| Jan 11, 2014 | सुविचार
दो लोगों का रिश्ता तभी सुखद तब होता है,_जब दोनों को महसूस होता है कि
_उसे जो मिला है_वो उसकी उम्मीद और योग्यता से ज्यादा है.
अपनी तरफ से किसी भी रिश्ते को आप अपना 100% दो, पूरी सिद्दत से निभाओ..
_ बिना ये सोचे कि सामने वाला क्या कर रहा है, कितना कर रहा है,
_ ताकि जब रिश्ता टूटे तो आप सकून में रहो कि आपने दिया अपना सब-कुछ..
_ ये उसकी बदक़िस्मती है कि उसे सहेजना नहीं आया.!!
रिश्तों को सहेज कर रखने वाले सुखी जीवन व्यतीत करते हैं,
_ और लापरवाही करने वाले दुःखद स्थितियों को आमंत्रित करते हैं.
सबकी सोच अलग होती है, जिस बात से हमें ख़ुशी होती है,
_ दूसरे उसी बात के लिए अपनी संकीर्ण बुद्धि से अच्छे संबंध खो देते हैं.!!
अपनों से अपनापन चाहिए तो बेवजह ही मिलिए,
_ क्योंकि कई रिश्ते केवल बुलावे के इंतजार मे ही बिखर जाते हैं.!!
‘सबसे महत्त्वपूर्ण वक़्त होता है’
_ कल तक जो पंखा अपना था, आज कंबल सगा लगता है.!!
बिखेरना तो सबको आता है.. मज़ा तब है जब बातें, रिश्ते और घर समेटने का हुनर भी हो.!!
हमने वो ‘रिश्ते’ भी देखे हैं.. जो ‘बेनाम’ होकर भी ताउम्र ‘साथ’ निभाते गये.!!
जो दूर रहते हैं “उन रिश्तों में मिठास बनी रहती है” पास रहने से वो बात नहीं रहती..
ज़िन्दगी में रिश्ते ऐसे बनाओ, सामने वाले को झूठ बोलने की ज़रूरत न पड़े न और आपको सच जानने की..!!
ऐसे किसी भी रिश्ते से दूर रहें..
_ जिसकी नींव सच्चाई पर ना टिकी हो या जो सच्चाई को बर्दाश्त न कर सके.!
लोग रिश्तों की डोर तोड़ कर कहते हैं कि आप उनसे बात क्यों नहीं करते.!!
बेवज़ह के रिश्तों को ढोने से अच्छा है..
_ हल्की मुस्कान के साथ उसे मुक्त कर दिया जाए..!!
“रिश्ते कम हों, पर मेरे हों”
“जब हम अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी को ढूंढना बंद कर देते हैं
_और इसके बजाय किसी और की जरूरतों को पूरा करने के लिए रिश्तों का उपयोग करना शुरू कर देते हैं,
_ तो हमारे रिश्ते अधिक मजबूत और अधिक संतुष्टिदायक हो जाते हैं.”
सच है कि.. रिश्ते कमाये जाते हैं, उन्हें सिर्फ याद ही नहीं रखते हैं बल्कि उन्हें जीते हैं और जीना भी चाहिए,
_ख़ून के रिश्तों से प्यार के रिश्ते अधिक ज़िंदादिल होते हैं.
_ होता यह है कि ब्लड रिलेशन [ Blood Relation ], अपेक्षाओं [ expectations ] के चरम को छूकर जजमेंटल होने लगते हैं.
_ ब्लड रिलेशन तो हमें मिलते हैं ..लेकिन उनके बीच कभी स्वार्थ और कटुता भी आ जाती है..
_ इसके विपरीत किसी से भी मिले स्नेह संबंध [ Affection Relation ] गहरी आपसी समझ से महककर खिलते हैं..
..कमाये हुए रिश्ते कभी खत्म नहीं होते, उन्हें प्यार से सींचते रहिए बंस..!!
..मेरा दिल तो यही कहता है..!!
“रिश्तों की मजबूती ही सफल जीवन का आधार”
हमारे जीवन मे रिश्तों की जो कीमत है वह साधारणतया हम लोग नहीं समझ पाते,
परंतु वास्तव में आपके रिश्ते भी आपकी ताकत होते हैं !
अपने रिश्तों को मजबूती प्रदान कीजिये !
रिश्तों की नींव प्रेम और त्याग पर ही टिकती है !
जितना sacrifice हम दूसरों के लिए करेंगे उतना ही प्रेम प्यार बढ़ता है !
प्रेम के धागे में ही रिश्ते पिरोए जाते हैं और त्याग से उनमें प्रगाढ़ता दी जाती है !
ग़ैरों की बातों में आकर अपनों से उलझना छोड़ दीजिए, क्योंकि रिश्ते हमारे अपने है ग़ैरों के नहीं, और कान के कच्चे लोग तो दूसरों की बातों में आकर अपने रिश्ते ख़राब कर ही लेते हैं;
_ ताल्लुक टूटते ही लोग चीख चीख कर कमियां बताने लगते हैं…!!
एक खूबसूरत रिश्ता इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हम किसी को कितनी अच्छी तरह समझते हैं ;
_ लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम कितनी अच्छी तरह गलतफहमी से बचते हैं.
सबको लगता है कि गलती हमेशा दूसरे की होती है,
_ शायद इसलिए ज़्यादातर रिश्ते बिना वजह टूट जाते हैं.
चाबी से खुला ताला बार-बार काम आता है और हथौड़े से खुला ताला दोबारा काम नहीं आता है,
_ अतः संबंधों के ताले को क्रोध के हथौड़े से नहीं, प्रेम की चाबी से खोलें.!!
रिश्तों की कभी कोई भरपाई नहीं होती, एक बार खो जाने पर वह दोबारा नहीं मिलते,
_ इसलिए अगर आपके पास अच्छे रिश्ते हैं तो उन्हें संभाल कर रखें.!!
केवल दिमाग़ का इस्तेमाल करते रहने से कोई रिश्ता बहुत लंबा नहीं चल सकता.!!
रिश्तों को मजबूत बनाना है तो सच बोलो… क्योंकि झूठ से बने पुल एक दिन जरूर ढह जाते हैं और तब केवल पछतावा रह जाता है.!!
संसार में कोई भी व्यक्ति सर्वगुण संपन्न नही होता,
_इसलिए कुछ कमियों को नजर अंदाज करके रिश्ते बनाएं रखिए ..
जब हम किसी में एक नुक्स देखते हैं तो बस नुक्स ही देखने लग जाते हैं,
_ हमें कुछ गलतियों को अनदेखा करना पड़ता है.. ताकि रिश्ता बना रहे.!!
जो रिश्ता आपके लिए रोटी कपड़ा और मकान जोड़ रहा है !
_ वो न जाने कितनों के आगे नतमस्तक हो रहा है…!!
रिश्ते बनाना उतना ही सरल है, जितना मिट्टी पर मिट्टी से मिट्टी लिखना ।
और निभाना उतना ही कठिन जितना पानी पर पानी से पानी लिखना ॥
इसलिए रिश्ता वही बनाओ जिसे निभा सको.
लोग कहते है कि सिर्फ एक ” गलतफहमी ” अच्छे से अच्छा रिश्ता तोड़ देती है
तो फिर आप सब बताइये, जो रिश्ता एक गलतफहमी से टूट जाये, वो रिश्ता अच्छा कहां से हुआ.
इसका मतलब वो रिश्ता मौका ढूँढ रहा था, सिर्फ एक गलती का.
रिश्ता सच्चा और अच्छा तो वो होता है, जो हजार गलतियों के बाद भी टीका रहे बना रहे..
रिश्तो में निवेश बहुत ही मूल्यवान होता है, पर कभी-कभी गलत रिश्ते में निवेश करने के बाद दुख तो मिलता है ..पर सबक भी मिलता है.
ज्यादातर होता यह है कि हम धन तो कमा लेते हैं… पर रिश्ते गवां देते हैं,
जबकि सही बुद्धिमत्ता तो इसमें है कि धन के साथ-साथ लोग भी हमसे दिल से जुड़े रहें.
मन को मार कर रिश्तों को ज़िन्दा रखा जाता है.
_ बड़े हिम्मती होते हैं वे लोग, जो रिश्तों को ज़िन्दा रखने के लिए अपने मन को मार देते हैं.
हम अपने रिश्तों में सबसे बड़ी गलती करते हैं; _ हम आधा सुनते हैं,
_ चौथाई समझते हैं, शून्य सोचते हैं और दोहरी प्रतिक्रिया करते हैं.
जन्म से मिले रिश्ते तो प्रकृति की देन हैं, लेकिन खुद के बनाये रिश्ते आपकी पूँजी हैं..
इसलिए सभी को सहेज कर रखिये.
अनजान रहिये कुछ हकीकतों से.. सच्चाई ना जाने कितने रिश्ते तोड़कर बैठी है.!!
“बहुत अजीब है रिश्तों की माया”
_ रिश्ते झूठ बोलने से संभले रहते हैं और सच बोलने से टूटते हैं.!!
अगर हर वक्त गलतियां ढूंढने में लगे रहोगे,
_ तो रिश्ते फूल नहीं, कैक्टस बन जाएंगे.!!
अनुभव कहता है कि रिश्तों में भी थोड़ा सोच समझ कर बोलिए,
क्योंकि वो इतनी जल्दी बातें नहीं मानते, जितना जल्दी बुरा मान जाते हैं.
रिश्ते मन से बनते हैं बातों से नहीं, कुछ लोग बहुत सी बातों के बाद भी अपने नहीं होते, _ और कुछ शांत रहकर भी अपने बन जाते हैं..
ज़िंदगी का चैन बचाना है तो झूठे रिश्तों से दूर रहो..
_ नकली प्यार, मतलब वाले यार और हर बात में टांग अड़ाने वाले रिश्तेदार सबसे ज़्यादा थकाते हैं.!!
रिश्ता तब नहीं बनता जब कोई साथ होता है.. रिश्ता तब बनता है जब कोई हर हाल में साथ निभाता है.!!
अक्सर रिश्ते तभी तक टिकते हैं, – जब तक किसी को आपसे कोई लाभ होता है.!!
कुछ रिश्ते इसलिए हिलते हैं, क्योंकि वो पुरानी आदतों पर टिके थे, सच्चाई पर नहीं.
सहजता से निभें,,,, वे ही रिश्ते सुखद हैं..
_ जिन्हें निभाना पड़े, वो केवल दुनियादारी है !
जहां शब्दों को तोलना ना पड़े, वहीं अपनापन बसता है,
_ बाकी सब तो बस दिखावा है.!!
रिश्तों का सच यही है की जो सबके होते हैं, वो किसी के भी नहीं होते.!!
रिश्ता वही सार्थक है, जो अनाश्रित होना सिखाए..!!
A relationship is meaningful only if it teaches one to be independent.
गलत कंधों का सहारा लेने से अच्छा है अकेले सफर करना ;
_ क्योंकि जब मन नहीं मिलता.. तो रिश्ते सिर्फ रूह पर बोझ बनते हैं.!!
रिश्तों में संतुलन रखें; भावनाओं में बहकर खुद को खोना मूर्खता है,
_ क्योंकि लोग आपकी कद्र सिर्फ अपनी ज़रूरत के वक्त तक ही करते हैं.!!
“जो अपना होगा वो पूरे अधिकार से ठहरेगा…जो अपना नहीं होगा…वो एक रोज राह में छुट जाएगा…
_किसी का किसी पर कोई बंधन नहीं….रिश्ते विश्वास के नाम का एक नाजुक धागा ही तो है….”
पहले रिश्तों में सच्चाई होती थी.. अब तो हर मुलाकात के पीछे कोई स्वार्थ छुपा होता है.!!
कुछ बाते लिखी ही इसलिए गई ताकि लोग उन परिस्थितियों को जान-समझ पायें,
कि कैसे एक फ़ैसले की वजह से कितने रिश्ते पल भर में तबाह हो गए , खैर !..
दोस्ती और रिश्तेदारी में जितना कम आना जाना रखोगे,
_ उतने ही लम्बे समय तक रिश्ता टिका रहेगा !!
रिश्तों में संवाद का टूटना सबसे बड़ा संकेत है..
_ जब वो सिर्फ सुनने लगे और बोलना छोड़ दे, तो समझ लो.. उसे आप खो चुके हो.!!
कुछ रिश्ते जुबान पर लगाम न होने के कारण टूटते हैं और कुछ रिश्ते जुबान न खोलने पर खत्म हो जाते हैं.. संवाद जरुरी है लेकिन एक सीमा में.!
जिनके पास जो रिश्ते होते हैं, वह उसकी कद्र करना भूल जाते हैं.!!
_ खो जाने के बाद सिर्फ यादें ही रह जाती हैं.!!
हर रिश्ते की एक सीमा होती है,
_ अगर वो लांघी जाए तो सबसे बेहतर होता है.. उससे दुरी बना लेना.!!
रिश्तो से भरी दुनिया में अगर किसी को परखने की नोबत नही आयी है,
तो समझ लीजिए कि वक्त ने आपसे बड़ी शिदत से रिश्तेदारी निभाई है.
मिट्टी का गिलापन जिस तरह से पेड़ की जड़ को पकड़ कर रखता है,
ठीक उस तरह शब्दों का मीठापन मनुष्य के रिश्तों को पकड़ कर रखता है.
जिंदगी के कुछ रिश्ते – बस समझने के लिए होते हैं, निभाने के लिए नहीं.!
_ और कुछ रिश्ते-माफ़ी और संवाद के बाद फिर से खिल जाते हैं.!!
शुक्रिया उन लोगों का जिन्होंने मेरा साथ छोड़ दिया..
उन्होंने मुझे सिखाया कि कोई रिश्ता हमेशा के लिए नहीं होता…
अपनों की ही साजिशों के हम शिकार बनते गए,
रिश्तों में हमने दिल साफ क्या रखा, उतना ही लोग हमें बेवकूफ समझते गए..
जो इंसान अपनी बात पर टिक ना पाए, उससे रिश्ता तोड़ लेना उचित है,
क्योंकि वो किसी के साथ रिश्ता निभा नहीं सकता.
रिश्ते निभाना हर किसी के बस की बात नहीं,
अपना दिल दुखाना पड़ता है दूसरों की ख़ुशी के लिए.
इस ज़िन्दगी के सफर में कुछ बेगाने अपने बन गये,
_ जो रिश्तों में थे अपने, वो अब बेगाने बन गये !!
चुगली की धार इतनी तेज होती है,
जो खून के रिश्तों को भी काटकर रख देती है..
हम तो रिश्ता बचाने के लिए झुक रहे थे,
आपने तो हमें गिरा हुआ समझ लिया.
जरुरत ढल गई रिश्ते में.. वरना यहां कोई किसी का अपना कब है ..!!
हर रिश्ता निभाना ज़रूरी नहीं होता. कुछ रिश्ते समझना ही काफी होता है.
चलो बिखरने दिया जाए, उन रिश्तों को..
_ संभालने और झुकने की भी एक हद होती है.!!
गैर भी नहीं रहे और अपनाया भी नहीं..
_ ये कैसा रिश्ता है, जिसमे कोई रिश्ता ही नहीं..!!
जितना गहरा रिश्ता, उतनी ज्यादा उम्मीद,
उम्मीद जितनी ज्यादा, उतनी गहरी चोट..
रिश्तों में हमेशा एक नाज़ुक संतुलन होना चाहिए..
_ अगर किसी के पास रहना चाहते हैं, तो उससे थोड़ा दूर भी रहिए, क्योंकि बहुत ज़्यादा पास रहना अक्सर बोझ बना देता है,
_ और बहुत ज़्यादा दूर रहना तन्हाई में बदल जाता है..
_ थोड़ा सा फासला ही वह जगह है, जहाँ मोहब्बत सांस लेती है, जहाँ अपनापन अपनी गरिमा बनाए रखता है.!!
रिश्तों की जान नीयत में होती है, खून में नहीं, अगर मन में खोट हो, तो सगे रिश्ते भी बोझ बन जाते हैं.
आप किसी के लिए चाहे कितना भी कर लो, चाहे आप उन्हें अपना सब कुछ सौंप दो,
_ लेकिन अगर आपका कोई एक काम उन्हें नापसंद हो, तो वो आपका सर्वस्व सौपना एकदम से ओझल हो जाएगा..
_ इसलिए, ज़रूरत से ज़्यादा रिश्ते नहीं बनाने चाहिए.!!
रिश्ते बहुत अजीब होते हैं, इसमें दोनों के पास देने को सफाई होती है ;
फिर भी रिश्ता साफ होने की बजाय और मैला हो जाता है.
जहां इज्जत और सम्मान नहीं, वहां रिश्ता रखना खुद के अस्तित्व के साथ अन्याय है,
_ऐसी भीड़ का हिस्सा बनने से बेहतर है अकेला रहना.!!
किसी भी रिश्ते का नियम है कि उसमें जितनी जगह आपको दी जाए, उतने में ही गुज़ारा करो.
_ज़्यादा जगह हथियाने की कोशिश की तो एक दिन खदेड़ कर बाहर कर दिए जाओगे.
लोग रिश्तों में अपने साथ ही छल करते हैं,
_ जब वे अस्थायी लोगों के कारण स्थायी लोगों के साथ छल करते हैं और जीवन भर पछताते हैं.!!
कोई भी रिश्ता इतना बड़ा नहीं कि उसकी वजह सेअपनी peace, self-respect,
mental health खो दो.
कुछ रिश्तों ने इतना भरमाया था कि हर रिश्ता मंज़िल नज़र आया था.!!
कुछ ऐसे हो गए हैं _ इस दौर के रिश्ते.!!
_ जो आवाज़ तुम ना दो तो _ बोलते वो भी नही..!!
अनजाने में की गई गलतियों को माफ किया जा सकता है, लेकिन जो लोग रिश्तों के साथ दिमाग लगाकर खिलवाड़ करते हैं ; उन्हें कभी भी अपने जीवन में वापस न आने दें.!!
कठिन दौर में दूर जाने वाले लोग यह एहसास कराते हैं कि हर रिश्ता सिर्फ परिस्थितियों तक होता है, उम्रभर का नहीं.!!
कोई भी रिश्ता हो अगर झगडा ज्यादा बढ़ जाए,
_ एक छत के नीचे रहना असम्भव हो जाए.. तो रिश्ते को तोड़ो मत.
_ कुछ दिन अलग रह कर देखो.. अलग रहने पर एक दूसरे की अहमियत पता चले तो फिर से साथ रहने लग जाओ.
_ वरना प्रेम से बिना कटु वचन बोले अपने रास्ते अलग कर लो.
_ ये जिंदगी एक सफर है और हम सब मुसाफिर हैं..
_ फिर से आमना सामना हो तो मुस्करा कर मिलने मे किसी के दिल पर कोई बोझ ना रहे.!!
जिन्हें जीवन की भीड़ में कभी किसी ने पुकारा ही नहीं, वे अनजानी आवाज़ों में भी अपनेपन की गूंज ढूँढ लिया करते हैं..
_ हर हवा का झोंका उन्हें किसी बुलावे जैसा लगता है,
_ हर गुजरते क़दम में किसी रिश्ते का अहसास सुनाई देता है..
_ वे अक़्सर भीड़ में भी अकेले खड़े रहते हैं, और हर आहट पर पीछे मुड़कर देख लिया करते हैं, शायद कभी कोई उन्हें सच में पुकारने आए…!
किसी के भी साथ सोच-समझ कर अच्छा व्यवहार करना चाहिए,
_ क्योंकि जीवन में सब लोग मात्र खानापूर्ति के लिए सम्बन्ध नहीं रखते.
_ यदि उनमें से किसी को खो दिया तो जीवन भर के लिए ही खो दिया.. फिर ये मानकर चलिए.
_ खानापूर्ति करने वाले लोग ही सब सहन करके काम निकालना जानते हैं,
_ सत्यनिष्ठ नहीं सहन करते सबकुछ.!!
असल सच्चाई यह है कि हर रिश्ता हमेशा के लिए नहीं होता.
_ कुछ रिश्ते हमें तोड़ने नहीं, बल्कि हमें जगाने आते हैं.
_ वे हमें यह सिखाने आते हैं कि समझौता और आत्मसम्मान के बीच एक महीन लेकिन बेहद ज़रूरी रेखा होती है.!!
थोड़े वक्त का रिश्ता मिठास से निभ जाता है,
_ मगर उम्र भर का रिश्ता सच और स्पष्टता मांगता है.!!
रिश्ते जब बोझ बन जाए तो उनको निभाना मूर्खता है,
_ मतलबी लोग किसी के रिश्तेदार नहीं होते..!!
“बेवजह नहीं पड़ती है रिश्तों में दरार..
_ कोई अपना ही ज़हर घोलता है अपनों में..”
भले ही जीवन भर अकेले रह लेना, लेकिन
जबरदस्ती किसी से रिश्ता निभवाने की ज़िद मत करना…
अब रिश्ता बना कर कर भी क्या लोगे, _
_ जब सामने वाले का इरादा ही निभाने का ना हो ..
नाराज़ होना और रूठना, रिश्तों में बहुत अहम है,
_ लेकिन हमारे बिना किसी की ज़िंदगी ठहर जायेगी, यह सोचना हमारा वहम है.
एहसासों की नमी का होना जरुरी है हर रिश्ते में,
रेत सूखी हो हाथों से फिसल ही जाती है.
उन रिश्तों को हमेशा संभाल कर रखना,
जिन्होंने तुम्हारे गिरते कदम को संभालने में सहारा दिया है.
रोज बदलो मत यूँ लिबासों की तरह,
ये रिश्ते हैं जनाब, बाजारों में कहाँ मिलते हैं.
जहाँ रिश्तों में स्वार्थ हो, वहां दूरी बना लेना ही ठीक है..
_ क्योंकि ऐसे रिश्ते वक्त के साथ बोझ बन जाते हैं.!!
गया तो मैं वहां पर उनसे मिला नहीं..
_ इस तरह भी कभी रिश्ते निभाये जाते हैं.!!
“कई रिश्तों में इंसान नहीं,
_ बस उसकी ‘हमेशा मौजूद रहने’ की आदत पसंद की जाती है”
“कुछ लोग साथ नहीं चाहते..- बस अपनी सुविधा के लिए..
हमेशा उपलब्ध कोई इंसान चाहते हैं”
हर समय किसी के आगे-पीछे घूमना, अपनी मानसिक शांति खोकर रिश्ते निभाना, healthy नहीं है.
देखना कि कहीं रिश्ते संभालते-संभालते और सबको खुश रखते-रखते खुद बिखरकर न खो जाओ.!!
बेहतर है उन रिश्तों का टूट जाना, जिनकी वजह से आप टूट जाते हो.!!
रिश्ते वही कायम रह पाते हैं, जहां दोनों एक दूसरे को खोने से डरते हों.!!
रिश्ते तब निभेंगे, जब एक दूसरे को बर्दाश्त करना सीखोगे !
जिक्र से नही.. एक दूसरे की फिक्र से चलते हैं रिश्ते
जुबान और दिमाग तेज चलाने से, रिश्तों की रफ्तार धीमी पड़ जाती है.
ऐसे रिश्ते टूटकर ही रहते हैं.. जहां आपकी प्राथमिकता शून्य होती है,
_ जहां आप केवल विकल्प मात्र होते हो.!!
आधे सच पर टिके हैं … सब रिश्ते, _
_ ज़िंदगी का यही है … पूरा सच !!
रिश्तों से अपेक्षा रखना, स्वार्थ नहीं है, _
_ मगर अपेक्षा के लिए रिश्ते रखना, स्वार्थ है ..
तजुर्बा कहता है कि रिश्तों में थोड़ा फासले रखिए,
ज्यादा नजदीकियां अक्सर दर्द दे जाती हैं..
अब कहाँ वो रिश्ते-नाते, अब कहाँ वो रात-दिन ?
दूर तक आती थी जिनकी महक, वो मुरझा गए.!!
वो दिन अब ना रहे – जब रिश्ते सुबह निकल कर शाम तक घर वापस पहुंच जाते थे.
_दुःख देता है अब अपनों का इतनी दूर बस जाना.!!
रिश्ते अब खून से नहीं, ज़रूरत से चलते हैं और हर तबाही में कोई अपना ही शामिल मिलता है.!!
बढ़िया रिश्ते यूँ ही नहीं बन जाते, उन्हें बनाया जाता है..
_ उन पर मेहनत करनी पड़ती है.!!
रिश्ते संभालना उन्हीं के लिए कष्टदायी होता है, जो रिश्तों की कद्र करना जानते हैं.
_ जो रिश्तों की कद्र नहीं करते, उनके लिए क्या रिश्ते और क्या उनको संभालना.!!
जिस दिन रिश्ता अपनी मौलिकता खोने लगे, उसी दिन दूरी सही निर्णय है.!!
रिश्तों की सच्चाई घर की दीवारों में ही रहने दो,
_ बाहर सिर्फ ताकत और प्यार दिखाओ, ताकि कोई आपको तोड़ न सके.!!
जब सब कुछ ठीक चल रहा होता है, तो लोग आपके साथ होते हैं.
_ लेकिन जब ज़िंदगी मुश्किलों से घिर जाती है, तभी सच्चे साथियों की पहचान होती है.
_ जो मुश्किल वक़्त में आपका साथ देते हैं, वही आपके सच्चे साथी होते हैं.
_ संकट ही रिश्तों की असली कसौटी है.
_ ठोकरें आपको गिराने के लिए नहीं हैं, बल्कि वे आपको सिखाने और यह दिखाने के लिए हैं कि आपके अपने लोग कौन हैं.!!
रिश्ते आपकी परीछा लेते रहेंगे, बस कोशिश करना, हर बार प्रेम, समझ और भावनात्मक जुड़ाव की जीत हो, न कि अहंकार, मनमुटाव, अलगाव या मिसअंडरस्टैंडिंग की..!!
सम्पत्ति का बँटवारा करते- करते लोग स्वयं बँट जाते हैं. लोगों को इतना भी ध्यान नहीं रहता कि जायदाद को तो बनाया जा सकता है, लेकिन माँ- बाप, भाई- बहन बनाए नहीं जा सकते.
_ रिश्तों को पाने के लिए जायदाद खो जाए तो कोई बात नहीं, लेकिन जायदाद पाने के लिए रिश्तों को खोना मूर्खतापूर्ण है.
दूर रहें ऐसी रिश्तों से, जो आपके किरदार को गंदा करने की कोशिस करे, जिन्हें खेलने के सिवा कुछ और आता ही न हो.!!
परिवार के रिश्तेदार भी सही काम और सही राह दिखाने की बजाय भड़काने का काम करते हैं.!
आप को जिससे प्यार हो, कभी उस के साथ जरुरत से ज्यादा समय मत बिताना, उसे लिमिट में ही टाइम देना ;
क्योंकि हमारी इन्द्रियों का स्वभाव है यदि कोई चीज हमारे लिए हर समय के लिए उपलब्ध हो तो मन उस से ऊब जाता है _
_ रिश्तों के टूटने का एक कारण ये भी बनता है..
कभी-कभी हम यह जानने की कोशिश करते रहते हैं कि हम किसी के लिए कितना मायने रखते हैं,
_ पर सच यह है कि इसका जवाब शब्दों मे नही, उनके रवैये में छुपा होता है.
_ अगर आपकी खामोशी उन्हें बेचैन नही करती, आपकी गैरमौजूदगी उनके दिनों को अधूरा नहीं बनाती, और आपकी तकलीफ उनके दिल मे हलचल नही पैदा करती…तो समझ लीजिए कि आपकी अहमियत उतनी नहीं है , जितनी आपने अपने दिल में मान रखी थी.
_ रिश्तों का सबसे कड़वा सच यही है कि कई बार हम किसी के लिए पूरी दुनिया बन बैठे होते हैं, और उनकी दुनिया में हम सिर्फ एक गुज़रता हुआ लम्हा होते हैं.!!
किसी भी रिश्ते में हर पल सब कुछ एक-सा रहे, ये ज़रूरी नहीं होता..
_ कभी मिठास घुलती है, तो कभी हल्की-सी खटास भी आ जाती है..
_ और यही उतार-चढ़ाव रिश्तों को ज़िंदा रखते हैं.
_ बस एक बात का ध्यान रहे, खटास कभी कड़वाहट न बने, क्योंकि रूठने-मनाने की यही छोटी-छोटी बातें आख़िर में प्रेम को और गहरा कर देती हैं.!!
खुद को कभी भी किसी की पसंद बनने पर मजबूर मत करो..
_ क्योंकि सच्चा रिश्ता चुनाव से नहीं, एहसास से बनता है.!!
मतलब से जुड़े रिश्ते वक्त के साथ फीके पड़ जाते हैं, लेकिन जो बिना लालच के बनते है, वो हमेशा दिल को सुकून देते हैं.!!
रिश्ते खत्म तभी करें जब उसे बचाने की आखिरी कोशिश भी आप कर चुकेंगे, लेकिन यदि कोई गुंजाइश न हो तो मरे पौधे को पानी देके खुद को बेवकूफ ना बनाएं.. कहीं से निकलने के बाद ही आप कहीं पहुंच सकते हैं.!!
रिश्ते कभी भीख में नहीं मांगे जाते, अगर बार-बार सिर्फ़ आप ही कोशिश कर रहे हो तो समझ लो वो रिश्ता आपके लिए नहीं बना.
_ जिसे साथ निभाना होता है.. उसे कहा नहीं जाता – बस वो साथ होता है..!!
रिश्ते जब बार-बार तोड़े और जोड़े जाएं, तो मिठास नहीं, मजबूरी घुलती है और फिर वो सिर्फ़ रिश्ता नहीं, समझौता बन जाता है.!!
रिश्ता चाहे कोई हो.. एक बात पक्की है, जिनसे हम आशा करते है..
_ वही जिंदगी का तमाशा करते है.!!
जो दुख में साथ ना दे सके, उनके साथ सुख भी फीका है,
_ सच्चा रिश्ता हर मौसम में साथ देता है.!!
जो रिश्ते टूट जाते हैं, उनसे उत्पन्न उदासियाँ नहीं टूटतीं.
_जो अपने प्रिय लोग जीवन में छूट जाते हैं, उनकी यादें पीछा नहीं छोड़तीं.
शिकायतों के स्वर तब तक गूँजते हैं, जब तक रिश्तों की डोर बंधी है.
_ जिस दिन ये डोर टूटती है, खामोशी का परदा गिर जाता है और एक नया अध्याय शुरू होता है.!!
कुछ पास आयेंगे कुछ दूर जायेंगे, _ बहुत कम लोग होंगे जो निःस्वार्थ रिश्ते निभायेंगे.
कुछ बातों को मुस्कुरा कर टाल देना चाहिए, _ इससे रिश्तों का नुकसान कम होता है.
जो इंसान अपनी बात पर टिक ना पाए, वो किसी के साथ रिश्ता नहीं निभा सकता.
केवल ज़िद की एक गांठ खुल जाए, तो उलझे हुए सब रिश्ते सुलझ जाएं..
रिश्ते कांच के होते हैं, अगर संभाल कर नहीं रखेंगे तो टूटेंगे और चुभेंगे भी.
फ्रैक्शन हुए रिश्ते वापस जुड़ तो जाते हैं.. मगर पहले जैसे नहीं रहते.!!
अक्सर रिश्तों में जरूरत रह जाती है, _ और दिलचस्पी ख्त्म हों जाती है..
रिश्तों की एहमियत को समझो,,, इन्हें जताया नहीं, निभाया जाता है…
रिश्ते इतने खोखले हो गए हैं कि लोगों को अब सच से भी परेशानी होने लगी है..!!
उम्र भर निभाओगे ऐसा मुझे भ्रम हुआ, एक रिश्ता उम्मीद पे शुरू और अफसोस पर खत्म हुआ.!!
हमारे खानदान में है अजब रिश्तों के ज़ंजीरें, जिधर बच्चों की मर्ज़ी हो उधर रिश्ता नहीं करते.!!
हर रिश्ते में संतुलन ज़रूरी है, वरना ज़रूरत से ज़्यादा मिलने पर लोग कद्र
करना भूल जाते हैं.!!
कुछ लोग रिश्ते में तो सगे होते हैं पर..काम दुश्मनों वाले करते हैं..!!
मौसम तक का मिज़ाज देखना पड़ता है.. रिश्तों की तो बात ही क्या ?
डर सा लगता है अब रिश्तों से, लोग थोड़ा सा वक़्त देकर ज़िन्दगी की सारी खुशियां ले जाते हैं.!!
ना होता अगर बिछड़ जाने का रिवाज, बहुत से लोग थे जिन्हें साथ जीना था..!!
बनावटी रिश्तों का दोगलापन कभी अच्छा नहीं होता..!!
कुछ रिश्ते जब अपनी हद्द पार कर दें, _ तो उन्हें मिटा देने मे ही भलाई होती है।।
_ टूटना तकलीफ कम देता है, टूट कर जुड़े रहना ज्यादा तकलीफ देता है..!!
वो जमाना कुछ और हुआ करता था, जब रूठने- मनाने में भी प्रेमभाव प्रकट होते थे..
_ अब का जमाना कुछ और है, यहां सीधे रिश्ते का ही रिप्लेसमेंट होता है.!!
आप से तुम और तुम से आप तक पहुंचने की यात्रा ही ‘रिश्तों’ का जीवन चक्र है…
अगर रिश्ते सच्चे हों तो उन्हें ज़्यादा संभालना नहीं पड़ता, वे खुद संभले रहते हैं.!!
जब एक व्यक्ति दूसरे पर जरूरत से ज़्यादा पैसा खर्च करता है तो रिश्ता बराबरी का नहीं रहता..
_ वह धीरे-धीरे आश्रित और कभी-कभी गुलाम बन जाता है.!!
इंसान तब तक सहन करता है जब तक उसकी सहन करने की क्षमता होती है..
_ उसके बाद वो ना तो रिश्तों को जरूरी समझता है और ना ही अपनों को..!!
किसी रिश्ते का टूट जाना आपको दर्द तो देता है,
_ लेकिन उसी रिश्ते में ख़ुद हर दिन टूटते रहना असहनीय होता है.!!
जीवन की अन्य समस्याएं भी हैं, पर सबसे ज्यादा इंसान रिश्तों से परेशान रहता है,
_ इसलिए रिश्तों पर ध्यान दें.!!
जो रिश्ता हमें रुला दे उससे गहरा कोई रिश्ता नहीं,
जो रिश्ता हमको रोते हुए छोड़ दे, उससे कमजोर कोई और रिश्ता नहीं.
जिन रिश्तों में समर्पण की भावना नहीं होती, वो रिश्ते पानी की बूंद की भांति होते है
जिनमें जिंदगी तो होती है मगर उम्र नहीं होती.
झूठ की मिठास दूर के रिश्तों को तो भा सकती है,
_ मगर अपनों के साथ वो सिर्फ़ दूरी बढ़ाती है.!!
देखकर जमाने का चलन, हमने भी बदल दिए मिजाज अपने,
रिश्ता सबसे है, मगर वास्ता किसी से नहीं…
एक मिनट लगता है रिश्तों का मजाक उड़ाने में,
और सारी उम्र बीत जाती है एक रिश्ते को बनाने में !
बहुत अजीब है रिश्तों की माया..
_ रिश्ते झूठ बोलने से संभले रहते हैं और सच बोलने से टूटते हैं.!!
रिश्तों की असलियत तभी सामने आती है,
_जब आप ‘समझौते’ की जगह ‘हक’ की बात करते हैं.!!
पहले लोग भावुक होते थे,भावना में बह कर रिश्ते निभाते थे,
फिर लोग प्रैक्टिकल हुए… भावना का कोई स्थान नहीं था … रिश्तों से फायदा उठाते थे…
अब लोग प्रोफेशनल हो गए हैं, जिनसे फायदा उठाया जा सके सिर्फ वहीं रिश्ते बनाते हैं…..
रिश्ते भी इमारत की ही तरह होते हैं, हल्की- फुल्की दरारें नजर आए तो,
इमारत को मत तोड़िए, उसकी मरम्मत कीजिए.
अब मुझे तकलीफ़ नहीं होती, चाहे कोई भी छोड़कर जाए,
क्योंकि, मैंने उन रिश्तों से धोखा खाया है, जिन पर मुझे नाज़ था…
धोखेबाज लोगों से रिश्ते बनाने से बेहतर है “अकेले रहो”
यकीन मानो आप ज्यादा खुश रहोगे,,,
रिश्ते से जब अपनापन खत्म हो जाय तो.. रिश्ता दुखदाई बंधन से ज्यादा कुछ नहीं रह जाता.
जब भी कोई आपके साथ हमेशा अपने मूड और सुविधा के अनुसार व्यवहार करे तो समझ लीजिए कि उस रिश्ते का कोई मतलब नहीं है..
_ रिश्ता एक जिम्मेदारी है और इसे जिम्मेदारी की तरह ही निभाना चाहिए..!!
यदि कोई रिश्ता हमारी मानसिक शांति और स्थिरता छीन रहा है और हम हर समय इसे लेकर चिंतित और बैचेनी महसूस करते हैं, तो हम गलत रिश्ते से बंधे हैं,
_ गलत रिश्ते की पहचान है कि वो सबसे पहले आपकी मानसिक शान्ति को भंग करेगा !!
_ क्योंकि स्वस्थ रिश्तों की नींव मानसिक शांति और स्थिरता है.!!
मुझे क्या, तुम्हे क्या, हमें क्या, और बस रिश्ते धीरे धीरे खत्म.
जिन रिश्तों में इज्जत नहीं रहती, वो रिश्ते जल्द खत्म हो जाते हैं…
जो रिश्ता आपकी मानसिक स्थिति को खराब करे,
_ वह कभी भी आपके जीवन को बेहतर नहीं बना सकता.!!
जिनके आसपास हमेशा लोग मंडराते हों, उनसे दूर रहना ही समझदारी है..
_ऐसे रिश्तों में गहराई कम ही होती है.!!
दिल के रिश्ते तकदीर से मिलते हैं , वरना मुलाकात तो हजारों से होती है..
जो लोग बिना मतलब मिलते हैं, वही रिश्ते होते हैं.. वहीँ प्यार होता है.
_ मिलन में जहां मतलब आया, वहां वो व्यापार हो जाता है.!!
हुनर तो नहीं था मुझमें बदल जाने का,
बस मेरे कुछ अपनों ने मुझे ये प्यारा सा तरीका सिखाया..!!
रिश्ते अगर बंधे हों दिल की डोरी से,
दूर नहीं होते किसी भी मजबूरी से.
मेरे लिए किसी से रिश्ता रखने का मतलब है;
ईमानदारी, भरोसा और अपनापन..
रिश्ते कैसे निभाए जाते हैं ये बच्चों से सीखिए,
जो आपस में लड़ने के थोड़ी देर बाद फिर दोस्त बन जाते हैं.
शानदार रिश्ते चाहिए तो उन्हें गहराई से निभाइये,
लाजवाब मोती कभी किनारों पे नहीं मिलते.
जिस रिश्ते को आप लम्बे समय तक निभाना चाहते हों,
उस रिश्ते में किसी और को मध्यस्थ न बनाएँ.
रिश्ते कब तक निभाता मै आखिर अकेला ही,
_थोड़ा अहसास तो सामने वाले को भी होना चाहिए !!
अगर आपके रिश्ते में पूरी तरह से विश्वास, इमानदारी और समझदारी है तो
जीवन में आपको वचन, कसम, नियम और शर्तों की कभी जरुरत नहीं पड़ेगी.
जब नाख़ून बढ़ जाते हैं, तब नाख़ून ही काटे जाते हैं, उंगलियाँ नहीं.
इसलिए अगर रिश्ते में दरार आ जाए तो दरार को मिटाइए न कि रिश्ते को.
नहीं चाहिए ऐसा रिश्ता जिसके लिए मूर्खों की तरह व्यवहार करना पड़े,
_सच बोलना चाहिए चाहे रिश्ता रहे या ना रहे कोई फर्क नहीं पड़ता.
कई वर्षों से एक ही शहर में, मेरे कुछ करीबी और प्रियजन हैं !
_ उन्हें मेरे बारे में कोई खबर नहीं है, मैं भी उनके बारे में कुछ नहीं जानता !!
प्रेम से भरे रिश्ते भरपूर आनंद का संकेत देते है,
प्रेम से खाली रिश्ते खाली डिब्बों की तरह केवल बजते रहते हैं.
आजकल खुशहाल रिश्ते लोगों को चुभते है..
_ क्योंकि उनके खुद के रिश्तों में खालीपन ज़्यादा होता है.!!
किसी से सिर्फ उतना ही दूर होना, जिससे कि उसे आपकी अहमियत का एहसास हो जाए.
किन्तु इतना भी दूर मत होना कि वो आपके बिना जीना ही सीख ले.
जो दिल मे है उसे कहने की हिम्मत रखो, और जो दूसरों के दिल मे है,
उसे समझने की समझ रखो, रिश्ते कभी नहीं टूटेंगे..
अपनी तरफ से किसी भी रिश्ते को आप अपना 100% दो, पूरी सिद्दत से निभाओ.. _ बिना ये सोचे कि सामने वाला क्या कर रहा है, कितना कर रहा है, ताकि जब रिश्ता टूटे तो आप सकून में रहो कि आपने दिया अपना सब-कुछ, ये उसकी बदक़िस्मती है कि उसे सहेजना नहीं आया.!!
ये दुनिया इतनी बड़ी क्यों है, कि हम दिलों से पास होकर भी उनसे और उनकी जगह से दूर हैं
_ फासले कदमों के हैं, एहसासों के नहीं, इसलिए दूर रहकर भी एक अपनापन सा बना रहता है,
_ हम अलग-अलग राहों पर चलते हुए भी, कहीं ना कहीं एक ही जुड़ाव में बंधे रहते हैं.!!
किसी भी रिश्ते को एकतरफा नहीं निभाया जा सकता है.
“” भरोसा “” एक रिश्ते की सबसे महंगी शर्त है..
भूल जीवन का एक पेज है और सम्बन्ध पूरी किताब.
जरुरत पड़े तो भूल का एक पेज फाड़ देना, लेकिन एक छोटे- से पेज के लिए पूरी किताब नहीं.
चालाकियाँ कुछ वक्त के लिए रिश्ते चला सकती हैं,
_ मगर लंबी दूरी के सफ़र में सच ही साथ देता है.!!
अभी जो समय चल रहा है, उसमें ये विचार दिल से निकाल दीजिए कि, बिना मतलब के कोई आपसे रिश्ता रखेगा,
अपने पास ऐसा जरूर कुछ बचा कर रखिए कि लोग उसे पाने के लिए आपसे जुड़े रहें,
खुद को खाली मत होने देना, क्योंकि लोग खाली चीजों को कचरे के डिब्बे में डाल देते हैं.
परिवार वह सुरछा कवच है जिस में रह कर व्यक्ति शान्ति का अनुभव करता है.
हर रिश्ते की एक मर्यादा होती है, और हमें उस मर्यादा को कभी नहीं तोड़ना चाहिए.
क्योंकि जब रिश्तों की मर्यादा टूट जाती है, तो बहुत कुछ खत्म हो जाता है.
रिश्ते अहसास के होते हैं,
अगर अहसास हो तो, अजनबी भी अपने होते हैं.
और अगर अहसास नहीं तो, अपने भी अजनबी होते हैं.
आजकल रिश्तों की सच्चाई बस इतनी सी है, सुन लिए जाए तो सुलझ जाते हैं
और गलती से जो सुना दो उलझ जाते हैं..!!
रिश्ते कभी अपने आप नहीं टूटते, अहंकार, अज्ञान और रवैये उन्हें तोड़ देते हैं.
झूठे रिश्तों को निभाने के चक्कर में लोग यहाँ
अपनों की खुशियों को ताक पर रख देते हैं…
अजीब पहेली है; कहीं रिश्तों के नाम ही नहीं होते,
और कहीं पर सिर्फ नाम के ही रिश्ते होते हैं.
अच्छा दिल और अच्छा स्वभाव दोनों आवश्यक हैं,
अच्छे दिल से कई रिश्ते बनेंगे और अच्छे स्वभाव से वो जीवन भर टिकेंगे.
रिश्ते कभी जिंदगी के साथ साथ नहीं चलते,
रिश्ते एक बार बनते हैं, फिर जिंदगी रिश्तों के साथ साथ चलती है.
ये रिश्ते भी अजीब हैं, बिना विश्वास के शुरु नहीं होते..
और बिना धोखे के ख़तम नहीं होते…
सिर्फ दुनिया के सामने जीतने वाला ही विजेता नहीं होता…
किन रिश्तों के सामने कब और कहाँ हारना है,
यह जानने वाला भी विजेता होता है…
राजनीति मे रिश्ते हो तो कोई तकलीफ नही,
किन्तु रिश्तो मे राजनीति नही होनी चाहिए.
सब ने पैसा तो बहुत कमा लिया, पर उस पैसे का क्या मोल है.
अपनों का प्यार और रिश्ते इस पैसे से कहीं अनमोल है.
कुछ लोग पिघल कर मोम की तरह रिश्ते निभाते हैं,
और कुछ लोग आग बन कर उन्हें जलाते ही जाते हैं.
किसने कहा रिश्ते मुफ्त मिलते हैं, मुफ्त तो हवा भी नहीं मिलती !
एक साँस भी तब आती है, जब एक साँस छोड़ी जाती है….!!!
रिश्ते वो बड़े नहीं होते जो जन्म से जुड़े होते है,
रिश्ते वो बड़े होते है जो दिल से जुडे होते है.
किसी रिश्ते में निखार, सिर्फ अच्छे समय में हाथ मिलाने से नहीं आता…,
बल्कि ……नाज़ुक समय में हाथ थामने से आता है…!!!
ज़िन्दगी में सब लोग रिश्तेदार या दोस्त बन कर ही नहीं आते, कुछ सबक बन कर भी आते हैं.!!
रिश्तों में कभी भी तकरार में बोलचाल बंद ना कर सुलह के हर संभावित मौके को जीवित रखें.
और हां अपने मिथ्या अभिमान को दफना दें, सारे झगडे की फसाद सिर्फ और सिर्फ झूठा अभिमान है.
रिश्तों की भीड़ में उन लोगों को हमेशा महत्व दीजिए, जो आपको दिल से मानते हैं.
क्योंकि दिल से मानने वाले लोग कभी कभार हीं मिलते हैं.
जब हम अपने रिश्तों के लिए वक़्त नही निकाल पाते
तो वक़्त हमारे बीच से रिश्ता निकाल देता है.
रिश्ते मजबूत तब बनते हैं.. जब हम अपनों की सुनते हैं और कमजोर तब.. जब गैरों की बातें बीच में आने लगती हैं.!!
कई लोग अपनी झूठी प्रशंसा करते हैं या फिर रिश्तों में भी झूठ बोलते हैं, जिससे आगे चलकर आपके रिश्ते बिगड़ सकते हैं और साथ ही आपके बारे में लोगों की राय भी बदल सकती है. कोई भी आप पर भरोसा नहीं करेगा. इसलिए झूठ बोलने से बचें.
कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिनका कोई नाम नहीं होता, फिर भी उनकी मौजूदगी हमारे भीतर बहुत गहराई तक महसूस होती है..
_ वे न परिचय मांगते हैं, न कोई अधिकार, बस चुपचाप हमारे जीवन में जगह बना लेते हैं.!!
जब किसी विवशता के कारण रिश्ता निभाना संभव नहीं हो पाता तो हम गलतियां ढूंढने लगते हैं.
_ और गलतियों की आड़ में हम फिर अपना फैसला सुना देते हैं ..जो हम बहुत पहले ले चुके होते हैं…!!
किसी भी रिश्ते को टिकने के लिए दो व्यक्तियों के मन में एक-दूसरे के प्रति सम्मान होना चाहिए.
प्यार, विश्वास और भरोसा; ये तीन चीज किसी रिश्ते में…
_ ना महसूस हो तो, रिश्ता नहीं रखने में ही भलाई है..
रिश्तों को निभाते हुए, ज़िन्दगी की सुबह से शाम हो गई, _
_ और इल्ज़ाम ये लगा कि, हमें निभाना नहीं आता ..
वक़्त सही हो तो निकाल लेते हैं दूर का रिश्ता,
_ बुरे वक़्त में ‘वही’ बात करने से भी कतराते हैं..!!
हम भी वहीं होते हैं, रिश्ते भी वहीं होते हैं और रास्ते भी वहीं होते हैं
बदलता है तो बस…..समय, अहसास, और नज़रिया…!!
माना की लोग स्वार्थी हो गए है मगर बिना रिश्तों के जिंदगी फीकी है.
_ इसलिए रिश्ते जैसे भी है.. उन्हे सम्भाल कर रखिये.
_ वरना अकेले मे जिंदगी रुलाती बहुत है.!!
घर के सदस्यों का स्नेह डॉक्टर की दवाई से ज्यादा असरदार होता है.
कुछ रिश्तों का नाम नहीं होता है, क्योंकि ऐसे रिश्ते…. रिश्तों से बड़े हो जाते हैं.
ऐसे लोगों पर कभी विश्वास मत करो
जो रिश्तों को कपड़ों की तरह बदलते हैं.
रिश्ते कभी भी सबसे जीतकर नहीं निभाए जा सकते.
रिश्तों की खुशहाली के लिए झुकना होता है,
सहना होता है,
दूसरों को जिताना होता है और स्वयं हारना होता है.
सच्चे रिश्ते ही वास्तविक पूँजी है.
रिश्तों को कभी धोखा मत दो,
पसंद ना आऐ तो उसे पूर्णविराम कर दो,,,
ना दूर रहने से रिश्ते टूट जाते हैं और ना पास रहने से जुड़ जाते हैं.
यह तो अहसास के पक्के धागे हैं, जो याद करने से और मजबूत हो जाते हैं.
रिश्तों की कदर भी पैसों की तरह कीजिये,
क्योंकि दोनों को गँवाना आसान है और कमाना मुश्किल है..
जब आपकी गलती हो तो गलती मानिये, इससे रिश्ते जल्दी नहीं टूटेंगे.
लोग विषाक्त रिश्तों में इसलिए फंस जाते हैं, क्योंकि वे अकेले होने से डरते हैं.!!
हम जिन लोगों के साथ ज्यादा Contact में नहीं रहते हैं,
वैसे रिश्ते नाम के रिश्ते रह जाते हैं.
बड़े प्यारे होते हैं ऐसे रिश्ते, जिन पर हक़ भी न हो और शक भी न हो.
जो रिश्ते गहरे होते हैं, वो अपनेपन का शोर नहीं मचाते.
मिट्टी का मटका और परिवार की कीमत
सिर्फ बनाने वाले को पता होती है तोड़ने वाले को नहीं.
जीत की आदत अच्छी होती है
मगर कुछ रिश्तों में हार जाना बेहतर है.
झूठे रिश्ते मैंने किसी के साथ बनाए नहीं, सच्चे बहुत ढूंढे मगर कहीं पाए नहीं.
अपने अहम् और अहंकार को लेकर रिश्ता खो देना बहुत आसान है..
_ एक दूसरे की परिस्थिति को समझते हुए समझौता करके रिश्ते में बने रहना बहुत मुश्किल.. और इस तरह से जो बना रहता है, वह रिश्ता लंबे समय तक बना रहता है..!!
हर रिश्ता निभाना ज़रूरी नहीं, कुछ का अंत ही नई शुरुआत होता है ;
_ हर रिश्ता निभाने लायक नहीं होता, कुछ लोगों का दूर हो जाना ही सही होता है.!!
जब हम बनाते हैं कोई रिश्ता …सालों साल लगे रहते हैं बनाने में चलाने में..
_ पर इस बात से अंजान की साथ ही साथ टूट भी रहा है.
_ बनाना टूटना भी हमारा भ्रम ही है.
_ पर हम कहते हैं कि कितने सालों का रिश्ता एक पल में टूट गया.
_ पर बनना टूटना साथ ही चल रहा था.!!
अच्छे रिश्तों को वादे और शर्तों की जरुरत नहीं होती,
बस दो खूबसूरत लोग चाहिए, एक निभा सके और दूसरा उसे समझ सके.
हर एक रिश्ते की एक मर्यादा होती है, एक लकीर होती है,
अगर वह पार कर दी तो रिश्ते की अहमियत चली जाती है.
रिश्ते आजकल रोटी की तरह हो गए हैं,
जरा सी आंच तेज क्या हुई, जल भुनकर खाक हो जाते हैं.
कोई भी रिश्ता ना होने पर भी जो रिश्ता निभाता है..,
वो रिश्ता एक दिन दिल की गहराइयों को छू जाता है…!
जिंदगी में किसी का साथ काफ़ी है, कंधे पर किसी का हाथ काफ़ी है.
दूर हो या पास फर्क नहीं पड़ता, सच्चे रिश्तों का बस अहसास ही काफ़ी है.
जो बांधने से बंधे और तोड़ने से टूट जाए उसका नाम है “बंधन” !
जो अपने आप बन जाए और जीवन भर ना टूटे उसका नाम है “संबंध” !!
रिश्ते जोड़ने या तोड़ने से पहले हजार बार सोच लेना चाहिए.
रिश्ते खराब होने की एक वजह ये भी है,
कि लोग झुकना पसंद नहीं करते.
रूबरू होने की तो छोड़िये, गुफ़्तगू से भी क़तराने लगे हैं,
ग़ुरूर ओढ़े हैं रिश्ते, अपनी फितरत पर इतराने लगे हैं…!
शर्त थी रिश्तों को बचाने की,
“और” यही वजह थी मेरे हार जाने की.
रिश्तों को बस इस तरह से बचा लिया करो,
कभी मान जाया करो तो कभी मना लिया करो.
ख्वाहिश सबकी है कि रिश्ते सुधरें,
पर चाहत है कि शुरुआत उधर से हो…
ऐसे ही नहीं बन जाते गैरों से रिश्ते,
_ कुछ खालीपन अपनों ने ही दिया होगा..
किसी भी रिश्ते का नियम है कि उसमें जितनी जगह आपको दी जाए, उतने में ही गुज़ारा करो.
_ज़्यादा जगह हथियाने की कोशिश की तो एक दिन खदेड़ कर बाहर कर दिए जाओगे.
_ कुछ रिश्ते आपको बुरी तरह थका देते हैं..
_जितना आप अपने पैंतीस चालीस साल की उम्र तक नहीं थकते, उससे बहुत ज्यादा चार छ: सालों में ही थक जाते हैं..!!
कभी-कभी रिश्तों का मतलब वो लोग भी समझा देते हैं
जिनसे हमारा कोई रिश्ता नहीं होता…
दिल से जो ना जुड़े हों, उन्हें रिश्तो का नाम ना दो,
यह दिखावे के रिश्ते हैं इसे तोड़ने का इल्जाम ना दो.
सख़्त हाथों से भी छूट जाती हैं कभी उंगलियाँ
रिश्ते ज़ोर से नहीं तमीज़ से थामे जाते हैं.
मसरूफ रहने का अंदाज़ आपको तन्हा न कर दे,
_ रिश्ते फुर्सत के नहीं, तवज्जो के मोहताज होते हैं.!!
आप कितने ही व्यस्त क्यों न हों. उनलोगों पर जरूर ध्यान दें,
जो आपके कामों को करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं.
ऐसे रिश्ते अनमोल होते हैं.
अपनापन छलके जिनकी बातों में,
सिर्फ कुछ लोग ही होते हैं लाखों में.
आनंद केवल रिश्ते बनाने में नहीं मिलता,
आनंद तो रिश्तों को जीने में मिलता हैं,
रिश्तों को जिन्दा रखें व रिश्तों में जियें.
” यही हैं जिन्दगी “
अगर रिश्तों की जड़ मजबूत है तो
दूरी कोई मायने नहीं रखती है.
कभी भी काम पड़ सकता है,
आधे रिश्ते तो लोग इसी वजह से निभा रहे हैं.
तुम तो अपने थे जरा हाथ बढ़ाया होता,
_ गैर भी डूबने वाले को बचा लेते हैं !!
जहां तक रिश्तों का सवाल है…..
लोगो का आधा वक़्त….’अन्जान लोगों को इम्प्रेस करने,
और अपनों को इग्नोर करने में चला जाता हैं…!
बड़े परिवार में एक दूसरे की भूल- चूक माफ करते रहने से ही प्रेम बना रहता है.
बड़े अनमोल हैं ये खून के रिश्ते, इनको तू बेकार न कर.
मेरा हिस्सा भी तू ले ले मेरे भाई, घर के आंगन में दिवार न कर.
आजकल के रिश्ते ऐसे हो गये हैं
कि हम अगर आवाज ना दें तो सामने से भी आवाज नहीं आती हैं !
खुशकिस्मत वालो को मिलते हैं परवाह करने वाले ……
दिल से बनाए गऐ रिश्ते खत्म नहीं होते
बस कभी कभी खामोश हो जाते हैं……..
कितने दूर निकल गए, रिश्तों को निभाते निभाते…
खुद को खो दिया हमने, अपनों को पाते पाते.
जिनके पास अपने हैं, वो अपनों से झगड़ते हैं
और जिनके पास कोई अपना नहीं, वो अपनों के लिए तरसते हैं.
रिश्ते तो बहुत होते हैं, पर जो दर्द बांटने लगे वही असली रिश्ता है.
मिल जाए उलझनो से फुरसत तो जरा सोचना,
क्या सिर्फ फुरसतों मे याद करने तक का रिश्ता है हमसे.
किसी भी रिश्तेदार या दोस्त पर भी हद से ज्यादा विश्वास नहीं करना चाहिए.
रिश्तों वाली भीड़ से सम्मान/प्रेम/तवज्जो मिलने का एक मानक [standard] तय कर दिया गया है ;
_ आप सामाजिक मानको पर खरे हैं तो _ आपको आपकी उम्मीदों से ज्यादा तवज्जो, सम्मान और फलाना-ढिमका मिलेगा..
_ वरना ये आपको आवारा, बेपरवाह, एक नंबर का वाहियात, ग़ैरज़िम्मेदार इंसान बताने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं.
_ बुरे वक्त पर मजाक बनाना _ गैर होने का एहसास कराना ;
_ जब भी मौक़ा मिला इन लोगों के द्वारा ये सब वक्त- वक्त पर बताया जाता है.
_ ये आपके प्रति ईर्ष्या, स्वार्थ, छल-कपट इत्यादि रखते हैं..
किसी से लगाव का कम हो जाना नफरत नहीं कहलाता..
_ यह जीवन की स्वाभाविक गति है — जहाँ कुछ लोग हमारे साथ कुछ दूर तक चलते हैं, फिर अपनी मंज़िल की ओर मुड़ जाते हैं.
_ हम रुकते नहीं, बस थोड़ी देर ठहरकर उन्हें मन से विदा देते हैं और अपनी राह पर आगे बढ़ते हैं.
_ हाँ, दिल में एक हल्की उदासी ज़रूर रहती है, पर समय सिखा देता है कि हर संबंध का एक समय होता है —
_ और उस समय के पूर्ण होने पर उसे गरिमा से छोड़ देना ही.. जीवन की सच्ची परिपक्वता है.!!
शिकायतें सिर्फ़ वहीं जन्म लेती हैं.. जहाँ रिश्ता गहरा होता है,
_ वरना अजनबियों से न कोई उम्मीद होती है, न कोई शिकवा शिकायतें..
_ दरअसल उस प्रेम, उस लगाव की परछाई होती है, जो हमने किसी से जोड़ रखी होती है..
_ जब दिल जुड़ा होता है, तभी उसके टूटने का दर्द भी होता है,
_ इसलिए जब हम किसी से शिकायत करते हैं, तो उसमें नाराज़गी से ज़्यादा अपनापन छुपा होता है.!!
धूल केवल चीजों पर ही नहीं जमती बल्कि रिश्तों में भी जम जाती है. बचपन में एकदूसरे का खयाल रखने वाले, चेहरा देख कर और आवाज की लय सुन कर एकदूसरे की परेशानी भांपने वाले न जाने क्यों और कब इतने बड़े हो जाते हैं कि एकदूसरे की चिंता को भांप कर भी अनदेखी कर देते हैं ?
कुछ चीज़ों को ज्यादा देर ‘स्टैंड बाई’ मोड पर छोड़ देने पर वो खुद ही ‘ऑफ’ हो जाती हैं…….!
रिश्ते उनमें सबसे पहले आते हैं……!!
दिल के रिश्ते ही हमारी ताकत बन सकते हैं,
खोखले रिश्ते हमारी कमजोरी ही बनते हैं.
खोखले रिश्ते जरूरतों को तो पूरा कर सकते हैं,
लेकिन हमें संतुष्टि नहीं दे सकते हैं.
किसी ने क्या खूब कहा हैं:- बहुत ज्यादा परखने से,
बहुत अच्छे रिश्ते भी टुट जाते हैं.
जबरदस्ती रिश्ते तोड़े जरूर जा सकते हैं, पर बनाये नहीं जा सकते.
बहुत से रिश्ते इसलिए खत्म हो जाते हैं,
क्यूंकि एक सही बोल नहीं पाता दूसरा समझ नहीं पाता.
मुलाकातें जरुरी है अगर रिश्ते बचाना है,
लगाकर भूल जाने से तो पौधे भी सुख जाते हैं.
पता नहीं क्यों…….लोग रिश्ते छोड़ देते हैं, लेकिन जिद नहीं.
जब रिश्ते सड़ने लगें तो अलग हो जाना दोनों के हित में है.!!
सड़े गले रिश्तों में रहने से अच्छा, बिना किसी रिश्ते के आजादी के साथ रहना अच्छा होता है.!!
सवालों में ही खत्म हो गए कई रिश्ते, शायद कोई जवाब देता तो संवर जाते.!!
वक्त तो रेत है, फिसलता ही जायेगा.
जीवन एक कारवां है, चलता चला जायेगा.
मिलेंगे कुछ खास, इस रिश्ते के दरमियां.
थाम लेना उन्हें वरना, कोई लौट के न आयेगा
पतझड़ भी हिस्सा है जिंदगी के मौसम का,
फर्क सिर्फ इतना है, कुदरत में पत्ते सूखते हैं, और हकीकत में रिश्ते.
किसी रिश्ते में निखार, सिर्फ अच्छे समय में हाथ मिलाने से नहीं आता.
बल्कि, नाज़ुक समय में हाथ थामने से आता है.
अहंकार दिखा के किसी रिश्ते को तोड़ने से अच्छा है की,
माफ़ी मांगकर वो रिश्ता निभाया जाये….
वो रिश्ते भी प्यारे होते हैं, जिनमें न हक़ हो न शक हो.
न अपने हो न पराये हो, न दूर हो न पास हो
न ज़ज़्बात हो
सिर्फ अहसास ही अहसास हो.
जिंदगियों के साथ इमारतों का ढह जाना भी दिखाई देता है.
_ इमारतें तो सालों बाद भी बन जाती हैं,
_ लेकिन खोये हुए रिश्ते कभी वापस नहीं आते और आँसुओं के साथ रोते रहते हैं.
