सुविचार – विवाह – शादी – 019

h

शादी हमारे दुखों को आधा कर देती है, खुशियों को दोगुना कर देती है और हमारे खर्चों को चौगुना कर देती है.

Marriage halves our griefs, doubles our joys, and quadruples our expenses. – Gilbert K. Chesterton

लोगों का मानना ​​है कि शादी हमें बेहतर बनाएगी.

People believe marriage will make us better. – Oprah Winfrey

विवाह का पूरा आनंद यह है कि यह एक सतत संकट है.

The whole pleasure of marriage is that it is a perpetual crisis.

– Gilbert K. Chesterton

विवाह के बाहर कुछ भी स्वतंत्रता और उत्साह जैसा लगता है, -Jeanette Winterson

Anything outside marriage seems like freedom and excitement. – Jeanette Winterson

विवाह दो खंभों पर टिके हुए मंदिर की तरह है ; _यदि वे एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए तो मंदिर ढह जाएगा.!!

Marriage is like a temple resting on two pillars. If they come too close to each other the temple will collapse. – Khalil Gibran

एक विवाह को सुखी तभी कहा जा सकता है जब दोनों पक्षों में से किसी को भी इससे अधिक खुशी मिलने की उम्मीद न हो.!!

A marriage is likely to be called happy if neither party ever expected to get much happiness out of it. – Bertrand Russell

विवाह में एक ही घर में दिन-रात एक साथ रहने वाले लोगों के बीच थोड़ी सी छूट, थोड़ी स्वतंत्रता अवश्य होनी चाहिए. – VirginiaWoolf

In marriage a little licence, a little independence there must be between people living together day in and day out in the same house. – VirginiaWoolf

सच ये है : समस्या ‘शादी’ नहीं है.

_ ज्यादातर लोग दुखी इसलिए नहीं हैं कि जिम्मेदारियां ज़्यादा हैं..
_ बल्कि इसलिए कि उन्होंने जीने का तरीका गलत सेट कर लिया है.
“घर को बोझ नहीं, सिस्टम बनाओ”
इसे कैसे लागू करें (Simple, actionable):
1. Role clear करो (दिमाग हल्का होगा)
_ हर चीज खुद करने की कोशिश मत करो.
_ तय करो – क्या मेरी जिम्मेदारी है, और क्या नहीं है.
👉 30% चीजें खुद हट जाएंगी.
2. Fixed routine बनाओ (Decision fatigue खत्म)
_ हर दिन नई लड़ाई नहीं चाहिए.
_ सुबह क्या करना है, शाम को कैसे unwind करना है, family time कब है- ये तय करो।.
👉 सिस्टम बनेगा और सेट होगा तो दिमाग खाली रहेगा – हंसी अपने आप आएगी.
3. पैसे, काम, family – सबका limit तय करो.
_ Unlimited expectation = permanent stress
👉 “बस इतना काफी है” – ये line तय करनी पड़ेगी.
4. हफ्ते में 1 दिन ‘No Responsibility Mode’
_ कम से कम 2–3 घंटे- ना काम, ना planning, ना future
👉 ये reset button है – बिना इसके system hang होगा ही.
✦ “जिंदगी मुश्किल नहीं होती,
_ हम उसे बिना सिस्टम के जीते हैं- इसलिए थक जाते हैं.”
🔹 “थकान जिम्मेदारियों से नहीं, बिखरे हुए जीने से आती है…
_ जिंदगी को सिस्टम दे दो, खुशहाली अपने आप लौट आएगी”
🔹 “समस्या शादी नहीं है, समस्या ये है कि हमने जीने का तरीका सेट नहीं किया…
_ जहाँ सिस्टम होता है, वहाँ इंसान नहीं टूटता”
_ “जिंदगी को सिस्टम दे दो… वरना वही जिंदगी आपको थका देगी”
_ “जिस दिन आपने अपनी जिंदगी का सिस्टम बना लिया,
उसी दिन जिम्मेदारियां बोझ नहीं रहेंगी”
विवाह का आनंद, यदि है तो, परिवार और दोस्तों के साथ है.!
_ वैसे मुझे तो कभी विवाह की रस्मों और समारोह में कभी कोई आनंद दिखा नहीं.!!
विवाहित जीवन में अनेक दुःख हैं, किन्तु अविवाहित जीवन में कोई भी सुख नहीं.
विवाह एक ऐसा बंधन है जो दो लोगों को जोड़ता है,

_ लेकिन यह जरूरी नहीं कि सभी के लिए सही हो.!!

विवाह को एक “साझा यात्रा [shared journey] के रूप में देखा जाना चाहिए,
_ न कि एक स्थायी समझौते [permanent agreement] के रूप में.!!
विवाह सरकस के समान है, क्योंकि उस में जितना विज्ञापन दिखाया जाता है, उतना वास्तव में होता नहीं है.
विवाहित जीवन फूलों की सेज नहीं, कांटों का ताज है,

_ सामान्य ताज में हीरे-जवाहरात बाहर जड़े हुए होते हैं _जबकि इसमें काटें अन्दर गुथे रहते हैं.

विवाह एक साझेदारी है और बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, उस बड़ी जिम्मेदारी के साथ बहुत सी छोटी-छोटी जिम्मेदारियां भी जुड़ी हुई हैं, जो आपको चाहते हुए या ना चाहते हुए भी उठानी ही पड़ेंगी, वरना समाज आपका सांस लेना मुश्किल कर देगा.!!
विवाह संस्था इतनी भी बुरी नहीं कि उसे सिरे से नकार दिया जाए.

_ विवाह ज़रूर करो.
_ क्या पता, कोई सच में मन का मिल जाए.
_ यह रिस्क तो लेना ही पड़ेगा.
_ हाँ, न जमे तो उसे दुनियादारी के डर से खींचे मत जाओ.
_ तोड़ो और आगे बढ़ो.
_ यह जीवन, यह दुनिया विवाह के बगैर भी बहुत खूबसूरत है.
विवाह करने के फायदे- निरंतर साथी, बुढ़ापे का साथी, प्रेम और मनोरंजन, गृहस्थी, संगीत और स्त्री हास्य, खूब सारे बच्चे..

_ विवाह करने के नुकसान- झगड़े, घूमने पर पाबंदी, समाज में बंधन, दोस्तों के साथ मनोरंजन घटना, ख़ामख़ाँ के रिश्तेदारों का बढ़ना, किताबों के लिए पैसे घटना, किताब पढ़ने की संभावना घटना, बच्चों के ढेर सारे खर्च और चिंता।
_ अंतिम निर्णय- विवाह कर ही लिया जाए.!!
“जब लोग शादी करते हैं तो उन्हें लगता है कि यह एक लंबे समय का प्रेम संबंध है, तो वे बहुत जल्द इसे खो देंगे, क्योंकि सभी प्रेम संबंधों का अंत निराशा में होता है,

_ लेकिन शादी एक “आध्यात्मिक पहचान” की पहचान है”
“जब आप शादी में त्याग करते हैं, तो आप एक दूसरे के लिए नहीं _ बल्कि एक रिश्ते में एकता के लिए त्याग कर रहे हैं.”
_इसीलिए अच्छी शादियां होती हैं, _लेकिन सुखद शादियां नहीं होतीं.!!
विवाह वह खुबसूरत संयोग है जिसमे व्यक्ति को अपना सबसे बेहतरीन दोस्त मिलता है.
ज़िंदगी भर समझौते का नाम है ‘शादी’..

_पहले बीवी के साथ, बाद में बच्चों के साथ..!!

शादी का अर्थ है अपनी आज़ादी को आधा और जिम्मेदारियों को दुगुनी करना..!!
शादी करके हम संभवतः जीवन की असुविधाओं के साथ_थोड़ी सी खुशियाँ खरीद रहे हैं..!!
शादी एक रिश्ता है, गुनाह नहीं, कि एक बार कर लिया तो ..उम्र भर इसकी सज़ा भुगतनी पड़ेगी..!!
‘सुना है, शादी के बाद ज़िंदगी तो होती है लेकिन ज़िंदादिली नहीं होती’
हर कोई आपकी ज़िंदगी में आने के काबिल नहीं होते..

_ हर रिश्ते का आधार आकर्षण नहीं, बल्कि मूल्य, सम्मान और समझदारी होनी चाहिए.!!

शादी एक शब्द पहेली है, जिसका परिणाम घोषित हो जाने के बाद पहेली भरने वाले को यही लगता है कि काश,

इस शब्द के बदले अमुक शब्द भरा होता.

विवाह खूबसूरत व छोटी- सी एक नाव है, जिस पर चढ़ने के लिए हर व्यक्ति उत्सुक रहता है,

फिर उतरने के लिए बैचेन हो जाता है.

जो इंसान अपनी खुद की जिंदगी ही नहीं संभाल सकता..

_ उसे प्रेम और विवाह करने का कोई हक नहीं.!!

‘विवाह एक रिश्ता है’ उसमें प्यार होने की गारंटी नहीं है.

_ प्यार के विवाह में बदलने की गारंटी नहीं है.!!
विवाह मित्रता का सबसे दृढ बन्धन है, विश्वास मित्रता की नीवं है, आपसी मेल से ही विश्वास पैदा होता है.

विवाह में जो खूबसूरती, धन और दिखावे को महत्व देता है, उसे सच्चा सुख नहीं मिल पाता.

विवाह की सफलता या असफलता पतिपत्नी की आपसी समझ और सामंजस्य पर निर्भर करती है.

_ दो लोगों को विवाह कर के भी दोस्त होना चाहिए.!!

रिश्ता तब सुंदर बनता है.. जब दो लोग मजबूरी नहीं..
_ समझदारी से एक दूसरे का साथ चुनते हैं.!!
शादी _ “दो लोगों के एक साथ आने का उद्देश्य एक-दूसरे को उनके व्यक्तिगत विकास में मदद करना है न कि इसमें बाधा बनना.

_अगर दो बहुत जागरूक लोग एक साथ आते हैं, तो यह एक खूबसूरत चीज़ हो सकती है.”

” विवाह जीवन का एक हिस्सा है, लेकिन सफलता वह आधार है जो पूरे जीवन को संवारता है.

_ पहले खुद को स्थापित करना, फिर जीवनसाथी के साथ एक मजबूत भविष्य बनाना ही समझदारी है.
शादी के सातों वचन अनमोल होते हैं ; _इन वचनों में वो जादू है,

_जो इनका पालन करे तो _कभी इस रिश्ते में चूक हो ही नहीं सकती है.!

विवाह जीवन को एक लय देता है. जैसे बिना साज के आवाज अधूरी है वैसे ही बिन विवाह के जीवन अधूरा.

जीवनसाथी का साथ अकेलेपन को दूर करता है.

शादी एक जीवनभर की यात्रा है, जो आप केवल एक अच्छे साथी के साथ ही निभा सकते हैं.
विवाह सरल और कम खर्चीला होना चाहिए ताकि लोग जीवन के अन्य पहलुओं पर ध्यान दे सकें.!!
विवाह क्या है ?

“विवाह” एक ऐसा गठबंधन है – जिसमें दो व्यक्ति मिलकर उन समस्याओं को सुलझाने का जीवन भर प्रयास करते हैं, जो पहले कभी थी ही नही.!!

“सर्वोत्तम विवाह वह नहीं है, जब एक सर्वगुण संपन्न जोड़ा एक साथ जुड़ता है.

_ यह वह है, जब एक जोड़ा सर्वगुण संपन्न न होते हुए भी _ अपने मतभेदों का आनंद लेना सीख लेता है”

शादी की सफलता का श्रेय दोस्ताना व्यवहार को भी जाता है. आप को अपने साथी के साथ दोस्ताना व्यवहार करना चाहिए,

तभी आप का साथी अपने मन की बात बेझिझक आप से कर पाएगा.

कोई भी व्यक्ति परफैक्ट नहीं होता, पर अपनी मैरिड लाइफ को खूबसूरत बनाने के लिए

अपने लाइफपार्टनर को अपने लिए हमेशा परफैक्ट मानें.

विवाह होता है, प्रेम विवाह जैसा कुछ नहीं होता.!!
विवाह हमारे लिए विकास करने, स्वयं को परिष्कृत करने

और प्रेम करना सीखने की सम्भावना लेकर आता है.

खुद की जीने की वजह जिनके पास होती है, _

_ उन्हें शादी के झमेले की जरूरत क्या है..!!

विवाह एक ऐसा पवित्र बंधन है, जिसमें बढ़ी हुई जिम्मेदारियां भी अच्छी लगती हैं.
शादी से पहले जिन्दगी एक मेला हैं _ शादी के बाद जिन्दगी एक झमेला है !!
जीविका का प्रश्न हल होने के बाद ही विवाह शोभा देता है..!!

मैं जब अपने संघर्ष से जीत जाऊंगा, तो निश्चित हीं विवाह कर लूंगा…
_ क्योंकि मैं नहीं चाहता की मेरे संघर्षों के बोझ तले कोई स्त्री दब कर,
_ अपने ख्वाबों की बलि चढ़ा दे..!!
जब तक आप अपनी वित्तीय स्थिति [financial position] ठीक नहीं कर लेते तब तक शादी न करें.
_ _ क्योंकि वे हमें टूटते हुए दिखाई देते हैं.. जो बहुत जल्दी पति की भूमिका निभाने लगते हैं.!!
शादी मतलब ढेर सारी जिम्मेदारियों का भार लेना, जो लोग बोलते है कब तक अकेले रहोगे ?

_ किसी का साथ जरूरी है..! सब बात ठीक है.. मगर जो इंसान खुद की जिम्मेदारी पूरी नही कर पा रहा..
_ उससे ये उम्मीद करना की वो अपने साथ एक और इंसान के भविष्य को दांव पे लगा दे.. इससे बड़ी बेवकूफी दूसरी नही हो सकती…!
शादी एक बहुत बड़ा आर्थिक निर्णय है, _ जिसे हम सामाजिक और भावनात्मक दबाव के चलते ले लेते हैं.!!
Marriage is a huge financial decision,_ Which we take due to social and emotional pressure.!!
“विवाह एक भरोसा है, समर्पण है “

तारीफ उस स्त्री की जिसने खुद का घर छोड़ दिया..

_ धन्य है वो पुरुष जिसने अनजाने स्त्री को अपना घर सौंप दिया.

शादी सिर्फ खुशियों का उत्सव नहीं, बल्कि जीवनभर का साथ निभाने का वादा होती है.

_ हर रिश्ता शुरुआत में आसान लगता है, लेकिन असली ताकत तब सामने आती है जब मुश्किलें दस्तक देती हैं.
_ अगर रिश्ता भरोसे, प्यार और समझ पर टिका हो, तो कोई भी कठिनाई इसे तोड़ नहीं पाती.
_ उल्टा, मुश्किल हालात में और भी गहरे हो जाते हैं… जो रिश्ता हर तूफान में साथ खड़ा रहता है, वही साथ निभाने की गारंटी देता है.
_ शादी का रिश्ता एक दूसरे की पसंद-नापसंद के साथ एडजस्टमेंट होता है.
_ मगर, इसमें जैसे ही जिद और हठ की इंट्री होती है, तो इसे तबाह होने से कोई नहीं रोक सकता है.!!
हिन्दू विवाह में सात फेरे के साथ लिए जाने वाले सात वचन जीवन को संतुलित और अर्थपूर्ण बनाने का संकल्प होते हैं.

सात फेरे – सात वचन (सरल अर्थ)
1.पहला वचन – “भोजन व आजीविका”
_ हम मिलकर ईमानदारी से जीवनयापन करेंगे और परिवार का भरण-पोषण करेंगे.
2.दूसरा वचन – “शक्ति व स्वास्थ्य”
_ हम एक-दूसरे के स्वास्थ्य, मन और सुख-दुख का ख़याल रखेंगे.
3.तीसरा वचन – “धन व समृद्धि”
_ हम धन को समझदारी से कमाएँगे, धन का सही उपयोग करेंगे और परिवार की उन्नति करेंगे.
4.चौथा वचन – “प्रेम व पारिवारिक दायित्व”
_ हम प्रेम, विश्वास, समझ और जिम्मेदारी से परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाएँगे.
5.पाँचवाँ वचन – “संतान व संस्कार”
_ हम संतान को अच्छे संस्कार देंगे और उन्हें सही मार्ग दिखाएँगे.
6.छठा वचन – “साथ व निष्ठा’
_ हम हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ निभाएँगे और ईमानदार रहेंगे.
7.सातवाँ वचन – “मित्रता व जीवनसाथी”
_ हम जीवन भर मित्र, साथी और सहयात्री बने रहेंगे.
इन सात वचनों का सार यही है कि विवाह केवल रस्म नहीं,
_ बल्कि साथ चलने, साथ निभाने और साथ बढ़ने का संकल्प है.
मेरा सवाल : -> क्या कोई व्यक्ति कभी यह रुककर देखता है कि वह किस वचन से भटक गया ?
“लोग जिम्मेदारी तो निभा लेते हैं.. पर मित्रता कहीं खो जाती है.”
हर व्यक्ति शादी के लिए नहीं बना होता.

_ हर कपल माँ/बाप बनने के लिए नहीं बना होता.
_ कई व्यक्ति बिना शादी के, सिंगल रहकर, ज्यादा अच्छी ज़िन्दगी बिता सकते हैं/थे.
_ कई कपल बिना बच्चे के ज्यादा अच्छी ज़िन्दगी बिता सकते हैं/थे.
_ सबको एक ढाँचे में फिट करने का फितूर छोड़ दीजिये..
_ शादी, बच्चे, घर-जायदाद, बेटा-वारिस इन सबने कई युवाओं की ज़िन्दगी बर्बाद की है.!!
जब मेरी शादी हुई, तो मुझे यह ठीक से नहीं पता था और न ही जानता था कि शादी के बाद जीवन कितना बदल जाएगा..

_ बस इतना समझता था कि शादी का अर्थ है, सुख-दुख में साथ निभाने का वादा, हर परिस्थिति में साथी बने रहने का भरोसा..
_ लेकिन सच कहूँ, उस समय मैंने इस रिश्ते की गहराई को पूरी तरह से समझा नहीं था..
_ लेकिन खुद उस सफर पर निकलने के बाद, शादी का असली अर्थ समझा..
_ लेकिन असल में इन दिनों सबसे बड़ी समस्या जो समाज के सामने आ रही है,
_ वो है पति-पत्नी के रिश्तों में नासमझी की,,
_ पति-पत्नी का रिश्ता खून का रिश्ता नहीं है, भावनाओं, समझ और वादों का है.
_ माता-पिता योग्य साथी चुन सकते हैं, या व्यक्ति खुद अपने लिए साथी ढूंढ सकता है,
_ लेकिन इस रिश्ते को निभाने की कसौटी इस बात पर निर्भर करती है कि दोनों साथी मिलकर कैसे एक-दूसरे के जीवन का हिस्सा बनते हैं.
_ बहुत से लोग शादी सिर्फ इसलिए करते हैं.. क्योंकि उम्र हो गई है या समाज का दबाव है.
_ लेकिन शादी का असली अर्थ समझे बिना किया गया यह फैसला अक्सर दुखदायी बन जाता है.
_ शादी तब ही सफल होती है, जब दोनों साथी एक-दूसरे के लिए सेवा और समर्पण के भाव से साथ चलते हैं.
_ जब एक और एक मिल कर दो नहीं, बल्कि एक हो जाने के अहसास को जीने लगते हैं.
_ शादी का असली अर्थ त्याग, समर्पण और समझदारी है.
_ यह एक ऐसा रिश्ता है, जिसमें दो लोग ‘मैं’ और ‘तुम’ से ऊपर उठकर ‘हम’ बनते हैं.
_ यह रिश्ता तभी फलता-फूलता है, जब दोनों साथी एक-दूसरे के सुख-दुख को साझा करें और हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ दें.
_ शादी को निभाना आसान नहीं है..
_ यह रिश्ता त्याग और समझौते की मांग करता है.
_ दोनों साथी इस रिश्ते को पूरी निष्ठा से निभाएं, तो यह जीवन को सबसे सुंदर अनुभव बना देता है.
_ शादी सिर्फ दो लोगों का जुड़ना नहीं है, बल्कि यह वादा है जिसे हर परिस्थिति में निभाना होता है.
_ शादी का अर्थ केवल प्रेम या संग-साथ तक सीमित नहीं है.
_ इसका असली अर्थ है अपने साथी के साथ हर मुश्किल में खड़ा रहना..
_ यही सच्चा वादा है, यही सच्चा रिश्ता है..!!

