सुविचार 488
गुण स्वयं सामने आ जाते हैं क्यों कि कस्तूरी को अपनी उपस्थिति प्रमाणित नहीं करनी होती है.
अब कोई वजह नही मिलती मुस्कुराने की..
फिर क्यों नहीं सब पे विश्वास होता हैं !!
इंसान चाहे कितनो भी आम हो….!
वो किसी न किसी के लिए जरुर खास होता हैं !!
जीने की मेरी ख्वाहिशें . कुछ और बढ़ गईं.
ये साफ़- सुथरी ज़िन्दगी, उस मिट्टी से भी ज्यादा गन्दी है.
कि वापिस भी लेने पड़ें तो खुद को कड़वे न लगें.