहास लिखते हैं,

_ समझदार लोग तो सिर्फ उनके बारे में पढ़ते हैं

मेरे पाँव के छालों ! जरा लहू उगलो _

_ सिरफिरे मुझसे _ सफर के निशान मांगेंगे !!

पांवों के लड़खड़ाने पे तो सबकी है नज़र,_

_ सर पे कितना बोझ है, कोई देखता नहीं !!

सुर्ख़ियों में हैं हमारी कामयाबी के चर्चे जनाब, _

_ कोई हम से पूछे, सफर कितना तकलीफ- देह- रहा ..!!

#परख से परे है… ये #शख्शियत मेरी…

मैं उन्हीं के लिए #हूं जो समझे #कदर मेरी…

जुबां से कम आँखों से ज्यादा बोलता हूँ मैं, _

_ जिंदगी को अपने ही तरीके से जीता हूँ मैं ..

ज़िन्दगी को आज में जीता हूँ मैं, _

_ इसलिए परेशान नहीं रहता हूँ मैं ..

इससे क्या फ़र्क पड़ता है कि हम कैसे हैं,_

_ जिसने जैसी राय बना ली उसके लिए तो वैसे हैं.

सबकी नज़र में नहीं मुमकिन, बेगुनाह रहना _

_ कोशिश करें, कि अपनी नज़र में बेदाग रहें !

मुझे अपने बारे में पता है ,,, मेरे लिए यही काफी है.

लोग क्या सोचते हैं मुझे इससे फर्क नही पड़ता..

कुछ लोग मुझे गलत समझते हैं तो मुझे बुरा नहीं लगता,

क्योंकि वो मुझे उतना ही समझते हैं जितनी उनमें समझ है…

रहूं जो दर्द में, _ कोई खबर तक नही लेता,

लिखूं जो दर्द तो, _ सभी वाह वाह करते हैं..!!

दुनिया देखते ही देखते __ बेगैरत हो गई !

हम ज़रा से क्या बदले __ सब को हैरत हो गई !!

ज्ञान से मतलब है लोगों की मूर्खता से दूरी,,,लोगों से नहीं_

_ रहना तो लोगों के बीच में ही है,,,लेकिन अब समझदार बन के रहेंगे.

लोगों को यह दिख जाता है कि हम बदल गए हैं,

लेकिन यह नहीं दिखता कि हमें उनकी किस बात ने बदल डाला.

अगर आप किसी को दिल से चाहो और वह आप की कदर ना करे _

_ तो यह उस की बदकिस्मती है आप की नहीं ..

यदि आप से कोई कहे कि आप बदल गये हो तो _ इसका मतलब ये है कि

_ अब आप वो नहीं करते ” जो उन को पसंद है “

मेरे क़दमों से बेहतर कौन जानता है, मेरे सफर का हाल, _

_ मंजिल का पता नहीं, पर रास्ते बहुत देख लिये..

हवाओं ने कोशिशें तो बहुत की थी उसे बुझाने की,_

_ वो कमबख्त हवाओं को भी मात दिए जा रहा था !!

उन्हें लग रहा है, वो आसानी से डूबा देंगे मुझे,_

_ उन्हें क्या मालूम बाज़ सा, उड़ता जा रहा हूँ मैं !!

मेरे मिजाज का कसूर नहीं कोई,_

_ तेरे सुलूक ने ही लहजा बदल दिया मेरा !!

जुल्म के सारे हुनर हम पर यूँ आज़माते गये,

ज़ुल्म भी सहा हमने _ और ज़ालिम भी कहलाते गये..

वो एहसास करा रहे थे हमें _ अपने पराए होने का..

हमने भी छोड़ दिया हक जताना _ अपने होने का…

मुझे ढूँढने कि कोशिश अब न किया कर,

तुने रास्ता बदला तो मैंने मंज़िल बदल ली..

मगरुर हूं मैं अपने ही किरदार पर _

_ कोई तुम सा नही तो कोई मुझ सा भी कहां है…

जैसा आपको चाहिए _ आप वहीं ढूंढिए,

_ हम तो गलत इंसान है, आप सही ढूंढिए.

खिलाफ़ कोई भी हो, अब फर्क़ नहीं पड़ता ;

जिनका साथ है, वो लाजवाब हैं.

ख़ुद की तलाश में अब मैं निकल गया हूँ, _

_ शायद इसलिए ही अब मैं बदल गया हूँ ..

अपनी ही धुन में रहो तो अच्छा है, _

_ दुनिया का क्या पता ,,…,, कब बदल जाए…

मुझे अपनी मस्ती में रहना पसंद है, _

_ लोग इसको गुरुर समझते हैं, तो इसमें मेरा क्या कसूर…

मत करो मुझे खुद में शामिल, _

_ मैं हर किसी को नहीं होता हासिल ..!!

मैं अधिक लोगों को अपने करीब नहीं आने देता …

_ ये मेरा अहंकार नहीं परन्तु मेरी आत्मसम्मान की रक्षा शैली है…!!!

इस दुनिया मेँ सब कुछ एक जैसा नहीं चलता,_

_ कुछ आप के खिलाफ तो कुछ आप के साथ चलता है..

अपने गिरने से लेकर उठने तक की कहानी इन पन्नों में उतारी है,

आप तो सिर्फ सुनते हैं, हमने सच में ऐसी जिंदगी गुजारी है..

ज़िंदगी के समंदर में कभी झांक कर देखिए जनाब, _

_ यादों की कश्ती का, एक हसीन काफिला मिलेगा ..!!

मकड़ी जैसे मत उलझो तुम गम के ताने बाने में,_

_ तितली जैसे रंग बिखेरो हँस कर इस ज़माने में..

किनके सामने आजतक अपने दुःख – सुख लिख रहा था पगले,

यहां सभी के सभी पत्थरों के बने हैं…!!!

जो बातें ; जो यादें ; जो शख्स ; आप को खुश रहने या आगे बढ़ने से रोके :_

_ ” उसे जीवन से निकाल दें ” और कदम बढ़ायें उन्नति की ओर !!!

किसी का दिल जीतने के लिए खुद को मत बदलो, सच्चे रहें,_

_ आपको कोई ऐसा व्यक्ति मिलेगा जो आपको पसंद करता है.

खुद से ही खुश हूँ और खुद से ही नाराज़ हूँ… _ पुरानी यादों को भूल गया, अब नया आगाज़ हूँ..
खुद की तबाही वहीँ से शुरू हो जाती है _ जब हम सब को खुश रखने की कोशिश करते हैं !!
बहुत काम कर लिया, दूसरों के लिए, _ अब अपने लिए कुछ करने जा रहे हैं !!
वो हमें दफ़ना देना चाहते हैं, _ पर वे नहीं जानते कि हम बीज हैं.
अपनी दुनियां वही बदलता है, _ जो दुनियां से नहीं डरता है …!!
मत किया करो इतनी उम्मीदें लोगों से _ हर किसी की अपनी एक अलग दुनिया है !!
वो लोग जो ऐसा कहते हैं कि सामने वाला हमसे बात नहीं करता या घमंडी हो चुका है,

इन लोगों में से 95 % लोग खुद घमंडी ही होते हैं.

बेवजह दूरी बनाई तो _ आवाज़ दे कर मैं भी ना बुलाऊंगा, _

_ तुम दो कदम पीछे हटे तो _ तो मैं दस कदम पीछे हट जाऊंगा ..

ज़ोर ज़ोर से हंसने वाला भी, उस दिन रो देता है, _

_ जब बेहतरीन की तलाश में वो, बेहतर को खो देता है !!

माना की अनमोल और नायाब हो तुम, _

_ मगर हम भी वो हैं _ जो हर दहलीज पर नहीं मिलते.!!!

नहीं मिलेगा तुझे कोई मुझ- सा, _

_ जा इजाजत है ज़माना आजमा ले !!

रोज रोज ग़म उठाने से यही बेहतर है,,, _

_ किनारा कर लिया जाये,_ किनारा करने वालों से..

जैसा हूँ वैसा नज़र आता हूँ, _ दिखावे मुझसे नहीं होते..!
आप से दूर जाने वाले लोग आप की व्यथा नहीं _ अपना स्वार्थ देखते हैं !!!
कामयाबी की मिठाई मांगने वाले, _ तकलीफ में कहीं नजर नहीं आते !!
यदि आप मुझे पसंद नहीं करते हैं तो कोई बात नहीं,_ हर किसी का स्वाद अच्छा नहीं होता.
छोड़ दिए वो रास्ते, _ जिस पर सिर्फ़ मतलबी लोग मिला करते थे !!
फासले जब महसूस होने लगें _ तो हकीकत में बना ही लेने चाहिए !!
यदि कोई समय निकाल कर आप का काम करने में मदद कर रहा हो,

तो उसे ” जल्दी करो ” कभी ना कहें ..

“उन लोगों का ध्यान रखें _ जो आपकी परवाह करते हैं,

वे वही हैं _ जिन पर आप अच्छे और बुरे समय में भरोसा कर सकते हैं “

“- उन अच्छे लोगों पर ध्यान दीजिये _ जो आपके जीवन में बने रहने का प्रयास करते हैं !”

ज़िक्र ज़रूरी नहीं, फ़िक्र किया करो,__ कद्र करने वालों की, कद्र किया करो ..

” – फ़िक्र करने वालों को तो _ आपको ही पहचानना होगा – “

कितने हसीन लोग हैं मेरे आस – पास, _

_ मैंने बेवज़ह ही, बेकद्रों पर अपना वक़्त गँवाया ..

बेकद्रों को देकर बर्बाद किया मैंने अपना वक़्त, _

_ अगर खुद को देता तो अच्छा होता..

जहां कद्र ना हो, वहां खुद को मत बिखेरिये._

_ बेकद्रों को हीरा भी कांच ही नजर आता है..

कद्र कीजिए हमारी ख़ामोशी की, _

_ हम अपनी औकात छिपाए रखते हैं ..!!

उन लोगों से तो दूरियां ही अच्छी हैं, _

_ जिन्होंने नजदीकियों की कभी कदर नहीं की ..

बेक़दर होकर भी हम उनकी क़दर करते हैं,

हम ही जानते हैं हम कितना सब्र करते हैं ..

अफ़सोस रहेगा उम्र भर _ _

_ कि कुछ बेगैरत अपनों के लिए _ सच्चे यार गवां दिए ..

हर इंसान को उसकी वास्तविकता पता होती है,_वो चाहे बाहर कितना भी दिखावा कर ले..
अच्छाई को कोई नहीं समझता _ इसलिए _ कोई बुरा समझे तो _ अब फर्क नहीं पड़ता..
लोगों के बदलने जैसी कोई बात नहीं है…_ आप उन्हें सिर्फ बेहतर तरीके से जान पाते हैं…
लोग नहीं बदलते, _ _बस समय __ उनके चेहरे के __ असली रंग बता देता है_….!!!!
पता नही सुधर गया या बिगड़ गया हूँ मैं _ क्योंकि अब किसी से बहस नही करता हूँ मैं..!
अकेले खड़े रहना उन लोगों के साथ खड़े होने से बेहतर है _ जो आपको चोट पहुँचाते हैं.
कुछ लोग कहते हैं की बदल गये हैं हम, _ उनको ये नहीं पता की संभल गये हैं अब हम..
कोई आज तो कोई कल बदलते हैं _ यकीन करो सब के सब बदलते हैं..
जो स्वयं को सम्मान नही देता, _ उसे दूसरा कोई क्यों सम्मान देगा !!
दूसरों की जिंदगी में अपनी जगह ढूंढ़ना बंद कर दो ,,,,” खुश रहोगे “
मैं जिन्दा रखे हुए हुँ _ हर उन खूबियों को ,,!! _ जो मेरे वजूद को जिन्दा रखे हुए है !!
मिजाज हमारा भी कुछ- कुछ समन्दर के पानी जैसा है, _ खारे हैं… मगर खरे हैं…. !!!
माना कि बहुत कीमती है वक़्त तेरा “मगर” हम भी नवाब हैं, _ बार- बार नहीं मिलेंगे.
सभी को बदतमीज सा नजर आता हूँ _ पर यारों,,, मुझे होश में आए अरसा हो गया..
जो लोग आपको अच्छे से जानते नहीं, _ उनकी बातों को दिल पर लेना बेवकूफ़ी है.
जिसे तुम आम समझ कर छोड़ देते हो, _ कोई उसे ख़ास समझ कर अपना लेता है !
हवा के रुख ने करवट क्या ली, _ तुमने तो अपने जलवे दिखाने शुरू कर दिए .!!!
परख ना सकोगे ऐसी शख्सियत है मेरी, _ मैं उन्हीं के लिए हूं जो जाने कदर मेरी!!
खो कर फिर तुम हमें पा ना सकोगे… _ हम वहां मिलेंगे जहाँ तुम आ ना सकोगे…
जीवन तब आसान हो जाता है _जब आप उससे नकारात्मक लोगों को हटा देते हैं.
जीवन आसान हो जाता है  _ जब आप इसमें से अनावश्यक लोगों को हटा देते हैं.
मेरी फितरत से अनजान हैं वो _ मैंने जिसे छोड़ा दिया, उसे मुड़ कर नहीं देखा है.॥
सहन करने की हिम्मत रखता हूँ तो, _ तबाह करने का हौसला भी रखता हूँ..!!
हम क्या जानें दुख की कीमत, _ हमको सारे मुफ्त में मिले हैं !!
मैं कूड़े कचरे के इलाकों में रह सकता हूँ _ परंतु गंदे लोगों के साथ नहीं रह सकता.