– संजय सिन्हा

सुविचार – विद्यार्थी – 018

विद्यार्थी की सच्ची सुंदरता उस के गुणों और योग्यता में है, न कि बाहरी फैशन में.
होंठो पे मुस्कान कंधो पे बस्ता था, _ सुकून के मामले में वो ज़माना सस्ता था !!
जिंदगी की पढ़ाई चल रही है, अभी हमारा बैग उतरा नहीं है.

सुविचार – बचपन – बच्चा – बच्चे – बच्चों – 017

13518969124_6a3676407e

जब मैं छोटा था तब मुझे बड़ा होने की बड़ी जल्दी थी ! आज समझ आया की वो बचपन ही अच्छा था, जब ना किसी की ज़रूरत थी और ना कोई ज़रूरी था.

बचपन चला गया ___ज़िन्दगी की सबसे कीमती _ निशानी चली गई _
वो बचपन बहुत प्यारा था,_ जो कभी हमारा था..!!
बचपन की यादें किसी भी व्यक्ति के जीवन की सबसे खूबसूरत यादें होती हैं.

_ समय में पीछे जाएँ और अपने आप को उस बचपन की मासूमियत में डुबो दें और देखें कि वह कितना सुंदर था.!!
बस कोई लौटा दे वो बचपन के दिन..

_ खाली हाथ होने के बावजूद भी, कुछ न होते हुए भी बहुत कुछ था..

जब छोटे बच्चे थे तो जोर से रोते थे, जो पसंद था उसे पाने के लिए.!

_ आज बड़े हैं तो चुपके से रोते हैं, जो पसंद हैं उसे भुलाने के लिए.!!

अँधेरे से कह दो बचपन बीत चुका, अब तुझसे डर नहीं सुकून मिलता है.!!
बच्चे दर्पण की तरह होते हैं, हमारे लाख छिपाने की कोशिश के बावजूद भी

एक बच्चे में सच को समझने की अनोखी योग्यता होती है.

बच्चे कोरे कपड़े की तरह होते हैं, जैसा चाहो वैसा रंग लो,

उन्हें निश्चित रंग में केवल डुबो देना पर्याप्त है.

बड़े हो चुके होने का एहसास दिला के जिंदगी, झिंझोड़ देती है

बचपन तब ही ख़त्म हो जाता है जब, माँ डाँटना छोड़ देती है।……..

*बचपन साथ रखियेगा ज़िन्दगी की शाम में,*

*उम्र महसूस ही न होगी, सफ़र के मुक़ाम में*

” मिट्टी भी जमा की और खिलौने भी बना कर देखे

ज़िन्दगी कभी न मुस्कुराई फिर बचपन की तरह “

भागते बचपन में भी थे, भागते आज भी हैं !! _

_बस्ता वही है, बस अंदर का सामान बदल गया है !!!

वो बारिश का पानी, वो कागज़ की नाव _

_ बचपन को जिया है, मैंने फिर से एक बार ..

वो शरारत, वो मस्ती का दौर था, _

_ वो बचपन का मज़ा ही कुछ और था !!

लौट कर आती हैँ, वो तारीखें ,,

_ लौट कर, वो दिन नहीं आते …!!

बचपन बीत गया है अब, अब वो ज़माने नहीं आते _

_ यार पुराने दूर हैं मुझसे, अब वो ग़म मिटाने नहीं आते ..

इतनी चाहत तो लाखो रु पाने की भी नही होती,

जितनी बचपन की तस्वीर देखकर बचपन में जाने की होती है…….

बचपन साथ रखिए जिंदगी की शाम में

उम्र महसूस ही ना होगी सफर के मुकाम में।

उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में

फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते.

इसलिए तो बच्चों पर नूर बरसता है,

शरारतें करते हैं, साज़िशें तो नहीं.

बच्चे पौधों के समान होते हैं –

वे प्रेम, प्रसन्नता और स्वतंत्र वातावरण में बढ़ते हैं.

आता है याद मुझ को बचपन वो जमाना,

रहता था साथ मेरे खुशियों का जब जमाना..

गरीबों की बस्ती में जरा जाकर तो देखो,

वहाँ बच्चे भुखे तो मिलेगें, मगर उदास नही.

दोस्ती तो बच्चे ही कर सकते हैं, बड़े तो समझौते और सौदेबाज़ी करते हैं !
माता-पिता बच्चों के नक़ली दोस्तों और बच्चे माता-पिता के नक़ली रिश्तेदारों को पहचानने में माहिर होते हैं..!!
एक बच्चे के लिए बचपन की यादें ही उनके आने वाले कल को खूबसूरत बनाती है,

_ इसलिए हो सके तो अपने बच्चों को संस्कार से ज्यादा प्रेम दें, ताकि वो प्रेम पाने के लिए गलत संगत का सहारा न ले.!!

अब तो बच्चे भी परिंदों जैसे हो गए हैं,

_ साथ रह कर बड़े होते हैं __ और बड़े हो कर उड़ जाते हैं..

बच्चे जल्दी-जल्दी घर आने चाहिएं.

_ एक उम्र के बाद मां-बाप मुरझाने लगते हैं “बच्चों के बिना”.!!

अपनी बच्चों से दोस्ती रखो, ताकि वो अपनी हर बात आप से शेयर कर सके.

_ वरना बुरे लोग घात लगाए बैठे हैं, उसे बुरा बनाने के लिए.!!

बच्चों की परवरिश में केवल आर्थिक उन्नति को शामिल मत कीजिए..

_ बल्कि मानसिक उन्नति को भी शामिल कीजिए.!

क्या हम अपने बच्चों को एक टॉप-ग्रेड मशीन बना रहे हैं, या एक समझदार इंसान ?
जिन बच्चों को बार-बार ताना मारा जाता है.. वो कोशिश करना छोड़ देते हैं.

_ जिन बच्चों को मारा पीटा जाता है.. वो डरपोक बन जाते हैं.
_ जिन बच्चे का मजाक बनाया जाता है.. वो आत्मविश्वास खो देते हैं.
_ जिन बच्चे पर विश्वास नहीं किया जाता है.. वो विद्रोही बन जाते हैं.
_ जिन बच्चों की तारीफ नहीं की जाती है.. वो अपने आप को पसंद करना छोड़ देते हैं.
_ कभी सोचा है हमारे व्यवहार से हमारे बच्चे क्या सीख रहे हैं.
_ बच्चो को फूलों की तरह सम्भालिए, उनका उत्साह बढाइये, मोटिवेशन दीजिए.
_ डराने धमकाने से.. सीखने की गति सौ गुना कम हो जाती है.!!
बचपन का समय एक ऐसा समय होता है…

_ जहां पर वास्तव में जीवन की असली खुशियां मिलती है..
_ कोई जिम्मेदारी नहीं… दुनियादारी नहीं …मन में किसी तरह का छल कपट नहीं…
_ बचपन का समय एक ऐसा समय होता है…जहां पर वास्तव में जीवन के असली खुशियां मिलती है..
_ जीवन में मिलने वाली छोटी-छोटी चीज भी कितनी अच्छी लगती है..
_ जीवन में बचपन का समय तो गुजर जाता है..
_ लेकिन बचपन की खुशियां कुछ तो विशेष होती हैं…
_ जिसके गुजर जाने के बाद अहमियत और बढ़ जाती है..
_ मां-बाप के साथ बीते हुए पल.. उनके द्वारा बनाया हुआ खुशी का माहौल…
_ कम में कैसे खुश रहना है…पता नहीं…
_ वो वक्त बहुत अलग था.. सादगी और मासूमियत से भरा जीवन..!!
” बचपन की यादों का सफर “

*************************
ए बचपन, मीठा कितना था तेरा सफर
प्यारा कितना, तेरी यादों का सफर
बीत गए कितनी जल्दी बरस दर बरस
पर ठहर गया तेरी बातों का सफर ।
किताब मांगना, फिर उसे लौटा देना
छत पर आना उसका, वो रातों का सफर।
रूठना बिना बात मेरा, मनाना तेरा
देखना साथ हमारा, तारों का सफर।
क्यों हुआ बचपन की बातो का छिड़ना
हां वो मास्टर जी की बेतों का सफर।
होली में भीगना, गुब्बारे फोड़ना
बहुत सुहाना था त्योहारों का सफर।
याद है वो हौज पे घंटो नहाना
सुहाना था सुबह की सैरों का सफर।
याद वो कपिल का वर्ल्ड कप जीतना
रेडियो पर मुकेश के गानों का सफर।
जून की तपती दोपहरी में खेलना
प्यारा लू से बेपरवाहियो का सफर।
वो नानाजी का प्यार से पढ़ाना
उनकी बेपनाह मुहब्बतों का सफर।
सिलसिला छिड़ा तो, उसका बंद न होना
ए बचपन, मीठा कितना था तेरा सफर
प्यारा कितना, तेरी यादों का सफर
आज बच्चों को शोर मचाने दो

कल जब ये बड़े हो जाएँगे
ख़ामोश ज़िंदगी बिताएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
गेंदों से तोड़ने दो शीशें
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
दिल तोड़ेंगे या ख़ुद टूट जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
बोलने दो बेहिसाब इन्हें
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
इनके भी होंठ सिल जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
दोस्तों संग छुट्टियों मनाने दो
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
दोस्ती-छुट्टी को तरस जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
भरने दो इन्हें सपनों की उड़ान
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
पर इनके भी कट जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
बनाने दो इन्हें काग़ज़ की कश्ती
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
ऑफ़िस के काग़ज़ों में खो जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
खाने दो जो दिल चाहे इनका
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
हर दाने की कैलोरी गिनाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
रहने दो आज मासूम इन्हें
कल जब ये बड़े हो जाएँगे
ये भी “#समझदार” हो जाएँगे
हम-तुम जैसे बन जाएँगे
एक सुझाव : – ध्यान रहे कि मैं बच्चे के जन्म के खिलाफ नही हूं..

_ _लेकिन जब हमें पता है कि बच्चे के जन्म होते ही क्या होने वाला है.. उसके साथ..
_ तो हम सोच सकते हैं कि क्या करना है,
_ यदि आप उन छोटे बच्चों का ध्यान जीवन भर रख सकते है तो जरूर जन्म लेने दें और उनका ख्याल रखें.
_ लेकिन ये भी ध्यान रहे कि बिना सोचे समझे बच्चे पैदा न करें..!!
_ हर कोई कह सकता है कि वो बच्चे चाहते हैं, लेकिन सभी बच्चे पालने में सक्षम नहीं होते.!!
_ हमारी सबसे बड़ी कमी, बच्चे तो पैदा कर लेते हैं, पर उन्हें कैसे पालना है, उनकी कैसी परवरिश करनी है, पता नहीं होता,
_ और ऐसे लोग ही आगे चलकर मनोविकार से ग्रस्त हो जाते हैं, मेंटल हेल्थ से गुजरते हैं.
हम बच्चे पैदा किसकी खुशी के लिए करते हैं ?
_ इस दुनिया मे जंहा तकलीफ, दुख, संताप, संघर्ष, धोखे भरे पड़े हैं,
_ ये सब जानते हुए भी क्यों माँ बाप एक और जिंदगी ला रहे हैं ?
_ सिर्फ बाप को समाज को साबित करना है कि मै नपुंसक नहीं हूँ और औरत को कि मैं बांझ नही हूँ.
_ फिर कौन उस से पूछ रहा है कि तु इंसान बनेगा या हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई ?
_ सब मां बाप धर्म थोप रहे हैं.
_ माता पिता को माफ कर दें बच्चे, उनको इस घटिया इंसानो की दुनिया में लाने के लिए तो भी बहुत है..!!
माता-पिता बनने के लिए योग्यता और पात्रता होनी चाहिए, हर कोई माता-पिता बनने में सक्षम नहीं होता, खराब पालन-पोषण का परिणाम आपराधिक प्रवृत्ति को ही बढ़ावा देता है, यदि बच्चे ठीक से प्रेम प्यार से पाले नहीं जाते तो पैदा ही न करें.

_ भारत में ज्यादातर पुरुष बाप बन जाते हैं, पिता कुछ ही बन पाते हैं.!!

आजकल के बच्चों में जिंदगी के झटके सहने की क्षमता बहुत कम है ;
_यही कारण है कि आज मानसिक अवसाद और तनाव अधिक व्याप्त है.!!
सामाजिक ताने बाने के भीतर आखिर हमने ऐसा खोखला डर क्यों बनाया हुआ है कि,
_ हम अपने ही घरों के बच्चों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को समझ नहीं पा रहे हैं.
बच्चों को बचपन में केवल एक अनुशासन सिखाइए कि अपनी चीज़ें सही जगह पर रखो.

_ बड़े होने पर उन्हें अपना जीवन सही जगह पर रखना आ जाएगा.
कभी-कभी होता यूँ है कि हम जिसे बच्चा समझ कर समझा रहे होते हैं,
_ वो अपनी विचारधारा में हमसे भी बड़े होते हैं.. वो खुद जानते हैं हर परिस्थिति से बाहर निकलना..!!
बच्चों को उड़ने से मत रोकिए._

_ वे कई बार गिरेंगे, कई गतिविधियों/कोर्सेज़ में पैसा व समय भी खराब करेंगे.
_ फिर भी उन्हें मत रोकिए.
_ अगर वे खुश होकर उड़ेंगे, तो उड़ते-उड़ते एक न एक दिन अंबर को छू ही लेंगे.
_ घर वालों को चाहिए कि वे अपने बच्चो के जीवन को बहोत कंट्रोल न करें…!
अपने बच्चों को खुद अपने सपने बुनने दीजिए..

_ उसे पूरा करने के लिये.. उसके सारथी बनिये..
_ मगर, उसकी आँखों में अपना सपना मत बो देना..
_ बच्चे की आंखों में परिवार का बोया सपना बड़ा भारी होता है..
_ वह सपना बच्चे को बूढ़ा कर देता है.. ‘उसे थका देता है’
_ दूसरों का सपना, सबसे पहले बचपन चट कर जाता है और फिर बाकी का जीवन..!!
माता-पिता कृपया अपने बच्चों पर अपने सपने मत थोपें, बच्चों के जो मनपसंद विषय है, उन्हें चुनने दें..
_ ताकि वो अपने भविष्य का निर्माण हंसते खेलते तनाव रहित होकर कर सकें..!!
संघर्ष में पले बच्चे भटक नहीं सकते, उन्होंने कामयाबी से पहले पसीना देखा होता है.
मै और मेरी पत्नी कभी अपनी बच्चों पर अपना सपना नहीं थोपते,

_ हमनें बच्चों को बोल कर रखा है कि.. आपसे ज्यादा हमारे लिए कुछ कीमती नहीं..
_ सही गलत की शिक्षा देते रहते हैं,
_ और फिर भी कोई बात हो या कोई गलती..
_ उसके लिए वो हमसे बेझिझक बात करे.. ऐसा माहौल बनाया है..!!
जीवन वाकई में दुखों और कष्टों की सेज है..

_ पर फिर लगता है कि हमारा क्या भरोसा, हम कब तक रहेंगे, और इस लिए बच्चों को आगे बढ़ने के लिए, स्वछंद उड़ान भरने की लिए अपने कलेजे पर पत्थर रखना ही पड़ता है..!!
पेरेंटिंग पर अधिक से अधिक बात, विचार, किताबें होनी चाहिए,

_ क्योंकि साबित हो चुका है कि अधिकांश पेरेंट्स केवल बच्चे की पढ़ाई, खिलौने, खाने आदि ज़रूरतों को पूरा करना ही पेरेंटिंग समझते हैं,
_ उनकी भावनात्मक, संज्ञानात्मक ज़रूरतों की जानकारी.. उन्हें इस आपाधापी भरे जीवन में नहीं हो पाती..!!
बच्चों की अपनी जिंदगी होती है, उन्हें जीने दीजिए,

_ वे साथ दें तो धन्यवाद, साथ न दें तो भी आशीर्वाद दें >>’वृद्धावस्था में स्वयं स्वाबलंबी और समर्थ बनें रहें, बाकी सब मिथ्या..!!
_ फिर साथ मिले या आदर- सत्कार मिले तो ” सोने पर सुहागा “
स्वयं को अक्षम समझना हमें हीन, कमजोर और लाचार बनाता है,

_जबकि दूसरों में दोष देखना, हमें परछिद्रान्वेषी, घमंडी, ईर्ष्यालु, बहानेबाज और गैरजिम्मेदार बनाता है.
_मनुष्य के लिए आदर्श और सकारात्मक सोच है- मैं सही, तुम भी सही..
_ डा॰ एरिक बर्न की उक्त कसौटी पर माता-पिता और उनके बच्चों के मध्य विकसित होने वाले मनोभावों को आसानी से समझा जा सकता है.
_बचपन में माता-पिता पर निर्भरता बच्चे पर उनके प्रति अनुकूल प्रभाव रखती है,
_लेकिन उस निर्भरता के समाप्त होते ही, वह आत्म-स्वतन्त्रता की ओर उन्मुख होने लगता है.
_माता-पिता का मार्गदर्शन और आदेश उसे नहीं सुहाता.
_ दरअसल, वयस्क मन स्वयं समझ विकसित करके निर्णय लेना चाहता है,
_जिसमें माता-पिता उसे बाधक समझ आते हैं.
_यहीं से उनके मध्य मतभेद उत्पन्न होने लगते हैं,
_जो धीरे-धीरे मनभेद की ओर बढ़ जाते हैं, और कालांतर में संघर्ष का रूप ले लेते हैं.
– द्वारिका प्रसाद अग्रवाल [ लेखक ]
अपने बच्चों से प्यार कीजिए, उन्हें बात-बात पर लज्जित मत कीजिए ;

_ कभी किसी बच्चे से तुलना करते हुए उसे कमतर मत बताइए.
_ बच्चा गलती कर सकता है, उसकी कुछ गलतियों की अनदेखी कीजिए.
_ मौका मिले तो समझाइए, बात कीजिए, लेकिन जलील मत कीजिए.
_ कोई उसकी आपसे शिकायत लगाए, तो भी अपने बच्चे को प्रोटेक्ट कीजिए.
_ कहिए कि वो छोटा है, टीन एज में है, नासमझ है,
_ पर उनकी हां में हां मिला कर बच्चे का दिल मत तोड़िए.
_ बच्चे अपने मां-बाप की ओर बहुत हसरत भरी नज़रों से देखते हैं.
_ उन्हें उम्मीद होती है कि जब पूरा संसार उनके विरुद्ध हो जाएगा, तब भी मां-बाप खड़े रहेंगे ..उसकी तरफ से.!!
— हर मां-बाप को अपने बच्चों से बात करनी चाहिए, उनके दिल का हाल पूछिए.
_ उनसे स्कूल में होने वाली गतिविधियों पर चर्चा कीजिए.
_ वो कभी पार्टी करना चाहे तो करने दीजिए.
_ आखिर उसे इसी संसार में बड़ा होना है, जीना है.
_ हर छोटी-बड़ी बात पर उसका मूल्यांकन मत कीजिए और टीचर से जब मिलने जाएं तो उनकी ओर से नहीं, अपने बच्चे की ओर खड़े दिखिए.
_ बच्चे सही मायने में भविष्य की अमानत हैं.
_ उन्हें बड़ा कीजिए. प्रोडक्ट बना कर नहीं, इंसान बना कर.
_ उनमें भरोसा जताइए.
_ भरोसे से प्यार बढ़ता है, प्यार से नजदीकियां..
_ अपने बच्चे के नज़दीक आइए..
— प्यार ही हर रिश्ते की बुनियाद है.
_ जब आप बच्चे को डांटेंगे, फटकारेंगे, जलील करेंगे तो प्यार कम होगा.
_ जब प्यार कम होगा ..फिर रिश्ते रहें न रहें क्या फर्क पड़ने वाला है ?
_ किसी को डांटना, पीटना रिश्तों की कड़ियों को टूटने देना है.
_ मत टूटने दीजिए रिश्तों की कड़ियों को.
_ प्यार ज़िंदगी है, प्यार बंदगी है, प्यार से प्यार कीजिए.
_ आदमी वही आदमी होता है, जो प्यार करना जानता है.
हर इंसान की चाहत होती है कि उसकी कद्र हो और उसके अस्तित्व की अहमियत समझी जाए, ये बात दुनिया को बताई जाए..

