मस्त विचार 4143
मेरी फितरत में तो गैरों पर भी भरोसा करना था.
मेरी फितरत में तो गैरों पर भी भरोसा करना था.
” आपका आराम क्षेत्र आपका दुश्मन है “
यदि आप स्वयं को असहज नहीं करते हैं, जीवन आपके लिए स्वयं का विस्तार न करने से निर्मित पीड़ा और पीड़ा के रूप में स्वचालित रूप से आपके लिए ऐसा करेगा.
_ कुछ चीजों के लिए काबिल बनना पड़ता है !
_ मैं किसी का बेहतर करूँ बहुत फ़र्क पड़ता है..
_ सबको बस एक फ़िक्र है, आप कितना उनकी हां में हाँ मिला पाते हो..!!
मैंने गलतिया आपसे ज्यादा कर-करके सिखा है..!!
क्योंकि लोग चेहरे भूल जाते हैं पर शब्दों को नहीं.
_ वह मानवमन को प्रीतिकर नहीं लगता.
_ शब्दों की गहराई कुछ ही समझ पाते हैं..!!
और *तारीफ* वह धोखा है, जिसे हम ध्यान से सुनते हैं !