” गंदे लोगों को अपनी जिंदगी से निकाल दीजिए -“

आज़ाद कर दिया मैंने उन सभी को… _ जिन्हें शिकायत थी की मैं स्वार्थी हूँ…!!!
मेरे अपनों से मेरे अंदाज़ नहीं मिलते, _ खून मिलता है ख़यालात नहीं मिलते !!
एक ही दिन में पढ़ लोगे क्या मुझे, _ मैंने खुद को लिखने में कई साल लगाए हैं.
तिनका तिनका संवारा है मैंने ख़ुद को, _ ये मत कह देना तुम जैसे बहुत मिलेंगे…
एक दिन ऐसा भी आएगा _ की तुम याद भी करोगे और मिल भी नहीं पाओगे !!!
हम अपना वक़्त बर्बाद नहीं करते _ जो हमें भूल गया _ हम उसे याद नहीं करते..
अगर लगता है तुम्हें गलत हूँ मैं __ तो सही हो तुम, _ क्योंकि थोड़ा अलग हूँ मैं..
दूसरों को ख़ुश रखना तो आता है हमें, _ अब से ख़ुद को ख़ुश रखना सीखते हैं.!!
मेरी फितरत में नहीं था तमाशा करना, _ बहुत कुछ जानते थे मगर ख़ामोश रहे .!
समझौता नहीं करना चाहिए _ अगर खुद के वजूद पर ऊँगली उठने लगे तो .!!
मैं किसी से वादा नही करता, _ अगर कह दिया तो जिंदगी भर साथ निभाउंगा.
मुझे ज़रा सोच समझ कर परखना…_ मैं आवारा जरूर हूँ पर अंधा नहीं हूँ…!!!
वक्त के साथ लोग बिछड़ गये, _ फायदा ये हुआ कि हम जीना सीख गये…
एक अच्छे इंसान से धोखा करना, _ हीरे को फेंक कर पत्थर उठाने जैसा है..
मुझे समझना तेरे वश की बात नहीं,,,सोच बुलंद कर _ या सोचना छोड़ दे..
जितना ही मेरा मिज़ाज है सादा ! _ उतने ही मुझे उलझे हुए लोग मिले ..!!
मैं शून्य हूँ मुझे पीछे ही रखना, _ मेरा फ़र्ज सिर्फ आपकी कीमत बढ़ाना है..
मुझे कोई ना पहचान पाया करीब से, _ कुछ अंधे थे… कुछ अंधेरों में थे…
वक़्त पर जो लोग काम आए हैं _ अक्सर अजनबी थे _ वो हमदम नहीं थे.
जो बचा है उसे संभाल लो, _ जिसे खो दिया वो तो लौटेगा भी नहीं !!
किसी पर हद से ज्यादा भरोसा मत करना _ क्योंकि वही धोखा देते हैं !!
पहले मंजिल हासिल कर लूँ, _ फिर सबका हिसाब बड़ी सिद्दत से करेगें..
अफवाहें सुन कर बदनाम मत करना, समझना है तो मिलकर बात करना !
दोहरे चरित्र में मैं रह नहीं सकता और _ज़्यादातर लोग वही पसंद करते हैं.
टूट चुके लोग कुछ यूँ निखरते हैं, -_ फूल भी तोड़ते नहीं, दर्द समझते हैं .!
आपके बारे में 10% जानने वाले लोग दूसरों को 100% बता रहे होते हैं.
भुलायी नहीं जा सकेंगी ये बातें, _ बहुत याद आयेंगे हम ” याद रखना “
खुद को माफ नहीं कर ” पाओगे ” _ जिस दिन मुझे समझ ” जाओगे “
तुमने मुझे खोकर क्या खोया है, _ ये मैं नहीं मेरा वक्त बताएगा ….!!!
तोड़कर लोग ख़ुश हुए मुझको, _ अपनी हिम्मत से ख़ुद को जोड़ा है !
खुद से जब मोहब्बत करी.. _ खुद से प्यारा और कोई न पाया ..!!
आप जितने मूल्यवान होंगे, आपकी उतनी ही अधिक आलोचना होगी.
वक़्त ही बतायेगा _ मैं जला था…..जलने के लिए……या रोशनी देने.
करने बैठेंगे जब हिसाब – किताब, _कुछ ख़ुदा की तरफ़ ही निकलेगा.
जिन्हें आसानी से मिलता हूं मैं, _ उन्हें लगता है कि बहुत सस्ता हूं मैं…
इस ज़माने का बड़ा कैसे बनूं _ कि इतना छोटापन मेरे बस का नहीं.!!
सब कुछ जानकार भी चुप रहना _ ये फितरत है मेरी, कमज़ोरी नहीं .!
बेशक तुम्हें मुझसे बेहतर मिलेगा _पर तुम्हें उससे सुकून नहीं मिलेगा !
घाट का एक खामोश पत्थर हूँ मैं, _मैंने नदी के हजार नखरे देखे हैं !!
हम अपने अंदाज में मस्त हैं, _ जरूरी नहीं कि सबको पसंद आ जाएं.
जब उठाने वाला रब हो तो _ क्या देखना कि, _ गिराने वाला कौन है.
ग़म का साथी कोई मिला ही नहीं, _ लोग ख़ुशियों में साथ देते हैं ..!
देखना एक दिन आप मुझे, _ फिर से पाने के लिए तरस जाओगे !
दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं _यह आपका काम का नहीं है..
शीशे की तरह आर पार हूँ, _ फिर भी लोगों की समझ से बाहर हूँ.
ख़ुद ही बुने थे जो रिश्तों के धागे, _ नाता तोड़ आये हैं उन्हीं अपनों से !!
नफ़रत नहीं है किसी से, _ बस अब हर कोई अच्छा नहीं लगता !!
डूबते हुए सूरज सा होगा अंत मेरा _ जाते -जाते हुए भी रोशन दिखूंगा मैं..
*सुख मेरा काँच सा था.. _**न जाने कितनों को चुभ गया..!*
क्या हासिल करने के लिए, _  ख़र्च कर दिया ख़ुद को ….!!!!
हमने देखा है तोड़ के ख़ुद को, _ अपने अंदर भी हम नहीं रहते !
पड़ चुका है इतना फर्क, _ _की अब कोई फर्क नहीं पड़ता !!!
तुम दुनिया से यारी रखना __ हम तो काम चला गए खुद से !!
पहुँच में कहां हूँ किसी की मैं, _ ख़ुद से भी तो अभी दूर हूँ मैं ..!
बहुत उम्मीद थी दुनिया से, _ हमीं आख़िर हमारे काम आए.!!!
मूर्खों की भीड़ से बेहतर _ एक बुद्धिमान का होना ही काफी है…!
कोशिश तो मासूम रहने की थी, _ वक्त ने समझदार बना दिया..
जब आप खुद को तराशते हैं _ तब दुनिया आपको तलाशती है.
अलग मिजाज वाला इंसान हूं, _ खुद को बस खुद समझता हूं.
” खुली ” किताब थे हम _  अफ़सोस अनपढ़ के हाथ में थे हम.
भूल चुका हूँ उन लोगों को, _ जिन्हें मैंने भूल से चुन लिया था..
हर उस ज़ंजीर को तोड़ डाला, _ जो मुझे मेरे होने से रोकती थी!
जो एक बार नज़रों से उतर गया, _फर्क नहीं पड़ता किधर गया.
मै लुट कर भी आबाद ही रहा, _वो लूट कर भी बर्बाद हो गया..
दिल से अगर साफ रहोगे, _ तो कम ही लोगों के ख़ास रहोगे !!
ढूंढ़ने से भी नहीं मिलूंगा, _ अगर गलती से भी खो दिया मुझे..
तुम जीत कर भी रो पड़ोगे,, _ हम तुमसे कुछ इस तरह हारेंगे…
निभा न पायेंगे वो मेरा किरदार, _ जो देते हैं हमें मशवरे हजार..
वो मतलब से मिल रहे थे, _ हमने मतलब ही ख़त्म कर दिया.
खो गए वो सारे रिश्ते _ जिन्हें मैंने हद से ज्यादा संभाला था..!
कुछ लोग लायक ही नही होते की उन्हें अपना कहा जाये…..!
सब कुछ पहले जैसा ही है, _ बस मैं थोड़ा बदल चुका हूँ…!!
वक़्त दे कर देख लिया _ _शायद अकेला रहना ही बेहतर है..
बहुत सरल हूँ मैं, मुझे समझने के लिए, तुम्हें मेरा होना पड़ेगा !!
हर कोई समझ सके मुझे,_  इतनी सरल लिखावट नहीं हूं मैं..!!
निगाहों ने तबाही मचाई है, _वरना होंठ तो कब के ख़ामोश हैं !
इरादे मेरे साफ़ हैं, _ इसलिए तो मेरे अपने ही मेरे खिलाफ हैं ..
ये भी तो खासियत ही है, _ की हम किसी के ख़ास नहीं !!
मुझे समझने के लिए _ तुम्हें दीवाना मस्ताना होना पड़ेगा..
दूसरों को फंसाने की कोशिश करने वाले खुद फंस जाते हैं..
बहुत महंगा पड़ रहा है, _ सस्ते लोगो पर भरोसा करना…!!
बहोत नासमझ हूँ मैं,_ अक्ल का बोझ उठा नहीं सकता .!
तुमसे मुझको क्या मतलब, _ मैं खुद की तलाश में हूं…!!
अपनी कला में जीना, _ जीने की सबसे अच्छी कला है…
चलो कहीं दूर चलते हैं _ दूसरों से नहीं ख़ुद से मिलते हैं !
” बातें !!! ” जो कही नहीं जाती __वो कहीं नहीं जाती !!
जो अर्थ ही न समझे, _ उन पर शब्द क्या ज़ाया करना !!!
फर्क समझिए…! _ आप महंगे हैं, _और हम कीमती…!
अच्छा हुआ लोग बदल गए, _ हम भी जरा संभल गए..
जब फिकर ही नहीं तो …_जिकर भी क्यों …?? जनाब
काफी समझदार थे लोग, _ पर मुझे समझ नहीं पाए !!
आप हँस सकते हैं मुझपे, _ आप पर बीती जो नहीं है !!
मैं दुनिया से अलग नहीं, _ मेरी दुनिया ही अलग है !!
कभी कभी नए लोग _ पुराने से बेहतर मिल जाते हैं .!
हर कोई आपको नहीं समझेगा _ बस यही ज़िन्दगी है.
पढ़ने वाले तो अनेकों हैं, _ समझने वाला कोई नहीं !!
तकलीफ तो अपने ही देते हैं,_ गैर तो यूँ ही बदनाम हैं.
अब हम जब भी आयेंगे, __ सिर्फ याद ही आयेंगे ..
जो छोड़ गये वो बोझ थे, _ जो पास है वो ख़ास हैं..
गैरों से हमदर्दियाँ मिलीं, _ अपनों के आगे हार गए..
जो था वो रहा नहीं, _जो हूँ वो किसी को पता नहीं..
जो जितना साथ चल दे _ उसका उतना शुक्रिया .!!
फक्र है मुझे मेरे बुरा होने पर.., _ अगर अच्छे तुम्हारे जैसे होते हैं…
देखना ले डूबेगी तुम्हें, _ मुझसे बेहतर की तलाश !!!
मुझे बुरा बनाने में हाथ है, _ कुछ अच्छे लोगों का !!
मैं सबका था, _ इसलिए किसी का न हो सका ..
मुमकिन नहीं साथ _ अब इतनी दूरियों के बाद !
ऐसे भुलाए जाओगे !! जैसे कभी थे ही नहीं !!!
जरुरत पड़ने पर शहद __ वरना जहर है लोग !!
ज़ख्म उन्हें दिखाओ, _ जो नमक ना छिड़के..
हमने सहा ज्यादा है, _ तुम्हें बताया कम है..!
मैं मेरे जैसा हूँ _ तुम तुम्हारे जैसे रहो..
बदले नहीं हैं, _ बस समझ गए हैं .!!
जल्दी से किसी भी बात का बुरा नहीं मानते हम, लेकिन

एक बार किसी की बात चुभ जाए तो _ उसकी तरफ़ फिर कभी नहीं देखते..

मैं जब रुठ जाऊँगा तुम से, तुम बहुत पछताओगे ;_

_ लाख ढूंढोगे तुम मुझे, पर कहीं ना पाओगे ..!!!

आँखें उठाकर भी न देखूँ, जिससे मेरा दिल न मिले ;

जबरन सबसे हाथ मिलाना, मेरे बस की बात नहीं.

कुछ लोग मुझे गलत समझते हैं, पर मुझे अब कोई फर्क नहीं पड़ता ; _

_ क्योंकि उन के साथ अच्छा बनने के लिए, मैंने अपना बहुत कुछ गंवा दिया ..

डूबे हुए को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारों, _

_ और, फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमें ही उतार दिया.

“खुदगर्ज की बस्ती में, एहसान भी एक गुनाह है, _

_ जिसे तैरना सिखाओ, वही डुबाने को तैयार रहता है.”

लोगों का मुँह बंद करवाने से अच्छा है की,

अपने कान बन्द कर लो, “ज़िन्दगी” बेहतर हो जायेगी.

ख़ुद की तारीफ़ में कुछ लोग इतना खो गये, _

_ की ख़ुद की कमियों का पता ही न चला !!

जब झूठ बोला तो महफ़िल भरी मिली, _

_ सच क्या बोलना शुरू किया _ लोग उठते चले गए..