_ हर किसी के अंदर एक बच्चा दुबकी मार के बैठा है..
_ जो गलतियां कर कर के सीखता रहना चाहता है पूरा जीवन..
_ इस बात को आप नकार सकते हो ..चूंकि ये आपके बड़प्पन के आड़े आ रहा होगा..
_ लेकिन मन ही मन सोच रहे होंगे कि __ मन की बात कह दी बच्चे ने !!
भारतीय समाज में विवाह और संतानोत्पत्ति की एक सुविचारित, सुदृढ़ और सुदीर्घ परंपरा के कारण माता पिता बनना बहुत आसान और अनिवार्य कार्य समझा जाता है..

बच्चे को जन्म देना, पढ़ाना लिखाना, खिलाना पिलाना और फरमाइशें पूरी करना ही यहां पेरेंटिंग समझा जाता है जबकि उसके संवेदात्मक, भावनात्मक विकास के लिए माहौल तैयार करना कोई ज़रूरी काम या जिम्मेदारी नहीं मानी जाती..
अधिकतर परिवारों में बेहद टॉक्सिक माहौल होता है, मां बाप बच्चों के आगे ही आपस में या परिवार, पड़ोस से झगड़ते, गाली गलौच करते हैं बिना यह सोचे कि इसका बच्चे के ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा !
बिना मानसिक, आर्थिक, शारीरिक तैयारी के, बिना प्लान के बस शादी हो गई है तो बच्चा पैदा करना है के दबाव, आदत,परम्परा के कारण बच्चे पैदा कर दिए जाते हैं और फिर कभी उस बच्चे के कारण या उसे मोहरा बनाकर सारी जिंदगी लोग झगड़ते ,भटकते रहते हैं..
जिसे दुनिया में ला रहे हैं उसके लिए एक सुंदर दुनिया बनाने और उसे दुनिया को सुंदर बनाने लायक करना लोगों को नहीं आता…जब बच्चों से पूछकर उन्हें पैदा नहीं किया जाता तो पैदा होने के बाद वह किस बात की कीमत ज़िंदगी भर चुकाते हैं..
पारिवारिक, सामाजिक, शारीरिक, आर्थिक सुविधाएं देकर बच्चों का मानसिक शोषण करना, उन्हें नीचा दिखाना,पालन पोषण का ताना देना और ज़िंदगी भर उनके हर कदम की आलोचना करना और अंत में असहाय होने पर उन्हीं बच्चों से प्यार, इज़्ज़त,देखभाल की अपेक्षा करना यहां आम बात है..
घर नाम की जगह को इतना सुकून भरा,प्यार भरा और भरोसे भरा होना चाहिए कि पढ़ने, कमाने या दुनिया देखने निकला बच्चा बार बार वहां लौटना चाहे, वर्ना तो जिसे जब जैसा बहाना, मौक़ा मिलेगा वह घर छोड़ जाएगा फिर आप रोते रहिए नए ज़माने को..
बच्चों से ज़्यादा यहां पेरेंट्स को ट्रेनिंग की ज़रूरत है…
– Mamta Singh
कुछ लोग तो आज के दौर में भी इतने गैर जिम्मेदार होते हैं.. ऊपर वाले के भरोसे बच्चे पैदा करते हैं..

_ और उनमें से कुछ आज भी ऐसे होते हैं जो लड़के की चाहत में बच्चे पैदा करते जाते हैं, _ गैर जिम्मेदाराना तरीके से इस तरह अनियमितता लाना… अपने स्वयं के साथ और धरती के साथ अन्याय है,
_ साथ ही उस बच्चे के साथ भी जिसे अनचाहे तरीके से आप जन्मते हो..
_ पति पत्नी का साथ एक संतुलित व्यवस्था है.. इसे असंतुलित ना करो,
_ यदि अपने मनोरंजन के लिए तुम किसी का जीवन खराब करते हो और इस धरती को.. तो तुम मनुष्य नहीं हो..!!
– Rhythm Rahi
हम पूरी उम्र गुज़ार देते हैं श्रम करते हुए कि बच्चों का जीवन बनाना है, ताकि उन्हें भविष्य में कोई तकलीफ़ न उठानी पड़े.

_ उस समय हम बच्चों को ज़्यादा वक़्त नहीं दे पाते.
_ जब हम सारे फ़र्ज़ पूरे करके खाली होते हैं, और बच्चों के साथ वक़्त बिताना चाहते हैं तो बच्चों के पास वक़्त नहीं होता.
_ यही जीवन की विडम्बना है.!!
– Manika Mohini

सुविचार – टाइम मैनेज – 016

~~ समय ~~

आप यह नहीं कह सकते कि आपके पास समय नहीं है क्योंकि आपको भी दिन में उतना ही समय (24 घंटे) मिलता है जितना समय महान एंव सफल लोगों को मिलता है.

परिवार, पुस्तक एवम प्रकृति के साथ समय बिताना सिख जाओ…

_ वरना समय भी एक समय तक ही मोहलत देता है…!!!!

धन बर्बाद कर के आप निर्धन होते हैं, _

_ लेकिन समय बर्बाद कर के आप अपना जीवन नष्ट करते हैं..!!

कई लोग ऐसी बातों के बारे में सोच रहे हैं, जो कभी होने वाली नही है, खैर !…
_ यह भी एक अच्छा टाइम पास है.!!
समय एक नदी की तरह है. आप एक ही पानी को दो बार नहीं छू सकते, क्योंकि जो प्रवाह बीत चुका है वह फिर कभी नहीं गुजरेगा.; _अपने जीवन के हर पल का आनंद लें !

Time is like a river. You cannot touch the same water twice, because the flow that has passed will never pass again. Enjoy every moment of your life !

समय मुफ़्त है, लेकिन अमूल्य है ; _ आप इसके मालिक नहीं हो सकते, लेकिन आप इसका उपयोग कर सकते हैं.

आप इसे रख नहीं सकते, लेकिन आप इसे खर्च कर सकते हैं ; _ एक बार आपने इसे खो दिया तो आप इसे कभी वापस नहीं पा सकते..

हम अपने जीवन में सबसे बड़ी गलती यह सोचते हैं कि हमारे पास समय है.

Time is free, but it’s priceless. You can’t own it, but you can use it. You can’t keep it, but you can spend it. Once you’ve lost it you can never get it back. The biggest mistake we make in our life is thinking we have time.

अगर हम रोजाना अपने कामों की लिस्ट बनाएँ और टाइम मैनजमेंट के अनुसार उन्हें निबटाएँ, तो सारे काम बड़े आसानी से हो सकते है. इधर- उधर की चीजों में , बेकार के तनाव में अपना समय न गँवाएँ — स्मार्ट वर्किंग से काम पूरा करें और अपनी ज़िन्दगी को एन्जॉय भी करें.

जो लोग यह कहते हैं ” मेरे पास बहुत काम है, वक्त नहीं है….. ” दरअसल वे लोग दिशाहीन होते हैं, उन्हें खुद को मैनेज करना नहीं आता.

एक बात जान लीजिए – समय एक ऐसा संसाधन है जिसका भविष्य के लिए संग्रह नहीं किया जा सकता है. अमीर हो या गरीब, सभी के पास एक दिन में चौबीस घंटे ही होते हैं. जो समय चला जाता है, उसे वापस कभी नहीं लाया जा सकता है.

इसलिए समय का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए. जब कभी लगे कि समय कम पड़ गया है, तो अपना एक रूटीन बना लेना चाहिए. जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए टाइम मैनेजमेंट में पारंगत होना जरुरी है. ऐसा नहीं होने पर कभी लगेगा समय कट नहीं रहा है और कभी अनुभव होगा कि समय है ही नहीं- इसलिए समय से पंगा नहीं.

समय का सदुपयोग किन किन चीजों में है ये बात हमें पता होनी चाहिए. एक ही टाइम टेबल 365 दिन काम नहीं आता. हमें समय का पूर्ण सदुपयोग करना चाहिए.
Time management  का सबसे अच्छा तरीका यह है कि सबसे पहले आप यह पता लगाएं कि आपका समय कहाँ बर्बाद हो रहा है. अगर आप ये पता लगा पाए तो आप उन सभी कार्यों को छोड़ सकते हैं जो आपका टाइम वेस्ट कर रहे थे.
सोचिये यदि आप कोई जरुरी कार्य कर रहे हैं और तभी आपका कोई दोस्त आ जाता है और आपसे बातें करने लगता है. ऐसे समय में आपको उससे अच्छे शब्दों में “न” कह देना चाहिए, वरना आपका टाइम वेस्ट हो जायेगा.
ध्यान दीजिए, क्या आप व्हाट्सप्प या फेसबुक पर कितना समय देते हैं. क्या आप ज्यादा टीवी देखकर अपना टाइम वेस्ट तो नहीं कर रहे. अगर ऐसा है तो तुरंत सावधान हो जाएँ और ऐसे तरीके अपनाएं जिससे आपका टाइम वेस्ट न हो और आप समय बचा कर उसे अच्छे कार्यों में प्रयोग कर सकें.

सुविचार – ईर्ष्या – ईर्ष्यालु – द्वेष – घृणा- कुढ़ना – नफ़रत – नफरत – जलन – 015

13514903353_fb06aff785
दूसरे की तरक्की से जलना नहीं चाहिए..

_ इंसान के पास अपनी ही खुशियां इतनी होनी चाहिए कि दूसरे की खुशी से जलने का समय न बचे.
_ लोगों की तारीफ़ करना सीखिए..
_ उनकी खुशी में शरीक होना सीखिए… खुश रहना सीखिए.
_ न जलिए, न जलाइए.. – ज़िंदगी इन बातों से आगे की कहानी है.
_ “किसी से जलना- उसकी ज़िंदगी को रौशन करना होता है, जिससे आप जलते हैं”
– Sanjay Sinha
यदि आपसे कोई व्यक्ति ईर्ष्या करता है, तो उससे नफरत ना करें, क्योंकि यही लोग जानते है कि आप उनसे बेहतर हैं.

दरअसल, ईर्ष्या हमारे व्यक्तित्व और स्वभाव का हिस्सा है. कम या अधिक हर किसी में ईर्ष्या विद्यमान होती है. एक कहावत है, ईर्ष्या आदमी को उसी प्रकार खा जाती है, जैसे कपड़े को कीड़ा. ईर्ष्या व्यक्ति को अशांत और क्रोधी बना देती है. इसका बोझ आपको दुनिया का सबसे दुखी व्यक्ति बना देगा.

ईर्ष्या आत्म- विश्वास की कमी से पैदा होती है और आत्म- विश्वास का साथी है ज्ञान. आप अपने ज्ञान की धार मजबूत करके ईर्ष्या से मुक्ति पा सकते हैं. यदि हम अपने जीवन में ऐसा कर पाये तो कोई भी नकारात्मक शक्ति हमें अपने डगर से विचलित नहीं कर पायेगी.
ईर्ष्या, राग, द्वेष जैसे कुविचारों को अपने पास फटकने न दें. किसी की उन्नति और विकास को देख कर, चिढ़ने, कुढ़ने के बजाय अपने कर्म पर भरोसा रखें. धैर्य रखें और प्रतीछा करें.
अगर कोई व्यक्ति दूसरे को खाता- पीता देख कर, फलता- फूलता देख कर, सुखी होता देख कर, उन्नति करता देख कर मन में जलता हो, उसे ईर्ष्या आती हो, बुरा सोचने लगता हो..

– हम इनसान हो कर यह आदत अपनाएँ, तो हमारे लिए यह अच्छी बात नहीं है.
हर छोटी-छोटी बात पर किसी के प्रति द्वेष रखना अक्सर इंसान की संकीर्ण और ओछी मानसिकता को दर्शाता है.

_ क्योंकि समझदार व्यक्ति मतभेदों को दिल में बोझ बनाकर नहीं रखता,
_ वह बातों से आगे बढ़ना जानता है,
_ जबकि छोटी सोच वाले लोग हर बात में दुश्मनी तलाश लेते हैं.!!
ईर्ष्या से ग्रसित होकर किसी की निन्दा कर उसका नुकसान करने का प्रयास नहीं करना चाहिए,

_ क्योंकि पलटवार होने पर इसका परिणाम घातक हो सकता है.

एक समझदार व्यक्ति वह है, जो दूसरों को देख कर उनकी विशेषताओं से सीखता है,

_ उनसे तुलना या ईर्ष्या नहीं करता.

अंजान लोग नापसंद करते हैं, नफ़रत नहीं.!!
अपना बना कर छल करना ये तो पुराना रिवाज है..

_ किंतु ईर्ष्या रखने वालों का आप कुछ नहीं कर सकते सिवाय दूरी बरतने के…हमने ये बात गाँठ बाँध ली है;
_ ऐसे लोगों को इग्नोर करना और खुश रहना _क्योंकि “बात उनकी होती है.. जिनमें कोई बात होती है”
_ जीवन अनमोल है.. इसे किसी ऐरे-गैरे के लिए दुखी नहीं करना है.!!
Because…”जिंदगी मिलेगी न दोबारा”
किसी के लिए सारे दरवाजे बंद करने के बाद भी लोग खिड़कियों से झांकना बंद नहीं करते !!
कुछ लोग दूसरों की ज़िंदगी में झांकने में ही अपना क़ीमती वक्त जाया कर देते हैं..

_ और ये ही आदत_उनकी ज़िंदगी को तबाह कर देती है, क्योंकि ये आदत ईर्ष्या की जननी है.. ..!

मन में नफ़रत पालने की बजाए उन लोगों से दूरियां बना लेना ज़्यादा बेहतर है..

_ जो आपकी अहमियत नहीं समझते हैं.!!

जब किसी के मन में आपके लिए ज़हर भर गया हो,

_ तो फिर आपकी सारी अच्छाई भी उसे छलावा ही लगती है.
_ एक बार घृणा बस जाए —
तो कोई दलील, कोई सच — कुछ भी असर नहीं करता.!!
अपने मन में किसी के प्रति नफरत रखने की बजाय..

_ अपनी ज़िंदगी से उनके अस्तित्व को ख़त्म कर देना ज़्यादा बेहतर है.!!

नफरत वो ही करते हैं.. जो आपकी बराबरी करने की चाहत तो रखते हैं, पर हिम्मत नहीं जुटा पाते.!!
ख़तरा दुश्मनों से नहीं बल्कि अपनों से है _ वो नहीं चाहते की आपकी कीर्ति और वैभव दुनिया में बढ़े ..! ईर्ष्यालु होना ज़्यादातर लोगों की मानसिकता है !

“हम खुद को बरगद बना कर छाँव बाटते रहे, और हमारे ही हमें थोड़ा थोड़ा काटते रहे !!”

जब इंसान ईर्ष्या करता है तो वह दुनिया में आग नहीं लगाता, बल्कि अपना ही घर जला देता है और दूर खड़ा होकर चुपचाप तमाशा देखता रहता है.!!
“असली ताकत नफ़रत में है”- जिन लोगों ने भी ऊँचाइयाँ हासिल कीं, उनके अंदर एक आग थी, एक चिंगारी जो नफ़रत के बिना कभी नहीं जल सकती थी.!!
इंसान की एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है, जिसने जीवन में कुछ नहीं किया होता है, वह उस से नफरत करता है, जिसके पास उस से ज्यादा होता है.
ईर्ष्या और द्वेष रखना आपको मजबूत नहीं बनाता, बल्कि आपको कड़वा बनाता है.

_माफ़ करना आपको कमज़ोर नहीं बनाता. यह आपको मुक्त करता है.!!

“ईर्ष्यालु लोग आपको एक प्रतियोगी के रूप में देखते हैं ;

_जबकि आप उन्हें परिवार या दोस्तों के रूप में देखते हैं.”

बैठ कर केवल उन लोगों से ईर्ष्या न करें, जिन्होंने अपना लछ्य पा लिया हो.

_ उनकी बराबरी का एक ही उपाय है, आप अपने काम में जुट जाएं.

दूसरों का दीया बुझाने से आपकी रोशनी नहीं बढ़ेगी;
_ अपनी तरक्की पर ध्यान दें, ईर्ष्या से कभी किसी का भला नहीं होता.!!
“नफरत बोझ है, माफी सुकून” बदला मत लो, बस सफल बनो..
_ आपकी कामयाबी ही सबसे तगड़ा जवाब है.!!
ईर्ष्या और जलन ने हमको इस स्तर तक नीच कर दिया..

_अगर तरक्की करे कोई वो हमे पसंद नहीं आता.!!

कुटिलता, चालाकी, लोभ, ईर्ष्या शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट में चार गुना से भी ज़्यादा वापसी की गारंटी देते हैं,

_ इन्हें आप अपनों में, परायों में, जहां चाहें वहां बो सकते हैं ..और यह एक बार बोने पर बार बार फसल देते हैं..

एक भिखारी अमीर आदमी से ईर्ष्या नहीं करता. _ वह उस भिखारी से ईर्ष्या करता है, जिसे उससे ज़्यादा भीख मिलती है.

_ सच यह है कि लोग अपने स्टेटस वालों से ही जलते-कुढ़ते हैं,
_ अपने से बहुत निम्न या बहुत उच्च वर्ग के लोगों से नहीं.!!
मन में किसी के प्रति ईर्ष्या और द्वेष रख कर मनुष्य सफल तो हो जाता है, _

_ पर कभी सुकून से जी नहीं पाता ..!!!

जब कोई आप पर अपनी मर्जी नहीं चला पाता है..

_ तब वो आपसे नफ़रत करने लगता है..!!

जो लोग नफरत करते हैं, उन पर तरस खाना चाहिए.

_ उनका दिमाग छोटा होता है, दिल और छोटा होता है..!!

जो लोग आपसे ईर्ष्या करते हैं..

_ वे आपके विरुद्ध बकवास करते रहेंगे और खुश होते रहेंगे.!!

नफ़रत ढोने से बेहतर है इज़्ज़त की दूरी रखकर, बिना शोर के अलग हो जाना.
कभी कभी लोगो को गलतफहमी हो जाती है कि लोग उनसे जलते हैं.!!
हृदय में द्वेष है, ज़ुबान पर प्रेम है और आजकल लोग इसे ‘बुद्धिमत्ता’ कहते हैं.!!
ईर्ष्या एक ऐसी मनोस्थिति है, जिस में प्रेम, क्रोध, विद्वेष, छोभ, अपमान और कुंठा के भाव मिले जुले होते हैं.
नफरती आदमी अपनी नफरत का तीर कभी भी किधर भी घुमा सकता है.
_ जो इनके मन की न करे तो ये उसके विरोधी हो जाते हैं.!!
ईर्ष्या का तात्पर्य यही है कि ईर्ष्या करने वाला व्यक्ति जिस से ईर्ष्या करता है, _

_ उसे वह स्वयं बड़ा मानता है.

आपको किसी व्यक्ति से ईर्ष्या हो रही हो तो समझ जाइये, _

_ आप का विचार का दायरा सीमित हो रहा है..!!!