_ जरूरी वस्तुओं का अभाव भी जीवन को मुश्किल बना देता है.
अब कहाँ वो रिश्ते-नाते, अब कहाँ वो रात-दिन ?
_ दूर तक आती थी जिनकी सुगंध, वो मुरझा गए.!!
दिल बड़ा रखने और मन साफ़ रखने से रिश्ते लम्बे चलते है…
छोटी सोच और मन में मैल, रिश्तों को कब ख़त्म कर दे कुछ नहीं पता.!!
” जब किसी में थोड़ा अलग और अच्छाई पाते हैं तो.. लोग संशय करने लगते हैं कि कोई ऐसा कैसे हो सकता हैं !”
_ ये संशय संभावित रिश्तों की आत्मीयता को खा जाता हैं !!
सबसे मुश्किल काम है “समेटना”,
_ फिर चाहे वो बातें हों, रिश्तें हों, या फिर बिखरा घर.!
पत्तों सी होती है कई रिश्तों कि उम्र…..आज हरे….कल सूखे
क्यों ना हम जड़ों से सीखे रिश्ते निभाना ॥……
जिंदगी में रिश्ते निभाना उतना ही मुश्किल होता हैं,
जितना हाथ में लिये हुए पानी को गिरने से बचाना.
जरूरी नहीं कि सारे सबक किताबों से ही सीखें,
कुछ सबक जिन्दगी और रिश्ते सिखा देते हैं..
जिंदगी में कुछ रिश्ते
आईने की तरह सच्चे, फूलों की तरह पाक,
वक्त की तरह अनमोल, रेशम की डोर की तरह नाजुक,
और साँसों की तरह जरूरी होते हैं,
लेकिन फिर भी ऐसे रिश्तों का कोई नाम नहीं होता !!
बिना कहे जो सब कुछ कह जाते हैं…
बिना कसूर के जो सब कुछ सह जाते हैं…
दूर रहकर भी जो अपना फ़र्ज़ निभाते हैं…
वही “रिश्ते” सच में अपने कहलाते हैं…
व्यंग्य और बहस से रिश्ते कमजोर हो जाते हैं इसलिए कभी भी ऐसी लड़ाई नहीं लड़नी चाहिए ….
जिससे बहस तो जीत जाओ लेकिन अपनों को हार जाओ..!
स्वांत: सुखाय ही नहीं, परमार्थ पर भी विश्वास रखें.
यदि कोई आप के काम आता है तो आप भी उस के काम आएं, रिश्ते मधुर बने रहेंगे.
मस्त हो कर हम नाचना जानते हैं.
फूल बन कर हम महकना जानते हैं.
मुस्करा कर ग़म भूलना हम जानते हैं.
लोग खुश होते हैं हम से क्यों कि,
बिना मिले ही हम रिश्ते निभाना जानते हैं.
जिंदगी के बारे में बस…..इतना ही लिख पाया हूँ,
बहुत मजबूत रिश्ते थे…..बहुत कमजोर लोगों से.
रिश्ते पैसो के मोहताज़ नहीं होते,
क्योंकि कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते पर जीवन अमीर जरूर बना देते हैं.
काश.. लोग ये समझ जाते रिश्ते एक दूसरे का खयाल रखने के लिए बनाए जाते हैं…
एक दूसरे का इस्तेमाल करने के लिए नहीं..
छोटी- छोटी बातें दिल में रखने से.. बड़े- बड़े रिश्ते कमजोर हो जाते हैं.
नए लोगों से पुरानी बातें क्या करना ?
_ फिर नए रिश्ते पर भी पुरानी जिंदगी की छाया आ जाती है.!!
इतना आसान नहीं है ज़िंदगी के किरदारों को निभा पाना,
हर पल बिखरना पड़ता है रिश्तों को संवारने के लिये….
रिश्ते की सबसे बड़ी बुनियाद आपसी समझ और भरोसा है,
इसके अभाव मे रिश्तों का महल एक दिन ढह जाता है.
यदि आप रिश्तों की गलतफहमियों को जल्द दूर नहीं करेंगे
तो उस रिश्ते को हमेशा के लिए खो देंगे..
रिश्ते तोड़ने तो नहीं चाहिए,
लेकिन जहाँ कदर ना हो वहां निभाने भी नहीं चाहिए.
किसी भी रिश्ते की खूबसूरती एक- दूसरे की बात समझने में है,
ना कि केवल अपनी बात समझाने और खुद को सही साबित करने में.
रिश्तों में सबकी अहमियत होनी चाहिए.
झूठ बोलकर रिश्ते उलझाने से अच्छा है सच बोलकर सुलझा लिया जाए,
क्योंकि सच्चाई देर सबेर सामने आ ही जाएगी..
धन ना हो तो रिश्ते, उँगली पर गिने जाते हैं,
और धन हो तो रिश्ते, डायरी में लिखे जाते हैं.
कभी नहीं टूटता वो रिश्ता,
जहाँ निभाने की चाहत दोनों तरफ से हो.
न किस्सों में, और न किस्तों में,
ज़िन्दगी की ख़ूबसूरती है चंद सच्चे रिश्तों में.
अहसासों की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में,
रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है…
कमाल है आजाद रिश्तों में लोग बंधन ढूंढ रहे हैं,
और बंधे रिश्तों में आजादी…!!!!
रिश्ते ऐसे बनाओ की जिसमें, शब्द कम और समझ ज्यादा हो,
झगड़े कम और नजरिया ज्यादा हो.
हम रिश्तों के बिना नहीं रह सकते, क्योंकि रिश्ते ही तो हमें एकदूसरे के करीब लाते हैं.
अगर रिश्ते न हों तो हम जी भी नहीं पाएंगे, इन्हीं के कारण हमें ठोस आधार मिलता है.
रिश्ते खून के नहीं, एहसास के होते हैं..
_ इसलिए कई बार अजनबी, वो सहारा बन जाते हैं.. जिसकी उम्मीद हमने अपनों से की थी.!!
अगर कोई याद नहीं करे तो आप कर लीजिए,
रिश्ते निभाते वक्त, मुकाबला नहीं किया जाता.
जब रिश्तों के बीच से विश्वाश गायब होने लगे…और उसकी जगह जिद, मुकाबला और बदतमीजी आ जाए…
तब वो रिश्ते ….खत्म होने की तरफ बढ़ने लगते हैं.
अपनी नाराज़गी को कुछ देर तक चुप रहकर मिटा लिया करें,
क्योंकि गलतियों पर तर्क करने से अक्सर रिश्ते उलझ जाया करते हैं.
मिलते रहना सबसे..किसी ना किसी बहाने से..
रिश्ते मजबूत बनते हैं दो पल साथ बिताने से..!!
सख़्त हाथों से भी छूट जाती हैं कभी कभी उँगलियाँ,
रिश्ते ज़ोर से नही तमीज़ से थामने चाहिए..
रिश्ता ‘बारिश जैसा नहीं’ होना चाहिए, जो एक बार बरस कर खत्म हो जाये,
बल्कि रिश्ता ‘हवा की तरह’ होना चाहिए, जो खामोश हो, पर हमेशा आसपास हो.
हम अक्सर उन रिश्तों को बचाने की कोशिश में ख़ुद को खर्च कर देते हैं,
_ जो वास्तव में हमारे होने का मोल ही नहीं जानते, असल में दूसरों को खोने का डर हमें ख़ुद से इतना दूर कर देता है कि हम अपनी ही पहचान एक अजनबी की तरह ढूँढने लगते हैं.!!
रिश्तों को गलतियां इतना कमजोर नहीं करती,,,,
जितना कि गलतफहमियां करती हैं.
बहुत से रिश्ते इसलिए… ख़त्म हो जाते हैं.
क्योंकि…..एक सही बोल नहीं पाता…दूसरा सही समझ नहीं पाता.
लोग रिश्ते भी फायदा देख कर निभाते हैं…..
जिनकी जरुरत नहीं तोड़ दिए जाते हैं.
झुकने से रिश्ते गहरे होते हैं तो…….झुक जाइए….
हर बार आपको ही झुकना पड़े तो……रुक जाइए…
आजकल रिश्तों पर विश्वास करना बहुत मुश्किल हो गया है
क्योंकि जरूरत ना हो तो लोग सालो पुराने रिश्ते भूला देते हैं.
जिनके साथ आपका रिश्ता हमेशा अच्छा रहा हो, अगर कभी उनके स्वभाव में कुछ अंतर दिखे तो उनसे मनमुटाव ना करें,
क्यूंकि कभी कभी लोग कुछ भटक जाते हैं, जिससे दूर लगते हैं, पर रिश्ते बदलते नहीं हैं, एक दिन फिर सब वापिस जरूर मिलते हैं…
जिंदगी में कुछ चीजें अपने मूल रूप में ही अच्छी लगती है और हमारे रिश्ते उनमें से एक हैं.
रिश्ते भी वक्त के साथ बदलते हैं, पर जो चीजें नहीं बदलती हैं- वे हैं अपनापन, रिश्तों की गर्मी और किसी के साथ से मिलनेवाली खुशी.
हक उतना ही जताइये, जितना जायज लगे…
रिश्ता कोई भी कैसा भी क्यों ना हो, बस घुटन ना होने लगे…
आखिर क्यों रिश्तों की गलियां इतनी तंग है,
शुरुआत कौन करे यही सोचकर बात बंद है.
जितनी गलतफहमी में रहो उतना ही अच्छा है,
सच्चाई जानने से रिश्ते अक्सर टूट जाते हैं..।।
जब रिश्ते में दरार आती है तो
सामने वाले की हर बात में बुराई नजर आती है.
जिसकी गलतियों से भी मैंने रिश्ता निभाया है,
उसने बार बार मुझे फालतू होने का एहसास दिलाया है.
रिश्तों से नाराजगी होने के बाद,
बहुत आसान है दूरियां बना लेना,
मुश्किल है हालात समझ पाना.
एक बार दिल से निकल जाने के बाद
दर्द का रिश्ता खत्म हो जाता है.
कुछ रिश्ते में पड़ चुका है इतना फ़र्क़ की ….
अब फ़र्क़ ही नहीं पड़ता……..
रिश्ते इसलिए भी नहीं सुलझ पाते हैं,
क्योंकि लोग गैरों की बातों में आकर अपनों से उलझ जाते हैं.
रिश्ते संभालिये, उन्हें तोड़ने का विचार ना बनाइये.
रिश्ते ढोने से नहीं, निभाने से मजबूत होते हैं !
त्योहारों के बहाने ही सही, रिश्ते वापस घर तो आते हैं.
रिश्तों की जड़ें मजबूत हो तो दूरी मायने नहीं रखती !
कुछ रिश्तों से हम थक कर जुदा होते हैं..!!
कुछ रिश्ते इसलिए भी खामोश हो जाते हैं,
क्योंकि एक को मनाने के लिए दूसरा खुद को मना नहीं पाता.
बनावटी रिश्तों से ज्यादा सकून देता है…”अकेलापन”
रिश्ते तो अब बुझ ही गए हैं, क्योंकि न वक्त रहा है, ना समझ रही है, ना प्यार रहा है, न कदर रही है,
तो फिर रिश्ते होकर भी कोई उमंग का एहसास नहीं रहता है.
जिन्हे रिश्ते नहीं निभाने होते हैं, वो दूर जाने के लिए कोई न कोई बहाना ढूंढ़ ही लेते हैं,
रिश्ते निभाने वाले हर हाल मे रिश्ता निभाएंगे और जिन्हे नहीं निभाना होगा, वो बिना वजह ही छोड़ जायेंगे..
रिश्ते बरकरार रखने की सिर्फ एक ही शर्त है,
भावना देखें संभावना नहीं.
कुछ रिश्ते बहुत रूहानी होते हैं,
अपनेपन का शोर नहीं मचाया करते…
रिश्ता जब टूटने पर आता है,
तो सब अच्छाईयां भी बुराईयां लगने लग जाती हैं…
रिश्ता नया हो पा लेने कि खुशी,
रिश्ता पुराना हो जाए फिर खो देने का डर,
बस यही तो है जिंदगी का सफ़र.
जो इंसान अपनी बात पर ना टिक पाए,
वह किसी दूसरे के साथ रिश्ता क्या खाक निभाएगा.
रिश्ते तब तक खूबसूरत होते हैं,
जब तक उन्हें आजमाने का अवसर नहीं मिल पाता.
रिश्तों का नूर तो मासूमियत से है,
_ ज्यादा समझदारियों से रिश्ते फ़ीके पड़ने लगते हैं.
हमारा कोई अतिप्रिय हमारे बिना भी जीवन जी सकता है,
_ ये छोटा सा सत्य, कितना बड़ा सुख भी है.. और कितना बड़ा दुख भी..!!
कैसे खिलेंगे रिश्तों के फूल, अगर ढूंढते रहेंगे हम एक दूसरे की भूल.
रिश्ता कोई भी हो, बस उसको निभाना पूरे दिल से चाहिए.
रिश्ते इलेक्ट्रिक करंट की तरह होते हैं, ग़लत जुड़ जाएँ तो ज़िन्दगी भर झटके.
और अगर सही जुड़ जाएँ तो, आपका पूर्ण जीवन प्रकाशमान !!
ना किस्सों में ना किश्तों में,
ज़िन्दगी का मज़ा है सच्चे रिश्तों में.
कुछ रिश्ते हैं इसलिए चुप हैं,
कुछ चुप हैं इसलिए रिश्ते हैं…
कुछ रिश्ते टूट तो जाते हैं, लेकिन खत्म नहीं होते.
कुछ रिश्तों को सिर्फ ढोना पड़ता है.!!
सच्चे रिश्तों की तो नहीं, लेकिन झूठे रिश्तों की पहचान जरूर हो गई.
रिश्तों में गेम ना खेला करें, गलती से जीत गए तो बहुत कुछ हार जाएंगे..
याद रखना, रिश्ते तोड़ने के लिए,
लोग गलत इल्जाम भी लगा देते हैं.
बड़ा शौक था हमें रिश्ते निभाने का,
होश तो तब आया जब हर रिश्ते को मतलबी पाया..!!
रिश्ते जब रूठने पे आ जाते हैं तो,
अच्छाई भी बुराई बन जाती है…
रिश्तों की खुबसुरती एक दूसरे की बात बर्दाश्त करने में है,
खुद जैसा इन्सान तलाश करोगे तो अकेले रह जाओगे !!
रिश्ते बरकरार रखने की, सिर्फ एक ही शर्त है…
किसी की कमियां नहीं, अच्छाइयां देखें…
इतने रिश्तों का क्या फायदा, जब हर तकलीफ खुद अकेले सहो..
इसलिए खुद को इतना मजबूत कर लो कि अपना खुद का गम खुद ही उठा सको…
एक बार रिश्ते को बचाने के लिए झुक क्या जाओ,
लोग गलत फहमी पाल लेते हैं दोबारा झुकेगा.
दोबारा गर्म की गई चाय और समझौता किया हुआ रिश्ता,
दोनों में पहले जैसी मिठास कभी नहीं आती.
उनका और मेरा रिश्ता बड़ा अजीब है,
पास रह नहीं सकते, और दूर रहा नहीं जाता.
कुछ रिश्ते बचाने के लिए उसूल तोड़े हमने,,
जहां गलती नहीं थी वहां भी हाथ जोड़े हमने !!
किसी भी रिश्ते में मधुरता तभी आती है,
जब दोनों की तरफ से खुशबू बिखरी हो !!
जिन रिश्तों को आपकी मौजूदगी से परहेज होने लगे,
वहां से मुस्करा कर चले जाना ही बेहतर होता है.
रिश्तों” की “कद्र” करनी हो.. तो
“वक्त” रहते कर लीजिए__वरना बाद में “सूखे पेड़” को
पानी” देकर “हरियाली” की उम्मीद” करना बेकार” है.
हवा में सुनी हुई बातों पर कभी यकीन मत करना,
कान के कच्चे लोग अक्सर सच्चे रिश्ते खो देते हैं.
खुली हवा सिर्फ इंसान को ही नहीं, कभी- कभी रिश्तों को भी चाहिए.
रिश्तों की दलदल से कैसे निकलेंगे,
जब हर साजिश के पीछे अपने निकलेंगे.
रिश्तों को शब्दों का मोहताज ना बनाइए,
अगर अपना कोई रूठा है तो खुद ही आवाज लगाइये.
आजकल समय की तरह रिश्ते भी बहुत जल्दी बदल जाते हैं
क्योंकि रिश्तों में प्यार कम और स्वार्थ ज्यादा हावी हो गया है.
जिस इंसान के पास समाधान करने की शक्ति जितनी ज्यादा होती है,
उसके रिश्तों का दायरा उतना ही विशाल होता है.
किसी भी रिश्ते को निभाने की पहल यदि एक तरफा हो तो कोई भी रिश्ता ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाता है,
कहीं ना कहीं रिश्ते कमजोर पड़ने लग जाते हैं और आखिर में जाकर रिश्ता टूटने के कागार पर आ जाता है.
ज्यादा झुक कर और समझौते करते हुए भी जिंदगी को नहीं जीना चाहिए रिश्ते में,
जिंदगी को हर उमंग और मस्ती से जीना चाहिए और आज में जीना चाहिए,
चाहे हजार बंधन हो मगर अपने लिए पल चुराने चाहिए,
जिंदगी में हमें सुकून के पल मिल सकें उसको पाना चाहिए ll
कभी- कभी ऐसी स्थिति भी पैदा हो जाती है कि जो गलती हमनें कभी की ही नहीं,
उसकी हमें माफी मांगनी पड़ती है.
बस इसलिए क्योंकि उस समय हम गलती नहीं बल्कि रिश्ते देखते हैं
कहीं प्यारा सा रिश्ता टूट न जाए.
पुरानी बातें पकड़ कर रखने से रिश्तों में गाँठें पड़ जाती हैं,
हम उनके साथ बातों को सुलझाना चाहते हैं, लेकिन पुरानी बातें इतनी निकल आती हैं,
गाँठें खुलने के बजाय और बढ़ जाती हैं, जब गाँठें खोल ना सकें, उन्हें तोड़ दें,
पुरानी बातों को चित्त से मिटाकर, प्यार से एक नई शुरुआत करें.
किसी से मिलो तो दूर का रिश्ता रखना,
ज्यादा करीबी रिश्तों को खा जाती है…
बह रही है दरारों से ये जिंदगी,
फटे हुए रिश्ते को सीया जाए क्या..
अच्छे रिश्ते एक बड़े पेड़ की तरह होते हैं,
वे शुरू में काफी ध्यान और सम्भाल मांगते हैं,
पर जैसे ही वे परिपक्व होते हैं,
आप को छाया और फल से संतृप्त कर देते हैं.
मुठ्ठी भर शिकायतों से दरारें नहीं पड़ती,
अगर रिश्तों की बनावट में झूठ ना हो !!
किसी की गरीबी को देखकर रिश्ता मत तोड़ना, क्योंकि
जितना मान सम्मान गरीबों के घर पर मिलता है,
उतना अमीरों के घर पर नहीं…
जिन लोगों को रिश्तों की क़दर होती है ना
वो मनाने से मान जाते हैं, और जिन लोगों को रिश्तों का मोल ही नहीं होता, वो छोटी सी बातों पर भी रिश्ते तोड़ देते हैं.
रिश्तों में समस्याएँ आम हैं, फर्क बस इतना है, कुछ लोग उन्हें मसला बना देते हैं
और कुछ मसले को समझदारी से सुलझा लेते हैं.
थमती नहीं ज़िन्दगी कभी किसी के बिना, लेकिन ये गुज़रती भी नहीं, अपनों के बिना..!!
जिन्हें रिश्ते नहीं निभाने,
वे धुएँ की तरह दूर खिसक जाते हैं.
रिश्ते वो नहीं जो मौसम की तरह बदलते हैं,
रिश्ते वो होते हैं जो पतझड़ में भी बसंत का अहसास कराते हैं..
रिश्ते निभाने के लिए बुद्धि की नहीं……. ह्रदय की शुद्धि चाहिए !
वो दौर कितना अच्छा था…
_ फासले तो थे.. दिलों के दरमियान नहीं थे.!!
रिश्तों की माला जब टूटती है तो दोबारा जोड़ने से छोटी हो जाती है,
क्योंकि कुछ जज्बातों के मोती बिखर ही जाते हैं…
मतलब और गरज़ के रिश्ते कोयले की तरह होते हैं,
जब गर्म होते हैं तो छूने वाले को जला देते हैं…..
और ठंडे होते हैं तब हाथ काले कर देते हैं…
रिश्तों का गलत इस्तेमाल कभी मत करना,
अच्छे लोग जिंदगी में बार- बार नहीं आते…
उसी रिश्ते की उम्र लंबी होती है,,
जहां लोग एक- दूसरे को समझते हैं, परखते नहीं !
हर बार गलती न होते हुए भी माफ़ी माँग लेने से रिश्ते मज़बूत नहीं,,
_ बल्कि समय के साथ कमज़ोर होते जाते हैं !!
किसी रिश्ते को जबरदस्ती पकड़ कर रखना मजबूती नहीं, मूर्खता होती है..
_ जहां इज्जत ना मिले, वहां से टाइम पर निकलने में ही समझदारी है.!!
कई रिश्तेदार तो इस लायक भी नहीं होते कि उन्हें अपना घर बुलाया जाए,
फिर उनकी बातें और जजमेंट से हमें फ़र्क पडना ही नहीं चाहिए.
_ वो जो सोचते हैं, सोचने दो.. आप मस्त रहिए.!!
किसी को खो कर उसकी कीमत समझ आती है चाहे कोई रिश्ता हो या कोई चीज,
इसलिए वक्त रहते कदर जरूर समझें, क्यूँकि वक्त निकलते ही पछतावा ही बचेगा…
रिश्ते तोड़ना आसान है, मुश्किल है तो निभा पाना..
रिश्ते गुलाब की तरह महकने चाहिए, जो खुद टूटकर भी दो लोगों को जोड़ देता है.
समझदार इंसान तभी रिश्ता तोड़ता है, जब बात उसकी इज़्ज़त पर आ जाए.!!
मसला तो सिर्फ एहसासों का है जनाब,
रिश्ते तो बिना मिले भी सदियां गुजार देते हैं.
“रिश्तों की सिलाई” अगर भावनाओं से हुई है…!
“तो टूटना मुश्किल है” और अगर स्वार्थ से हुई है…! “तो टिकना मुश्किल है”
झूठे रिश्ते मैंने किसी के साथ बनाए नहीं !!
सच्चे बहुत ढूंढे मगर कहीं पाए नहीं !
जो लोग आपका वक़्त देख कर इज्जत दे, वो आपके अपने कभी नहीं हो सकते,
क्योंकि वक़्त देख कर तो मतलब पूरे किए जाते है, रिश्ते नहीं निभाये जा सकते…
कोई रिश्ता जब आंसू साफ़ करने के बजाए आंसू देने लग जाए,
तो समझ जाओ उस रिश्ते ने अपनी उमर पूरी कर ली.
रिश्ते अगर बोझ बन जाए तो, किनारा कर लेना ही अच्छा होता है.
वरना घुटन होने लगती है और घुटन के साथ जीना, जिंदगी बर्बाद करना है.
झूठ की मिठास दूर के रिश्तों को तो भा सकती है,
_ मगर अपनों के साथ वो सिर्फ़ दूरी बढ़ाती है.
आजकल जहाँ खुशी है, वहाँ कोई रिश्ता नही…!!!
और जहाँ रिश्ता है, वहाँ खुशी का पता नहीं…!!!
रिश्ते तो सूरजमुखी के फूलों की तरह होते हैं,
जिधर प्यार मिले…..उधर ही घूम जाते हैं.
एक भ्रम अच्छे से अच्छे रिश्ते को भी तोड़ देता है,
लेकिन वह रिश्ता अच्छा कैसे हुआ, जो सिर्फ एक भ्रम से टूट जाता है…
मुस्करा कर देखने में और देख कर मुस्कुराने में बड़ा फर्क है,
नतीजे बदल जाते हैं और कभी कभी रिश्ते भी..
जिन्हें रिश्ते नहीं निभाने,
वे धुँए की तरह दूर खिसक जाते हैं.
कुछ रिश्तों को मजबूत करते- करते
इंसान खुद कमजोर हो जाता है..
जब ‘मैं, मुझे और मेरा’ को अहमियत दी जाती है,
तब घनिष्ठता कहीं खो जाती है और रिश्तों में दरार आने लगती है.
वो रिश्ते बड़े प्यारे होते हैं, जिनमें न हक़ हो, न शक हो.
न अपना हो, न पराया हो, न दूर हो, न पास हो..
न जात हो, न जज़बात हो,
सिर्फ अपनेपन का एहसास ही एहसास हो…
दुनिया का.. कोई भी इंसान.. सर्वगुण संपन्न नहीं होता,
इसलिए कुछ कमियों.. को नजर अंदाज करके.. रिश्ते अपनाना सीखिए…
रिश्तों में जब अपूर्णता का शोर पैदा होता है,
तब पूर्णता की शांति रिश्तों को छोड़कर चली जाती है.
कमाई की कोई परिभाषा तय नहीं होती..!!
धन, तजुर्बा, रिश्ते, सम्मान और सबक सब कमाई के ही रूप हैं.
जो लोग रिश्तों में झुकना ही नहीं जानते,
वे कभी प्रेम, आनंद और सच्ची सफलता प्राप्त नहीं कर सकते.
रिश्ते तो बहुत होते हैं, पर जो दर्द बांटने लगे
वही असली रिश्ता होता है…
जो रिश्ते ! गहरे होते हैं…
वो अपनेपन का ! शोर नहीं मचाते !!!
हर रिश्ते का मतलब सिर्फ मतलब है.!!
संबंधों का पौधा जब भी लगाओ, जमीन को भी परख लेना,
क्योंकि सभी मिट्टी में रिश्तों को उपजाऊ बनाने की आदत नहीं होती.
जब आप चीजों को सही ढंग से, सही जगह पर रखने की अच्छी आदत विकसित करेंगे,
तब आपके रिश्तों में भी सलीका आएगा.
जहां तक रिश्तों का सवाल है, लोगों का आधा वक़्त अंजान लोगों को इम्प्रेस करने
और अपनों को इग्नोर करने में चला जाता है.
*कैसे खिलेंगे रिश्तों के फूल*
*अगर ढूंढते रहेंगे एक-दूसरे की भूल..*
*यूँ ही नहीं आती* *खूबसूरती इन्द्रधनुष में*
*अलग-अलग रंगो को* *”एक” होना पड़ता है*
ज़रा सम्भाल कर रखिएगा इन्हें,
रिश्ते हैं, कपड़े नहीं कि रफ़ू हो जायें.
” रिश्ता “हमेशा जोड़ने की कोशिश किजीये, तोड़ने की नही…
उन लोगो के तरह बिल्कुल भी ना बनिये,
जो कैची ✂ की तरह एक चीज को दो टुकड़े करते हों..बल्कि उन लोगो की तरह बनिये
जो सुई की तरह जो दो टुकड़े को एक करते हों.
रिश्ते कभी भी मीठी आवाज़ या खूबसूरत चेहरे होने से नहीं टिकते,
वो टिकते हैं साफ दिल और सच्चे विश्वास से..!!
रिश्तों की खूबसूरती, निभाने वाले ही समझ सकते हैं.
कुछ रिश्तों की कीमत नहीं होती, अहमियत होती है.!!
बड़े महंगे पड़े, मेरे रिश्ते, मुझ पर..!!
बहुत सोचना पड़ता है अब मुहँ खोलने से पहले, क्यूंकि
अब दुनियाँ दिल से नहीं दिमाग से रिश्ते निभाती है..
रिश्तों को वक़्त पर वक़्त देना उतना ही जरूरी है,
जितना पौधों को वक्त पर पानी देना..
परेशानी में मज़ाक ना करो और खुशी में ताना ना दो,
इससे रिश्तों में दरार आ जाती है..
संसार में कोई भी सर्वगुण सम्पन्न नहीं होता है,
इसलिए कुछ कमियों को नजर अंदाज करके रिश्ते बनाये रखिये..
रिश्ता उनसे रखो जो रिश्ता निभाना जानते हों,
उनके पीछे क्या वक्त बर्बाद करना ; जो रिश्तों को सिर्फ़ मज़ाक समझते हों..
कई रिश्ते किराये के मकान की तरह होते हैं.
_उन्हें जितना भी सजा लो, वे कभी अपने नहीं होते.!!
रिश्तों को ” दिल ” से निभाओ,
” दिमाग ” लगाओगे तो सब हार जाओगे…!!!
आज़ाद रिश्तों में लोग, बंधन ढूंढ रहे हैं..!!
_और बंधे रिश्तों में, आज़ादी..!!
चेहरे अक्सर झूठ बोलते हैं,
” रिश्तों की असलियत ” बस वक़्त आने पर पता चलती है..
रिश्ते में गहराई सिर्फ़ उतनी ही अच्छी है,
जिसमें स्वाभिमान गिरवी रखने की जरुरत ना पड़े..
रिश्ते निभाना सीखो,
तोड़ने तो हर किसी को आते हैं।
सच बताऊ तो रिश्ते कभी भी
खुद नहीं मरते इन्हे हमेशा
इंसान खुद क़त्ल करता है, वह भी
3 तरीको से,
एक नफरत से, दो नजर अंदाज करके,
और तीसरा गलतफमी से
कुछ रिश्ते आजकल उस रास्ते जा रहे हैं ;
ना तो साथ छोड़ रहे हैं और ना ही साथ निभा रहे हैं ;
ना खामोश हैं और ना ही ढंग से बोल पा रहे हैं..!!
उन्हें अपना समझने से क्या फायदा,
जिनके अंदर आपके लिए कोई अपनापन ही ना हो..
मतलब हो तो लोग फरिश्ते बन जाते हैं,
मतलब निकल जाने पर रिश्ते बदल जाते हैं..
जिंदगी की कसौटी से हर रिश्ता गुजर गया,
कुछ निकले खरे सोने से, कुछ का पानी उतर गया.
कभी कभी रिश्तों में कुछ ऐसे दर्द मिलते हैं,
पास आंसू तो होते हैं, पर रोया नहीं जाता है.
रिश्ता रखना हो तो अच्छाई बयां करते रहो,
और ख़तम करना हो तो सच्चाई बयां कर दो.
बात करने का तरीका ही बता देता है कि
रिश्तों में कितनी गहराई और कितना अपनापन है.
झूठ बोलकर रिश्ते उलझाने से अच्छा है, सच बोलकर समझा लिया जाए,
क्योंकि सच्चाई देर सबेर सामने आ ही जायेगी.
कुछ रिश्ते जिस हाल में हैं, उन्हें उसी हाल में छोड़ देना बेहतर है,
कभी कभी उन्हें ज्यादा संभालने में, हम खुद ही बिखरने लगते हैं….
रिश्ते निभाने की तलब हो तो वक़्त मिल ही जाता है,
व्यस्तता के बहाने तो दिखावटी लोग करते हैं.
कुछ रिश्ते जिस हाल में हैं, उन्हें उसी हाल में छोड़ देना बेहतर है..
कभी कभी उन्हें ज्यादा संभालने में हम खुद ही बिखरने लगते हैं…
समय से ज्यादा सिर्फ़ उन्हीं रिश्तों की कदर करो ;
जिन्होंने समय पर आपका साथ दिया है.
रिश्तें तो अपनी जगह पर आज भी #_मजबूत है,
बस निभाने वाले ही #_कमज़ोर हो गए हैं !
कुछ अजीब है ये दुनियाँ
” यहाँ झूठ नहीं ” सच बोलने से रिश्ते टूट जाते हैं.
दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो अकड़ नहीं छोड़ सकते ;
पर रिश्ता तोड़ सकते हैं…..
वो #रिश्ते बहुत कमजोर होते हैं,
जो दूसरों के कहने पे #तोड़ दिए जाते हैं..
वक्त ही तो है जो रिश्तों की सच्ची पहचान करवाता है,
वरना यूं तो हर रिश्ता अपना सा नजर आता है.
वादों की जरूरत नही होती है उन रिश्तो में,
जहां निभाने वाले पर भरोसा होता है.
ज्यादा नजदीकियाँ बहुत बुरी चीज होती है,
साहब : रिश्तों को खा जाती है…
काट देना ही मसले का हल नहीं होता, किसी के लिए थोड़ा सरक जाएं ;
तो रिश्ता भी बच जाता है और रास्ता भी निकल जाता है..
अगर एक बार रिश्ते को बचाने के लिए झुक जाओ तो
लोग गलतफहमी पाल लेते हैं कि अब यह हर बार झुकेगा..
उसे रूठना आता था, उसने रूठ कर दिखा दिया
एक तरफ़ा था रिश्ता मेरा, बिना बोले जता दिया
भ्र्म हमेशा रिश्तों को बिखेरता है,
और प्रेम से अजनबी भी बंध जाते हैं..!!
गलत सोच और गलत अंदाजा.
इंसान को हर रिश्ते से गुमराह कर देता है….
मेरे अकेले रहने की एक वजह ये भी है की
मुझे झूठे लोगों से रिश्ता तोड़ने में डर नहीं लगता..
“ एक मिनट लगता है, रिश्तों का मज़ाक़ उड़ाने में
लेकिन हम भूल जाते हैं कि ज़िंदगी रिश्तों से ही सजती-संवरती है ”
मुझे रिश्तो की लंबी कतारो से मतलब नही,
कोई दिल से हो मेरा, तो एक शख्स ही काफी है..
मिल जाए उलझनो से फुरसत तो जरा सोचना,
क्या सिर्फ फुरसतों मे याद करने तक का रिश्ता है हमसे..
कुछ यूँ ही चलेगा तेरा मेरा रिश्ता उम्र भर
मिल गए तो बात लम्बी…. न मिले तो याद लम्बी…
रिश्तों का गलत इस्तेमाल, कभी मत करना…
अच्छे लोग जिंदगी में बार- बार नहीं आते हैं.
“रिश्ते” भी “इमारत” की ही तरह होते हैं,
हल्की फुल्की “दरारें” नज़र आये तो “ढ़हाइये” नहीं, “मरम्मत” कीजिए.
मतलब और स्वार्थ के रिश्ते* *कोयले की तरह होते हैं..**जब गर्म होते हैं
तो छूने वाले को* *जला देते हैं.. और ठंडे होते हैं तब* *हाथ काले कर देते हैं*
समय उल्टा हुआ है__सारे रिश्ते नाते स्वार्थ से जुड़ से गए हैं.!!
बड़े वफादार हैं आजकल के रिश्ते…
याद हम ना करें तो कोशिश वो भी नहीं करते..
गलत फहमी जल्द ही खत्म कर लेना चाहिए,
नहीं तो वो रिश्तों को खत्म कर देती है.
हर रिश्ते के अपने कुछ हक़ होते हैं, तो अपनी कुछ हदें भी.
जब हद याद नहीं, तो हक़ मिलने की उम्मीद भी बेईमानी है.
रिश्तों और संबंधों की गहराई का हुनर पेड़ों से सीखिए,
जड़ों में चोट लगते ही शाखें सूख जाती हैं.
गलतफहमी_और_शक जब अपनी हद पार करता है तो
बेहद खूबसूरत रिश्तो को भी तबाह कर जाता है.
रिश्ते बनाकर भी क्या कर लोगे ?
जब सामने वाले का इरादा ही ना हो निभाने का..
यूं ना पूछो सरेआम उदासी की वजह मेरी,
मेरे लफ्ज अगर निकले तो सारे रिश्ते बेनकाब होंगे..!!
रिश्ते दूर से ही अधिक चमकते हैं…
ज्यादा क़रीब आ जाने से ये मटमैले हो जाते हैं…!!!
रिश्तों के कारण प्रेम हो तो अलग बात है,
लेकिन कोई आपके व्यवहार के कारण आपसे प्रेम करे, यह महत्वपूर्ण बात है !!
जो आपसे रिश्ता नहीं रखना चाहते, उनसे दूर रहें_क्योंकि रिश्ते दिल से बनते हैं, जबरदस्ती नहीं.
बेवजह किसी से रिश्ता रखने की जिद्द करने से बेहतर इस लायक बनें की लोग खुद आपकी ओर खिंचे चले आएं.
रिश्ते निभाइये, पर उन्हें बेड़ियाँ मत बनाइये.
प्रीत कीजिए, पर किसी की जकड़न मत बनिए.
साथ चलिए पर गुंजाईश रखिये, अपने मोड़ पर मुड़ जाने की..
उलझे जो कभी रिश्ता हमसे,तो तुम सुलझा लेना,
क्योंकि, ……..
तुम्हारे हाथ में भी तो ..रिश्ते का एक सिरा होगा..
एक सच्चे रिश्ते को हमेशा समय देना चाहिए,
क्यूँकि क्या पता कल आपके पास समय हो और रिश्ते ना हों…
जिंदगी में रिश्तों का स्वाद हररोज बदलता रहता है, कभी मीठा, कभी खारा, कभी तीखा,
ये स्वाद इस बात पर निर्भर करता है, की हम प्रतिदिन अपने रिश्तों में मिला क्या रहे हैं.
जिनसे आपके संबंध हैं.. उनसे बस आपके संबंध हैं.
“उनका आपसे कोई संबंध नहीं..”
आँखों को पढ़ने और चुप्पी को समझने वाले संबंधों की उम्र अपेछाकृत ज्यादा होती है.
कुछ रिश्तों का टूटना ही बेहतर था, छूटने वाले का छूटना ही बेहतर था.
_ एक ही बात उसको कब तक समझाते, रुठने वाले का रूठना ही बेहतर था.
-“उन रिश्तों का ख़त्म हो जाना ही बेहतर है, जिनमें हर दिन आप टूट रहे हो !!”
बुरे वक़्त में _मैंने हर रिश्ते को पुकारा_सबको आवाज दी_
मगर_जो _वापिस लौट कर आई_वह मेरी ही_आवाज थी_
जब रिश्ते में दरार आती है तो,
सामने वाले की हर बात में ही बुराई नज़र आती है.
अगर बात करके सुधार हो सकता है,
तो खामोश रह कर रिश्ते मत बिगाड़ो.
हमारे रिश्ते उस वक्त बहुत ज्यादा मजबूत हो जाते हैं,
जब हम किसी इंसान की गलतियों को माफ करने लगते हैं
और उसकी इज्जत करने लगते हैं..!!
रिश्तों की बनावट आज कुछ इस तरह हो रही है,
बाहर से अच्छी सजावट और अंदर से स्वार्थ की मिलावट हो रही है.
रिश्तों को बनाए रखने में मेहनत दोनों ने की थी,
बस फ़र्क इतना था कि हमने दिल लगा रखा था और उन्होंने दिमाग लगा रखा था.
अगर रिश्ता बनाए रखना है तो लोगों के स्वार्थ की पूर्ति करते रहिए, _
_ क्योंकि स्वार्थ पूरे होते ना देख कर यहां हर कोई रास्ता बदल लेता है…
जो हो कर भी ना हो उसका होना कैसा,
अगर रिश्ता बस नाम का हो तो फिर रोना कैसा।।
समय से ज्यादा सिर्फ़ उन्हीं रिश्तों की कद्र करो,
जिन्होंने समय पर आपका साथ दिया हो..
*”जब सवालों के जवाब मिलने बंद हो जायें*
*तो समझ लो एक मोड़ लेना है, रास्ते और रिश्ते दोनों में !”*.
सुई की नोक पर टिके हैं, ” सारे रिश्ते,
जरा सी चूक हुई नहीं कि चुभ कर लहुलुहान कर देते हैं..
आजकल के रिश्ते… बात सह गए तो रिश्ते रह गए ..
बात कह गए तो रिश्ते ढह गए …
रिश्तों को तोड़ने के लिए गलतियों की जरुरत नहीं पड़ती ;
स्वार्थ पूरा होते ही रिश्ता फीका पड़ने लगता है..
आप एक बार लोगों को ” ना ” कहना शुरू कर दो _ फिर देखना
_ आपके रिश्ते ताश के पत्तियों की तरह ढेर हो जाएंगे..!!!
कुछ _ इस तरह _ तेरे मेरे रिश्ते ने _ आखिरी सांस ली..
ना मैंने पलट कर देखा _ न तुमने आवाज दी..
वहम मत पालो की हर ” रिश्ते ” ख़ास होते हैं !
कुछ अपने दिखने वाले भी ” धोखेबाज ” होते हैं !!
उठाकर फेंक दो उन रिश्तों को गहरे समंदर में, _
_ जिनमें वक्त पड़ने पर स्वार्थ की बू आती हो..!!
ख़त्म हो गए उन लोगों से रिश्ते, _
_ जिन से मिल कर लगता था, ज़िन्दगी भर साथ देंगे !!
कच्चे धागों से निकले सब रिश्ते, _
_ उम्र गांठ बांधने में ही बीत गई ..
कितना अजीब है ना, रिश्ता एक होता है, निभाने वाले दो..
फिर भी इसे नहीं संभाल पाते…
खत्म हो गए उन लोगों से रिश्ते साहब,
जिनसे मिलकर लगता था की ये उम्र भर साथ देंगे… !!
दूरियों में ही परखे जाते हैं रिश्ते, _
_ आंखों के सामने तो सभी वफादार होते हैं..!!
केवल रक्तसंबंध से ही कोई अपना नहीं होता…
प्रेम, सहयोग, विश्वास, निष्ठा, प्रतिआभार, सुरछा, सहानुभूति और सम्मान
ये सारे ऐसे भाव हैं,_ जो परायों को भी अपना बनाते हैं.
जिस रिश्ते में ना कुछ पा लेने की चाहत होती
ना कुछ मिट जाने की परवाह, ” वहीं प्रेम है “
एक अच्छा रिश्ता उस मस्त हवा की तरह होना चाहिए,
खामोश मगर हमेशा आस पास..
ज़िंदगी की कसौटी से हर रिश्ता गुज़र गया _
_ कुछ निकले खरे सोने से, कुछ का पानी उतर गया..!!
” ज्यादा बहस अक्सर रिश्तों को खराब कर देती है, _
इसलिए कभी कभी खामोशी भी बेहतरीन होती है “…..
देखे जो बुरे दिन तो ये बात समझ में आई,
_ इस दौर में यारों औकात से रिश्ता है !!
फक़त रेशम सी गांठे थी, जरा सा खाेल लेते तुम ;
अगर दिल में शिकायत थी, जुबां से बोल देते तुम !
कुछ ऐसे हो गए हैं इस दौर के रिश्ते !
जो आवाज़ तुम ना दो तो बोलते वो भी नही..!!
*आँसूओं के प्रतिबिंब गिरे,* *ऐसे दर्पण अब कहाँ ?*
*बिना कहे सब कुछ समझे,* *वैसे रिश्ते अब कहाँ ?*
*मकड़ी जैसे मत उलझो गम के ताने-बाने में*
*तितली जैसे रंग बिखेरो हँस कर इस ज़माने में..*
सच पूछिए तो.. कोई भी किसी भी रिश्ते में खुश नही है,
_ सभी बस ढो रहे एक दूसरे को.. क्योंकि सब बंधे हुए हैं.!!
जब ” मैं, मुझे और मेरा ” को अहमियत दी जाती है, तब घनिष्ठता कहीं खो जाती है और रिश्तों में दरार आने लगती है.
“ना जाने क्यों कुछ मजबूत रिश्ते बहुत आसानी से टूट जाते हैं “
दूर रहो उन रिश्तों से, जिनमें वक्त पड़ने पर स्वार्थ की बू आती हो.!!
गलत रिश्ते और बुरी संगत में रहने से अच्छा है रिश्तों से मुक्त रहना । ….
हिलते दांत और हिलते रिश्ते _ अधिक दिनों तक साथ नहीं देते.!!
रिश्तों में किसी के उतने ही रहो, जितने वो आपके हैं..!!
किसी के दुःख को दुख समझने वाले रिश्ते बनने बंद हो चुके हैं..!!
चुगली की धार इतनी तेज होती है, जो खून के रिश्तों को काट के रख देती है..
रिश्ते अगर थोड़े बिखर जाए – तो समेटने वाले कम और आग लगाने वाले बढ़ जाते हैं !
कभी कभी हम किसी पर इतना भरोसा कर लेते हैं की वो हमारी पीठ में खंजर पे खंजर घोंपता रहता है.. उस भरोसे के पीछे खंजरों के प्रहार दिखते नहीं, लेकिन उनके घाव बाद में बहुत पीड़ा देते हैं.
_ किसी को इतना क़रीब ना आने दो कि उसके दूर जाने पर ख़ुद टूट जाओ और किसी से इतना दूर भी न जाओ कि उसके पुकारने पर उसकी आवाज़ ही न सुनाई दे.
_ इसलिए हर रिश्ते में एक दायरा होना ज़रूरी है.
हर रिश्ते में समय-समय पर नमक जैसा हल्का-सा खारापन आना शायद जरूरी होता है,
_ क्योंकि यही छोटी-छोटी खटास हमें एक-दूसरे की अहमियत महसूस कराती है,
_ अगर सब कुछ हमेशा एक जैसा ही रहे, तो स्वाद की पहचान ही खो जाती है,
_ पर जब थोड़ी कड़वाहट घुलती है, तब समझ आता है कि रिश्ता सिर्फ खुशियों से नहीं, बल्कि समझ, सहनशीलता और हमेशा जुड़े रहने की कोशिशों से मजबूत होता है.!!
रिश्ते हमेशा प्यार से नहीं टिकते.. कभी समझौते से, कभी अपनेपन से, और कभी बस आदत से टिकते हैं..
_ जब दो लोग एक-दूसरे के आदी हो जाते हैं, तो फिर कमियाँ मायने नहीं रखतीं, झगड़े डर नहीं देते..
_ हर बात के बाद भी लौट आने की वजह वही पुरानी आदत होती है.. क्योंकि मोहब्बत से ज़्यादा मुश्किल चीज़ है.. किसी की आदत बन जाना, और आदतें कभी नहीं छूटती.!!
सच तो यह है कि हम इंसान बेहद स्वार्थी हो गए हैं.
_ हमने रिश्तों को व्यापार बना दिया है, जहाँ भावनाओं की जगह “मुनाफे” ने ले ली है.
_ अब हम ऐसे रिश्ते निभाते हैं जो हमें कुछ देते हैं और धीरे-धीरे उनसे दूरी बना लेते हैं जो हमें कुछ नहीं देते.
_ यही कारण है कि आज के समय में परिवार, मित्रता और सामाजिक संबंध सभी महज औपचारिकताएं बन कर रह गए हैं.!!
जब तक किसी फूल की चाह है _ वह आकर्षित करेगा ही, _ मिलने पर खुशी भी होगी..!!
_ लेकिन कब तक _ हम उसे अपने पास ताज़ा रख पाएंगे _
_ वही हाल रिश्तों का भी है..!!
_ हद से ज्यादा किसी के बारे में जानकारी और interference [ दखल अंदाजी ] रिश्तों को खराब करती ही है.
_ निरर्थक कहा-सुनी के कारण माहौल बिगड़ जाता है और ‘मुंह चलाए’ बिना हम लोग रह नहीं सकते !!
_ जुबान और दिमाग तेज़ चलाने से रिश्तों की रफ्तार धीमी पड़ जाती है..
_ परिणामस्वरूप धीरे-धीरे रिश्ते बोझ बनने लगते हैं !!
_ इसलिए थोड़ी बहुत दूरी और ignorance आज के time में रिश्तों की ताजगी के लिए जरूरी है.!!
_ दूर रहने पर रोज-रोज की किच-किच नहीं होती, चार दिन का मिलना जुलना हुआ तो _ हंस-बोल कर बीत जाता है _ और प्रेम बना रहता है..!!
जिस रिश्ते में कोई कमिटमेंट नहीं होता उस रिश्ते को लेकर ऊंचे उड़ना ठीक नही होता.
_ जितने ऊंचे उड़ेंगे एक दिन उतने ऊंचाई से गिरेंगे भी..!!
_ फिर सिर्फ पछतावा होगा..!!
आपके पास जो रिश्ते हैं, उसे संभालिए, सहेजिए.. ; रिश्ते दौलत हैं.. तभी तक, जब तक इनमें स्वार्थ और अहं का घुन नहीं लगता है.
_वर्ना भाई भाई नहीं रहता है, बहन बहन नहीं रह जाती है… बाकी रिश्तों के बारे में तो कहना ही क्या..!!
रिश्तों में मुसीबत के समय पर उनका साथ अनिवार्य होता है.
_जबकि, आज के समय में मित्र, रिश्तेदार अधिकतर बातें करते हैं पर सहयोग से किनारा कर लेते हैं.
जीवन में जब खून के रिश्ते धोखा देते हैं तो.. ..इंसान निर्मोही हो जाता है..
..और बाकी का जीवन अकेले जीता है.
_ शुरुआत में ख़ामोशी पढ़ने वाले, अंत में चीखें भी अनसुनी कर देते हैं..!!
बेवकूफ बने रहो, रिश्ते बने रहेंगे,
_जिस दिन गलत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाओगे “रिश्ते टूटने लगेंगे”
खत्म हो गया ‘उन लोगो से रिश्ता भी’..
_ जिन्हे देख कर लगता था.. ये उम्र भर साथ निभाएंगे.!
पहल आप नहीं करोगे तो याद तो वो भी नहीं करेंगे,
_ रिश्ते आजकल के कुछ ऐसे ही हैं.!!
जब कोई आँखों के बजाय कानों से देखना शुरू कर देता है,
_तो रिश्तों में दरार आना तय है..!!
कुछ रिश्ते जिस हाल में हैं, उसी हाल में छोड़ देना बेहतर है ;
_उन्हें ज्यादा संभालने में हम खुद बिखरने लगते हैं !!
एक तरफा रिश्ता नहीं निभ सकता, अगर सामने वाला एफर्ट्स नही दे रहा तो..
_ उसको उसके हाल पर छोड़ देना चाहिए !!
रिश्ते बिजली की धाराओं की तरह होते हैं ! गलत कनेक्शन आपको झटके देगा, लेकिन सही कनेक्शन आपके जीवन को रोशन कर देगा.
Relations are like Electric Currents !
Wrong connection will give you Shocks. But the Right ones will Light Up Your Life.
जिन रिश्तों से आप जन्म से जुड़े होते हैं जिनके सुख-दुख आपको बखूबी प्रभावित करते हैं, वो रिश्ते विरासत में मिले होते हैं !
_ किन्तु जब लोग आपके स्वभाव के बदौलत आपसे जुड़ते हैं
_ और, निःस्वार्थ भाव से हाल जानने को बेहाल होने लगते हैं
_ वो रिश्ते जीवन के पूंजी होते हैं !
_ सही मायनों में मानवता के परिचायक होते हैं
_ एवं, आपके जीवन की सार्थकता को सिद्ध करते हैं..!!
कोई भी रिश्ता झूठ सच से परे होता है,
_ क्योंकि हम सच झूठ का फैसला खुद करते हैं,
_ रिश्तों में इतने दिमाग नहीं लगाए जाते कि सिर्फ सच या झूठ के आधार पर रिश्ते से मुंह मोड़ लिया जाए,
_ रिश्ते दिल से बनाए व निभाए जाते हैं,
_ छोटे मोटे झूठ–सच, नोक–झोंक रिश्तों की बुनियाद मजबूत करती हैं..
जब आप किसी रिश्ते में होते हैं, तो उसकी देखभाल करनी होती है.
_ आप जिन रिश्तों को लपेट कर आलमारी में रख देते हैं, वो दम तोड़ देते हैं.
_ लेकिन जिन रिश्तों को मिलन, बातचीत, मदद की हवा-पानी देते रहते हैं, वो दीर्घायु होते हैं.
किसी के रहते ही बता दीजिए कि आपके जीवन में उनका कितना महत्त्व है हिम्मत करके, चाहे रिश्ता कैसा भी हो..
_ कभी शब्दों में, कभी व्यवहार से यह जता दीजिए कि आप उन्हें कितना मानते हैं और उनकी कितनी क़द्र करते हैं..
_ क्योंकि एक दिन वे चले जाएँगे, और तब यह खालीपन रह जाएगा कि वे यह जाने बिना ही चले गए.. ऐसा नहीं होना चाहिए.!!
किसी से भी किये वादे बहुत कम ही तोड़ने चाहिए, क्योंकि यह भरोसा तोड़ता है.
_ विश्वास और भरोसे के बिना, कोई रिश्ता नहीं होता..
रिश्ते निभाने हैं तो थोड़ा सुनने की भी आदत डालिए,,
_ सिर्फ़ बोलने से यहां नहीं निभती !!
निभा कर दिखाओ तो कुछ बात है,
_ रिश्ते बनाना तो आजकल आम बात है..!!
रिश्ते !! कुछ छण के लिए हैं तो मीठे बनिए;
_ यदि !! सदा के लिए हैं तो स्पष्ट बनिए..!!
सिर्फ खून के रिश्ते होना जरूरी नहीं होता,
_कुछ रिश्ते दिल के भी हुआ करते है..
अजनबियों में भी, एक रिश्ता होता है..!
_ जान पहचान का नहीं, पर कुछ अपना होता है..!!
कुछ रिश्ते अनसुलझे रह जाते हैं.
_ बिगड़ जाती है संबंधों की तह बनते बनते.._ फिर कभी ना सही होने के लिये..!!
रिश्ते कहीं भी सीधी सरल रेखा में सरपट नहीं चल रहे..
_ तनाव अपने ही रूप में हर जगह है..
..और इसे ही तो पकड़ने की चुनौती है.!!
कोई नहीं है इस संसार में जिसने रिश्तों को ठगा या धोखा न दिया हो.
_ जरुरत पड़ने पर सब अपनेपन और रिश्तेदारी का दिखावा करते हैं, किंतु वास्तविकता में यहां कोई किसी का सगा नहीं.
– कड़वा मगर सच
शांति पाने के लिए ज़रूरी है कि हम ज़रूरत से ज़्यादा बोझ ना ढोएं.
_ रिश्ते तभी तक अच्छे होते हैं, जब तक वे सुकून दें.
_ “कम, लेकिन सार्थक” रिश्ते ज़िंदगी को बेहतर बनाते हैं.!!
“अपने ही गिराते हैं हम पर बिजलियां,
_ ग़ैरों ने आ के फिर भी थाम लिया है,
_ जो अपने थे वो बैरी बने बैठे हैं,
_ अपनों ने अपना कर्तव्य बखूबी निभाया है.”
“- ताने ताने पर लिखा है रिश्तेदारों का नाम-“
अगर आपको लोगों से शिकायत है कि आप लोगों के काम आते हैं और वो आपके काम नहीं आते..
_ तो ये रिश्ता प्यार का नहीं बल्कि व्यापार का है… और व्यापार में घाटा होना कोई बड़ी बात नहीं है.!!
खुशियां सिर्फ पैसों से नहीं खरीदी जाती लेकिन खुशियों के लिए पैसे भी उतने ही अहम हैं जितने रिश्ते..
_ इसलिए हम कोशिश यही कर सकते हैं कि टॉक्सिक और तनावपूर्ण रिश्तों से चार हाथ की दूरी बनाए रखें..
_ जो आपके साथ हैं उनका अच्छे से साथ दें
_ किसी ऐसे इंसान के पीछे नहीं भागें.. जो आपकी जिंदगी को तनाव से भर रहा है..!!
किसी रिश्ते के साथ होने के बाद भी हम अकेले रह जाते हैं, जहाँ होने को बहुत कुछ हो सकता था, लेकिन मन जानता था जो हो रहा है ठीक नहीं है,
_ खैर !…होने पर भी ना होना मान लेना कितना पीड़ादायक होता है…!
रिश्तों में अगर आपकी गैरमौजूदगी से उन्हें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ रहा है तो..
_ शायद आपकी मौजूदगी का कभी कोई मतलब ही नहीं था..!!
अगर दो लोगों को अलग होना ही है, तो झगड़ा करने से क्या फायदा ?
_ झगड़ा सिर्फ मन को और भारी करता है, नफरत बढ़ाता है, और जो रिश्ता कभी खूबसूरत था, उसे कड़वाहट में बदल देता है.
_ अगर बिछड़ना तय है, तो क्यों न सम्मान और शांति के साथ अलविदा कहा जाए..
_इससे दोनों के लिए आगे बढ़ना आसान हो जाता है.
कुछ रिश्तों की शुरुआत बेहद मजबूत होती है, जिससे हमे यकीन होता है कि हम कभी अलग नहीं होंगे,
_ लेकिन अचानक उन रिश्तों का अंत इतना बुरा हो जाता है कि हम सोचते हैं कि अब शायद ही कभी फिर मुलाकात होगी….!
जब कठिन चीजें बहुत आसानी से मिल जाए न, तब हम कद्र करना बन्द कर देते हैं..
_ या यूं कहें कि यह मानव स्वभाव ही है, चाहे वह प्रेम हो या यारी या कोई रिश्ते और इसका खमियाजा हम किसी को खोकर चुकाते हैं, खैर !…
जिंदगी अनमोल है, इसे रिश्तों की उलझनों में फंसा कर न बर्बाद करें..
_ हर पल शानदार तरीके से जिएं, क्योंकि यही असली कहानी है.
_ खुशियां बाहरी नहीं, भीतरी होती हैं, खुद को बदलें, और जिंदगी बदल जाएगी.
_ रिश्ते जब बोझ लगने लगें, जो रिश्ता आपको तकलीफ दे, तो उनसे दूरी बना लेना ही बेहतर है.!!
रिश्ता सिर्फ़ वो नहीं है, जो किसी लेबल के जरिए होता है.
_ यह तो दो आत्माओं के बीच ऊर्जा का आदान–प्रदान है, फ़िर वो दो आत्माएं अलग–अलग भूमिकाएं निभा रही हैं.
_ हम सारा दिन जो भी कर रहे हैं, रिश्तों के लिए ही तो कर रहे हैं,
_ सारी मेहनत विफल लगती.. जब एक छोटी सी बात से रिश्ता हिलने लगता है.
_ हम कोशिश बहुत कर रहे हैं, लेकिन कोई गलतफहमी, कोई नाराज़गी, कोई दुख, कोई अधूरी उम्मीद रह जाती है.
_ छोटी–छोटी बात पर इतनी उम्मीदें है कि उनके पूरे न होने पर हम आहत हो जाते हैं और फिर सवाल करने लगते हैं,
_ इन सब को हावी नहीं होने देना चाहिए.
_ आख़िरकार, रिश्तों में ’क्या किया’ की तुलना में ‘किस सोच’ के साथ किया,
यह ज़्यादा मायने रखता है.!!
एक अच्छा इंसान रिश्तों में कई मौके देता है, लेकिन जब वो समझ जाता है कि सामने वाला नहीं सुधर सकता,
_ तो वो अपने मन से उस रिश्ते को हमेशा के लिए ख़त्म कर देता है..!!
जब आपका किसी के प्रति बेहद लगाव,,
_ सामने वाले को घुटन महसूस कराये,, _ ऐसे रिश्ते का,, क्या भविष्य है ?
अब मुझे तकलीफ नहीं होती, चाहे कोई भी छोड़ कर जाए..
_ क्योंकि मैंने उन रिश्तों से धोखा खाया है, जिन पर मुझे नाज़ था..!!
रिश्ते अगर मर्यादा भूल जाए तो हम रिश्ते भूलना पसंद करते हैं..!!
जो रिश्ते ख़ामोश हो चुके हैं, अब उनके लिए शोर नहीं करना,
_ बहुत लड़ लिए सबके लिए, अब ख़ुद को कमज़ोर नहीं करना ;
_ ज़िंदगी ले ही जाती है सब को अपनी मंज़िल के पास,
_ पर जिन राहों को छोड़ दिया है, अब ख़ुद को उस ओर नहीं करना..!!
हम किसी शख़्स को नहीं.. उसके साथ हमारे रिश्ते को खो देते हैं,
_ मुड़कर देखेंगे तो.. वो इंसान कहीं ना कहीं.. हमें मिल जाएगा,
_ लेकिन उस से जो हमारा रिश्ता था.. वो कहीं पीछे खत्म हो चुका होता है.!!
पता नहीं लोग इतनी चालाकियां क्यों करते हैं,
साथ में रहते भी हैं और जलते भी हैं,
_ रिश्ता भी रखते हैं, दुश्मनी भी निभाते हैं,
_ तारीफ़ भी करते है, और पीठ पीछे बुराई भी करते है..!!
दोगला इंसान बाहर जाकर घरवालों की बुराई करता है और फिर घर लौटकर उन्हीं को नसीहत देता है की घर की इज्जत बनाए रखनी चाहिए,
_ अजीब इंसान हो यार, जब तुम्हारा ही मुँह सबसे बड़ा स्पीकर है, तो इज्जत कैसे बचाई जाएगी..?
_ चुगलखोर व्यक्ति के सम्मुख, कभी गोपनीय रहस्य न खोलें.!!
हाथी से हजार गज की दूरी रखें, घोड़े से सौ गज की दूरी रखें, सींग वाले जानवर से दस गज दूर रहें, लेकिन दोगला इंसान जहां दिखे, वहां खड़े रहने में भी नुकसान है.!!
फसल सूखने के बाद बारिश किसी काम की नहीं रहती, यही बात रिश्तों में भी लागू होती है.
_ समय रहते मतभेदों को दूर कर लेना चाहिए.
_ अगर सामने वाला आपके बिना जीना सीख गया तो.. फिर आपके द्वारा किया गया प्रयास किसी काम नही आयेगा.!!
“रिश्ते अब बस रोज़मर्रा के संदेशों तक सिमट गए हैं —
Good morning, kaise ho, khana khaya…
_ ये सब बंद कर दो तो लोग कहते हैं भूला दिया,
_ लेकिन इन्हीं औपचारिक बातों के पीछे जो असली भूला हुआ अपनापन है,
उस पर किसी की नज़र नहीं जाती.
_ देखा जाए तो रिश्ते अब दिल से नहीं, दिखावे में ही सिमट गए हैं.!!
रिश्ते आजकल कपड़ों की तरह हो गए हैं, जिस तरह कपङा फट जाने पर लोग उसकी सिलाई तुरपाई नहीं करते फेंक देते हैं,
_ ऐसा ही हाल संबंधों का हो गया है, थोड़ो-सी अनबन होते ही लोग छोड़ना पसंद करते हैं, मनाने का रिवाज अब नहीं रहा..!!
रिश्तों का भी गज़ब नियम है.. जब तक कर्तव्य मेरे और अधिकार दूसरो के हैं सब अपने हैं.
_ जिस दिन अधिकार मेरे और कर्तव्यों की आशा दूसरो से की, सब अपने भी पराये हो जाते हैं..!
बेहतर है उन रिश्तों का टूट जाना, जिन रिश्तों में आप टूट रहे हों..!
खून अब गाढ़ा नहीं रहा. आजकल, रिश्तेदारों से ज्यादा अजनबी हमारी मदद करते हैं.
_रिश्तेदार आपको तभी स्वीकार करते हैं जब आप सफल होते हैं.
Blood is no longer thicker. Nowadays, Strangers help us more than Relatives. Relatives only Accept you when you’re Successful.
कुछ लोग बहुत गहराई की बातें किया करते थे, दिल से अपना कहा करते थे, फ़िर हुआ ये जड़ों में वही चोट लगाकर चले गए, अंततः रिश्तों की डालियां पत्तियां