इतने बुरे तो नहीं थे, जितने इल्जाम लगाए लोगों ने, _

_ कुछ मुकद्दर बुरे थे, कुछ आग लगाईं लोगों ने ..

कुछ ने इसीलिए भी हमे बुरा कह दिया.._

_ अफ़वाह उड़ी थी ,” अच्छा नहीं है वो ” !!

वो चाहे _ आंसू का कतरा हो या कोई चेहरा ;_

_ जो गिर गया है पलक से _ उसे उठाना क्या..

ज़रा सी बात पे, बरसो के याराने गए…._

_ चलो अच्छा हुआ, कुछ लोग तो पहचाने गए ….

यकीं रखना मत किसी कच्चे ताल्लुक़ पर _

_ जो धागा टूटने वाला हो, उसे खुद तोड़ देना..

जितना गैरों को अहमियत देते हो, _ इतना जो ख़ुद को देते, _

_ तो तुम अपनी जिंदगी संवार लेते ..

ज़िन्दगी जीने का अपना कुछ अंदाज़ ही निराला है, _

_ मतलबी लोगों से किनारा कर डाला है !!

जो तेरी याद # दिलाता था…. # चहचाता था..

_ # मुंडेर से # वो परिंदा…. # उड़ा दिया # मैंने….

तुम्हारे लौटने की उम्मीद मैंने छोड़ दी है, _

_ जब तुम पास थे, वैसे भी कौन से साथ थे !!

हमें बेवकूफ समझकर तूने बहुत बड़ी गलती की,

अब खुद को आसान कर जीने में तुम्हें बहुत मुश्किल होगी..

मुझे खुद पर इतना तो यकीन है, _ की रोएगा वो शख्स

फिर से मुझे पाने के लिए..

तरसोगे तुम एक दिन ये सोच कर, ” वो अपना भी ना था “

एहसास करता था अपनों से भी बढ़ कर..

गलत व्यक्तियों का चयन हमारे जीवन को प्रभावित करे या न करे…

परंतु एक सही व्यक्ति की उपेक्षा हमें जीवन भर पछताने पर मजबूर कर सकती है…!!

जब आपके इरादे नेक होते हैं तो…आप किसी को नहीं खोते हो…जनाब ;

बस…..लोग आपको खो देते हैं…..!!

लोग मुझे पसंद करें या नापसंद, मैंने सोचना छोड़ दिया,

मुझे ख़ुद को पसंद करने में सालों लगे, अब दूसरों को समझाने के लिए इतना वक़्त नहीं.

मैं क्यूँ ये सोचता हूँ कि कोई मुझे समझे…मैं स्वयं को ही क्यूँ नहीं समझता ?

उम्मीद ही क्यूँ रखता हूँ कि कोई तो हो जो मुझे कहे तुम ठीक हो ?

हमसे उलझा यह रिश्ता तुम सुलझा सकते थे, _

_ एक सिरा तेरे हाथ में भी था ..

तरक्की मिलेगी तो गिराने वाले भी मिलेंगे, _

_ तू तैयार रहना आज़माने वाले भी मिलेंगे..

” हम मेहमान नहीं रौनक_ऐ_महफ़िल हैं “

” मुद्दतों याद रखोगे कि ज़िन्दगी में कोई आया था “

भ्रम है उन्हें कि हमें उनकी आदत है जनाब, _

_ हम अकेले भी पूरी महफ़िल से कम नहीं ..

मैं अकेला खुद के लियें काफी हूं, _

_ मेरे वजूद को सहारों की आदत नही !

मुझे रुख़सत तो कर रहे हो खुद से,

मगर एक बात याद रखना…मैं दुबारा नहीं मिलता….!!!!

मैं हर किसी को नहीं मिलता, मैं आवारा नही फिरता, _

_ मुझे सोच समझ कर खोना _ मैं दुबारा नहीं मिलता..!

जिद पर आ जाऊं तो पलट कर भी ना देखूं,

मेरे सब्र से अभी तुम वाकिफ ही कहां हो..

बेचैनी देख चुके हो हमारी _ अब सब्र देखना,

इस क़दर खामोश रहेंगे हम _ कि चीख उठोगे तुम..

पुछों न मेरा पत्ता, तुम हमें न ढूंढ पाओगे..

हम यायावर हैं, हम न जानें किधर जायेंगें…

मेरे चेहरे पर हमेशा खुद का नक़ाब रहता है,

इसलिए जीवन मेरा ….. बेनक़ाब रहता है.

मुझसे मिलना हो तो खुद के किरदार में आना,,

_ ये चेहरे परख लेने की बुरी आदत है मुझे…!!!

लोगों को देखा मैंने जब, वह बनते हुए, जो वह कभी होते ही नहीं _

_ उन की इस हालत पर मुझे तरस बहुत आया !!

मेरे हालात से ना बना राय, मेरे किरदार के बाबत, _

_ आज बीज हूँ दबा हुआ, कल जंगल हो जाऊँगा मैं ..

चेहरा देखने से नहीं जान पाओगे हक़ीक़त मेरी ;_

_ कहीं पत्थर, कहीं मोती, कहीं आईना हूँ मैं..

कुछ लोग कहते हैं,, बहुत बदल गये हो तुम,

हमने भी मुस्कुरा कर कहा,, लोगों के हिसाब से जीना छोड़ दिया है मैंने..

कभी भी किसी को ये अहसास ना कराओ ! कि तुम उनके बिना नहीं रह सकते,

_ क्योंकि वही लोग तुम्हारी उदासी की वजह बनते हैं !!

लोग हमारे अंदर हमारा दुख तलाश नहीं करते, _

_ उनको उस तमाशे की खोज होती है, जो हमारे साथ हुआ !!

लाख खामियां हो भले मुझ में पर दगाबाज़ नहीं हूँ मैं, _

_ ख़ुश रहता हूँ ख़ुद में, महफ़िलों का मोहताज नहीं हूँ मैं..

मुझे नहीं चाहिए किसी से जबरदस्ती वाला साथ…

अगर मैं हाथ पकडूं तो पकड़ आपकी भी होनी चाहिए.

क्यों नहीं महसूस होती उन्हें मेरी तकलीफ, _

_ जो कहते थे ” तुम्हे हम ” अच्छे से जानते हैं..

जरूर मुकरे होंगे लोग जुबान दे कर, _

_ वरना आज कागजों पर कारोबार ना होते .!!

कम लोग हो, पर अपने हों _

_ ज़िन्दगी तमाशा थोड़ी है, जो भीड़ चाहिए !

अब रोता नहीं हूँ, खामोश हो गया हूँ, _

_ अब तो दर्द भी दर्द नही देता, _ लगता है पत्थर हो गया हूँ ..

जिंदगी का फ़लसफ़ा बस इतना है यारों, _

_ अपनों से बचो….गैरो से तो निपट लोगे….!!

नही जीना मुझे ” नकली अपनों के मेले में “,

खुश रहने की कोशिश कर लूंगा ” खुद ही अकेले में “.

“- अपनों को आजमा के देख लेना _ दुश्मनों से मोहब्बत हो जाएगी “

मैं नही बता सकता अपना दुःख अपने लोंगो को,,,_

_ मैं हँसने का मौका नही देना चाहता अपने लोगोँ को,,

इस जिंदगी ने मत पूछो कितना हैरान किया, _

_ कांटो का साथ मिला _ फूलों ने परेशान किया !!

अब ढूढ़ रहे हैं, _ वो मुझ को भूल जाने के तरीके…!!

खफा हो कर _ उनकी मुश्किलें आसन कर दी मैंने..!

निकले थे नाम मिलेगा और खूब कमाएंगे,_

_ क्या पता था ? अपनों को ही नहीं सुहायेंगे..

दर्द ओ गम से हमेशा के लिए, _ पीछा छुड़ा लिया,

बार बार टूट जाता था दिल, _ पत्थर का बना लिया…

जिन्दगी मे मिला हर शख़्स होली सा था..

कुछ रंग बदलते गये, _ तो कुछ रंग भरते गये….!

तू कोई फरिश्ता तो नहीं, तू भी तो एक इंसान है_

अरे क्यूँ _ तू किसी के दर्द को, खुद सहन करता है..!!

महक गुलाब की आएगी आप के हाँथों से, _

_ किसी के रास्ते से कांटे हटा कर तो देखो ..!!

कांटा हूं मैं, _ जिसे चुभता हूं उसी का हो जाता हूं..

वो फूल नहीं हूं, _ जिसे हर भंवरा चूमता फिरे.

क्यों घावों का सारा दोष काँटों के सर करें,,,

_ कुछ ऐसे भी ज़ख़्म हैं जो फूलों की देन है…

ये व्यक्तित्व की गरिमा है, _ कि फूल कुछ नहीं कहते,

वरना कभी, कांटो को, _ मसलकर दिखाईये !!

फूल बेशक ना बोलते हों …!!

उनकी खुश्बू ….. _ दिन भर गुनगुनाती है..

कितनी दफा मिटाओगे मेरा वजूद,

मैं फिर से उग जाऊंगा, _ तुम देख लेना.

वजूद सबका है अपना अपना,

सूर्य के सामने दीपक का न सही, अंधेरों के आगे बहुत कुछ है..

जब कहीं भी कुछ समझ ना आए, _

_ तब शांत बैठ कर _ खुद को समझ लेना चाहिए ..

अगर बिकने पे आ जाओ तो घट जाते हैं दाम अक्सर,

न बिकने का इरादा हो तो क़ीमत और बढ़ती है.

जिस दिन तुम्हे खुद अपना मुल्य पता लग गया, _ उस दिन के बाद

_ तुम्हें किसी के द्वारा की गई निंदा या प्रशंसा से कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

स्वयं को ऐसा बनायें जैसा दुनियां को देखना चाहते हैं, _

_ और फिर आप देखेंगे कि दुनियां भी आप के हिसाब से बदल गई..

जब हम खुद को समझ लेते हैं, तो इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि

कोई और हमारे बारे में क्या सोचता हैं.

मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं,

अगर मैं सही हूँ तो मुझे किसी को भी सफाई देने की जरुरत नहीं..

जिंदगी का सच जो हमने जाना है, _

_ दर्द अकेले बर्दाश्त करना है और खुशियों में संग सारा ज़माना है ..

खोदे लोगों ने हमें गिराने के लिए गड्डे,

लेकिन रेहमत देखो उस खुदा की, हम छलांग लगाना सीख गए..

*एक ख्याल ही तो हूँ मैं ..* *याद रह जाऊँ .. तो याद रखना …*

*वरना…….* *सौ बहाने मिलेंगे …भूल जाना मुझे….!!*!

तुम मेरी नज़र से देखो, _

_ इन आँखों ने अपनों को पराया बनते देखा है ..

यारों से नाराज़ होना छोड़ दिया, _

_ बस कुछ ख़ास की फ़ेहरिस्त से निकाल कर आम कर दिया ..

मैं खुद उलझा हूँ अपनी कहानी मेँ,

_ मैं कहां किसी के किस्से का किरदार बनूँ..

कहां मिलेंगे लोग मन के मुताबिक,_

_ कुछ हमें भी ढलना पड़ता है ” उनके मुताबिक “

मैंने तो सिर्फ वो ही खोया जो मेरा था ही नहीं,

लेकिन उसने वो खोया जो सिर्फ उसीका ही था..

अब कोई आए, चला जाए, फिर भी मैं खुश रहता हूँ.

अब किसी शख्स की आदत नहीं होती मुझको.

” फर्क पड़ना नही चाहिए तुम्हें, _ चाहे कोई आए या फिर जाए “

ज़रूरी नहीं की हर दफ़ा मैं सच अपनी ज़बां से बोलूं, _

_ मेरी आँखें जो सच बोलती हैं, वो भी तो काफ़ी है !!

कोई मेरे बारे में गलत कहे तो उससे पूछना एक बार की __ठीक से जानते हो.?

या यूं ही मन हल्का कर रहे हो.!!

किसी को जाने बिना उसके बारे में गलत कहना,_

_ इससे बेहतर है कि अपना मुहं बंद ही रखा जाए.

मुझे कोई समझ पाया है तो वो मैं खुद हूँ _

_ बाकी तो सब अंदाजे लगा रहे हैं !!

मुझे आजमाने वाले शख्स तेरा शुक्रिया …

मेरी काबिलियत निखरी है तेरी हर आजमाईश के बाद….

अब मैं पहले जैसा नहीं रहा… ये तो तय है,

और कैसा हो गया हूं… ये मुझे भी नहीं मालूम !!

शरारतें करो, साजिशें नहीं _

_ हम शरीफ़ हैं, सीधे नहीं !!

मुद्दत हो गयी, कोई शख्स तो अब ऐसा मिले..

बाहर से जो दिखता हो, अन्दर भी वैसा मिले…

अब घमंडी कहो या समझदार _ पर अब हम दूर हो गए हैं _

उन लोगों से _ जो हमें सिर्फ मतलब के लिए याद करते थे..

मेरी बातों का कोई मतलब नहीं, _

_ मैं मतलब से बातें नहीं करता ..

वक़्त ने वक़्त दिया है मुझे _ जो अब समझ आया है !!

_ उलझा तो कई बार था _ पर इस बार खुद को ही सुलझाया है.

जब कोई आप को न समझे _ तो उससे एक लाइन बोलना_

_ मुझे समझने के लिए _ आप का समझदार होना जरुरी है..

अगर मुझे समझना चाहते हो _ तो बस अपना समझो !!
जो मुझे नहीं समझ सकते वो समझ लें – मेरा जीवन

इतना सस्ता नहीं है कि हर कोई मुझे आसानी से समझ जाए.

