सुविचार 4186

विपरीत परिस्थितियों में स्वयं को खुश रखने के लिए,

सकारात्मक बातों का खजाना अवश्य याद रखें.

विपरीत परिस्थितियों में साथ देने वाले विरले ही होते हैं,

_ यह स्वीकार करना हम सबके लिए जरुरी है..!!

दूसरों को समझाने के बजाय..

_हम खुद ही परिस्थिति के अनुसार खुद को ढाल लें तो बेहतर है..!!

“ये जीवन है” जब तक चलेगा, घटनाएं घटती रहेंगी.

_महत्वपूर्ण यह है कि हमारा इन घटनाओं के साथ कैसा व्यवहार रहा ?

_ यही मनुष्य की परीक्षा के अवसर होते हैं.

_इन अयाचित परिस्थितियों में अपना मानसिक संतुलन बनाए रखना होगा..
_ तब ही जीवन सकारात्मक ढंग से आगे बढ़ता है.

मस्त विचार 4060

मौन को सुनने वाले कान नहीं मिलते … इसलिये शब्दों से परोसता हूँ.
भाग्यशाली हैं वे लोग जिनके शब्दों के वही अर्थ समझे जाएं ..जो उन्होंने कहा,

_ लेकिन बोले गए शब्द अपनी-अपनी समझ के अनुसार समझे जाते हैं..!!

शब्दों के बाण जरा सोच कर चलाएं..

_ ये कमान से निकल कर लक्ष्य नहीं… हमारे हृदय को भेदते हैं..!!

हम अपने ही नजरिए के शिकार हैं, चाहे हम कितना भी बेहतर बनने की कोशिश करें,

_ उसका कोई फायदा नहीं है..!!

किसी बात को समझ सकने की छमता हर इंसान की अलग होती है,

_ जिन्हें चीजें “वैसी” नहीं दिखती.. जैसी आपको दिखती है..
_ तो उन्हें “दिखाने” के अथक प्रयासों में उतरने से पहले समझिये कि..
_ आपको वह बात “वैसी” दिख सकती है, जैसी उन्हें दिख रही है ?
_ अगर आपका उत्तर ना में है तो ..उनके साथ जबरदस्ती मत कीजिये,
_ “उन विषयों” पर बात उनसे कीजिये,
_ जो आपका नजरिया और आपकी बातों को समझते हों..!!
दुनिया का नजरिया देखो 40 साल का होते ही कहते हैं बुढा हो गया..

_ अगर कोई 40 साल का मर जाता है तो कहते हैं जवानी मे मर गया..
_ जिंदा है तो मनोबल तौड दो और मरने के बाद तारीफें होती हैं.
_ इसलिए दुनिया की बातों को मिक्सी में पीसकर पी जाओ और अपनी स्पीड से भागो.. _ क्योंकि यहां पर तालियां भी पीठ पीछे बजती हैं और गालियां भी..
_ लेकिन एक बात हमेशा याद रखना की दुनिया के हिसाब से नहीं.. अपने दिल के हिसाब से जीना है..
_ क्योंकि आखिर में रेस अपनी है तो रफ्तार भी अपनी ही होनी चाहिए.!!

सुविचार 4184

जब हम यह मानते हैं कि हम अपनी नियति का निर्माण करते हैं,

तब हम अपने लछयों की प्राप्ति के लिए दिशा निर्धारित कर लेते हैं.

सुविचार 4183

अपनी विशेषताओं का प्रयोग करो,

_जीवन के हर कदम पर प्रगति का अहसास होगा.

कोशिश में दम रखो, बाकी देना तो उसके हाथ में है..!!

मस्त विचार 4057

मुझे पता है कैसे- कैसे खुद को मैंने बर्बाद किया,

_ पांच मिनट की बात की खातिर, चौबीस घंटे इंतजार किया..

मैं किसी का इंतजार क्यों कर रहा हूँ ?

_ कोई जिसने कभी मेरी परवाह नहीं की ?

_ कोई ऐसा जिसके लिए मैं कभी था ही नहीं..!!

सुविचार 4182

हमारे व्यक्तित्व की उत्पत्ति हमारे विचारों में है.

_ शब्द गौण हैं, विचार मुख्य हैं और उनका असर दूर तक होता है.

कहने के बाद सोचना और सोचने के बाद कहना,

_व्यक्ति के व्यक्तित्व को बदल देता है..!!

Collection of Thought 997

I am not impressed by money, social status or job title.

I’m impressed by the way someone treats other human being.

मैं पैसे, सामाजिक स्थिति या नौकरी के शीर्षक से प्रभावित नहीं हूं.

जिस तरह से कोई दूसरे इंसान के साथ व्यवहार करता है, उससे मैं प्रभावित हूं..

error: Content is protected