सुविचार 4241
जिन्हें हम कमजोर लम्हों में अपनी सारी सच्चाईयाँ सौंप देते हैं.
जिन्हें हम कमजोर लम्हों में अपनी सारी सच्चाईयाँ सौंप देते हैं.
उसने मेरी जिंदगी तमाम कर दी…
_या तो मुझे कोई रास्ता मिल जायेगा या मैं बना लूँगा..
बिछड़कर फिर ज़िंदा कैसे रह गए.
_ रूह तो उत्तरी थी जमीं पे, मंज़िल का पता लेकर..!!
_ क्योंकि झूठी उड़ान अंत में गिरावट ही देती है.
हमने उनसे आशाएं रखी,,,,जिनसे हमें नहीं रखनी चाहिए थी.
_ महज़ पचास साठ साल की जिंदगी में ही इतनी बेचारगी,
_ बेबसी और बोझ है की जिंदगी मजबूरी बन जाती है…!!!
” इसलिए समझदारी और ज्ञान के साथ जियें ”
_ दुनिया का हर चिराग हवा की नज़र में है..!!
मेरा होना तेरे होने की निशानी होगा !!
_ पर हकीकत में जरुरी किसी के लिए नहीं होते..
_ बगैर जरुरत के भी साथ कौन हैं ‘असल सवाल तो यह है’
” दुनिया में सबसे बड़ी संपत्ति आपकी मानसिकता है “
यह जानना कि हमें वास्तव में क्या चाहिए, उस पर कायम रहना और संतुष्ट महसूस करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है.
अगर आप खुद से संतुष्ट हैं और जानते हैं कि आप योग्य हैं तो आपको लोगों की तारीफों की जरूरत नहीं है.