सुविचार – “मैं अकेला नहीं हूँ” – 325
“कोई तो है मेरे भीतर मुझे सँभाले हुए –
_”मेरे भीतर का मौन सहारा ही मुझे हर बेक़रारी में संभाले हुए है”
“मैं अकेला नहीं हूँ—
मेरे भीतर कोई अदृश्य सहारा है।
वही मुझे थामे रखता है,
“कि मैं बेक़रार होकर भी बरक़रार रह पाता हूँ”