सब सूख गईं..!!
– रिदम राही
कभी-कभी दिल इतना किसी से जुड़ जाता है कि यादें बोझ भी बनती हैं और सुकून भी..
_ याद रखना और भूलना दोनों ही साधना जैसे हैं — कोई भी आसान नहीं.
_ सच्चाई ये है कि जिस रिश्ते ने आत्मा को छुआ हो, वहाँ “भूलना” असंभव और “याद करना” स्वाभाविक हो जाता है.
_ इसलिए बात भुलाने या याद करने की नहीं, बल्कि अपने भीतर उस एहसास को शांति से जगह देने की है — ताकि वह बोझ न बने, बल्कि आत्मा का अनुभव बनकर टिक जाए.!!
वो पुराने ज़माने गए.. जब लोगों को काम-धंधा कम था और टाइम पास करने के लिए बतकही ज़्यादा होती थी.
_ लोगों से जुड़ने में बतकही सहायक होती है. _ अब लोगों को पढ़ाई करने, कमाई करने से फ़ुरसत नहीं, इसलिए रिश्तों के लिए भी कामचलाऊ टाइम होता है.
_ इसमें कुछ बुराई नहीं है.
_ जितना बोलोगे, उतना मुंह से गलत भी निकलेगा.
_ ज़्यादा बक-बक करके भी क्या करना.!!
“रिश्ते”– रिश्तों को निभाते समय किसी के आगे इतना मत झुको; कि उठते वक्त सहारे की जरुरत पड़े !
_ क्योंकि जो आपको झुका रहा है.. वो आपको उठने में कभी मदद नहीं करेगा !
_ और जो रिश्तों को झुकाने में विश्वास करता है; वो कभी रिश्तों को निभाने में विश्वास नहीं कर सकता.
_ ऐसे रिश्ते को उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए.. या समय को प्रतिकूल जानकर शांत बैठ जाना ही अच्छा है.
_ कोई अपना है या हम किसी के हों.. क्या फर्क पड़ता है..
_ अपना वही है.. जो हर हाल में आपको आगे बढाता है..
_ जो पीछे धकेल रहा है.. वो कभी आपका नहीं हो सकता है.!!
एक वक्त के बाद हम बेहतर बनने की चाह छोड़ देते हैं,
_ क्योंकि हमारा इस बनावटी दुनिया से मोह नहीं रह जाता.. हम थक चुके होते है प्रयत्न करते-करते..
_ अतीत में निभाए गए कई रिश्तों से और उनसे मिले निराशजनक परिणाओं से..
_ जब किसी की भावनाएं मर जाती हैं, फिर उनको फ़र्क नही पड़ता किसी की भावनाओं से, वो नही सुनते आपकी शिकायतें, आपके द्वारा की गई बुराइयां या आपके द्वारा की गई बड़ाई..
_ इसलिए अब अपनी ही विचित्र सी धुन में मगन रहने लगते हैं.!!
_ वो बस ख़ुश रहना चाहते है अपनी दुनिया में…!!
कभी-कभी हम किसी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाते हैं,
_ उनकी मुस्कान की वजह, उनके हर दिन की शुरुआत होते हैं..
_ पर वक्त बड़ा चुपचाप सब कुछ बदल देता है.
_ एक समय आता है.. जब वही हमारी मौजूदगी से परेशान होने लगते हैं..
_ जिन पलों में हमारी बातों में उन्हें सुकून मिलता था,
_ अब वही बातें.. उन्हें बोझ लगने लगती हैं..
_ हम वही रहते हैं, लेकिन उनके लिए हमारे मायने बदल जाते हैं.
_ शायद यही रिश्तों की सच्चाई है.. कोई भी हमेशा किसी का नहीं रहता,
_ कभी हम वजह होते हैं.. किसी की खुशी की, और कभी वही लोग हमें अपनी सबसे बड़ी परेशानी समझने लगते हैं.!!
रिश्ते बनाना आसान होता है, मुश्किल होता है जब टूटने लगते हैं,
_ उस वक्त समझ नहीं आता कि पकड़े रखें या जाने दें,
_ क्योंकि होता क्या है, जब जाने देने का सोचते हैं तो पुराना वक्त याद आता है, और आदत भी पड़ चुकी होती है,
_ और जब पकड़े रखने की कोशिश करते हैं, तो कई बार घुटन और समझौतों के साथ रहना पड़ता है,
_ इसीलिए किसी से अधिक लगाव भी मानसिक पतन [mental breakdown] का कारण बन जाता है…!
कोई चाहे जितना भी अपना, कितना ही करीबी क्यों न हो..
– हर इंसान के भीतर एक निजी दायरा होता है, एक ऐसी जगह जहाँ उसकी सोच, उसकी चुप्पियाँ और उसके एहसास सिर्फ उसी के होते हैं..
– वहाँ बिना इजाज़त दाख़िल होना भी कभी-कभी रिश्तों को बोझिल बना देता है..
_ सच्ची नज़दीकी वही है.. जो उस पर्सनल स्पेस का सम्मान करना जानते हो.!!
– निरर्थक
रिश्ता कोई भी हो ईमानदारी सबसे जरूरी होती है, झूठ धोखा बेईमानी दिखावे से अगर किसी का स्नेह पा भी लिया तो वो स्थाई नहीं होता, एक ना एक दिन सच बाहर आ जाता है,
_नियति के चक्र के आगे अच्छे बुद्धिमान खिलाड़ी भी धराशायी हो जाते हैं,
_ इसलिए हमेशा सच के साथ और रिश्तों की मर्यादा बनाकर चलिए…!
“कभी तुम मुझे बचा लेना, कभी मैं तुम्हें बचा लूंगा”
_ “सच्चे रिश्ते वही होते हैं,
जहाँ कोई हमेशा रक्षक और कोई हमेशा रक्षित नहीं रहता…
कभी तुम थाम लो, कभी मैं थाम लूँ — और यूँ हम दोनों मिलकर गिरने से बचते रहें.”
“इंसान कोई थाम कर रखने की चीज़ नहीं होता”
_ जो दिल से साथ नहीं रहना चाहता, उसे हज़ार बार प्यार दो, ध्यान दो या आँखों से समंदर बहा दो— फिर भी वो एक दिन चला ही जाएगा.
_ रिश्तों में ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं चलती, ज़बरदस्ती से दरवाज़े बंद होते हैं, मगर दिल कभी नहीं जुड़ते.
_ साथ वही रहता है.. जो सच में रहना चाहता है.
_ जो दिल से जुड़ा होता है, वो कभी बहाने नहीं बनाता..
_ और जो जाना चाहता है, उसके पास बहाने ही होते हैं.
_ दुनिया का सबसे बड़ा दर्द यही है—
_ किसी को सँभाल कर रखने की कोशिश करना..
_ जो अब खुद ही तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहता.
_ उसे रोकना वैसा ही है जैसे किसी बच्चे को जबरदस्ती गणित का कठिन सूत्र याद करवाना—
_ सिर भारी होगा, थकान होगी, लेकिन अंत में कुछ भी असर नहीं होगा.
_ क्योंकि अगर रिश्ता दिल से न हो, तो उसके मायने भी खो जाते हैं.
_ इसलिए जो जाना चाहता है, उसे जाने दो.
_ प्यार का मतलब बाँधना नहीं, प्यार का असली मतलब है आज़ादी देना—
ताकि वो खुद महसूस कर सके कि.. किसका साथ उसके लिए सच में कीमती था.
_ जो तुम्हारा है, वो बिना आवाज़ दिए लौट आएगा,
_ और जो सिर्फ राहगीर था, वो किसी मोड़ पर खो जाएगा.
_ अपना प्यार सच्चा रखो, पर खुद को किसी के पीछे इतना मत खो दो कि.. तुम्हारी अपनी अहमियत ही खत्म हो जाए.!!
हमें दूसरे के बारे में सब कुछ क्यों जानना रहता है,
_ क्या हम जितना जानते हैं __ उतना काफी नहीं होता…
_ हम इंसान क्या खुद के बारे में सब कुछ जानते भी हैं…
_ जब हम खुद को ही पूरी तरह नहीं जान पाते तो..
_ फिर दूसरा कोई कैसे हमारे बारे में सब कुछ जान सकता है…
_ हम जिनके साथ भी रिश्ते में बंधे होते हैं..
_ या जिससे भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं..
_ हम उनके बारे में इतना कुछ जरूर जान चुके होते हैं __जिससे ये जुड़ाव बना रहे.
_ जरूरत से ज्यादा किसी के बारे में जानने की कोशिश करना,
_ किसी भी रिश्ते में कड़वाहट घोलता है……
_ कोई भी इंसान संपूर्ण नहीं होता बल्कि वो गलतियों का पुतला होता है,
_ हम दूसरे के बारे में शायद उससे भी ज्यादा बेहतर जानते हैं..
_ क्योंकि हमें उनकी अच्छाइयों के संग कमियां भी दिखती है,
_ ये अलग बात है कि उन कमियों को नजरअंदाज कर..
_ उन कमियों के संग ही जुड़े रहते हैं..
_ बस यही जिंदगी है ..!!
असल में हम इंसान बेहद खुदगर्ज हो चुके हैं,
_ हमें अपने अलावा कोई दिखता नहीं,
_ हम जो भी करते हैं उसमें सबसे पहले ये सोचते हैं कि ये कार्य करने से हमारा फायदा है या नुकसान,
_ हम रिश्ते भी व्यापार की तरह ही बना रहे हैं,
_ हमारा जुड़ाव सिर्फ उन्हें के साथ रहता हैं, जिनसे हमारा कुछ फायदा जुड़ा होता है
_ अन्यथा हम हर उस रिश्ते से दूर होते चले जाते हैं जो हमसे कमजोर या हमारी उनसे कोई जरूरत पूरी नहीं हो सकती…
_ इसलिए आज के समय परिवार, दोस्ती हो या समाजिक जुड़ाव, ये सब कुछ वक्त तक निभाए जा रहे हैं…
आख़िर क्यों लोग उन टूटे रिश्तों की बार बार याद दिलाते हैं,
_ जिन्हें हम तोड़ना नही चाहते थे और जो उन वजहों से टूट गए..
_ जिन पर हमारा कोई कंट्रोल नही था.!!
_ कोई कहता है कि इसका दोष, कोई बताता है उसका दोष..
_ कोई कहता है.. उनकी कमी पूरी नहीं हो सकती..
_ कोई इनके साथ, कोई उनके साथ..
_ कोई किसी के साथ नहीं.. मगर आदत है उसकी कि.. वह गैरजरूरी हस्तक्षेप करेगा जरूर..!!
_ अरे, आपको न लेना एक न देना दो..
_ मगर प्रतिक्रिया देने में आगे..
_ कोई रिश्ता टूट गया तो टूट गया..
_ क्यों उसे लेकर बैठे रहें, उसका रोना रोते रहें.. उसके लिये जान दें दें !!
_ रिश्ते ऐसे हों कि खुशी और ग़म एक दूसरे के साथ मनाओ.. पर हावी ना हो..
_ सबकी अपनी अपनी जिंदगी भी होती है.!!
कभी-कभी जीवन में कुछ रिश्ते, कुछ लोग, और कुछ लम्हे इतने अपने हो जाते हैं कि उनका दूर हो जाना हमें भीतर तक तोड़ देता है.
_ लगता है जैसे सब कुछ रुक गया हो — समय, भावनाएं, उम्मीदें..
_ लेकिन यहीं जीवन का सबसे गहरा सच छिपा होता है.
— कहा जाता है, “कहीं संपर्क कम हो जाए तो किसी और जगह प्रबल संपर्क बन जाता है.”
_ इसका अर्थ यही है कि जब कोई आपका साथ छोड़ता है, तो वो कहीं और अपने जीवन का नया अध्याय लिख रहा होता है — किसी और के साथ, किसी और की कहानी में.. और यही सत्य सबसे ज्यादा चुभता है.
_ हम सोचते हैं कि जब हमारे जीवन में अंधेरा छा गया, तो क्या सच में किसी और के जीवन में उजाला फैल गया ?
_ जी हाँ, ठीक वैसा ही होता है.
_ “सूर्य का डूबना कभी भी अंत नहीं होता; वो कहीं और एक नई सुबह की शुरुआत बनता है.”
_ जब कोई व्यक्ति हमारी दुनिया से दूर चला जाता है, हमारे मन में उदासी की रात बसा कर चला जाता है, तब कहीं और वह किसी के लिए एक नई सुबह, नई उम्मीद बनकर प्रकट होता है.
_ और यही जीवन की सच्चाई है — सब कुछ एक प्रवाह में है.
_ कोई रिश्ता जब समाप्त होता है, तो कहीं न कहीं एक नया रिश्ता जन्म लेता है.
_ यह प्रकृति का नियम है, लेकिन मानवीय भावनाएं इतनी सहज नहीं होतीं.
_ हम उस रात में फँसे रह जाते हैं.. जो कभी खत्म ही नहीं होती.
_ हमारी आत्मा उस “अधूरी रात” में भटकती रहती है — जहाँ अतीत की परछाइयाँ होती हैं, अधूरे सपने होते हैं, और टूटे वादों की गूंज होती है.
_ वहीं दूसरी ओर, वही व्यक्ति किसी और की ज़िंदगी में सुबह की पहली धूप बन जाता है.
_ तो क्या इसका मतलब यह है कि हमें टूट जाना चाहिए ?
_ “नहीं”.. इसका मतलब यह है कि जब जीवन की कोई दिशा बंद होती है, तो कहीं और एक नई दिशा खुल रही होती है.
_ किसी और के लिए ही नहीं, हमारे लिए भी..
_ शायद हमें थोड़ी देर लगे उस सुबह तक पहुँचने में, लेकिन याद रखिए — हर रात के बाद सुबह जरूर होती है.
_ आज नहीं तो कल, आपकी रात भी किसी के लिए सुबह बन सकती है.
_ और उस समय, आप समझेंगे कि जो कुछ भी बीता, वह आपको उस एक सुबह तक लाने के लिए ही था — जो सच में आपकी अपनी होगी.!!
इस भौतिकवादी युग में – चाहे महिला हो या पुरुष, बच्चा हो या बूढ़ा – यदि वह स्वार्थी नहीं बन पाया, तो दुनिया स्वार्थी बनकर उसका फायदा उठा लेगी.
‘ इसलिए, सबसे पहले खुद के बारे में सोचिए, उसके बाद किसी अन्य के बारे में.
_ किसी भी नकारात्मक रिश्ते को ठीक वैसे ही त्याग दीजिए, जैसे आप भोजन के उस निवाले को त्याग देते हैं, जिसमें कोई महीन सा बाल आ जाता है.
– Vipul
लड़ाई के बाद चाहे समझौता हो जाए, लेकिन लड़ाइयां रिश्तों को खोखला करती हैं.
_ हर लड़ाई के बाद मन में कुछ टूट जाता है और हम गाँठ बाँध कर फिर आगे चल देते हैं.
_ गाँठ-गंठीली राहों पर चलते-चलते मन लहू-लुहान हो जाता है और एक दिन हम गाँठ लगाना भूल जाते हैं.
_ बस, वह दिन कभी न आए कि हम गाँठ बाँधना भूल जाएं.!!
– Manika Mohini
कभी किसी से बहस मत करो, जब तुम्हें लगे तुम्हारे विचार किसी से मिल नहीं रहे, मुस्कुराते हुए उस रिश्ते की पतंग को छोड़ दो, जाने दो फिर आसमान पर उसे अपने रास्ते पर..
– Rhythm Raahi
जब भी आप किसी नए रिश्ते में जाते हो हर पल नई बातें, नया एक्साइटमेंट, एक दूसरे को टाइम देना, नई फीलिंग्स वगैरा वगैरा ये सारी भावनाएं उमड़ती हैं,
_ लेकिन मुझे ठहराव पसंद है किसी भी स्थिति में.. ये किसी के लिए बोरिंग हो सकता है, पर मेरा मानना है शुरू से ही जो हो वही रहो और तुम्हें कोई उसी तरह एक्सेप्ट भी करे तो ठीक है,, चार दिन की चांदनी के बाद कोई बदल जाए या बदलना हुआ तो फिर रिश्ता कैसा..!!
– Rhythm Raahi
कोई भी काम किसी को इंप्रेस करने के लिए मत करो, तुम जैसे हो उसी धारा प्रवाह की सहजता, सरलता लिए बहते रहो,
_ इस तरह से फ़िर जब कोई इंसान तुम्हारे साथ ठहरता है तो वही तुम्हारे लिए वास्तविक रिश्ता है और जो तुम्हारी सहजता सरलता के साथ ठहर नहीं सका वो इंसान तुम्हारा था भी नहीं और हो भी नहीं सकता..!!
कुछ रिश्ते बचाकर रखने चाहिए और कोशिश करनी चाहिए की किसी से व्यवहार खराब ना हो,
_ लेकिन ये भी सच है कि हम हर किसी को खुश नहीं रख सकते, चाहे कितना संभालो, कुछ लोग जीवन से चले ही जाते हैं, क्योंकि उनके मुताबिक हम उनकी हां में हां नहीं मिला पाते.!!
– Rhythm Raahi
चीज़ें अब रिपेयर नहीं होती, रिप्लेस होती हैं ये बात सिर्फ वस्तुओं में लागू नहीं होती, रिश्तों में भी बराबर लागू होती हैं.. कड़वा है मगर कठोर सत्य है..
मेरी कोशिश रहती है कुछ अच्छा करने की, कोशिश रहती है सामंजस्य बनाकर चलने की, जिसे कर्तव्य समझकर करता भी हूं मगर बावजूद इसके भी हर किसी के लिए अच्छा तो फ़िर भी नहीं बन सकता मैं..
– Rhythm Raahi
जो फूल के पौधे हम रोपते हैं, उनसे कहीं अधिक स्वस्थ और सुंदर वो पौधे होते हैं, जो बगीचे की बजाय, पत्थरों, कंक्रीट की दीवारों के बीच रास्ता बनाते हुए उग आते हैं..
_ जीवन में रिश्ते भी कुछ इसी तरह हैं, जबरदस्ती थोपे या रोपे गए संबंध तभी मधुर नहीं होते या उनके मधुर होने की कोई गारंटी नहीं होती..
_ जो रिश्ते स्वाभाविक प्रकृति से मिलते हैं असली जीवन का पुष्प तो उन्हीं में खिला