तारीफ झूठी हो सकती है, मगर ईर्ष्या कभी झूठी नहीं हो सकती.!!
किसी से ईर्ष्या करके मनुष्य उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है पर अपनी नींद और सुख चैन अवश्य खो देता है.

_जो ईर्ष्या करता है _ वह पहले अपना नुकसान करता है.

द्वेष रखना आपको मजबूत नहीं बनाता, बल्कि आपको कड़वा बनाता है.

_क्षमा करना आपको कमज़ोर नहीं बनाता, बल्कि आपको आज़ाद करता है.

ज़रा सी समझ बहुत कुछ सुधार सकती है, बचा सकती है.

_ नफ़रत करना बहुत आसान है ..उससे भी आसान है ..अक्ल लगाकर उस नफरत को हराना..!!

लोगों से नफरत व ईर्ष्या करना चूहे से छुटकारा पाने के लिए अपने ही घर को जलाने जैसा है.
मन में ईर्ष्या तभी पनपती है जब हम दूसरों को खुश नहीं देखना चाहते..!!
नफ़रत भी कोई करने की चीज है, सब्र कीजिए, रहम कीजिए, माफ़ कीजिए.!!
आज कल लोग होठों पर दुआ और आँखों में जलन रखते हैं..!!
कभी भी उस से अपना दुख ना कहें, जो आप से ईर्ष्या करता है..!!
ईर्षालु मनुष्य स्वयं ही ईर्ष्याग्नि में जला करता है, उसे और जलाना व्यर्थ है.!!
‘जलन और ईर्ष्या’ खुद के छोटे होने का सबूत है.!!
कभी किसी से ईर्ष्या मत रखें, _क्योंकि कोई फायदा नहीं है

_ इससे सिर्फ दुखी ही मिलता है और गलत विचार आते हैं बस..!!

जब आपके पास कुछ नहीं होगा तब लोग आपको बेचारा समझेंगे,

_ मगर जैसे ही आप उठेंगे.. लोग आपसे ईर्ष्या करने लगेंगे.!!

नफरत, ईर्ष्या से सृष्टि का चक्र रुक जाता है.

_ मदद कीजिए ..मदद मिलेगी ..शुरुआत करके देखिए..!!

आपसे ईर्ष्या करने वाले अधिकांश लोग वही होंगे,

_ जिनकी आपने कभी अपना समझ कर मदद की थी..!!

मेरे लिए नफ़रत पालने वालों के लिए भी बेहतरी की दुवाएं मांगता हूं..

– उन्हें दुआओं की गठरी थमा के लौट आया, वो जो मुझको बर्बाद करना चाहते थे..!!
नफरत एक बार मन में घुस गयी तो उससे बाहर निकलने में हमारा संदेह बाधा उपस्थित करता है.
_ जिनसे भी मुझे नफरत हुई, किसी ठोस कारण से हुई लेकिन जब भी मैंने उस नफरत को कम करने की कोशिश की, मैं असफल रहा.
_ समझ में यह आया कि एक निश्चित दूरी बनाकर रखी जाए, तुम अपने रास्ते, हम अपने रास्ते.!!
_ कुछ गलतियों की माफिया, शब्दों में तो मिल जाती है.. अंतर्मन नहीं दे पाता..!!
_ फिर सौंप दिया जाता है, उसको.. प्रकृति और ऊपर वाले के हवाले.!!
_ क्योंकि, जब इंसान खामोश हो जाता है, फैसले ऊपर से होते हैं..!!
अगर किसी के मन में दूसरों की खुशी और तरक्की देखकर ईर्ष्या की भावना है..

_ तब वह तिनका तिनका राख हो रहा है और दीमक कि तरह खोखला..
आपसे जलने वाले आपके बारे में अफ़वाहें उड़ाते हैं..

_ और बेवकूफ लोग बिना सोचे समझे उन अफ़वाहों पर विश्वास कर बैठते हैं.!!
कुछ लोग आपसे नफ़रत इसलिए करते हैँ कि आपकी मौजूदगी उनके वज़ूद को बेकार बना देती है !
ईर्ष्यालु और आपसे जलने वाला आपकी बुरी ख़बरें जानने में बहुत दिलचस्पी लेता है.!!
जब लोग आपको अपनी बातों के झाँसे में नहीं फँसा पाते,
_ तब वो आपसे नफ़रत करने लगते हैं.!!
आपसे जलने वालों की हरकतों पर कोई भी प्रतिक्रिया न दें.!!
जीवन में इज्जत और प्रेम पाने के भूखे कभी मत रहो..
_ वरना ये दुनिया ऐसे लूटेगी कि आप इससे नफरत करने लगोगे..!!
जैसे-जैसे आपकी प्रगति का स्तर बढ़ेगा,
_लोगों की ईर्ष्या का स्तर भी बढ़ेगा और आप दूर से भी उनकी ईर्ष्या की तपिश को महसूस कर पाओगे.
दूसरों की तरक्की से जलने वालों की किस्मत अकसर ठंडी ही रह जाती है !
_ आप अपने काम में लगे रहो, क्योंकि जो आपको गिराने में व्यस्त हैं, वो खुद कभी ऊपर नहीं उठ सकते !!
कुछ लोगों में ईर्ष्या और घृणा का स्तर इतना अधिक होता है कि जब वे अपने सामने वाले की सफलता और खुशी देखते हैं, तो वे…

_ वे ऊपर से तो बहुत चिकनी-चुपड़ी और बनावटी बातें करते हैं, लेकिन भीतर से पूरी तरह ख़त्म हो जाते हैं.. आपके आस-पास भी ऐसे कई होंगे.!!
आमतौर पर देखा जाता है कि जिस इंसान में ईर्ष्या अधिक होती है..

_वह किसी भी स्थिति में अधिक ही रहती है.!
कोई अगर खुश है तो ईर्ष्या मत करो, ध्यान दीजिए कि आप क्यों दुखी हैं..!!
यह देखकर बहुत ख़राब लगता है कि हमारे आस-पास के लोग बेवजह ईर्ष्या, जलन, नफ़रत और बदले की भावना रखते हैं.

_ बिना बात के एक-दूसरे को जज करते हैं.
_ वे लोगों को अपनी मर्ज़ी के मुताबिक ढालने की कोशिश करते हैं.!!
अहंकार और ईर्ष्या से ग्रस्त इंसान को जीवन में कभी भी सच्ची खुशी नहीं मिलती,

_ क्योंकि उनके मन में हमेशा दूसरों के प्रति ईर्ष्या और अपने आप को बड़ा दिखाने की चाह रहती है.
_ ऐसे लोगों को अपने जीवन में सुधार करने के लिए प्रयास करना चाहिए और अपने अंदर के अहंकार और ईर्ष्या को दूर करना चाहिए.
अक्सर हमें लगता है कि अगर कोई हमसे नफ़रत कर रहा है, तो शायद हमने कुछ गलत किया है.

_ लेकिन हकीकत यह है कि नफ़रत हमेशा जलन की वजह से नहीं होती.
_ कई बार यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत होता है कि आप अपनी ज़िंदगी के सफर में उन लोगों से बहुत आगे निकल चुके हैं.
_ जब आप अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर भीड़ से अलग दिखने लगते हैं, तो जो लोग आपका मुकाबला नहीं कर पाते, वो अक्सर नफ़रत का सहारा लेते हैं.
_ उनकी यह कड़वाहट दरअसल उनकी अपनी हार का शोर है.
_ यह इशारा है कि आपकी रफ्तार इतनी तेज़ है कि वो आपको पकड़ नहीं पा रहे, इसलिए बस दूर से पत्थर फेंक रहे हैं.
_ इस नकारात्मकता को बोझ बनाने के बजाय इसे अपनी ‘सक्सेस रिपोर्ट’ समझिए.
_ याद रखिए, पेड़ पर पत्थर भी तभी मारे जाते हैं.. जब उस पर मीठे फल लगे हों.
_ अगर लोग आपके बारे में बातें कर रहे हैं या आपसे बेवजह चिढ़ रहे हैं, तो समझ लीजिए कि आप कुछ ऐसा कर रहे हैं.. जो वो कभी नहीं कर पाए.
_ उनकी बातों को दिल पर लेने के बजाय अपनी मंज़िल पर ध्यान लगाइए.
_ आपकी कामयाबी ही उनकी नफ़रत का सबसे करारा जवाब होगी.. आगे बढ़ते रहिए, _ क्योंकि आसमान छूने वालों को ज़मीन पर शोर मचाने वालों से कोई फर्क नहीं पड़ता.!!
उन लोगों से कभी नफरत न करें जो आपसे ईर्ष्या करते हैं,

_बल्कि उनकी ईर्ष्या का सम्मान करें, क्योंकि वे वही हैं जो सोचते हैं कि आप अद्भुत हैं.
Never hate those people who are jealous of you, but respect their jealousy, because they are the ones who think you are amazing.
नफ़रत मेरे स्वभाव में नहीं

सच कहूँ तो, ये एक choice भी नहीं
मैं उस level तक नहीं जाऊंगा
जहाँ मन ज़हर से भर जाए।😔
मैंने गुस्से में जीना नहीं सीखा,
बदले की आग में नहीं जलना
हाँ, मैंने तुम्हें माफ़ किया है।
अब मेरे दिल में तुम नहीं हो
न अच्छे में, न बुरे में।😶
मेरे मन में जगह कम नहीं–
पर उसे कचरे से नहीं भरूंगा।
थोड़ा-सा कचरा☠️
अच्छी चीज़ों की खुशबू बिगाड़ता है।
मन एक कमरा है—
जहाँ या तो शांति रहती है,
या पुराने झगड़ों की बदबू।
दोनों साथ नहीं रह सकते।❌
इसलिए मैंने तुम्हें माफ़ किया–
जो हुआ, सो हुआ।
तुमने दुख दिया, पीड़ा दी,
कई बार वो भी नहीं जो मेरा हक़ था।
अब मुझे कोई हिसाब नहीं करना।
मैंने शिकायतों की फाइल बंद की है।
लेकिन माफ़ करना👈
वापस वही रिश्ता जीना नहीं होता।
हर माफ़ी एक दूरी को जन्म देती है
जहाँ आत्मसम्मान खुलकर साँस ले।
Stay away now✔️
तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है।
न तुम्हारा ज़िक्र,न नाम, न कहानी।
तुमने जैसा भी किया—
मैंने सब छोड़ा है।अपनी राह चलो
मुझे भी अपनी राह पर चलने दो।
कुछ लोग माफ़ तो कर दिए जाते हैं,
पर दिल के घर में❤️
उन्हें दोबारा जगह नहीं दी जाती।🌷
-Yu Hi

सुविचार – वाणी – 014

एक सरल सी टिप्पणी भी किसी का मान-सम्मान उस सीमा तक नष्ट कर सकती है, जिसे वह व्यक्ति किसी भी दशा में दोबारा प्राप्त करने में सक्षम नहीं हो सकता,

इसलिए यदि किसी के बारे में कुछ अच्छा नहीं कह सकते, तो चुप रहें.

जिसकी वाणी विनम्र, शिष्ट और सभ्य होती है, _ उसका ह्रदय विशाल, पवित्र और उदात्त होता है.
मीठा बोल…[ वचन] …

मीठा बोलने मेँ हमारा कुछ नहीं जाता, किन्तु इससे हमें अमूल्य लोग, मित्र मिलते हैं और अनेक समस्याए मुफ्त मेँ हल हो जाती हैं !

अतः मधुर बोलें, वाणी संयम एक महान तप है !!!

दुर्भाषित वाणी हलाहल विष के समान ऐसा नाश करती है, जैसा तेज किया हुआ शस्त्र भी नहीं कर सकता,

इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वाणी की समय- असमय रछा करे.

वाणी पर हमारा नियंत्रण होना चाहिए, ताकि हम शब्दों के दास न बनें.
जमीन अच्छी है खाद अच्छा हो परंतु पानी अगर खारा हो तो फूल खिलते नहीं.

भाव अच्छे हों  कर्म भी अच्छे हों, मगर वाणी खराब हो तो सम्बन्ध कभी टिकते नहीं.

वाणी में सरलता और सज्जनता होनी चाहिए,

बोलने के दौरान संयम के अभाव में कई तरह की समस्याएँ पैदा हो जाती हैं.

वाणी की मधुरता मित्रता बढाती है और

वाणी की कठोरता के कारण व्यक्ति अपनों से भी दूर हो जाता है.

वाणी के व्यवहार को लेकर जितनी लड़ाईयाँ होती हैं,

उतनी धन और सम्पत्ति को लेकर नहीं होती.

इंसान जब जब अपनी जुबान चाबुक की तरह चलाता है तब उसको यह पता नहीं होता कि

उसका एक कठोर शब्द दूसरे इंसान को कितना गहरा जख्म दे देता है.

बोलना या चुप रहना हमारे औजार और हथियार हैं,

इनका इस्तेमाल बहुत सोच- समझ कर करना चाहिए.

हमारी वाणी प्रेम पूर्ण हो. दूसरों में दोष ढूंढ़ना एक ऐसी आदत है

जो स्वयं के लिए भी दुख का कारण बन जाती है.

अगर पानी अपनी मर्यादा तोड़े तो विनाश होता है,

लेकिन वाणी अगर मर्यादा तोड़े तो सर्वनाश होता है.

पानी को छान कर पीते हो ! क्या वाणी को भी छान कर बोलते हो ??
जब बात जरुरत की हो तो, _ जुबान सब की मीठी हो जाती है !!!
सुसंस्कृत वाणी दिलों पर राज करती है..
कर्कश वाणी से कलह का जन्म होता है.

सुविचार – सफलता – सफल – Success – 013

13465703673_35b872d6cf
अपनी सफलता  के लिए ऐसे विशेषज्ञों से सवाल पूछिए और ध्यान से सुनिए, जो आपकी रूचि के हों………उन लोगों से बात कीजिए, आप जिन की तरह बनना चाहते हैं.
मुझे लगता है कि हर किसी के सुखी, सफल जीवन की राह कई तरीकों से तय होती है ;

_ कोई भी ग़लत नहीं है और ऐसा कोई जादुई नुस्खा नहीं है जो हर किसी पर फिट बैठता हो.

पहले ही कदम पर लिए गए दृढ़ संकल्प को _यदि अंत तक कायम रखा जाए तो_ _ वह पूर्ण सफलता प्राप्त करने में कभी विफल नहीं होगा.
मुझे नहीं लगता कि आप आराम क्षेत्र से कुछ भी दिलचस्प बना सकते हैं.

_ आपको डर और असफलता की जगह से काम करना होगा.

I don’t think you can create anything interesting from a comfort zone. You have to work from a place of fear and failure.

सफलता शत्रुओं को आकर्षित करती है. प्रगति ईर्ष्या को जन्म देती है.

अगर कोई आपसे नफरत नहीं करता, तो आप जीवन में सफल नहीं हो रहे हैं.
SUCCESS attracts enemies. PROGRESS invites jealousy. If nobody HATES you, you are not making it in life.
मैं असफल नहीं होने वाला, हार में भी एक मूल्यवान सबक सीखा गया है, और यह मुझे विकसित कर रहा है.

I’m not going to fail, a valuable lesson has been learned even in defeat, and it’s developing me.

यदि आप सफल होना चाहते हैं, तो आपको एक नियम का सम्मान करना होगा: खुद से कभी झूठ न बोलें.

If you want to be successful, you must Respect One Rule: NEVER LIE TO YOURSELF.

आप अपना जीवन तब तक कभी नहीं बदल सकते जब तक आप कुछ ऐसा नहीं बदलते जो आप रोज करते हैं.

आपकी सफलता का राज आपके दैनिक दिनचर्या में पाया जाता है.

You’ll never change your life until you change something you do daily.

The secret of your success is found in your daily routine.

सफलता का अर्थ है उत्साह खोए बिना एक के बाद एक असफलताओं का सामना करना.

Success consists of going from failure to failure without loss of enthusiasm.

यदि आप सफल होना चाहते हैं, तो आपको अधिक कदम उठाना और कम घोषणाएँ करना सीखना होगा ; _ अपनी घोषणा को तब तक गुप्त रखें _जब तक आप यह न जान लें कि _यह स्थायी है; अपने कदम उठाने से पहले कभी भी उनकी घोषणा न करें.!!

_अधिक कदम उठाएँ और कम घोषणाएँ करें.!!

यदि, यद्यपि से जीवन नही चलता है, _जो परिस्थिति बने _उसी हिसाब से जीवन को ढालना होता है,

_यही सफलता- असफलता की निशानी होती है..!!

सफलता का वजन उठाने के लिए मजबूत मन चाहिए ;

_ जो तनाव नहीं झेल सकता, वह कामयाबी की ऊंचाइयों पर कभी नहीं टिक पाता.!!

अगर आपकी सफलता आपकी शर्तों पर नहीं है, अगर यह दुनिया को अच्छी लगती है. लेकिन आपके दिल को अच्छी नहीं लगती है, तो यह सफलता बिल्कुल नहीं है.
अगर ज़िन्दगी में सफलता हासिल करना चाहते हैं तो _सबसे पहले जुबान का पक्का बनें, _तभी आप आगे बढ़ पायेंगे..!!
अपनी सफलता का मूल्यांकन इस बात से करें कि इसे हासिल करने के लिए आपको क्या त्याग करना पड़ा.!!
अपने जीवन में अच्छा सोचें, अच्छे व पक्के इरादे रखें. काम जो सोचा है, उसे परिस्थितियों के अनुरूप पूरा करने की ठान लें तो सफलता आपके कदम चूमेगी.
जीवन की सफलता का सब से अच्छा तरीका यह है कि जिस सलाह को आप दूसरों को देते हैं या जिस की दूसरों से अपेछा करते हैं, उसे स्वयं कार्यरूप में परिणत कर दिखाएं.
सफल लोगों की कहानी आपको अपने लक्ष्य के मार्ग पर बिना रुके चलने के लिए ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करती है.
असफलता, सफलता का विपरीत, या उलटा नहीं, उसका भाग है, उसका एक अंग.
एक आदमी सफल है यदि वह सुबह उठता है और रात को सोता है और इस बीच वह जो करना चाहता है वह करता है.

A man is a success if he gets up in the morning and gets to bed at night, and in between he does what he wants to do.

सफल लोग कभी इस बात की चिंता नहीं करते कि दूसरे क्या कर रहे हैं.

Successful people never worry about what others are doing.

हर सफल व्यक्ति के पीछे नफरत करने वालों का एक झुंड होता है.

Behind every successful person lies a pack of haters.

असफलता सफलता के विपरीत नहीं है, यह सफलता का एक हिस्सा है.

Failure is not the opposite of success, it’s part of success.

आपकी संपत्ति आपको या आपकी सफलता को परिभाषित नहीं करती है.

Your possessions do not define you or your success.

अगर आप सफल होना चाहते हैं तो दूसरों को नहीं, खुद को बदलने पर ध्यान दें.

If you want to succeed, focus on changing yourself, not others.

सफलता को कभी अपने सिर पर चढ़ने न दें; असफलता को कभी अपने दिल पर हावी न होने दें.

Never let success get to your head; never let failure get to your heart.

लोग शायद ही कभी सफल होते हैं जब तक कि वे जो कर रहे हैं उसमें उन्हें आनंद न मिले..!!

People rarely succeed unless they have fun in what they are doing.

सफलता के लिए दछता और धीरज का होना जरुरी है और इसके लिए मनःस्थिति और चिंतन में बदलाव आवश्यक है. हमें ज्यादा सकारात्मक और स्वीकार्य बनाना होगा, ताकि असमंजस में भी अडिग रह सकें. समस्या पर अपना ध्यान केंद्रित करने से बेहतर है कि हम चुनौतियों को स्वीकारें और उस पर विजय प्राप्त करें. वास्तव में हर समस्या हमारे लिए एक अवसर प्रदान करती है. अगर हम इस अवसर का उपयोग कर सकें, तो परिस्थिति हमारी दासी होगी.