जानने एवं समझने में..अंतर होता है..

आपको बहुत से लोग जानते हैं, _ मगर समझने वाले.. _ कुछ ही होते हैं…

” समझ ” …ज्ञान से ज्यादा गहरी होती है…!

बहुत से लोग आपको जानते हैं…परंतु कुछ ही हैं जो आपको समझते हैं…!

किसी को जानना बहुत आसान होता है,

_ पर किसी को समझ पाना काफ़ी मुश्किल..

पूरी उमर मुझे परखने में गुजार दी, _

_ काश समझने की थोड़ी सी ही कोशिश की होती ..

मुझमें खामियां देखने वाले को ये हुनर आया ही नहीं, _

_ कितने लोग मरते हैं मुझ पर, ये वो देख पाया ही नहीं ..

समझने वालों के लिए अनमोल हीरा हूँ एक,

ना समझने वालों के लिए पत्थर भी नहीं.

उस शख्स को समझना मुश्किल है, _

_ जो जानता तो सब कुछ है _ पर बोलता कुछ भी नहीं !

अब जो रुठोगे तो हार जाओगे ! _

_ हम मनाने का हुनर भूल चुके हैं !!!

वक़्त आने पर सब समझ जाएंगे मेरी अहमियत, _

_ मै किसी को समझाने की सिफारिश नहीं करता..

सुनी सुनाई बातों पर यकीन करना छोड़ दो, _

_ हम इतने भी बुरे नहीं जितना लोग बताते हैं ..

जितना बदल सकता था बदल लिया खुद को,

अब जिसको तकलीफ है वो अपना रास्ता बदल लें.

कहती है जिंदगी मुझे की मैं आदत बदल लूँ,

बहुत चला मैं लोगो के पीछे अब थोड़ा खुद के साथ चलुं..

ख्वाब मंजिल के मत दिखाओ मुझको,_

_ तुम कहाँ तक साथ आओगे ये बताओ मुझको..

कुछ लोग आपको गलत समझते है तो बुरा न मानें,

क्योंकि वे आपको उतना ही समझते हैं जितनी उनमें समझ है..

हर कोई हमारा नहीं है जनाब,,,,

_ कुछ लोग हमारे काबिल नहीं, _ कुछ के हम काबिल नहीं,,,,,,,

हर किसी का दखल _ ग़वाऱा नही मुझे यारों,

पसंद हैं मुझे _ खुद को खुद की नजर से परखना..

अगर नेकी करने के बावजूद भी तकलीफ मिल रही है…

तो समझ लीजिए के दर्ज़े बुलंद हो रहे हैं….

जिनके मिज़ाज़ दुनिया से अलग होते हैं, _

_ महफ़िलो में चर्चे उनके गज़ब होते हैं .!

अगर कोई व्यक्ति आपसे जलता है, तो ये उसकी बुरी आदत नहीं,

बल्कि आपकी काबिलियत है, जो उसे जलने पर मजबूर करती है…

आप से जलने वाले लोगों के सामने _

_ कभी भी अपनी उपलब्धियों का बखान नहीं करना चाहिए ..

मैं खुद ही रंगा हूँ _ अपने किरदार के अनगिनत रंगो से..

_ जीत से तो वाकिफ हुए तुम, _ कभी मिलना मेरे हार वाले किरदार से..!

सब मुझ से कहते हैं, बदल गया है तू, _ अब किस किस को समझाऊं

_  टूटे हुए पत्तों का रंग अक्सर बदल जाता है..

” – टूट चुका जो पत्ता डाल से, _ रंग बदलना उसका लाजिमी है..-“

कभी आ भी जाने दो यारो मुश्किलों की आंधियां,

मुखौटे उतरने दो उनके जो यू ही दिखाते है यारियां.

चलो ज़िन्दगी के सफर को एक नया मोड़ देते हैं,

जो हमे नहीं समझते हम भी उन्हें समझना छोड़ देते हैं..

खुली किताब सी है ये मेरी ज़िंदगी जनाब, _

_ पढ़ कर भी लोग समझ नहीं पा रहे ..

जिंदगी करवटें ले रही है हर – पल..! _ अब कुछ जाने – पहचाने

_ लोगों की भी गिनती _ अजनबियों की कतार में होने लगी है..!!

हमने भी ज़िन्दगी का कारवाँ आसाँ कर दिया,

जो तकलीफ देते थे बस उन्हें रिहा कर दिया..!!

क्यों ना खुद को इस क़ैद से रिहा किया जाए, _

_ जो कद्र ना करें उसे भुला दिया जाये..

शुरुआत तो सभी अच्छी करते हैं…

_ मसला तो सारा आखिरी तक अच्छा रहने का है !!

अपने आप को ऐसा बना लो की ; किसी के आने से या किसी के जाने से ;

या फिर किसी के बदल जाने से ; आपको कोई फर्क ना पड़े..

बहुत जिए उनके लिए, जिन्हें हम पसंद करते थे ;

अब जीना है उनके लिए, जो हमें पसंद करते हैं..

उन्हीं की मुस्कुराहटों से आबाद है ये ज़िंदगी जनाब, _

_ जिन्होंने मेरी ख़ुशी के लिए हर दर्द, हंस कर सहा .!!

अपनी ज़िंदगी को मैंने अब थोड़ा आवारा कर लिया..!!

कुछ मुझसे किनारा कर गए तो कुछ से मैंने किनारा कर लिया..!!

एक वक्त पर जाकर _ ये महसूस होता है..

बेहतर होता अगर मैं _ कुछ लोगों से _ मिला ही ना होता..

फ़ुरसत अगर मिले तो मुझे पढ़ना ज़रूर,_

_ मैं तेरी उलझनों का मुकम्मल जवाब हूँ !!

मेरी आवाज़ ही परदा है मेरे चेहरे का, _

_ मैं हूँ ख़ामोश जहाँ, मुझको वहाँ से सुनिए..

लफ़्ज़ों की कमी तो कभी भी नहीं थी जनाब, _

_ मुझे तलाश उसकी है जो मेरी ख़ामोशी पढ़ ले ..!!

तराशिए खुद को __ कुछ इस तरह जहाँ में !

पाने वाले को __ नाज और खोने वाले को अफ़सोस रहे !!

मुझे बर्बाद करने की दुआ मांगते है वो, _

_ चलो इसी बहाने हमें याद तो करते हैं ..

उस दिन तुम्हारी सारी उलझने सुलझ जाएँगी, _

_ जिस दिन तुम हमे समझ जाओगे ..

काँच सा था तो, हमेशा तोड़ देते थे मुझे ;_

अब तोड़ के दिखाओ, कि अब पत्थर सा हूँ मैं..

पहले ये सोचता था कि नादान क्यूँ हूँ मैं, _

_ अब सोचता हूं कि अच्छा हुआ नादान रहा..

ग़मों की क्या औकात भला जो हरा दे मुझे, _

_ मैं तो वो हूँ जो रुख हवाओं के बदल देता हूँ !!

स्वाद अनुसार बहुत इस्तेमाल हुए हम,_

_ अब लोगों की औकात अनुसार बर्ताव करंगे ..

ख़ुद को बेइंतेहा अब हम चाहने लगे हैं, _

_ कुछ इस तरह से, दुनिया को हम भुलाने लगे हैं .!!

लोगों की नज़रों में फर्क अब भी नहीं है,_

_ पहले मुड़ कर देखते थे.., अब देख कर मुड़ जाते हैं.,

किसी को याद करने कि वजह नहीं होती हर बार.. _

_ जो सुकून देते हैं _ वो जहन में जिया करते हैं..

दूसरों को प्रसन्न करना बंद करें, आप हर किसी के पसंदीदा नहीं हो सकते हो,

इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करने की कोशिश भी ना करें.

सम्बन्ध को निभाने की ख़ातिर _ अपने को ख़त्म कर देने से अच्छा कि _

_ सम्बन्ध को ख़त्म कर दो ..

झुक झुक कर सीधा खड़ा हुआ, अब फिर झुकने का शौक नहीं,_

_ अपनी ही हाथों रचा स्वयं को, तुम से मिटने का खौफ नहीं..

अब ठहर कर बात करने का मन नहीं करता किसी से,_

_ चलते-चलते जितनी बात हो जाए वही बहुत है…

मुझे उन लोगों पर दया आती है _ जिनके दिल में नफरत भरी हुई है;_

_ ये नफरत उन्हें खुद ही बहुत नुकसान पहुंचाती है.

जिसके साथ बात करने से ही खुशी दोगुनी और दुःख आधा हो जाए,

वो ही अपना है ! बाकी तो बस दुनिया ही है..

खुद को खुद ही खुश रखें और योग्य बनायें,

क्योंकि ये जिम्मेदारी आपके लिए कोई दूसरा नहीं उठा सकता.

न कोई उम्मीद है और न ही शिकायत…_

_ समझ लो कि जिंदगी लाजवाब हो गई है.

“ माना कि हम अदब से बात नहीं करते, _

_ पर ये मानों…मतलब से बात नहीं करते..

एक जीना जग ज़ाहिर, एक जीना चुपचाप, _

_ दो – दो प्रकार से जीना पड़ता है _ एक जीवन कई बार..

हालात मुझे कमजोर बनाने की कोशिश करते रहे,_

_ और मेरा रब मुझे मजबूत बनाता गया…

जो लोग आपको दौड़कर नहीं हरा पाते !!_

_ वो लोग आपको तोड़कर हरा देते हैं !!

हर किसी को मत बताया करो तुम अपनी बातें, _

_ यहाँ हर कोई खुश नहीं है, किसी को ख़ुश देख कर .!!

ना हक़ दो किसी को इतना कि तकलीफ हो तुम्हें, _

_ ना वक्त ही दो इतना की गुरुर हो उन्हें ..

दुनिया की फितरत को बड़े करीब से देखा, _

_ खुद को मिलने वाली वाह वाह से अपनों को ही जलते देखा ..

कोई राज़ अब किसी को बताना नहीं, _

_ ज्यादा अच्छा बनने का अब ज़माना नहीं ..

आसान नहीं है उस शख्स को समझ पाना,_

_ जो जानता सब हो, पर खामोश रहे हर वक़्त…

कतरा कतरा ख़ुशी के लिए तरशे हैं, _

_ और हम उन्हें ख़ुशियों का समंदर समझते थे ..

मैंने अच्छा बन कर देख लिया है, _

_ वहाँ कुछ नहीं है सिवाय दर्द, पछतावा एवम बेइज्जती के ..!!!

शौक़ ही नहीं रहा कि खुद को साबित करूँ, _

_ अब तो आप जो समझो वही हूँ मैं !!

पहुँच गई है घड़ी, फैसला अब करना ही होगा _

_ दो में एक राह पगले ! पग धरना ही होगा ..

धैर्य की भी अपनी सीमाएं होती हैं, _

_ अगर ज्यादा हो जाए तो कायरता कहलाती है ..

संकट का इन्जार मत करना,,,_

_ वो आएगा जरूर आएगा,,, उसकी तैयारी करना,,,

हम ही सोचें ज़माने की _ हम ही मानें ज़माने की.

हमारे साथ कुछ देर _ ज़माना क्यूं नहीं होता..

छोड़ो उन्हें जो छोड़ गया तुम्हें, _

_ जाते हुए नहीं सोचा उन्होंने तेरे बारे में, _

_ तो क्यों लौट कर आएंगे वो तेरे बुलाने पे ..

हाँ अब मैं समझदार हो गया हूँ..

मैं बदल गया हूँ ऐसा लोग कहते हैं

मैं मानता हूँ कि अब जाके समझदार हुआ हूँ

अब छूटने वालों का इंतजार नही

अब किसी खास से कोई प्यार नहीं

अब न जाने वालों को रोकता हूँ

न आने वालों को टोकता हूँ

वक़्त से पहले घर आ जाता हूँ

कमरे को बस खुद के लिए सजाता हूँ

सारी रात किसी के लिए जागता नहीं

यूँ ही किसी के पीछे भागता नहीं

” हाँ अब मैं समझदार हो गया हूँ “

सपनों ने ज़िन्दगी को जीना सीखा दिया,

अपनी हदों को पार करना समझा दिया,

जो डर हमेशा से था, वो मिटा दिया,

इस काले पत्थर को एक कोहिनूर बना दिया ;

सुविचार – सैल्फ एक्चुलाइज्ड व्यक्ति के गुण – 1001

सैल्फ एक्चुलाइज्ड व्यक्ति के गुण :–>
वह जीवन की वास्तविकता का ज्ञान रखता है और सूझबूझ के साथ जीवन की जटिल समस्याओं का हल ढूंढ निकालता है. संघर्ष का मुकाबला डट कर करता है.
खुद को और संपर्क में आने वाले लोगों को, वे जैसे हैं, स्वीकार करता है, सहयोग करता है.
अपनी सोच और क्रियाकलापों को संयोजित व नियंत्रित रखता है. उस की सकारात्मक सोच ऐसा करने में उस की मदद करती है.
समस्याओं पर ध्यान केंद्रित कर, उन का समाधान विवेक और व्यवहारिकता के साथ निकालता है.
वह काम से काम रखता है. अपनी निजता में किसी को दखल नहीं देने देता.
पूर्ण स्वतंत्रता से कार्य करता है, अपने माहौल को अपने अनुकूल बनाने की कला में माहिर होता है.
अपने अनुभव और दूसरों के अनुभव से सीखते हुए लगातार अपनी कार्यशैली में निपुणता लाने का प्रयास करता है. इस प्रकार वह अपनी सफलता निश्चित करता है.
वह अपने आत्मसम्मान को ध्यान में रखते हुए हालात से अनावश्यक समझौता नहीं करता.
लोगों के साथ अच्छा व्यवहार बनाए रखता है ताकि उन का सहयोग अपने काम के लिए हासिल कर सके.
लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाना उसे रुचिकर लगता है.
तानाशाह न हो कर वह लोकतांत्रिक रवैया बनाए रखता है, लोगों के साथ मिलजुल कर आगे बढ़ता है.
ऐसे लोग रचनात्मक होते हैं. रचनात्मक होने के कारण उन का जीवन नए नए अनुभवों से भरा होता है. वे लकीर के फकीर नहीं होते. परंपरा का निर्वाह करते हुए नित नवीन तरीकों से अपने काम की गुणवत्ता बनाए रखते हैं.
बुद्धिमान लोगों के 5 गुण ~

1. अपना काम गुप्त तरीक़े से करना पसंद करते हैं.