होता है..!!
– Rhythm Raahi
खुद को गलत जगह कभी खर्च मत करो, फिर चाहे वह आपका वक्त हो या कोई रिश्ता.!!
– Rhythm Raahi
सब अपनी जगह पर है, मैं भी वही हूँ, लोग भी वही हैं,
_ पर अब हर चीज़ में एक अजनबीपन सा है..
_ जहाँ कभी ठहाकों की गूंज थी, अब वहां खामोशी पसरी है..
_ वही चेहरे हैं, मगर मुस्कान अब शिष्टाचार भर रह गई है..
_ न वो आँखों की चमक रही, न बातों में आत्मीयता..
_ अब हर कोई जैसे खुद में उलझा है,
_ हर रिश्ता अब एक औपचारिकता में बदल चुका है..
_ शायद वक़्त ने किसी को नहीं छोड़ा.. सब बदल गया,
_ बस यादें हैं.. जो अब भी वहीं ठहरी हुई हैं.!!
– निरर्थक
दूर हो जाते हैं लोग बिना दूरी की परिभाषा समझे..!
_ कभी पर्सनल स्पेस के नाम पर, तो कभी जब रिश्तों में आए दुःख को संभाल नहीं पाते तो एक ठंडी दूरी बना लेते हैं, जिसे एक चुप से ढक देते हैं, उसे हीलिंग का नाम देते हैं.
_एकान्त सुंदर है, पर एकान्त के लिए जो दूरी होती है.. उसमें दो लोगो की स्वीकार्यता होती है, उसे हम पर्सनल स्पेस कहते हैं.
_ डिटैचमेंट कभी पर्सनल स्पेस नही होता, वो दरअसल एक ख़ालीपन पैदा करता है रिश्तों में..
_ और ख़ालीपन हमेशा एक इंसान पैदा करता है.. उसमें दूसरे की रज़ामंदी नहीं होती हैं अक्सर..!!
_ ख़ालीपन हमेशा उन संभावनाओं को आकर्षित करेगा.. जिस से दो लोगो के बीच दुःख की सीमाओं का विस्तार होगा.
_ दुःख के वक़्त में भी इतना क़रीब तो होना ही चाहिए की दिन में एक बार आप एक मुक्त मुस्कान अपने होठों पर महसूस कर सकें.. अपने साथी को याद करके.!!
_ दूरी कितनी मीठी है.. जब दो प्रेमी दूर हो एक-दूजे से और एक-दूजे की याद में तकते हैं चाँद ,पढ़ते है कविताएं, मिलन की अभिलाषाओं से मंद-मंद मुस्काते हैं.
_ एक पिता का दूर परदेश में बैठे अपने बच्चे की तस्वीर को तकना..
_ एक पति का अपनी पत्नी की फ़ोटो को चूम कर मुस्कुराना.. जब काम से दूर हो, परवाह करना, हाल लेना ..कितना कुछ है ..जिसे दूरियां सुंदर बनाती हैं.
_ किसी भी रिश्ते में पास होने से ज्यादा अनिवार्य है पास महसूस होना.
_ अपने रिश्तों में दूरियां उतनी ही रखना के किसी के गिरने से पहले तुम्हारा हाथ संभाल सके उसे,
_ उसकी आँख का आँसू जमीन पर नहीं.. तुम्हारे कांधे पर गिरे.
_ रिश्तों में दूरियां आकर्षण का कारण बननी चाहिए.. विकर्षण का नहीं.
_ हेमन्त परिहार
जीवन की सतत बहती धारा में, कुछ रिश्ते और बंधन समय की कसौटी पर खरे उतरते हैं, तो कुछ अनायास ही मुरझाने लगते हैं। यह नफरत का भाव नहीं, अपितु एक मूक दूरी है, जो परिस्थितियों के आवरण में लिपटकर हृदय के कोमल कोनों को स्पर्श करती है.
_ कभी-कभी, किसी इंसान के साथ बिताए पल, जो कभी आत्मा को सुकून देते थे, समय के साथ धुंधले पड़ जाते हैं.
_ यह कोई तीव्र विरोध या वैमनस्य नहीं, बल्कि एक ऐसी शांति है, जो लगाव के अभाव में पनपती है.
_ जैसे कोई पुराना पत्र, जो अब पढ़ा नहीं जाता, पर उसे फेंका भी नहीं जाता.
_ मैंने देखा है कि परिस्थितियाँ—चाहे वे विश्वास का टूटना हों, अपेक्षाओं का बोझ, या फिर जीवन की भिन्न दिशाएँ—कभी प्रिय रहे लोगों के बीच एक अदृश्य दीवार खड़ी कर देती हैं.
_ लगाव का कम होना नफरत का पर्याय नहीं। यह जीवन की एक स्वाभाविक गति है, जहाँ कुछ लोग हमारे साथ कुछ कदम चलकर अपनी मंजिल की ओर मुड़ जाते हैं,
_ और हम, उनके बिना, अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हैं.
_ इस प्रक्रिया में हृदय कभी-कभी उदास तो होता है, पर वह यह भी सीखता है कि हर रिश्ते का एक समय होता है, और उस समय को गरिमा के साथ विदा करना ही जीवन की सच्ची कला है.!!
_ राहुल आर्यन
खोई हुई चीज़ें अक्सर भौतिक नहीं होतीं.
_ कभी कोई रिश्ता, कभी कोई सपना, कभी वह संस्करण खुद का जो हम कभी थे.
_ ये सब एक खामोश वज़न बन जाते हैं.
_ हम चलते हैं, हँसते हैं, काम करते हैं, लेकिन भीतर कोई हिस्सा लगातार उस खाली जगह को मापता रहता है और यही माप-तौल हमें वर्तमान से दूर ले जाता है.
_ हम शरीर से यहाँ होते हैं, मन से कहीं और..
_ जो हाथ में है—प्रेम, अवसर, समय, स्वास्थ्य—वह सब धुंधला पड़ने लगता है, क्योंकि आँखें पीछे की ओर अटकी रहती हैं.
_ लेकिन यहीं एक कड़वी सच्चाई भी छिपी है: हम अक्सर खोई हुई चीज़ को इसलिए इतना बड़ा बनाते हैं..
_ क्योंकि उसे छोड़ने का मतलब है खुद के किसी हिस्से को स्वीकार करना कि वह अब नहीं रहा.
_ छोड़ना दुख देता है, इसलिए हम उसे ढोते रहते हैं और ढोते-ढोते एक दिन पता चलता है कि असल में हमने जो खोया वह बहुत पहले खो चुके थे; अब तो हम बस उस खोने की याद को ढो रहे हैं.
_ फिर भी, एक पल आता है—कभी बहुत देर से—जब हम मुट्ठी खोलते हैं.
_ रेत गिरती है, हथेली खाली हो जाती है, पर पहली बार हवा का स्पर्श महसूस होता है.
_ खालीपन दुख देता है, लेकिन वह खालीपन ही नई चीज़ों के लिए जगह बनाता है.
_ शायद यही जीवन का सबसे निष्ठुर और सबसे दयालु नियम है: जो जा चुका, उसे जाने दो, वरना जो आ सकता है, वह भी चला जाएगा.
_ खोया हुआ बोझ नहीं, एक सबक होता है। जब तक हम उसे सबक की तरह पढ़ नहीं लेते, वह बोझ बना रहता है और जब पढ़ लिया, तो वह बोझ अचानक हल्का नहीं होता—वह गायब हो जाता है.
_ फिर हाथ में जो रह जाता है, वह रेत नहीं, मिट्टी होता है—जिसे सहेजकर कुछ नया उगाया जा सकता है.!!
– राहुल आर्यन
कभी-कभी सुकून पाने के लिए पास रहना नहीं, बल्कि थोड़ा हट जाना ज़रूरी हो जाता है.
_ कुछ रिश्तों से, जो मन पर अनावश्यक भार डालते हैं ;
_ कुछ स्थानों से, जहाँ शांति के बजाय हलचल अधिक होती है ;
_ और कुछ बातों व चीज़ों से, जो जीवन में अर्थ कम और शोर ज़्यादा पैदा करती हैं.
_ यह दूरी कमजोरी नहीं, बल्कि आत्म-संरक्षण की एक समझदार चुप्पी होती है.
– राहुल आर्यन
कुछ रिश्ते
पकड़ने से नहीं,
छोड़ने से हल्के होते हैं।
कुछ जवाब
मिलते नहीं,
बस स्वीकारने पड़ते हैं।
क्योंकि अब समझ आया है—
पीछे हट जाना हार नहीं,
कभी-कभी
खुद को बचा लेना
ही सबसे बड़ी जीत होती है।
– राहुल आर्यन
जीवन में “छोड़ देने” की कला में माहिर होना ज़रूरी है.
_ सब कुछ वैसे भी पकड़ कर नहीं रखा जा सकता.
_ किसी परीक्षा की तैयारी में यह पता रहना चाहिए कि क्या-क्या नहीं तैयार करना है.
_ चुनते समय यह पता रहना चाहिये कि किन लोगों से वास्ता नहीं रखना है.
_ सम्बन्धों में यह पता रहना चाहिए कि किस सम्बन्ध को कब जाने देना है.
_ बातों में यह पता रहना चाहिए कि किन बातों को दीर्घकालिक स्मृति का हिस्सा नहीं बनने देना है.
_ बहुत अधिक मूल्यों, स्मृतियों, द्वंद्वों, अतिसंवेदनशीलता, सापेक्षता और समावेशन में जकड़े लोग अंततः कहीं नहीं पहुँचते, सिवाए हाशिए के, वह भी ख़ुद नहीं बल्कि लोगों द्वारा खिसका दिए जाने के बाद.
– Shail Tyagi Bezaar
खंडहर होते रिश्तों के बीच एक बात तो ख़ास है की अगर आप सही हैं तो ऐसे रिश्तों की ज्यादा परवाह करने की जरुरत नहीं.
_ रिश्ते जरूर मूल्यवान होते हैं और गौरय्या की पकड़ जैसी पकड़ के योग्य होते हैं,
_ लेकिन अगर दबाव महसूस करें तो उड़ा कर दूर कर देने में ही समझदारी है.!!
किस किस को खुश करें ?
_ कैसे खुश करें ?
_ कुछ रिश्ते तो.. खुश होने में ही नहीं आ रहे.
_ इस उम्र में.. क्या निकाल कर उनके सामने रख दें
_ कि उनकी खुशी का पलड़ा.. हमारी पीड़ा से उपर उठ आसमान छू ले ?
और हमारा पलड़ा जमीन !
सभी रिश्ते अनेको बन्धनों में बंधे होने के बावजूद भी आपस में एक सजीव नेटवर्क बनाये रखने के लिये बाध्य हैं.
_ यही बाध्यता स्वस्थ रिश्तों का आधार है.
_ रिश्ते ऐसे नहीं लगने चाहिए कि एक बोझ ढो रहे हों , बल्कि एक माला में गुथे फूलों की तरह महक बिखेरते हुए हों.
_ जब एक रिश्ता बोझिल लगे तो वह नेटवर्क के सारे रिश्तों को बीमार कर के रख देता है.
_ और सभी सम्बंधित रिश्ते कच्ची नींव पर बने मकान की तरह भरभरा कर खत्म हो जाते हैं.
_ यही बाध्यता हमें रिश्तों की गर्माहट से सुकून देने वाली होती है.
कभी कभी कोई रिश्ता गलत परिक्षण से भी टूट जाता है.
_बाद की स्थितियों में देखने पर पता चलता है कि निर्दोष कोई और था और दोषी छुपा बैठा था.
_ इसलिए किसी भी स्थिति में स्थिति को नियंत्रण से बाहर न जाने दें.
हम तो खुद भी बहुत कुछ खो चुके हैं.
– तेज बीर सिंह सधर
बिना हड्डियों की जुबान कितने मासूम रिश्तों को घायल कर सकती है सोच का विषय है.
_ अगर इसमें हड्डियां होती तो शायद लहूलुहान भी कर देती और किसी के दिल को चीर कर भी रख देती.
_ कुछ लोग इसका प्रयोग इतने सहज भाव से करते हैं और आगे बढ़ जाते हैं जैसे कुछ कहा न हो, लेकिन बात दिल में लगे खंजर की तरह चुभ जाती है.
_ घायल का तो समझा ही जा सकता है क्या हाल होता है, सम्बंधित कितने रिश्ते प्रभावित होते हैं ? सोचने वाली बात है.
_ इस समाज को सही दिशा में ले जाने का प्रयोग ही आदमी को असली इंसान बनाता है वरना लोग तो बहुत से घूम रहे हैं सड़कों पर.
( यहां आदमी से मतलब पुरुष और स्त्री दोनों से है।)
‘रिश्तेदारों का कड़वा सत्य’
_ रिश्ते खून से बनते हैं, लेकिन निभाए दिल से जाते हैं.
_ यह बात हम बचपन से सुनते आए हैं, पर सच हमेशा इतना सीधा नहीं होता.
_ रिश्तेदार वही होते हैं, जो हर खुशी में शामिल होने का दावा करते हैं और हर दुख में साथ देने की बात करते हैं..
_ लेकिन समय आने पर अक्सर उनके चेहरे बदल जाते हैं, सामने मुस्कान और पीछे तुलना.. यही कड़वा सत्य है.
_ जब तक इंसान कमजोर होता है, संघर्ष कर रहा होता है.. तब तक रिश्तेदार उसे सलाह देते हैं, समझाते हैं और कभी कभी दया भी दिखाते हैं..
_ लेकिन जैसे ही वही इंसान अपने पैरों पर खड़ा होने लगता है, आगे बढ़ने लगता है,
_ तब कई चेहरों पर अजीब सी खामोशी आ जाती है..
_ तारीफ कम और आलोचना ज्यादा होने लगती है..
_ उनकी नजरों में आपकी हर सफलता किस्मत बन जाती है और हर गलती आपकी औकात..
_ रिश्तेदारों की दुनिया में तुलना सबसे बड़ा रोग है..
_ कौन कितना कमा रहा है, किसका बेटा क्या कर रहा है, किसकी बेटी की शादी कहां हुई, किसके घर में क्या सामान है..
इन सब बातों का हिसाब किताब चुपचाप रखा जाता है..
_ कोई खुले में कुछ नहीं कहता, लेकिन हर नजर में एक तराजू छुपा होता है..
_ जिसमें इंसान को नहीं.. उसकी हैसियत को तौला जाता है.
_ कड़वा सत्य यह भी है कि कई रिश्ते जरूरत के समय ही याद आते हैं.
_ जब काम हो तब फोन आएगा, जब मदद चाहिए तब अपनापन जागेगा..
_ लेकिन जब आपको सहारे की जरूरत हो.. तब अक्सर बहाने मिलेंगे.
_ व्यस्तता का हवाला मिलेगा या फिर चुप्पी मिलेगी..
_ यह चुप्पी ही असली जवाब होती है.
– लेकिन इस सच्चाई का दूसरा पहलू भी है..
_ हर रिश्तेदार एक जैसा नहीं होता..
_ कुछ लोग सच में अपने होते हैं, जो बिना दिखावे के साथ खड़े रहते हैं.
_ जिनके लिए आपकी इज्जत, आपकी सफलता से बड़ी होती है..
_ ऐसे लोग कम होते हैं, पर वही असली पूंजी होते हैं.
_ इसलिए जरूरी है कि इंसान रिश्तों की भीड़ में खुद को ना खो दे..
_ सबको खुश करने की कोशिश में अपनी आत्मा को थका न दे..
_ सम्मान दीजिए लेकिन खुद का सम्मान बचाकर रखिए..
_ अपनापन रखिए, लेकिन उम्मीदों का बोझ मत पालिए..
_ क्योंकि रिश्तेदारों का कड़वा सत्य यही है कि हर कोई अपना नहीं होता और जो सच में अपना होता है, उसे साबित करने की जरूरत नहीं पड़ती.!!
अधिकतर रिश्ते ऐसे होते है जहां एक इंसान रिश्ते में अपना सब कुछ झोंक देता है जबकि दूसरा इंसान सिर्फ लेना जानता है उसे फर्क नहीं पड़ता कि तुम्हे भी कुछ चाहिए या नहीं,
_ तुम्हारा वक्त, पैसा, attention सब उन्हें चाहिए पर तुम्हे क्या चाहिए उन्हें इससे मतलब ही नहीं होता है,
_ और वो इंसान तुम्हे तब तक चूसता रहेगा जब तक तुम पूरे खाली ना हो जाए, वक्त से, पैसे से सब कुछ से.
नोट: जैसे कि तुम वो मोमबत्ती हो जो अंधेरे को खत्म करने के लिए रिश्ते में आते हो,
पर गलत इंसान मतलब हवा के संपर्क में आने पर पूरी तरह खत्म भी हो जाओगे और तुमसे फैली रोशनी सामने वाले को दिखाई भी नहीं देगी और वो बोल देगा तुमने मेरे लिए किया ही क्या है.
_ Commando Dhruv
जो रिश्ते दूर हो जाते हैं, उनका दुःख नहीं होता है, क्योंकि इंसान सब्र कर लेता है.. अपने अकेलेपन का, या कोई और विकल्प तलाश लेता है खुश होने का,
_ लेकिन जो रिश्ते साथ रह कर अवसाद देते हैं, दुख पीड़ा या तिरस्कार देते हैं, वे ज़्यादा खतरनाक होते हैं.
_ उन रिश्तों में साथ रह कर जो पीड़ा दर्द होता है, वह इंसान किसी को बता भी नहीं सकता.
_ इसके विपरीत जो रिश्ते टूट जाते हैं, उनका मातम मना कर इंसान आज़ाद हो जाता है,
अतः टूटने के भय से ऐसे रिश्ते से जुड़े रहना व्यर्थ है.. जहां हर रोज़ मरा जाता है.
_ बेहतर है एक रोज़ ढंग से मरा जाए और हमेशा के लिए खुद को जीवित रखा जाए.!!
| Jan 1, 2014 | MASTO
दांत टूथपेस्ट- ब्रश से साफ हो जाते हैं..
_तन साबुन -पानी से धुल जाता है..
_मैं इस खोज में हूं कि दिमाग में भरा कचरा कैसे साफ होगा ?
मानसिक स्वास्थ्य [Mental health] आजकल एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है,
_ फिर भी दुर्भाग्यवश, कोई भी सिस्टम इस पर उतना ध्यान नहीं दे रहा है, जितना देना चाहिए..!!
जीवन में सिर्फ ऐसे लोगों को चुनो, जो आपके मानसिक स्वास्थ के लिए अच्छे हों !!
जिसपर आपका अधिकार ही ना हो, उसकी चाहत रखना.. खुद को मानसिक रोगी बनाना होता है.!!
स्वस्थ मन दूसरों की बुराई नहीं करता.!
A healthy mind, Does not speak ill of others !!!
जब व्यवस्था [System] अच्छी और सही हो तो दिमाग को सोचने की ज्यादा जगह मिलती है.
When the system is good and correct, the mind gets more space to think.
अच्छे लोगों को कभी बड़े या छोटे के दायरे में नहीं रखा जा सकता,
_ उनका अच्छा होना ही बड़ा होना है..!!
ऐसे लोग जो अपने जीवन मूल्यों से समझौता नहीं करते,
_ वे निश्चित ही आज की परिस्थिति में एक विशेष मानसिकता [special mindset] के होते हैं.
विलक्षण व्यक्ति [Eccentric] ताली का भूखा नहीं होता,
_ कभी-कभी सबसे तेज़ चलने वाला दिमाग़ शांत दिखता है.!!
जो लोग कठपुतली बनने के बजाए अपने दिमाग का इस्तेमाल करते हैं, वे लोग सवाल भी उठाएँगे, और जानने की हिम्मत भी करेंगे.
_ करियर सफलता से लेकर अध्यात्म तक – सबकुछ ज्ञान के मार्ग पर मिलता है.
_ कुछ जानना और विस्मित होते रहना ही उनकी ज़िंदगी का बड़ा एडवेंचर और मज़ा है,
_ यही वह बात है.. जो ज़िंदगी बदल सकती है.!!
मानसिक रूप से मजबूत लोग दूसरों पर निर्भर नहीं रहते हैं,
_ इसका मतलब है कि वे दूसरों को ख़ुश करने के बजाय खुद को ख़ुश रखते हैं,
_ उन लोगों में अकड़ नहीं होती, बल्कि उनकी सीमायें होती हैं, जिन्हें वो किसी को भी लांघने नहीं देते हैं..!
_ वे हमेशा खुद को बेहतर बनाने और अपने जीवन को जितना संभव हो.. उतना आसान और स्वतंत्र बनाने के तरीके खोजते रहते हैं.!!
सस्ते लोगों को सस्ते लोग पसंद आते हैं.
_ महंगे लोगों के साथ निभाना हर कोई Afford भी नहीं कर सकता.
_ यहां महंगे लोग का तात्पर्य मौलिक व्यक्तित्व [original personality] से है.
जिसके साथ की यात्रा कठिन और Long लाइफ होती है..
_ जो अपनी बात के पक्के होते हैं.. ना कि वो जो आज कुछ कह रहे और हर चार दिन बाद बदल-बदल कर बातें बनाते हैं और कहीं भी टिक नहीं पाते..!!
माइक्रो लेवल [सूक्ष्म स्तर] पर अपडेट रहना ज़रूरी है.,
_ विभिन्न विषयों की अपडेटेड जानकारी हो तो बात करना, ठोस तरह से बात करना और विषयों को जोड़ना आसान हो जाता है.!!
अमीर बनने के लिए हर चीज में अच्छा बनना जरूरी नहीं है,
_ बल्कि कुछ चीज में अच्छा बनना जरूरी है _ जिसमें आपको कोई हरा नहीं सकता..!!
मानसिक स्तर की गुणवत्ता इस बात से आंकी जाती है कि..
_ आपकी दृष्टि कितनी दूर तक और कितनी गहराई तक जाती है.!!
पर्सनालिटी कैसी है ये महत्वपूर्ण नहीं है, मेंटलिटी कैसी है ये ज्यादा महत्वपूर्ण है.!!
कम बोलने वाले लोगों की कुछ खूबियां :-
- जो लोग सामने वाले की बात ध्यान से सुनते हैं और खुद कम बोलते हैं, _ ऐसे लोगों में दूसरों के मन को पढ़ने की छमता बहुत ज्यादा होती है.
- कम बोलने वाले लोग अधिक समझदार होते हैं, क्योंकि वो तब ही बोलते हैं, जब उन्हें जरुरत होती है.
- कम बोलने वाले लोग किसी से उलझते नहीं हैं बल्कि किनारे से निकलना पसंद करते हैं.
- कम बोलने वाले लोग ज्यादा किसी के मुंह नहीं लगते, इसी कारण इनकी Self Respect मेंटेन रहती है.
- कम बोलने वाले लोग फ्रेंडली होते हैं, क्योंकि वह दिल के बहुत अच्छे होते हैं.
- कम बोलने वाले लोग अकेले रहना पसंद करते हैं क्योंकि इनके Personality में Positive Attitude होता है.
- कम बोलने वाले लोग बहुत ट्रस्टेबल होते हैं, क्योंकि किसी के सामने _ आपकी बातों को बयां नहीं करते.
- कम बोलने वाले लोगों में ज्यादा सफल होने की क्वालिटी पाई जाती है, _ क्योंकि ये हवाबाजी नहीं करते.
- यह लोग अपने ज्यादातर कामों को सीक्रेट तरीके से करते हैं _ और काम पूरा हो जाने पर ही किसी को बताते हैं.
- कम बोलने वाले लोग बहुत इंटेलीजेंट होते हैं, _ क्योंकि वह अपनी बातों को एक ही बार में कह देते हैं.
- कम बोलने वाले लोग _ उन चीज़ों को ‘नहीं’ कहने पर अड़े रहते हैं ; _जो उनके मिशन से मेल नहीं खातीं.!!
- कम बोलने वाले लोग _ सिर्फ पसंदीदा लोगों के सामने _ ज्यादा बोलते हैं !!!
सफल लोगों की दिनचर्या :–
अगर सफल लोगों की दिनचर्या पर ध्यान देंगे तो आप देखेंगे कि ये लोग कितना भी व्यस्त क्यों न हों, लेकिन हमेशा एनर्जेटिक और मोटिवेटेड होते हैं. दरअसल, ये अपने समय का सही उपयोग करना जानते हैं. सफल लोगों के लछ्य स्पष्ट होते हैं और वे अपने आराम के समय भी कुछ प्रोडक्टिव काम करते हैं. सफल व्यक्ति हर छण को उपयोगी बनाना जानते हैं. ऐसे लोग फ्री टाइम में मेडिटेशन, एक्सरसाइज, फैमिली के साथ समय बिताना, हॉबी को टाइम देना आदि वे सारे काम करते हैं, जिससे उन्हें मानसिक खुशी मिले और जब वे काम पर लौटें तो ज्यादा एनर्जेटिक महसूस करें.
जानते हैं ऐसी ही आदतें :—————–>
समझते हैं एक्सरसाइज के लाभ :—————-
सफल लोगों की दिनचर्या में एक बात कॉमन होती हैं, वह है नियमित एक्सरसाइज करना. इसमें कोई शक नहीं कि एक्सरसाइज से शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं. लछ्य को अर्जित करने के लिए प्रतिबद्ध लोग एक्सरसाइज को मोटिवेशल बूस्टर की तरह देखते हैं. इससे जीवन के हर छेत्र में आगे बढ़ने के लिए ऊर्जा मिलती है. एक्टिविटीज तनाव दूर करने के साथ एनर्जी लेवल को बूस्ट करने का काम भी करती है. इस तरह एक्सरसाइज करने वाले लोग पूरा दिन स्वयं को लछयों पर फोकस्ड रख पाते हैं.
हर पल को एंजोय करना जानते हैं : ————
सफल लोग अपने काम से वास्तविक रूप से ब्रेक लेना जानते हैं. ऐसे लोग आराम के समय कहीं आउटिंग पर जाना पसंद करते हैं. इससे न केवल मेंटल हेल्थ को फायदा मिलता है, बल्कि प्रोडक्टिविटी एवं ओवरऑल पर्सनेलिटी डेवलपमेंट भी होता है.
यदि आप यह सोचते हैं कि वेकेशंस पर जाना समय खराब करना है, तो यह गलत है, बल्कि जब आप छोटे ब्रेक के बाद फिर से काम पर लौटेंगे तो स्वयं को ज्यादा प्रोडक्टिव एवं एनर्जेटिक महसूस करेंगे. साथ ही तनावमुक्त भी रहेंगे.
मानसिक हेल्थ पर देते हैं ध्यान :——————-
मेंटली स्ट्रॉन्ग होने के लिए सफल लोग मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा अवश्य बनाते हैं. _माइंडफुल मेडिटेशन दिमाग को क्लियर करने के साथ नए- नए विचारों की आवाजाही भी बढ़ाता है और मेमोरी पॉवर बढ़ती है. इससे फोकस बढ़ता है और तनाव कम होता है.
_इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि सफल लोग अपने आराम के समय को मेडिटेशन का फायदा उठाने में खर्च करते हैं. _उनका मानना है कि क्रिएटिविटी बढ़ाने के लिए मेडिटेशन बेस्ट है. इस तरह सोचने की छमता भी बढ़ती है.
पढ़ने की आदत :————–
नियमित पढ़ने के कई सारे फायदे हैं. आप न्यूज़ पेपर, मैगजीन, नॉन फिक्शन बुक्स या फिक्शन बुक्स आदि पढ़ सकते हैं.
पढ़ने से आपका शब्द भंडार बढ़ेगा. साथ ही मेमोरी एवं रिंटेशन भी बूस्ट होगा. पढ़ने की आदत से बिज़नेस और कॅरियर के लिए नए विचारों के निर्माण में भी मदद मिलेगी.
सीखने की चाह :————-
सफल लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते कि सामने वाले व्यक्ति क्या सोचेगा. वे हर समय कुछ न कुछ नया सीखने के लिए लालायित रहते हैं.
भले ही आप अपनी इंडस्ट्री में मास्टर हों, लेकिन तकनीक एवं नए बदलाव लाने के लिए सीखने की आदत को विकसित करना बहुत जरुरी है.
आइए जानते हैं, मानसिक रूप से मजबूत लोगों की कुछ आदतों के बारे में :–
सफल होने के लिए आपका मानसिक रूप से मजबूत होना बहुत जरुरी है, तभी आप सभी चुनौतियों का सामना आराम से कर सकते हैं. मानसिक रूप से मजबूत लोग कभी उन चीजों के बारे में परेशान और चिन्तित नहीं होते जो उनके पास नहीं है.
ऐसे लोग अपनी विफलता को स्वीकार करते हैं और इससे उन्होंने जो सीखा, उसके लिए शुक्रगुजार होते हैं.
आपको कभी न कभी जिंदगी में मुश्किलों का सामना करना ही पड़ता है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता आप क्या करते हैं और आप कौन हैं. जिंदगी में आपको किसी न किसी मोड़ पर रुकावटों और कठिनाइयों से उबरना ही पड़ता है. यह चुनौतियाँ आपको भले ही दुर्गम लग सकती हैं, लेकिन ऐसा क्या है जो सफल लोगों को या कम से कम जो सफलता की राह पर चल रहे हैं, उन्हें अलग करता है.
वह चीज उनकी काबलियत नहीं बल्कि उनका विश्वास और गिरकर फिर उठने की जिद है. कुछ लोग इसे उनका स्वभाव कहते हैं, लेकिन आमतौर पर इसे मानसिक मजबूती कहा जाता है. ऐसे लोग काबिल होने के साथ ही मानसिक तौर पर बहुत मजबूत भी होते हैं.
देखा जाए तो काबिलियत को बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है, लेकिन असल में जिंदगी में सफल वही लोग होते हैं जो मानसिक तौर पर मजबूत होते हैं, जो गिरकर दोबारा उठने की हिम्मत करते हैं,
अगर आप भी वाकई सफल होना चाहते हैं तो आपको भी दिमागी रूप से खुद को मजबूत बनाना होगा.
आइए जानते हैं, मानसिक रूप से मजबूत लोगों की कुछ आदतों के बारे में :—–
बीते हुए कल से सीखते हैं :—
कोई भी शख्स ऐसा नहीं होता जिससे कभी कोई गलती न हुई हो. कहते हैं कि गलतियां करके ही आप सीखते हैं और सीखकर ही आगे बढ़ते हैं. अगर आप मानसिक रूप से मजबूत होना चाहते हैं तो आपको भी अपनी गलतियों से सीखना चाहिए. आपको बीते हुए कल पर ही नहीं अड़े रहना चाहिए और न ही उसके बारे में सोच- सोचकर अपना आज और आने वाला कल खराब करना चाहिए.
इसके इतर आपको बीते हुए कल में की गई अपनी गलती से सीख लेनी चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि आपसे दोबारा ऐसी गलती न हो.
इमोशनली इंटेलीजेंट होते हैं :——————
_ इंटेलिजेंट अकेला रहना पसंद करता है, इंटेलिजेंट लोग झुंड में नहीं रहते.!!
“High emotional Intelligent” लोगो को मूर्ख बनाना आसान नही है, वो शब्दों की बजाय, energy, mood, body language, आपकी आँखों मे झांक कर आप को पहचान सकते हैं !
_ हो सकता है वो कम बोलते हों.. पर वो notice सब करते हैं।
_ शायद इसी वजह से “high emotional Intelligent” लोग अक्सर अकेले रहते हैं.
सफल लोग इमोशनली इंटेलीजेंट होते हैं.
_ इसका मतलब यह है कि उनमें अपनी और दूसरों की भावनाओं को पहचानने और उन्हें संभालने की छमता होती है.
_ उनकी यह प्रतिभा भी उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाती है.
_ अगर आप भी इमोशनली इंटेलीजेंट बनना चाहते हैं तो आपको अपने अंदर कुछ खास गुण लाने होंगे,
_ जैसे परफेक्शनिस्ट न बनना, वर्क- लाइफ बैलेंस बनाना, आसानी से ध्यान नहीं भटकने देना, अपनी कमियां और ताकत जानना, अपने लिए कठिन सीमाएं तय करना आदि.
_ इन गुणों से आप खुद को इमोशनली इंटेलीजेंट बना सकते हैं या यह जान सकते हैं कि आप इमोशनली इंटेलीजेंट हैं या नहीं.
_ मानसिक मजबूती के लिए यह गुण होना जरुरी हैं.
कभी शिकायत नहीं करते :——————
अधिकतर लोग आसपास की चीजों या लोगों की आलोचनाओं में लगे रहते हैं. वह ऐसा इसलिए करते हैं, ताकि उन्हें अच्छा लगे, लेकिन वास्तविकता में ऐसा करने से वह और ज्यादा निराश महसूस करते हैं.
अगर आप मानसिक मजबूती चाहते हैं तो आपको चीजों को लेकर शिकायत नहीं करनी चाहिए. इसके बजाए चीजों को बेहतर बनाने की तरफ ध्यान देना चाहिए. शिकायत करने के बजाए समाधान खोजना चाहिए.
ये लोग जिंदगी को हमेशा सकारात्मक नजरिए से देखते हैं और नकारात्मकता को खुद पर कभी हावी नहीं होने देते.
फ्लेक्सिबल होते हैं :——————
जो लोग मानसिक रूप से मजबूत होते हैं, वह अपनी समस्याओं के लिए अलग- अलग समाधान निकाल लेते हैं.
_ साथ ही वह अपनी समस्याओं को अलग और नए तरीके से देखते हैं, जिससे वह उनके लिए हल ढूंढ पाते हैं.
_ वह किसी एक तरह के समाधान पर अड़ते नहीं हैं. वह फ्लेक्सिबल तरीके से काम करने में यकीन रखते हैं और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालते हैं. इससे वह निश्चित रूप से सफल होते हैं.
_ ये लोग खुद को समय के साथ अपडेट करते हैं, जबकि बाकि लोग हालात के साथ समझौता करते हैं !!
बोरियत से निपटते हैं :————
महान लोगों को अलग करने वाली विशेषताओं में से एक यह है कि वे बोरियत का आनंद लेते हैं ; _ जब वे मूड में नहीं होते हैं या कुछ और करना चाहते हैं तब भी वे दृढ़ रहने को तैयार रहते हैं ; _
सफलता के लिए सबसे बड़ा खतरा बोरियत है, असफलता नहीं.
—– हम अलग-अलग हिस्सों से बने हैं, कुछ अच्छे, कुछ बुरे, और एक स्वस्थ दिमाग इस दुविधा को सहन कर सकता है और एक ही समय में अच्छे और बुरे दोनों को जोड़ सकता है,
_मानसिक बीमारी वास्तव में इस प्रकार के एकीकरण की कमी के बारे में है – हम स्वयं के अस्वीकार्य हिस्सों से संपर्क खो देते हैं. – Alex Michaelides
We are made up of different parts, some good, some bad, and a healthy mind can tolerate this ambivalence and juggle both good and bad at the same time. Mental illness is precisely about a lack of this kind of integration – we end up losing contact with the unacceptable parts of ourselves. -Alex Michaelides
जिन्दगी बहुत मुश्किल भी नही और बहुत आसान भी नही
हजारों कठिनाइयाँ भी हैं और जटिलताएं भी हैं
लेकिन सारा खेल केवल ” नजरिए ” का है
कि हम कैसे अपनी समस्याओं को देखते हैं, कितनी जल्दी उसमे सुधार के लिए कोशिश करते हैं
और जीवन को सही दिशा में ले जाने के लिए कितनी ताकत झोकते हैं
ये सब नजरिया ही तो है, नजरिया को नजर भी नही लगती
बस अपनी खुशियों की नुमाईश हर जगह करनी नही चाहिए..
खुश रहने वाले लोगों की आदतें : –>
1 – वो लोग दूसरों से कोई उम्मीद नहीं रखते —
अगर आप ऐसे व्यक्ति हैं जो अपने किसी काम के लिये दूसरों पर उम्मीद लगाये रखते हैं तो आप दुखी रहेंगे,
अगर आप सच में खुश रहना चाहते हैं तो आज से ही दूसरों से सभी उम्मीदें करना बंद कर दो !
2 – वो लोग वही काम करते हैं जो उन्हें पसंद है ! —
आज अधिकांश लोग वह काम करते हैं जो दूसरे लोग उनसे करवाते हैं या करने के लिए बोलते हैं, इसलिए वह हमेशा दुखी रहते हैं ;
जो दूसरों के हिसाब से अपनी जिंदगी जीते हैं, वो कुछ समय के लिये तो खुश रह सकते हैं, लेकिन वो अपनी लाइफ से कभी संतुष्ट नहीं रह सकते !
अपनी रुचियों और प्रवृत्तियों को ध्यान में रखना सुनिश्चित करें ; _ आपके लिए क्या आसान है जो दूसरों के लिए कठिन है ?
सफल होना बहुत आसान हो जाता है जब आप कुछ ऐसा कर रहे होते हैं जिसे आप पसंद करते हैं और आनंद लेते हैं.
3 – वो लोग कभी भी नकारात्मक नहीं सोचते —
खुश रहने वाले लोग हमेशा हर Situation में Positive रहते हैं, वो किसी भी परिस्थिति में कभी भी बुरा नहीं सोचते, ना खुद के लिए ना दूसरों के लिए ;
आप जैसा सोचते हो, आपकी जिंदगी भी _ उसी रूप से ही ढलती है !
10 Traits of a high value man
एक उच्च मूल्य वाले व्यक्ति के 10 लक्षण
1. Assertive/ Confident _ दृढ़ / आत्मविश्वासी.
2. Has a purpose and Follows it _ एक उद्देश्य है और इसका अनुसरण करता है.
3. Intentions are clear _ इरादे साफ हैं.
4. Doesn’t chase, Attracts _ पीछा नहीं करता, आकर्षित करता है.
5. Has Self – Respect _ आत्म – सम्मान रखता है.
6. Maintains Frame _ फ्रेम बनाए रखता है.
7. Has Growth Mindset _ विकास की मानसिकता रखता है.
8. Great Social Skills _ बढ़िया सामाजिक कौशल.
9. Understands Female nature _ स्त्री स्वभाव को समझते हैं.
10. Values Healthy Lifestyle _ स्वस्थ जीवन शैली को महत्व देता है.
“Best life” वही लोग जीते हैं जो इन चार चीज़ों को संभाल लेते हैं..-
चाहे उनका बैकग्राउंड, पैसा, ओहदा कोई भी हो :
1. जो बाहर की दुनिया से ज़्यादा अपने अंदर की दुनिया को सँभालते हैं.
_ उनके decisions उनके “अंदर” से आते हैं, लोगों को खुश करने के दबाव से नहीं.
_ ऐसे लोग कम दुखी होते हैं और कम भटकते हैं.
2. जो छोटी-छोटी चीज़ों में ख़ुशी ढूँढ लेते हैं.
_ उनको बड़ा कुछ नहीं चाहिए होता..
_ एक cup चाय, एक walk, एक kitab, एक शांत दोपहर…
_ उनकी ज़िन्दगी सादगी में ही rich हो जाती है.
3. जो comparison छोड़ चुके हैं.
_ जो दूसरों की ज़िन्दगी से तुलना करना बंद कर देते हैं —
वो बेचैन नहीं होते, उनका सुकून उनका अपना होता है.
4. जो अपना काम, अपना rhythm, अपना life-path follow करते हैं.
_ चाहे वो writer हो, farmer, teacher, या एक simple इंसान ही क्यों न हो.
_ जो naturally जो करना चाहते हैं वही करते हैं — उनकी life सबसे authentic होती है.
Simplicity + Freedom + Inner Clarity = Best Life.
“ज़िन्दगी “Best” तब होती है जब वो अपनी हो..- ना की दुनिया के standards वाली.”
शांत लोगों से सावधान रहें, वे बहुत सोच समझ कर कदम उठाते हैं ;
आप जितना समझदार होंगे, आप उतना ही कम बोलेंगे ..
जो ज्ञानी हैं ; उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि लोग उन्हें समझें,
_ मात्र अज्ञानी ही खुद को महान दिखाने में लगे रहते हैं !!
यदि आप को कोई मानसिक तौर पर प्रताड़ित कर रहा है तो _
_ आप को उस से व्यवहारिक तौर पर संपर्क निरस्त कर देने चाहियें !!
जब दिमाग कमजोर होता है तो परिस्थितियां समस्या बन जाती हैं, _
_ जब दिमाग स्थिर होता है तो परिस्थितियां आसान बन जाती हैं !!
यदि आप बुद्धिमान हो तो, अपनी समस्याएं स्वयं सुलझा लोगे ; सभी समस्याओं को हल करने के लिए बुद्धिमत्ता पर्याप्त है !!
वास्तव में जो भी समस्याएं जीवन में सृजित होती हैं, उस समस्याओं से कहीं अधिक बुद्धि होती है, यह एक उपहार है..!!
जिंदगी में सबसे अच्छा क्या है ?
जिंदगी की सबसे बड़ी चीज है अपने दिमाग को जवान रखना ; कोई उम्र का बढ़ना नहीं रोक सकता, पर अपनी उत्पादकता बढ़ाते हुए उम्रदराज होना कुछ और ही है. _ हम अपनी नासमझी के कारण रोज – रोज मरते हैं.
“*- जीवन में सिर्फ़ ऐसे लोगों को चुनों जो आपके मानसिक स्वास्थ के लिए अच्छे हों !!”
आपका आहार केवल वही नहीं है जो आप खाते हैं.
जैसे – जैसे आप बड़े होते जाते हैं, आप महसूस करते हैं कि आपका आहार केवल वही नहीं है जो आप खाते हैं, _ बल्कि यह है कि आप क्या देखते हैं, क्या पढ़ते हैं, आप किसका अनुसरण करते हैं और किसके साथ अपना समय बिताते हैं.
इसलिए यदि आपका लक्ष्य स्वस्थ दिमाग रखना है, तो आपको अपने आहार से सभी जंक को हटाकर शुरुआत करनी होगी.
*”दिमाग से मत हारना _फिर ना कोई घटना तोड़ सकेगी ना मौत मार सकेगी..”
अपने आप को उस गंदगी से हटाना, जो लगातार आपके मानसिक स्वास्थ्य को ट्रिगर करती है और आपके दिल को चोट पहुँचाती है, शीर्ष स्तरीय आत्म – देखभाल है.
Removing yourself from shit that continuously triggers your mental health and hurts your heart is top tier self-care.
आप और आपका मानसिक स्वास्थ्य आपके करियर, अधिक पैसा व अन्य लोगों की राय से अधिक महत्वपूर्ण हैं,
आपका आत्म-प्रेम हमेशा दूसरों से प्यार करने की आपकी इच्छा से अधिक मजबूत होना चाहिए.
You and your mental health are more important than your career, more money, and other people’s opinions.
Your self- love must always be stronger than your desire to be loved by others.
” जीवन का उद्देश्य समृद्धि नहीं है जैसा कि हमें विश्वास दिलाया गया है, बल्कि आत्म – देखभाल है “
The aim of life is not prosperity as we have been led to believe, but self-care.”
किसी भी दुख, चिंता और भय को इतना महत्व मत दो, कि वो आपकी शक्ति को नष्ट कर दे.
Do not give much importance to any grief, worry and fear, that it destroys your strength.
इस भागती जिंदगी में खुद को समय जरूर दें, वरना एक दिन डॉक्टर आपको समय देंगे, फिर समय भी आपका होगा और पैसा भी आपका.
आपका मानसिक स्वास्थ्य ही सब कुछ है- इसे प्राथमिकता दें.
_ समय को ऐसे बनाएं जैसे आपका जीवन उस पर निर्भर करता है, क्योंकि यह करता है.
Your mental health is everything- prioritize it.
Make the time like your life depends on it, because it does.
यदि आप नकारात्मक स्थिति में सकारात्मक सोच सकते हैं, तो आप जीत जाते हैं.
IF YOU CAN THINK POSITIVE IN NEGATIVE SITUATION, YOU WIN.
“जो बुद्धिमान हैं वे व्यस्त नहीं होंगे, और जो बहुत व्यस्त हैं वे बुद्धिमान नहीं हो सकते।” -लिन युतांग
“Those who are wise won’t be busy, and those who are too busy can’t be wise.” ― Lin Yutang
अपनी मानसिक स्थिति को ‘मैं टूटा हुआ और असहाय हूं’ से _ ‘मैं आगे बढ़ रहा हूं और ठीक हो रहा हूं’ पर स्विच करें और देखें कि आपका जीवन कितनी तेजी से बदलता है.
Switch your mental from i’m broken and helpless to I’m growing and healing and watch how fast your life changes.
खुले दिमाग वाले लोग सही होने की परवाह नहीं करते, वे समझने की परवाह करते हैं. __ कभी भी कोई सही या ग़लत उत्तर नहीं होता. __सब कुछ समझने की बात है.
Open minded people don’t care to be right, they care to understand.
There’s never a right or wrong answer.
Everything is about understanding.
एक बुद्धिमान व्यक्ति को तब तक नींद नहीं आती जब तक वह अपने प्रश्नों के उत्तर नहीं खोज लेता.
A wise person cannot sleep unless he uncovers the answers to his questions.
“एक बुद्धिमान व्यक्ति अपना मुँह खाली करने से पहले _अपना दिमाग भरता है.”
“A wise man fills his brain before emptying his mouth.”
एक बुद्धिमान व्यक्ति को दिया गया सम्मान उन लोगों के लिए बहुत अच्छा होता है जो उसका सम्मान करते हैं.
The honor paid to a wise man is a great good for those who honor him.
आपको पता है क्या समस्या है ? आप बहुत ज़्यादा सोचते हो ; आप हमेशा अपने दिमाग में रहते हैं, और आप इससे कभी बाहर नहीं निकलते.
ऐसी चीजें हैं जो आप करना चाहते हैं, जिन लोगों से आप बात करना चाहते हैं, जिन जगहों पर आप जाना चाहते हैं, लेकिन आप सही समय का इंतजार करते रहते हैं.
खैर, मैं आपको रहस्य से बचाता हूं: कोई सही समय नहीं है ; _ यदि आप इसकी प्रतीक्षा करते हैं, तो मुझे डर है कि आप हमेशा के लिए प्रतीक्षा करते रहेंगे.
जीवन अभी है, आप यहां हो, यही है। शुरू करना। हो सकता है कि आप वहां न पहुंचें जहां आप जाना चाहते हैं, लेकिन आप कहीं पहुंच जाएंगे, और मैं यह देखने के लिए इंतजार नहीं कर सकता कि वह कहां है !
दुनिया में तीन तरह के लोग होते हैं. : – पहला जो अपने सपनों के बारे में कुछ नहीं करता ; _ वे केवल दिवास्वप्न देखते हैं और कभी यात्रा करने का प्रयास नहीं करते.
दूसरे प्रकार के लोग वे होते हैं _ जो अपने सपनों को साकार करने का प्रयास तो करते हैं _ लेकिन बीच में ही हार मान लेते हैं, किसी बिंदु पर, _ वे दुनिया की बाधाओं के सामने आत्मसमर्पण कर देते हैं और हार मान लेते हैं. __ अधिकांश इसी श्रेणी में आते हैं.
और तीसरी तरह के लोग हैं. _ इस तीसरी अवस्था तक बहुत कम लोग पहुँचते हैं. _ ये वे लोग हैं जो कड़ी मेहनत करते रहते हैं, अपने सपनों को हासिल करने के लिए प्रयास करते रहते हैं._ये जिंदगी के सफर में कभी हार नहीं मानते और ये वो लोग हैं _ जो हमेशा खुद को बदलकर दुनिया बदल देते हैं.
बुद्धिमान व्यक्ति में ये 8 लक्षण पाए जाते है। अगर इनमे से आप मे 5 भी है तो आप बुध्दिमान है।
1) बुद्धिमान लोग अकेले रहना पसंद करते है _वे बेवजह दूसरों के साथ रहना पसंद नहीं करते है _और ये बहुत ही कम दोस्त बनाते है _लेकिन जो भी इनके दोस्त होते है _उनका ये जीवन भर साथ देते है _ये लोग अंदर से काफी दयालू होते है.
बुद्धिमान लोगों के औसत व्यक्ति की तुलना में कम दोस्त होते हैं, आप जितने अधिक बुद्धिमान होंगे आप उतने ही अधिक चयनात्मक [ selective ] बनेंगे.
2) बुद्धिमान लोग कम बातें करते है _वे घर वालों से भी कम बातें करते है _क्योंकि उनका दिमाग हर वक़्त किसी ना किसी चीज पर चल रहा होता है _जिसकी वजह ‘से वे सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही बोलते है !
3) बुद्धिमान लोग नए दोस्त बनाने _या किसी भी काम को सोच समझ कर करते है _किसी दूसरे की सुन कर काम नहीं करते _बल्कि खुद अच्छी तरह से ‘समझ लेने के बाद ही किसी काम की शुरुआत करते है !
4) बुद्धिमान व्यक्ति खुद से अधिक बातें करते है और बहुत अधिक सोचते है. ऐसे लोग भीड़ वाली जगह और लड़ाई झगड़े से दूर रहना पसंद करते है. _और फालतू में किसी से बहस करके अपनी एनेर्जी वेस्ट नहीं करते !
5) बुद्धिमान लोग खराब से खराब situation में भी पॉज़िटिव रहते है. वे कभी समस्या के बारे में नहीं सोचते बल्कि समस्या को दूर ‘करने के बारे में सोचते है.
_बुद्धिमान व्यक्ति के आगे आप चुगली करेंगे तो _उनका जवाब ये होगा की _रहने दो उनकी लाइफ है _उन्हें अपने हिसाब से जीने दो !
“आलोचक इधर-उधर घूमते रहते हैं और दूसरों की गलतियाँ होने का इंतज़ार करते हैं. _लेकिन दुनिया के असली कर्ता-धर्ताओं के पास दूसरों की आलोचना करने का समय नहीं है.
_वे गलतियाँ करने, सुधार करने, प्रगति करने में बहुत व्यस्त हैं.”
–बुद्धिमान इंसान की एक बहुत बड़ी विशेषता यह होती है, कि वो कभी भी किसी से नाराज़ नहीं रह सकता,
_बल्कि प्राप्त अनुभव से सतर्क जरूर हो जाता है.!!
6) हर बुद्धिमान को शुरुआत में ये लगता है कि _ मैं सबका भला चाहता हूँ _ लेकिन मुझे कोई नहीं समझता.
_ ऐसा इसलिए होता है _ क्योंकि बुद्धिमान व्यक्ति _ये सोचता है कि _दुनिया की सोच भी उसकी तरह बन जाये.
_ लेकिन लोगों की छोटी सोच की वजह से _शुरुआत में सभी लोग बुद्धिमान व्यक्ति को गलत समझते है.
7) बुद्धिमान व्यक्ति बहुत ज्यादा इमोशनल होते है ये छोटी छोटी चीज़ो को गहराई से फील करते है. _ऐसे लोग किसी नए व्यक्ति पर आसानी से यकीन भी नहीं करते _लेकिन 1 बार किसी पर यकीन कर लेते है तो _वो यकीन लंबे समय तक बना रहता है !
8) बुद्धिमान लोग अपने काम मे Improvement करते रहते है _क्योंकि ये अपने काम को हमेशा बेहतर से बेहतर तरीके से करने की कोशिश करते है _और हमेशा दूसरों से सीखते रहते है.
_ बुद्धिमान लोग निरंतरता को इतना महत्व इस कारण देते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि निरंतरता ऐसा महान गुण है, जो उनमें कौशल की कमी की भरपाई की कमी कर सकता है…
एक चतुर दिमाग [ A clever mind ] हमेशा जीवन की सच्चाइयों से दूर रहता है.
_यह खुद को बचाने की भी कोशिश करता है.
_एक सुरक्षात्मक दिमाग हमेशा प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में सोचता है.
_अगर हमें कुछ हासिल करना है तो हमें प्रतिस्पर्धी बनना होगा.
_और हम सभी कुछ न कुछ हासिल करना चाहते हैं और इसके लिए हमें प्रतिस्पर्धी होना होगा.
— प्रतिस्पर्धा हमारे अंदर ईर्ष्या और हिंसा की भावना पैदा करती है.
_और हम इतने आत्मकेंद्रित हो जाते हैं कि प्रकृति का प्रवाह हम तक नहीं पहुंच पाता.
— शुद्ध मन को कुछ नहीं चाहिए.
_यह भविष्य की तलाश नहीं करता.
_यह कभी किसी के खिलाफ नहीं है.
_यह किसी के पक्ष में नहीं है.
_यह न्याय नहीं करता और यह कहीं जाना नहीं चाहता.
— एक शुद्ध हृदय हमेशा यहाँ रहता है और पूरी तरह से खुला होता है.
_यह कोई सुरक्षा नहीं मांगता.
_यह जो कुछ भी आता है उसके प्रति ख़ुशी से असुरक्षित रहता है.
_यदि जीवन आता है तो उसे पूरी तरह से जीता है..
_और यदि कोई कठिन परिस्थिति आती है तो _उसे पूरी तरह से स्वीकार करता है.
सफल लोगों की मानसिकता
The mindset successful people
- अपने उद्देश्यों को परिभाषित करें Define your objectives
2. आत्म जागरूकता Self-awareness
3. हम किस प्रकार का जीवन जीना चाहते हैं, इसके बारे में एक दृष्टिकोण रखना
Having a vision about what kind of life we want to live.
4. अपनी रुचियों को खोजना और उसमें स्वयं को उच्चतम स्तर तक शिक्षित करना
Finding ones interests and educating oneself in that to the highest level.
5. समझ के साथ बदलाव के लिए अनुशासन और लचीलेपन का संतुलन होना
Having a balance of discipline and flexibility to change with the understanding.
जब आप सिद्धांतों [principles] के साथ जीते हैं तो.. आपके पास ऐसे लोग होंगे..
_ जो आपको बर्दाश्त नहीं कर सकते, आपको नापसंद करेंगे..
_ जो इस फैक्ट से खुद को खतरे में महसूस करते हैं कि आपके पास मानक [standard] और सीमाएं हैं.
_ क्योंकि ऐसा व्यक्ति ऐसी रियायतें [concessions] नहीं देता ..जो उसके मूल्यों [values] को धोखा देती है.
_ वह जो विश्वास करता है ..उसके साथ खड़ा रहता है,
_ भले ही दूसरों के साथ मनमुटाव हो..
_ वो अटल है, जमीन पर है, और हर किसी को खुश करने के लिए झुकता नहीं.
_ सच तो यह है कि आपकी आत्म-भावना जितनी मजबूत होगी,
_ उतना ही अधिक आप खुद को उन लोगों से अलग पाएंगे.. जिनके पास इसकी कमी है.
“एक असली आदमी “ना” कहने से नहीं डरता है”
_ वह सतही विचारों से प्रभावित नहीं है, न ही वह सत्यापन [verification] की लालसा करता है,
_ जब आप सिद्धांतों [principles]के अनुसार, एक रेखा खींचते हैं, जिसे कुछ लोग आपके साथ पार नहीं करेंगे.
_ यह उन्हें असुविधाजनक बनाता है, क्योंकि वे आपको हेरफेर नहीं कर सकते,
_ आपको आकर्षित नहीं कर सकते हैं,
_ या आपको उससे कम के लिए व्यवस्थित [arranged] नहीं कर सकते हैं..
..जिसके आप हकदार हैं.
यह कुछ बातें हैं जो इंट्रोवर्ट [introvert- अंतर्मुखी] लोगों के बारे में सच होती हैं:
1. वे सोशल मीडिया पर खुलकर बात कर सकते हैं, हंसी-मज़ाक कर सकते हैं, लेकिन असल ज़िंदगी में वे बर्फ की तरह सख्त होते हैं।