अंग्रेजी में एक प्रसिद्ध वाक्य है- “फर्स्ट डिज़र्व, देन डिज़ायर” यानी पहले योग्य बनो, बाद में सफलता की कामना करो. जो अपने जीवन में प्रगति चाहते हैं, वे इस वाक्य का मनन और अनुसरण करें. अधिकतर लोग तपस्या से बचने के लिए ‘शॉर्टकट’ तरीके खोजते हैं. हो सकता है कि शॉर्टकट से सफलता मिल जाये, पर ऐसी सफलता छणिक होती है. साथ ही, इसके दूरगामी परिणाम हानिकारक होते हैं. असल में सहनशील बनकर व्यक्ति हर समस्या को झेलने में सफल हो जाता है. किसी भी कार्य के आरंभ में अवरोधों का सामना करना होता है. जो उनसे विचलित हो जाते हैं, वे अपने लछ्य नहीं भेद पाते. जो धीरज से आगे बढ़ते हैं, वे उन अवरोधों का निराकरण खोजने में सफल हो जाते हैं.

बड़ी सफलता हासिल करने के लिए आपको किसी और की तुलना में अधिक प्रतिभाशाली या होशियार या बेहतर दिखने या अधिक जुड़ा हुआ होने की आवश्यकता नहीं है ; _ आपको बस उस पर ध्यान केंद्रित करना है जो आप चाहते हैं, उस पर कड़ी मेहनत करें और उस पर टिके रहें.

You dont have to be more talented or smarter or better looking or more connected than anybody else to achieve great success. You just have to focus on what you want, work hard at it and stay on it.

सफलता किसी चमत्कार की तरह हमारे जेहन में जगह बनाती है. जब आप भी आकलन करेंगे, तो पायेंगे कि आप कई मुश्किलों से घिरे हैं. यह सबके साथ होता है, लेकिन थोड़ी- सी कोशिश से मुश्किलों में सफलता की राह बनायी जा सकती है.
सावधान रहें कि आप अपने सपनों को किससे सींचते हैं ; उन्हें चिंता और भय से सींचो, तुम मातम पैदा करोगे जो तुम्हारे सपनों को दबा देंगे. अपने सपनों को आशावाद और कड़ी मेहनत से सींचें, आप सफलता की खेती करेंगे.

Be careful what you water your dreams with. Water them with worry & fear, you will produce weeds that choke your dreams. Water your dreams with optimism and hard work, you will cultivate success.

यदि आप सफल होना चाहते हैं, तो जानें कि आप क्या चाहते हैं, इसके बारे में स्पष्ट रहें और इसे लिख लें..!!

If you want succeed, know what you want, be super clear about it and write it down.

असफलता बस फिर से शुरुआत करने का अवसर है, इस बार अधिक समझदारी से.!

Failure is simply the opportunity to begin again, this time more intelligently.

संयोग से कुछ नहीं होता, कोई भी अनुभव बेकार नहीं होता, आपका दर्द व्यर्थ नहीं है, आज आप जो संघर्ष कर रहे हैं, वह उस ताकत को विकसित कर रहे हैं, जिसकी आपको कल के लिए जरूरत है.

आप जिस भी दौर से गुजर रहे हैं, उससे गुजरें, जिस यात्रा में आप हैं, उसके प्रति सच्चे रहें, प्रक्रिया को सहन करें और आप सफलता का आनंद लेंगे. __अच्छी चीज़ें आपके रास्ते में आ रही हैं, आज हार न मानें.

Nothing happens by accident, no experience is a waste, your pain is not in vain, the struggles you are in today are developing the strength you need for tomorrow.

Go through all that you are going through, stay true to the journey you are in, endure the process and you will enjoy the success. Great things are coming your way, don’t give up today.

सफल होने का कोई तय फार्मूला नहीं है. लेकिन, यह तय है कि कोशिश नहीं करने वाले हमेशा असफल होते हैं. इसलिए कोशिश कभी नहीं छोड़नी चाहिए.
जीवन में सफल लोगों की सफलता के सूत्रों पर ध्यान दीजिए. उनका अनुभव आपका मददगार बन सकता है.
अगर आज मुश्किलें हैं तो डरना मत.. क्योंकि कल आपकी सफलता उसी बुरे वक्त
की बदौलत चमकेगी.!!
हर किसी के पास सफल होने की एक योजना होती है, लेकिन केवल कुछ ही लोग उस योजना को क्रियान्वित करने में सक्षम होते हैं और इसलिए सफल भी कुछ लोग ही हो पाते हैं।
अगर कोई अपने मेहनत से सफलता हासिल करता है तो वो उसका पूरा हकदार है.
जिन्होंने सफलता पाई है, उन्होंने सपने कम देखे हैं और प्रयत्न अधिक किए हैं.!!
सफलता खैरात में नहीं मिलती, संघर्ष में पूरी उम्र गुजरती है.

सफलता शक्ल देख के कदम नहीं चूमती, _ सफलता मेहनत की दीवानी होती है.

आपके कार्यछेत्र में आपकी सफ़लता इस बात पर निर्भर करेगी कि आपको स्वयं पर कितना भरोसा है.

अगर जीवन में कभी असफलता से पाला पड़ जाए तो यह समझ कर न रूकें कि सफ़र यहीं समाप्त है, बल्कि वहीँ से नई राह की शुरुआत समझें.

असफलता यह दर्शाती है कि आप ने सफलता के लिए पूरे मन से प्रयास नहीं किया.

सफलता छोटे – छोटे प्रयासों का योग है, यह प्रतिदिन दोहराया जाता है..

सफल व्यक्ति हर उस काम को करता है, जिसे करना जरुरी होता है. इस तरह के काम को वो टालता नहीं है.

सफल व्यक्ति हर किसी को खुश करने की कोशिश नहीं करता है. ऐसा करना संभव भी नहीं है.

सफल लोग कभी- भी छोटी अवधि में होने वाले लाभ की तरफ आकर्षित नहीं होते हैं. वह हमेशा लांग टर्म टारगेट सेट करते हैं.

जीवन के हर छेत्र में सफल लोग खुद से सवाल करते हैं. खुद से ही सवाल पूछ कर वह जानना चाहते हैं कि जो काम वह कर रहे हैं, वह सही है या नहीं.

सफल लोग हर दिन को महत्वपूर्ण मानते हैं, उनके लिए कोई दिन अच्छा और कोई दिन खराब नहीं होता है.

सफल व्यक्ति भी गलती करता है. लेकिन, एक सफल व्यक्ति अपनी गलतियों को स्वीकार करता है और कोशिश करता है कि आगे उससे वही गलती न हो.

सफल वही होता है, जो लछ्य का निर्धारण करता है और उस पर अडिग रहता है. रास्ते में आनेवाली हर कठिनाइयों का डटकर सामना करता है और छोटी- छोटी कठिनाइयों को नजरअंदाज कर देता है.

सफल होने के लिए जरूरी नहीं कि आप ज्यादा स्मार्ट या ज्यादा पढ़े-लिखे हों ; _ आपकी शक्ति महत्वपूर्ण कार्य करने पर ध्यान केंद्रित करने की आपकी क्षमता में निहित है ;

_ यदि आप सही चीजों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और उन पर अक्सर काम करते हैं, तो आप असाधारण परिणाम प्राप्त करेंगे.

हम सभी अपने जीवन में सफलता चाहते हैं, लेकिन हम उस शिद्दत और जुनून के अनुरूप जीवन नहीं जी पाते और कई बार बड़े मौके गंवा देते हैं.!!
वह जो लगातार हर दिन योजना बनाता है, वह जीवन के सभी वर्षों में सफलता पूर्वक यात्रा करेगा.!!
सफ़लता अपनी कीमत वसूल करती है, _ जो उस कीमत को चुकाने के लिये तैयार है _ उसे निराश होने की ज़रूरत नहीं है.
“असफलता का मौसम, सफलता के बीज बोने के लिए सर्वश्रेष्ठ समय होता है.”
सफल व्यक्ति के जीवन में समस्याऐं नहीं, _ सिर्फ चुनौतियाँ होती हैं.
सफल व्यक्ति वही है जो सुबह उठ कर पहले यह तय करता है कि आज उसे क्या – क्या काम करने हैं _

_ और रात तक वह उन सारे कामों को कई परेशानियों के बाद भी पूरा कर लेता है.

लोग हमें कमजोर बनाते हैं ताकि वे हमारे माध्यम से अपनी इच्छाएं पूरी कर सकें… और फिर जब आप असफल होते हैं तो वे आपको कोसते हैं.

_ इसलिए अपनी सफलता की जिम्मेदारी खुद लें और ऐसे लोगों से खुद को दूर रखें.!!
“सफलता शोर नहीं मचाती”

_ अपने लक्ष्यों को गुप्त रखें, और अपने काम को बोलने दें.
_ हर जीत को दिखाना ज़रूरी नहीं..
_ जो लोग शांत रहकर काम करते हैं, वही सबसे गहरी छाप छोड़ते हैं.!!
सफ़लता आपके हालात देखकर नहीं, आपकी मेहनत देख कर आएगी.
सफलता के हर शोर के पीछे होता है _सहनशीलता का मौन..
सफ़लता कि सभी कहानियाँ असफलताओं कि एक पूरी सीरीज से जुड़ी रहती हैं, _ इसलिए असफलताओं से घबराएँ नहीं.
इस दुनिया में, लोग हमेशा आपकी सफलता के रास्ते पर पत्थर फेकेंगे..

_ यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उनसे क्या बनाते हैं – एक दीवार या एक पुल..

असफलता से करीबी लोग भी खुद को दूर का बताते हैं, और सफलता से दूर वाले भी खुद को पास का बताते हैं.

_ हम समाज के तौर पे ऐसे ही हैं.

यदि आप सफल होना चाहते हैं, तो संदेह और परीक्षण के लिए तैयार रहें। जीवन हमेशा चुनौतियों से भरा रहेगा। इसी तरह हम बढ़ते हैं.

If you want to be successful, prepare to be doubted and tested. Life will always be full of challenges. That’s how we grow.

सकारात्मक सोच के साथ आपकी सकारात्मक कार्रवाई से सफलता मिलती है.

Your positive action combined with positive thinking results in success.

अपनी सफलताओं पर इतराकर किसी का अपमान न करें,

_ आपकी सफलताएं किसी के असफल होने का प्रमाणपत्र नहीं हैं..!!

जब आप सफलता के खास मुकाम पर पहुंच जाते हैं,

_ तो आपको लोगों के तानों का जवाब देने का साहस मिल जाता है.!!

यदि हमें अपने जीवन में हमेशा सफ़लता मिलती रहेगी, _

_ तो कभी हमें जीवन का असल अर्थ पता ही नहीं लगेगा ..

भेड़ चाल से आप सफलता हासिल नही कर पाओगे …

अगर लक्ष्य तक पहुँचना है तो अपना रास्ता खुद बनाओ ..!

अगर दूर तक जाना है तो अकेले ही जाना पड़ेगा !

सफलता की ऊंचाई तक पहुँचने से ज़्यादा ज़रूरी है वहाँ टिके रहना.

_ याद रखें, दुनिया अक्सर आपकी कोशिशों को नहीं, बल्कि आपकी एक चूक को देखने के इंतज़ार में बैठी होती है.
_ अपनी मेहनत को दूसरों के मज़ाक का मौका न बनने दें.
_ हर कदम सावधानी से उठाएं.!
अगर आप मान लेते हैं कि कुछ असंभव है, तो वह सच में असंभव हो जाता है,

_ लेकिन अगर आप यह विश्वास कर लें कि कोई बाधा आपको रोक नहीं सकती,
_ तो आप हर मुश्किल को पार कर सकते हैं.
_ सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, बल्कि सही मानसिकता से आती है.
If you believe that something is impossible, it truly becomes impossible. But if you have faith that no obstacle can stop you, you can overcome any challenge. Success comes not just from hard work but from the right mindset.
जीवन का आनंद लेना और अपने मनभावन कर्म करना ही सफलता है.
सफलता को मापने का ऐसा निश्चित पैमाना नहीं है, जिसमें आप नाप कर यह कह सको कि हां यह व्यक्ति सफल है.

_ आज के इस दौर में मेरी निगाह में सफल वही है जो सांसारिक सुख सुविधाओं को अपने दैनिक जीवन में उतनी ही अहमियत दे रहा है,
_ जितने से दैनिक कार्य सुचारू रूप से चल सके.
_ फर्जी के संसाधन एकत्र करके खुद को योग्य व धनाढ्य साबित करने वाले जिंदगी भर इन्ही जंजालों में बंधे रहते हैं.
_ अगर आप अपने कार्यों से स्वयं संतुष्ट रहते हैं और आपको लगता है कि आप जिस काबिल हैं, उतना योगदान दे रहे हैं और आपके कार्यों से किसी का अहित नहीं हो रहा है तो मेरी नजरों में आप सबसे सफल व्यक्ति हैं.!!
जीवन में सफलता पाने के टिप्स –

  1. कुछ लोग अपना गोल (लक्ष्य) छोटा सेट करते हैं और उसे हासिल करके खुश हो जाते हैं …
  2. व्यक्ति को हमेशा वही काम करना चाहिए, जिसमें उसकी रूचि हो …
  3. सफलता को पाने के लिए व्यक्ति को अपनी लाइफ संतुलित बनानी चाहिए …
  4. कहावत है कि असफलता का अर्थ है कि सफलता का प्रयास पूरे मन से नहीं किया गया..

सुविचार – क्रोध- गुस्सा – नाराज़गी – 012

288070518_da27317d4f
गुस्से का अर्थ है कि जब कोई चीज हमारे विरोध में है, स्थिति प्रतिकूल है, उसका विरोध जताने के लिए जो हमारी  ऊर्जा शक्ति विस्फोट करती है, उस स्थिति का नाम क्रोध है.
कभी कभी गुस्से में क़ुछ लोग दूसरों को हानि पहुंचाने की कोशिश करते हैं, _ उन्हें पता ही नही चलता के वो अपना ही नुकसान कर रहे हैं, _ _ सार ये है कि अच्छी जिंदगी के लिए कभी कभी हमें, कुछ चीजों को, #कुछ घटिया लोगों को, #कुछ घटनाओं को, #_कुछ कामों को और #कुछ बातों को इग्नोर करना चाहिए ..

_ अपने आपको मानसिक मजबूती के साथ इग्नोर करने का आदी बनाइये.

आप ही का गला ना काट ले कहीं, ज़ुबान बहुत तेज है आपकी ??
सभी लड़ाइयाँ लड़ने लायक नहीं होतीं ; कई बार जाने देना वास्तव में जीत है. अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें, उन लोगों को क्षमा करें जिन्होंने आपको चोट पहुंचाई है, और लोगों या चीजों को अपने ऊपर हावी न होने दें ; _ यह अंततः आपको मार सकता है.
क्रोध क्या हैं ? क्रोध भयावह हैं, क्रोध भयंकर हैं, क्रोध बहरा हैं, क्रोध गूंगा हैं, क्रोध विकलांग है.
क्रोध को पाले रखना, गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान हैं, इसमें आप स्वयं ही जलते हैं.
क्रोध को छमा से, विरोध को अनुरोध से, घृणा को दया से, द्वेष को प्रेम से और हिंसा को अहिंसा की भावना से जीतो.
जब लोग गुस्से में हों तो उनकी बात सुनें, क्योंकि तभी असली सच्चाई सामने आती है.

Listen to people when they are angry, because that is when the real truth comes out.

अपने गुस्से को स्पष्ट करें, व्यक्त न करें, और आप तुरंत तर्क-वितर्क के बजाय समाधान का द्वार खोल देंगे.

Explain your anger, don’t express it, and you will immediately open the door to solutions instead of arguments.

जब लोग गुस्से में हों या नशे में हों तो उनकी बात ध्यान से सुनें क्योंकि तभी अनफ़िल्टर्ड सच सामने आता है.

Listen carefully to people when they are angry or drunk because that’s when the unfiltered truth comes out.

वह जो _ एक पल के गुस्से को दबा सकता है, कई दिनों तक होने वाले दुख को रोक सकता है.
मूर्ख मनुष्य क्रोध को जोर-शोर से प्रकट करता है, किंतु बुद्धिमान शांति से उसे वश में करता है.
क्रोध मस्तिष्क के दीपक को बुझा देता है। अतः हमें सदैव शांत व स्थिरचित्त रहना चाहिए.
आप किसी व्यक्ति को वर्षों में उतना नहीं जान सकते,

_ जितना कि उसे क्रोध की स्थिति में देखकर जान सकते हैं.!!

अगर आप सही मायनों में अपना ख्याल रखना चाहते हैं तो क्रोध की आग को बुझाना सीखें,

_ क्योंकि यह सबसे पहले आपको ही जलाती है.!!
अगर आप सही हैं तो शांत रहिए, अगर ग़लत हैं तो गुस्सा करने से कुछ नहीं बदलेगा.
गुस्सा बुरा है, पर इसी गुस्से में कई बार इंसान वो सच कह जाता है, जिसे वह छुपा रहा होता है.!!
क्रोध से मूढ़ता उत्पन्न होती है, मूढ़ता से स्मृति भ्रांत हो जाती है, स्मृति भ्रांत हो जाने से बुद्धि का नाश हो जाता है और बुद्धि नष्ट होने पर प्राणी स्वयं नष्ट हो जाता है.
जो मनुष्य क्रोधी पर क्रोध नहीं करता और क्षमा करता है, वह अपनी और क्रोध करने वाले की महासंकट से रक्षा करता है.
सुबह से शाम तक काम करके आदमी उतना नहीं थकता, जितना क्रोध या चिन्ता से पल भर में थक जाता है.
क्रोध में हो तो बोलने से पहले दस तक गिनो, अगर ज़्यादा क्रोध में तो सौ तक.
क्रोध में उत्तर मत दीजिये, _ ऐसे उत्तर हमेशा खुद के लिए नया प्रश्न और परेशानी बनते हैं..!!
क्रोध हवा का वह झोंका है जो बुद्धि के दीपक को बुझा देता है.
क्रोध की फुफकार अहं पर चोट लगने से उठती है.
क्रोध करना पागलपन हैं, जिससे सत्संकल्पो का विनाश होता है.
वास्तव में हमें हर हाल में अपने क्रोध पर काबू रखना चाहिए, जिससे हमारा या अन्य किसी का अहित न हो सके.
जीवन में जो भी कर्म करो, होश में करो. क्रोध में अगर होश रह जाए तो विनाश नहीं होता.
क्रोध में ना कोई फैसला लो और ना ही किसी से बहस करो,

_ क्योंकि उस समय आप ना खुद को समझ पाते हो, ना सामने वाले को.!!

यदि आप गुस्सैल और अहंकारी हैं तो आपको दुश्मनों की कोई जरुरत नहीं है, आपको बर्बाद करने के लिए ये दो दुर्गुण ही काफी हैं.
गुस्से में बोला हुआ एक कठोर शब्द इतना जहरीला बन सकता है कि आपकी हजार प्यारी बातों को एक मिनट में नष्ट कर सकता है.
यदि आप सही हैं तो आपको गुस्सा होने की ज़रूरत नहीं..

_ यदि आप गलत हैं तो आपको गुस्सा होने का कोई हक़ नहीं..
_ यदि कोई आपकी बात मानता ही नहीं तो गुस्सा करके कर भी क्या लेंगे ?
_ न जाने क्यों, फिर भी लोग गुस्सा करते रहते हैं..
_ खुल कर नहीं करेंगे तो घुमा-फिरा के करेंगे..
_ शांत हो कर बैठना सीखो..
_ गुस्से को जीवन मूल्य मत बनाओ.!!
ग़ुस्सा करने वालों की अक़्ल महदूद और कमज़ोर होती है, न ख़ुद उस इंसान को फ़ायदा पहुँचाती है, न किसी दूसरे को, साथ ही उसकी बदकलामी, बदज़ुबानी से लोग उस से दूरी बनाने लगते हैं,

एक वक़्त ऐसा आता है कि इंसान बिल्कुल अकेला रह जाता है, ग़ुस्से और ज़बान को का़बू में रखें, ताकि सबके अज़ीज़ बन सकें.