2. दुनिया को तब तक नहीं बताते _  जब तक कि उनका काम शत प्रतिशत पूरा नहीं हो जाता.

3. किसी से भी उलझना पसन्द नहीं करते _  बल्कि किनारे से निकल जाना ज़्यादा पसन्द करते हैं.

4. बोलते कम हैं  _ सुनते ज़्यादा हैं.

5. सुनते सबकी हैं _ लेकिन करते अपने मन की हैं.

My Favourites – यार – 2015

अजीब रिश्ता है मेरा तेरे साथ ! मुसीबत जब भी आती है ; ना जाने किस रूप में आता है, _ हाथ पकड़ कर पार लगा देता है,,,

_ मैं तेरे सामने सर झुकाता हूँ : तू सबके सामने मेरा सर उठाता है.

मेरी जिंदगी में कुछ ऐसे रिश्ते हैं जो कहने को तो मेरे कुछ भी नहीं लगते_ मगर मेरे होने में उनका अहम किरदार है.

ये वही लोग है, जो मेरी हैसियत नही मेरा दिल देखते हैं_ मैं शुक्र गुजार हूँ ऊपर वाले का,

उस ने मेरी ज़िन्दगी में बहुत कुछ छीना, पर सब कुछ नही छीना.

कभी कभी कुछ चीजों से Move on करना मेरे लिए भी आसान नहीं होता

मगर वक़्त के साथ आगे बढ़ना ” मैंने तुमसे सीखा है “

रूठी जो जिंदगी तो मना लूंगा मैं, मिले जो ग़म वो सह लूंगा मैं ;_

_ बस यार तू रहना हमेशा साथ मेरे, तो निकलते आंसुओ में भी मुसकुरा लूंगा मैं ..

जाने कैसे तू… मुकद्दर की किताब लिख देता है ;

साँसे गिनती की… और ख्वाहिशें बेहिसाब लिख देता है..

जब खुद को कर दिया तेरे हवाले, तो फिर गम कैसा ; _

_ तू फना कर दे य़ा गले लगा ले मुझको…

🌹तुम्हें एक और बहुत ऊँचे नियम का पता नहीं कि

अस्तित्व उनकी सुरक्षा करता है जो सत्य की खोज में हैं.🌹🌹

” सत्य सभी के लिए नहीं है, _ बल्कि केवल उनके लिए है _ जो इसे चाहते हैं.”
आँख खुलते ही याद आ जाता है तेरा चेहरा,,_

_ दिन की ये पहली ख़ुशी भी कमाल होती है…!!

मिल जाता है दो पल का सुकून, बंद आँखों की बंदगी में,

वरना परेशां कौन नहीं, अपनी- अपनी ज़िंदगी में..

कुछ याद करके आंख से आंसू निकल पड़े,

मुद्दत के बाद गुजरे जो उसकी गली से हम.

आँखों में तेरी _ कोई करिश्मा जरूर है,

_ तू जिसको देखता है,,,, वो तड़पता जरूर है .!!

काश की बचपन में ही तुझे मांग लेते.._

_ हर चीज मिल जाती थी दो आंसू बहाने से…

जब जब तू मुझसे मिलता है, अपना रंग दे जाता है._

पर तू, _ पर तू बड़ी मुश्किल से मिलता है.

खुद अपने ही भीतर से उठता है वह मौसम,_

_ जो रंग भरता है सारी कायनात में.

आ देख मेरी आँखों के, ये भीगे हुए मौसम _

_ ये किसने कह दिया कि, तुम्हें भूल गये हम..

सौ बार तलाश किया हमने खुद को खुद में,

एक तेरे सिवा कुछ ना मिला मुझको मुझमें..

नहीं बसती किसी और की सूरत अब इन आँखो में….

काश कि तुमने मुझे इतने गौर से ना देखा होता…

तू हार ना मान उसकी दिलकश ख़ामोशी को,,

” खुशनसीब हो ” – पढ़ लेता है वो तुम्हारी आंखों की भाषा को !!

जीवन को महकाते हो, _ जब भी तुम आते हो.

मस्ती भी तब ही आती है, _ जब याद तेरी ही आती है.

जब- जब मैंने तुझे दूसरों की आंखों से तलाशा तो तू नहीं मिला !!!!

जब मैंने अपनी आंखों से तलाशा ” तो तू मिल गया !!

_ हम है कि ढूँढ़ते रहे, _ वो है कि बरसता ही रहा _

” खुली आंखो से देखते हो, _ कभी बंद आंखो से कोशिश कर “

लगता है तू _ मेहरबान है मुझ पर, _

_ मेरी दुनिया में तेरी मौजूदगी _ यूं ही तो नहीं..

मुझ में ही थी कोई कमी कि याद मुझे तू आ न सका. _

_मैंने तो तुम को भुला दिया _ पर तुम ने मुझे न भुलाया.

_ धन्यवाद है, ज़िन्दगी में रंग लाने के लिए..

ढूंढा तुझको सारे जग में, कहीं पार न तेरा पाया _

_ बंद आँख से भीतर देखा तो _ तू ही दिल में समाया..

मिल लेता हूँ तुमसे आँखें बंद करके,

जो दिल में बस जाते हैं, उन्हें भीड़ में क्यूं ढूंढ़ना !!

कुछ तो मेरी आँखों को पढ़ने का हुनर सीख,

हर बात मेरे यार बताने की नहीं होती.

आँखें पढ़ो और जानो, हमारी रज़ा क्या है _

_ हर बात लफ़्ज़ों से हो, तो मज़ा क्या है !!

आँख भिगोने लगी हैं अब यादें तेरी, _

_ काश हम अजनबी ही रहते तो अच्छा था !

दिल ने आज फिर तेरे दीदार की ख्वाहिश रखी है,

अगर फुरसत मिले तो ख्वाबों में आ जाना.

जब भी ढूँढोगे, अकेला ही पाओगे मुझे…

मैंने तुम्हारे सिवा किसी को तरज़ीह नहीं दी…!!!

निकला तो तेरी तलाश में था, _

_ तुझे ढूंढते ढूंढते ख़ुद को पा लिया ..

तुम आंखों में रहते हो कुछ इस तरह, _

_ कि तस्वीर की भी अब कोई जरूरत नहीं ..

आ देख मेरी आंखो के ये भीगे हुए मौसम,

ये किसने कह दिया कि भूल गए हम…

जरुरी तो नहीं है कि तुझे आँखों से ही देखूं _

_ तेरी याद का आना भी, तेरे दीदार से कम नहीं..

मैंने तुझे देखा था, पहली नज़र में ! _

_ मुझे क्या पता था की तू… मेरे रग रग में समा जाएगा !!

किसी को क्या बताऊँ _ क्या हो तुम मेरे लिए.

तुम्हें खामोशी से चाहना __ मुझे अच्छा लगता है..

ख़ामोश हूं तो क्या हुआ _ तू भी तो कभी आवाज़ दे,,,

तू भी तो समझे _ मैं कितना बैचैन हूँ तेरे लिए..

दुनिया, जहां, परिवार सबसे दिल लगा कर देख लिया _

_ परंतु जो सुकून तेरे साथ मिला,,, वह कहीं नहीं मिला ,,,!!!!

इक सिर्फ़ तुम ही तो हो ले – देकर मेरे पास,_

_ तुम्हें भी खो दूंगा तो, फिर क्या बचेगा मेरे पास ?

एक तू ही है मेरी ज़िन्दगी में, _

_ जो मेरे ना होने पर भी मुझे ढूंढ़ता है ..

तुमको क्या बताऊँ कितना मजबूर हूं मैं, _

_ एक तुम्हे ही चाहा और तुमसे ही दूर हूं मैं….

ये आईने क्या दे सकेंगे मुझे, _ तुम्हारी शख्सियत की खबर ;_

_ कभी मेरी आँखों से आकर पूछो, कितने लाजवाब हो तुम !!

लफ़्ज़ों में नहीं बयान कर सकता की तुम, कितने खास हो मेरे लिए ;_

_ कभी वक्त निकाल कर, मेरी आंखे पढ़ लो ना..

कुछ कहना था तुमसे, थोड़ी फुरसत निकाल कर सुन लो ना ;_

_ जानता हूं वक़्त कीमती है तुम्हारा, थोड़ा सा मुझ पर खर्च कर दो ना..

हर मुलाक़ात वैसे भी अब सिर्फ़ तुम से ही तो करता हूँ, _

_ जो करूँ अगर किसी और से तो भी ज़िक्र तुम्हारा ही करता हूँ !!

अब किसी से भी बात करने को मन नहीं करता, _

_ यह दिल तेरी यादों में रहना चाहता है ..!!

कभी टूटा ही नहीं तुमसे, तुम्हारी यादों का रिश्ता ;

बात हो या ना हो, खयाल तुम्हारा ही रहता है..

ख़त्म हो जायेंगी _ मेरी सारी उदासियां,

बस इक तेरे _ हंसने की देर है.

तेरे खयाल में जब, बेख़याल होता हूँ,_

_ जरा सी देर सही, लाजवाब होता हूँ ..

तू आया और रोशन हो गयी महफ़िल तेरे नाम से._

_ पर तू कितना बेपरवाह है, मेरे ही सलाम से..

अपनी मस्ती भूल गया हूँ, आकर तू याद करा दे._

_ मुझे अपने रंग में, वापस तू ही ला दे.

दुनिया तेरे वजूद को कर रही तलाश,

हमने तेरी याद को ही दुनिया बना लिया.

सिर्फ मोहब्बत की होती तो भुला देते तुम्हें ..!!

ये पागल दिल तो इबादत कर बैठा..!!!!

उसको लुभाने के लिए कुछ मत करो,_

_ तुम खुशबू बनो _ उस की नाक तुमको सूंघ लेगी..

संसार के मार्ग पर सुख भी दुख है,

और तेरे मार्ग पर दुख भी सुख हो जाता है..

तुम्हारे सिवा कुछ अच्छा नहीं लगता है मुझे..

फिर चाहे तुम दूर हो या क़रीब मेरे…

बहुत खूबसूरत है,, _ तेरे अहसास की खुश्बू..

_ जीतना सोचता हूँ …_ उतना महक जाता हूँ ..!!

ज़िन्दगी तेरे होने से ही आबाद लगती है, _

_ जो तुम ना हो पास मेरे, तो बर्बाद लगती है ..

जीने के बहाने हज़ार हो सकते हैं, _

_ पर जब से वास्ता तुझ से हुआ है, मैं तेरा हो कर रह गया हुँ !!

तू एक कदम भी जो मेरी तरफ बढ़ा देता,

मैं मंजिलें तेरी दहलीज से मिला देता..

तुम न होते तो फिर कौन होता,__

_ तुम हो…तब भी कौन है…?

“ तुम समझे ही नहीं “,__

_ मुझे तुमसे कुछ भी नहीं चाहिए था….” तुम्हारे सिवा॥”

तेरी खुशबू कहीं ओर मिलती ही नहीं,

फ़ूल सारे खरीद कर ,,,,,देखे हैं हमने..

वो तो ख़ुशबू है हवाओ में बिखर जाएगा,

मसला फूल का है फूल किधर जाएगा !!

फूल जब उसने छू लिया होगा ; _

_ होश तो खुशबू के भी उड़ गए होंगे !!

यूँ ही बदनाम हैं ये कांटें जनाब, _

_ असली चुभन तो गुलाब देते हैं ..

कांटे तो नसीब में आने ही थे ..! _

_ फूल जो हमने गुलाब चुना था…!

मुझे पसंद है बेहतरीन ये #एकांत

बस जिसमें तू और मैं भावो में बहते रहें नितांत..

भीतर असली जिंदगी, बाहर है वर्ताव !

थोड़ा अंदर से जियो, देखो अलग प्रभाव !!

पल-पल, अब का, मैं मस्ती में पीता हूँ.

इसीलिए तो, हो, बे-परवाह, मैं, मस्ती में जीता हूँ.

कैसी अजीब शर्त है दीदार के लिए,

आँखें जो बंद हों तो वो जल्वा दिखाई दे.

किरदार मेरा थोड़ा पागल ही रहने देना ..

सुना है पागलो से दुनिया कम उलझती है.

सभी हारा समझ रहे हैं मुझे,

सबको कैसे समझाऊं की – मंजिल के कितना पास हूं मैं,,,

अगर मुझसे दूर जाने की जिद्द तुम्हारी है, _

_ तो हर इबादत में तुम्हे पाने की दुआ हमारी है ..

जिंदगी की तलाश में निकला हूं, _

_ अगर तुम मिल जाते तो यह सफ़र मुक्कमल हो जाता..