2. वे सड़क पर आपको बिना बात किए गुजर सकते हैं सिर्फ अपनी शर्म के कारण

। वे हफ्तों तक घर में रह सकते हैं और उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता

।
3. वे बहुत ही सोच-समझ कर काम करते हैं, थोड़ा चिपकने वाले, गुस्सैल होते हैं, और जिस व्यक्ति से प्यार करते हैं, उनके साथ रोमांटिक होते हैं। वे मुश्किल से प्यार करते हैं, लेकिन एक बार कर लें तो पूरी तरह से दिल से उस व्यक्ति के होते हैं

।
4. वे शायद ही धोखा देते हैं

।
5. वे बहुत संवेदनशील होते हैं, आप उन्हें देख पाए इससे पहले, वे आपको देख चुके होते हैं।
6. वे लोगों के मन को पढ़ सकते हैं इससे पहले कि आप कुछ कहें।
7. वे कम दोस्त बनाते हैं और किसी भी गतिविधियों में शामिल होने में कम रुचि रखते हैं।
8. वे बहुत भीड़-भाड़ वाले स्थानों में रहने में असहज होते हैं, और अकेले रहना पसंद करते हैं

।
9. वे लोगों के बीच कम बात करते हैं लेकिन अपने प्यारे लोगों के साथ बात करने में बहुत खुश होते हैं।
10. लोग उन्हें अकसर घमंडी समझते हैं, लेकिन वे घमंडी नहीं होते हैं।
11. वे बहुत कुछ सह सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आप पर गुस्सा आ जाए या आप उनका मज़ाक उड़ाएं, तो एक बार जब वे फैसला कर लें, तो आप उन्हें खो सकते हैं

।
12. वे बहुत भावुक होते हैं

। वे बुरी बातें बहुत देर तक याद रखते हैं, जिन्हें किसी ने उनके साथ किया हो

।
13. वे अपनी समस्याओं को किसी से साझा करना पसंद नहीं करते और किसी से मदद नहीं मांगते चाहे वे कितनी भी मुश्किल में हों

।
14. आप उन्हें अच्छे से जानने के बाद ही समझ सकते हैं कि वे कैसे होते हैं। वे अप्रत्याशित और जिद्दी होते हैं

।
15. वे शायद ही किसी से दोस्ती करते हैं।
16. उन्हें धोखा सहन नहीं होता। अगर वे किसी से धोखा खाते हैं, तो वे हमेशा के लिए उस व्यक्ति से नफरत कर सकते हैं।
अगर आप इस तालिका में शामिल हैं, तो यहां आकर खुद को पहचानिए !
एक मेहनती आदमी के साथ रिश्ते में होना हर किसी के लिए नहीं है.
_ इसलिए आजकल कुछ महिलाएं ऐसे पुरुषों में रुचि रखती हैं जिनके पास कोई जीवन दृष्टिकोण [Perspective] नहीं होता.
_ एक मेहनती आदमी के साथ रिश्ते में होना.. यह समझने जैसा है कि वह हमेशा आपके लिए उपलब्ध नहीं हो सकता.
_ आप सोच सकते हैं कि कभी-कभी वह रिश्ते में पूरी तरह से निवेशित नहीं दिखाई देंगे, लेकिन यह सच नहीं है,
_ बल्कि इसके विपरीत है, वह हर सुबह उठते हैं और हर मौके पर कड़ी मेहनत करते हैं ताकि आपके लिए एक स्थिर भविष्य बना सकें.
_ आपको यह समझना होगा कि कुछ दिन ऐसे होंगे जब वह शायद थके हुए होंगे और उन्हें नहा लेने का भी समय नहीं मिलेगा,
_ उन्हें बिस्तर पर जाकर सोना होगा ताकि अगले दिन फिर से शुरुआत कर सकें.
_ इस तरह के आदमी को कभी हल्के में न लें.
_ वह शायद थोड़ा rough लगे, उसके हाथ कसे हुए और शर्ट पर तेल के दाग हों,
_ लेकिन यह आदमी आपको ऐसी मोहब्बत देगा.. जिसे आपने कभी पहले नहीं महसूस किया होगा.
_ तो उन मेहनती आदमियों के लिए जो अपनी जिंदगी की ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए हर सुबह उठकर अपने परिवार के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, उनके लिए यह संदेश है.!!
थोड़ा-बहुत मेंटल डिसऑर्डर [Mental Disorders] हम सबमें है –
_ लेकिन हमने कभी उसे बीमारी की तरह नहीं लिया, न उसका उपचार करने का सोचा ;
_ वैसे भी हम अपनी मेंटल हेल्थ (मानसिक स्वास्थ्य) की ओर ध्यान नहीं देते.
_ हमें डर होता है कि कहीं हम पागल न समझे जाएं,
_ जबकि मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति पागल नहीं होता,
_ बस सोच-विचार में, खुद पर नियंत्रण रखने में थोड़ा कमज़ोर होता है.!!
कभी ख़ुद के जीवन का आत्म मूल्यांकन करना कि आपके जीवन की वास्तविक समस्या कितनी है और आप कितने समस्याओं से उलझे घिरे होते हो,
_ आप आश्चर्य में पड़ जाएंगे कि आपके ख़ुद के जीवन की समस्या तो बिल्कुल नगण्य है..
_ जबकि आप दूसरो की समस्याओं की वजह से उलझे, फंसे, दुःखी और उदास होते हो..!
कभी –कभी स्वार्थी बन जाना खुद के – मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है..!!
आज मानसिक स्वास्थ्य [Mental Health] एक मौन महामारी बन चुका है.
_ लोग थके हुए हैं, दबे हुए हैं, पर बोलते नहीं — क्योंकि बोलना कमजोरी समझा जाता है.
_ और यही हमारी सबसे बड़ी त्रासदी है — कि हम दर्द में भी सामान्य दिखने की कोशिश करते हैं, टूटते हुए भी मुस्कुराते रहते हैं,
_ सिर्फ इसलिए कि समाज “अच्छा दिखने” को “ठीक होने” से ज़्यादा महत्व देता है.
ज़्यादातर लोग अपनी पूरी ज़िंदगी एक ही जगह अटके रहते हैं और वहीँ गुजार देते हैं.
_ वे न तो अपना माहौल बदल पाते हैं और न ही माइंडसेट को अपने.
_ क्या आपको नहीं लगता कि अगर आप पहला काम नहीं कर सकते, तो कम से कम दूसरा तो करना ही चाहिए ?
इंसान के मस्तिष्क का आकार और वजन भले ही लगभग समान हो, पर उसकी क्षमताएँ, समझ और सोचने का तरीका एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होता है..
_ कोई व्यक्ति छोटी-सी छोटी बात भी वर्षों तक याद रख लेता है, तो कोई गहरे हादसों तक को समय के साथ भूल जाना सीख जाता है.!!
स्वस्थ मस्तिष्क—–>
यह आपके जिंदगी का यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू है !
_ लोग इस पर ध्यान कम देते हैं !
_ दुख देने वाले से दूर रहें, सोते समय ना सोचें, कमाई से अधिक खर्च ना करें, किसी से झूठा वादा ना करें, जिसको आप पूरा ना कर सकें,
_ बिना मतलब का कुछ ना सोचें, अच्छे लोगों से मिले और उसे दोस्त बनायें, खूब हंसे और दूसरे को हंसाने की कोशिश करें !
_ दिमाग का सीधा रिश्ता दिल से होता है अगर आप टेंशन में रहते हैं तो आपका ब्लड प्रेशर बढ़ता है..
_ जिस से बहुत सारी बीमारियां होती हैं जैसे हार्ट अटैक आदि !
_ अपने लाइफ स्टाइल को ठीक करें, जल्दी सोए और जल्दी जगे !
_ चिंता, क्रोध, शोक, शक और दूसरों से उम्मीद करना छोड़ें !
अच्छी नींद——>
_ नींद सबसे बड़ी दवा है, आप गौर कीजिए जब आप काम करके बहुत ज्यादा थक जाते हैं और अगर आप गहरी नींद से सोते हैं तो सुबह अपने आप को आप फ्रेश पाते हैं !
_ इसीलिए कहा जाता है अच्छी नींद का होना बहुत जरुरी है !
_ कम नींद होना या ज्यादा नींद का होना इसका सीधा प्रभाव स्वास्थ्य पड़ता है !
_ वैज्ञानिक अध्ययन से पाया गया है कि 8 घंटा से ज्यादा और 6 घंटे से कम नहीं सोना चाहिए !
_ सोते समय सोचना नहीं चाहिए जिससे आपका नींद खराब होता है !
_ आप यह जान लें कि सोते समय का सोच कभी भी सही नहीं हो सकता.. क्योंकि आपके थके हुए होते हैं, आपके मस्तिष्क में ऊर्जा की भारी कमी होती है !
इलाज करवाने में देरी ना करें——>
_ लोग अपनी बीमारियों को टालने की कोशिश करते हैं या फिर अपनी बीमारियों को झूठलाते हैं, कि मुझे यह बीमारी नहीं है ! इसका चयन स्वयं न करें !
_ डॉक्टरी सलाह अवश्य लें समय रहते, अगर आप डॉक्टर से मिलते हैं तो आप का इलाज कम खर्च में जल्दी हो जाता है !
खुश रहने के बहाने खोजें—>
_ सिर्फ अपने आपको कामों में व्यस्त रखना या पैसे कमाने की मशीन बन जाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है !
_ आप काम भी करें साथ ही साथ खुश रहने के लिए अलग-अलग तरीकों को अपनाएं जैसे खेल कूद में भाग लेना, फिल्म देखना, अपने मनपसंद दोस्त से मिलना, घूमने जाना, मजाकिया आदत रखना, और मनपसंद खाना खाना आदि !
जिंदगी में एक उम्र ऐसी होती है.. जब इंसान के पास सबसे ज्यादा ताकत होती है.
_ उस समय शरीर भी पूरा साथ देता है दिमाग भी तेज चलता है और सपने भी बड़े होते हैं.
_ यही वह समय होता है जब इंसान अगर ठान ले तो अपनी पूरी जिंदगी की दिशा बदल सकता है.
_ लेकिन अफसोस की बात यह है कि इसी उम्र में ज्यादातर लोग अपना समय और दिमाग रिश्तों में उलझा देते हैं.
_ दोस्ती यारी प्यार इश्क मोहब्बत और रिश्तेदारी में फंसकर वे धीरे धीरे अपने असली लक्ष्य से दूर होते चले जाते हैं..
_ और उन्हें पता भी नहीं चलता कि कब उनका समय निकल गया.
_ सच्चाई यह है कि कामयाबी पूरी एकाग्रता मांगती है,
_ कामयाबी यह चाहती है कि इंसान रोज एक ही दिशा में बिना रुके बिना भटके मेहनत करता रहे..
_ लेकिन जब दिमाग बार बार फोन मैसेज मनमुटाव मनाना शिकायतें और भावनात्मक उलझनों में फंसा रहता है.. तब इंसान अपनी पूरी ताकत किसी एक काम पर नहीं लगा पाता..
_ और यही कारण है कि बहुत से लोग मेहनती होने के बावजूद आगे नहीं बढ़ पाते.
_ क्योंकि कामयाबी आधे दिल और आधे दिमाग से नहीं मिलती.
_ जो लोग कम उम्र में सच में आगे बढ़ते हैं, वे जानबूझकर कई चीजों से दूरी बना लेते हैं.
_ इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें रिश्तों की कद्र नहीं होती, बल्कि वे यह समझते हैं कि हर चीज का एक सही समय होता है.
_ वे जानते हैं कि अगर आज भावनाओं में बह गए तो कल मजबूरी में जीना पड़ेगा.
_ इसलिए वे आज अकेले रहना स्वीकार कर लेते हैं ताकि आने वाले समय में किसी के सहारे पर निर्भर न रहना पड़े.
_ यह भी एक कड़वा सच है कि जब इंसान खाली हाथ होता है, तब लोग उसकी बातें तो सुन लेते हैं.. लेकिन उसकी इज्जत नहीं करते.
_ वे उसकी हालत पर चर्चा करते हैं, उसकी मेहनत पर नहीं..
_ वे उसकी मजबूरी देखते हैं, उसके इरादों को नहीं..
_ लेकिन जैसे ही वही इंसान कुछ बन जाता है, जब उसके पास पैसा आता है, जब उसकी पहचान बनती है..
_ तब वही लोग खुद उसकी तरफ खिंचे चले आते हैं, तब रिश्ते याद आने लगते हैं, दोस्ती जाग जाती है और प्यार भी आसान लगने लगता है.
_ दुनिया को पुरानी बातें जल्दी बोर कर देती हैं.
_बहुत कम लोग यह पूछते हैं कि आपने कितना संघर्ष किया..
_ आपने कितनी रातें जागकर गुजारी..
_ लोगों को बस यह दिखता है कि आज आपके पास क्या है
_ इसलिए समाज उस इंसान की तरफ ज्यादा आकर्षित होता है जो आगे बढ़ चुका होता है न कि उस इंसान की तरफ जो सिर्फ अच्छा और ईमानदार है.
_ यही आज की दुनिया की सच्चाई है.
– लेखक यही समझाना चाहता है कि कामयाबी अक्सर अकेलेपन से होकर गुजरती है. _ जब इंसान अकेला होता है.. तब वह खुद से झूठ नहीं बोल पाता, तब उसे अपनी कमजोरियां साफ दिखाई देती हैं अपनी गलतियां समझ में आती हैं और खुद को सुधारने का मौका मिलता है.
_ भीड़ में इंसान बहाने बना लेता है, लेकिन अकेले में उसे सच से सामना करना ही पड़ता है और वही सच उसे मजबूत बनाता है.
_ यह लेख यह नहीं कहता कि प्यार या रिश्ते गलत हैं.
_ लेखक बस इतना कहना चाहता है कि उन्हें गलत समय पर जिंदगी का केंद्र बना लेना गलत है.
_ अगर किसी ने अपनी जवानी सिर्फ भावनाओं में खर्च कर दी और अपने भविष्य पर काम नहीं किया तो आगे चलकर न भावनाएं बचेंगी और न ही कोई सहारा बचेगा,
_ लेकिन अगर किसी ने पहले खुद को मजबूत बना लिया तो रिश्ते अपने आप लौट आते हैं और तब वे बोझ नहीं बनते बल्कि सहारा बनते हैं.
_ आखिर में बात इतनी सी है.. जो इंसान आज खुद पर काम नहीं करता, वह कल हालात पर रोता है..
_ और जो इंसान आज अकेले मेहनत करता है.. उसके पास कल अपनी जिंदगी चुनने की आजादी होती है.!!
मनुष्य के brain (दिमाग़) की capacity बहुत ज़्यादा है.
_ इसमें अंधाधुंध चीज़ें भरी जा सकती हैं.
_ जैसे शरीर को Excercise (कसरत, व्यायाम) की आवश्यकता होती है, वैसे ही दिमाग़ को भी व्यायाम की आवश्यकता होती है.
_ दिमाग़ में चीज़ें भरना ही ज़रूरी नहीं है, उन चीज़ों को हिलाना भी ज़रूरी है यानी दिमाग़ की कसरत भी ज़रूरी है, अन्यथा चीज़ें यानी दिमाग़ में भरी हुई जानकारियां brain wash हो जाती हैं यानी हम भूल जाते हैं.
_ दिमागी कसरत यही है कि हम अपने दिमाग़ में घुसी हुई बातों को जब-तब खंगालते रहें, मन ही मन दोहराते रहें.
_ आपने महसूस किया होगा कि दिमाग़ कभी खाली नहीं रहता यानी कभी शांत नहीं बैठता.
_ जिस वक्त हम कुछ काम नहीं कर रहे होते, किसी से बात नहीं कर रहे होते या आराम कर रहे होते हैं, उस समय भी हमारा मस्तिष्क चलायमान रहता है, हम अनचाहे कुछ न कुछ सोच रहे होते हैं.
_ यह सोचना ही दिमाग़ की excercise है.
_ इसलिए दिमाग़ को खाली मत बैठने दो, कुछ न कुछ सोचते रहो.
– Manika Mohini
| Dec 29, 2013 | Collection of Thoughts
Man has entered into 21st Century and progressed much beyond the imagination. He dreamt of flying and today it is possible for any person to fly. Science has contributed much to our daily life in every aspect. Earlier man built big monuments like the Pyramids in Egypt, the Taj Mahal in India and many more magnificient structures with his hand power but today he has machines to accomplish such great tasks. He just need to operate those. Also, in future using Artificial Intelligence, he will have robots for doing even such basic operations. Each and every task has been automated.
But Human is deviating from his mole motto of his life. Simplicity has been somewhat deep buried away from Life. He has forgotten the name of God and lost all the Goodness. He want to get more and more to overtake others. Life has become so hectic that one does not has time to chant few words admiring God. One should lead a simple life. Simplicity is the key to peace and happiness. All the man made comfort comes packaged with some pain hidden within. Simplicity beholds all the comfort within it. Simple life does not means that one should go to exile and live in isolation from the world. One should try to get into the frame of simplicity in the present world. One should take some time out for meditation and admiration of the God. It provides the chance to move away from this hectic world and relax.
Another important aspect of life is the way of thinking. Some people speak uselessly and some doesn’t speak at all. Excess of anything is bad. One should think twice before proceeding to any work, be it action or speech. One should acquire the skill of deep and high thinking. People with such high mindset speak less and every words of their are worth listening. It is truly said that Speech is silver and Silence is Gold. Person who speak less are given more attention in the society.
High thinking doesn’t involves the thoughts of being rich or high in the society in terms of wealth. It refers to the way of thinking and depth of mind. In present time wealth and science, both cannot be ignored. But everything has its threshold which should never be crossed. If one has enough money, he should contribute a part of it for some good work. This too provides peace and happiness to our mind. So, one should try to lead a Simple life and have High thinking.
मनुष्य 21वीं सदी में प्रवेश कर चुका है और कल्पना से भी कहीं आगे बढ़ चुका है.
_ उन्होंने उड़ने का सपना देखा था और आज किसी भी व्यक्ति के लिए उड़ना संभव है.
_विज्ञान ने हमारे दैनिक जीवन के हर पहलू में बहुत योगदान दिया है.
_ पहले मनुष्य ने अपने हाथ की शक्ति से मिस्र में पिरामिड, भारत में ताज महल और कई अन्य भव्य इमारतों जैसे बड़े स्मारक बनाए लेकिन आज उसके पास ऐसे महान कार्यों को पूरा करने के लिए मशीनें हैं.
_ उसे बस उन्हें संचालित करने की जरूरत है.
_ साथ ही भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हुए ऐसे बुनियादी ऑपरेशन भी करने के लिए उसके पास रोबोट होंगे. प्रत्येक कार्य को स्वचालित कर दिया गया है.
— लेकिन मानव अपने जीवन के आदर्श वाक्य से भटक रहा है.
_ सरलता जीवन से कुछ हद तक दूर हो गई है.
_ वह भगवान का नाम भूल गया है और सारी अच्छाइयां खो चुका है.
_ वह दूसरों से आगे निकलने के लिए अधिक से अधिक पाना चाहता है.
_ जीवन इतना व्यस्त हो गया है कि किसी के पास भगवान की प्रशंसा में कुछ शब्द जपने का समय नहीं है.
_ व्यक्ति को सादा जीवन जीना चाहिए.
_ सादगी शांति और खुशी की कुंजी है.
_ सभी मानव निर्मित आराम अपने अंदर कुछ दर्द छिपाए हुए आते हैं.
_ सादगी अपने भीतर सभी आराम को देखती है.
_ साधारण जीवन का अर्थ यह नहीं है कि कोई निर्वासन में चला जाये और संसार से अलग-थलग जीवन व्यतीत करे.
_ वर्तमान दुनिया में सरलता के दायरे में आने का प्रयास करना चाहिए.
_ मनुष्य को कुछ समय ईश्वर के ध्यान व भजन के लिए भी निकालना चाहिए.
_ यह इस व्यस्त दुनिया से दूर जाने और आराम करने का मौका प्रदान करता है.
– – जीवन का एक और महत्वपूर्ण पहलू है सोचने का तरीका.._ कुछ लोग बेकार बोलते हैं और कुछ बिल्कुल नहीं बोलते.
_ किसी भी चीज़ की अति बुरी होती है.
_ किसी भी कार्य को करने से पहले दो बार सोचना चाहिए, चाहे वह कार्य हो या वाणी.
_ व्यक्ति को गहन एवं उच्च विचार का कौशल प्राप्त करना चाहिए.
_ ऐसी उच्च मानसिकता वाले लोग कम बोलते हैं और उनका एक-एक शब्द सुनने लायक होता है.
_ सच ही कहा गया है कि वाणी चांदी है और मौन सोना है.
_ जो व्यक्ति कम बोलते हैं उन्हें समाज में अधिक तवज्जो दी जाती है.
– उच्च सोच में अमीर होने या धन के मामले में समाज में उच्च होने के विचार शामिल नहीं हैं.
_ यह सोचने के तरीके और मन की गहराई को दर्शाता है.
_ वर्तमान समय में धन और विज्ञान दोनों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, लेकिन हर चीज़ की एक सीमा होती है जिसे कभी भी पार नहीं करना चाहिए.
_ यदि किसी के पास पर्याप्त धन है तो उसे उसका एक हिस्सा किसी अच्छे काम में लगाना चाहिए.
_ इससे भी हमारे मन को शांति और खुशी मिलती है.
_ इसलिए व्यक्ति को सादा जीवन और उच्च विचार रखने का प्रयास करना चाहिए.
| Dec 26, 2013 | सुविचार
झूठ बोलने वाला शुरू में प्रभाव जमा लेगा, मगर बाद में विश्वास खो देगा.
अधिकतर लोग आत्ममुग्धता और आत्ममहानता के भ्रम में जीते हैं.
_ वे सोचते हैं, जितना उन्होंने सीख लिया, समझ लिया, उतना काफी है.
_ लेकिन ज़िन्दगी हमें हर पल नए से नया सीखने-समझने के अवसर प्रदान करती है.
_ हर मोड़ पर जैसे एक नया रहस्य खुलता नज़र आता है.
_ जीवन सबसे बड़ा शिक्षक है.
_ बस, हम अपनी चेतना की आँखें खुली रखें.
– Manika Mohini
जिन्हें आत्मा की शांति मिल जाए, उन्हें दुनिया का कोई भ्रम डिगा नहीं सकता.!!
झूठ बोलने वाले पर तब भी विश्वास नहीं किया जाएगा, जब वह सच भी बोले.
A liar will not be believed, even when he speaks the truth.
जब तक आप स्वयं को अपने झूठे विचारों की जेल से मुक्त नहीं कर लेते तब तक आप कभी भी स्वतंत्र नहीं होंगे.
You will never be free until you free yourself from the prison of your own false thoughts.
कोई कितना भी जोर लगा ले, _ गलत को सही साबित नही कर सकता _
__ झूठ आखिर झूठ ही रहता है ..!!
अधिक कल्पनाएं मन को खाली कर जाती है,
_ मन कुछ बेहतर सोच ही नहीं पाता.!!
कई बार जान बूझकर भी कुछ चीजों से दूरी बना लेनी चाहिए ताकि उनके साथ बने रहने का भ्रम बना रहे।
_ कुछ भ्रम जीवन में जरूरी होते हैं – जीने के लिए, जीते रहने के लिए.!!
झूठ को सच समझने वाली दुनिया में झूठ चलाया जा रहा है,
_शुरू में चलता है ..फिर भसक जाता है..!!
जब झूठ बोलकर किसी का बुरा करो तो, उसे कर्ज [ Loan ] समझो,
_यह ब्याज [ Interest ] सहित आपके पास वापस आएगा.!!
तारीफ किये बिना कोई इंसान ख़ुश ही नहीं होता है,
और __ झूठ बोले बिना किसी कि _ तारीफ़ ही नहीं होती है ,, अब कोई करे भी तो क्या करे !!!
झूठ की कीमत क्या है ?
ऐसा नहीं है कि हम उन्हें सच समझने की भूल करेंगे. वास्तविक ख़तरा यह है कि, यदि हम पर्याप्त झूठ सुनते हैं, तो हम सत्य को बिल्कुल भी नहीं पहचान पाते हैं.
झूठ दुनिया की सबसे खूबसूरत रचना है..
_ इसमें एक अजीब सा आकर्षण होता है.. जो हमें बिना सोचे-समझे अपनी ओर खींच लेता है.
_ कभी-कभी यह सच्चाई से भी अधिक आकर्षक, ज्यादा चमकदार और ज्यादा पूर्ण लगता है..
_ पर यही खूबसूरती अक्सर धोखे की आड़ में छुपी होती है, और हमें उस जाल में उलझा देती है.. जिसे हम अपनी आंखों से सच मान बैठते हैं.!!
झूठ सुनकर दुःख होता है, और सच सुन कर और ज्यादा दुःख होता है,
_ आदमी बस बकवास कह-सुनकर ही खुश रह सकता है.!!
हम जिनके झूठ का भी मान रख लेते हैं,
_ वो समझते हैं कि हमें बेवकूफ बना दिया.!!
अधिकतर लोग झूठी दुनिया में जीते हैं, _सच को भी समझना चाहिए.. .
इस बात का भरम न पालें कि आपके बिना कहीं भी कुछ भी रुकेगा..!!
सबका सबके बिना काम चल ही जाता है, हम भ्रम में हैं कि हम खास हैं.!!
सच बोलूं तो दुनिया में सबसे अधिक, _ झूठ ही पसंद किया जाता है.
झूठ बोलना पहली बार आसान हो सकता है, पर बाद में सिर्फ परेशानी देता है.
मीठे झूठ का स्वाद हम लोगों को इतना भाता है कि कड़वे सच से दूरियां बना लेते हैं…
मुस्कुराहटें झूठी भी हुआ करती हैं, _ इंसान को देखना नहीं बस समझना सीखो..
अक्सर झूठे इंसान की बातें मीठी होती हैं _ और सच्चे इंसान की बातें कड़वी होती हैं..
ये वो दुनिया है जहां झूठ से तो सबको नफ़रत है, पर सच कोई नहीं बोलता है..
हमारा दिल कभी झूठ नहीं बोलता, _ वो काम तो दिमाग करता है.
झूठ की चमक आज नहीं तो कल फीकी पड़ ही जाती है.
आप उन लोगों से ईमानदारी की उम्मीद नहीं कर सकते, जो खुद से भी झूठ बोलते हैं.!
कुछ लोग कभी नहीं बदलते, वो तो बस झूठ बोलने के नए तरीके ढूँढ लेते हैं.!!
इंसान का सबसे बड़ा भ्रम.. – वो किसी को खुश कर सकता है.!!
“झूठ”.. चुटकियों में फैलता है.
_ ‘हल्का’.. जो होता है.
यह सिर्फ एक वहम है कि हम किसी के बिना जी नहीं सकते ;
_ वक्त गुजरता है और इंसान जीना सीख ही जाता है.!!
झूठ को सच समझने वालों से बहस करना फिजूल है ;
_ अपनी खामोशी को ढाल बनाओ और उन्हें उनकी काल्पनिक दुनिया में ही रहने दो.
झूठे लोग कभी पूरी बात नहीं बताते हैं ;
_ वो उतना ही बताते हैं, जिसमें वो खुद सही हों.!!
चारों तरफ झूठ, लूट, ठगी, बेईमानी का जाल कसा है.
_ आम आदमी किस-किस से बचे.. भरे पड़े हैं बेईमान हर जगह.!!
आज भी लोग बात को वेरिफाई किये बिना ही लड़ने लगते हैं,
_ कोई भी यह पता नहीं लगाना चाहता कि क्या सच है और क्या झूठ.!!
जब हम बार- बार झूठ बोलते हैं, तो खुद ही भीतर ही भीतर इसे सच मानने लगते हैं.
इस तरह हम अपनी ही ग़लत छवि के साथ जीने लगते हैं.
जो लोग झूठ बोलकर बदनाम होते हैं, वे कहते हैं, ‘ जीभ भी जली और स्वाद भी न मिला,
_ जो लोग सच के साथ जीते हैं, वे कहते हैं, ‘ जीभ जली तो क्या हुआ ‘, स्वयं का स्वाद तो पाया !!!
झूठ सुनकर दुःख होता है, और सच सुन कर और ज्यादा दुःख होता है,
_ इंसान बस बकवास कह-सुनकर ही खुश रह सकता है.!!
आज झूठ और बहाने सुकून देंगे,
_ पर कल इन्हीं की वजह से आपको नींद नहीं आएगी.!!
एक झूठी मुस्कराहट बहुत पीड़ा दे जाती है … यह हमें प्रसन्न नहीं करती, _
_ यह सिर्फ हमें यह स्मरण दिलाती है कि हम कितने दुखी हैं.
आजकल के दौर में प्रशंसा किए बिना कोई खुश नहीं होता, _
_ और झूठ बोले बिना किसी की प्रशंसा नहीं होती..
झूठ को आप जितनी बार दोहराते हैं उतनी ही बार उसका अर्थ बदल जाता है.
_ यदि हम जीवन में झूठ का सहारा लेते हैं तो यह मानसिक तनाव का कारण बनकर.. हमारे जीवन की सरलता को समाप्त कर देता है॥
झूठ की इज्जत बढ़ गई है, पहले झूठ बदनाम था.. लोग उससे संपर्क रखने से परहेज करते थे..
_ पर अब झूठ हमारे बीच ही रहता है घुला -मिला हुआ.!!
अगर आपको कोई चीज़ पसंद न हो तो अन्य लोगों को विनम्रतापूर्वक बताएं, लेकिन इस पर झूठ की चादर न डालें,
अधिकांश समय, इस प्रकार से बोला गया झूठ बाद में, जब पलट कर आप पर वापस आता है तो आपको अपमानित होना पड़ता है.
जब आप अपने झूठ से किसी की ज़िंदगी तबाह करते हो तो.. इसे किसी क़र्ज़ की तरह समझो, जो आपके पास सूद समैत वापस आएगा.!!
झूठ बोलने के लिए आपको बहुत रचनात्मक होना पड़ता है, लेकिन सच बोलने के लिए आपको सहज होना पड़ता है ;
सच पवित्र होता है, जो सीधे दिल से आता है.
झूठ बोल कर अपनी बड़ाई करने से कुछ मूर्ख लोग भले ही आपकी हाँ में हाँ मिला लें,
लेकिन समझदार लोग आपसे जरूर दूरी बना लेंगें.
झूठ की रफ्तार भले ही बहुत तेज होती है, _ लेकिन मंजिल तक सच ही पहुंचता है…
झूठा इंसान- अंत में- अपने सिवाय किसी को धोखा नहीं दे सकता.
सत्य कहो, स्पष्ट कहो, कहो ना सुंदर झूठ, _ चाहे कोई खुश रहे, चाहे जाए रुठ…
वे लोग जो झूठ में जी रहे हैं ; _वे ही लोग _सच बोलने के लिए आपसे नाराज़ हैं.!!
झूठ को अच्छे लहजे की ज़रूरत है, _ _सच तो हर लहजे में कड़वा ही होता है.
यकीन तो सबको झूठ पर ही होता है, _ सच तो अकसर साबित करना पड़ता है.
किसी से झूठे वादे करने से अच्छा है कि, _ आप उससे कोई वादा ही ना करो.
जो चाहे वो करना जिंदगी में, _ लेकिन कभी अधूरी बात व झूठ मत बोलना.
कई झूठ इतने बड़े होते हैं कि वो हक़ीक़त को छोटा कर देते हैं.!!
चिल्लाने से ‘ झूठ ‘ कभी ‘ सच ‘ नहीं हो जाता.
_ चिल्लाते वे लोग हैं जिनके पास कोई नई बात नहीं होती,
_ अपनी बात नहीं होती, तर्क नहीं होते, ऑथेंटिसिटी नहीं होती.
हरेक झूठ, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, एक ऐसी खाई का किनारा होता है, _
_ जिसकी गहराई कभी नहीं नापी जा सकती.
झूठ का कोई भविष्य नहीं,, वह आप का आज शायद सुखद कर दे _
_ पर कल तो बिलकुल नहीं ..
झूठ कभी-कभी तो काम आता है, लेकिन जब पकड़ में आता है..
…तो सब कुछ खत्म कर जाता है…
झूठ किसी भी संबंध का अंत करने में अहम भूमिका निभाता है,
क्योंकि सच आज नहीं तो कल ” सामने आ ही जाता है “
बड़े ही बेबस होते हैं वो लोग जो झूठे नहीं होते,
लेकिन दूसरे को तकलीफ ना हो इसलिए सच नहीं कहते.
झूठे व्यक्ति की ऊँची आवाज सच्चे व्यक्ति को चुप करा देती है,
_ परंतु सच्चे व्यक्ति का मौन, झूठे व्यक्ति की जड़ें हिला देता है.
उन लोगों से सावधान रहें.. जो पूरी तरह झूठ बोलते हैं.
_ आप उनसे बहस नहीं कर सकते, आप यह साबित नहीं कर सकते कि वे झूठ बोल रहे हैं ;
_ क्योंकि वे अपने झूठ को साबित करने के लिए हर सबूत इकट्ठा करते हैं.
_ आखिरकार आप खलनायक बन जाते हैं और वे सब कुछ जीत जाते हैं.
_ ऐसे लोगों से सावधान रहें.!!
झूठे व बेईमान लोग ..
..#रो कर अपने को निर्दोष दिखाने मे सबसे अधिक निपुर्ण होते हैं.
जो लोग झूठ में रहने के आदी हो चुके होते हैं,
_ वो सच सुनकर चिढ़ बहुत जल्दी जाते हैं.!!
झूठे मांगे गवाही, सच को हकलाना पड़ेगा ;
_ आप बहुत सच बोलते हो ..आप को पछताना पड़ेगा !!
सच तो हम बहुत पहले से जानते थे, _
_ बस देखना चाहते थे कि लोग झूठ कहां तक बोल सकते हैं ..
मेरे सामने खड़े हो कर, झूठ बोलना आसान नहीं ;
_ ” किताबें ” कम ” चेहरे ” ज्यादा पढ़े हैं मैंने..
दुनिया को झूठे लोग ही पसंद आते हैं, _
_ थोड़ी सी सच्चाई कह देने से आजकल अपने ही रूठ जाते हैं.
हकीकत जानेंगे तो सब पराये हो जायेंगे,
_ भ्रम में ही रहें कि सब अपने हैं !!
झूठ को सच समझने वाली दुनिया में झूठ चलाया जा रहा है,
_शुरू में चलता है फिर भसक जाता है..!!
लोगों को क्या मिलता है झूठ बोलने से ??_
_ बस किसी अपने का भरोसा खो देते हैं ..
अगर आपने मुझसे झूठ बोला और मुझे सच्चाई पता चल गई,
_तो मैं आपको कभी भी उस नजर से नहीं देखूंगा..!!
सच्चे लोगों को शायद झूठ का पता ना हो, _
_ लेकिन झूठे लोगों को सच का पता हमेशा होता है.
” आमतौर पर जो ख़्याल ” ज्यादातर लोगों को अच्छा लगता है,
_ अक्सर वो सबसे बड़ा झूठ° होता है.
झूठ बोलने के लिए आपको बहुत रचनात्मक होना पड़ता है,
लेकिन सच बोलने के लिए आपको सहज होना पड़ता है,
सच पवित्र होता है, जो सीधे दिल से आता है.
कितना गुस्सा आता है ना उस वक़्त जब कोई आपसे झूठ बोले,
_ और आपको सच पता हो…..
कड़वी सच्चाई बोल देने वाले लोग _
_ झूठा दिलासा देने वालों से लाख गुना अच्छे होते हैं..
आज की दुनिया में झूठ धीरे से बोलोगे तो भी सब सुन लेंगे,_
_ और सच चिल्लाने पर भी कोई नहीं सुनता..
सब ठीक हो जाएगा, भरोसा रखो ये इस दुनिया का सबसे सकारात्मक झूठ है,
_ जो दिल को थोड़ी देर के लिए बहला देता है, पर हकीकत को नहीं.!!
सीख नहीं पा रहा हूँ, मीठे झूठ बोलने का हुनर. _
_ कड़वे सच ने हमसे न जाने कितने लोग छीन लिए..
जब तक ..सत्य .घर से बाहर निकलता है _
_ तब तक ..झूठ. आधी दुनिया घूम लेता है..
जरुरी नहीं कि काम से ही इंसान थक जाए, _
_ झूठ, फ़िक्र, धोखे और फरेब भी थका देते हैं जिंदगी में..
एक इंसान उस वक़्त सबसे अच्छा होता है, _
_ जब वह कुबूल कर लेता है उसके भीतर एक झूठ बोलने वाला आदमी भी है.
जीवन में कभी भी पूर्ण संतुष्टि नहीं होगी, संतुष्टि केवल एक भ्रम है.
भ्रम टूट जाते हैं तो निश्चिंत हो जाता है व्यक्ति …जो हो रहा है वो हो रहा है ..उसके ना रहने से कुछ नहीं रुकने वाला..!!
अधिकांश लोग अपना पूरा जीवन झूठ और भ्रम में जीते हैं ;
_ ऐसा लगता है कि वे नसीबवादी और भाग्यवादी हो गये हैं..!!
जो सोचते थे उनके इशारे पर सब चलता था,
_आज उनका भी भ्रम टूट रहा है..!!
ज़िन्दगी में अगर परिस्थिति एक समान बनी रहे तो..
_ हम सबको अपना समझने के भरम में रहेंगे.!!
भ्रम में हर कोई फंस जाता है, क्योंकि यहां हर चीज बेहतरीन तरीके से परोसी जाती है.
भ्रम कोई समाधान नहीं है, हमें वास्तविकताओं को स्वीकार करना होगा और चुनौतियों से बचने और भ्रम में रहने के बजाय चुनौतियों का सामना करने का साहस रखना होगा !!
जब हम ज़रूरत से ज़्यादा कल्पनाएँ करने लगते हैं, तो मन धीरे-धीरे खाली-सा महसूस होने लगता है.
_ हकीकत से दूर अपनी ही सोच में खो जाने के कारण दिमाग उलझ जाता है और फिर वह कुछ अच्छा, सकारात्मक या बेहतर सोच ही नहीं पाता.!!
हम सबसे ज्यादा अपने मन की कल्पनाओं से धोखा खाते हैं,
_ क्योंकि हम उन चीजों को कल्पनाओं में जीते हैं, जैसा कभी नहीं हो सकता.!!
इंसान इतनी आपा धापी में लगा हुआ है, बस कुछ पल का सुकून मिल जाए कहीं से..
_ पर अगले ही पल वो फिर कमर कस लेता है, भागता दौड़ता रहता है..
_ बस एक भ्रम में कि सब कुछ उसे ही करना है..
_ वो नहीं करेगा तो कौन करेगा..!!
_ इंसानों में इतना भय है कि हम हर चीज को पकड़कर रखते हैं.
_ एक छूटा तो हमने दूसरा पकड़ लिया, रिश्तों में भी ऐसे..!!
_ यह विचार नहीं आता कि क्या हम कठपुतली तो नहीं बन रहे.
_ हम किसी पर इतने निर्भर क्यों हैं ?
_ भय लगता है कि सब छूट गया तो क्या जिंदगी रहेगी..
_ जब तक भय है तब तक आपको कुछ भी पता नहीं चल सकेगा..
_ न ही आपके मन का ये डर ख़त्म होगा, जिसने आपको कठपुतली बना दिया है.
_ इंसान अपना पूरा जीवन भय में निकाल देता है.!!
कुछ लोग वास्तव में महान जोड़तोड़ करने वाले होते हैं.
वे झूठ बोल सकते हैं, धोखा दे सकते हैं, आपके साथ बुरा बर्ताव कर सकते हैं और किसी तरह सब कुछ आपकी गलती की तरह दिखा सकते हैं. इसके लिए मत गिरो, बस यही वे करते हैं.
Some people are truly great manipulators.
They can lie, cheat, treat you badly and somehow manage to make it all seem like your fault.
Don’t fall for it, that’s just what they do.
जब हम झूठ बोलते हैं तो हमें बुरा लगता है और जब हम झूठ को स्वीकार करते हैं तो हमें हल्का महसूस होता है.
_ जब हम झूठ बोलते हैं तो हमें बुरा क्यों लगता है और जब हम कबूल करते हैं तो हल्का क्यों महसूस करते हैं ?
_ क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है ?
_ हम जीवन का विश्लेषण क्यों नहीं करते ?
_ जब हम सच बोलते हैं तो हमें अच्छा क्यों लगता है ?
_ मेरे पास जितने भी संपर्क और अनुभव थे, उन सभी के माध्यम से मेरे पास उत्तर आया, — ” स्वभाव से, हम अच्छे इंसान हैं ” हम सामान्य परिस्थितियों में अच्छे लोग हैं.
_ हम अच्छे पैदा होते हैं और सभी गलत चीजें को हमने समय के साथ जमा किया है.
एक व्यक्ति जो खुद से झूठ बोलता है, और अपने झूठ पर विश्वास करता है, वह खुद में या किसी और में सच्चाई को पहचानने में असमर्थ हो जाता है, और वह खुद के लिए और दूसरों के लिए सम्मान खो देता है.
_जब उसके मन में किसी के लिए कोई सम्मान नहीं होता है, तो वह प्यार नहीं कर पाता है, और, खुद को भटकाने के लिए, उसके अंदर कोई प्यार नहीं होता है, वह अपने आवेगों के आगे झुक जाता है, निम्नतम प्रकार के आनंद में लिप्त हो जाता है, और अंत में एक जानवर की तरह व्यवहार करता है.
_और यह सब झूठ बोलने से आता है – दूसरों से और खुद से झूठ बोलना.
-Fyodor Dostoevsky
| Dec 2, 2013 | My Favourite Thoughts, सुविचार
खामोशी की भी आवाज़ होती है और यह बोली गई आवाज़ से ज्यादा धमाकेदार होती है.!!
हौसला कम न होगा, तेरा तूफानों के सामने. _ मेहनत को इबादत में, बदल कर तो देख.
_ खुद ब खुद हल होंगी, ज़िन्दगी की मुश्किलें. _ बस खामोशी को सवालों में, बदल कर तो देख.
” ख़ामोश ” हो जाने का मतलब ” दब जाना ” या ” डर जाना ” नहीं होता,
बल्कि ” कुछ लोग ” हमारी प्रतिक्रिया के योग्य भी नहीं होते..
कुछ लोगों को लगता है उनकी चालाकियाँ मुझे समझ नहीं आती,
मैं बड़ी खामोशी से देखता हूँ…उनको अपनी नजरों से गिरते हुए.
शोर के बीच कुछ ख़ामोश रह गया, जो वह खामोश नहीं है.. वही तो शोर है..
_ अब खैर करना अपनी.. तुम्हारी अब कहीं भी खैर नहीं..!!
अगर आप एक खामोश बुत भी बन जाएं, तब भी लोग आप को नहीं छोड़ेंगे !!
कोई आपको गलत बात बोलता है, बदले मे आप भी गुस्से में उसे खरीखोटी सुनाते हो.
_ फिर घंटो आपका दिमाग खराब रहता है, यही तो वह चाहता है, आपका दिमाग खराब करना, आपको गुस्सा दिलाना.
_ इससे अच्छा है आप चुप ही रहो, उसके बोले गए शब्द ग्रहण ही मत करो, बस मुस्करा के अपने काम मे लग जाओ.
_ याद रखिये.. खामोशी से बड़ा कोई जवाब नही होता.
_ खामोश रहने से गलती होने का भी कोई चांस नही है.
_ जब उसके बोले गए शब्द आप लेने से इनकार कर दोगे तो.. वह खुद ही परेशान हो जाएगा.!
लफ़्ज़ों के बोझ से थक जाती है…’ज़ुबान’ कभी कभी…
_ पता नहीं खामोशी …’मज़बूरी’ है.. या समझदारी…!!
मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन …
_ आवाज़ों के बाज़ारों में खामोशी पहचाने कौन ..!
असलियत तो ख़ामोशी बयां करती है, _
_ अक्सर इंसानों को देख कर अल्फाजों को बदलते देखा है..
ख़ामोशी का मतलब लिहाज़ भी हो सकता है,
_ इसे किसी की कमज़ोरी समझने की भूल ना करें.
दस्तक और आवाज़ तो कानों के लिए है _
_ जो दिल को सुनाई दे, उसे ख़ामोशी कहते हैं !!!
ख़ामोशी में बड़ी राहत है, _
_ लफ़्ज़ों का सफर इंसान को थका देता है ..
कभी-कभी ख़ामोशी ही सबसे सच्चा शब्द होती है —
_ वो जो भीतर बोलता है, वही असल में सुनाई देना चाहिए.
जुबान बोले न भी बोले, तो मुश्किल नहीं,_
_ मुश्किलें तब होती हैं, जब खामोशी, भी बोलना छोड़ दे…
कुछ ही देर की खामोशी है…. फिर कानों में शोर आएगा…
तुम्हारा तो सिर्फ वक्त है…. हमारा दौर आएगा..
मोहब्बत में नुमाइश की ज़रूरत नही होती……
ये वो ज़ज़्बा है जिसमे ख़ामोशी भी गुनगुनाती है……..
मेरी खामोशी से उसे कभी कोई फर्क नहीं पड़ता,
शिकायत में दो लफ़्ज कह दूं तो चुभ जाते हैं…..!!
मेरे रूठ जाने से अब उनको फर्क नहीं पड़ता,
बैचेन कर देती थी, कभी जिनको खामोशी मेरी.
रुतबा तो खामोशियों का होता है ; अल्फ़ाज़ों का क्या है,
वो तो मुकर जाते हैं हालात देख कर..
ख़ामोशी ख़ुद अपनी ज़ुबाँ हो, ऐसा भी हो सकता है ;
सन्नाटा ही गूंज रहा हो, ऐसा भी हो सकता है.
एक नया व्यापार करता हूं ;
_ ख़ामोशी बेच कर _ सकून खरीदता हूं ..
बेवकूफ की सब से बड़ी अक्लमंदी ख़ामोशी है. _
_ अक्लमंद का ज्यादा देर तक खामोश रहना बेवकूफी है…
जितना हो सके ख़ामोश रहना ही अच्छा है, _
_ क्योंकि सबसे ज़्यादा गुनाह इंसान से जुबान ही करवाती है….
हम पर लगे इल्ज़ामों के, जवाब तो बहुत थे ! _
_ मगर खत्म हुए किस्सों की, हमें ख़ामोशी ही बेहतर लगी !!
अच्छी लगने लगी है ये ख़ामोशियाँ भी, _
_ अब हर किसी को जवाब देने का सिलसिला ख़त्म हो गया..!
कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं, _जिन्हे बयान करने के लिए शब्द नहीं, _
_ बस एक खामोशी ही काफी होती है.
अपने खिलाफ बातें मैं अक्सर ख़ामोशी से सुनता हूँ. _
_ जवाब देने का हक मैंने वक्त को दे रखा है….
मेरी ख़ामोशियों को सब पढ़ नहीं पाते, और समझे बिना, उनके उलट कहानियाँ गढ़ लेते हैं, ऐसा नहीं करना चाहिए,
_ क्योंकि ये मनगढ़ंत बातें धीरे-धीरे सच जैसी बन जाती हैं
_ फिर एक दिन जब अनकही बातें फूटती हैं, तो वो सन्नाटा भी शोर बन जाता है..
_ जिससे कोई नहीं बच पाता..!
खामोशी अक्सर सबसे बड़ा और गहरा जवाब होती है,
_ जब कोई चुप हो जाए, तो समझ लें उसे आपकी हकीकत दिख गई है.
_ अब वक्त सफाई देने या खोखली दलीलें पेश करने का नहीं, बल्कि खुद के भीतर झाँकने और उसे सुधारने का है.
_ सच्चाई की गूँज अक्सर खामोशी में ही सबसे तेज़ सुनाई देती है.!!
जब गिला शिकवा अपनों से हो तो ख़ामोशी भली, _
_ अब हर बात पर जंग हो जरूरी तो नहीं !!!!
चुप थे तो चल रही थी जिंदगी लाजवाब… _
_ खामोशियाँ बोलने लगीं…तो बवाल हो गया…!!
खामोशी की तह में छुपा लो सारी उलझनें, _
_ शोर कभी मुश्किलों को आसान नहीं करता….!!
रिश्तों में शिकायते कर के क्यों घटाया जाए रूतबा अपना;
_ करने दीजिए खामोशियों को खामोशी से काम अपना !!
एक ग़लतफ़हमी है कि खामोश चेहरों को शिकार बनाना आसान है,
_ लेकिन याद रखें कि जब खामोश चेहरे चक्रव्यूह रचते हैं तो कहीं का नहीं छोड़ते.!!
खामोशियाँ इस कदर बढ़ गयी है की, अब जाने पहचाने लोग भी ..!!_
_ अनजाने से लगते हैं …!!
बहुत भारी होता है वो पल, जब इंसान ना रोता है ना शिकायत करता है ;
_ बस खामोशी से सब कुछ सहते-सहते थक कर बैठ जाता है.!!
कुछ ख़ामोशियाँ चीख़ों से भी तेज़ होती हैं —बस सुनने वाला चाहिए.”
तुम्हारी चीखती हुई खामोशी सबको सुनाई देती है.!!
वक़्त रहते सीख ले ख़ामोश रहने का फ़न,
_ एक दिन वरना जुबां की ज़द में सर आ जायेगा.
लाखों हैं मेरे अल्फाज के दीवाने, _
_ मेरी खामोशी सुनने वाला कोई होता तो क्या बात होती.
मेरी खामोशी हज़ारों जवाबों से बेहतर है, _
_ क्योंकि ये अनगिनत सवालों की इज्जत रखती है.
तूने मेरा तकाजा देखा है कभी सब्र देख..
_ मैं इतना खामोश हो जाऊँगा कि तू चिल्ला उठेगा..!!
खामोशी को हमेशा दर्द से जोड़ कर ना देखो, _
_ खामोशी सुकून का दूसरा रूप भी होती है.
ख़ामोशी ग़लत फ़ैसला कर देगी,,
_ जहां जरुरत है वहां बोलिए.. वरना मसला हो जाएगा.!!
कुछ चीज़ों को ख़त्म करने का सबसे बेहतर तरीका है.. उन्हें छोड़ देना.. न रिएक्शन, न एक्शन ;
“बस ख़ामोशी” वहीं असली ताक़त है.!!
हम अपने आसपास चहकते-खिलखिलाते लोगों की ख़ामोशी को नोटिस क्यों नहीं करते…
खामोशियों में रहने का शौक नहीं ! कुछ ऐसी वजह होती !! जो खामोश कर देती है ..!!!
बेवजह शोर मचाने से सुर्खियां नहीं मिलती, _ कर्म करो ख़ामोशी भी अखबारों में छपेगी.
आवाज़ की पहुंच तो बस होती है कान तक, ख़ामोशी पहुंच जाती है दूर आसमान तक..
ख़ामोशी में चाहे जितना बेगानापन हो, _ लेकिन इक आहट जानी-पहचानी होती है…
मेरी ख़ामोशी को मेरी हार मत समझना, _ मैं कुछ फैसले ऊपर वाले पर छोड़ देता हूँ..
*खामोशी से बनाते रहो पहचान अपनी* __ *हवाएँ ख़ुद गुनगुनाएँगी नाम तुम्हारा*..
कुछ बातों का जवाब सिर्फ ख़ामोशी होती है और ख़ामोशी बहुत ख़ूबसूरत जवाब है !
खामोशी का मतलब लिहाज भी होता है, पर कुछ लोग इसे कमजोरी समझ लेते हैं !!
लोग कहते हैं ज्यादा बोलता नहीं मैं, _ पर कहूं ऐसा क्या जो खामोशी से बेहतर हो.
खामोशियाँ भी सुनाई पड़ती है साहब _ बस कान से नहीं दिल से सुनकर देखिये..!!
खामोशी इतनी गहरी होनी चाहिए कि _ बेकद्री करने वालों की चीखें निकल पड़े !!
हजार जवाबों से अच्छी है खामोशी, _ ना जाने कितने सवालों की आबरू रखती है.
रुतबा तो.. ख़ामोशीयों का होता है, _ अलफ़ाज़ तो बदल जाते हैं लोग देखकर.
खामोशी ….कभी खाली नहीं होती _ यह ढेरों जवाबों से लबालब होती है…..!!
जितना ही खामोश रह सकोगे, _ उतना ही तुम सुनने में ज्यादा सछम हो सकोगे.
खामोश जिंदगी जो बसर कर रहे हैं हम, _ गहरे समुन्द्रों में सफर कर रहे हैं हम…
खामोशी का अपना अलग ही मजा है, _ पेड़ों की जड़े फड़फड़ाया नही करती.!
जिन्हें बात करने का सलीका होता है, _ उन्हें खामोशिया ज्यादा पसंद होती हैं.
कोई सुनता नहीं किसी की यहाँ _ अपना खामोश रहना ही बेहतर है यहाँ_.!
जब कोई आपकी बात का यकीन ना करे, तो खामोश रहना बेहतर है..
ख़ामोशी बहुत कुछ कहती है, _ कान लगाकर नहीं, दिल लगाकर सुनो !!
छोड़ दिया सबसे बात करना, _अब खामोश रहना ही अच्छा लगता है…
जिन्हे वाकई बात करना आता है, _ वो लोग अक्सर ख़ामोश रहते हैं…
सम्मान कीजिए हमारी ख़ामोशी का, ..आपकी औकात छुपाए बैठे हैं.!!
एक ख़ामोशी में मिल गई हज़ार खुशियाँ, थक गया था मैं शोर कर कर के !!
जब बाहर शोर हो तो अपने भीतर की खामोशी की शरण लेनी चाहिए.
ख़ामोशी छुपाती है ऐब और हुनर, शख्सियत का अंदाज़ा गुफ़्तगू से होता है.
हर खामोशी अहंकार नहीं होती, कुछ खामोशी सब्र भी होती है.!!
मेरी ख़ामोशी एक दिन शोर… मचाएगी _ आज अकेला हूँ तो क्या…
जिन्हें एक बार खामोशियाँ रास आ जाएँ, फिर वे बोला नहीं करते !!
ये जो तुम मुझ में ख़ामोशी देख रहे हो, दरअसल ये मेरा सुकून है.
मेहनत इतनी खामोशी से करो की _ कामयाबी शोर मचा दे…..
बढ़ती हुई समझदारी, _ जीवन को मौन की तरफ ले जाती है.!!
खामोशियां जिसे अच्छी लग जाएं, वो फ़िर बोला नहीं करते.!!
उनकी खामोशी बता रही है कि … अब उनको बात नहीं करनी !
लफ्ज़ अब बड़े महँगे हो गए, आओ ख़ामोशी का सौदा करें…
खामोशी जरा देर से सुनाई देती है, लेकिन असरदार होती है..
कभी- कभी खामोशी से बेहतर, और कोई जवाब नहीं होता.
शोर की तो उम्र होती है, _ खामोशी तो सदाबहार होती है..
खामोशी की चीख़… चिल्लाने से भी अधिक होती है….!!!
कानों के पर्दे फट जायें, ख़ामोशी में वो धमाका होता है..!!
ख़ामोशी तुम समझ नहीं रहे, _ अल्फ़ाज़ अब बचे नहीं.
शोर की उम्र होती है, ख़ामोशी सदाबहार है..!!
एक शोर है मुझमें, _ जो खामोश बहुत है..
| Nov 21, 2013 | My Favourite Thoughts, सुविचार
कभी-कभी मौन एक विकल्प नहीं, बल्कि आपकी थकी हुई आत्मा का अंतिम सहारा होता है.
Sometimes silence is not a choice, but the last resort of your weary soul.
संसार मे सब स्वतः दिखाई पड़ता है -अपना पराया, सही गलत, किस बात को कैसे समझा गया, किसने किसे क्या समझा, हर चीज एवं बात —
– और फिर इस मोह से आप स्वयं बाहर निकल जाना पसंद करते हैं !
— सत्य तो बस इतना सा होता है — की चिल्लाने के लिए बल नहीं लगते..
— बल्कि मौन रहने मे बेहद बल लगते हैं.!!
— स्मिता सिन्हा
मौन को उसकी ताकत के साथ अपनाएं, अपनी कमजोरी न बनने दें.
_ उसे इस तरह न अपनाएं कि वह आपको दीमक की तरह भीतर ही भीतर खाने लगे और भावनात्मक रूप से खोखला कर दे.
_ बेवजह के टकराव से बचने के लिए चुप्पी एक सटीक तरीका है,
_ लेकिन अगर कोई आप पर प्रहार कर रहा हो, तो उस पर चुप रहने को समझदारी नहीं माना जाएगा.
_ इसलिए मौन को कमजोरी कतई न बनने दें.
कई बार निःशब्द [मौन] होना शब्दों से कहीं आगे का संवाद होता है,
_ जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों पर शायद हम निःशब्द [मौन] ही संवाद करते हैं..!!
_ जो मौन रहता है, उसके पास कुछ देने को है, और वही बोलने का हकदार है.!!
हम लोगों का बोलना बंद नहीं कर सकते, मगर हम किसकी सुनेंगे ये तय कर सकते हैं.!!
हर ताने का जवाब देने में जो खुद को उलझाओगे,
_ तो कैसे “मौन की गूंज” अनंत तक पहुंचाओगे..!
तुम्हारे पास लफ्ज थे, सोच थी.. आवाज़ थी..!
_ तुमने मौन रहने के लिए कितना संघर्ष किया होगा..!!
जो लोग सही बातों के समर्थन में चुप रहते हैं,
_वही लोग गलत होने पर चीखते-चिल्लाते हैं.!!
कभी किसी की चुप्पी को उसकी कमजोरी मत समझो..
_ क्योंकि जिस दिन वो बोलेगा, बहुत कुछ बदल जाएगा.!!
चुप हो जाना शांति नहीं..- शांति में चुप्पी अपने आप उतरती है.!!
“मौन” कभी हमें विनाश से बचाता है तो कभी विनाश का कारण बनता है,
_ हमें यह समझना होगा कि इसका उपयोग कब, कहां और कितना करना है…
_कई बार खामोशी ही अफसोस होती है.
मौन में बड़ी ताकत होती है इसलिए हमें मौन ही रहना चाहिए..
_ और जहां हमें बोलने की आवश्यकता न हो, वहां तो विशेष रूप से चुप रहना ही बेहतर होता है.
_ और वैसे भी ज़िन्दगी में कई ऐसे मोड़ आते हैं, जब हमें मौन रहना ही पड़ता है.
_ जब हम मौन रहते हैं तो अपनी क्षमता से अधिक सोच सकते हैं,
_ जिससे न होने वाले काम भी आसानी से हो जाते हैं.,
— चुप रहना एक ऐसी शक्ति है, जो हमें किसी भी बात को गहराई से समझने की एवं काम करने की ऊर्जा प्रदान करती है.
_ मौन रहने से हमारा मस्तिष्क ज़्यादा काम करता है और हम सही समय पर सही निर्णय लेने में भी सफल होते हैं.
_ जितना हम स्वयं को मौन रख पाते हैं उतना ही हमारा दिल अंदर से अपने को खुश महसूस करता है और यह ख़ुशी ही हमारे जीवन की वास्तविक ख़ुशी होती है.
— किसी भी विवादित स्थान पर चुप रहना हमें विजय दिला सकता है बशर्ते हम मौन रहें.
_यह हमारी मनोवैज्ञानिक शक्तियों को भी मजबूत करता है.
_ मौन हमारे कार्य में एकाग्रता लाता है जिसकी वजह से हम अधिक सोच पाते है.
_ इसलिए हमें अधिक से अधिक मौन रहने का संकल्प लेना चाहिए तथा आवश्यक हो तभी बात करनी चाहिए.
— इस दुनिया में वही व्यक्ति सबसे अधिक सुखी और समृद्ध है, जो क्रोध आने पर भी स्वयं को मौन रखता है.
_ हालांकि मौन रहना कोई आसान कार्य नहीं है,
_ इसके लिए भी साहस और धैर्य की आवश्यकता होती है.
_ यदि हम यही सीख लें कि कब और कहां मौन रहना है,
_ तो हमारे जीवन की आधी समस्याएं स्वतः ही खत्म हो सकती हैं.
“मौन वह भाषा है, जो आत्मा बोलती है”
_ जब शब्द चुप हो जाते हैं, तब भीतर की आवाज़ गूंजने लगती है.
_ यह वही क्षण होता है, जब व्यक्ति स्वयं से संवाद करता है.
_ मौन सिर्फ चुप रहना नहीं, बल्कि चेतना का विस्तार है.!!
जो आदमी मौन रहने में असमर्थ है, उसे जानना चाहिए कि उसके भीतर कुछ न कुछ पागलपन है ;
_ जो आदमी बिना बात किए रहने में असमर्थ है, जानना चाहिए, उसके भीतर कोई रोग है ;
_ सारी दुनिया बात कर रही है, सुबह से शाम तक बात कर रही है,कौन सी बातें हैं ? _शायद हमने कभी खयाल भी न किया हो कि कौन सी बातें कर रहे हैं ! – ओशो
बोलना कम करो, ज्यादा बोलने से एनर्जी और दिमाग दोनों खराब होते हैं,_
_ कोई आप को शांति नहीं दे सकता _ सिवाय आप के दिमाग के..
क्या बोलना है इंसान को ये भले न पता हो,_ लेकिन ये अच्छे से पता होना चाहिए कि क्या नहीं बोलना है.
अफ़सोस ये कि ज्यादातर लोगों ने चुप रहना नहीं सीखा है ; _हर मामले में बोला नहीं जाता है.
शायद चुप्पी हमें अपनी आंतरिक आवाज सुनने को मजबूर करती है, _जिससे हममें से ज्यादातर लोग डरते हैं _और इसलिए हम शोर को अपनाना पसंद करते हैं.
“शांत समय वास्तव में हमारे स्वास्थ्य और विवेक के लिए महत्वपूर्ण है.”
कभी-कभी हम भीतर इतना कुछ कह चुके होते हैं कि शब्द थक जाते हैं, भाव चुप हो जाते हैं..
_ ऐसा लगता है जैसे भीतर की ज़मीन बंजर हो गई हो, न कोई नयी बात उपजती है, न कोई नया जज़्बा,
_ शायद चुप्पी भी एक चरण है रचनात्मक ठहराव का..!!
कुछ सवालों के जवाब नहीं होते, वो बस मन की शांति को तोड़ते हैं, दिल के रिश्तों पर खामोशियाँ छोड़ते हैं..
_ ऐसे सवाल सिर्फ तर्क नहीं मांगते, वो भावनाओं की जड़ों को काटते हैं,
_ कभी-कभी चुप रह जाना ही सही होता है, क्योंकि हर सच कह देने से दिलों का भार हल्का नहीं होता, कई बार वो भार और बढ़ जाता है.!!
लोग बहुत बोलते हैं.
_ यहां खूबसूरत पेड़ हैं, पहाड़ हैं, जंगलों का सन्नाटा है, पक्षियों की आवाजें हैं, धरती की फुसफुसाहट है और उनकी अपनी आवाज है.
_ लेकिन लोग इतना बोलते हैं.
_ मैं चाहता हूं कि एक बार लोग मौन में चल सकें और एक बार इस जादू को महसूस कर सकें.
People speak a lot.
There are beautiful trees, mountains, the silence of forests, the voices of birds, the whisper of earth, and their own voice.
But people speak so much. I wish for once people can walk in silence and feel the magic for once.
एक बार जब आप परिपक्व हो जाते हैं तो आपको एहसास होता है कि किसी बात को साबित करने की तुलना में चुप्पी अधिक शक्तिशाली है.
Once you mature you realize that silence is more powerful than proving a point.
व्यक्ति शब्दों के जाल में फंसा हुआ है.
_ वह दूसरों को भी इस जाल में फंसाने की कोशिश करता है.
_ वह अपना बहुमूल्य समय व्यर्थ की बातों को सोच कर नष्ट कर देता है.
_ किसने किससे क्या कहा ? किस बारे में कहा ? ऐसा क्यों कहा होगा ? आदि.
_ आपको ध्यान रखना है कि आप स्वयं को इस प्रकार की उलझनों से दूर रखें.
_ अपनी ऊर्जा का उपयोग अनावश्यक बातों अथवा वार्तालाप में न गंवाएं.
_ स्वयं को मौन में जाने का अवसर दें.
_ उतना ही बोलें जितने की जरुरत हो.
_ मौन की गहराई ही आपको सही और गलत को पहचानने में मदद करेगी.
ख़ामोशी की ताकत से अनभिज्ञ हम एक वाचाल दुनिया में रहते हैं.
_ बहुत से लोग खामोशी को अकेलेपन और बोरियत से जोड़ कर देखते हैं,
_ लेकिन हकीकत यह है कि हम अगर दूसरों की नकारात्मकता को लेना नहीं चाहते, तो चुप रहना ही सबसे सही नीति है.
_ दिन में कम- से- कम कुछ देर अपनी खामोशी के साथ रह कर देखें,
_ बेवजह बोलते रहने से बचें, क्रोध के छणों में चुप रहें,
_ आपको कुछ समय बाद जिन्दगी में कई तरह के सकारात्मक बदलाव दिखाई देंगे.
आप बोल कर भी कई बार सामने वाले व्यक्ति को अपनी बात नहीं समझा पाते.
_ लिख कर बताना भी जब असफल रहता है तब मौन रहने का विकल्प बचता है..
_ और अक्सर खामोशी कारगर जरिया साबित होती है.
_ आप चुप रह कर समय देते हैं लोगों को आपकी बात समझ पाने का.
जिसने मौन को साध लिया, उसने धैर्य को पा लिया.
_ बोलने से जीवन की कई मुश्किलें हल हो जाती हैं, मन भी हल्का हो जाता है.
_ लेकिन बिना सोचे- समझे जल्दीबाजी में बोल कर प्रतिक्रिया दे देना उग्रता की निशानी है.
_ अगर आप ऐसी स्थितियों से खामोशी से गुजर जाने की कला सीख जाते हैं,
_ तो आप अपने भीतर धैर्य का गुण विकसित कर पाएंगे,
_ जो कि आपकी जिन्दगी में बहुत काम आएगा.
हम सुबह जागते ही एक शोर भरी दुनिया में प्रवेश कर जाते हैं.
_ घर में सब बोलना शुरू कर देते हैं,
_ टीवी या रेडियो चल पड़ता है,
_ घर से निकलते ही वाहनों के शोर से घिर जाते हैं.
_ इस शोर से हमारी सोचने की छमता प्रभावित ही नहीं होती, कई बार खत्म भी होने लगती है और नये विचारों के आने का क्रम टूट जाता है.
_ अगर आप अपनी दिनचर्या में से थोड़ा सा वक़्त नीरवता के साथ बिताते हैं,
_ तो आपका मौन आपको नये विचारों तक ले जाएगा.
कम से कम बोलें—इतना कम, जितना जरूरी हो— टेलीग्रैफिक.
_ जैसे तारघर में टेलीग्राम करने जाते हैं तो देख लेते हैं कि अब दस अक्षर से ज्यादा नहीं.
_ अब तो आठ से भी ज्यादा नहीं.. तो एक दो अक्षर और काट देते हैं, आठ पर बिठा देते हैं.
_ तो टेलीग्रैफिक !
_ खयाल रखें कि एक—एक शब्द की कीमत चुकानी पड़ रही है.
_ इसलिए एक—एक शब्द बहुत महंगा है; सच में महंगा है.
_इसलिए कम से कम शब्द का उपयोग करें;
_ जो बिलकुल मौन न रह सकें वे कम से कम शब्द का उपयोग करें.
परिपक्वता मौन की ओर ले जाती है..
_ जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है हम मितभाषी बनते जाते हैं..
_ हम बाहरी भावों को नियंत्रण करना सीख लेते हैं…
_ किसी भी बात का फर्क पड़ना बन्द हो जाता है… आँसुओ को पीने लगते हैं,
_ सामयिक लोगों को अपनी जिंदगी से दूर फेंक देते है और सुकून की तलाश में रहते हैं.
मछली पर एक कहावत है..”ना खोलती मुंह, ना होती ये हालत”
_ अनावश्यक अधिक बोलना स्वयं के भेद खोलना है, शत्रु को हावी होने देना होता है.!!
हमारे जीवन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि जब हम सिर्फ मौन रहना चाहते हैं तो हमे रह-रह कर कुरेदा जाता है, और जब हम कुछ बोलना चाहते हैं तो उसे सुनना कोई नही चाहता.!!
आपके पास कहने के लिए बहुत कुछ हो, लेकिन नासमझ लोगों के सामने आप चुप रहना पसंद करें, तो आप Classy people [उत्तम दर्जे के लोग] की श्रेणी में गिने जाएंगे.!!
जब तक किसी बात की पूरी जानकारी ना हो, तब तक मौन ही रहना चाहिए..
_क्योंकि अधूरा सत्य पूर्ण झूठ से कई गुना ज्यादा खतरनाक होता है.!
बोलना तभी होना चाहिए.. जब बोलने की आवश्यकता हो.
_ मौन तो बड़ी खूबसूरत अनुभूति है,
_ जहां अनावश्यक बोलने से समस्या जन्म लेती है, वहीं मौन समस्या को अजन्मा रहने देता है.
खयाल रखें कि एक एक शब्द की कीमत चुकानी पड़ रही है, इसलिए एक एक शब्द बहुत महंगा है ;
इसलिए कम से कम शब्दों का उपयोग करें ; जो बिलकुल मौन न रह सकें, वे कम से कम शब्दों का उपयोग करें.
“लोगों को तर्क से कभी मत जीतो, बल्कि अपनी चुप्पी से उन्हें हराओ… क्योंकि जो लोग
हमेशा आपसे बहस करना चाहते हैं, वे आपकी चुप्पी बर्दाश्त नहीं कर सकते…”चुप रहो, समझदार बनो”
चुप्पी हमेशा कायरता नहीं होती है. यह तो भावनाओं की भाषा होती है, जो आप शब्दों से नहीं बोल सकते, वह आप अपने मौन से बोल सकते हैं.
वैसे भी जब मौन बोलता है, तो उसकी आवाज भले ही देर में सुनायी दे, पर बहुत दूर तक सुनायी देती है.
जीभ में कोई हड्डी ना होकर भी यह बहुत कुछ तोड़ने की क्षमता रखती है,
_ इसलिए शब्दों का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना चाहिए.!!
इतना मत बोलिए, की लोग चुप होने का इंतजार करें,_ बल्कि इतना बोल कर चुप हो जाइए की लोग आपके दोबारा बोलने का इंतज़ार करें..
चुप्पी को सहनशीलता समझा जाता है लेकिन जब आवाज़ उठती है, तो उसे
विद्रोह कहा जाता है.. यही दुनिया की विडंबना है.!!
जो ऊंचाई चाहते हैं, उन्हें चुप रहना भी आना चाहिए..
_ जैसे चील शांत रहकर भी ऊंचे आसमान की उड़ान भरती है.!!
जरुरत से ज्यादा बोलने वालों के साथ _ जरुरत से कम सम्बन्ध रखना ही उचित समझदारी है..!!
आप जितना कम बात करेंगे, लोग आपकी बातों के बारे में उतना ही अधिक सोचेंगे.
The less you talk the more people think about your words.
मौन का अर्थ यह नहीं होता की हम केवल बाहरी दिखावे के लिए चुप रहें..
..हमे अंतर्मन को भी खामोश करना पड़ता है…!!!
ये बात हमारे लिए अच्छी बात नहीं है कि हम उन मुद्दों को लेकर चुप्पी साध लेते हैं, जो मायने रखते हैं.!!
जहां बात सुनी न जाए, सुन के भी समझी न जाए, वहां चुप रहना ही बेहतर है..!!
जीवन के संघर्ष में यह बात समझनी ज़रूरी है कि कई बार आप सही होते हैं, तब भी चुप रहना बेहतर विकल्प होता है.!!
हर व्यक्ति अपनी स्थिति में संघर्ष कर रहा है,
_ इसीलिए हर मौन अहंकार नहीं है.!!
“मुंह से कुछ ना बोलना ही मौन नहीं है,
भीतर से भी कुछ ना बोला जाए, उसे मौन कहते हैं, “
जो घड़ा आधा भरा होता है, वह ज्यादा बजता है.
जो पूर्णता भरा होता है, वह मौन रहता है..!!
दुखी होने पर हम रोते हैं, ज्यादा दुखी होने पर ज्यादा रोते हैं !
_ पर जब दुःख सीमा लांघ दे, हम चुप हो जाते हैं !!
सुकून, खुशी व जीवन आपके अंदर छिपा है, दुसरो में केवल उलझने ही मिलेंगी,
इसलिए मौन होकर खुद को जानो…
“कभी-कभी चुप रहना मजबूरी नहीं होता, बल्कि हमारी थक चुकी आत्मा का आखिरी बचाव होता है”
बीज बिना किसी आवाज के बढ़ता है, लेकिन एक पेड़ भारी शोर के साथ गिरता है.
विनाश शोर करता है, लेकिन बढ़ने वाला मौन रहता है, यह मौन की शक्ति है !
हमेशा चुप रहना तो कोई हल नहीं है !
_ अपने मन की बात और सही बात कहना भी उतना ही जरूरी है ;
_ क्योंकि अगर आप हमेशा चुप रहेंगे तो गलत चीजें सिर्फ बढ़ती हैं..!
— मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूं जिन्हें जब खुल कर बोलना था, तब उन्होंने चुप्पी का दामन थाम लिया..
_ क्योंकि जिसके खिलाफ बोलना था, उसने उन्हें कुछ ऐसा पकड़ा दिया कि उनकी बोलती बंद हो गई.!!
_ चुप्पियाँ बढ़ती जा रही हैं उन सारी जगहों पर, जहाँ बोलना जरुरी था !!
कुछ लोग जरूरत से ज्यादा बोलते हैं. कुछ लोग जरूरत से कम..!
_ दोनों ही स्थितियां ठीक नहीं हैं.
_ अगर आप चाहते हैं कि आपकी बात सही मायनों में सुनी जाए और असर करे, तो उसे टू द प्वाइंट और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना आना चाहिए.
_ टू द प्वाइंट का यह महत्व हमें रोज़मर्रा की ज़िंदगी से लेकर गंभीर मुद्दों तक हर जगह दिखाई देता है.
_ इसीलिए, संचार में सबसे अहम है – टू द प्वॉइंट रहना..
_ जब आप अपनी बात कहने में बहुत ज्यादा बोलते हैं, तो असली संदेश अक्सर इधर-उधर की बातों में खो जाता है.
_ टू द पॉइंट अपनी बात जो नहीं कह रहे हैं, वास्तव में ये अपने ही व्यक्तित्व का उलझाव होता है.
_ बात बस इतनी सी है, की आपको अपनी बात कहनी आनी चाहिए, और यह तभी हो सकता है, जब आप ही अपने लिए क्लियर कट हो,
_ जो जरा जरा से निर्णय भी पूछ पूछ कर लेते हैं, वह अपनी बात कैसे कह सकते हैं.
_ मुझे भी क्लियर कट अपनी बात रखनी अच्छी लगती है, बहुत कम शब्दों में..!!
किसी बात को ठीक से समझने के लिए सुनने का धैर्य विकसित करना बहुत ज़रूरी है.
_ चुप रहकर सुनना बहुत कठिन होता है, क्योंकि हमारे बोलने का उतावलापन बाधक बन जाता है.
_ सच तो यह है कि मौन ही वह ज़रिया है.. जिससे हम दूसरे व्यक्ति की बात को ठीक से समझ सकते हैं और यह मौन ही खुद को जानने का ज़रिया भी है.!!
कमज़ोर परिस्थितियों में मौन रहना सीख लो और सही वक्त आने पर दुनिया को दिखा दो की तुममें कितनी गर्जना है…!!!
कभी-कभी आपको चुप रहना चाहिए_और लोगों को देखने देना चाहिए कि आप कौन हैं..
.. क्योंकि कार्य शब्दों से अधिक जोर से बोलते हैं..!!
ह्रदय से जो दिया जा सकता है वो हाथों से नहीं, _ और जो मौन से कहा जा सकता है वो शब्दों से नहीं.
कई बार निःशब्द [ मौन ] होना शब्दों से कहीं आगे का संवाद होता है,
_ जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों पर शायद हम निःशब्द [ मौन ] ही संवाद करते हैं..!!
मैं अगर कभी कुछ बना पाया तो ऐसी लिपि बनाऊँगा, _ जिसमें लोगों का मौन पढ़ा जा सके.!
“मौन और चुप्पियों को पढ़ना हर किसी को नहीं आता !!”
मुझे बहुत ज्यादा बोलने वाले लोग पसंद नहीं हैं,
_ मतलब लोगों को समझ ही नहीं आता कि ..कुछ देर चुप रह लूँ,
_ ऐसी बातें करेंगे ..जिसका कोई अर्थ भी नहीं है, बेबुनियाद बात करेंगे,
_ अब तो ऐसा लगता है कि ..जो ज्यादा बोलता है ..वो बकलोल है !!
जहाँ तक मुझे पता है, मैं जवाब देना बखूबी जानता हूँ.. शब्दों की कमी नहीं मुझमें,
_ पर फिर भी अक्सर खामोश रहता हूँ..
_ क्योंकि ये अच्छे से समझता हूँ कि हर किसी को जवाब देना ज़रूरी नहीं होता..
_ कुछ जगहों पर जवाब नहीं, सिर्फ मौन ही सबसे सटीक उत्तर होता है.!!
“सच्चा सहारा तब मिलता है, जब मैं अपने ही मौन को सुनना सीखता हूँ”
भीतर खामोशी इतनी बढ़ी कि बाहर शब्दों का समुद्र उमड़ आया.
_ यूँ मैं बचा मौन के आघात से..!!
अब चुप रहना ही सही लगता है, क्योंकि समझने वाला कोई नहीं है,
_ और जो समझने वाले हैं, वो बातों का अलग मतलब निकाल लेते हैं ..!!
_ अब मैं सिर्फ खामोशी से भरा होता हूँ, कुछ कहने को नहीं, कुछ सुनने को नहीं.. “बस शुद्ध मौन”
मौन स्वयं से खाली होने की प्रक्रिया है.
_ समुद्र जितना गहरा होता है उतना ही शांत होता है.
_ गहरे पानी की तरह रहिए “साफ और चुप”
हर ताने का जवाब देने में जो खुद को उलझाओगे,
_ तो कैसे ‘मौन की गूंज’ अनंत तक पहुंचाओगे.!!
कुछ भी सुनने और समझने के लिए, _ ” मन ” का मौन रहना आवश्यक है !!
मौन होना रूठना नहीं होता _ जैसे नहीं होता _ ढ़ेर सारी बातें करने का अर्थ संवाद …
मै चुप नही हूं, मेरा “मौन” बहुत कुछ कह रहा है, तुम सुन पाने में असमर्थ हो !
मौन एक मित्र है, जिसका साथ आपको पछतावे की आग में कभी जलने नहीं देगा…
मैं केवल इतना समझ पाया हूँ, _ मौन शब्दों से ज्यादा सार्थक है.
” संवाद तो मौन में भी हो जाता है बस, दिल के तार जुड़ना जरूरी है,”
मौन का अर्थ है बाहर से भी चुप हो जाना और भीतर से भी चुप हो जाना.
“कभी-कभी चुप रह जाना हार नहीं होता,
_ वो अपने भीतर की शांति को बचा लेना होता है”
जो मौन हैं वो चिल्ला चुके हैं..
_ जो चिल्ला रहे हैं ..वक्त उन्हें भी खामोश कर देगा.!!
मौन को सुनने वाले कान नहीं मिलते, इसलिए शब्दों से परोसता हूं.
अक्सर बढ़ती हुई समझ…..जीवन को मौन की ओर ले जाती है…
मौन की भाषा वाणी की भाषा की अपेछा अधिक बलवती होती है.
आदमी चुप रहना सीख जाए तो अधिकांश शिकायतें खत्म हो जाएं.
महान लोग प्रायः चुप रहते हैं, बुद्धिमान बोलते हैं, मूर्ख बहस करते हैं.
किसी व्यक्ति को उसकी ऊँची आवाज़ से नहीं, बल्कि उसके मौन की गहराई से जानें.
जो आवश्यकता से ज्यादा बोलता है, उसका कभी मूल्य नहीं बढ़ता.
बात कहने के सौ तरीक़े हैं, कुछ न कहना भी एक तरीका है.!!
वाणी का अफसोस अनेक बार होता है मौन का कभी नहीं.
मौन एक ऐसी भाषा है जो बिना आवाज के ही बोलती है.
मौन जीवन के अनेक कष्टों से सीखा गया सबक है.!!
चुप्पी साध लेना…दुनिया की सबसे बड़ी साधना है.
अप्रिय शब्द बोलने से मौन रहना अच्छा है.
‘जो मौन है’ वो पहले बोल चुका है.!!
दूसरों को चुप करने के लिए, पहले स्वयं चुप हो जाओ.
हर एक शब्दों का तोड़ है, पर मौन का कोई तोड़ नहीं
बेवजह के सवालों का सबसे बड़ा उत्तर है … ” मौन “
कुछ पल मौन रह कर आत्म- निरिछण करना चाहिए.
कभी- कभी मौन रह जाना सबसे कटु आलोचना है.
जब आपका वक्त बुरा चल रहा हो..तो मौन हो जाने से सुंदर और कुछ नहीं..!!!
खुश रहना है तो मौन रहना सीखो, _ क्योंकि खुशियों को शोर पसंद नहीं है.
मौन सबसे कठोर तर्क है, जो आप कभी- कभी अपने शत्रु को देते हैं.
कहने को तो बहुत-सी बातें हैं पर.. चुप रहने में ही सुकून है !!
मौन रहना अच्छा है, परंतु जब अन्याय हो, तब नहीं…
“मौन” क्रोध की सर्वोत्तम चिकित्सा है…!
मूर्ख की बात का उत्तर मौन है.
जब आपके पास कहने को कुछ न हो, तब कुछ मत कहो.
दूरदर्शी व्यक्ति हमेशा मौन की शक्ति धारण कर सकता है.
बोलने लायक हो कुछ तो ही बोलो, _ नहीं तो मौन बहुत सुंदर है.
मौन रहना एक साधना है _ पर सोच समझ कर बोलना एक कला है.
मौन हो जाओ, बहुत कुछ सुनाई देगा और दिखाई भी देगा !!
जुबान का ज्यादा चलना.. अक़्ल कम होने की निशानी है.!
मौन आपको दूसरों को ध्यान से सुनने की छमता देता है..!
शब्द तो छलावा है, पढ़ना है तो किसी का मौन पढ़ो..!!
मौन भी कई मौकों पर संवाद का माध्यम बन जाता है.!
मौन ही बेहतर है, क्योँकि बातों से ही बातें बिगड़ती हैं !
मौन वो मरहम है, जो शोर से उपजे घाव को भरता है..!
मौन के आगे क्रोध की शक्ति असफल हो जाती है..
गहरी पीड़ा आँसू नहीं केवल मौन देकर जाती है.
कम बोलने और ज्यादा समझने में ही भलाई है.
कुछ स्थितियों में चुप रहना ही बेहतर होता है..
In some situations it’s better to remain silent..
मौन मन और शरीर दोनों को आराम देता है..
गहरे दुःख हमेशा निःशब्द और मौन होते हैं.!
मौन बात – चीत की एक महान कला है.!!
बहुत अच्छा नहीं कह सकते तो, चुप रहें.
मौन खाली नहीं है, _ यह उत्तरों से भरा है..
मन की वृत्तियों को रोकने का नाम मौन है.!
गहरे पानी की तरह रहिए_ साफ़ और चुप.!
झूठे आरोपों का सर्वोत्तम उत्तर मौन है.
मौन सबसे शक्तिशाली चीख है, _
_ Silence is the most powerful scream.
एक समझदार आदमी तब बोलता है,
_ जब दूसरे अपने शब्दों का इस्तेमाल कर चुके होते हैं.
अगर आप मौन का अभ्यास शुरू करेंगे _
_ तो पाएंगे कि इसमें मानसिक विकारों को समाप्त करने की शक्ति भी मौजूद है.
मौन भी एक प्रकार का संवाद है, _
_ जो ये जान गया, उसके लिए बोलने या चुप रहने का भेद मिट जाता है.
हर किसी के सामने अपने शब्दों को फ़िज़ूल जाया मत करिए, _
_ मौन रह कर भी आप जवाब दे सकते हैं ..!!!!
चुप रहना ही सही लगता है, क्योंकि समझने वाला कोई नहीं है ;
_और जो समझने वाले हैं, वो बातों का अलग ही मतलब निकाल लेते हैं..!!
एक दिन आपको अपने बोले हुए शब्दों का अफ़सोस हो सकता है..
_______लेकिन चुप रहने का कभी नहीं ..!
हजारों खोखले शब्दों से बड़ा एक मौन होता है,
क्योंकि वह अपने साथ शांति लेकर आता है.
शब्द तो यदा- कदा चुभते ही रहते हैं,
पर किसी का मौन चुभ जाए तो संभल जाना..
सारा दिन मुँह नहीं चलाना चाहिए, बोलने पर नियंत्रण जरुरी है.
_ ज्यादा बोलने से समस्याएं बढ़ती हैं.
जहां अपने शब्दों का कोई महत्व नहीं, _
_ वहां मौन से अच्छा कोई विकल्प नहीं..
व्यक्ति जब मौन को प्राथमिकता देने लग जाता है, _
_ तब उसका एक अलग व्यक्तित्व का निर्माण होता है .!!!
जिस तरह घोंसला सोती हुई चिड़ियों को आश्रय देता है,
_ उसी तरह मौन तुम्हारी वाणी को आश्रय देता है.
कभी – कभी अच्छा लगता है कि किसी से कुछ भी बात न करें…
Sometimes it feels better not to talk at all…about anything, to anyone.
हर इंसान अपनी जगह किसी न किसी जंग से गुजर रहा है, इसलिए हर खामोशी को घमंड समझना ठीक नहीं.
_ कई बार चुप रहना मजबूरी होती है, या फिर टूटा हुआ मन बस आवाज़ नहीं बन पाता.
_ मौन का मतलब हमेशा अहंकार नहीं होता… कभी-कभी वो सहने की हद होती है, या फिर खुद को संभालने की आखिरी कोशिश.!!
मौन का अर्थ है वाणी की पूर्ण शान्ति.
_ मौन का अर्थ केवल चुप रहना नहीं है.
_ मौन एक गहरी साधना है, जिसके माध्यम से मनुष्य अपने भीतर की परतों को हटाकर अपने वास्तविक स्व रूप का परिचय प्राप्त करता है.
_मौन अपने भीतर के सौन्दर्य और गहराई को निहारने की एक अनूठी प्रक्रिया है.
_ वाणी ही एक ऐसा माध्यम है जिससे मनुष्य अपने आप को संसार से योग करके रखता है.
_ जितना ही वह संसार में लिप्त होता है उतना ही वह स्वयं से दूर हटने लगता है.
_ ज्यों ही हम वाणी को विराम देते है, अहिस्ता -अहिस्ता अपने ही समीप पहुँचने लगते हैं और अपनी पहचान प्राप्त करते हैं.
_ मौन में वह शक्ति है जो प्राणों की ऊर्जा के अपव्यय का समापन करती है.
_ मनुष्य अपनी प्रचण्ड ऊर्जा को अनर्गल बोलकर शब्दों के माध्यम से ह्रास कराता है.
_ इसी ऊर्जा को मौन धारण करके एकत्रित किया जा सकता है.
— नब्बे प्रतिशत मुसीबतें संसार से कम हो जायें, यदि लोग थोडा कम बोलें,
_ लेकिन होता यह है कि मनुष अपने भीतर बैठे हर मनोविकार को वाणी के द्वारा बाहर प्रवाहित करता है और तदनुरूप अपने परिवेश का सृजन कर लेता है.
_ जो विषम परिस्थिति जिह्वा उत्पन्न कर सकती है, वैसा तलवार के माध्यम से भी होना कठिन है.
_ जिह्वा द्वारा दिया गया घाव कभी नहीं भरता..
_ आध्यत्मिक जीवन में जिसने भी ऊँचाइयों को छुआ है, उसने मौन का सहारा अवश्य लिया है.
_ महावीर स्वामी ने बारह वर्ष तक मौन रखा और गौतम बुद्ध ने छ:वर्ष तक, जिसके पश्चात उनकी वाणी दिव्य हो गई.
_ हमारे मन में हर पल विचारों का मेला लगा रहता है.
_ हर क्षण एक नये विचार का उदय होता है.
_ ऐसी स्थिति में मौन का पूरा लाभ नहीं लिया जा सकता.
_ बाहर के साथ-साथ अन्दर से मौन रहना कहीं अधिक आवश्यक है.
— इसलिये संसार के कुतूहल से जब मन अत्यधिक विचलित हो जाये,
_ तो प्रयास करना चाहिए कि लोगों के भीड से दूर प्रकृति के बीच में जाकर बैठे.
_ हर समय प्रकृति एक नया सन्देश देती है.
_ उसके कण कण में एक दिव्य संगीत की धुन सुनाई देती है.
_ जितना ही हम भीतर से शान्त होते जाते है, उतना ही हम प्रकृति के हर शब्द को अपने भीतर अनुभव करते हैँ.
_ भ्रमरों के गुंजार में हमें अनन्त की ध्वनि सुनाई देने लगती है.
_ डालों पर बैठे पक्षियों के चहचहाने में हमें राग दीपक या भैरवी के स्वरों का आभास होता है.
_ प्रकृति को यदि समझना है तो अपने भीतर के सुनहरे मौन को जाग्रत करना आवश्यक है.
— मौन वास्तव में वह संजीवनी शक्ति है जिससे व्यक्ति के प्राणों की ऊर्जा का पुन:विकास एवं उत्थान होता है.
_ नित्यप्रति तीन या चार घंटे का मौन रखना अत्यन्त लाभदायक है.
_ मौन के निरन्तर अभ्यास से वाणी पवित्र होने लगती है और उसमें सत्यता जाग्रत होती है.
_ ऐसा व्यक्ति वाणी से जो भी बोलता है, वह सच होने लगता है.
_ उसके व्यक्तित्व में गंभीरता आने लगती है और मन एकाग्रता की ओर वढता है.
— मौन जब पूर्ण रूप से सिद्ध हो जाये तो मन का लय हो जाता है जैसे कोई विचार है ही नहीं है.
_ क्या आपने शान्त सागर को ध्यान से देखा है ?
_ उसमें कभी कोई लहरे नहीं उठती.
_ वह एक रस में बहता चला जाता है.
_ मौन में लहरों की भांति उठने वाले विचार विलीन हो जाते हैं.
_ व्यक्ति को अहसास होता है कि जो ‘मै’ था वह केवल जड की अनुभूति थी.
_ अब मैं एक चेतना का सागर हूँ,
_ परिपूर्ण मौन शान्ति के जल में मन की आहूति है.
‘मौन शान्ति का सन्देश है’
___ यह स्वयं को रब से जुडने का सबसे सरल उपाय है.
_ इसलिए जहाँ भी आप हों जो भी आप कार्य करतें हों,
_ प्रयास कीजिये कि अपने व्यस्त दिनचर्या में से कुछ क्षण निकालकर संकल्पबद्ध होकर मौन में उतरकर परम शान्ति का अनुभव करें.
कब मौन रहना बहुत जरूरी होता है ?
1 😷 मौन रहे — जब तक आप के पास प्रमाण न हो.
2 😷 मौन रहें — जब आप को लगता है कि आप बिना चीखे
कुछ बात नहीं बोल सकते.
3 😷 मौन रहें — अगर आप के शब्दों से, वाणी से त्रुटि पूर्ण भावों का प्रचार प्रसार हो रहा हो.
4 😷 मौन रहें — अगर आप आक्रोश के आवेग में आ रहे हो.
5 😷 मौन रहें — जब आप को लगता है कि कोई महत्वपूर्ण दोस्ती आपके बोलने की वज़ह से टूट सकतीं हैं.
6 😷 मौन रहें — जब आप को लगता है कि किसी व्यक्ति को आपके शब्द चुभेगे.
7 😷 मौन रहें — अगर आप को लगे कि मुझे ऐसा नहीं बोलना चाहिए था.
8 😷 मौन रहें — जब आप को स्वयं के प्रति आत्म ग्लानि से भरे हुए हो.
9 😷 मौन रहें — जब श्रवण का समय हो.
10 😷 मौन रहें — तब जब आपको लगता है कि निरर्थक शब्दों के उपयोग से बचना ही उचित है.
सब तरफ शोर ही शोर
उठता और चारों ओर पसरता शोर.
आपस में हो रही बातों का शोर
मशीनों के चलने का शोर
दो-पहियों और चार-पहियों के आवागमन का शोर
ऊपर से उनकी हार्न की अनवरत टें-टें
गाजे-बाजे का शोर
उस पर डीजे की कान फोड़ू ध्वनि
कैसे रोकूँ इन्हें ?
किसी को कहो तो सुनता नहीं
सुनता है तो मानता नहीं
बहस में उतारू हो जाता है
कैसे रोकूँ इन्हें ?
क्या करूँ ?
अपने कान में रुई ठूँस लूँ
या कान के परदे फाड़ लूँ
क्या करूं?
या, मौन धारण कर लूँ
जिसमें बाहरी ध्वनियाँ स्वयं मौन हो जाती हैं
केवल अंतर्मन की आवाज़ सुनाई पड़ती है.
चुप रहो
——–
चुप रहने से घुटन हो तो हो
लेकिन टूटन बच जाती है
मुरझाते रिश्ते फिर पनप जाते हैं
इसलिए चुप रहो।
मालूम है?
छुपाना जरूरी है
क्योंकि खुले घाव से बदबू फैलती है
खुला घाव सबको दिखेगा
सब जान जाएंगे
कहेंगे, कुछ करते क्यों नहीं?
घाव अंदर फैलता है तो फैलता रहे
दिखेगा तो कुछ करना होगा
हम कुछ कर नहीं सकते
इसलिए चुप रहो।
लेकिन उसने कुछ नहीं कहा
बस, चुप रह गया
क्योंकि यह उसका खुद का फैसला था
कि किसी से कुछ मत कहो
चुप रहो।
शब्द हर बार हमारे भावों का बोझ नहीं उठा पाते..
_ कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जो ज़ुबान से नहीं, सिर्फ़ आत्मा से महसूस किए जा सकते हैं. _ भावनाओं की तीव्रता जब अपनी सीमा पार कर जाती है, तब भीतर एक मौन जन्म लेता है — ऐसा मौन जो बाहर से शांत दिखता है, लेकिन भीतर बहुत कुछ कह रहा होता है.
_ यह मौन कोई कमज़ोरी नहीं, बल्कि एक थकी हुई आत्मा का चयन है.
_ यह तब आता है जब मन बार-बार टूटने के बाद अब टूटना नहीं चाहता, जब उम्मीदें दम तोड़ देती हैं, और जब समझाने की थकान भीतर तक जम जाती है.
_ मौन तब नहीं आता जब हमें कुछ कहने को नहीं होता, बल्कि तब आता है जब हमने बहुत कुछ कह दिया हो, और अब उस ‘कहने’ में कोई अर्थ नहीं बचा हो.
_ यह चुप्पी एक निर्णय है — लड़ाई बंद करने का, खुद को समझाने का प्रयास छोड़ने का, और उस शांति को चुनने का जिसे अब किसी के जवाब की ज़रूरत नहीं.
_ मौन का यह चरण बदलाव के स्वीकृति से शुरू होता है, जहाँ शिकायतें पिघलने लगती हैं और आत्मा खुद से ही संवाद करने लगती है.
_ अब कोई शिकवा नहीं होता, कोई अपेक्षा नहीं बचती..
_ बस एक गहरा स्वीकार होता है कि जो होना था, वह हो चुका.
_ अब सिर्फ़ आगे बढ़ना है — खुद के साथ, खुद के लिए..
_ और जब आत्मा यह स्वीकार कर लेती है, तब भीतर क्षमा का बीज अंकुरित होता है.
_ यह क्षमा दूसरों के लिए नहीं, सबसे पहले खुद के लिए होती है.
_ हम समझते हैं कि जो किया, उस वक़्त अपनी समझ और हालातों के अनुसार किया. _ आज अगर वह अधूरा लगता है, तो वह आत्मज्ञान का परिणाम है — आत्मग्लानि का नहीं, इस बोध से जन्म लेती है आत्म-मुक्ति.
_ हम खुद को माफ करते हैं, गले लगाते हैं, और धीरे-धीरे अपने ही टूटे हिस्सों को जोड़ते हैं.
_ इस मौन के साथ दिल अब भी वैसा ही बना रहता है — कोमल, संवेदनशील और सच्चा, लेकिन अब वह चयनशील हो जाता है.
_ अब हर कोई उस दिल तक पहुँच नहीं सकता.
_ अब वह हृदय अपनी सीमाएँ जानता है और उन सीमाओं की रक्षा करना सीख चुका है. _ अब वह प्रेम करता है, पर बिना अपने आप को खोए.
_ अब वह भरोसा करता है, पर आँख मूँद कर नहीं.
_ यह हृदय अब अनुभव से सधा हुआ है, आत्मसम्मान से भरा हुआ है.
_ मौन के इस रास्ते पर चलना आसान नहीं होता, लेकिन यही रास्ता आत्मा को सबसे ज़्यादा सुकून देता है.
_ जब बोलना थकाता है, तब चुप रहना संबल देता है.
_ जब बाहर कोई नहीं समझता, तब भीतर की आवाज़ ही मार्गदर्शक बन जाती है..
_ और यही मौन धीरे-धीरे घावों को भरता है, थकान को मिटाता है और हमें सिखाता है कि गरिमा के साथ आगे कैसे बढ़ा जाए.
_ अब मेरा मौन सिर्फ़ चुप्पी नहीं है, यह मेरा उत्तर है — उन सभी प्रश्नों का जो अब अर्थहीन हो चुके हैं.
_ यह मेरे भीतर का संतुलन है, मेरी आत्मा की शांति है.
_ अब मैं कुछ भी साबित नहीं करना चाहता.
_ अब मैं सिर्फ़ जीना चाहता हूँ — पूरे सम्मान, आत्मसम्मान और सच्चाई के साथ.!!
– Rahul Jha
| Nov 19, 2013 | सुविचार