क्रोध अपने आप विपत्ति उत्पन्न करता हैं, क्रोधी मनुष्य दूसरों को हानि पहुँचाता है परन्तु उससे अधिक अपने आप को घायल कर लेता है.
क्रोध बुरा होता है, पर जहां जरुरत हो, वहां दिखाना भी चाहिए, नहीं तो गलती करने वाले को एहसास ही नहीं होगा कि वह गलत कर रहा है ; वह आपके साथ हमेशा वैसा ही व्यवहार करेगा.
गुस्सा करने वाले लोग बुरे नहीं होते, बल्कि शक्कर की तरह दिखावटी मीठा बोलने वाले लोगों से बचकर रहना चाहिए, मीठा बोलकर लोग ज्यादा फायदा उठाते हैं.
क्रोध करने का अर्थ है, दूसरों कि गलतियों का स्वयं से प्रतिशोध लेना.
क्रोध बुरे विचारों की खिचड़ी है. उसमे द्वेष भी है, दुःख भी है, भय भी है, तिरस्कार भी है और अविवेक भी.
जो मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप में नहीं कह सकता, उसी को क्रोध अधिक आता है.
केवल वही लोग भड़कते और क्रोधित होते हैं, जो गलत होते हैं,

_ जो सही होगा, वो हमेशा परिस्थिति को सुधारने और संभालने का प्रयास करेगा.!

क्या आप जानते हैं ? क्रोध और आँधी दोनों बराबर हैं ….

शान्त होने के बाद पता चलता है, कितना नुकसान हुआ है ..

खौलते हुये पानी में जिस तरह प्रतिबिंब नहीं देखा जा सकता,

उसी तरह क्रोध की स्थिति में सच नहीं देखा जा सकता है.

क्रोध को जीतने में मौन सबसे अधिक सहायक है.
जब क्रोध आए तो उसके परिणाम पर विचार करो.
क्रोध से धनी व्यक्ति घृणा और निर्धन तिरस्कार का पात्र होता है.
क्रोध मूर्खता से प्रारम्भ और पश्चाताप पर खत्म होता है.
क्रोध के सिंहासनासीन होने पर बुद्धि वहां से खिसक जाती है.
क्रोध में की गयी बातें अक्सर अंत में उलटी निकलती हैं.
क्रोध एक प्रकार का क्षणिक पागलपन है.
क्रोध में विवेक नष्ट हो जाता है.
क्रोध एक स्थिति है, जिसमे जीभ मन से अधिक तेजी से काम करती है.
यदि आप सही हैं तो आपको गुस्सा होने कि जरुरत नहीं..

और यदि आप गलत हैं तो आपको गुस्सा होना का कोई हक नहीं…

क्रोध एक ऐसा तेजाब है जो जिस चीज़ पे डाला जाता है,

उससे ज्यादा उस पात्र को नुकसान पहुंचाता है जिसमे वो रखा है.

गुस्से में आप खुद को भी नहीं संभाल सकते,

लेकिन प्रेम से आप पूरी दुनिया को संभाल सकते हो.

गुस्से को योग्य दिशा में मोड़ा जाए तो पछताने की जरुरत नहीं पड़े कभी…
क्रोध में व्यक्ति जिद पर अड जाता है, हिंसा पर उतारू हो जाता है और फिर अंहकार में आकर खुद का ही नुकसान कर बैठता है.
गुस्से में इंसान बकवास तो करता ही है.. लेकिन कई बार वह बात भी बोल जाता है जो होश में बोलने की उसकी हिम्मत नहीं होती.!!
किसी इंसान से अच्छा रिश्ता होना ये नहीं दर्शाता कि आप उसे अच्छी तरह जानते हैं.

_ जब तक आपने किसी का गुस्सा नहीं देखा, तब तक आप उसे पूरी तरह नहीं समझ सकते.
_ लोग जो सोचते हैं, वो हमेशा ज़ाहिर नहीं करते.
_ सामाजिक शिष्टाचार, रिश्ते बनाए रखने की कोशिश या फिर सभ्यता की नकाब में बहुत कुछ छिपा रहता है.
_ लेकिन जो बातें दिल के अंदर दबी रहती हैं, वो गुस्से के समय बाहर आ जाती हैं.
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से,
_ गुस्सा एक ऐसा भाव है जो इंसान के अंदर जमा हुए अनकहे विचारों को जुबान पर ले आता है.
_ गुस्से में इंसान वो सब कुछ कह देता है जो वो सामान्य स्थिति में कभी नहीं कहता — क्योंकि उस वक़्त उसका “सोचने का फिल्टर” काम नहीं करता.
उदाहरण के तौर पर:
_ मान लीजिए, आपका एक रिश्तेदार हमेशा आपसे अच्छे से पेश आता था.
_ एक दिन किसी छोटी-सी बात पर गुस्से में कुछ कह बैठा,
_ ये बात क्या उस पल ही पैदा हुई ? नहीं.. ये उसके मन में पहले से बैठी थी.
_ गुस्से ने बस उसे बाहर निकाल दिया.
मनोविज्ञान कहता है:
“जब कोई इंसान गुस्से में बोलता है, तो वह केवल आवेग से नहीं बोलता, बल्कि अपने भीतर दबे हुए विचारों के भंडार से बोलता है.”
_ यानी गुस्सा केवल तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि अंदर छिपे विचारों का तीव्र प्रदर्शन है.
_ इसलिए जब कोई गुस्से में होता है, तो वह कुछ नया नहीं कहता — बल्कि वह अपने छुपे हुए विचारों की परतें हटा देता है.
_ आपके बारे में लोग क्या सोचते हैं, यह आप उनकी मुस्कान, अच्छे व्यवहार या देखभाल से नहीं जान सकते.
_ लेकिन आप यह जरूर जान सकते हैं.. जब वो आपसे नाराज़ होते हैं — क्योंकि तब उनकी जुबान पर उनका असली मन होता है, न कि शिष्टाचार.
_ तो किसी के गुस्से को केवल सुनें नहीं — समझें, विश्लेषण करें.
_ रिश्ते अक्सर गुस्से से नहीं टूटते, बल्कि गुस्से से सच्चाई सामने आती है.
अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें, यह खतरे से एक कदम दूर है ; इससे पहले कि वह आपको नष्ट कर दे !

क्रोध एक बहुत ही नकारात्मक भावना है, यह आंखों को अंधा कर देता है और मस्तिष्क को बंद कर देता है, और अंत में यह दर्द लाता है.

अपनी भावनाओं को अपना निर्णय न लेने दें, इसे हमेशा तर्क के अधीन रखें.

इससे पहले कि आप गुस्से से प्रतिक्रिया दें, परिणामों के बारे में सोचें ; _ ऐसा काम कभी न करें जिसके लिए आपको बाद में पछताना पड़े !

लोग हमेशा आपका अपमान करेंगे, आपको परेशान करेंगे, आपको भड़काएंगे ; _ लेकिन उन्हें कभी भी आप पर नियंत्रण न करने दें !

उनके कार्यों को आपकी प्रतिक्रिया निर्धारित नहीं करनी चाहिए.

क्रोध के उपायों में से एक विलंब है ; _ प्रतिक्रिया देने से पहले एक क्षण लें, गहरी सांस लें ; _ जब तक आप सीधे नहीं सोच रहे हैं तब तक कार्य न करें.

_क्रोध से कुछ भी हल नहीं होता है, यह सब कुछ नष्ट कर देता है और हमेशा याद रखें, जो आपको क्रोधित करता है _ वह आप पर विजय प्राप्त करता है.

कुछ लोग हमारे क्रोध के नहीं, बल्कि दया के पात्र होते हैं,

_ इसलिए हमको क्रोध करने से पहले, चिन्तन करना आवश्यक है, कि सामने वाला व्यक्ति क्या है..

— हर किसी पर क्रोध करना उचित नहीं है, कुछ लोग मानसिक रूप से इतने गरीब होते हैं कि उनके पास उनकी हरकतों के अलावा कुछ नहीं होता…

_ जब उन्ही हरकतों पर क्रोध आता है, तो सोचता हूँ, यदि ये इतने ही समृद्ध होते तो ऐसा क्यों करते, फिर उनपर दया आने लगती है !!

गुस्सा दो तरह का होता है —

_ एक स्वभाव वाला, जो बस बेवजह बह जाता है — इससे बचना चाहिए.
_ दूसरा वो, जो जीवन की असंगतियों को देखकर भीतर उठता है —
_ वो दरअसल आपकी जागरूकता का प्रमाण है.
_ अगर और भी condensed चाहिए — ultra short:
_ बेवजह वाला गुस्सा कमजोरी है, अन्याय पर उठने वाला गुस्सा — जागरूकता है.!!
क्या करोगे किसी से नाराज़गी रखकर ?

_ जिंदगी का तो वैसे भी कोई भरोसा नहीं.
_ क्या पता, कब, कहां और किसका आख़िरी हो ?
_ इसलिए हर एक लम्हे को खुलकर जी लो,
_ जो भी यादें हैं, उन्हें संजो लो,
_ जो भी बिखरा है, उसे समेट लो.
_ अगर कोई रूठा है, तो उसे मना लो,
_ जोड़कर अपने पास रख लो.
_ क्योंकि जिंदगी कभी भी
_ फिर से कुछ भी नहीं दोहराएगी.
_ एक दिन हम भी गुजर जाएंगे यूं ही अचानक…
_ हम चलें जाएंगे, कोई और आ जाएगा.
_ कहानियां यहीं रहेंगी, बस किरदार बदल जाएगा.!!
– Neha Chandra

सुविचार – निन्दा – निंदा – निन्दक – निंदक – चुगली – चुग़ली – बुराई – कानाफूसी – 011

आइए हम अपने आप को ही अच्छा बना लें,

_ ताकि दुनिया से एक बुरा इंसान कम हो जाए..!!

चाहे कोई आपके साथ कितना भी बुरा करे, उसके स्तर तक मत गिरो.

_ शांत रहो और दूर हो जाओ..!!

खुद को दूसरों की निंदा और चुगली करने से खुद को बचाए रखने की आदत विकसित करें _आपको जबरदस्त लाभ होगा.
किसी का अनुकरण मत करो, अपने मन-आत्मा के दर्शाए मार्ग पर चलते रहो..

_ और हाँ, निन्दकों से परहेज़ मत करो, मन की शुद्धि और परिमार्जन के लिए वे भी ज़रूरी हैं.
_ ऐसे ही नहीं कह गए कवि, “निन्दक नियरे राखिए”
जिस दिन अपनो की चुगली सुनने से इनकार कर दोगे..
_ उस दिन के बाद कोई भी बाहरी व्यक्ति आपकी शांति भंग नही कर पाएगा.!!
अपने अंदर के बुरे को संतुष्ट करने के लिए, ग़लत करने पर, अपनी ज़मीर की आवाज़ को दबाने के लिए, _हर इंसान दूसरों की बुराई के बारे में भौंकने लगता है.
निंदा-चुगली-कानाफूसी में रुचि लेना मानवीय आचरण के अनुरूप नहीं है.

_इससे बचें और आलोचना का सकारात्मक रूप अपनाएं.

क्योंकि वह वैसा नहीं करता, जैसा आप करते हैं,

या वह वैसा नहीं सोचता, जैसा आप सोचते हैं.!!

_क्या इसीलिए आप किसी की निंदा करते हैं ?

अपने दिल दिमाग के थोड़े से भी हिस्से से आप बुराइयों को निकाल बाहर कीजिए, _

_ तुरंत उस रिक्त स्थान को सृजनात्मकता भर देगी ..

अगर हर कोई आपकी तारीफ करता रहेगा, तो आप अपनी कमियों को पहचान नहीं पाएंगे, बुराई भी ज़रूरी है, सुधार के लिए.!!
आज के समय में लोग आपकी बुराई पर एकदम विश्वास करेंगे लेकिन अच्छाई पर नहीं..

_ बुराई हैरान नहीं करती, अच्छाई करती है..!!

हो सकता है कि कुछ लोग आपको पसंद ना करते हों,

_ लेकिन वो अपनी महफ़िल में आपकी चुग़ली करना बहुत पसंद करते हैं.!!

ज्यादातर लोग सिर्फ इस लिए दुःखी हैं, क्योंकि _

_ उन्हें खुद से ज्यादा दूसरों की पंचायती में रहने से मतलब है ..

जब आप औरों का बुरा करने की यात्रा शुरू करते हैं तो

_ अपनी भी बर्बादी का रास्ता खोल लेते हैं..!!

यदि मुझे प्रशंसा पसन्द है तो इसका अर्थ है कि मैं निन्दा द्वारा सरलता से दुखी हो सकता हूँ.
जो लोग चुगली-निंदा करते हैं, बना बनाया घर ताप देते हैं ऐसे लोग.!!
कई व्यक्ति इतने कमनसीब होते हैं कि वो आएंगे..

_ और बनता हुआ काम बिगाड़ जाएंगे.!!

आपकी आदत है आलोचना, निंदा करने की _ तो जी भर कर किया करिए ;

_ क्यूंकि समझदार आदत में सुधार कर के सुखी हो जायेगा, और नासमझ आप से दूर होकर !!

“चुगली- निंदा” शुरुआत में सुखद और मजेदार लग सकता है,

_लेकिन अंत में, यह हमारे दिलों को कड़वाहट और जहर से भर देता है !

ध्यान दें कि लोग आपसे दूसरे लोगों के बारे में कैसे बात करते हैं.

_क्योंकि ठीक इसी तरह वे आपके बारे में दूसरों से बात करते हैं.!!

उस जगह बैठना छोड़ दो, जहाँ लोग दूसरों की चुग़ली करते हैं.

_ क्योंकि आपके वहाँ से जाते ही उन लोगों की चुग़ली का अगला विषय आप होंगे.

आपसे जलने वाले आपकी बुराई करेंगे और आपसे नफरत करने वाले उस पर भरोसा करेंगे ;

_ आपके बारे में सबको भड़काने वाले ज्यादा हैं और उन पर विश्वास करने वाले उससे भी ज्यादा हैं.!!

चुगलखोरों की मंडली से दूर ही रहो, क्योंकि वहां बैठकर आप सिर्फ़ सुनते हो,

_ पर आपके जाते ही आप भी उनकी चर्चा का हिस्सा बन जाते हो.

लोगों का काम है चुगली-निंदा का स्वाद लेना,

_ आज मेरा ले रहे हैं कल आपका और परसों किसी और का लेंगे..!!

निंदा करने वालों को अनदेखा करो ;

_ जो पीठ पीछे बोलते हैं, उनका कद हमेशा नीचा ही रहता है.!!

निंदा से मत घबराओ, ये दुनिया का पुराना नियम है.

_ यहाँ सम्मान और तारीफें अक्सर इंसान की मौत के बाद ही सरेआम गूँजती हैं.
हर किसी में कुछ न कुछ अच्छाई जरूर होती है,

_ फिर छोटी सी बुराई का हिसाब क्यों रखा जाए..!!

जिन्हें आप कभी अपना सबसे करीबी मानते थे,

_ वही लोग ग़ैरों में जाकर आपकी चुग़लियाँ करते हैं.!!

चुगली करने वालों से दूर रहो..
_ क्योंकि उनकी तीखी बातें खून के गहरे रिश्तों को भी कमजोर कर देती हैं.!!
किसी की बुराई करने का हमें कोई हक नहीं है..
_ पर हमने हक की बात मानी कब है ?
जब लोग किसी की खोज-खोज कर कमियाँ निकालते हैं,

_ तो उन्हें खोज-खोज कर अच्छाइयों की चर्चा भी करनी चाहिए.!!
दूसरों की प्रशंसा से खुद को मूल्यवान मत समझो,

_ अन्यथा उनकी निंदा-आलोचना से आप टूट जाओगे.!!
जो लोग आपकी पीठ पीछे बोलते हैं, उन्हें बोलने दीजिए..

_ ये संकेत है कि आप उनसे आगे बढ़ चुके हैं.!!
कुछ लोग होते हैं, जिनको पता होता है कि कौन-कौन उनकी बुराई करता है.

_ फिर भी वो उन्ही से चिपके रहते हैं..
_ ऐसा लोगों से चिपकने वाला इंसान मुझसे तो नहीं बना जाता.!!
जिस व्यक्ति में कोई अच्छे गुण नहीं होते वह दूसरों में कमियां निकाल कर तथा बुराई करके स्वयं को अच्छा बनाने का प्रयास करता है.
प्रशंसा नहीं कर सकते तो निन्दा भी न करें. निन्दा करनी भी है तो सधे हुए शब्दों में करें, जो सीख दे न कि चोट पहुँचाए.
ज्ञानियों का समय काव्य और ग्रंथो के आनन्द में व्यतीत होता है और मूर्खों का बुराई तथा लड़ाई-झगडे में.
माना कि आप किसी बुराई की वजह नहीं होगें, _ पर किसी अच्छाई की वजह तो बन ही सकते हो.
अगर आप दूसरों की बुराई करते हैं, तो उस से केवल दूसरा ही नहीं बल्कि आप भी प्रभावित होते हैं.

अच्छे आदमी की जरा सी बुराई जल्दी फ़ैल जाती है. बुरे आदमी को बुरा कहने वाले कम होते हैं.

वह व्यक्ति कभी बहादुर नहीं हो सकता, जो कष्टों को जीवन की सब से बड़ी बुराई समझता है.
खुद मे झाकने के लिये जिगर चाहिये, _ दुसरो की बुराईया खोजने मे तो हर शख्स माहिर है.
निंदा भी कमाल की “ऊर्जा” _ निंदा कायर को मार देती है और साहसी को निखार देती है.
आप निंदा में जो कुछ भी कहते हैं _ वह सिर्फ दूसरों की निंदा नहीं है, _ वह आपकी घबराहट को ही दर्शाता है.
लोग चर्चा ही न करें, यह अधिक बुरा है _ वे हमारी निंदा करें, यह कम बुरा है !
ऐसा जीवन जियो कि अगर कोई आपकी बुराई भी करे तो लोग उस पर विश्वास न करें.
स्वयं की उन्नति में अधिक समय देंगे तो, दूसरों की निंदा करने का समय नहीं मिलेगा.
समझदार इंसान ना तो किसी की बुराई सुनता है और ना ही किसी की बुराई करता है.
अपनी तारीफ स्वयं करें _ क्योकि..आपकी बुराई करने को बहुत से तैयार बैठे हैं… !!
चापलूसी और चुगली कोई कितनी भी कर ले, डंका सच्चाई का ही बजेगा..!!
चुगली-निन्दा करने वाला इंसान बिना किसी काम के खुद को व्यस्त रखता है,

_ बेचारा यह समझने में विफल रहता है कि वह दूसरों पर इतना समय और ऊर्जा बर्बाद कर रहा है और लोग मुफ्त में इसका आनंद ले रहे हैं.!!
ऐसे लोगों से दूरी बनाकर रखें, जो किसी दूसरे की बुराई-चुगली आपके सामने करते हैं..

_ क्योंकि ये वही लोग होते हैं.. जो दूसरों की बुराई आपके सामने और आपकी बुराई दूसरों के सामने करते हैं.
_ ऐसे लोग किसी के सगे नहीं होते, ये बस सबके सामने अच्छा होने का ढोंग करते हैं.!!
जो दूसरों के बारे में चुगली करता है उससे दूर रहें,

_ आपके जाने के बाद वह आपके बारे में ही चुगली करेगा.!!

जो इंसान आपके सामने कुछ और पीठ पीछे कुछ और होता है,

_ उससे रिश्ता रखना अपने आत्म-सम्मान को दांव पर लगाने जैसा है.!!

​“किसी में कोई बुराई नजर आए तो प्रार्थना करें कि उसकी वह बुराई दूर हो जाए.”

“If you find fault with anybody, pray for their freedom from it.”

