सुविचार 210

अपने लिए निर्णय लेने का अधिकार दूसरे को मत दो.
Do not let others make decisions for you.

 

सुविचार – “कोई मेरी ख़ामोश मौजूदगी में भी सहज रहे” – 209

“कोई मेरी ख़ामोश मौजूदगी में भी सहज रहे”

“ज़िंदगी का यही मतलब है… जब मैं बिना कुछ किए आराम कर पाता हूँ, और मेरे पास कोई ऐसा होता है जिसे मेरी मौजूदगी से कोई परेशानी नहीं होती”
_ यह बिल्कुल सही, गहरी और मानवीय भावना है.
– क्यों यह सही है ?
1. मनुष्य को सुरक्षा और सहजता चाहिए..
_ हम सबके भीतर एक शांत इच्छा होती है — कोई ऐसा हो जिसके सामने हमें खुद को साबित न करना पड़े… न कोई दिखावा, न कोई रोल.
_ बस “मैं हूँ, इतना काफी है” वाली भावना..
2. सच्चा रिश्ता वही होता है.. जहाँ आपकी उपस्थिति बोझ न हो.
_ जब कोई आपकी मौजूदगी में खुद बना रहे और आप उसकी मौजूदगी में… तो वही वास्तविक जुड़ाव है.
_ ये बहुत दुर्लभ और बहुत मूल्यवान होता है.
3. शांति “करने” में नहीं, “होने” में मिलती है..
_ कभी-कभी ज़िंदगी का सबसे सच्चा अर्थ तब मिलता है जब हम कुछ नहीं कर रहे होते… और फिर भी पूरा महसूस करते हैं.
__ अगर आपको ऐसा कोई क्षण मिले, कोई व्यक्ति मिले, या सिर्फ अपने भीतर ऐसी शांति मिले–
_ तो समझिए कि आप सही दिशा में हैं, क्योंकि मन वहीं आराम पाता है.. जहाँ उसे स्वीकार किया जाता है.!!
“जब कोई मेरी ख़ामोश मौजूदगी में भी सहज रहे, वही रिश्ता असली मायने रखता है”

मस्त विचार 050

मै चैन से सोने लगा हूँ.

जिन्दगी ने वो तकलीफ है बख्सी.

मौत का खौफ खोने लगा हूँ.

काबिले भरोसे का कोई,

इन्सान नहीं मिलता.

पत्थरों से मन लगाने लगा हूँ.

लुटा रिश्तों के हाथों में इतना.

और लुटवाने कि हिम्मत खो चुका हूँ.

सच जानने कि जिद अधूरी रहेगी.

आदर्शों को अपनाना न सम्भव हुआ.

बे- परवाह अब मै सोने लगा हूँ.

मस्त विचार 049

अच्छा लगा, तेरा बोलना, बतलाना.

अच्छा लगा, तेरा हँसना, मुस्कुराना.

अच्छा लगा, तेरे संग में चलना.

अच्छा लगा, तेरा मिलना, मिलाना.

पर अब दुःख है तेरे जाने का.

तू जो अब तक साथ रहा.

हर दिन तुमने मुझको कुछ सिखलाया.

सुख- दुःख में भी मेरे साथ रहा.

पर फिर भी कहूँगा, अच्छा लगा.

मस्त विचार 047

सिर्फ एक ही तमन्ना रखते हैं हम अपने दिल में..

बस महोब्बत से याद करो चाहे मुद्दतों न बात करो..

मस्त विचार 046

 क्यों जिन्दगी की राह में मजबूर हो गए,

इतने हुए करीब के हम दूर हो गए,

ऐसा नहीं के हम को कोई भी खुशी नहीं,

लेकिन ये जिन्दगी तो कोई जिन्दगी नहीं,

क्यों इसके फैसले हमे मंजूर हो गए,

पाया तुम्हे तो हम को लगा तुम को खो दिया,

हम दिल पे रोये और ये दिल हम पे रो दिया,

पलकों से ख्वाब क्यों गिरे क्यों चूर हो गए.

मस्त विचार 045

 कभी हंस लिया तेरे बिना, कभी रो लिया तेरे बिना.

कभी जग लिया तेरे बिना, कभी सो लिया तेरे बिना.

भरी दुनिया में अकेला हूँ तेरे बिना.

कभी हंस लिया तेरे बिना, कभी रो लिया तेरे बिना.

मस्त विचार 044

ऐ यार, अब तो फासले मिटा दे,

नामुमकिन को मुमकिन बना दे,

तुम से ही एक रिश्ता है यारी का,

इन्तजार की घड़ियां मिटा दे.

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