न जाने कितने लोग ख़फ़ा हैं मुझसे, _

_ इक तुम से दोस्ती के लिए, सैकड़ों दुश्मन बनाएं हैं मैंने ..

तुम्हारा नाम लेने से, मुझे सब जान जाते हैं ;_

मैं वो खोई हुई एक चीज़ हूँ, जिसका पता तुम हो …

जो तू है सो मैं हूं जो मैं हूं सो तू है लेकिन _

_ तुझ में और मुझ में मगर फ़ासला यूँ कितना है..

तूने मुझे चाहा है हजार नुक्स ओ ऐब के बाद, _

_  तुझे तराशने की ज़िद में कहीं खो न बैठूं तुम्हें ..

अब तराशो तुम मुझे अपने तरीके से,__

_ मेरे तौर- तरीकों ने तो मुझे चूर- चूर ही किया है.

ऐ रफुगर, रफू कर जरा आराम से,__

_ ज़ख्म तेरी मेरी सोच से कहीं गहरे हैं.

तू वाक़िफ नहीं मेरी दीवानगी से,

जिद्द पर आऊं तो खुदा को भी ढूंढ लूँ.

सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का,

जो कहता है ख़ुदा है तो नजर आना जरुरी है..

तेरी बन्दगी से ही मिली है, मेरे वज़ूद क़ो शोहरत,

तेरी रहमतों से पहले, मेरा जिक्र ही कहाँ था..

लगता तो बेख़बर सा हूँ लेकिन खबर में हूँ,

अगर तेरी नज़र में हूँ तो सबकी नज़र में हूँ…

“जमाना” जब भी मुझे मुश्किलों में डाल देता है,

मेरा रब हजारों रास्ते निकाल देता है.

ऐ यार … बस तुम कोई उम्मीद दिला दो मुलाकात की, _

_ फिर इन्तजार तो हम सारी उम्र कर लेंगे.

मेरा तो क्या है मैं तो तेरी यादों के सहारे भी जी लूंगा,_

_ हैरान तो आँखें हैं जो तड़पती है तेरे दीदार को !!

तुम्हारी यादों के सहारे,,,, हर मुश्किल से मुश्किल

तकलीफों को बड़ी आसानी से झेल लेता हूँ मैं..__!!!

याद तेरी मुझ पर कुछ यूँ असर करती है, _

_ मेरे हर वक़्त को ये अच्छा रखती है ..

कैसे छुपाऊं तेरे प्यार को इस दुनिया से, _

_ मेरे हर अल्फ़ाज़ में तुम महकते हो ..

तुम आराम से हो, पत्थर के जो हो, _

_ मुसीबत तो हमारे लिए है, एहसास वाले जो हैं ..

आदत है मुझे हर रोज़ _ तेरी यादों में खोने की,

_ फुर्सत ही नहीं मिलती है मुझे _ तुझसे आ कर मिलने की !!

अक्सर पूछते हैं लोग तुझसे बिछड़ने की वजह,_

_ मैं खुद में कमी बताकर तेरी इज्ज़त बढ़ा देता हूं !!

कई बार टूटा हूं, मैं कई बार बिखरा हूं।

मैं जब भी बिखरा हूं, मैं और निखरा हूं॥

बहका तो बहुत बहका, संभला तो वली ठहरा ;

इस ख़ाक के पुतले का हर रंग निराला है..

ये तो पता है उसका मकान इस गली में है,

पर कौन सा है उसका घर ये तलाश जारी है..

पता नहीं कैसे परखता है तू मुझे,_

_ इम्तिहान भी कठिन लेता है और फेल भी नहीं होने देता !!

हम भी खामोश रह कर _ तेरा सबर आजमायेंगे,

देखते हैं अब तुझे हम _ कब याद आयेंगे..

तुम ना मिलो तो किसी और का हो जाऊं, _

_ इतना कमजोर भी नहीं है इश्क़ मेरा ..

इश्क की गहराइयों से खूबसूरत क्या है..

मैं हूं ____तुम हो__फिर__कुछ और की जरुरत क्या है..

फीकी है हर चुनरी….फीका हर बंधेज,_

_ जो रंगता है रुह को….वो असली रंगरेज..

मेरा इश्क _ मेरे खुदा _ आप ही हो…

आप को पाने की ख्वाहिश नहीं _ आप का होना ही काफी है..

मैं तुझसे कैसे कहूँ यार -ए- मेहरबां मेरे, _

_ कि तू ही इलाज़ है मेरी हर उदासी का.!!

हमने लाख छुपाया दुनिया से, _

_ पर महफ़िल में तेरा मुड़ मुड़ कर देखना बदनाम कर गया ..

तू तो आया था इश्क़ का पूरा आसमान लिए यार, _

_ मैं ही पंख फैला कर उड़ने की हिम्मत न कर पाया .!!

हो इश्क़ का रंग सफ़ेद यार _ ना छल, ना कपट, ना भेद यार !
अक़्लवालों के मुक़द्दर में ये जुनूँन कहाँ,

ये इश्क़ वाले हैं _ जो हर चीज़ लुटा देते..

कभी तो सोच कि वो शख़्स किस कदर था बुलंद, _

_ जो बिछ गया तेरे क़दमों में, आसमाँ की तरह

कुछ यूँ बन जा अब तू ख़ुदा -ओ- मुर्शद मेरा,,

मैं तेरी इबादत में किसी मलंग सा हो जाऊँ..

रंगत में डूब जाऊं तेरी संगत में डूब जाऊं._

_ बन के रगों में नगमा तेरी चाहत में झूम जाऊं.

जब बेफ़िक्र था तुझसे…..तब फ़िक़रें लगी हुई थीं,

जबसे फ़िक्र है तेरा…..बेफ़िक्र हो गया हूँ…

तुम इतने भी नादां नहीं हो की ” समझ ” न सको..!!

मेरी चंद लाइनों में सिर्फ तेरा ही ” जिक्र ” होता है ..!!!!

ख्याल में भी नहीं आता अब हमें _ #ख्याल किसी और का

…सिर्फ तेरे ही #ख्याल में इतने _ #बेख्याल रहते हैं हम..

तुम्हे खोजते-खोजते लापता हो गया हूँ खुद में ही…

कहीं मिल जाऊँ तो मुझे जरूर बता देना..!!

खुबसूरत रिश्ता है मेरा और तेरा,

ज्यादा मैं मांगता नहीं और कम तू देता नही….

गर तेरी….बंदगी नहीं होती !

ज़िन्दगी….ज़िन्दगी नहीं होती !!

ढूँढने चला था सबसे बेहतर यार.

तलाश तुम से शुरू हो कर तुम पर ही रुक गई.

भूलना चाहूँ तो भी तुम्हें नहीं भूल सकता यार.

मेरे मन की गहराई में तेरी तस्वीर जो बस गई.

जब मैं हर पल तेरी देख- रेख और निगरानी में हूँ,

__ तो इससे बड़ी और कड़ी सुरछा क्या हो सकती है.

_” जिसके साथ तू है _ वो असुरक्षित नही, जिसके साथ तू नही _ वो सुरक्षित नही !! “

तू साथ है तो _ कागज की कश्ती भी तैर जाएगी,

तू नही तो ये कहानी _ ताश के पत्तो सी बिखर जाएगी.

मेरे टूटने की वजह मेरे जौहरी से पूछ,

उसकी जिद थी मुझे और तराशा जाए.

लोग खुले दरवाजों पर भी दस्तक नहीं देते,_

_ और मैं बंद दरवाजों पर भी अर्जी छोड़ आता हूँ..

कुछ दरवाज़े कभी बंद नहीं हुआ करते _

_ बस हम ही खटखटाना छोड़ देते हैं..

मेरी मर्जी ने बगावत क्या की ?

बस, एक तू ही मिला ! बाकी सब रूठ गए !

ज़िस्म में और ज़िस्म से बाहर समाया मैं ही हूँ,

सारी कुदरत सामने जो कुछ नुमाया मैं ही हूँ.

अश्क़ बह गए आँखों से _ मगर इतना कह गए,

फिर आएंगे तेरी आँखों में _ तू अपना सा लगता है.

ये और बात है कि तेरे उड़ जाने का ग़म है,

लेकिन मै चाहता था कि तू आज़ाद रहे..

तुम से बिछड कर भी तुम्हे भूलना आसान न था,

तुम्ही को याद किया, तुमको भूलने के लिए !

ऐ काश तू भी सुनता कभी आहटों की गूँज,

तू भी मेरी तरह कभी ढूंढता मुझे…

दिल से पर्दा जो उठा, हो गयी रोशन आंखे

दिल में वह पर्दानशी था मुझे मालूम न था !!!!

सब पूछते हैं मुझसे, मेरी मुस्कराहट का राज़ _

_ पर फितरत नहीं है मेरी कि, तेरा नाम लेकर तुझे बदनाम कर दूं ..

अब तो तेरी मंजिल पे आ पहुंचे हैं तेरी चाहत में,

अब खुद को तुझमें और तुमको पाते हैं मुझमें.

तुम्हारे सिवाय मुझे इस जिंदगी में और कुछ नहीं चाहिए ;

_ थोड़े भी तुम और ज्यादा भी तुम, _आज भी तुम और कल भी तुम ..

रूठी जो जिंदगी तो मना लूंगा मैं, मिले जो ग़म वो सह लूंगा मैं ;_

_ बस यार तू रहना हमेशा साथ मेरे, तो निकलते आंसुओ में भी मुसकुरा लूंगा मैं ..

तुझे #याद ना करें तो, #बैचेन सा हो जातें हैं….!

पता नही ये #ज़िन्दगी सांसों से चलती है, या तेरी #यादों से चलती हैं…..!!

बेचैन सा हो जाता हूं, _ तुझे अपने करीब न पाकर ; _

_ क्या बोलूं _ मुझे _ आदत हो गई है तेरी..

आखिर क्यों तुम _ मेरे दिल के इतने पास हो,

कोई तो वजह जरूर है _ जो तुम इतने खास हो..

कुछ तो है जो मुझे तुझसे जोड़े रखता है,

कुछ तो है जो मेरा ध्यान सिर्फ तेरी और मोड़े रखता है !

” तुमने कहा था, आँख भर कर देख लिया करो “

_ अब आँख तो भर आती है, मगर तुम नजर नहीं आते !!

हम जिसकी खोज कर रहे हैं, वह कुछ नहीं है _

_ हमारे अंदर का खाली आकाश है..

हममें ये फ़ासला ज़रूरी है, क्योंकि तू भी समझ सके _

_ रिश्तों को निभाने के लिए, दूर रहना कितना ज़रूरी है..!!

रहने दे उधार इक मुलाकत यूँ ही..!!

सुना है..उधार वालों को लोग भुलाया नहीं करते…!!

तेरे साथ की दूरी, जो इतनी खूबसूरत है ;_

_ तेरे साथ की कुरबत क्या होगी ..

तुम उस की एक लौ जला कर तो देखो, _

_ कैसे तुम्हारा जीवन जगमगा उठेगा..

सफ़र-ए- ज़िन्दगी में एक तेरे साथ की खातिर _

_ उन मंज़िलों को भी छोड़ दिया, जो मेरे मुकद्दर में थीं !!

तेरी जरुरत,, तेरा इंतज़ार,, और ये कश्मकश,_

_थक कर मुस्कुरा देते हैं,, जब हम रो नहीं पाते !!

कुछ यूँ उतर गए हो, मेरी रग – रग मेँ तुम _

_ कि खुद से पहले, एहसास तुम्हारा होता है !!!

समन्दर हूं मै, __ तो किनारा है हो तुम,,_

_ जो बिखर जाऊ मै ,_, तो सहारा हो तुम,,

माना कि तेरे दीदार की हैसियत नहीं अपनी, _

_ फिर भी तेरे इंतज़ार का शौक पाल रखा है ..