ख़ुद में झांकने का जिगर चाहिए, _ दूसरों की बुराई में तो हर शख्स माहिर है.
दूसरों की बुराई करके आप अपना किरदार अच्छा नहीं कर सकते.
दिल में “बुराई” रखने से बेहतर है, कि “नाराजगी” जाहिर कर दो.
खुश होना है तो तारीफ सुनिए… _ और बेहतर होना है तो निंदा…
दूसरे की बुराई देखना और सुनना ही बुरा बनने की शुरुआत है.
बुराई कितनी भी बड़ी हो, पर अच्छाई के सामने छोटी ही होती है.
शब्द यात्रा करते हैं, इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें.
कानों में बोलने वाला अक्सर दोगली मानसिकता का होता है..!!
जो पीठ पीछे आपकी बुराई करते हैं, उनसे एक ही बात कहो “लगे रहो”
ज़िंदा हो तो निंदा भी होगी, तारीफ़ तो मरने के बाद होती है.
बुराई हमेशा वही लोग करते हैं, जो बराबरी नहीं कर सकते.
खुद बुराई करके _ अच्छाई की उम्मीद दूसरों से मत रखना..
ख़ुश होना है तो तारीफ़ सुनिए और बेहतर होना है तो निंदा..
बुरा इतना ही करो, जब खुद पर आए तो बर्दाश्त कर सको.
ऐसे लोगों के साथ बैठो, जो कभी भी किसी से न आपकी बुराई करे और न ही किसी की बुराई सुने.!!
खाली बर्तन ही सबसे ज्यादा शोर मचाते हैं ;

_ जिनके पास खुद की कोई खूबी नहीं.. वे दूसरों की निंदा में व्यस्त रहते हैं.!!

आगे बढ़ना है तो _निंदा करने वालों को _बड़े हल्के में लें..

_ इधर की बात उधर करने वाले खुश नहीं रहते.!!

दूसरों से मदद की उम्मीद ही हर बुराई की जड़ है.
किसी की “निंदा” से घबराकर अपने “लक्ष्य” को नही छोड़े,

क्यों कि…अक्सर “लक्ष्य” मिलते ही निंदा करने वालों की “राय” बदल जाती है.

#भलाई करते रहिए बहते #पानी_की_तरह ..

बुराई ख़ुद ही किनारे लग जाएगी कचरे की तरह …

लोग प्रशंसा करते हैं या निंदा इसकी चिंता छोड़ो,

सिर्फ एक बात सोचो कि ईमानदारी से जिम्मेदारियाँ पूरी की गईं या नहीं.

उन व्यक्तियों के जीवन में आनंद और शांति कई गुना बढ़ जाती है..!

जिन्होंने प्रशंसा और निंदा दोनों में एक जैसा रहना सीख लिया..!!

“जो लोग नसीब के सहारे कुछ पाना चाहते हैं,

वो हमेशा कामयाब लोगों की निंदा कर स्वयं को सांत्वना दे लेते हैं”

..समझदार इंसान अपने काम से ही मतलब रखता है..

दूसरों की बुराई करने में वो अपना कीमती वक़्त बरबाद नहीं करता..

समझदार इंसान न तो किसी की बुराई सुनता है और न ही किसी की बुराई करता है.
नकली लोग आपके सामने औरों की और आपकी पीठ पीछे आपकी चुगली करने में बहुत माहिर होते हैं.
किसी की “तारीफ़” करने के लिए जिगर चाहिए….

“बुराई” तो बिना हुनर के किसी की भी की जा सकती है.

जिनके खुद के जीवन का कोई बड़ा लछ्य नहीं है,

वो रात दिन दूसरों की चुगली और बुराई करने में लगे हुए हैं.

जिन लोगों को अकसर दूसरों की बुराई करने की आदत होती है,

उनके अंदर आत्मविश्वास की बहुत कमी होती है.

वो जो करते हैं दूसरों की बुराई मेरे आगे, _

_ सगे वो मुझे किसी के नहीं लगते ..

लोग ” निंदा ” इसलिये नहीं करते कि ..उन्हें कुछ निंदनीय लगा,

_बल्कि इसलिये करते हैं कि ..वे निंदक होना उपलब्धि मानते हैं..!!

जीवन में जब तक व्यक्ति दूसरों में बुराई ढूंढेगा, वो खुश नहीं रह सकता.

जीवन भी एक यात्रा है, जिसमें सकारात्मक सोच जीवन को ख़ुशहाल बनाती है.

किसी की बुराई तलाश करने वाले इन्सान की मिसाल उस ” मक्खी ” सी है,

जो सारे खूबसूरत जिस्म को छोड़ कर केवल ज़ख्म पर ही बैठती है.

अपनी जुबान से किसी की बुराई मत करो, क्योंकि बुराइयाँ आपमें भी हैं और जुबान दूसरों के पास भी है.
बुराई कभी भी किसी कि भी मत करें, क्योकिँ बुराई नाव मेँ छेद समान है, _  छेद छोटा हो या बड़ा नाव तो डुबो ही देता है.
कुछ लोग खुद की कमी छुपाने के लिए दूसरों की बुराई करते हैं..

_ लेकिन उन्हें क्या पता दूसरों को नीचा दिखाकर कोई ऊँचा नहीं बनता.!!

यदि कोई आपके पास आके किसी और की बुराई करता है तो आप इस बात के लिए भी तैयार हो जाइये की वो किसी और के पास जाकर आपकी बुराई भी निसंदेह करेगा

और जिस चाव से आप किसी और की बुराई सुनते हैं उसी चाव से कोई और आपकी भी सुनेगा.

जो आपके साथ बैठकर आपकी बुराई करे या कामयाबी से चिढ़े, वह आपका अपना नहीं हो सकता..

_ ऐसे अपनों से दूरी बनाए रखने में ही समझदारी है.!!
ध्यान से सुनें कि कोई व्यक्ति आप से अन्य लोगों के बारे में _ कैसे बात करता है ;

_ वो ठीक उसी तरह _ आप के बारे में दूसरे लोगों को बातें बताएगा..

जिन चार लोगों में बैठकर आप दूसरों की बुराई करते हैं,

यकीन मानिए आपके जाते ही वहां पर आपकी बुराई शुरू हो जाएगी.

यदि आप मेरे पास आकर किसी और की बुराई करते हैं,

तो मुझे कोई संदेह नहीं की आप दूसरों के पास जाकर मेरी बुराई करते होंगे.

बिना धैर्य के लोग किसी के लिए भी कुछ भी गलत और उल्टा-सीधा सोच लेते और बोल देते हैं.

_ और अब तो मुझे ऐसा लगने लगा है कि यह कोई महामारी है,
_ कि झट से लो और किसी के लिये कुछ भी बोल दो,
_ जमाना ऐसा है कि सब मुँह सोभली बातें करते हैं,
_ ऐसे बहुत ही कम लोग होते हैं,
_जो आपका सच्चे और खुले दिल से समर्थन करते हैं,
_ इसीलिए अपना औरा ही मजबूत ऱखना है..!!
जिनके पास कुछ करने को नहीं होता, वे ही चुगली-निंदा करते हैं.

_ वे शायद सोचते हैं कि और कुछ तो हमारे बस का है नहीं, खाली बैठे क्या करें, चलो, यही कर लें.
_ हम जैसों को देखो, सारी उम्र पढ़ने-लिखने में खपा दी, जॉब करने में खपा दी, ज़िन्दगी की आपाधापी में खपा दी.
_ इन सब बातों का न समय है, न समझ !!
कभी-कभी लोग आप को इसलिए बुरा बना देते हैं ..ताकि उन्होंने जो आप के साथ ग़लत किया ..उसे सही साबित कर सकें.!!
संभल कर किया करें गैरों से हमारी बुराई, _

_ आप जाकर जिसको जताते हैं, वो आकर हमें बताते हैं.

जो शख्स आपसे दूसरों की कमियाँ बयान करता है, _

_ वो दूसरों से निश्चित आपकी बुराई करता होगा.

जब आप बुराई के साथ जीने लग जाते हैं, _

_ तब आपको बुराई में बुराई दिखनी ही बंद हो जाती है.

अक्सर दूसरों की बुराइयां करने वाला खुद बुरा होता चला जाता है, समय के साथ उसका मस्तिष्क परिवर्तन होता है,

और वो दुनिया की हर चीज में कमियां निकालने लग जाता है ..

लोगों से ईर्ष्या करना और लोगों की बुराई करना छोड़ दीजिए,

यकीन मानिए उसके पश्चात आपके पास वक़्त की कमी नहीं होगी.

अच्छाई इसलिए हार जाती है बुराई से क्योंकि कि, बुरे लोग तुरंत संगठित हो जाते हैं,

और अच्छे लोग संगठित होते हैं, तब तक नुकसान हो चुका होता है.

बुराई को जड़ से ख़त्म नहीं किया जा सकता. लेकिन अगर हम सब अपने आप को अच्छा बनायें और नैतिक रूप से ऊपर उठें तो.. बुराई पर निश्चित रूप से काबू पाया जा सकता है.
अपनी किसी भी बुराई या कमजोरी के लिए हालात को दोषी मत ठहराइये.

बारिश की बूँदे सांप और सीप दोनों के मुँह में एक जैसी गिरती हैं,

लेकिन सांप उससे जहर बनाता है और सीप मोती. _ “हालात बस हालात हैं न अच्छे न बुरे”

शब्द- यात्रा करते हैं इसलिए पीठ पीछे भी किसी की निन्दा मत करो. मुख से निकले किसी की निन्दा के शब्द चलते- चलते संबंधित व्यक्ति के पास तक जरूर पहुंचते हैं और दुश्मनी कम होने के बजाए और बढ़ जाती है.

पीठ पीछे दुश्मन की तारीफ करना सीखो, तारीफ के शब्द एक दिन उस तक जरूर पहुंचेंगे और आधी दुश्मनी उसी समय खत्म हो जाएगी. याद रखें- संबोधन अच्छे हों तो संबंध भी अच्छे रहते हैं.

निंदा…बुराई करना……

यदि आप ऐसे लोगो के साथ बातचीत या व्यवहार कर रहे हैं जो दूसरों की निंदा या बुराई करने में तल्लीन हैं तो याद रखिये उनका अगला लक्ष्य आप हैं !

आप भी शीघ्र ही उनकी निंदा या उनके द्वारा आपकी बुराई करने की स्थिति को तैयार रहें, अतः ऐसे लोगों और स्थिति से दूर रहें !!!!

बतोलेबाजी से बचें. इस तरह के लोगों पर लोग भरोसा नहीं करते. अगर आपके आस पास भी ऐसे लोग हैं, तो उनसे दूर ही रहें.

जब कोई किसी की बुराई करे, तो तुरन्त उस जगह से हट जाएँ या उस व्यक्ति को रोकें — इधर की उधर करने वाला अंततः फंसता ही है.

हर व्यक्ति में कोई न कोई अवगुण होते हैं. दुनिया में शायद कोई ही ऐसा व्यक्ति हो जिसमे सभी गुण विद्यमान हों. हमेशा बुराईयों को नजरअन्दाज करें व अच्छाइयों पर ही ध्यान दें.

यदि कोई किसी की बुराई कर रहा हो तो उसमे शामिल न हों. न ही किसी की बुराई करें, न सुनें.

एक तो लोग खुद कोई अच्छा काम नहीं करेंगे और जब कोई दूसरा करता है तो उसमें बुराई ढूंढ़ना शुरू कर देंगे,

यदि आप खुद किसी के लिए कुछ अच्छा नहीं कर सकते तो आपको लोगों की अच्छाई में बुराई निकालने का कोई हक नहीं है.

जिनकी बातों में सिर्फ शिकायतें, आलोचना, निंदा होती है, उनकी जिंदगी भी कीड़े मकोड़े की तरह हो जाती है.!

_ ऐसे लोग न ख़ुद शांति से जी पाते हैं न अपने आसपास के लोगों को शांति से जीने देते हैं.!!
संसार में हर वस्तु में अच्छे और बुरे दोनों पहलू होते हैं, जो व्यक्ति अच्छा पहलू देखते हैं वे अच्छाई

और जिन्हें केवल बुरा पहलू देखना आता है वे उसमे बुराई का संग्रह देखते हैं….

कुछ लोग अच्छी बातों में भी बुराई देखते हैं, वो इसलिए नहीं कि अच्छी बातों में बुराई होती है,

बल्कि इसलिए क्योंकि बुराई देखने वाला _ कभी अच्छाई को देखना ही नहीं चाहता है.

हर व्यक्ति यह समझ जाता है कि जिस तरह आप इन्सान के न होने पर उसकी बुराई कर सकते हैं ,

तो उनके न होने पर उसकी भी बुराई किसी और से कर सकते हैं.

कई लोग व्यक्तिपूजा में विश्वास करते हैं, कई मूर्तिपूजा में, कई विचारों की पूजा में, कई जीवन मूल्यों की पूजा में, लेकिन बुराई को पूजने वाले लोग भी कम नहीं हैं.

_ ऐसे लोगों की नज़रों में बुराई भी एक मूल्य है.
_ उन्हें लगता है, यही मूल्य उनकी नैया पार लगाएगा.. ऐसा होता है क्या ?
किसी पर भरोसा कर उसके सामने तीसरे व्यक्ति कि बुराई न करें.

आपकी बात उस इंसान तक पहुंचेगी ही और आप बाद में शर्मिंदा भी होंगे.

पीठ पीछे बुराई करने वालों के बारे में ज़्यादा सोचने की जरुरत नहीं है .!

_ ऐसे लोग अपना जीवन सिर्फ़ दूसरों की बुराई करने में ही निकाल देते हैं ..!!

यदि आप सोचते हो कि पीठ- पीछे किसी की बुराई करने से लोग आपको भला मान लेंगे,

तो इसका मतलब है कि _ आप को लोगों का मिजाज समझ नहीं आया.

जब कमज़ोर लोग ताकत का आभास देना चाहते हैं तो..

_ वे बुराई करने की उनकी क्षमता का खतरनाक संकेत देते हैं.

इन्सान की अच्छाई की चर्चा में लोग खामोश हो जाते हैं,

पर जब चर्चा उसकी बुराई की होती है तो गूंगे भी बोल पड़ते हैं.

– “बुरे में अच्छा ढूंढो तो कोई बात बने..

अच्छे में बुराई ढूंढना तो दुनिया का रिवाज है.”

लोगों की बुराई करने वाले, छोटी सोच रखने वाले लोग बहुत बड़ी संख्य़ा में दुनिया में भरे पड़े हैं,

यदि आपको आगे बढ़ना है, तो सोच का दायरा बड़ा करें.

निन्दा-चुगली करने वाले खुद तो कुछ करते नहीं और दूसरों को भी फ़ालतू की बातों में उलझा कर उनका भी समय नष्ट करते हैं,

_ इसलिए ऐसे गप्पू लोगों से दूर रहें..!!
जब हमारे अच्छा करने पर भी सामने वाला हमारी निंदा करे तो हमें बुरा लगता है ; _ लेकिन बुरा महसूस करने के बजाए यदि हम यह समझ जाएं कि सामने वाला अपने व्यवहार के लिए स्वतंत्र है ;

मेरी उनसे अच्छे व्यवहार की अपेछा मुझे बुरा अनुभव करा रही है !!

इसलिए अपेछा रूपी बंधन को जितनी जल्दी तोड़ेंगे, उतना अच्छा महसूस होगा !!

ज़िन्दगी में “खुद” को कभी किसी इंसान का “आदी” मत बनाइए. क्यूँकि इंसान बहुत खुदगर्ज़ है.

जब आपको पसंद करता है तो आपकी “बुराई” भूल जाता है और जब आपसे नफरत करता है तो आपकी “अच्छाई” भूल जाता है.

ज्यादातर लोग जिसकी वे निंदा करते हैं, उनसे संबंधित होने के बजाय उस छवि [ image ] से संबंधित होते हैं _जो उनके दिमाग में उनके बारे में गपशप [ gossip ] से आई थी.

– यह बिल्कुल वास्तविक नहीं है _ और ये, एक ख़राब एहसास छोड़ता है.
“यदि आप किसी के बारे में कुछ अच्छा नहीं कह सकते तो अपना मुँह बंद रखें ;
_ यदि आपको किसी के बारे में कुछ कहना है, तो उनके सामने कहें
_ और यदि आप यह बात उनके सामने नहीं कहना चाहते, तो अपना मुँह बंद रखें”
— छोटे दिमाग वाले दूसरों के बारे में बात करते हैं, _जो लोग खुद से नाखुश होते हैं _ उन्हें गपशप [ gossip ] में आनंद मिलता है;
– कभी-कभी मुझे आश्चर्य होता है कि _ अगर गपशप नहीं होती तो _ क्या वहां कोई बातचीत होती..
_यदि हम सभी यह मूल्यांकन [ Evaluation ] कर सकें कि _ हमने कैसे बात की _या अपना समय बिताया, तो चीजें बेहतर होतीं..
_ यदि वे भटक भी गए हों, तो प्रार्थना करें कि उन्हें मार्ग मिल जाए; _ वे भी हमारे जैसे ही इंसान हैं.
– मुझे दुख होता है कि दुनिया कितनी निंदक [ Cynic ] हो गई है.
– मुझे कहावत पसंद है. मुझे गपशप [ gossip ] पसंद नहीं है, फिर भी मेरा मानना ​​है कि ज्यादातर लोग इसे सुनना पसंद करते हैं और यही कारण है कि गपशप अभी भी मजबूत है.
मैं गपशप [ gossip ] करने वाले लोगों से दूर रहता हूं. _इसका मेरे जीवन के लिए कोई मूल्य नहीं है,
_और मेरा दृढ़ विश्वास है कि यदि वे दूसरों के साथ ऐसा कर सकते हैं _तो वे आपके साथ भी ऐसा कर सकते हैं.
– स्वस्थ जीवन जीने की कोशिश करना थोड़ा मुश्किल है ; _ क्योंकि जैसे ही लोगों को पता चलता है कि आप गपशप नहीं करते हैं ;
– वे आपसे दूर रहने लगते हैं. — “जिंदगी कैसी अजीब है.”
— मुझे लगता है जैसे-जैसे हम सरल, अधिक सार्थक जीवन की ओर बढ़ते हैं,
_ दूसरों के बारे में सस्ती बातें _कम और कम _आकर्षक होती जाती हैं.
— चुगली- निंदा रस में रस लेने वालों के लिए यह सुझाव है कि _चुगली- निंदा में रस लेना मानव व्यवहार के अनुरूप नहीं है.
_काना-फूसी का काम घटिया लोग करते हैं _इसलिए इससे बचें और आलोचना करने के लिए सकारात्मक तरीका अपनाएं.
– अक्सर हम निंदा को दिलचस्पी से सुनते हैं तो, हम सुनाने वाले को बढ़ावा देते हैं ; _ सुनाने वाले से ज़्यादा ज़िम्मेवारी सुनने वाले की होती है ; सुनने वाले सुनना बंद कर दें तो, सुनाने वाले किसको सुनायेंगे ? – वातावरण को दूषित होने से बचाएं –
बुरे लोगो से कैसे बचे ?

1) उनसे दुर रहो : (Stay away from them):

बुरे लोगो से घबराकर दूर नहीं बल्कि आपका दिमाग शांत रहे और ऐसे फालतू लोगों की वजह से आपको कोई टेंशन या कोई तकलीफ ना हो _ इसलिए ऐसे लोगों से दुरी बनाये रखें.

जो लोग आपको आसानी से छोड़ सकते हैं, वे वास्तव में आपके लिए कभी बने ही नहीं थे ; _उन्हें जाने दो.

उनके शब्दों पर नहीं, भावनाओं [ Vibes ] पर भरोसा करिए ; लोग आपको कुछ भी बता सकते हैं, लेकिन उनकी एक भावना [ Vibe ] आपको सब कुछ बता देती है..!!