सबसे फालतू चीज क्या है जिस पर लोग पैसे खर्च करते हैं ?
What is the most useless thing people spend money on ????
पैसे कमाने के बारे में तो आपको हर कोई बताता होगा, लेकिन शायद ही कोई आपको खर्च करने के तरीके बताता होगा.
सही फाइनेंशियल मैनेजमेंट में यह जरूरी है कि आप अपने खर्चों को भी मैनेज करें, हमें शांत चित से महीने की कमाई और खर्च का गणित अवश्य मिलाना चाहिए. खर्चे का सही मैनेजमेंट नही होने के कारण ही कमाई से अधिक खर्च कर जाते हैं. इसीलिए हम जो चीजें सस्ती हैं, उसका पीछा करने के लिए हमेशा महंगा भुगतान करते हैं.
_ शॉपिंग को अपनी हॉबी बनाने से बचें, लोन के द्वारा कुछ ना खरीदें, _ ये समझें कि कहां पर पैसे खर्च करने चाहिए और कहां नहीं..!!
सामाजिककरण महंगा नहीं होना चाहिए, जैसे शादी-विवाह, गृह प्रवेश आदि..!!
आगे की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए आज पैसे बचाना जरूरी है.
पैसे खर्च करना सीखने से आपको अपने पैसों का अधिक से अधिक इस्तेमाल आ जाता है ; _ इतना ही नहीं, इससे आपको भी खुशी मिलती है.
अनेक लोग वह धन व्यय करते हैं, जो उनके द्वारा कमाया हुआ नहीं होता. वे चीजें खरीदतें हैं, जिनकी उन्हें जरुरत नहीं होती.
ऐसे लोग _ उनको प्रभावित व दिखावा करना चाहते हैं, जिन्हें वे पसन्द भी नहीं करते.
हमारी ‘चाहत’ चुपके से ‘ज़रूरतों’ में बदल जाती है और ऐसी चीजें जो कभी विलासिता की चीज़ें हुआ करती थीं, ज़रूरतों में बदल जाती है.
यह मानसिकता एक समस्या खड़ी करती है, एक बड़ी समस्या..
इसलिए अपनी आय के आधार पर अपनी चाहत की सीमा निर्धारित करें..
आप अपने चुने हुए तरीके से अपने जीवन का भरपूर ‘आनंद ’लेते रह सकते हैं.
पैसा तो एक साधन मात्र है. आप जहां चाहें यह आपको ले जाएगा, लेकिन यह ड्राइवर के रूप में आपकी जगह नहीं लेगा. – AynRand
बिना किसी को दुख दिए या किसी का हक़ मारे पैसा कमाना सुख की बात है.!!
सही पैसा वो है जिसे कमाने के पश्चात् नींद चैन की आये.!!
पैसे से यदि आप सुविधा, साधन और समय खरीद सकें तो पैसे का इससे बङा सदुपयोग कोई दूसरा नही हो सकता.!!
पैसा महत्वपूर्ण है लेकिन यह सब कुछ नहीं है… उन सभी चीजों के बारे में सोचें _जो आपके पास पहले से ही हैं _जिन्हें पैसे से नहीं खरीदा जा सकता.
पैसे से सम्पति का खरीदी जाती है पर कुछ अमूल्य चीजो को पैसा भी नही बचा सकता.. जैसे कि समय, सौंदर्य…!
यदि आपके पास पैसा नहीं है तो आप कुछ और नहीं सोचते हैं, _और यदि आपके पास है तो अन्य चीजों के बारे में सोचते हैं.!!
धन कमाना बहुत कठिन है, और यदि मिल जाए तो ..
“उसकी रक्षा करना और मुश्किल है.”
कुछ लोग निर्धनता प्रकट करके और खुद को निर्धन दिखा के खुश होते हैं.!!
_धनी होना चाहते हैं पर मेहनत किए बिना.!!
भौतिक जगत में जीना है और सुकून से जीना है तो अच्छे पैसे कमाने ही होंगे..
_ क्योंकि बग़ैर पैसे के समाज तो नहीं जीने देगा.!!
पैसा इतना होना चाहिए कि हम जो काम करना चाहे कर सकें..
_ इसके लिए दिन, रात, महीनों, वर्षों तक न सोचना पड़े..
_ और न अपने आप को उस काम को करने के लिए अनैतिक मार्ग और अनुचित साधन का प्रयोग करने के लिए मजबूर होना पड़े.!!
खरीदारी से पहले सोचें कि वह चीज आपके समय और मेहनत से कमाए गए पैसे की असल कीमत के लायक है या नहीं.!!
धन की महिमा उतनी ही ठीक है, जितने से जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे ; _ उससे अधिक की इच्छा करना और उसके लिए कीमती जीवन को नष्ट करना व्यर्थ है !!
” जीवन यापन के लिए धन अर्जित करना उचित है, पर धन के लिए जीवन अर्पित कर देना पागलपन है “
” पर्याप्त पैसा होने की सबसे बड़ी बात यह है कि आप इसके बारे में सोचना बंद कर सकते हैं.” – Tara Westover
धन हमारी क्षमता को बढ़ाकर हमारे जीवन में एक भूमिका निभाता है ; _ लेकिन बहुत अधिक धन वास्तव में इससे वंचित करता है.
किसी व्यक्ति की महानता इस बात में नहीं है कि वह कितना धन अर्जित करता है, बल्कि उसकी ईमानदारी और अपने आसपास के लोगों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने की उसकी क्षमता में है.”
The greatness of a man is not in how much wealth he acquires, but in his integrity and his ability to affect those around him positively.”
धन हमें अपने पास होने से उतना प्रसन्न नहीं करता जितना अपने नुकसान से हमें पीड़ा देता है.
Riches do not exhilarate us so much with their possession as they torment us with their loss.
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके पास बहुत कुछ है या थोड़ा, धन प्रबंधन के पांच सरल नियम याद रखें:
1. नकद राजा है.
2. आपके पास जितना है उससे अधिक खर्च न करें.
3. जब आप अधिक कमाते हैं तो अपने खर्च में वृद्धि न करें.
4. आप पैसे बचाने में कभी गलत नहीं हो सकते.
5. अपना पैसा काम पर लगाएं.
It doesn’t matter If you’ve a lot or a little, remember five simple rules of money management: Cash is king. Don’t spend more than you have. Don’t increase your spending when you make more. You can never go wrong saving money. Put your money to work.
अपने जीवन और कार्य को प्रबंधित करें ताकि पैसा आपका वफादार सेवक बन जाए, न कि आपका अथक स्वामी..!!
Manage your life and work so that money becomes your faithful servant, not your relentless master.
अधिकतर झगडे पैसों को लेकर होते हैं. बेहतर होगा कि अपने खर्च, बचत, निवेश की योजना पहले से ही बना लें और फिजूल के खर्चों से बचें.
यदि आप किसी से पैसा उधार लेते हैं तो उसे समय पर अवश्य लौटाएं.
_ जो भी तारीख दो उस तारीख को चाहे किसी से भी पैसे लेकर देने पड़े लेकिन उस तारीख को कभी मत चूकना..!!
पैसे को सफलता से जोड़ना गलत हो सकता है, पर अफ़सोस यह है कि सफलता को आँकने के लिए पैसा ही सब से अच्छा थर्मामीटर है.
धनी और कंगाल के मध्य का अन्तर कितना नगण्य है. एक ही दिन की भूख या एक ही घण्टे की प्यास दोनों को समान बना देती है.
जिनके पास सही में दौलत होती है उन्हें बताने की आवश्यकता नहीं होती..
_ क्योंकि जिनके पास कुछ नहीं होता वही सबसे ज़्यादा हवा में बातें करते हैं.!!
#धन आवश्यक है, _ आजीविका और अच्छा जीवन को जीने के लिए,
_ पर इस से अधिक धन को महत्व देना वाले व्यक्ति के जीवन से प्रेम विदा हो जाता है,
_ क्योंकि धन के लिए जितना कठोर होना होता है , प्रेम इतना कठोर नही हो पाता..!!
इतना पैसा तो होना ही चाहिए कि दुख दूर हो जाए,
_ पर इतना नहीं कि पैसे से ही दुख पास आ जाए.!!
यदि आप कम धन में सुख का अनुभव करना नहीं जानते, _
_ तो अनंत धन राशि भी आप को सुखी नहीं बना सकती.
पैसा सिर्फ जमा करने की चीज नहीं है, यह जीवन को सहज बनाने का साधन है.
_ धन का असली मूल्य तब है, जब वह सुरछित भी हो और शांत भी रखे.
_ कितना रखना है, से ज्यादा जरुरी है “कितना पर्याप्त है”
_ जरुरत से ज्यादा रखा हुआ धन, सुरछा नहीं,,, अक्सर एक नया बोझ बन जाता है
_ बहुत से लोग ये गलती करते हैं : – पहले पैसा कमाते हैं, फिर उसे बचाने की चिंता में जीवन जीना ही भूल जाते हैं.
पैसा सिर्फ एक हद तक ख़ुशियाँ खरीद सकता है, स्टडीज बताती है कि _
_ करीब ४९ लाख प्रति वर्ष इनकम की बाद भी ख़ुशियों में बहुत कम ही इज़ाफ़ा होता है.
ईमानदारी से धन कमाना सर्वश्रेष्ठ नीति है तथा मेहनत से कमाए धन से जो संतोष और ख़ुशी मिलती है _ वह अनैतिक तरीको से कमाई में नहीं मिलती हैं.
“पैसा कमाना महत्वपूर्ण है” लेकिन पैसे को सुरछित रखना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है.
धनार्जन के लिए प्रयतनशील रहना उत्तम है, _
_ किन्तु धन की धुन में ही धधकते हुए धराशायी हो जाना उचित नहीं है.
धन का मोह छोड़ने पर ही मालूम होता है कि उस से भी बड़ी चीज कुछ होती है.
अक्सर, जीवन में सबसे कीमती चीजें वे चीजें होती हैं _ जिन्हें पैसे से नहीं खरीदा जा सकता.
“सही जगह रखा पैसा ही कमाई करता है,
_ सिर्फ जमा किया पैसा नहीं”
पैसा डेटॉल [Dettol] की तरह है..
_क्योंकि यह 99.9% समस्याओं [Problem] को ख़त्म कर देता है.!!
कम पूंजी के बढ़ने की गति बहुत धीमी होती है..
_ इसलिए उसे बचाए रखने के लिए अपने खर्च पर निर्मम नियंत्रण रखना जरूरी है.
जैसे धुन बदलने पर लोगों का नृत्य बदल जाता है,
_ वैसे ही धन के आगमन पर लोगों का पूरा दृश्य बदल जाता है ..
पैसा वो माध्यम है जो समस्या को खत्म तो नहीं करता..
_लेकिन इतनी सुविधा देता है कि समस्या ‘महसूस’ नहीं होती.!!
जिन्दगी में जीवन से बड़ा पैसे को मत समझ लेना _
_ वरना जिंदगी बड़ी ही बेकार सी लगने लगेगी.
खुश रहना एवं खुशहाल रहना दोनों ही आप पर निर्भर करता है. पैसा एक साधन मात्र है.
_ जीवन को योजनाबद्ध तरीके से जीया जाए तो आप कम में भी खुश रह सकते हैं.!!
आप ने पैसे कितने कमाए, इस बात की कोई अहमियत नहीं होगी,
_ “कैसे कमाए, इस बात की हमेशा अहमियत रहेगी.”
अमीरी के बाद, जो मान- सम्मान मिलता है, वह अमीर का सम्मान नहीं, _
_ अमीरी का सम्मान है.
एक प्रश्न आदमी को खुद से जरूर पूछ लेना चाहिए “जो सिर्फ पैसों की वजह से आपको इज्जत दें, मान सम्मान दें, अपना मानें, आपकी बात सुनें, क्या वो सच में आपके अपने हैं ?”
अपने आसपास आपको जितने भी उपद्रव होते दिखेंगे,
_ उसकी जड़ में कहीं ना कहीं पैसें या सम्मान पाने का लालच ही नजर आएगा,
_ व्यक्ति को पैसा और सम्मान जितना मिले उतना कम लगता है, इसलिए आखिरी सांस तक व्यक्ति के जीवन में उपद्रव चलते रहते हैं.
अगर आप जितना पाते हो, उस से कम खर्च करना जानते हो, तो आपके पास पारस पत्थर है.
यदि आप अपनी मेहनत से कमाए गए पैसे की कद्र नहीं करेंगे तो..
..कोई भी आपके पैसे की कद्र नहीं करेगा..!!
पैसा आपको ख़ुशी के अतिरिक्त, सब कुछ दे सकता है. _
_ उस में आपको सुखों में भी दुःखी बनाने की शक्ति है.
किसी के धन- ऐश्वर्य से उसके सुखी होने की परिकल्पना न कीजिये, वह अपने हिस्से के जाल में घिरा है.
_ उसका ऐश्वर्य एक सुसज्जित प्रयोगशाला (lab) की तरह है, जहाँ उसे अपने हिस्से के सबक़ सीखने के लिए भेजा गया है.
“ ऐसा मत सोचो कि पैसा सब कुछ करता है _
_ वरना आप पैसे के लिए सब कुछ करने लग जाओगे ”
अपनी आर्थिक स्थिति को गंभीरता से लो,
_ पैसा कई चुनौतियों का बचाव है और इससे कई समस्याएं हल हो सकती हैँ.
पैसे के बिना आपकी बातें अनसुनी हो जाती हैं और पैसे के साथ आपकी खामोशी भी काबिलियत बन जाती है.!!
पैसे की कीमत को मैंने इतना ही जाना है, _ अमीर चाहे जितना हो जाओ, दाल – रोटी ही खाना है..
पैसा एक कीमती वस्तु है; आपके पास है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप इसे बर्बाद कर दें.
पैसा खुशी नहीं देता पर आपके दुःखों को कम जरूर कर देता है.
धन, जीवन, स्त्री और भोजन के विषय में, सब प्राणी अतृप्त हो कर गए, जाते हैं और जाएंगे.
हराम की दौलत आराम दे सकती है, लेकिन सुकून नहीं !
पैसा हमारे व्यक्तित्व में तभी सही चमक पैदा कर सकता है, जब हमारे मानवीय गुण बने रहें.
हमें प्रतिस्पर्धा में तो नहीं जीना, पर साथ ही आवश्यक धन का अभाव भी हमारे पास नहीं रहना चाहिए.
धन का सही इस्तेमाल समझदार ही करता है, और लोग उससे ईर्ष्या करते हैं कि वो संतुष्ट कैसे है.
पैसे के लिए काम करना और पैसों को काम पर लगाना ; इन दोनों में फर्क है.
ईमानदारी से कमाया हुआ पैसा बरकत भी देता है और सुकून भी.!!
ये दबदबा, ये दौलतें सब किरायेदार हैं, घर बदलते रहते हैं.!
छोटी धनराशि ऋणी बनाती है और बड़ी धनराशि शत्रु.
पैसा आपका सेवक है, यदि आप उसका उपयोग जानते हैं, तो आप उसके स्वामी हैं.
पैसा हमारा सेवक ही बना रहे, न कि यह हमारा स्वामी बन बैठे.
ऐसा मत सोचो कि पैसा सब कुछ करता है वरना आप पैसे के लिए सब कुछ करने लग जाओगे.
पैसा जरूरी हो सकता है, लेकिन इतना भी जरूरी नहीं कि वो हमें इंसान से कुछ और बना दे.
जीवन में धन कमाना जरुरी है.. ताकि ये दुनियावी सिस्टम अपने स्वरूप में चलता रहे.!!
धन के मद में मतवाला मनुष्य, गिरे बिना होश में नहीं आता !!
कई बार लोगों के पास पैसा तो आ जाता है पर गंभीरता नहीं आती व्यवहार में..
_ कहते हैं न, जिस पेड़ पर जितने ज्यादा फल, वो उतना ही ज्यादा झुका रहता है.!!
जीवन में खुश रहने में पैसे का बहुत बड़ा योगदान है, इसलिए पैसे का सम्मान करें, पर इस तरह से कि यह आप की चिन्ताएं दूर करे न कि चिन्ता का कारण बने.
धन हमारी आवश्यकताओं और इच्छाओं को पूरा करे, हमारी प्रतिभा को निखारे, हमारी छमता को बढ़ाए, तो इसके लिए बेहद जरुरी है कि हम पैसे का सम्मान करें.
हमारी शिछा में कमी ये नहीं है कि पैसा खर्च करना नहीं सिखाया गया.
_ बल्कि कमी यह है कि पैसा बनाने के बाद उसका किस तरह इस्तेमाल किया जाए और उसे किस तरह संभाला जाए, इसे पैसे की समझ कहते हैं.
मेहनत से कमाए धन की फसलें जब बढ़ती हुई नजर आती है तो.. संतोष होता है.
_ मेहनत की कमाई, थोड़ी कम ही क्यों ना हो, वो जीवन में खुशी और शांति देती है,
_ लेकिन गलत तरीके से आई धन की फसलें लहराती तो हैं.. लेकिन कम समय तक..
_ और फिर उसमें उग आए खरपतवार के कांटे आपको चुभने लगते है..
_ और समय के साथ इसका दर्द और भी बदतर हो जाता है..!!
गलत काम से पैसे तो कमाए जा सकते हैं, लेकिन वो पैसे इच्छा पूरी नहीं कर पाते,
क्योंकि इच्छा लगातार बढ़ती चली जाती है की इसके बाद ये ये शौक पूरे करना है.
और ईमानदारी की कमाई, थोड़ी कम ही क्यों ना हो, वो जीवन में खुशी और शांति देती है,
अपना लछ्य अमीर बनना जरूर रखो, लेकिन जल्दी अमीर बनने के चक्कर में गलत रास्ते पर मत जाओ,
वरना आप मानसिक रोगी बन जाओगे.
निश्चल हृदय का कोई मोल नहीं, प्रेम तो ठीक है कर लेंगे __ पर जीवन भर साथ निभाने वाला कोई नहीं,
धन हो तो प्रेम, साथ, यार दोस्त, रिश्तेदार इस संसार का हर संबंध खरीद सकते हो _ हर बेगाना भी आपका अपना हो जाता है…!!!
पैसे का प्रभाव अपने चरम पर पहुंच गया है और हर जगह इसका बोलबाला है.
_ जिसके पास पैसा है.. वह बुद्धिमान और शक्तिशाली है, बाकी दुनिया उनकी नजर में मूर्ख है.
_ ये भी सच है कि पैसा कमाने का ये आसान सा दिखने वाला काम ..हर कोई क्यों नहीं कर पाता ?
_ दरअसल, ‘आसान’ दिखने वाला ये काम ..इतना आसान नहीं है.
पैसा इंसान के चरित्र की असली परीक्षा लेता है,
_ कई बार जो लोग सच्चे और अच्छे लगते हैं, वो पैसे के सामने खुद को बदल लेते हैं,
_ और वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं.. जो पैसा आने के बाद भी अपनी असलियत और इंसानियत नहीं छोड़ते, खैर..!
…पैसा इंसान को नहीं बदलता, वो तो सिर्फ उसकी असली पहचान सामने लाता है…!
पैसों की अन्धी लालसा में जब हम बेईमानी, चोरी और भ्रष्टाचार से पैसा कमाने लगते हैं, तो हम पैसे का घोर निरादर कर रहे होते हैं.
जब हम पैसा धोखा, बेईमानी, शोषण, भ्रष्टाचार या अपराध के द्वारा हासिल करते हैं, तो इसका सीधा- सा अर्थ है कि हम पैसे की अस्मिता और उसकी गरिमा को अपमानित कर रहे हैं — ऎसा पैसा कभी भी सच्ची ख़ुशी नहीं देता.
पैसा कमाने की होड़ ने हमें पागल कर दिया है, अमानवीय बना दिया है.
_ धन कमाना और उसे बढ़ाना- प्रशंसनीय है..
_ लेकिन इसके लिए छल-बल, प्रपंच, बेईमानी, घूसख़ोरी कतई ज़रूरी नहीं है.
_ ये कमाई के वे ‘शार्टकट’ हैं, जिसे केवल आलसी और लालची लोग अपनाते हैं।
_ मेहनत करने वाला अपनी बुद्धि-चातुर्य और परिश्रम से, ईमानदारी से धनोपार्जन करता है और सीना तान कर अपने व्यक्तित्व का विकास करता है.
_ रात को मीठी नींद सोता है, शारीरिक व्याधियों से दूर रहता है और अपनी आगामी पीढ़ियों को प्रकाशपुंज बनकर प्रकाशित करता है.
– द्वारिका प्रसाद अग्रवाल
आपके पास जितना भी धन हो, अगर आपका मन शांत और खुश नहीं है, तो आप जीवन का सच्चा आनंद नहीं ले सकते.
_ पैसा कमाना जरूरी है, लेकिन अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
_ काम और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखें और एक सकारात्मक दृष्टिकोण को अपनाएं.!!
“जिस तरह गंदगी में बना भोजन खाने में स्वादिष्ट होता है, लेकिन शरीर को नुकसान पहुंचाता है,
_ वैसे ही गलत तरीके से कमाया पैसा आपको क्षणिक सुख ज़रूर देता है, लेकिन वो इसी तरह बाहर भी निकलता है.
_ इसलिए पैसे कमाने में ईमान का ध्यान रखें, नहीं तो वो संताप के रूप में सामने आएगा.
“- “पैसा कितना कमाया, इससे अधिक महत्वपूर्ण है कि पैसा कैसे कमाया”
लोग धन जमा करने में समय गंवा देते हैं.
_ जिस समय को वो जी सकते थे, उसे जीने की तैयारी में खर्च कर देते हैं.
_ सोचते हैं कि एक दिन जी लेंगे.
_ जब कागज के ढेरों नोट वो जमा कर लेते हैं और सोचते हैं कि अब जी लेंगे तो समय नहीं बचता, जीने के लिए..
_ सबसे बड़ी करेंसी खत्म हो चुकी होती है.
_ बचता है, बस कागज का टुकड़ा..!!
दुनिया की सारी सुविधाएं पाने और पैसा कमाने की होड़ में हम इंसान मशीन बन गये हैं.
_ मिलना जुलना आपसी सुख दुख सब दूर हो चले हैं..!!
बेईमानों, धोखेबाजों और भ्रष्टाचारियों से धन अपने अपमान का बदला जरूर लेता है, जब ऎसे लोग मुसीबत में घिरते हैं, तो पैसा भी अपना मुँह मोड़ लेता है.
कमाना एक बुद्धिमता हो सकती है, लेकिन उस से बड़ी बुद्धिमता इसमें है कि अपनी कमाई का सदुपयोग करना सीख जाए.
पैसा कमाने की होड़ ने हमें पागल कर दिया है, अमानवीय बना दिया है.
_ धन कमाना और उसे बढ़ाना- प्रशंसनीय है लेकिन इसके लिए छल-बल, प्रपंच, बेईमानी कतई ज़रूरी नहीं है.
_ ये कमाई के वे ‘शार्टकट’ हैं जिसे केवल आलसी और लालची लोग अपनाते हैं.
छोटे-छोटे लोभ, बङे लाभों से वंचित करते हैं, लेकिन लोग फिर भी समझते नहीं हैं, और शोर्ट कट रास्ता चुनते हैँ !!
मेहनत करने वाला अपनी बुद्धि-चातुर्य और परिश्रम से, ईमानदारी से धनोपार्जन करता है और सीना तान कर अपने व्यक्तित्व का विकास करता है.
_रात को मीठी नींद सोता है, शारीरिक व्याधियों से दूर रहता है और अपनी आगामी पीढ़ियों को प्रकाशपुंज बनकर प्रकाशित करता है.
मनुष्य धन के अभाव से उतना कष्ट नहीं पाता, जितना वह अपनी फ़ुजूलखर्ची के कारण पाता है.
मजाक और पैसा सोच समझकर उड़ाओ..
_क्योंकि असली बुद्धिमान वो है.. जो जरूरत पड़ने पर खुद को भी थोड़ा नासमझ दिखा सके.!!
जिस पैसे में अपने पसीने की महक न हो, वह पैसा सुख के सारे साधन तो दे सकता है, परन्तु मन की शान्ति नहीं.
यदि धन को आप पहचानते हैं तो वह आप का दास है, यदि नहीं पहचानते तो आप उस के दास हैं.
जिस व्यक्ति की यह राय हो की पैसा सब कुछ कर सकता है,
उस पर ये संदेह किया जा सकता है की वो पैसे के लिए कुछ भी कर सकता है.
पैसा इनसान के लिए जरुरी है लेकिन पैसा सब कुछ नहीं है, जिस के लिए आदमी सारे रिश्तों को आग लगाने के लिए तैयार हो जाए.
पैसों के लिए इतना अंधा भी नहीं होना चाहिए कि वह अपनों को ही नुकसान पहुंचा कर अपने स्वार्थ की पूर्ति करे.
जो इंसान अपनी आमदनी के अनुसार खर्च करता और बचत करता है, अपने आने वाले कल के लिए सोच कर चलता है, वह कभी परेशान नहीं होता.
पैसा हर सवाल का हल नहीं है.. लेकिन आज की दुनिया में यह हर दरवाज़े की चाबी ज़रूर बन चुका है.!!
पैसों को सही ढंग से बचत करना कंजूसी नहीं, _ बल्कि समझदारी कहलाता है…
कमाने में बहुत श्रम लगता है _उसे यूँ जाया जाते देख पीड़ा होती है.
_ पर समझदारी से खर्च करने और कंजूस होने में फर्क होता है..!!
पैसा कमाने के लिए इतना वक़्त खर्च ना करो कि _ पैसा खर्च करने के लिए ज़िन्दगी में वक़्त ही ना मिले !
जो खर्च कर सके, वही धन का वास्तविक मालिक है, _ बाकि तो सभी सम्पति के चौकीदार हैं.
खुद के लिए पैसा कमाना अच्छी बात है, और उससे किसी और का भी भला हो तो बहुत अच्छी बात है.
किसी भी तरह से पैसा प्राप्त करना न पैसे से प्यार है, न यह पैसे का सम्मान है.
पैसा सब कुछ नहीं होता,_ बाकी पैसे से सब कुछ होता है..!!
पैसे होना सुखी होने की नहीं संपन्नता की निशानी है.
धनसंपदा आप को बिना उच्चतर मूल्यों के स्थायी सुख संतोष नहीं दे सकती.
पैसा, शोहरत या स्टेटस सिर्फ हमारी जरुरत है, ख़ुशी का मूलमन्त्र नहीं.
-पैसा कितना कमाओगे इसकी अहमियत नहीं है _बल्कि पैसे कैसे कमाए _यह महत्वपूर्ण होता है.
धन के भी पर होते हैं. कभी- कभी वे स्वयं उड़ते हैं और कभी- कभी अधिक धन लाने के लिए उन्हें उड़ाना पड़ता है.
“उन चीज़ों पर अत्यधिक पैसा खर्च करें जिन्हें आप पसंद करते हैं,
_ और उन चीज़ों पर निर्दयतापूर्वक कटौती करें जिन्हें आप पसंद नहीं करते हैं”
बेशक पैसे से हम कुछ भी ख़रीद सकते है पर पैसे से कई चीज़ें नही ख़रीद सकते
जैसे – माँ-बाप, मन की शांति, बुद्धि, समझ, प्रतिभा.
धन से हम जीवन की सारी सुख सुविधा तो हासिल कर सकते हैं,
पर जीवन में सुकून केवल अच्छे कर्मों से ही आता है.
सत्य से कमाया धन हर प्रकार से सुख देता है और
छल कपट से कमाया हुआ धन दुःख ही दुःख देता है.
आप कितना कमाते हैँ और आप के पास कितना धन है,
_ यह बातें किसी को भी सीधे – सीधे ना बताएं..
शराब से ज्यादा नशा धन का होता है,
शराब का नशा तो दो- चार घंटे बाद ही उतर जाता है,
लेकिन धन का नशा तो
जिंदगी बरबाद करने के बाद ही उतरता है.
क्या चीज बनायी है “धन”,
लगभग सभी अपने “निधन” तक इकठ्ठा करने में लगे रहते हैं.
हर किसी को लगता है सफ़ल होने के बाद ज़िंदगी आसान होगी…पैसे होंगे और मन पसन्द सब कुछ होगा, _
_ देखो यार, _ ऐसा है यदि तुम्हारा मन शांत नहीं है और तुम परेशान हो…तब जीवन की कोई भी अवस्था रास नहीं आनी…!!!
लोग कहते हैं कि पैसा सिर्फ़ बेईमानी से, धोखाधड़ी से, गरीबों का शोषण करके ही कमाया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है !!
_यह कामचोर और आलसी लोगों की फैलाई हुई भ्रांति है.
_यदि आपमें श्रम करने की ताकत है, दिन-रात काम में जुटे रहने का जज़्बा है, सोच-विधार करने की शक्ति है तो ..आपके पास पैसे को आने से कोई नहीं रोक सकता.
_पैसे के साथ आपके चेहरे पर मेहनत की चमक भी आएगी, सफ़लता का आत्मविश्वास भी झलकेगा.
_मेहनत और लगन के रास्ते पर चलना तो शुरू कीजिए.
धन….
अपनी जरूरतों के लिए धन कमाना, भौतिक साधन एकत्र करना बहुत अच्छी बात है किन्तु धन दौलत जमा करने की भूख होना, लालसा होना, लालच होना उसके लिए अनैतिक कार्य करना, दुसरो का हक़ मारना उचित नहीं है !!! याद रखिये धन की तीन गतियाँ प्रसिद्ध है, पहला उपभोग, दूसरा दान तीसरा स्वतः नष्ट हो जाना !!!
पैसा अकेला एक साधन है; यह एक आदमी को इसका इस्तेमाल करने की अनुमति देता है. अमीर आदमी जहां चाहे जा सकता है, लेकिन शायद खुद को कहीं खुश नहीं करता ; _ वह एक पुस्तकालय खरीद सकता है या पूरी दुनिया की यात्रा कर सकता है, लेकिन शायद न तो पढ़ने का धैर्य है और न ही देखने की बुद्धि…. बटुआ भरा हो सकता है और दिल खाली.
_हो सकता है उसने संसार को पा लिया हो और स्वयं को खो दिया हो; और उसके चारों ओर उसकी सारी दौलत के साथ .. वह किसी भी जीर्ण-शीर्ण खाई की तरह खाली जीवन जी सकता है.
हमारे पैसे का असली मूल्य इसमें नहीं है कि हम अपने लिए क्या खरीद सकते हैं, बल्कि इस बात में निहित है कि हम दूसरों के जीवन में क्या बदलाव ला सकते हैं.
_ भौतिक संपत्ति की तुलना में हमारे पैसे खर्च करने के लिए हमेशा बेहतर चीजें होती हैं.
_ हमारा पैसा केवल उतना ही मूल्यवान है जितना हम इसे खर्च करने के लिए चुनते हैं ; _ जब हम भौतिक सामान चुनते हैं, जैसे बड़ी स्क्रीन वाला टीवी या नया वार्डरोब, तो यही वह मूल्य है जो हमने प्राप्त किया है—क्षणभंगुर मनोरंजन या हमेशा बदलते रहने वाला फैशन.
लेकिन आइए एक अलग दृष्टिकोण पर विचार करें ; __ क्या होगा अगर हम उस पैसे को परिवार की छुट्टी – जैसे साझा अनुभवों पर खर्च करना चुनते हैं ? हमारे धन का मूल्य तब भौतिक से परे होता है.
उसी तर्ज पर, क्या होगा अगर हम उन्हीं संसाधनों को समस्याओं को हल करने और दुनिया में परिवर्तन को प्रभावित करने के लिए निर्देशित करें ?
एक अनाथ बच्चे के लिए एक परिवार या एक गांव को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए ? अचानक, हमारे पैसे का मूल्य कई गुना अधिक हो जाता है !
अगर आप को पैसे बचाने हैं तो बैंक में एक आरडी अकाउंट जरूर खुलवाएं.
ऐसा करने से आप हर महीने कुछ पैसे जरूर बचा सकेंगे और साथ ही, आप को बैंक से ब्याज भी मिलेगा.
यदि रूपया उधार लेने की नौबत आ जाय, तो वायदे के अनुसार उसका ब्याज देते रहिये और उसे उतार कर ही दम लीजिये.
धन उत्तम कर्मों से उत्पन्न होता है, प्रगल्भता [ साहस, योग्यता व दृढ़ निश्चय ] से बढ़ता है, चतुराई से फलताफूलता है और संयम से सुरछित होता है.
सिर्फ इसलिए कि आपके पास पैसा है, बहुत सी नई चीजें ख़रीदना बंद करें, जिनकी आपको जरुरत नहीं है.
पैसे की असल कीमत हमें तभी समझ आती है,
_ जब हमें किसी चीज़ की जरूरत होती है और अगर वही पैसा हमारे पास होते हुए भी हम उसे अपनी ज़रूरत के लिए इस्तेमाल ना कर पाएं, तो वो सिर्फ कागज़ के टुकड़ों जैसा रह जाता है.. शायद रद्दी से भी ज़्यादा बेकार.!!
क्या जीवन में भोजन ही प्रधान है ?
सामाजिक खर्च, दैनिक जीवन हेतु उपयोगी वस्तुएँ, सामाजिक लेन-देन,
आपके रोजाना आने-जाने का खर्च, रोज का ड्रेस-अप,
आगे चलकर कुछ आकस्मिकताओं का वित्तीय प्रबंधन….
इस विषय में क्या सोचा आपने ?
पैसे सिर्फ आपकी लाइफ़ स्टाइल बदलते हैं और
आपकी जरूरतों को पूरा करते हैं.
अपनी खुशी के लिए पूरी तरह से पैसे पर आश्रित ना रहें.
धन न हो तो चिंता मोटी होती है और
धन ज़्यादा हो तो भी चिंता तंदुरुस्त होती है,
इसलिए धन के साथ ध्यान को जोड़ना जरुरी है.
जिनके पास सिर्फ सिक्के थे वो मज़े से भीगते रहे बारिश में ..
.. जिनके जेब में नोट थे वो छत तलाशते रहे ….
खरीद लो साहब पैसों से संसार के सारे ऐशो आराम,
बस हमें इतना बता देना __ सुकून क्या भाव ख़रीदा..
“हम पैसे से वो चीज़ें खरीदते हैं जिनकी हमें ज़रूरत नहीं होती
हमें उन लोगों को प्रभावित करने की ज़रूरत नहीं है जिन्हें हम पसंद नहीं करते”
“We buy things we don’t need with money
we don’t have to impress people we don’t like”
धन का अभाव होने पर मलाल की स्थिति में या धन का भरपूर आनंद लेने के बाद ऊबने की स्थिति में.. यह कहा जाता है कि खुशी पाने के लिए धन की ज़रूरत नहीं है.
एक वक़्त होता है, जब हम कुछ बनना चाहते हैं..
_ किसी को देख के.. उसके रुतबे को या ओहदे को देख के.. टीचर, डॉक्टर, इंजीनियर या फिर पायलट, खैर !…
_ फिर बाद में मुझे पता चला कि पैसेवाला बनना ज्यादा जरूरी है…!!
१. लोगों को यह दिखाने के लिए पैसा खर्च करना कि आपके पास कितना पैसा है, कम पैसे रखने का सबसे तेज़ तरीका है.
2. पैसे का सबसे बड़ा आंतरिक मूल्य– यह आपको अपने समय पर नियंत्रण देने की क्षमता रखता है.
3. मेरे लिए स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि आप काम करना बंद कर देंगे. _ इसका मतलब है कि आप केवल उन लोगों के साथ काम करते हैं जिन्हें आप पसंद करते हैं, जब आप चाहते हैं _तब तक आप चाहते हैं.
४. कम खर्च कर बचत की जा सकती है. यदि आप चाहते हैं तो आप कम खर्च कर सकते हैं.. और आप कम इच्छा करेंगे ;
यदि आप इस बात की कम परवाह करते हैं कि दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं.
पैसा जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज क्यों है ?
पैसा कितना महत्वपूर्ण है, यह आपकी जरूरतों और इच्छाओं पर निर्भर करता है।
सर ढकने के लिए छत, शरीर पर आरामदायक कपड़े, और भूख शांत करने वाला भोजन। इन 3 चीजों के लिए 10,000 भी काफी है ,_
और 10,00,000 भी कम है – जब तक इच्छाएं हैं, तब तक पैसे का जीवन में अतिमहत्वपूर्ण स्थान है.
” कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना “
अगर कोई व्यक्ति दिन रात मेहनत करता है तो लोग कहते हैं,
पैसों के लिए मरा जा रहा है और मेहनत ना करे तो निकम्मा है,
पैसा खर्च करो तो उसे फिजूलखर्ची व दिखावा कहा जाता है
और पैसा खर्च ना करे तो उसे कंजूस व मक्खीचूस कहा जाता है,
अगर आपके पास पैसा बहुत है तो कहेंगे कि दो नम्बर का होगा
और अगर पैसा कम है तो कहेंगे कि थोड़ी सूझबूझ होती तो यह हाल नहीं होता,
और जिंदगी भर मेहनत से जमा किये गये पैसों के बारे में कहा जाता है कि
पैसे का सुख नहीं भोगा, ” तो कमाया ही क्यों था ”
बहुत पैसा है माना, तुम सब कुछ खरीद लोगे,
बताओ जरा मुस्कुराहट की कीमत क्या दोगे,
क्या भाव लगाओगे तुम भावनाओं का,
रिश्तों को निभाने की कीमत क्या दोगे,
माना ख़रीद लोगे तुम जमीं बहुत,
क्या आसमाँ जरा सा भी ख़रीद पाओगे,
पानी भी खरीद सकते हो पैसो से मगर,
क्या प्यास की कीमत लगा पाओगे,
बहुत पैसा है माना मगर,
क्या खुशियाँ खरीद सकते हो,
क्या खरीद सकते हो तुम सुकूँ थोड़ा,
क्या वो बचपन खरीद सकते हो,
बहुत महँगा सा बेड भी खरीद लोगें यूँ तो तुम,
मगर क्या तुम नींद का भाव लगाओगे,
डॉक्टर भी रख लोगे महँगे से महँगा,
मगर स्वस्थ शरीर क्या पुनः पाओगे..
बहुत पैसा है माना मगर क्या खोये हुए दोस्त खरीद सकते हो,
क्या भाव लगाओगे उन यादों का, उन लम्हों का बताओ तो,
क्या वो चौराहें वाली मुलाक़ातें ख़रीद सकते हो ,
बहुत पैसा है माना मगर..
खरीद तो लोगे तुम घर भी बड़ा,
क्या परिवार जुटा पाओगे,
बिन परिवार क्या सिर्फ पैसों से,
घर को घर भी बना पाओगें,
बहुत पैसा है माना मगर, क्या दिन-रातें खरीद सकते हो,
क्या अंतिम क्षण में पैसों से कुछ साँसे खरीद सकते हो..
बहुत पैसा है माना मगर ???
असल में पैसे की इस भागा – दौड़ी में मनुष्य जीवन को जीना भूल गए है, जीवन को धीरे-धीरे पैसे के जैसे ही खर्च किये जा रहे है,
लोगो के पास भाइयों- बहनों तथा उन दोस्तों जिन्होंने हर परेशानी में साथ दिया है उनसे ही बात करने के लिए समय नही है..
अरे क्या करोगें इतना पैसा कमाकर,
एक बार रोज़ शाम को इस झूठी दुनिया से बाहर निकलो और भाइयों – बहनों और उन बिछड़े दोस्तों को कॉल कर बात करना शुरू करो,
देखो जीवन कितना सुन्दरमय उपहार है..
आज की दुनिया में, हम पैसे वाले लोगों की प्रशंसा करते हैं और उनका जश्न मनाते हैं.
पत्रिकाएँ उन्हें रैंक करती हैं, टेलीविज़न नेटवर्क और वेबसाइटें उनकी सफलता का जश्न मनाती हैं; – उनसे जुड़ने के तरीके के बारे में किताबें लिखी गई हैं.
पैसे वाले लोगों के साथ अक्सर हमारी डिनर पार्टियों में अलग तरह से व्यवहार किया जाता है ; _ मुझे ऐसा लगता है कि अधिकांश लोग उनसे जुड़ना चाहते हैं.
वास्तव में, यदि आपको एक कमरे में बैठे लोगों से पूछा जाए, “आपमें से कितने लोग अमीर बनना चाहेंगे ?” लगभग हर हाथ ऊपर उठेगा.
हमारे समाज में ढेर सारा पैसा होना एक उपलब्धि का प्रतीक है, _जिसे हासिल करने की चाहत ज्यादातर लोग रखते हैं.
यहां तक कि छोटी उम्र से ही, _हममें से कई लोगों ने यह कल्पना की थी कि जब हम बड़े होंगे तो हमारे पास ढेर सारा पैसा होगा और यह कितना अद्भुत होगा.
_ और जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, यह कुछ ऐसा है जिसे हासिल करने के लिए हम कड़ी मेहनत करते हैं.
लेकिन आइए एक पल के लिए रुकें और एक नए ढंग से विचार करें: ->
क्या बहुत सारा पैसा होना सचमुच ऐसी चीज़ है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए ?
हम इसका इतना पीछा क्यों कर रहे हैं ? शायद यह गर्व करने की बात नहीं है…
निःसंदेह, यह बात कड़ी मेहनत कर के जो धन अर्जित करता है, उसको कमतर आंकने के लिए नहीं है.!!
_यह सिर्फ एक स्वीकृति है कि इसके अलावा और भी कुछ है, जिसका हमें पीछा करना चाहिए.
हमारे लिए भविष्य के लिए तैयारी करना बुद्धिमानी है, _ लेकिन कोई ऐसा बिंदु भी है _ जिसको आवश्यकता के मुकाबले _अधिक महत्व दिया जाना चाहिए.
मैं कम कमाई के लिए नहीं कह रहा हूं. _प्रत्येक व्यक्ति को उसकी मेहनत का पैसा मिलना चाहिए,
_मैं बस सोच रहा हूं कि हमने जो पैसा कमाया है, उस पर हमें कहां गर्व होना चाहिए.!!
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,
मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार।
सोचो माँग रहे हो जिससे पैसे, उसकी अपनी भी जरूरतें हैं,
पैसे माँग कर क्यूँ बढा रहे हो, किसी और का तुम भार॥
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,
मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार।
हर इन्सान कमाता है यहाँ, खुद को सूकून देने के लिए,
उस पर फिर आ जाते हो तुम, उससे उधार लेने के लिए,
फिर रिश्तो को बना देते हो तुम, पैसे माँग माँग कर,
कभी न चलने वाला यहाँ, इक उजङा हुआ कारोबार॥
सोचो माँग रहे हो जिससे पैसे, उसकी अपनी भी जरूरतें हैं,
पैसे माँग कर क्यूँ बढा रहे हो, किसी और का तुम भार॥
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,
मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार।
दिन रात मेहनत कर कर ईंसान, कुछ पैसे कमा कर लाता है,
इस शख्स से पैसे माँगते हुए, माँगने वाले का कुछ नहीं जाता है,
माँगने वाला तो पा लेता है खुशियाँ, उन पैसों से यहाँ,
और पैसे देने वाला पैसो की, फिर करता रहता है ईंतजार॥
सोचो माँग रहे हो जिससे पैसे, उसकी अपनी भी जरूरतें हैं,
पैसे माँग कर क्यूँ बढा रहे हो, किसी और का तुम भार॥
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,
मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार।
जरा सोचो उधार किसी ने यहाँ, कितनी जरूरतें मार कर दिया होगा,
फिर खुद की जरूरत पङने पर पैसे, आने का ईंतेजार किया होगा,
फिर उधार देने वाला शख्स पैसे, अपने पाने के लिए,
आता रहा आपकी चौखट पर, खाली लौटता रहा हर बार॥
सोचो माँग रहे हो जिससे पैसे, उसकी अपनी भी जरूरतें हैं,
पैसे माँग कर क्यूँ बढा रहे हो, किसी और का तुम भार॥
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,
मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार..
Lekhak MAHESH KUMAR CHALIA.
कमाल के लोग हैं…
_ पैसे लेते हुए आपको सिर्फ अपने जरूरतों का ख्याल रहता है, जब पैसा देना होता है अपनी मजबूरियों का ख्याल रहता है….
_ ये भी सोचा करें कि.. जिनसे हम उधार पैसे लेते हैं..
_ वो अपने जरूरतों को कम कर पैसा देता है..
_ और जब वो अपने पैसे मांगता है तो.. उसे उसकी जरूरत होती है….
— इनमें से ज्यादातर लोग उधार लेकर अपने सारे शौक पूरा करते हैं,
_ ऐसा नहीं होता कि उन्हें खाने के फांके पड़े हैं या पहनने को कपड़े नहीं है या रूम का किराया देना है…
_ आप ऐसा ना करें.. जिससे किसी जरूरतमंद को उधार पैसे देते हुए भी दस बार सोचना पड़ें….
– हेसाम
इंसान के पास जब जरूरत से ज्यादा पैसे आ जाते हैं तो उसे लगता है कि वो दुनियां की हर चीज खरीद सकता है.
_ लहज़े में नर्मी की जगह वो घमंड दिखने लगता है.
_ इस गुरूर में वो रिश्ते नाते सभी को रौंदना शुरू कर देते हैं,
_ लेकिन शायद ये हम भूल जाते हैं कि पैसे जिस तेजी से.. जिस तरीके से आते हैं..
_ उसी तेजी से वो पैसे आने बंद भी हो सकते हैं.
_ पैसे हैं लेकिन जरूरी तो नहीं कि कल हों..
_ लेकिन जो प्यार, इज्जत और अपनापन होता है वो हमेशा ही रहता है,
_ जब पैसे दूर होते हैं तो झूठे रिश्ते भी दूर होते चले जाते हैं और जब पैसे होते हैं तो सच्चे रिश्ते दूर जाते हैं.
_ शायद पैसों का नशा ही ऐसा होता है जो सर चढ़ कर बोलता है.!!
– हेसाम
“क्या पैसा ही सब कुछ है ?”
_ कहना आसान है – “पैसा सब कुछ नहीं होता,”
_ पर हकीकत में यह मानना सबसे कठिन होता.
_ इस समाज में बिना पैसे के कोई पहचान नहीं,
_ जिसके पास धन नहीं, उसकी कोई जुबान नहीं.
_ जिसकी जेब खाली है, उसकी बातें अनसुनी जाती हैं,
_ उसकी पीड़ा, उसकी चीखें भी बेमानी कहलाती हैं.
_ ज़रूरतें ही नहीं छिनती उससे,
_ बल्कि समाज उसे ताने देता है, उपेक्षा की दृष्टि से देखता है.
_ पैसे के बिना— न दवा मिलती है, न राहत,
_ न संतान की मुस्कान, न माता-पिता की चाहत.
_ कई माँ-बाप इलाज न करवा पाने की मजबूरी में
_ चुपचाप दुनिया छोड़ जाते हैं—गरीबी की चादर ओढ़कर.
_ बिना पैसे— न रिश्ते टिकते हैं, न सम्मान,
_ तुम चाहो लाख निभाना,
_ लेकिन वक़्त के साथ साथ, वो सब हो जाते हैं अनजान.
_ कहते हैं—पैसे से प्यार नहीं खरीदा जा सकता,
_ पर प्यार को निभाने के लिए भी जेब भारी होना ज़रूरी लगता.
_ यह दुनिया सपनों को देखती है,
_ पर उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता.
_ जो पैसे के पीछे भागते हैं, उन्हें मत कोसो—
_ वो जानते हैं अभाव का दर्द, वो समझते हैं संघर्ष का अर्थ.
_ वो मुस्कान के पीछे की तकलीफ़ जानते हैं,
_ हर दिन अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते हैं.
_ पैसा सब कुछ नहीं होता—सच है.
_ मगर यही वो ज़मीन है,
_ जिस पर खड़े होते हैं रिश्ते, जिम्मेदारी, सम्मान और सपने.
_ जो कहते हैं—पैसे से सुख नहीं आता,
_ उन्हें समझना होगा—
_ सुख तक पहुँचने की राह भी.. पैसे की सीढ़ी से ही जाती है.
_ इसलिए… पैसे से नफरत नहीं,
_ईमानदारी से कमाने की आदत बनाओ.
_ संवेदनाओं के साथ-साथ सक्षम बनो—
_ क्योंकि ज़िंदगी केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि ज़रूरतों की पूर्ति से चलती है.!!
— Rahul
लोग कहते हैं कि पैसा सिर्फ़ बेईमानी से, धोखाधड़ी से, गरीबों को कुचल कर, गरीबों का शोषण करके ही कमाया जाता है.
_ मैं इस बात से सहमत नहीं.
_ यह कामचोर और आलसी लोगों की फैलाई हुई भ्रांति है.
_ यदि आपमें श्रम करने की ताकत है, दिन-रात काम में जुटे रहने का जज़्बा है, सोच-विचार करने की शक्ति है तो आपके पास पैसे को आने से कोई नहीं रोक सकता.
_ पैसे के साथ आपके चेहरे पर मेहनत की चमक भी आएगी, सफ़लता का आत्मविश्वास भी झलकेगा.
_ मेहनत और लगन के रास्ते पर चलना तो शुरू कीजिए.!!
— Manika Mohini
यदि आपके पास बहुत सारा पैसा है तो आप अच्छा खाना खा सकते हो,
_ अच्छे आलीशान सारी सुख सुविधाओं के साथ अच्छे घर में रह सकते हो,
_ अच्छी कार में चल सकते हो, ट्रेन में फर्स्ट एसी में चल सकते हो, यात्राएँ कर सकते हो, दुनिया घूम सकते हो, मनपसंद किताबें पढ़ सकते हो, बच्चों को अच्छी परवरिश के साथ अच्छी शिक्षा दिला सकते हो, मेडिकल इमरजेंसी में अच्छे से अच्छा इलाज करवा सकते हो,
_ इसके अलावा भी बहुत कुछ है.. जो आप पैसे होने पर कर सकते हो.
_ बिना पैसे के आपका जीवन कीड़े मकोड़े जैसा हो जायेगा, न आप अच्छा खा पाओगे, न अच्छी सुख सुविधा ले पाओगे, यात्रा करने से पहले सौ बार सोचोगे, कोई सम्मान नहीं करेगा, कोई साथ नहीं बैठेगा, मेडिकल इमरजेंसी में सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटोगे और भ्रष्ट सिस्टम के हाथों मारे जाओगे, बच्चों को अच्छी शिक्षा और परवरिश नहीं दे पाओगे और एक दिन कीड़े मकोड़े की तरह यह भ्रष्ट सिस्टम आपको कुचलकर मार देगा.!!
– Mayank Mishra
तुम बिलकुल नहीं कमाओगे तो भी लोग कहेंगे नाकारा है.
_ तुम कम कमाओगे तो भी लोग कहेंगे कि क्या ही कमाता है ?
_ तुम लोगों की उम्मीद से ज़्यादा कमाओगे, आलीशान ज़िन्दगी जिओगे तो ही लोग कहेंगे कि नंबर दो की कमा रहा होगा, हराम का पैसा आ रहा होगा.
_ कहने का तात्पर्य यह है कि तुम कुछ भी कर लो.. मगर लोगों का मुंह बंद नहीं करवा पाओगे,
_ इसलिए सबसे बेहतर है कि अपना जीवन मस्ती के साथ आनंदमय होकर जिओ और इस बात कि बिलकुल भी चिंता मत करो कि कौन क्या सोचेगा और कौन क्या कहेगा ? _ तुम्हारा जन्म लोगों को खुश रखने के लिए नहीं.. बल्कि अपना जीवन खुशहाल बनाने के लिए हुआ है.. तो लोगों की परवाह करना ही छोड़ दो.!!
– Mayank Mishra
धन संचय के लियें सबसे कारगर उपाय हैं की आप धन कमाने के अधिक से अधिक रास्ते बनाये.
_ ऐसा देखा गया हैं एक परिवार जिसकी आय के पाँच या पाँच से अधिक नियमित स्रोत हैं वो अमीर हो जाता हैं.
_ और ये भी याद रखे, आपकी आयु जैसे जैसे बढ़ती जायगी आपके लियें नौकरी करना मुश्किल होता जायेगा तो आप आपने पाँच नियमित स्रोत बनाये रख पाये..
_ इसके लियें ज़रूरी हैं आप 40–45 की आयु तक आपके पास सात स्रोत होने ज़रूरी हैं.
_ आय के स्रोत कैसे बनते हैं, वो बताती हूँ.
1. आपकी नौकरी या व्यपार – सबसे पहले आपको एक नियमित आय का स्रोत बनाना हैं ये नौकरी व्यापार कुछ भी हो सकता हैं.. तो आपका वेतन पहला स्रोत है.
2. आपकी हॉबी को आपके अपनी आय के माध्यम में विकसित करना होगा.
आरम्भ में आय कम भी हैं तो चलेगा लेकिन आय नियमित करने का प्रयास करे और ये ज़रूरी हैं की ये स्रोत आपकी हॉबी हो.
3. इन दोनो के माध्यम से अपने परिवार के लियें एक आपातकाल फ़ण्ड बनाये..
और इस फ़ण्ड पर प्राप्त होने वाला ब्याज आपका तीसरा आय का स्रोत होगा.
4. आपातकाल के प्रावधान के बाद आप अपने तीनो स्रोत से होने वाली आय को निवेश करे और ये निवेश आपका चौथा स्रोत बनेगा.
5. अपने जीवन साथी को रोज़गार से जोड़े, (ये व्यक्तिगत विषय हैं, लेकिन स्वस्थ संवाद करे इस विषय पर)
6. 40–45 आयु तक रेंटल प्रॉपर्टी से आय का स्रोत बनाया जा सकता है.
7. इस आयु तक बच्चें भी बड़े हो जाते हैं, तो जीवन साथी की हॉबी को भी आय के स्रोत की तरह विकसित करे.. और ये होगा आपका सातवाँ स्रोत.
_ आरम्भ में स्रोत से कमाई कितनी होती हैं, इसकी परवाह अधिक ना करके सिर्फ़ सुनिश्चहित करें की कमाई नियमित हो और धीरे धीरे आगे बढ़े.
_ इतना सब आय के साधन बना लियें, तो एक स्रोत समाज को वापिस देने का भी बनाये.
_ समाज में या तो ख़ुद कुछ योगदान दे या उन लोगों को आर्थिक योगदान दे जो समाज में बदलाव के लियें काम कर रहे है.
_ अमीर होने का ये आख़री और ज़रूरी पड़ाव है.
– Neha Chandra
हमने बचपन से एक वाक्य बार-बार सुना है पैसा कुछ नहीं होता,
_ लेकिन ज़रा ईमानदारी से पूछिए, क्या यह वाक्य आज की दुनिया में सच है ?
_ अगर पैसा सच में कुछ नहीं होता, तो इंसान की पूरी ज़िंदगी उसी के पीछे क्यों भाग रही होती ?
_ आज अगर हम अपने आस-पड़ोस, अपने रिश्तों और अपने समाज को ध्यान से देखें, तो एक कड़वा सच साफ दिखाई देता है..- जहाँ पैसा है, वहीं खुशी का अभिनय है ; और जहाँ पैसा नहीं है, वहाँ मजबूरी का शोर है.
_ पैसा सिर्फ ज़रूरत नहीं रह गया है, वह अब पहचान, रुतबा और अधिकार बन चुका है..
_ जिसके पास पैसा है, उसके आगे-पीछे लोग घूमते हैं.
_ उसकी बात सुनी जाती है, उसकी गलती भी नज़रअंदाज़ कर दी जाती है.
_ वह समाज में सम्मान पाता है, परिवार में निर्णय लेता है, और रिश्तों में शर्ते रखता है
यानी पैसा अब केवल साधन नहीं, सत्ता है.
_ आज के रिश्तों को ही देख लीजिए..
_ गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड का रिश्ता हो या पति-पत्नी का भावनाओं की जगह अब लेन-देन ने ले ली है.
_ जो ज़्यादा खर्च करता है, वही ज़्यादा प्यार करने वाला कहलाता है.
_ महंगे गिफ्ट, महंगे होटल, महंगी लाइफ, यही आज के प्रेम के प्रमाण बन चुके हैं.
_ और सच तो यह है कि जब एक व्यक्ति दूसरे पर जरूरत से ज़्यादा पैसा खर्च करता है
तो रिश्ता बराबरी का नहीं रहता..
_ वह धीरे-धीरे आश्रित और कभी-कभी गुलाम बन जाता है.
_ क्योंकि आज खुशी का मतलब आज़ादी नहीं, सुविधा है,
और सुविधा बिना पैसे के संभव नहीं.
_ लोग कहते हैं प्यार चाहिए, पैसा नहीं..
_ लेकिन सवाल यह है कि बिना पैसे के प्यार कब तक जिंदा रहता है ?
_ भूख, इलाज, शिक्षा, घर, सम्मान इन सबके सामने प्रेम अक्सर हार मान लेता है.
_ इसलिए आज का यथार्थ यही है कि प्यार भी तभी सांस ले पाता है जब उसके पीछे पैसा खड़ा हो.
_ आज की दुनिया में रिश्ते खुद-ब-खुद नहीं बनते, उन्हें बनाए रखने के लिए साधन चाहिए और वह साधन है पैसा.
_ दोस्ती भी वहीं टिकती है.. जहाँ जेब बराबर हो.
_ गरीब की दोस्ती सलाह बन जाती है और अमीर की दोस्ती संपर्क.
_ परिवार में भी वही सदस्य महत्वपूर्ण माना जाता है जो आर्थिक रूप से मजबूत हो.
_ जिसके पास पैसा नहीं.. उसकी राय भावनात्मक कहकर टाल दी जाती है.
_ आज आप यह लेख पढ़ पा रहे हैं, क्योंकि आपके मोबाइल में रिचार्ज है, बिजली है, इंटरनेट है, सिस्टम है.
_ इन सबके पीछे भी पैसा ही खड़ा है.
_ यानी सच यह है कि हम पैसे की वजह से ही दुनिया को देख समझ और महसूस कर पा रहे हैं.
_ यह कहना गलत नहीं होगा कि.. आज पैसा सबसे बड़ा रिश्ता बन चुका है.
_ पिता से बड़ा, मित्र से बड़ा, प्रेम से बड़ा..
_ क्योंकि वही तय करता है कि आपकी आवाज़ कितनी दूर तक सुनी जाएगी.
_ यह लेख पैसे की पूजा नहीं करता.. लेकिन इस झूठे आदर्शवाद को जरूर तोड़ता है
कि पैसा कुछ नहीं होता.
_ पैसा सब कुछ नहीं है.. लेकिन पैसे के बिना आज लगभग कुछ भी नहीं है.
_ यही आज की दुनिया का सबसे कड़वा, सबसे सच्चा और सबसे अनकहा सच है.!!
– लेखक की दुनिया
पैसे की ताकत से अभिभूत हूं, हालांकि ये कुछ नहीं करता है, करता आदमी ही है, पैसा को बनाया भी आदमी ने ही है, पर फिर भी ये आदमी की दुनिया में अद्भुत शक्ति बनकर उभरा है.
_ पैसा विरोधी मानसिकता भी मूर्ख होने का सबूत है, बिल्कुल पैसे की दीवानगी की तरह ही.
_ किसी भी दूसरे महत्वपूर्ण आविष्कार की तरह पैसा भी अपना सही उपयोग चाहता है.
_ अच्छी मात्रा में पैसा हो तो आदमी कितना आश्वस्त रहता है कि किसी भी सिचुएशन से डील किया जा सकता है.
_ पैसा न हो तो आदमी लगातार आशंकित रहता है.
_ पैसे का अभाव आदमी को सिकोड़ देता है.
_ पैसे को सबकुछ मानना और पैसे को गाली देना दोनों ही दो अतियां है.
_ पैसे का सच कहीं बीच में है.
– Shailendra Sudharma
| Nov 14, 2013 | सुविचार