मिलने को दुनिया में मुझे क्या – क्या नहीं मिला.. _

_ पर तू जैसा है _ वैसा कोई ना मिला…

हम बहुत से अरमान जिंदगी जीने के लिए चाहते हैं,, _ तूने मुझे वंचित कर के बचा लिया.
यात्राएं बड़ी थीं, सफर लंबा था ! _ फिर जहां पर छांव मिली, वहीं ठिठक कर बैठ गए .!!
कुरबान हो जाऊँ तुझ पर,_तू दरवाजा भी वहां से खोलता है,_जहाँ से उम्मीद भी ना हो !!
करने को बहुत काम थे अपने लिए मगर,,,_ हमको तेरे ख्याल से कभी फुर्सत नहीं मिली..
अब क्या ही नया सुनाएँ तुम्हें हम, __ तुम्हें देख कर सब भूलने की आदत है मुझे !!
मैं ढूंढ़ता रहा हर कहीं तुम्हें, _ अगर पूछता मैं तेरे बारे में किसी से !! तो क्या पूछता ..??
“ तुम गए क्या शहर सूना कर गए “,_ दर्द का आकार दूना कर गए..!
तेरे ज़िक्र भर से होती है मुलाक़ात जैसे…,, _ _तेरे नाम से भी इस क़दर इश्क़ है मुझे….
कभी आया तो नही तेरे पास, _ पर तेरी याद मुझे महका जाती है..
कैसे रहूं तुझे याद किए बिना _ बात बात पे तेरी बात याद आती है !
अब तो सिर्फ तुमसे ही बात होती है _ और किसी से बात करने का मन होता ही नहीं .!!
लाज़मी है तुम्हारा खुद पर गुरुर करना _ हम जिसे चाहें _वो मामूली हो भी नहीं सकता.
तू बेखबर सा रहता है, खबर भी रखता है _ बात भी नहीं करता और प्यार भी करता है..
तेरी शिकायत करूँ भी तो किस से करूँ, _ हर किसी को तुझे मैंने ” अच्छा बताया है.”
तुझसे अच्छी तो तेरी यादें हैं, _ कम से कम मेरे करीब आ एक मुस्कान तो दे जाती हैं.!
अपने अपने हौसले अपनी तलब की बात है _ चुन लिया तुम्हें सारा जहां रहने दिया !!
बड़ा खुशनुमा सा है ये अहसास तेरा _ तू साथ है मेरे ये कोई ख्वाब तो ना है मेरा ..!
नशे की आदत तूने लगाई है, _ वरना कभी मैं भी होश में जिया करता था !!
बारिश की तरह तू बरसता है मुझ पर, _ मिट्टी की तरह मैं भी महकता चला जाऊं..
लोग समंदर की बात करते हैं _ मैं तो तुझ में ही डूब जाता हूँ !!
जो बाहर की सुनता है, बिखर जाता है.. _ जो भीतर की सुनता है, निखर जाता है..
नसीब क्या होता है ये तो मुझे मालूम नहीं _ पर तू मेरी सुनता है ये खबर पक्की है.
तेरी निगाह ने कुछ ऐसा दिखा दिया, _ यूँ ही नही दांव पे सब अपना लगा दिया..
न जाने किसकी #_ दुआ काम आई ..!! _ आखिर तू #_ मिल ही गया मुझे..!!
एक इश्क़ का दर्द ना हो तो, ज़िन्दगी कुछ नहीं, _ रोग भी लाजवाब, दवा कुछ भी नहीं..
जब से तुम से इश्क़ हुआ है, _ तब से बोलता कम हूँ और मुस्कुराता ज्यादा हूँ..!!
जब से लगाया है तेरे इश्क़ का चश्मा, _ ये दुनियां बेहतर नज़र आने लगी है..!!
मेरी पसंद हमेशा लाज़वाब होती है _ यकीन न हो तो _ अपनी तरफ देख लो !
दुनिया में जीने के दो तरीके हैं _ एक तुझे नहीं आता, दूसरा मुझे नहीं आता..!!
एक अजीब सी बैचेनी है तेरे बिन, _ रह भी लेते हैं, और रहा भी नहीं जाता ..!!
शायद तू बेहतर की तलाश में है, _ और मैं तो अच्छा भी नही…!!
जब भी तुझे याद करता हुँ _ कुछ अलग रंग में रंग जाती है ..ये दुनियाँ !!
शायद तुम्हे खबर नहीं _ तुम्हारी याद मेँ _ मैं कितनी बार रोया..
कौन चला गया ये ज़रूरी नहीं मेरे लिए ,,,_ तुम साथ रहना ये ज़रूरी है..!
जब बहने में ही मज़ा आने लगे, – तो भला तैरने की फिक्र कौन करता है !
एक तू जिसको के देखा न था, _ तुमको सोचेंगे इतना _ ये सोचा न था.
जो कीमती है वो मुझे बहुत पसंद है _ इसका सबसे बड़ा सबूत तुम हो..!
मैंने वहाँ भी सिर्फ ” तुझे ” ही माँगा,, _ जहाँ लोग अपनी ” खुशियाँ ” माँगते हैं,,!!
मैं पा तो लूँ जहाँ भर की खुशियाँ.. _ लेकिन उनसे तुम्हारी कमी कहाँ पूरी होती है..
तूने दीवाना बनाया तो मैं दीवाना बना, _ मुझे होश की दुनिया का तमाशा न बना.
साकी तेरी निगाह की मस्ती में डूब कर मैं होश में न आऊं _ ” अगर मेरा बस चले..”
फासले तो है उससे पर इतने भी नहीं, _ कि मैं ख्वाब में बुलाऊं और वो ना आए..!!
आंख भिगोने लगी है अब यादें तेरी _ काश अब तो आ जाते तो _ अच्छा था ..!
तुमसे नजदीकियां इस हद तक हैं…के मिलन का कोई सवाल ही पैदा नही होता.
तुम मिल गए हो, अब तो सोचना ही नहीं कि कोई और भी ज़रूरत है ज़िंदगी में. !
जो “जानता” है वो जानता है कि बताने की कोई जरुरत नहीं _ जानना काफ़ी है.
मुझे तो इंतजार करने से मतलब है _ बाकी तुम्हारी मर्ज़ी _ मिलो या ना मिलो..
जो खुद से बिछड़ जाते हैं , _ फिर वो दुनिया से नहीं मिलते…
चाहे कितना भी वक़्त ले लो, _ ,,,,,,”पर आना जरूर” सब्र बहुत है मुझमें…!!!
उठी ही नहीं निगाहें किसी और पर, _ तेरा दीदार हमें इतना, पाबंद कर गया..!!
ऐ यार ! कैसे कहूं मेरा खयाल नहीं तुझे,, मुझसे ज्यादा तो _ तूँ जानता है मुझे..
तुझ से दोस्ती हुई तो पता चला कि _ तुझसे बेहतर मुझे कोई नहीं जानता ..!!
उसके छूने से ही जानोगे तुम उसे _,, तुम्हारे छूने से वो छुआ नहीं जा सकेगा….
कुछ इसलिए भी हम मरते हैं तुम पर, _ के जीने का खूबसूरत बहाना हो तुम !!
तेरा साथ जो मिला मुझको, _ तब कहीं जा के ज़िन्दगी ” ज़िन्दगी ” हुई …!!
” तू बेशक सबसे बात कर ” ,लेकिन मैं भी ख़ास हूँ, _ इसका भी ध्यान रख..
मैं उसमें रहता हूं, वो मुझमें रहता है _ फिक्र नही जमाना अब क्या कहता है..
फिर ना आया खयाल जन्नत का …. जब से तेरे दर का रास्ता देखा है ….!!!
नहीं कुछ भी रहता है अब ध्यान मुझको _ ये बेफ़िक्री मेरी बनी ज़िन्दगी है.!
जब से ज़िन्दगी में, तेरी कमी सी है, _ इन आंखों में _ हर पल, नमी सी है..
कैसे कह दूँ कि मुलाक़ात नहीं होती, _ रोज़ मिलते हैं मगर बात नहीं होती..
और क्या चीज कुर्बां करूँ आप पर ? दिल जिगर आपका, जिंदगी आपकी..
देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से, चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से.
पलकों पर रुका है समंदर खुमार का _कितना अजब नशा है तेरे इंतज़ार का.
तू देख मेरी चाहत को _ अब तो तेरा जिक्र _ मेरी मन्नतों में होने लगा है .!!
मैं कहां अपनी मनमानी करता हूँ, तेरी मर्जी के खिलाफ कुछ नहीं करता हूँ..
मेरी बंदगी में ही कुछ कमी है,,,_ वरना तेरा दर तो रहमतों का खजाना है…
करने दे आज मुझे मस्ती में रक्स _ ख़्वाब में यार के गले मिल आए हैं हम..
नहीं होते फिर भी होते हो तुम, _ न जाने क्यूं हर वक़्त महसूस होते हो तुम !
लाख संवार लूं मैं अपनी जिंदगी को, _ तेरे बिना कुछ कमी तो ज़रूर रहेगी !!
बहुत कुछ देख लिया है इस जिंदगी में,_मगर जिंदगी सिर्फ तुझमे दिखी..
बहुत नजदीक से देखा है,_ दुनिया को … तब ही तो दूर बैठा हूँ मैं सबसे..
मेरी उससे ऐसी भी होती है बातें _ ना वो बोलता है और ना मैं बोलता हूं..
एक मुद्दत से देख रहा हूँ तुम्हें,, और लगता है अभी एक झलक देखा है….
अच्छा लगता तुम्हें याद कर के, _ जाहिर नही होने देता, ये अलग बात है.
कुछ इस तरह जीऊं मैं तुम्हारे बगैर _ जिसमें तेरे होने का ज़िक्र होता रहे..!
हर तरफ़ दिखता है बस एक तू ही, _न जाने तूने मुझ पर क्या कर दिया है.
कभी ” खुद ” से मिला मेरे मौला … थक गया हूं गैरों से मिलते मिलते..
तुम्हारी नज़र में जो देखा है ख़ुद को, _ मेरी ज़िंदगी में बहार आ गई है…
तुमसे मेरा जुड़ना _ जैसे जिंदगी का एक और हिस्सा जुड़ गया हो ..!!
बहोत सी राहों में, एक राह तो वो होगी, _ तुम तक जो पहुंचती है…”
दुआ का यूँ तो कोई रंग नहीं होता,_ मगर दुआ जरूर रंग लाती है.
अब साथ नहीं किसी का, _ आसमां में अकेले ही शान से उड़ता हूँ.!!
अब छोड़ नहीं पाऊंगा तुम्हे, _ तू मेरी बिगड़ी हुई आदत सा हो गया है..
समझ नहीं पाता मैं भी तेरे इशारे _ तू भी खुल के कुछ कहता नहीं है…
अब वो शख्स भाता नहीं है, _जो हर पल सिर्फ तेरी ही बातें ना करे….
जिसे पा लिया वो मोहब्बत ही क्या, _ जो सुलगता रहे वही इश्क़ है..
मैं काबिल तो नहीं तेरे लिए _ पर ये चाहत- ए- जिद्द है तुझे पाने की.
थोड़ी सी रोशनी मांगी थी तुझ से, _तू ने तो आग ही लगा दी !!
मेरी आँखों ने जो कुछ भी कहा है, _ वो सिर्फ तूने ही पढ़ा है..
तू बिलकुल चाँद की तरह है, _ नूर भी, गुरुर भी, और दूर भी..
उम्मीद जब तुम से लगी हो तो _ टूटने का खौफ नहीं होता !!
इस नफ़रत भरे जमाने में, _ एक तुम से ही तो खुश हूँ मैं …!!
आवाज़ देता है दिल बेहिसाब तुझको _ हो सके तो जरूर आना…
देर से ही आ जाना, _ शक्ल तो दिखा जाना…
” _ तेरे एहसासों को हर रंग मेँ ढूंढा मैंने, _ मगर तेरे एहसास जैसा कोई रंग ना मिला _”

“_ तेरे सिवा भी कई रंग थे हसीन मगर,_ जो तुझको देख चुका हो, वो और क्या देखे…!!

” _ तेरे रंग में रंग कर ही तो मैं..खुशनुमा हूँ,_ तुम ही तो हो मुझमें… मैं कहाँ हूँ .._”

” _ मैं तो खुद बेरंग हो गया , _ _तेरे इश्क़ को रंगीन करते करते ….._ “

” _ रंग बदलती इस दुनिया में., मुझे मेरा, _बेरंग होना पसंद आया …_”

” _ हज़ार रंग हैं इस दुनिया में _ मैं रंगना चाहूं _ बस तेरे रंग में…!! _”

“_ धीरे – धीरे तेरा रंग चढ़ गया _ चढ़े तो उतरे ना …..वह है रंग _”

“_ तमाम रंग लगा कर देखे, _ तेरे एहसास जैसा कोई रंग नहीं _”

” _ हर रंग में जला हूं यार, _ इसीलिए इतना रंगीन बना हूं .!! _”

” _ रंगों से सीखा है, _ अगर निखरना है तो बिखरना पड़ेगा.!!_ “

_ ” जब तलक तू मेरे संग है, _ _हर तरफ रंग ही रंग है_ “

” _ हर रंग कुछ कहता है,, __ कभी रंगहीन हुआ कर.. _”

” _ तुम्हें महसूस करके _ मैंने ख़ुद को रंग लगा लिया ! _”

” _ सारे रंगों के मायने _ _एक तुम्हारे होने से है _ “

” _ रंगो में वो रंग कहां _ जो रंग _ लोग बदलते हैं _”