2) उन्हें अपनी कोई भी बात ना बताएं : (Don’t tell them anything about you) बुरे लोगो से अपनी घर की बातें या आपकी कोई भी पर्सनल बातें नहीं बतानी है, _ क्योंकि ऐसे लोग भरोसे के लायक नहीं होते ; ऐसे लोग आपकी बातों को जानकार आपकी कमजोरियों का फायदा उठा सकते हैं और आपको धोखा दे सकते हैं.

3) उनकी चालाकी को समझें :(Understand their tricks)

जब कभी ऐसे लोग आपसे बहुत अच्छी और मीठी बातें करे तो समझ जाना की दाल में कुछ काला है, _जब भी वो बहुत अच्छे से पेश आते हैं तब समझ जाना की या तो वो आपसे कोई काम निकालवाने की कोशिश कर रहे हैं या फिर आपको किसी परिस्थिति में फसा रहे हैं _तो ऐसे में आप उनसे तुरंत सावधान हो जाएं और उनकी बातों में न आएं.

4) उन्हें ज्यादा महत्व न दें : (Don’t give them too much importance) वो आपके सामने दिखावा करेंगे, उनके लाइफ में ज़रा कुछ अच्छा हो जाए तो बढ़ा चढ़कर बताएँगे और आपको जान बूझकर नीचा दिखाने की कोशिश करेंगे __ तो ऐसे में आपको उनको और उनकी बातों को ज्यादा महत्व नहीं देना है.

5) उनसे बहस मत करो : (Don’t argue with them)

जब भी कोई ऐसी बात हो _जिसको लेकर वो आपसे बहस करने लगें तो ऐसी परिस्थिति में पहले आप ये देखो की जिस बात को लेकर वो आपसे बहस कर रहे हैं _ वो बात आपके लिए कितनी महत्व रखती है.

अगर वो बात आपके लिए ज्यादा महत्व नहीं रखती तो _ आप उन बुरे लोगों से बहस करके अपना दिमाग और समय बर्बाद ना करें _ क्योंकि ऐसे लोग दूसरों की नहीं सुनते और बस खुद की ही बात को सही मानते हैं.

6) उनसे किसी भी तरह का लेन देन ना करें : आपको बुरे लोगों से किसी भी तरह का लेन देन या किसी भी तरह का व्यवहार नहीं करना है _ क्योंकि ऐसे लोग खुद का फायदा देख के आपसे किसी भी चीज़ का सौदा करते हैं और बाद में आपको धोखा देते हैं.

7) उन्हें बेवकूफ बनाकर रखो : (Keep them stupid)

जब भी वो आपसे बात करें तो आप उन्हें ज्यादा महत्व देने का दिखावा करो और वो आपसे कुछ भी बढ़ा चढ़ाकर बातें करे तो _ आप उनकी झूठी तारीफ करिए..

_ ऐसा करने से वो आपसे प्रभावित हो जाएंगे और आपको उनकी असली औकात पता होनी चाहिए.

8) कार्रवाई करें (Take action): अगर उनकी बदतमीजी हद से ज्यादा बढ़ जाए और वो आपका किसी भी तरह का कोई नुकसान करें तो _ ऐसे में आप चुप ना रहें और उसको मुँह तोड़ जवाब दें _ क्योंकि ऐसे लोगों को सबक सीखाना बहुत ज़रूरी है,

अगर हम चुप रह कर उन्हें सहते रहेंगे तो वो आपको कमजोर समझकर और ज्यादा दबाने की कोशिश करेंगे.

” पर-निंदा में जो परमानंद है”

_ यह वही जानता है ..जो निरन्तर इसका अभ्यास करता रहता हो.
_ सुस्ती आ रही है ? मन कुछ उदास सा है ?
_ किसी भी परिचित की निंदा करना शुरू कर दो..
_ और देखो सुस्ती कैसे उड़न छू हो जाती है ..और शरीर स्फूर्ति से भर उठता है.
_ जिसके भी भाग्य से आप ईर्ष्या करते हैं ..बस उसकी निंदा में लग जाओ..
_ और जी भर कर उसकी निंदा ..आपके मनोबल को ऊँचे और ऊँचे उठा देगी.
_ हम कितने ‘उच्च हैं’ ऐसा महसूस होते ही सारी निराशा भाग जायेगी.
_ दूसरे कि ख़ुशी, दूसरे कि सफलता देखी नहीं जाती,
_ हम खुद वह काम कर नहीं सकते तो क्या करें..
_ ईर्ष्या कर के, निंदा कर के अपने गम गलत कर लेते हैँ..
_ तो ईर्ष्या-द्वेष भाव से भी निंदा होती है,
_ फिर निंदा करके जो अहं को तुष्टि मिलती है ..वह किसी अमृत से कम नहीं.
_ इसीलिए यह कुछ लोगो के लिए ..यह टॉनिक का या दवा का काम भी करती है.
_ सुबह आँख खुलने से लेकर रात को सोने तक बस यही करते हैं वह.
_ तभी तो इतने संतुष्ट रहते हैं.
_ऐसी आत्म तुष्टि शायद ही किसी अन्य काम से संभव हो.
_ मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जब कोई व्यक्ति किसी अनुपस्थित की निंदा करता है तो..
_ उसका मुख्य कारण बोलनेवाले की ईर्ष्या होती है ..बजाय अगले के वास्तविक दोषों के..!!
_ वह स्वयं को उसके स्थान पर देखना चाहता है ..परन्तु यह संभव नहीं.
_ अतः निंदा कर के उसका क़द छोटा करने की नाकाम कोशिश करता है.
_ इससे उसके अहम् को तुष्टि मिलती है.
_ चूँकि निंदा ईर्ष्यावश की जाती है, अतः ऐसे लोग परनिंदा के संग आत्मप्रशंसा करना नहीं भूलते..
_ जैसे -“मैं तो भई…”
_ सत्य तो यह है कि खुद को बेहतर साबित करने के चक्कर में किसी और की कितनी भी निंदा करें, इसमें उसका कुछ भी बिगड़ने वाला नहीं,
“निंदा की महिमा अपरम्पार है”

_ निंदा में जो रस मिलता है, वह किसी भी चीज में भी नहीं मिलता,
_ निंदकों की सी एकाग्रता, परस्पर आत्मीयता, अन्यत्र दुर्लभ है.
_ इसलिए संतों ने सलाह दी है उनसे सीखने की..
_ निंदकों को ‘आंगन कुटी छवाय’ पास रखने की सलाह दी है.
_ बेहद पारखी नज़र होती है निंदक की, जिस कमी के बारे में आपको खुद जानकारी नहीं होगी, निंदक उसको खोज निकलेगा.
_ इसीलिए जब एक व्यक्ति ने कबीर से कहा महाराज ..मैं अपनी कमियों को जानना चाहता हूँ,
कबीर ने उसे सलाह दी ” निंदक नियरे राखिये, आँगन कुटी छबाय” बस तभी से शादी की प्रथा शुरू हुई.
_ दूसरे कि ख़ुशी, दूसरे कि सफलता इनसे देखी नहीं जाती,
_ खुद वह काम कर नहीं सकते तो क्या करें ईर्ष्या करके, निंदा करके अपने गम कम कर लेते हैं.!!
“” निंदा, चुगली, बुराई, कानाफूसी “””

किसी व्यक्ति के विषय में उसकी गैरहाजिरी में आलोचना करना हम सबको बहुत पसंद है.
_ इसका आनंद अवर्णनीय है.
_ घंटों बीत जाएं, बातों से बातें खुलती जाएँगी और हम सब मिलकर ऐसे रसमय संसार की रचना कर लेते हैं, इसे निंदा रस कहते हैं.
_ प्रत्येक व्यक्ति अपने विवेक के अनुसार अपना व्यवहार निश्चित करता है.
_ यह ज़रूरी नहीं कि उसका तरीका सबको पसंद आए.
_ फिर, उस पर टीका-टिप्पणी शुरू होती है.
_ उचित-अनुचित पर तर्क दिए जाते हैं और बहस आरम्भ हो जाती है.
_ वार्तालाप का एक ऐसा निरर्थक सिलसिला शुरू हो जाता है..
_ जिससे किसी को कुछ भी हासिल नहीं होता.
_ यदि किसी के सामने उसकी आलोचना करने का साहस न हो, या रिश्तों के बिगड़ने की बाधा न हो तो..
_ अपने मन का गुबार निकालने का यह एक मात्र तरीका है.
_ वैसे, निंदा करने से दो फायदे होते हैं,
_ प्रथम, इस प्रकार कुछ कह-सुन लेने से मन हल्का हो जाता है और द्वितीय, यह अत्यंत रोचक ‘टाइम पास’ खेल है.
_ इसलिए जिनके पास फुर्सत है, वे इसके निपुण खिलाड़ी होते हैं.
_ और जो व्यस्त हैं, वे कम शब्दों में कुछ कहकर या धीरे से मुस्कुरा कर ..इसका सुख प्राप्त कर लेते हैं.
_ हम सब निंदा करने में बहुत आगे रहते हैं लेकिन हम खुद इसे सहन नहीं कर पाते.
_ किसी ‘भेदिये’ से अपने विषय में हो रही निंदा की जानकारी मिलते ही हमारे चेहरे की रंगत बदलने लगती है,
_ कान गर्म होने लगते हैं और हमारे दिमाग में दूषित बातें जन्म लेने लगती हैं.
_ कई बार हम अपने संबंधों पर पुनर्विचार करने लगते हैं.
_ हमारी यह सोच न्यायोचित नहीं है.
_ कड़वाहट की तर्ज़ पर आमने-सामने की आलोचना किसी का भी ह्रदय भेदती है और उसे जिद्दी बनाती है.
_ यदि किसी समूह में किसी व्यक्ति की निंदा हो रही हो तो उसे रोकें
_ और लोगों को प्रेरित करें कि भूलों की चर्चा केवल भूल करने वाले के सामने की जाएं.
_ किसी के पीठ-पीछे उसकी आलोचना करने से होने वाली हानियाँ अत्यंत घातक होती हैं.
_ किसी की गलतियां आमने-सामने भी बताई जा सकती हैं.
_ सबसे पहले उसके अच्छे कार्यों की प्रशंसा करें, फिर धीरे से ‘सूगर कोटेड’ कैप्सूल की तरह उसकी भूलों की ओर इशारा करें.
_ ध्यान रहे, किसी को भी दोषी ठहराने का हक आपको नहीं है.
_ इस प्रकार उसकी गलतियों को सुधार का अवसर देकर हम उसके कार्यों तथा व्यवहार को सही दिशा दे सकते हैं.
_ इससे हमारे सम्बन्ध और अधिक मधुर एवं प्रगाढ़ होते हैं.
— निंदा रस में रस लेने वालों के लिए यह सुझाव है कि निंदा में रस लेना मानव व्यवहार के अनुरूप नहीं है.
_ काना-फूसी और चरित्रहरण का काम घटिया लोग करते हैं,
_ इसलिए इससे बचें और आलोचना करने के लिए सकारात्मक तरीका अपनाएं.

सुविचार – आलोचना – Criticism – 010

13468905954_53ac8eb8ce

किसी की आलोचना करना सरल है, किसी काम में मीनमेख निकालना सरल है, किसी के प्रयासों में कमियां और गलतियां निकाल लेना भी सरल है, पर खुद वैसा करके दिखाना बड़ा मुश्किल है.

_ आप आलोचना करने के अधिकारी तभी हो सकते हैं जब आप खुद वैसा करके दिखा दें.. जैसा आलोचना करते हुए कहते हैं.
_ प्रायः वे ही आलोचक बन जाते हैं जो खुद उस काम को करने में सफल न हो सके.
_ कुछ लोग ईर्ष्यालु आलोचना करते हैं, कुछ लोग हीनता की भावना से सिर्फ तुच्छता सिद्ध करके अपने मन को समझाने के लिए आलोचना किया करते हैं.
_ ऐसे लोगों की नजर किसी काम की अच्छाई पर पड़ने की अपेछा उसकी कमियों या खराबियों पर ही पड़ती है.
_ सिर्फ व ही आलोचना उचित है जो समालोचना हो अर्थात गुण और दोष दोनों पर चर्चा करे और पूर्वाग्रह से ग्रसित न हो.
_ आलोचना में कटुता और निन्दा का भाव लेशमात्र भी न हो तो ही यह उपयोगी सिद्ध हो सकती है.
किसी की शिकायत, आलोचना, व्यंग्य करना, ताने देना या तंज कसना अक्सर वही लोग करते हैं जो खुद कुंठित मानसिकता के होते हैं।

_ उन्हें इसकी परवाह नहीं है कि उनके अपने जीवन में क्या चल रहा है, लेकिन दूसरों के जीवन में क्या चल रहा है, वो उसी कुंठा से पीड़ित रहते हैं।
_ ऐसे मानसिक रोगियों पर दया आती है.. बेचारे !!
“आलोचना से बचिए “

_ कुछ लोगों को आलोचना की आदत होती है, ..बिना कारण..
_कुछ लोग इसी को जीवन का आधार बना कर जीते हैं.
_ इधर की उधर करना, ..मत कीजिए..
-तो अगर आप चाहते हैं कि _आपको लोग पसंद करें _तो आलोचना से बचिए.
_कभी अपनी तुलना किसी और से मत कीजिए.
_आप जो हैं, आप वही रहेंगे.
_दूसरा जो है, उसे दूसरा रहने दीजिए.
_”रोइए मत” _ कोई किसी रोने वाले को पसंद नहीं करता है.
_आपका रोना व्यर्थ है दूसरों की नज़र में..!!
“फलां खराब है, _वो बुरा है.
“उसने ये कहा था, _उसमें ये कमी है” __मत कीजिए ये सब..!!
__कोई आपकी शिकायत सुनने को नहीं बैठा है.
_आपकी शिकायतें आपका फ्रस्ट्रेशन [ निराशा ] हैं.
_”खुश रहिए” _लोगों से खुशी से मिलिए.
_देखिए कैसे लोग आपको पसंद करते हैं.
_”जीवन छोटा है, ..जितना संभाल सकते हैं संभालिये..”
अगर आप अपने जीवन में बड़ी उपलब्धि हासिल करने का सपना देख रहे हैं, तो आलोचना के लिए तैयार रहिये. आलोचना को उसके तीखेपन के साथ स्वीकार कीजिये और अपने आलोचकों को इस बात के लिए धन्यवाद दीजिए कि उन्होंने आपको अपशब्द कहने के लिए अपना कीमती समय निकाला. सच तो यह है कि ऐसे लोग आपकी सफलता के लिए मील के पत्थर साबित होते हैं.
जिन्हें पता ही नहीं कि वे अँधेरे में चल रहे हैं वे कभी प्रकाश की तलाश नहीं करेंगे.

ऐसे लोगों को दूसरों की सफलता व ख़ुशी बिल्कुल बर्दाश्त नही होती, वे खुद तो अच्छा कुछ करते नहीं_

_ मगर कोई और अच्छा व रचनात्मक कार्य करे तो उसकी आलोचना करने में कोई कसर छोड़ते नही !

लोगों को आपके बारे में अच्छी-बुरी बात करने की वजह दें,

_ क्योंकि लोग इतने खाली बैठे हैं, उनके जीवन में उनकी बातें हैं ही नहीं..!!

अधिकतर लोग आसपास की चीजों या लोगों की आलोचनाओं में लगे रहते हैं. _ वह ऐसा इसलिए करते हैं, ताकि उन्हें अच्छा लगे,

_ लेकिन वास्तविकता में ऐसा करने से वह और ज्यादा निराश महसूस करते हैं.

कभी भी किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा आपकी आलोचना नहीं की जाएगी _जो आपसे अधिक काम कर रहा है.

_ कम काम करने वाले व्यक्ति द्वारा हमेशा आपकी आलोचना की जाएगी.

कोई फर्क नहीं पड़ता कि कितने लोग आपकी आलोचना करने की कोशिश करते हैं, सबसे अच्छा बदला उन्हें गलत साबित करना है.

No matter how many people try to criticize you, the best revenge is to prove them wrong.

कभी भी किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा आपकी आलोचना नहीं की जाएगी जो आपसे अधिक काम कर रहा है.

_कम काम करने वाले व्यक्ति द्वारा हमेशा आपकी आलोचना की जाएगी. _ उसे याद रखो.

You’ll never be criticized by someone who is doing more than you. You’ll always be criticized by someone doing less. Remember that.

जीवन में आलोचना और अस्वीकृति का अनुभव किए बिना, खुद को विकसित करना या सुधारना असंभव होगा.

Without experiencing criticism and rejection in life, it would be impossible to grow or improve yourself.

चापलूस और आलोचक में क्या फर्क है ? चापलूस और आलोचक में केवल इतना अंतर है कि चापलूस अच्छा बन कर भी बुरा करता है,

जबकि आलोचक बुरा बन कर भी अच्छा करता है.

आलोचना से कुछ सीखें, काम और अच्छी तरह करें. _ क्योंकि आलोचना

व्यक्ति को गिराती भी है और उस पर सकारात्मक सोच रखने वालों को वह उठाती भी है.

आलोचना करने वाले लोगों का जीवन में बहुत बड़ा योगदान होता है.

_ सच्चे हितैषी तो आलोचक ही हैं, बाधाओं से ही जीवन मजबूत बनता है..!!

जो आपसे ज्यादा कुछ कर रहा है, उसके द्वारा कभी भी आपकी आलोचना नहीं होगी, _

_ कम करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा आपकी हमेशा आलोचना की जाएगी __ उसे याद रखो..

अपनी आलोचना ख़ुशी से सुन पाना और उसपर निरंतर कार्य करना एक अदभुत कला है,

जो आपको सफलता की सीढ़ी पर चढ़ने में बहुत मदद करेगी.

कुछ लोग हमारी ” सराहना ” करेंगे, कुछ लोग हमारी ” आलोचना ” करेंगे. दोनों ही मामलों में हम “फायदे” में हैं, _

_ एक हमें ” प्रेरित ” करेगा और दूसरा हमारे भीतर ” सुधार ” लाएगा.

आलोचना को गुस्सा या उदासी के बिना गम्भीरता से लें,

_ ख़ुद को सुधारने के लिए इसका उपयोग करें और इसका स्वागत करें.

जो लोग कुछ कर नहीं सकते वो आलोचक बन जाते हैं.!

_तो उन आलोचकों पर ध्यान ना देकर आप अपने काम में व्यस्त रहें मस्त रहें.!!
इस बात पर ध्यान दें कि लोग निजी तौर पर आपसे दूसरे लोगों के बारे में कैसे बात करते हैं,

_क्योंकि ठीक इसी तरह वे आपके बारे में दूसरों से बात करते हैं.

परिणाम हमारी इच्छा के अनुसार नहीं मिलता है, परिणाम हमारी मेहनत के आधार पर मिलता है ..!!
लछ्य यदि सर्वोपरि है तो फिर आलोचना, विवेचना और प्रशंसा कोई मायने नहीं रखती है.
आलोचना सहने की आदत डालिये, इससे न केवल आपकी कमजोरियां दूर होंगी, _ वरन आत्मशक्ति भी जाग्रत होगी.
खुद को सुधारने में इतना व्यस्त रहो कि _ आपके पास दूसरों की आलोचना करने का समय ही नहीं हो..
अपनी आलोचना को धेर्य से सुनें, _ यह हमारी जिंदगी का मैल हटाने में साबुन का काम करती है.
स्वयं की आलोचना होने पर क्रोध करने की अपेक्षा अपने में सुधार करने की सोचें..!!
“हर मुस्कुराता चेहरा मददगार नहीं होता, और हर आलोचक आपका दुश्मन नहीं होता.”
उत्तम से सर्वोत्तम वही हुए हैं, _ जिन्होंने आलोचनाओं को, सुना और सहा है….
किसी की आलोचना मत करो, _ ताकि तुम्हारी भी कोई आलोचना न करे.
दूसरों की आलोचना करने से पहले खुद को सही ढंग से व्यवस्थित कर लें.
जो स्वयं कुछ नहीं कर पाते, वे दूसरों की आलोचना करते हैं.
error: Content is protected