आगे बढ़ने के लिए यह जरुरी है कि हम गलतियों को दोहराएं नहीं. उनसे सबक लें
और खुद से वादा करें कि यह गलती दोबारा बिल्कुल नहीं होगी.
कनाडा के प्रसिद्ध लेखक रॉबिन शर्मा ने कहा था — “गलती जैसा कुछ होता ही नहीं, सब कुछ एक नई सीख है.”
अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा — “अगर कोई कहता है कि उसने कभी गलती नहीं की, तो इसका मतलब उसने कभी कोई कोशिश ही नहीं की.”
बेंजामिन फ्रैंकलिन कहते हैं — “प्रगति एक सतत प्रक्रिया है — प्रयास और गलतियों का मिश्रण.”
रिचर्ड ब्रानसन के अनुसार, “कोई भी नियमों को पढ़कर चलना नहीं सीखता, चलना सीखने के लिए लड़खड़ाना और गिरना ज़रूरी है.”
‘जो गलत है’ हम उसे अलग कहते, उससे अलग हो जाते तो कोई बात न थी,
_ पर न जाने क्यूं, जो हमसे अलग है, ‘हम उसे भी गलत ठहराने लगे.!!
गलत लोग, गलत परिस्थितियाँ, और इनसे मिला अनुभव, सही निर्णय लेना सिखा ही देता है..!!
अपने द्वारा की गई गलतियों के लिए स्वयं को क्षमा करें ; _ कल की असफलताओं और निराशाओं को जाने दें और नई और नई शुरुआत करें.
” आप कहाँ जा रहे हैं यह कहीं अधिक महत्वपूर्ण है न कि आप कहाँ थे.”
Forgive yourself for the mistakes you’ve made. Let go of the setbacks and disappointments of yesterday and start fresh and new. Where you’re going is much more important than where you’ve been.
आप की ग़लती हो या ना हो आप तुरंत आगेवाले की बात मान जाते हो.
_ और माफ़ी माँगने से भी पीछे नहीं हटते ..तो “ये आप को और भी श्रेष्ठ बना देता है”
गलतियाँ मानव विकास के विस्तार का आधार हैं, गलतियों के बिना हम कभी महसूस नहीं कर पाएंगे कि हम वास्तव में कौन हैं ; _ अगर हमें गलत होने का हुनर नहीं दिया गया होता, तो हम जीवन की अनंत संभावनाओं को कभी महसूस नहीं कर पाते.
हम सही और गलत विकल्पों के बीच चयन करके अपने तरीके से सोचते हैं, और गलत विकल्पों को उतनी ही बार बनाना पड़ता है जितनी बार सही विकल्प. हम जीवन में इस तरह से साथ चलते हैं ;
हम गलतियाँ करने के लिए बने हैं, एक तरह से गलतियाँ करने और असफल होने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं.
हम सीखते हैं, जैसा कि हम कहते हैं, “परीक्षण और त्रुटि” से अपनी गलतियों को सही ठहराने के लिए, हम अपनी और दूसरों की गलतियों को खुले तौर पर स्वीकार क्यों नहीं कर सकते.
_ अगर हम अपनी (अपनी या आपकी ) गलतियों को उसी सम्मान के साथ स्वीकार करना सीख लें, तो शायद हम एक ऐसी दुनिया बना सकते हैं, जहां ज्यादा से ज्यादा लोगों में वह जीने का साहस हो, जो उनका दिल उन्हें बताता है.
Mistakes are at the very base of expansion of human growth, without mistakes we will never realise who we really are. If we were not provided with the knack of being wrong, we could never realise the infinite possibilities of life.
We think our way along by choosing between right and wrong alternatives, and the wrong choices have to be made as frequently as the right ones. We get along in life this way.
We are built to make mistakes, in a way, designed to commit errors and fail.
We learn, as we say, by “trial and error”to justify our mistakes, Why we cannot openly accept ours and others mistakes.
Only if we learn to accept mistakes (mine or yours) with the same reverence, then maybe, we might create a world where more people have the courage to live what their heart tells them to.
‘गलत’ गलत होता है.
_ कोई भले न रोके, न टोके ..लेकिन आत्मा का लालन-पालन ऐसा होना चाहिए कि ..वही आपको रोक ले.
सामने से आकर यदि कोई हमसे पूछे, तभी हमें उसे उसकी गलतियाँ बतानी चाहिए;
_ उन्हें उनकी गलतियाँ बताने से बेहतर है कि.. हम शांत और चुप रहें,
_ क्योंकि आजकल लगभग हर व्यक्ति अपने अहंकार भाव से संचालित हो रहा है.
_ अगर आप किसी का भला करेंगे, तो भी आपको ही दोषी ठहराया जाएगा.!!
लोगों को बार-बार बताना छोड़ दीजिए कि वो ग़लत क्या कर रहे हैं..
_ शांत रहकर अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ जाओ.. इससे बेहतर उन लोगों के लिए दूसरा कोई जवाब नहीं.!!
गलतियाँ करते-करते इतने गलत हो गए हैं कि ..हम किसी भी चीज़ को सही नहीं मानते..
_ और जो सही कर रहे हैं उनमें भी गलतियाँ निकालने लगते हैं.!!
मन का ना होना बुरा नहीं लगता..
_ ‘जो सही है’ उसके साथ गलत होना बुरा लगता है.!!
इस दुनिया में कौन है जो अपनी गलती सहजता से स्वीकार करता है ?
_ आदमी अपनी गलती के बचाव के लिए तर्क तलाश लेता है.
यदि कोई आपकी गलती को सुधारता है..तब भी आपको बुरा लगता है तो..
_ आपको अपने स्वभाव में परिवर्तन लाने की जरुरत है.!!
गलती किसी से भी हो सकती है, लेकिन किसी को धोखा देना और उससे झूठ बोलना.. गलती नहीं मर्जी होती है.!!
अब अपने साथ ग़लतियों का बोझ लेकर घूमना छोड़ दीजिए, _ गुज़रे हुए वक्त की गलतियों के लिए बार-बार अफसोस करना बंद कीजिए, _
_ जिसके लिए आपको अभी भी अफ़सोस है, शायद पहले आप इतना अनुभवी और परिपक्व नहीं थे.
हर बार बात सही गलत की नही होती..
_ कई बार ऐसा होता है कि हम किसी ऐसी बात पर असहमत हो रहे होते हैं, जिसको समझने के लिए हम उस समय योग्य नही होते.!!
आपके साथ ग़लत करने वालों से बदला लेने की बजाय..
_ आपको उन्हें उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए,
_ क्योंकि ऐसे लोग अंत में ख़ुद को ख़ुद से ही तबाह कर लेते हैं.!!
उन लोगों से सदैव दूरी बना कर रखें.. जो कभी ख़ुद की गलती नहीं मानते..
_ और हर गलती का दोष आपके माथे मढ़ देते है.!!
गलत करना नहीं और गलत सहना नहीं, मैं तो वही करते आया हूँ.
_हाँ गलत का साथ देना भी गलत करने के बराबर ही है.!!
बहुत से लोग गलत चीज़ चुनते हैं, हमें उन्हें सही चीज़ चुनने में मदद करनी चाहिए.!!
इंसान हैं तो गलतियां लाज़िमी हैं.
_ अपनी गलतियों से सीखना चाहिए.
_ इंसान सोच समझ के सही ही फैसला लेता है ..अब वो आगे जाकर गलत निकल जाए तो उसके लिए ख़ुद को कोसना सही नहीं है.
_ ज़िंदगी सुकून से बीते उसके लिए ज़रूरी है ..दूसरों से माफी मांगने के साथ ख़ुद को माफ़ करना सीखना.
_ इंसान सब करता है ..लेकिन खुद को माफ़ नहीं करता.
अ-कृतज्ञ [ungrateful] व्यक्ति अपने घमंड तले दबकर मर जाएगा और पूरे जीवन भर कुछ भी उल्लेखनीय नहीं कर पाएगा…
कृतज्ञ [grateful] होना, विनम्र होना, धन्यवाद देना और गलती की माफ़ी मांगना मनुष्य होने की पहली शर्त है,
_ जो इनसे हीन है वह अभागा है जो मनुष्य होते हुए भी मनुष्यता से परे है..
हर व्यक्ति में सही और गलत की समझ होनी चाहिए और सही का समर्थन करने की क्षमता भी होनी चाहिए.!!
” हमेशा याद रखें कि _ इस तरह से बोलना असंभव है कि आपको गलत न समझा जाए : हमेशा कुछ ऐसे होंगे जो _ आप को गलत समझेंगे ही “
कई बार किसी को बार – बार समझाने से अच्छा, उसे उसकी गलतियों के साथ अकेला छोड़ देना होता है..!!
जब लोग आपको गलत बोलते हैं तब परेशान होने की जरूरत नहीं ;
_ वास्तव में आप परेशान तो तब हो, _ जब लोग आपको देख ही न रहे हों ;
क्योंकि आज नही कल आप गलतियां तो सुधार ही लेंगे..!!
इंसान में गलत साबित होने से बचने की प्रबल इच्छा होती है.
कुछ समय के लिए, उनका पूरा अस्तित्व स्वयं को सही साबित करने और आत्म-संतुष्टि के इर्द-गिर्द घूमता है.!!
लोग आपमें सिर्फ खामियां और गलतियां ढूंढते हैं, इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिनके साथ आपने कभी अच्छा व्यवहार किया था,
_ लेकिन जब मौका निकल जाता है तो वे भी आपकी अच्छाइयों को भूल जाते हैं.!!
उन लोगों से दूरी बनाए रखें, जो कभी स्वीकार नहीं करते कि वे गलत हैं ; और
हमेशा आप को यह महसूस कराने की कोशिश करते हैं कि यह सब आप की गलती है.
उन गलतियों की कोई माफ़ी नहीं होती, जहां आप जानते हैं,
_ क्या सही है ; क्या गलत है ; लेकिन जान- बूझकर गलत का चुनाव करे.
समझदार इनसान तो वही है, जो दूसरों की गलती से भी सबक ले ले.
जरुरी नहीं कि सुधार के लिए खुद ही गलतियां की जाएं.
बहुत सी बातों की, हमें लगता है, कोई वजह नहीं है लेकिन फिर भी वे ‘बेवजह’ नहीं होतीं.
_ उनके होने की वजह उनके सही या गलत हो चुकने के बाद समझ आती है.!!
गलत, गलत होता है और सही, सही होता है.
_ गलत को सही साबित करने के लिए कोई दलील नहीं दी जा सकती.!!
इस बात से मत डरिए कि लोग आपकी पीठ पीछे आपके बारे में क्या कहते हैं,
_ क्योंकि ये वही लोग हैं जो अपनी कमियों को सुधारने की बजाय दूसरों में गलतियाँ निकालने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं.
हक़ पर रहना सीखा है, सीखा है कि गलत हर हाल में गलत होता है,
_ सीखा है कि सही बोलने से कभी न हिचको.
जब किसी को अपने किए कामों को सही साबित करने का कोई सही तरीका/तर्क नहीं मिलता..
_ तो ऐसे लोग गलत तरीकों पर उतर आते हैं.
कोई गलत को गलत कह दे तो भी हजम नहीं होता है लोगों से..
_ गलत को गलत क्या “खाक” मानेंगे ?
_शायद हमें पहले सही-गलत को समझने और मानने की आदत डालनी होगी.
अपनी गलती मानना अच्छी बात है. लेकिन उतना ही जरुरी है खुद को जल्दी से माफ़ कर देना.
गलती से सीख ले कर उसे भूल जाना सही है.
सही और गलत की असली परीक्षा आपके मन के भीतर होती है.
_ आप मन में खूब जानते हैं कि आप जो कर रहे हैं वो सही है या गलत ?
_आज आप किसी के आदेश पर गलत कर रहे हैं तो _मन की आवाज़ एक बार ज़रूर सुनें..
किसी के साथ भी ना होना,
_ किसी ग़लत इंसान के साथ होने से तो बेहतर ही होता है.!!
यदि आप सोचते हैं कि आपने कुछ गलत किया है, तब अपने आप को दोष न दें !
_ जीवन में प्रत्येक अनुभव एक सीढ़ी है, उन ‘गलतियों’ सहित, जिन्हें आपने कभी किया था.
_ अपने को प्रत्येक गलती के लिए प्यार करें, वे आप के लिए बहुत बहुमूल्य रहीं हैं.
_ उन्होंने आप को बहुत सी बातें सिखाई हैं.
_ अपने आप को दोषी ठहराना बंद करें.
_ इसी प्रकार से आप सीखते हैं.
_ अपने आप को सिखने और आगे बढ़ने के लिए प्रेम करें.
कुछ गलतियों की माफियां शब्दों में तो मिल जाती हैं, पर अंतर्मन नहीं दे पाता !!
_ फिर सौंप दिया जाता है उसको, प्रकृति और रब के हवाले !!
_ क्योंकि जब इंसान खामोश हो जाता है, फैसले ऊपर से होते हैं.!!
शायद ही हममें से कोई हो, जिसने अपनी जिंदगी में गलतियां न की हों, मैंने भी की हैं, _लोगों का दिल दुखाया है, उन्हें कष्ट पहुंचाया है.
_ पर आज मैं बस इतना जानता हूँ कि विषाद कितना भी गहरा हो, उससे बीता हुआ कल कभी बदल नहीं सकता.
_ आज बस यही किया जा सकता है कि बीते हुए कल की सीख लेकर आगे बेहतर इंसान बनने की कोशिश की जाए.
_ बस यह याद रखते हुए…. कि जो बीत गया, वो जिंदगी का एक छोटा सा किस्सा था – पूरी जिंदगी नहीं.
कभी अगर गलती हुई है, तो पछताओ, सुधारो..
_ दूसरों को नीचा दिखाकर, धोखा देकर कभी आत्मिक शांति नहीं मिलती.
_ किसी का हक मत छीनो, किसी का विश्वास मत तोड़ो..
_ जीवन यही है, एक बार ही मिलता है – इसे सुंदर बनाओ..
_ दूसरों को जिता कर हारो, तुम्हारी वही हार असली जीत होगी.!!!
अपने मन में झाँक कर बताओ,
_ क्या आप सचमुच नहीं जानते ?
_आप कहां सही हैं और कहां गलत..!!
एक छोटी-सी भूल, पूरे दिन की मुस्कान छीन लेती है और मन में एक खामोश-सी बेचैनी छोड़ जाती है.. जो बिना कुछ कहे, हर पल अंदर ही अंदर हलचल करती रहती है.!!
षड्यंत्र करने वाले को देर-सबेर अपनी गलती समझ आती है,
_पर तब तक देर हो जाती है..!!
आपको ‘सही’ बताने वाले तमाम लोग आपके एक ‘ग़लत’ के इन्तिज़ार में बैठे हैं.!!
कुछ लोग इसलिए भी आपको गलत ठहराते रहते हैँ,
_ ताकि खुद गलत होते हुए भी ..उन्हें खुद की नजरों में शर्मिंदगी महसूस ना हो..!!
यदि आप किसी की गलतियों की हद नहीं बताएंगे,
_ तो एक दिन आपको अपनी माफियों पर शर्मिंदा होना होगा..!!
हमारी खूबियों का बखान कोई नहीं करेगा,
_ लेकिन हमारी गलतियों का बही खाता सबके पास है..!!
आजकल लोग गलत काम करने पर माफ़ी नहीं मांगते, बल्कि हम कैसे प्रतिक्रिया करते हैं, इसके लिए वे हमें दोषी ठहराते हैं.
अपनी ग़लतियों को दूसरों पर न थोपें, इस तरह आप खुद के साथ धोखा करते हैं और दूसरों का विश्वास भी खोते हैं.
परिस्थितियां कैसी भी हों, तुरन्त प्रतिक्रिया न दें. आपकी जल्दबाजी, गलत निर्णय करवाती है.
खुद को कुछ समय अकेला छोड़ दें और चिंतन करें.
गलती कौन नहीं करता है. जो व्यक्ति काम करता है, वही गलतियां भी करता है.
इसलिए खुद पर विश्वास बनाये रखें और सतर्क रहें.
समय रहते गलत जगह से निकल जाना हार नहीं बल्कि आशीर्वाद है,
_ जो आपको भविष्य में किसी भी बड़ी तबाही से सुरक्षित रखता है.!!
यदि आप किसी को गलत समझने की इच्छा रखते हैं,
_ तो आप उन्हें गलत समझने के हजारों तरीके ढूंढ लेंगे.!!
अपने बीते हुए कल की गलतियां जानकार उनमें सुधार करें, फिर उस पर कफन ओढ़ा दें;
_ क्योंकि भूतकाल बुरा नहीं है बल्कि वह मर चुका है.
रबर की तरह घिसने वाले लोग दूसरों की गलतियाँ मिटाते-मिटाते..
खुद भी मिट जाते हैं और किसी को याद भी नहीं रहते.!!
दूसरों की गलतियाँ माफ़ करने से कभी पोछे नहीं हटना, यह आपके बड़प्पन की निशानी है
किन्तु अपनी गलतियों को कभी छमा नहीं करना, यह भी बड़प्पन की निशानी है.
इंसान वही होता है जो खुद की गलती माने और सुधारें,_ गलती न मानने वाला इंसान,
_ चाहे हमारा कितना भी करीबी और खास क्याें न हो, _ दिल से दूर चला ही जाता है.
कितने अजीब होते हैं लोग, गलत साबित होने पर माफ़ी नहीं मांगते ;
_ बल्कि आप को गलत साबित करने में अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं !!
खुद को माफ़ करना सीखो, आपकी हर गलती इस बात का सबूत है कि आप ‘कोशिश’ कर रहे हो.!!
हमें अपनी गलतियों की सज़ा भले ही तुरंत न मिले,
परंतु समय के साथ कभी न कभी सज़ा अवश्य मिलती है.
जो शख्श गलती करके उसका अहसास कर लेता है और भविष्य में गलती ना करने का निर्णय कर लेता है,
_ वह जीवन में बुलंदियों को छूता है.
सुधर वही सकता है, जिसे पता है कि वह गलत कहाँ है ;_ यही कारण है की लोग माफ़ी भी मांगते हैं,
गलती न करने के वादे भी करते हैं और फिर भी वही गलतियां दुहराते हैं.
किसी कि कही हुई बातों पर पूरा भरोसा मत करो ; अपनी बुद्धि का भी प्रयोग करो.
क्यूंकि कोई भी व्यक्ति आपको वह कहानी नहीं सुनाएगा, जिसमें वह खुद गलत हो !!
गलत को सही कहने की आदत.._ आपको इतने गहरे गर्त में ले जाएगी कि
_जिसका आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते.
जब हम सही करते हैं तो कोई याद नहीं रखता ;
_ जब हम गलत करते हैं तो कोई नहीं भूलता.!!
ग़लत को ग़लत कहेंगे तो बहुत सारे लोग छूट जायेंगे,
_मतलब छोड़ देंगे आपको..!!
जब आप एक बार तय कर लेंगे कि गलत का साथ नहीं देना है,
_ तो उसका मुकाबला नहीं करना होता है, उसे छोड़ देना होता है.!!
कोई व्यक्ति ,,,एक बार गलती करे तो – कोई बात नहीं !!
दो बार गलती करे तो – होता है, इंसान है !!
तीसरी बार गलती करे तो – इनसे दूर ही रहना !!
क्योंकि ये उसकी गलती नहीं आदत है !
अगर तुम्हे किसी की कोई बात गलत लगती है तो तुरन्त प्रतिक्रिया दो _
_ क्योंकि उस समय का मौन बाद का पछतावा या कुण्ठा बनता है..
भूल जाना भी ग़र कोई हुनर होता …
_ ख़ुदा क़सम उससे हुनरमंद दुनिया में कोई होता ही नहीं !
गलत जानकारी को मन में बिठा कर जीवन जीना गलत है..
_जीवन में सच अवश्य जानना चाहिए..!!
आप अपनी गलतियों को सुधारने के लिए कितनी मेहनत करते हैं,
_इससे आपके बारे में पता चलता है.
किसी सही व्यक्ति को बार-बार आजमाने की गलती मत करना,
_क्योंकि हर बार हार आपकी ही होगी..!!
बात सही गलत की नही होती..
_ कई बार ऐसा होता है, कि हम किसी ऐसी बात पर असहमत हो रहे होते है.
_ जिनको समझने के हम उस वक्त योग्य नही होते…!
कई बार हम सही होते हैं.. फिर भी समय के गलत फेर की वजह से गलत साबित हो जाते हैं.!
जब कोई गलत को पनपने देता है तो..वो भी उसकी चपेट में आएगा ही..!!
सब कुछ जानते हुए भी _ अगर आप _ गलत को गलत नहीं कह सकते तो ; आप भी गलत हो..
होते वक़्त गलतियाँ कष्टकारी होती है, लेकिन सालों बाद इन्हीं गलतियों के संग्रह को हम अनुभव कहते हैं !!
” हो जाती हैं गलतियां,” पता चल जाये तो सुधार लेना चाहिए, _ जीवन फिर से सहज़ जीने के लिए..
अगर हमारी स्थिति में कोई कमी हो, तो एक बार अपने मन में झांकना चाहिए कि कहीं…भूल कर कोई भूल तो नहीं हुई न ?
अगर आप किसी का भला चाहते हैँ तो सही को सही, और गलत को गलत, बताने की छमता रखो..!!
यदि आप गलतियां नहीं कर रहे हैं तो इसका मतलब है आप शत- प्रतिशत प्रयास नहीं कर रहे हैं.
आप चाहे जितने भी होशियार हो. आप गलतियाँ करेगे हीं. _ और इससे आप बेहतर हीं बनेंगे.
गलतियां हमेशा छमा की जा सकती हैं, यदि आपके पास उन्हें स्वीकारने का साहस हो.
जो लोग हमेशा अपनी गलतियों पर ध्यान देते हैं, एक दिन वे ही बुद्धिमान कहलाते हैं..
ग़लती करने के बाद ही खुद को सुधारने और अधिक बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है.
गलतियां कीजिए वो तो सबसे होती है,,,,पर कभी किसी के साथ गलत ना कीजिए.
गलतियां करना गलत नहीं है; _ लेकिन किसी के साथ गलत करना; बहुत गलत है..
आप हज़ार गलतियां कीजिये.._ पर ध्यान रहे किसी के साथ गलत मत कीजिये…
कहा गया है कि _ गलतियों से मत घबराइए, गलती वही करेगा जो काम करेगा …
अगर आप अपनी गलतियों से सीख़ लेते हैं तो गलतियाँ आपके लिए सीढ़ी है.
इन्सान अपने को चाहे कितना ही समझदार क्यों न कहे, पर गलतियाँ तो करता ही है.
विवेकशील मनुष्य दूसरों की ग़लतियों से अपनी गलतियाँ सुधारते रहते हैं.
भूल भी ठीक की तरफ ले जाने का मार्ग है ;_ इसलिए भूल करने से डरना नहीं चाहिए.
अपनी ग़लतियों को इसलिए बताएँ ताकि होश सँभालने वाले लोग उन ग़लतियों से कुछ सबक लें.
दूसरों की भूलों से बुद्धिमान लोग अपनी भूलें सुधारते हैं.
होती हैं गलतियां हर एक से मगर, _ कुछ जानते नहीं, कुछ मानते नहीं.
गलतियां सबूत हैं इस बात की, आप ने जीतने की कोशिश ख़ूब की है..
” गलती को स्वीकारना, आदमी को दोबारा गलती करने से रोकता है,”
कुछ तो गलत है हमारे जीने में, नमक कुछ कम हो गया लगता है पसीने में..
सब कुछ ठीक होने से पहले, बहुत कुछ ग़लत भी ज़रूर होता है.!!
ग़लतियों से सीख लें और उसी के अनुसार आगे का रास्ता प्लान करें.
ग़लती होने के डर से अपने कदम आगे नहीं बढ़ाना – समझदारी नहीं.
गलत को गलत और सही को सही कहने वाले लोग..
_ जल्दी किसी को सहन नहीं होते.!!
जो अपनी गलती मानने की बजाय आपको गलत ठहराए ; उससे दूर रहने में ही शांति है.!!
गलत होते देख कर बर्दाश्त नहीं करना, यह एक स्वभाव होता है.
गलती चाहे भूल जाओ, लेकिन उससे मिला सबक़ हमेशा याद रखो..
होती है गलतियां हर एक से, मगर कुछ जानते नहीं कुछ मानते नहीं !!
गलत की हिमायत अज्ञानी या गलत इंसान ही कर सकता है.
जो लोग अपनी गलती खुद नहीं मानते, _ वक़्त मनवा लेता है.
गलतियां होती रहती है, बस इरादे गलत नहीं होने चाहिए..!!
दूसरों को ग़लत कहने से पहले आपका सही होना ज़रूरी है.
गलती करना बुरा नहीं है, _ गलती से सीख ना लेना बुरा है.!
किसी को मत समझो, लेकिन गलत मत समझो..!!
गलत को गलत कह सको, बस इतने सही रहो..!!
स्वीकार की हुई गलती एक विजय है ….!
| Nov 14, 2013 | सुविचार
सफल लोगों के तमाम नुस्खों में से एक नुस्खा है, अपने साथ हमेशा एक डायरी व पेन रखना, तो आप पायेँगे कि हर सफल व्यक्ति ऎसा करता है, यह सही तरीका है.
ये डायरी लिखना न मेरे लिए बहुत शानदार रहता है, _ मैं दिनचर्या में कुछ वक्त निकाल कर कुछ ऐसे चीजों को लिख लेता हूँ, _
_ जो मैं कभी किसी को कह नहीं सकता ; लेकिन मैं यहां लिखकर अपने मस्तिष्क के असीम बोझ को हल्का कर लेता हूँ..!!
विचारों को कागज़ पर आकार दें, क्योंकि आकार मिल जाने के बाद आप उनका अध्ययन कर सकते हैं, उनकी कमियाँ देख सकते हैं और फिर उनमे सुधार कर सकते हैं.
हर चीज सिस्टमेटिक तरीके से करें. अपनी योजनाएँ डायरी में लिखें, मुख्य चीजों की सूची बनाएँ, चेक करें कि कौन- कौन सा काम हो गया है.
एक छोटी डायरी रखें और प्रत्येक जरुरी काम उस में लिख लें, इससे आप कुछ भूलेंगे नहीं और याद रखने का तनाव भी नहीं झेलना पड़ेगा. कार्य पूरे करते जाएँ उसे काटते जाएँ, आप पायेंगे कि आपके सभी काम आसानी से हो रहे हैं.
अपने डेली प्लान को डायरी में नोट करें, डेली प्लानर का सब से बड़ा फायदा यह होता है कि आप किसी भी कार्य के लिए पहले से मानसिक रूप से तैयार होते हैं. सो, सफलता मिलना लगभग तय हो जाता है.
मैं अपने अनुभवों को शब्द देना पसन्द करता हूँ, जिसे साधारण भाषा में डायरी लिखना कह देते हैं. _
_ अक्सर मन की बात जबान तक आते- आते या औरों तक जाते- जाते अपने मायने बदल लेती है._
_ डायरी ही वह दोस्त है, जो हमारी अंतरंग सचाइयों को हूबहू खुद में सम्भाले रखती है.
व्यक्ति को हर रोज दिन पूरा होने पर लिखना चाहिये कि आज उसने क्या-क्या किया? क्या खोया, क्या पाया? आपने अगर कुछ नया किया है, तो उसे डायरी में लिखें.
डायरी लिखने के जो फायदे हैं, वो आपकी जिंदगी बदल सकते हैं. क्योंकि आपकी पर्सनल डायरी आपका आइना बनकर उभरती है. आपने कहां गलती की, कहां समझदारी, कब किसी का दिल दु:खाया, कब किसी को खुश किया, कहां फेल हुए कहां पास और जीवन में आज क्या नया किया, यह सब आप पर्सनल डायरी में लिखते हैं.
डायरी लिखने से इंसान का स्वयं का विकास होता है। इसलिए आप कहीं भी जाइये.. अपने अनुभव आकर जरूर डायरी में लिखिये. फिर जब कुछ दिनों बाद आप उन पन्नों पर पलटेंगे तोआप को ही अच्छा लगेगा और आपके दिमाग में नये विचार आयेंगे. डायरी लिखना एक खूबसूरत आदत है.
डायरी लिखने का सबसे बड़ा फायदा है कि इंसान के पास हर चीज का रिकार्ड मेंटेन रहता है, अपने और अपनों से जुड़ी बातें अगर आप रोज डायरी में लिखेंगे तो आप कभी भी चीजों को भूल नहीं पायेंगे.
दिन भर भाग-दौड़ करने के बाद जब आप रात में डायरी लिखने बैठते हैं तो लिखते-लिखते ही आप को प्यारी सी नींद आ जाती है और आपको किसी भी दवा की जरूरत नहीं, यानी दूसरे दिन आप तरो-ताज़ा महसूस करते हैं.
आजकल भागम भाग भरी लाइफ में इंसान के पास अपनों के लिए वक्त ही नहीं होता है, ऐसे में डायरी की वजह से इंसान को अकेलापन महसूस नहीं होता, उसकी खुद से दोस्ती हो जाती है और वो कभी अवसाद ग्रसित नहीं होता.
डायरी के कारण आप स्वयं का आंकलन कर सकते हैं, आप अपनी क्षमता का ब्यौरा देखकर खुद को सुधारने का मौका दे सकते हैं और आगे बढ़ने के लिये तय कर सकते हैं कि आगे आपको क्या करना है.
अगर आप डायरी लिखते हैं तो आपकी याददाश्त हमेशा मजबूत रहेगी, ना तो आप अपने किसी क्लोज का बर्थेडे भूलेंगे और ना ही एनिवर्सरी.
रोज़ाना अपनी टू डू लिस्ट अपडेट करें यानी दिनभर में आपको जो भी काम करना हो, उसकी लिस्ट बनाएं.
डायरी में लिखीं आपकी भावनाएं आपको सुख-दुख का एहसास कराती हैं और इसी कारण आप मानसिक रूप से मजबूत होते हैं.
डायरी लिखने से इंसान के अंदर एक नियम बद्ध काम करने की आदत पड़ती है जो कि सफलता का मूल मंत्र है.
डायरी लिखने से आप के लेखन में सुधार होता है जो कि आपको भीड़ से अलग करता है, यानी भाषा में आपकी पकड़ मजबूत होती है. अच्छे शब्द भी जहन में आते हैं.
इंसान दिन भर में बहुत कुछ सोचता है लेकिन उन विचारों को गति दे नहीं पाता, अगर आप अपने विचारों को रोज डायरी में लिखेंगे तो आप जरूर अपनी सोच और विचार को आकार दे पायेंगे.
डायरी में आप दूसरे लोगों के अनुभव भी लिखें जिससे कि आपके अंदर दूसरों के अनुभवों से भी सीखने की आदत डेवलप होगी जो कि सफलता का मूल मंत्र हैं.
| Nov 12, 2013 | सुविचार

बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा पुस्तकों से प्रेम करते हैं.
पुस्तक एक बगीचा है, जिसे जेब में रखा जा सकता है.
मैं एक ऐसा व्यक्ति हूँ जिसे दोस्त की नहीं, पुस्तकों की आवश्यकता है…!!!
सर्वश्रेष्ठ किताबें वही बातें बताती हैं _ जो आप पहले से जानते हैं.
जो बहुमूल्य ज्ञान किताबें हमें देती हैं, _ नयी दुनिया के दरवाज़े खोल देती हैं ..
किताबें दुनिया की बेशकीमती दौलत हैं और ये पीढ़ियों और देशों की विरासत संजोए हुए हैं.
जिस व्यक्ति के हाथों में एक अच्छी किताब है, तुम उस से जीत नहीं सकते .. _
_ अगर फ़िर भी जीतना चाहते हो तो _ अपने हाथों में उस से बेहतर किताब रखो ..
हर किसी की जिंदगी में कुछ अच्छी किताबों का होना जरुरी है. किताबें सिर्फ मनोरंजन या परीछाएं पास करने के लिए नहीं होतीं, जिंदगी के रास्ते बनाने के लिए होती हैं. किताबें पढ़ कर ही हम उन बातों को जानते हैं, जो दूसरों ने कहीं हैं, उनमें कई बातें हमारी जिंदगी के लिए बहुत लाभदायक होती हैं.
किताबें उन अनुभवों को समेट कर रखती हैं जो हमारे नहीं हो सकते, सबके अनुभव अलग होते हैं और वक़्त आने पर एक-दूसरे के काम आते हैं, किताबें ज़रूरी हैं ताकि हम अपने अनुभव के आकाश को और बड़ा बना सकें, जीवन को एक नया विस्तार दे सकें, पढ़ना ज़रूरी है..
किताबें हमें मानसिक रूप से सन्तुलित रखती है, इसलिए सभी को किताबों से दोस्ती करनी चाहिए,
क्योंकि यह न सिर्फ हमें कल्पनाशील बनाती हैं बल्कि हमारे ज्ञान में भी वृद्धि करती हैं.
सुबह जागकर कुछ पन्ने अच्छी किताब के पढ़ लेने मात्र से ही जीवन का बदलना शुरू हो सकता है…!!!
यह संसार एक सुन्दर पुस्तक है, परन्तु जो इसे नहीं पढ़ सकता, उस के लिए व्यर्थ है.
अच्छी किताबें हमारी सोच को विकसित करती हैं और ज़िन्दगी को बेहतरी की ओर मोड़ने का माद्दा रखती हैं.
यदि कोई ऐसी पुस्तक है, जिसे आप पढ़ने के अत्यन्त इच्छुक हों, लेकिन वह लिखी नहीं गयी हो,
तो ऐसी पुस्तक को आपको स्वयं ही लिखना होगा.
पुस्तकों से विहीन घर, खिड़की विहीन घर के समान है.
साफसुथरी मनोरंजन वाली किताबें अपने पास अवश्य रखें.
मन में निराशा पैदा होते ही तत्काल चुटकुले की या मनोरंजन वाली किताब पढ़ें.
दुनिया, जहां, प्रेम, परिवार सबसे दिल लगा कर देख लिया _
_ परंतु जो सुकून पुस्तकों के साथ मिला … वह कहीं नहीं मिला …!!!!
जो व्यक्ति अच्छी किताबें नहीं पढ़ता, वह उस व्यक्ति से _
_ किसी मायने में अलग नहीं है, जो कि पढ़ नहीं सकता ..
पुस्तकों में खोए रहने से एक फ़ायदा यह होता है कि फालतू के विचारों एवम फालतू के लोगों से छुटकारा मिल जाता है…!!!
अच्छी पुस्तकों के सम्पर्क में रह कर मनुष्य का मन, ऎसा सुन्दर हो जाता है कि उसकी सुगन्ध हर तरफ फ़ैल जाती है.
किताबें ऐसी शिछक हैं, जो बिना कष्ट दिए, बिना आलोचना किए और बिना परीछा लिए, हमें शिछा देती हैं.
किताबों ने कहा, हमें पढ़ो ; ताकि तुम्हारे भीतर चीज़ों को बदलने की बैचेनी पैदा हो सके..
ज़िन्दगी तो सभी के लिए वही रंगीन किताब है, फर्क सिर्फ इतना है, कोई हर पन्ने को
दिल से पढ़ रहा है और कोई दिल रखने के लिए केवल पन्ने पलट रहा है.
सही किताब वह नहीं है, जिसे हम पढ़ते हैं. सही किताब वह है, जो हमें पढ़ती है,
एक अच्छी पुस्तक एक महान व्यक्ति के जीवन का निचोड़ होती है,
जो दूसरों के लिए बहोत मेहनत से लिखी जाती है.
अच्छी किताब एक जादुई कालीन की तरह है जो आहिस्ते से हमें उस दुनिया की सैर कराती है,
जहाँ दूसरी किसी चीज़ के ज़रिए हम प्रवेश नहीं कर सकते.
पैसे की तरह किताबें भी लगातार चलती रहनी चाहिए… किताब सिर्फ दोस्त नहीं होती, _ ये आपके लिए दोस्त भी बनाती है ;
जब आपके पास मन और आत्मा के साथ एक किताब होती है, तो आप समृद्ध होते हैं ; लेकिन जब आप इसे आगे बढ़ाते हैं तो आप तीन गुना समृद्ध हो जाते हैं.
— किताबें सिर्फ समझदार लोग ही पढ़ सकते हैं ; _ छोटे – मोटे पाठक के तो सिर के ऊपर से गुजर जाएंगी.
किताबें पढ़ना न केवल मस्तिष्क को विचार और उक्त “ज्ञान” प्रदान करता है,
_ बल्कि यह किसी के मस्तिष्क के ऊतकों और तंत्रिकाओं में दबे हुए बुद्धिजीवियों को जगाता है.
किसी को समझना हो तो उसकी शेल्फ में लगी किताबों को देख लेना चाहिए,
_ किसी की आत्मा को समझना हो तो उन किताबों में लगी अंडर लाइन को पढ़ना चाहिए..
कभी – कभी हम अपने बहुत करीबी, लोगों की भावनाओं को समझ नहीं पाते हैं..!
_ क्योंकि आँख के एकदम पास रखकर, किताब को पढ़ना बड़ा कठिन होता है..!
जो लोग किताबों को बहुमूल्य मानते हैं, वे उन्हें किसी दोस्त की तरह समझते हैं,
उनसे तरह- तरह की बातें सीखते हैं.
किताबों से तो अपना गहरा नाता है जनाब, _
_ हर मर्ज़ का मरहम बिना पूछे इससे मिला है ..!!
किताबो की दोस्ती बड़ी ही अच्छी होती है, वो हमसे बातें तो नहीं करती,
लेकिन अनजाने में बहुत कुछ सिखा जाती हैं !!
ज़्यादा लिखा मैंने अगर तो बनकर किताब रह जाऊँगा,
आया नहीं हूँ हाथ अब तक फिर एक बार मैं आ जाऊँगा..
किताबों की अहमियत अपनी जगह है जनाब, _
_ सबको वही याद रहता है, जो वक़्त और लोग सिखाते है ..!!
किताबों से दिल लगाकर रखिए, यकीन मानिए जिन्दगी में ठोकर नहीं खानी पड़ेगी..
दर्पण में नहीं पुस्तकों में खुद को देखिए… जिंदगी की तस्वीर बदल जाएगी…!!!
किताबें भी बिल्कुल मेरी तरह हैं, अल्फ़ाज़ से भरपूर मगर ख़ामोश.
जो किताबें दोस्त नहीं बन पाती वे आपका साथ छोड़ जाती हैं.
दुनियां की सबसे अच्छी किताब हम स्वयं है, खुद को समझ लीजिए ;
सब समस्याओं का समाधान हो जाएगा..
कभी ख़ुद भी निकल घर से _ खपा ना सर किताबों में,
क़िताबों का तजुर्बा तो _ तजुर्बा दूसरों का है..
किताबों के दौर से _ बाहर आ गये हैं _ ज़नाब ;
अब हमें _ ज़िन्दगी पढ़ाती है ,,,,!!
मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें
मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं. — जौन एलिया
जिनके घर किताबों से भरी अलमारियाँ हैं, _ उनसे ज्यादा रईस कोई नहीं—- मैत्रेयी पुष्पा
कारण ; क्यों आपको एक किताब पढ़ने वाला / वाली होना चाहिए..
वे बुद्धिमान होते हैं, जितनी अधिक किताबें पढ़ते हैं , उतना ही वह दुनिया के बारे में जानते हैं. _साथ ही, वह अपने दिमाग को रोजाना एक अच्छी कसरत देते हैं, जो उसे तेज रखने में मदद करता है. निरंतर पढ़ने को शब्दावली और लेखन कौशल में सुधार के लिए भी जाना जाता है. वे अच्छा बोलते हैं, चूँकि पढ़ने से शब्दावली में सुधार होता है.
यह देखा गया है कि जो लोग पढ़ते हैं उनमें मजबूत विश्लेषणात्मक कौशल होते हैं ; इसलिए, कठिन निर्णयों और जीवन योजनाओं के बारे में बात करने के लिए वह एक बेहतरीन व्यक्ति होंगे.
वे जिज्ञासु होते हैं, वे दुनिया और उसमें मौजूद लोगों और चीजों के बारे में उत्सुक हैं. _ जो किताबें पढ़ते हैं उनके पास आमतौर पर विभिन्न विषयों पर पुस्तकों का संग्रह होता है और वे नई चीजें सीखने के लिए उत्सुक रहते हैं.
जैसे-जैसे वह किताबें इकट्ठा करते हैं, वैसे-वैसे वह तथ्यों को भी इकट्ठा करेंगे, उनमें से कई पूरी तरह से यादृच्छिक [ Random ] हैं.
वे कम रखरखाव वाले होते हैं [ low-maintenance ], वे एक कप चाय और एक अच्छी किताब के साथ बिस्तर में दुबकने की आदी हैं, इसलिए वह जानते हैं कि कैसे आराम करना है.
वे एक विशेषज्ञ संवादी [ expert conversationalist ] होते हैं, चूँकि वे किताबों और पत्रिकाओं को पढ़ने से बहुत कुछ जानते हैं, इसलिए उनके पास बात करने के लिए बहुत सारे विषय होंगे _और आप जो कह रहे हैं उससे संबंधित तरीके खोज सकते हैं, _ और जैसा कि वे चुप रहने और जानकारी लेने के आदी हैं, वह शायद एक अच्छा श्रोता भी होंगे.
वे अधिक अंतरंग [ intimate ] होते हैं ; पढ़ना अपने आप में एक अंतरंग [ intimate ] क्रिया है. वे जो किताबें पढ़ते हैं _वे जानते हैं कि कैसे अपना पूरा ध्यान उसके सामने देना है और सभी विकर्षणों को दूर करना है.
“उनके पास एक बड़ी कल्पना होती है” : कहानी को सजीव बनाने के लिए बहुत कल्पनाशक्ति की जरूरत होती है. _ जैसे-जैसे वह पढ़ते हैं, वे लगातार पात्रों, रंगों और परिदृश्यों की कल्पना कर रहे होते हैं.
वे अविश्वसनीय रूप से महत्वाकांक्षी होते हैं [ incredibly ambitious ],: – किसी किताब को लेने और उसे पढ़ने के साथ आगे बढ़ने के लिए थोड़ी महत्वाकांक्षा की जरूरत होती है. _ जब किताब मुश्किल हो जाती है या 200 से अधिक पृष्ठ होते हैं तब भी वह पढ़ने के लिए खुद को आगे बढ़ाते हैं. _ वे सीखना और बढ़ना चाहते हैं, आमतौर पर अपने जीवन के एक से अधिक पहलुओं में..!
वे एक अच्छी किताब के साथ अकेले रहना पसंद करते हैं और पढ़ने के क्षेत्र में परेशान होना पसंद नहीं करते, _ऐसे लोग को दूसरों से चिपकने कि आदत नहीं होगी या आप पर निर्भर नहीं होंगे..!
“वे आसानी से अपना मनोरंजन [ entertained ] करते हैं” _ उनको मनोरंजन [ entertained ] करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा. _ जो पढ़ते हैं वे आसानी से एक अच्छी किताब के साथ एक पेड़ के नीचे बैठकर घंटों बिता सकते हैं. _ आपको उन्हें इम्प्रेस करने के लिए महंगी और लक्ज़री ट्रिप्स पर नहीं ले जाना पड़ेगा.
“वे एक अद्भुत श्रोता होते हैं” [ an amazing listener ], : वे अपनी कहानियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उपयोग की जाती है, जिसके लिए किसी भी तरह की बात करने की आवश्यकता नहीं होती है. _यह उसे एक अच्छा श्रोता बना देगा क्योंकि जब वह अपनी किताबें पढ़ते हैं तो वह बिना किसी प्रतिक्रिया [ without responding ] के जानकारी लेते हैं.
“वे औरों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे” _ पढ़ने के दौरान वे इतने खुश और प्रेरित दिखेंगे कि आप भी ऐसा ही करना चाहेंगे.