कोई पागल भी इतना पागल नहीं होगा, _ जितना मैं तेरे लिए हूं..
कोई मेरे आंखों से तुम्हे देखे तो समझे, __ की तुम मेरे क्या हो…
जब कुछ कह न पाँऊ _ तो रो लेता हूँ _ तू तो सब जानता है ना..
भटके हैं हम कहां कहां, _ झांका जो खुद में तो तेरा पता मिला !!
इतना असर रहता है तेरी यादों का _ कि बिना बात मुस्कुराता हूँ..
जब से तुमसे जुड़ा तब से __हर बात जैसे मेरे हित में हो जाती है.
मेरी रूह की तलब हो तुम, _ कैसे कहें अलग हो तुम !!
दोनों ने ही छोड़ दी फिकर, __ उसने मेरी….._ मैंने खुद की..
तुम मेरी वो कमी हो, _ जो कोई भी पूरी नहीं कर सकता ..!!
नजर अंदाज ना कर …..वो भी दिल से चलता है _ रब है ..वो..
मुझे तेरे सिवा कोई नहीं जानता, _ और तो सब पहचानते हैं…
खुद को खोकर खुद को पाना, _ ऐसा होगा…उसका दीवाना.
मैं दीवाना हूँ उसका,,,,,,, _ ,,,,जो किसी को नहीं दिखता….
जब ठिकाना ही तुम हो, तो खुशियां दुनिया में और कहां ढूंढे..
कभी यूँ भी आ मेरे रु -ब- रु _ कि तुझे पास पा के मैं रो पडूँ..
अपने कदम के निशां बनाते चलना,_ अपने घर का पता कुछ यूँ दे देना !
हमें रास्तों की जरुरत नहीं, _ तेरे पैरों के निशान मिल गये हैं.
तुम्हारे जैसा कोई मिला नहीं _ कैसे मिलता _ था ही नहीं..
मुझे तेरी आवाज का मरहम चाहिए __ पुकारो ना _ मुझे..
तुम तक जो पहुँचा दे मुझे..!! _ वो पता चाहता हूँ मैं….!!!!
तुम से मिल कर लगता है _ मैंने जीने में कितनी देर कर दी..
क्यों करूं परवाह जमाने की _ मुझे नजरें तुझ से मिलानी हैं.
भेद तेरा कोई क्या पहचाने, जो तुझ सा है वो ही तुझे जाने..
तेरा आगाज़ जब से हुआ है ! जीवन का शुभारंभ हुआ है !!!!
जो अपनी तस्वीर बनाई, _ वह तस्वीर तुम्हारी निकली ….!
कुछ यूँ मिली नज़र तुमसे, _ बाकि सब नज़रअंदाज़ हो गये.
तू ही जानता है,_ तू किस कतरे को,_ कब दरिया करेगा…
जब जब मन अशांत हुआ ,एक तुम्हें देख कर ही शांत हुआ..
तू मेरी ख़ामोशी नहीं सुनता, मुझसे आवाज़ दी नहीं जाती..!
तेरी यादों का इतना नशा है _ की उस नशे में ही रहता हूँ..
तुझको चाहने के बाद, _ कोई और मुझसे चाहा न गया..
मैंने तुम्हें ही चाहा, _ _ औऱ तुमसे कभी कुछ नहीं चाहा…
तुम्हें पाने के बाद, _ कुछ भी पाने को बाकी ना रहा..!!!!
ख्याल रखना अपना, _ मेरे पास तुम्हारे जैसा कोई नहीं..
जो मौसम बदलता है, _ वो मुकद्दर भी बदल सकता है.
मैं जिसकी बात करता हूँ, _ कोई तो बात उसमें होगी..
मेरी इच्छाओं से ज्यादा सुंदर, तेरी योजनाएं होती हैं,,!!
तेरा वजूद मुझमें मौजूद, _ यही है तेरे होने का सबूत..
मैं देखूं तुझे करीब से, _ मेरे शौक हैं बड़े अजीब से !
सांसे तो बस नुमाईश है !!!! मेरी ज़िदंगी तो तुम हो
एक तुम साथ हो तो _कोई और चाहिए भी नहीं…
चाहे कितना भी वक़्त लगे, मुझे सिर्फ तू चाहिए ..
कि तुम ही ज़िंदगी हो _ तुम ही जीने की वजह हो.
यूँ चुप्पियों में रहकर भी _ मैंने तुमसे बात की है..
गुज़ारिश है तुमसे कि _ तुम हकीकत बन जाओ..
अब जब तू साथ है तो _ कुछ भी असंभव नहीं..
इंतजार हमेशा रहेगा,_ बस कभी आवाज़ नहीं दूंगा..
जबसे तेरे गुलाम हुए, _ तब से अपने मालिक हुए…
तुम साथ हो तो फिर क्या डरना _कर लेंगे हर मंज़िल हर ख्वाब अपना.
कुछ अनूठा ही रिश्ता है मेरा तुम से, तुझे सोचने से ही सुकून मिलता है.
तेरी यारी ने सुकून इतना दिया कि, _तेरे बाद कोई और अच्छा न लगा..!
मुझे नहीं चाहिए तुमसे बेहतर, _ मुझे तो तेरे साथ ही सुकून मिलता है…
मंजिल मिले या न मिले, _ तुम साथ हो तब और कुछ चाहिए भी नहीं..
तुम्हें ढूंढ़ती हैं मेरी निगाहें, _ अगर हो सके तो आके चेहरा दिखा दो …!
मुझे भाता है अंदाज़ तुम्हारा _ ! अदा तुम्हारी मिज़ाज़ तुम्हारा _ .!!
अब मैं हर वक़्त महकता हूँ, _ मैंने तुम से जो हाथ मिला लिया है..
तेरी एक झलक से _ ऐसा लगा की जैसे ज़िंदगी मिल गयी हो..!!
तू ही बात समझता है मेरी .. _ दुनिया तो सिर्फ सुन लेती है..!
तुझे देख के जो मिलता है, _सारा मसला उसी सुकून का है.!!
वक़्त थोड़ा लगा ..! ऐ यार, _ तेरे करीब तो आ गया..!!
तेरी नजरों का ही कमाल है _ जो मैं तेरे इतने करीब हुँ..!
अपनी राह बनाऊँ कैसे _ बोलो तुम तक आऊँ कैसे ..!!
तू मिलता नहीं रोज रोज _ पर याद आता है हर रोज ..!!
मुझे सुकून की तलाश थी, और फिर तुम मिल गए..
मै आवाज भी न दूं………और तुम चले आओ…..
बहुत आई गई यादें.. मगर इस बार तुम्हीं आना…
ऐ यार ,,, जिंदगी का कोई रंग न छुपाना मुझसे…
कब तक तेरी राह मैं देखूँ _ कब तू बोलेगा .?
तुम से मिलना _ सबसे मिलने जैसा होता है..
तुम ही जरुरी हो, _ अगर तुम समझो तो ..!
तेरे होते हुए मेरी हार, नामुमकिन है मेरे यार..
तराशा गया जो हमें, हम ही में हम ना मिले..
बहुत कुछ था सीखने को ! _ और हमने बेफिक्री सीखी !!
जब से हुई तेरी फिक्र, बेफिक्र हो गया हूँ.
रब तेरे हाथों में हूं मैं, इसलिए बेफिक्र हूं.
मुझे तेरी यादों में रहना अच्छा लगता है..
हूँ अकेला भी, पर उसके साये में भी.
मैं खुद से दूर _ तू मुझमें मौजूद ..!
जब से मै तुम से मिला, मेरा जीवन भी खिला दिया_

तुमने मेरे जीवन में, आनन्द का रंग भर दिया._मेरे यार,

लाजवाब हो तुम ; हर वक़्त आते हो याद. _

_ जब से मै तुम से मिला, मेरा जीवन भी खिला दिया.

ऎसा कोई गीत सुना दे, जीवन का सूनापन मिटा दे._

_ ऎसा रस तू ही बरसा दे, जीवन में नया रंग खिला दे.

मै जैसा चाहता था वैसा तूने बना दिया.

_ कोई कुछ भी कहे मुझे बेपरवाह बना दिया._

_ बोझिल जीवन को मस्त बनाना सीखा दिया._

_ जीवन को रंगीन बनाना सीखा दिया._

_ मै जैसा चाहता था वैसा तूने बना दिया.

जीया भी नहीं हूँ, मरा भी नहीं हूँ._ समय सारा चिन्ता को मैंने दिया है._

_ जीने का ढंग भी तूने सिखाया, _ जीवन को रंगना भी तूने सिखाया.

कोरा कागज – सा था जीवन मेरा._ _ ऐ यार, तूने ऎसा रंग लगाया._

_ उलझा था मन दुनिया की उलझन में._ _ ऐ यार, तूने आकर सुलझाया._

_ मन के अँधेरे दूर हुए. __ ” आकर तूने दिया जलाया. ”

धन्यवाद है, ज़िन्दगी में रंग लाने के लिए._

_ वीरान थी ज़िन्दगी, ठहरी – सी ज़िन्दगी._

_ तूने आकर मुझे झझकोरा. _ सोयी वीणा के तारों को तूने छेड़ा._

_ धन्यवाद है, ज़िन्दगी में रंग लाने के लिए.

एक और शाम बीत चली है तुझे चाहते हुए !

_ तू आज भी बे-खबर है, बीते हुए कल की तरह !

तू नहीं लेकिन तेरी आहट होती है, _

_ यही सोचकर मेरे चेहरे पर मुस्कराहट होती है…

यक़ीनन वो बेइंतहा खूबसूरत बंधन था हमारा, _

_ न उसने कभी क़ैद किया, न मैं कभी फ़रार हुआ ..!!

कदम कदम पर तू मुझको संभाल लेता है !, _

_ हर एक बला से तू मुझको टाल देता है .!!

ना जाने कितने काश, अगर, मगर दफ़न हैं मुझमे, _

_ कभी फ़ुरसत में आओ तो मिलकर बताएंगे तुम्हें .!!

उलझा रही है मुझको ये कशमकश अंदर से…

_ कि तुम बस गये हो मुझमे या हम खो गए है तुझमे…!

तड़प रहे हैं तुमसे एक अल्फाज के लिए, _

_ तोड़ दो खामोशी हमें जिन्दा रखने के लिए..!

तेरी एक नज़र ने खरीद लिया हमे, _

_ बड़ा गुमान था कि हम बिकते नहीं ..

तुम ख़ास थे, इसलिए लड़े तुमसे.._

_ पराये होते तो मुस्कुरा कर जाने देते..

लगा लिया तेरे इश्क़ को इत्र की तरह, _

_ अब हम में तुम ही तुम महकोगे ..

फिक्र तो तुम्हारी आज भी करते हैं ;

_ पर हमारी बदनसीबी तो देखिये, _ बस जिक्र नही कर सकते ..

इंतज़ार तो खुशियों का है, _

_ मगर मालूम है कि तुम्हारे आते ही _ यह भी अपने आप आ जायेंगी ..

जिंदगी के आइने पर हर वक़्त एक अजनबी की सूरत है.

_ तुम्हें हो या ना हो लेकिन मुझे तेरी जरूरत है…

कभी कभी यूं ही चले आया करो दिल की दहलीज पर… ऐ यार _

_ अच्छा लगता है, यूँ तन्हाइयों में तुम्हारा दस्तक देना…!

कोई तो है मेरे अंदर, मुझे संभाले हुए .. _

_ बेकरार सा रह कर भी बरकरार हूँ ..!

वाह रे मौसम , _ तूने आज खुश कर दिया, _

_ मुझे उनकी याद आयी और बरस तू गया..

मेरे अल्फ़ाज़ भी तेरी खुशबू में महकते हैं, _

_ तेरे जिक्र में बहकते हैं और तेरे सजदे में बिखरते हैं ..

माफ़ी चाहता हूं, _तुम्हारी नींद ख़राब करने के लिए ;

किस्मत वाला हूँ मैं, _ मैं ख्वाबों में भी किसी ख़ास से ही मिला करता हूँ ..

इस जीवन का इक अधूरा सपना पूरा हो गया ;

_ तुमने जो अपना कहा _ तो सारा ज़माना पराया हो गया ..

अब जो तू, मेरी जिंदगी में आया है _ तुम क्या महसूस करोगे इसे, _

_ मैंने तो हर जगह तुम्हें अपने साथ पाया है ..

मुझे मालूम था कि आज भी तुम नही आओगे, _

_ मगर फिर भी इंतज़ार किया खुशी से ..

तुम से आगे .,हम सोचते भी क्या…!!

तुम से आगे _ कोई ख़्याल ही नही जाता…!!

और कोई नही है जिंदगी जीने के लिए, _

_ सब कुछ तो लुटा दिया, इसलिए तुम्हें खोने से डरते हैं ..

ए यार बस इतनी ही ख्वाहिश है मेरी, _

_ मुझे दुनिया जहान की कभी हवा न लगे ..

ए यार …. या तो हमसे यारी रख, _

_ या फिर ….दुनिया सारी रख.

हमनें तो कह दिया है कि जैसे जहाँ मर्जी,_

_ अब ये तुम्हें देखना है कब कहाँ कैसे..

ऐ यार, वो दिन मत दिखाना कि लोग मुझे कहें, _

_ कि तूने भी ग़मे दुनिया से हार मान ली..

यूँ ना देखो इस नज़ाकत से हमें, _

_ तुम्हारी हर अदा के हम तो पहले ही दीवाने हैं !!

जब से तेरे आने की ख़बर आयी है, _

_ ” नज़ारा कुछ ऐसा है ” जैसे पतझड़ में बहार आयी है..

जो मांगना ना आए तुझे, तो खाली हाथ फैला दे ,,,

_ वो बंद लबों की इल्तजा सुनता है,,,

तेरा दर ढूंढ़ते -ढूंढ़ते जिदंगी की शाम हो गई,_

_ जब तेरा दर देखा यार, तो जिदंगी ही तेरे नाम हो गई ..

मेरी रूह में समाई है तेरी खुशबू.., _

_ लोग कहते हैं तेरा इत्र लाजवाब है..

तुझसे मिल कर दुःख भी हँसता._

_ तेरे प्यालों में पड़ के विष भी अमृत बनता._

_ कर देते हो सबको मतवाले,_ ” अपने ही रंग में रंग देते हो.”

दुःखों की धूप में तू छांव बन कर आया है.

मेरी हर तकलीफ को तूने हर बार मिटाया है.

कैसे करूं तेरा शुक्रिया मेरे यार,

तू ने ही तो मुझ जैसे कंकर को हीरा बनाया है.

तेरी याद में जब आँसू, आँखों में आते हैं ll

एक दर्द उठे मीठा, और हम मुस्काते हैं l

तेरी याद में जब आँसू …

जब दुनियाँ सोती है, हम रात को जगते हैं ll

जब दुनियाँ जगती है ll, तब ‘हम खो जाते हैं ll’

तेरी याद में जब आँसू …

तेरे मिलने की आस नहीं, पर प्यास जगी दिल में ll

तड़फेंगे या कि मिलें ll, ‘राजी हुए जाते हैं ll’

तेरी याद में जब आँसू …

सब टूट चुके बन्धन, मन कर रहा वन्दन ll

दिन रात तेरे नग्मे ll, हम ‘गाए जाते हैं ll’

तेरी याद में जब आँसू … Anandmurti Gurumaa

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