मस्त विचार 4086
_ धूल चेहरे पर थी ..और हम आईना साफ करते रहे..
_ धूल चेहरे पर थी ..और हम आईना साफ करते रहे..
_क्या पता था ..रहनें कों पत्थर ही आएगें.
_ अगर यात्रा में सामान और जिंदगी से ख्वाहिशें अधिक हों तो..
_मगर इतनी देर से कि उनके होने का कोई अर्थ नहीं होता…!
_ कुछ तुम बदलकर देखो कुछ हम बदलकर देखें.
_ जो रब आपको दोगुना करके वापिस देता है.
_आज फिर तुमको…. मेरे ऐब दिखाई देंगे ..!!
We see others’ faults but why not ours ?
_ जो भी हैं वो भी उलझन में हैं,
उनके मन के आगे पेट खड़ा है..!!
तेरे साथ तो हम मरने के बाद भी रह लेंगे.…।
किन्तु इनकी ध्वनि अनन्त तक गूँजती रहती है.
अपने लक्ष्यों की कल्पना करें, अपना दिमाग उन चीज़ों पर केंद्रित रखें जो आप चाहते हैं और आप कौन बनना चाहते हैं.